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                <title>Steps - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>कंबाईन मालिकों ने नहीं  माना सरकार का आदेश, प्रशासन ने प्रदूषण को रोकने के लिए उठाया था कदम</title>
                                    <description><![CDATA[बिना एसएमएस यंत्रों से कंबाईनें चला कर रहे धान की कटाई Combined owners did not believe the order of the government बठिंडा/संगत मंडी(मंजीत नरुआणा)। राज्य सरकार की ओर से धान की पराली को आग लगाने साथ पैदा होते प्रदूषण से निजात पाने के लिए धान की कटाई करते समय कम्बाईनों पर कम्बाईन मालिकों को सुपर स्ट्रा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/combined-owners-did-not-believe-the-order-of-the-government-the-administration-had-taken-steps-to-stop-pollution/article-6273"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/combined-owners-did-not-believe-the-order-of-the-government.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">बिना एसएमएस यंत्रों से कंबाईनें चला कर रहे धान की कटाई Combined owners did not believe the order of the government</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा/संगत मंडी(मंजीत नरुआणा)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार की ओर से धान की पराली को आग लगाने साथ पैदा होते प्रदूषण से निजात पाने के लिए धान की कटाई करते समय कम्बाईनों पर कम्बाईन मालिकों को सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट व्यवस्था (एसएमएस) लगाने के सख्त निर्देश दिए गए थे परंतु कम्बाईन मालिकों की ओर से राज्य सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाते एसएमएस व्यवस्था से बिना ही धान की कटाई की जा रही है। एकत्रित की जानकारी अनुसार धान की पराली को आग लगाने साथ जहां वातावरण प्रदूषित हो रहा वहीं धरती बीच वाले जीव जंतू भी आग की चपेट में आकर मर रहे हैं। ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से धान की पराली को आग लगाने के साथ पैदा होते प्रदूषित होते वातावरण को लेकर राज्य सूबा सरकार को सख़्त फटकार लगाई गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी के चलते राज्य सरकार की ओर से धान की पराली को जमीन में ही नष्ट करने के लिए कम्बाईनों पर सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट व्यवस्था (एसएमएस) लगाना जरूरी कर दिया। इस यंत्र के साथ कम्बाईन की ओर से धान की पराली को खेत में नष्ट कर फेंका जाता है। सरकार की ओर से यह हिदायतें तो जारी कर दीं परंतु इसे अमली जामा पहनाने के लिए जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं किया गया। किसानों के खेत में कम्बाईन मालिकों की तरफ से बिना किसी डर भय के एसएमएस के बिना ही धान की कटाई की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई भी विभाग उनको रोकने तक नहीं आया। बेशक कृषि विभाग की ओर से एसएमएस यंत्र को लगाने के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है परंतु फिर भी कम्बाईन मालिकों की ओर से यह यंत्र नहीं लगाया गया। अतिरिक्त जिला मैजिस्ट्रेट बठिंडा सुखप्रीत सिंह सिद्धू की ओर से विवरण फौजदारी संहिता 1973 की धारा 144 के अधीन यह आदेश जारी कर दिए कि जिले में जो भी कम्बाईन मालिक बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट व्यवस्था (एसएमएस) से धान की कटाई करेगा तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते उस की कम्बाईन को जब्त कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंजाब में धान की पराली को जलाने के कारण पैदा होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए पंजाब सरकार व राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों अनुसार पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी की सिफारिशों को मद्देनजर रखते हुए ही ऐसे सख्त कदम उठाए गए हैं।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Oct 2018 11:46:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाकिस्तान तालिबान के खिलाफ और करे कार्रवाई : अमेरिका</title>
