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                <title>Lalu Yadav - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>लालू यादव की टिप्पणी पर विवाद, सोनिया ने की बात</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास पर लालू यादव की टिप्पणी से उपजा विवाद अब थमता नजर आ रहा है। इसके साथ ही विपक्षी नेताओं ने भी लालू को ‘दलित विरोधी’ करार दे दिया। विवाद के बीच ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लालू यादव से फोन पर बात की है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/controversy-over-lalu-yadav-remarks-sonia-spoke/article-27924"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/lalu-prasad-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> बिहार कांग्रेस प्रभारी भक्त चरण दास पर लालू यादव की टिप्पणी से उपजा विवाद अब थमता नजर आ रहा है। इसके साथ ही विपक्षी नेताओं ने भी लालू को ‘दलित विरोधी’ करार दे दिया। विवाद के बीच ही कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी ने लालू यादव से फोन पर बात की है। दरअसल, कुछ दिन पहले लालू यादव ने दिल्ली से पटना के लिए निकलते समय भक्त चरण दास को ‘भकचोन्हर’ बोल दिया था। इस टिप्पणी के बाद से महागठबंधन में कड़वाहट आने की बातें सामने आ रही थीं। कांग्रेस ने भी लालू यादव से शब्द वापस लेने की मांग की थी। इस बीच सोनिया गांधी का लालू यादव से फोन पर बात करने महागठबंधन में आ रही कड़वाहट को दूर करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, दोनों के बीच क्या बात हुई, इसे लेकर अभी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। लेकिन माना जा रहा है कि भक्त चरण दास पर की गई टिप्पणी को लेकर ही सोनिया ने लालू से बात की होगी। जदयू नेता और बिहार सरकार में मंत्री अशोक चौधरी ने भी इसे अनुसूचित जाति का अपमान बताया था। उन्होंने ये भी कहा था कि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अनुसूचित जाति के हैं, इसलिए आरजेडी ने उनके कार्यक्रम का बहिष्कार किया था। वहीं, पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने लालू यादव से सवाल पूछते हुए कहा था कि वो दलित समुदाय से इतनी नफरत क्यों करते हैं।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Oct 2021 11:42:47 +0530</pubDate>
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                <title>मॉर्निंग वॉक पर निकले RJD नेता की हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[पटना: आरजेडी नेता और पटना के पार्षद केदार राय की गुरुवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। केदार सुबह दानापुर स्थित अपने घर से मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। वह करीब 100 गज ही पहुंचे, तभी एक बाइक पर सवार तीन लोगों ने उन पर फायर किए। सभी शूटर फरार हैं। पुलिस ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/rjd-leader-assassinated/article-3022"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/murder-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना:</strong> आरजेडी नेता और पटना के पार्षद केदार राय की गुरुवार को गोली मारकर हत्या कर दी गई। केदार सुबह दानापुर स्थित अपने घर से मॉर्निंग वॉक के लिए निकले थे। वह करीब 100 गज ही पहुंचे, तभी एक बाइक पर सवार तीन लोगों ने उन पर फायर किए। सभी शूटर फरार हैं। पुलिस ने 3 आरोपियों को हिरासत में लिया है। जानकारी के मुताबिक, केदार को एक गोली कान के पास और दूसरी सीने में लगी। गोली लगते ही केदार जमीन पर गिर गए। लोगों ने उन्हें तुरंत हॉस्पिटल में एडमिट कराया, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। गोली मारने के बाद शूटर फरार हो गए।</p>
<h1>15 दिन के अंदर आरजेडी के दूसरे नेता की हत्या</h1>
<ul>
<li>केदार राय आरजेडी के दूसरे ऐसे नेता हैं, जिनकी पिछले 15 दिन में हत्या हुई है।</li>
<li>29 जुलाई को सीवान के बसंतपुर के शेखपुरा गांव में युवा आरजेडी नेता मिन्हाज खान की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।</li>