                                    <description><![CDATA[वाशिंगटन (एजेंसी)। अमेरिका ने कहा है कि अफगानिस्तान में 17 वर्षों से आतंकवादी गतिविधियां करने वाला तालिबान बातचीत के लिए तैयार नहीं है। (Pakistan, Steps, Against, Taliban, US) पाकिस्तान को तालिबान के खिलाफ और अधिक कार्रवाई करने की जरूरत है। अमेरिका की राजदूत एलिस वेल्स ने कहा है कि तालिबान को बातचीत की मेज पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/pakistan-steps-against-taliban-us/article-4621"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/flag.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन (एजेंसी)।</strong></p>
<p>अमेरिका ने कहा है कि अफगानिस्तान में 17 वर्षों से आतंकवादी गतिविधियां करने वाला तालिबान बातचीत के लिए तैयार नहीं है। (Pakistan, Steps, Against, Taliban, US) पाकिस्तान को तालिबान के खिलाफ और अधिक कार्रवाई करने की जरूरत है। अमेरिका की राजदूत एलिस वेल्स ने कहा है कि तालिबान को बातचीत की मेज पर लाने के लिए पाकिस्तान को और अधिक प्रयास करने होंगे। सुश्री वेल्स को सोमवार को पाकिस्तान में वार्ता में हिस्सा लेना है। सुश्री वेल्स ने पत्रकारों से कहा, ‘पाकिस्तान की इसमें महत्वपूर्ण भूमिका होगी लेकिन पाकिस्तान ने अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। पाकिस्तान के सहयोग के बिना हमारे लिए अपने लक्ष्य को हासिल करना बहुत मुश्किल है।</p>
<h1>तालिबान के संबंध में नए सिरे से प्रयास करने होंगे</h1>
<p>मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार सुश्री वेल्स ने कहा, ‘मेरा मानना है कि तालिबान के संबंध में सभी को राजनीतिक समाधान के लिए नये सिरे से प्रयास करने होंगे। सुश्री वेल्स ने शनिवार को अफगानिस्तान यात्रा के दौरान यह टिप्पणी की। उन्होंने कहा, ‘तालिबान के बातचीत के रास्ते पर न आने को किसी भी तरह स्वीकार नहीं किया जा सकता। तालिबान ने अभी तक अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के शांति वार्ता के प्रस्ताव को अस्वीकार किया है। तालिबान सीधे अमेरिका से वार्ता के लिए जोर दे रहा है जिससे अमेरिका ने बार-बार इंकार किया है।</p>
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<p>(Pakistan, Steps, Against, Taliban, US)</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jul 2018 15:02:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>घाटी में शांति के लिए सख्त कदम उठाए सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[तारकेश्वर मिश्र जम्मू कश्मीर में भाजपा-पीडीपी सरकार के गिरने के बाद से कश्मीर घाटी का दृश्य बदला हुआ दिखाई दे रहा है। रमजान के महीने में सीजफायर के दौरान आंतकी घटनाओं में एकाएक बढ़ोत्तरी ने प्रदेश व केंद्र सरकार की जमकर किरकिरी करवाई थी, लेकिन अब कश्मीर घाटी में राज्यपाल शासन लागू होते ही प्रशासन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/government-takes-tough-steps-for-peace-in-the-valley/article-4502"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/artical-01.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>तारकेश्वर मिश्र</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जम्मू कश्मीर में भाजपा-पीडीपी सरकार के गिरने के बाद से कश्मीर घाटी का दृश्य बदला हुआ दिखाई दे रहा है। रमजान के महीने में सीजफायर के दौरान आंतकी घटनाओं में एकाएक बढ़ोत्तरी ने प्रदेश व केंद्र सरकार की जमकर किरकिरी करवाई थी, लेकिन अब कश्मीर घाटी में राज्यपाल शासन लागू होते ही प्रशासन का नजरिया बदलने लगा। यासीन मलिक और मीर वाइज उमर फारुख को गिरफ्तार और सैयद अहमद शाह जिलानी को घर में नजरबंद करने जैसी कार्रवाई के साथ ये खबर भी आ गई कि अब घाटी में ब्लैक कैट कमांडो तैनात किए जा रहे हैं जो आतंकवादियों के सफाये के साथ ही अमरनाथ यात्रा के दौरान आने वाले लाखों यात्रियों की सुरक्षा का काम भी देखेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यपाल ने सभी दलों की बैठक बुलाकर राजनीतिक प्रक्रिया जारी रखने के संकेत भी दिए हैं। राज्यपाल शासन का अनुभव जम्मू कश्मीर को पहले भी हो चुका है लेकिन इस मर्तबा परिस्थितियां काफी अलग हैं क्योंकि पीडीपी-भाजपा गठबंधन टूटने की वजह वैचारिक मतभेद न होकर मुख्यमंत्री रहीं महबूबा मुफ्ती का पत्थरबाजों और अलगाववादियों के प्रति नरम रवैया बना।</p>
<p style="text-align:justify;">रमजान के उपरांत भी युद्धविराम जारी रखने की महबूबा की जिद के चलते भाजपा को गठबंधन तोडने का अवसर मिल गया। युद्धविराम के दौरान पत्थरबाजी और आतंकवादी घटनाओं में वृद्धि के कारण उसे आगे जारी रखने का कोई औचित्य नहीं था। पीडीपी अपने रुख में बदलाव के लिए तैयार नहीं थी। सही बात ये है कि पीडीपी और भाजपा दोनों साथ रहते हुए असहज अनुभव कर रही थीं। यदि भाजपा ने गठबंधन नहीं तोड़ा होता तो महबूबा भी किसी दिन पत्रकार वार्ता बुलाकर भाजपा से दूर होने का ऐलान कर देतीं।</p>
<p style="text-align:justify;">उसकी भनक लगते ही भाजपा ने कमांडो एक्शन जैसी कार्रवाई करते हुए सरकार गिरवा दी। राज्यपाल शासन के बाद अब राज्य पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन आने से भाजपा को अपनी नीतियां लागू करने का अवसर मिल गया। यही वजह है कि ब्लैक कैट कमांडो तैनात करने जैसा फैसला लिया गया। इस फैसले से ये भी आभास होता है कि केंद्र सरकार अलगाववादियों से निबटने के लिए पूरी तैयारी कर रही है।<br />
कश्मीर के मामले में पाकिस्तान अंग्रेजों की भूमिका निभा रहा है जिसे चीन का खुला समर्थन है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल राज्यपाल शासन लगते ही घाटी का माहौल बदलने के संकेत मिलने लगे हैं। शुरूवात होते ही सुरक्षा बलों ने कुछ आतंकवादियों को मार गिराया। हुर्रियत नेताओं द्वारा विरोध किये जाने पर उनकी गिरफ्तारी और नजरबंदी से लगने लगा है कि केंद्र उन सभी आरोपों को धो डालने के लिए तत्पर है जो महबूबा सरकार के रहते उसके दामन पर लगते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">खबर है सेना एवं अन्य सुरक्षा बलों ने घाटी में पनाह लिए आतंकवादियों की पूरी सूची बना ली है। शीघ्र ही उनके विरुद्ध अभियान छेड़ा जाएगा। चूंकि ब्लैक कैट कमांडो विषम स्थितियों में भी अपने कार्य को सफलतापूर्वक करने हेतु प्रशिक्षित और अभ्यस्त रहते हैं इसलिए उनको मोर्चे पर उतारकर आतंकवादियों को ईंट का जवाब पत्थर से देने की रणनीति बनाली गई है। ऐसा करने से सुरक्षा बलों का हौसला भी बढ़ेगा जो राज्य सरकार के हस्तक्षेप और असहयोग की वजह से खुलकर अपने हाथ नहीं दिखा पा रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">अमरनाथ यात्रा के पहले सुरक्षा प्रबंध चाक-चौबंद करने की बेहद जरूरत है क्योंकि यात्रा के दौरान आतंकवादी वारदात से यात्रियों का ही नहीं पूरे देश का मनोबल गिरता है। ब्लैक कैट कमांडो को यदि आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई में लगा दिया जावे तो निश्चत रूप से ठोस नतीजे निकल सकते