<li>वह अपने घर में सो रहा था तभी हथियारों से लैस अारोपी घर में घुसे और उसके सिर में गोली मार दी थी।</li>
<li>मिन्हाज शहाबुद्दीन का करीबी था।</li>
<li>घटनास्थल से कार्बाइन, बम और पेट्रोल बरामद हुआ था।</li>
</ul>
<h1 style="text-align:justify;">सीबीआई जांच हो: लालू</h1>
<p style="text-align:justify;">केदार की हत्या के मामले में रांची में आरजेडी प्रमुख लालू यादव ने कहा कि एक बड़े नेता के इशारे पर यह हत्या हुई है। इस मामले की जांच सीबीआई से होनी चाहिए। वक्त आने पर मैं इस केस में खुलासा करूंगा। आरजेडी नेता भाई वीरेंद्र ने कहा कि जब से नीतीश कुमार आरएसएस और बीजेपी के साथ मिले हैं आरजेडी के नेता और समर्थकों पर हमले हो रहे हैं। नीतीश बिहार में कानून के राज की बात कहते हैं, लेकिन यहां कोई सुरक्षित नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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<h2></h2>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Aug 2017 03:23:41 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सत्ता से बाहर हुए लालू की अवसरवादिता</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार से बाहर होने के बाद लालू प्रसाद यादव ने जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ आरोपों की झड़ी लगा दी है, उससे लालू की अवसरवादिता और बौखलाहट का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। लालू ने नीतिश कुमार के खिलाफ सन् 1991 के सीताराम हत्याकांड मुद्दे को हवा दी, जिसके बाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/lalu-opportunism-out-power/article-2764"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/lalu-parsad-yadav1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">सरकार से बाहर होने के बाद लालू प्रसाद यादव ने जिस तरह से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के खिलाफ आरोपों की झड़ी लगा दी है, उससे लालू की अवसरवादिता और बौखलाहट का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। लालू ने नीतिश कुमार के खिलाफ सन् 1991 के सीताराम हत्याकांड मुद्दे को हवा दी, जिसके बाद लालू खुद ही सवालों के घेरे में आ गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्हें यह हत्याकांड तब याद आया जब नीतीश कुमार ने उन्हें सरकार से बाहर कर दिया। यदि नीतीश दोषी हैं तो लालू और भी बड़े दोषी बन जाएंगे, जिन्होंने एक संगीन मामले के आरोपी को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया। जनता दल (यू) दूसरे नंबर की पार्टी थी। इसके बावजूद लालू ने नीतीश कुमार को राज्य की कमान सौंपते वक्त केवल एक ही निशाना मुख्य रखा कि किसी भी तरह भाजपा को सत्ता से दूर रखा जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्ता के लोभ व विरोधी पार्टी को सबक सिखाने के लिए लालू ने नीतीश की अपराधिक पृष्ठ भूमि (लालू के अनुसार) भी कोई ध्यान नहीं रखा। आमतौर पर जब कोई नेता पार्टी बदले तो उसकी पैतृक पार्टी उसे भ्रष्ट कहने लगती है, लेकिन लालू ने तो इस मामले में छक्का ही मार दिया है। लालू प्रसाद के लिए बेहतर होगा कि अब वह फिजूल की बातें करने की बजाय अपना राजनैतिक आधार मजबूत बनाने के लिए जनता के बीच जाएं और जनसेवा करें।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां तक रणनीति का सवाल है, नीतीश कुमार अपनी पार्टी से भी बड़े नेता साबित हुए हैं। रणनीति में नीतीश ने लालू को बुरी तरह पटकनी दी है। नीतीश के इस्तीफे को कई महीने पहले तय होने का दावा करने वाले लालू कोई सुरक्षात्मक रणनीति बनाने में नाकाम रहे। अब वह हमलावर नीति अपना रहे हैं जो किसी भी तरह सफल होती नहीं दिख रही। नीतीश कुमार के पास पूर्ण बहुमत है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय जनता दल के नेताओं को चाहिए कि वे विपक्ष की जिम्मेदारी पूरी तन्मयता से निभाएं। यह बात संतोषजनक है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने के हालात नहीं बने और दोबारा लोकतांत्रिक सरकार बन गई। सत्तापक्ष व विपक्ष दोनों अब राजनीति करने की बजाय, राज्य की बेहतरी के लिए मिलकर काम करें। सरकार को गिराने के पारंपरिक रुझान को छोड़कर मुद्दों की राजनीति ही बिहार के हित में है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/lalu-opportunism-out-power/article-2764</link>
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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2017 23:21:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नीतीश कुमार की घर-वापसी के निहितार्थ</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार में जदयू के नेतृत्व वाले गठबंधन के बिखराव की पटकथा नीतीश कुमार के शपथग्रहण करने के साथ ही लिखी जानी प्रारम्भ हो गयी थी, क्योंकि नीतीश कुमार और लालू यादव राजनीति के दो ध्रुवों की भांति थे जिनको केवल राजनीतिक परिस्थितियों ने एक दूसरे का दामन थामने पर मजबूर कर दिया था। नीतीश कुमार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/implications-of-nitish-kumars-return/article-2680"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/nitish-kumar-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बिहार में जदयू के नेतृत्व वाले गठबंधन के बिखराव की पटकथा नीतीश कुमार के शपथग्रहण करने के साथ ही लिखी जानी प्रारम्भ हो गयी थी, क्योंकि नीतीश कुमार और लालू यादव राजनीति के दो ध्रुवों की भांति थे जिनको केवल राजनीतिक परिस्थितियों ने एक दूसरे का दामन थामने पर मजबूर कर दिया था। नीतीश कुमार की छवि जहाँ सुशासन बाबू के रूप में विकसित हुई वहीं लालू यादव का अधिकांश राजनीतिक जीवन विवादों और आरोपों में घिरा रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में सशक्त और सम्भावित उम्मीदवार के रूप में नीतीश कुमार को विपक्षी दलों के प्रस्तावित राष्ट्रीय गठबंधन के रूप में प्रधानमन्त्री पद की राह आसान दिखाई पड़ी। जिसके कारण उन्होंने विपक्षी गठबंधन का अंग बनना स्वीकार किया लेकिन विपरीत विचारों के कारण लालू और नीतीश का एक साथ चल पाना मुश्किल था। दरअसल एक दूसरे के धुर राजनीतिक विरोधी रहे नीतीश और लालू यादव का यह साथ लम्बा चलनेवाला भी नहीं था। परिणामस्वरूप नीतीश कुमार ने विपक्षी एकता को झटका देते हुए अपने पुराने राजनीतिक साथी भाजपा से गठबंधन कर लिया।</p>
<h1 style="text-align:justify;">छवि को प्राथमिकता</h1>
<p style="text-align:justify;">आरोपों से घिरे और परस्पर विरोधी राजनीतिज्ञों से बने बेमेल विपक्षी गठ्बन्धन का अंग होने के कारण नीतीश कुमार सामाजिक और राजनीतिक तौर पर अपनी छवि को लेकर चिंतित थे। उनके लिए अपनी जनसामान्य में प्रचलित छवि को बरकरार रखना प्रथमिकता थी कि नीतीश कुमार सत्ता के लिए अपने सिद्धांतों से समझौता नहीं करते,  और इसीलिए भ्रष्टाचार के मुद्दे पर उन्होंने त्यागपत्र दे दिया। बेदाग छवि के नीतीश, उपमुख्यमंत्री तेजस्वी के विरुद्ध लगे भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद निरंतर सवालों के घेरे में थे। स्पष्ट है कि आसानी से विकल्प उपलब्धता की स्थिति में नीतीश ने बोझ बन चुकी गठबंधन सरकार के बदले अपनी छवि को चुन लिया।</p>
<h1 style="text-align:justify;">दूरियां यूँ बढ़ती गयी</h1>
<p style="text-align:justify;">दरअसल जदयू-कांग्रेस और राजद गठबंधन में विरोधाभास की स्थिति काफी पहले ही उत्पन्न हो गयी थी जब कई मुद्दों पर नितीश ने गठबंधन से अलग रुख अपनाया नीतीश ने गठबंधन के विरुद्ध जीएसटी, नोटबंदी और राष्ट्रपति चुनावों में भाजपा उम्मीदवार रामनाथ कोविंद का समर्थन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">शहाबुद्दीन आॅडियो, उपमुख्यमंत्री पर लगते भ्रष्टाचार के आरोप, लालू यादव की हठधर्मिता ने रही-सही कसर पूरी कर दी। ऐसी स्थिति में नीतीश कुमार के लिए सरकार चलाना एक दुष्कर कार्य साबित हो रहा था, जिससे मुक्त होकर पुराने और स्वाभाविक सहयोगी भाजपा के साथ जाना उन्हें बेहतर विकल्प लगा।</p>