हैं। कड़वा सच ये है कि कश्मीर घाटी में तैनात राज्य के अधिकतर पुलिसकर्मी भी महबूबा मुफ्ती की तरह से ही अलगाववादियों के प्रति हमदर्दी रखते हैं। इसकी वजह डर भी हो सकता है किन्तु घाटी के भीतर भारत विरोधी भावनाएं काफी गहराई तक फैल चुकी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नई पीढ़ी के नौजवानों के मन में अलगाववाद को मजहब के नाम पर इस तरह भर दिया गया जैसे आजादी के पहले पाकिस्तान बनाने का माहौल मुसलमानों में अंग्रेजों की मदद से पैदा किया गया था। वास्तव में कश्मीर को लेकर पूरा देश उद्वेलित है। वहां जिस तरह से अलगाववाद का फैलाव हुआ और सुरक्षा बलों के लोगों की जानें सस्ते में जाती गईं उससे देश में केंद्र सरकार के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही थी। लोग इस बात को लेकर हैरान थे कि प्रधानमंत्री अपने पहले वाले बयानों को कैसे भूल गए।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Jun 2018 07:42:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>घटा लिंगानुपात तो पंचायत ने उठाया ऐतिहासिक कदम</title>
                                    <description><![CDATA[अहमदपुर दारेवाला में बेटी जन्म पर 2100 रुपए मिलेगी प्रोत्साहन राशि सच क हूँ-अनिल गोरीवाला। लिंगानुपात में सुधार लाने के लिए अब पंचायतों ने भी कमर कस ली है। बेटियां पहले कोख में मार दी जाती, कुछ जन्म के बाद हालात यह है लिंगानुपात में असमानताएं चिंता बनी है। जो लोग पहले बेटों के लिए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/historical-steps-raised-by-the-panchayat-on-decreasing-gender-ratio/article-4349"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/anil-01.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">अहमदपुर दारेवाला में बेटी जन्म पर 2100 रुपए मिलेगी प्रोत्साहन राशि</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच क हूँ-अनिल</strong></p>
<p style="text-align:justify;"><strong>गोरीवाला।</strong> लिंगानुपात में सुधार लाने के लिए अब पंचायतों ने भी कमर कस ली है। बेटियां पहले कोख में मार दी जाती, कुछ जन्म के बाद हालात यह है लिंगानुपात में असमानताएं चिंता बनी है। जो लोग पहले बेटों के लिए रोते ओर फिर बेटे के लिए बहू न मिलने पर परेशान होते हैं। बहरहाल सकून इस बात का है हालात अब पहले के मुकाबले बदल गए है।</p>
<p style="text-align:justify;">बेटी बचाओ बेटी पढाओ अभियान के तहत गांव की पंचायत ने मिसाल पैदा की है। जहां हरियाणा के एक गांव ने भ्रूण हत्या को रोकने और बेटी को बचाने के लिए ऐतिहासिक पहल की हैं। वहीं गांव में किसी भी परिवार में बेटी पैदा होने पर उस बेटी को 2100 रुपये की उपहार राशि पंचायत की ओर से दी जाएगी। खंड मंडी डबवाली के 3800 की आबादी वाले गांव अहमदपुर दारेवाला की पंचायत का बेटियों के हित में एक ऐतिहासिक फैसले का फरमान जारी किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल ग्राम पंचायत द्वारा गांव में बेटियों के लिंगानुपात में कमी को देखते हुए पंचायत ने चिंता जाहिर की और एक कड़ा फैसला लिया हैं। जहां पर पंचायत ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत गांव में लगातार गिरते लिंगानुपात के स्तर को सुधारने के लिए बेटी के जन्म पर 2100 रुपए प्रोत्साहन राशि दिए जाने का प्रस्ताव पास किया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">1000 लड़कों के पीछे महज 850 लड़कियां: सरपंच</h2>
<p style="text-align:justify;">सरपंच शारदा देवी ने बताया कि यह फैसला इस लिए लिया गया है क्योंकि गांव में लिंगानुपात में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। गांव में महज 1000 लड़कों के पीछे 850 लड़कियां हैं जो कि चिंता का विषय है। जिस घर में बेटी पैदा होगी उस बेटी के सम्मान के रूप में पंचायत द्वारा 2100 रुपये की राशि दी जाएगी ताकि गांव में बेटियों की संख्या बढ़ सके ।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ग्राम पंचायत का फैसला सराहनीय: चरणजीत</h2>
<p style="text-align:justify;">आदर्श युवा क्लब के प्रधान चरणजीत मेहरड़ा ने बताया कि गांव की ग्राम पंचायत ने जो बेटी के जन्म पर 2100 रुपए प्रोत्साहन राशि देने का फैसला लिया है यह बहुत सराहनीय कदम है। क्लब इस फैसले का स्वागत करता है क्योंकि पिछले काफी सालों से दारेवाला में लिंगानुपात चिंता का विषय बना हुआ था।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/historical-steps-raised-by-the-panchayat-on-decreasing-gender-ratio/article-4349</link>
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                <pubDate>Thu, 21 Jun 2018 08:57:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>हिंसा रोकने के लिए ठोस कदम उठाए पंजाब सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब में सांप्रदायिक हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही। एक धर्म विशेष से सबंधित नेताओं की हत्या से राज्य में दहशत का माहौल पैदा हो रहा है। अमृतसर में हिंदू संघर्ष सेना दल के जिलाध्यक्ष विपन कुमार की हत्या इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पिछले साल आरएसएस के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश गगनेजा की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/punjab-government-took-concrete-steps-to-stop-violence/article-3479"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-11/punjab-govt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पंजाब में सांप्रदायिक हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही। एक धर्म विशेष से सबंधित नेताओं की हत्या से राज्य में दहशत का माहौल पैदा हो रहा है। अमृतसर में हिंदू संघर्ष सेना दल के जिलाध्यक्ष विपन कुमार की हत्या इस बात का स्पष्ट संकेत है कि पिछले साल आरएसएस के प्रदेशाध्यक्ष जगदीश गगनेजा की हत्या से कोई सबक नहीं लिया। पिछली अकाली-भाजपा सरकार और वर्तमान कांग्रेस सरकार दोनों सरकारें इस मामले में केवल बयानबाजी तक सीमित हैं। हिंसा के पीछे विदेशी ताकतों का हाथ है, इस बयान से सरकार की जिम्मेदारी पूरी नहीं हो जाती। अकाली-भाजपा सरकार के कार्यकाल में मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल ने विदेशी ताकतों का हाथ होना बताया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बयान के बाद सरकार ने राज्य में सुरक्षा प्रबंधों के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई। हिंसा की घटनाओं का सिलसिला निरंतर जारी है। इसके बाद नामचर्चा घर जगेड़ा (खन्ना) में डेरा सच्चा सौदा के दो श्रद्धालुओं की हत्या कर दी गई। एक साल बाद भी इन हत्याओं की गुत्थी नहीं सुलझी। पिछले महीने लुधियाना में आरएसएस के एक अन्य नेता की हत्या कर दी गई।हमलावरों ने सभी मामलों में एक ही तरीके का प्रयोग किया। चाहे हिंसा मामले में विदेशी ताकतों का हाथ होने की संभावना है लेकिन राजनैतिक नेताओं के केवल अंदाजे ही काफी नहीं। सरकार ने हिंसा को रोकने के लिए किसी भी प्रकार की कोई तैयारी या रणनीति का जिक्र ही नहीं किया। मृतक के परिजनों को केवल मुआवजा देना ही समस्या का समाधान नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्य सरकार को केंद्र के साथ मिलकर हिंसा को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने चाहिए, लेकिन अभी तक कोई रणनीति व सक्रियता नजर नहीं आ रही। कानून व व्यवस्था में सरकार की कार्यवाही काफी हलकी रही है। लूटपाट की वारदातें आम बात बन चुकी है। इन हालातों में विदेशी ताकतों को मौका मिल जाता है। इससे पहले दीनानगर व पठानकोट में आतंकवादी हमले ने सुरक्षा प्रबंधों पर सवालिया निशान लगाया था। सत्तापक्ष के लिए राजनैतिक सरगर्मियां जरूरी है, लेकिन शांति बहाल करना सबसे पहली जिम्मेवारी है। सुरक्षा प्रबंधों पर विशेष ध्यान देना होगा।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Nov 2017 00:03:48 +0530</pubDate>
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                <title>आरबीआई ने ग्राहकों को धोखाधड़ी से बचाने के लिए उठाए कई अहम कदम</title>
                                    <description><![CDATA[डेबिट कार्ड से लेन-देन के बारे में ग्राहकों की शिकायतों में बढ़ोतरी के बीच किया निर्देश जारी नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों को इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन में धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने बताया कि अगर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन से जुड़ी किसी धोखाधड़ी की जानकारी तीन दिन के अंदर दे दी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/rbi-has-taken-several-important-steps-to-protect-customers-from-fraud/article-2031"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/atm1.jpg" alt=""></a><br /><h3>डेबिट कार्ड से लेन-देन के बारे में ग्राहकों की शिकायतों में बढ़ोतरी के बीच किया निर्देश जारी</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली: </strong>भारतीय रिजर्व बैंक ने ग्राहकों को इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन में धोखाधड़ी से बचाने के लिए कई अहम कदम उठाए हैं। केंद्रीय बैंक ने बताया कि अगर इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन से जुड़ी किसी धोखाधड़ी की जानकारी तीन दिन के अंदर दे दी जाती है, तो ग्राहकों को कोई नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा और उनके खाते से कटी रकम 10 दिन के अंदर उसी खाते में वापस आ जाएगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ग्राहकों को खुद उठाना होगा 25,000 रुपये तक का नुकसान</h2>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई ने साथ ही बताया कि अगर थर्ड पार्टी की तरफ से की गई धोखाधड़ी की रिपोर्ट 4 से 7 दिन की देरी से की जाती है, तो ग्राहकों को 25,000 रुपये तक का नुकसान खुद उठाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं अगर यह नुकसान बैंक खाताधारक की लापरवाही से हुआ है (जैसे पेमेंट से जुड़ी गोपनीय जानकारी शेयर कर देने से) और बैंकों को तुरंत इस फ्रॉड की जानकारी नहीं दी। तो ग्राहक को ही पूरा नुकसान उठाना पड़ेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई ने कहा कि खातों और डेबिट या क्रेडिट कार्ड से लेन-देन के बारे में ग्राहकों की शिकायतों में बढ़ोतरी के बीच संशोधित दिशा निर्देश जारी किया गया है। इसमें कहा गया है कि थर्ड पार्टी की तरफ धोखाधड़ी बैंक या ग्राहकों की तरफ से चूक की वजह से नहीं, बल्कि बैंकिंग सिस्टम की किसी चूक की वजह से हुई है, तो ऐसे मामलों में ग्राहकों की कोई देनदारी नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इसमें ग्राहक को इस अनाधिकृत ट्रांजैक्शन की पता चलने के बाद तीन वर्किंग डे के अंदर-अंदर बैंकों को इसकी जानकारी देनी होगी। ऐसे में उस ट्रांजैक्शन में बैंक की तरफ से चूक सामने आने पर ग्राहक की कोई देनदारी नहीं होगी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 22:11:47 +0530</pubDate>
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