<h1 style="text-align:justify;">सुशासन और भ्रष्टाचार बने राष्ट्रीय विमर्श के मुद्दे</h1>
<p style="text-align:justify;">बिहार की राजनीतिक उठापठक के कारण सुशासन और भ्रष्टाचार देश के राजनीतिक गलियारों में मुख्य मुद्दा बना। अन्यथा ऐसा प्रतीत होने लगा था जैसे इस देश में साम्प्रदायिकता के अलावा कोई समस्या बची नहीं है। गरीबी, भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, आदि समस्याओं को उठाना विपक्ष का कार्य है, परन्तु असहिष्णुता और साम्प्रदायिकता के सामने विपक्ष को आम जनता की समस्याएँ गौण नजर आईं।</p>
<p style="text-align:justify;">वास्तव में नीतीश का विपक्षी गठबंधन को छोड़ना, साम्प्रदायिकता विरोध के गलीचे के तले सब तरह के भ्रष्टाचार और अपराधों को छुपाने की राजनीतिक बाजीगरी के दिन लदने का संकेत है। साम्प्रदायि विरोध के नाम पर शोर मचाकर मुद्दाविहीन विपक्ष, जनता का ध्यान अपनी कमियों की ओर से भटकाए रखना चाहता है। नीतीश के इस कदम ने सुशासन और भ्रष्टाचार के विषय को जनता की चर्चा का केन्द्रीय बिंदू बना दिया है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">आत्मघात की मुद्रा में विपक्ष</h1>
<p style="text-align:justify;">भ्रष्टाचार के प्रति उदासीन कांग्रेसनीत गठबंधन ने अपना सबसे भरोसेमंद और स्वीकार्य चेहरा खो दिया है। कबूतर की भांति आँखें मूंद बैठे विपक्ष के पास अब कोई ऐसा चेहरा नहीं बचा है जिसकी राष्ट्रीय स्वीकार्यता हो। राहुल गाँधी के नेतृत्व में विभिन्न चुनावों में कांग्रेस का प्रदर्शन किसी से छुपा नहीं है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष का खाली पड़ा पद, विपक्ष की राजनीति के लिए अच्छा संकेत नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">आत्मघाती मुद्रा में आ चुकी कांग्रेस ने अगर समय रहते बिहार के राजनीतिक घटनाक्रम को सम्भाला होता तो आज विपक्ष के पास राष्ट्रीय नेतृत्व के नाम पर एक सर्व-स्वीकार्य नेता होता। विपक्ष भले ही केजरीवाल या ममता बनर्जी को राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ाने का प्रयास करे परन्तु एक ओर जहाँ इनकी स्वीकार्यता नीतीश कुमार जैसी नहीं हो सकती, वहीं भानुमती के कुनबे जैसा विपक्षी गठबंधन कब बिखर जाये, इसका पता किसी को नहीं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">नये राजनीतिक क्षत्रप भी जुड़ सकते हैं भाजपा से</h1>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी दलों द्वारा निरंतर भाजपा को राजनीतिक रूप से अछूत माना जाता रहा है। विभिन्न राजनीतिक दलों ने भाजपा के विरोध को ही अपनी अस्तित्व-रक्षा का उपकरण समझा है। भाजपा के विरोध को आधार बनाकर ही कई प्रकार के गठबन्धनों के प्रयोग भारतीय राजनीति में किया गया। विपक्षी दलों द्वारा परस्पर विरोधी विचारों ओर विचारधाराओं के बेमेल गठबंधन निर्माण करने के प्रयास भी किये गये।</p>
<p style="text-align:justify;">नीतीश का भाजपा से गठबंधन विपक्ष की गठबंधन राजनीति के लिए बड़ा झटका है जो कई अन्य राजनीतिक क्षत्रपों और क्षेत्रीय नेताओं जैसे नवीन पटनायक तथा चंद्रबाबू नायडू आदि नेताओं को भाजपा के निकट ला सकता है। अगर ऐसा हो जाता है तो विपक्ष की स्थिति काफी कमजोर हो जाएगी और अगले लोकसभा चुनावों में भाजपा की राह अधिक आसान हो जाएगी।</p>
<h1 style="text-align:justify;">बिहार में लालू युग का अवसान</h1>
<p style="text-align:justify;">नीतीश कुमार का लालू यादव और कांग्रेस का साथ छोड़कर भाजपा का दामन थामना न केवल राष्ट्रीय राजनीति में विपक्ष के लिए एक बड़ा झटका है, बल्कि क्षेत्रीय दल के रूप में भी राष्ट्रीय जनता दल के लिए बहुत ज्यादा नुकसानदेह साबित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजनीतिक आधुनिकीकरण और सोशल मीडिया के दौर में पहले ही राजद जैसे क्षेत्रीय दलों का जनाधार सिमट रहा है, ऊपर से अगर सरकार बनने की सम्भावना न हो तो परम्परागत वोटरों का एक बड़ा हिस्सा भी पार्टी से छिटक सकता है। अगर नीतीश और भाजपा का गठबंधन स्थायी स्वरुप ग्रहण कर लेता है तो निश्चित ही आने वाले वर्षों में लालू को राजनीतिक अस्तित्व बचाए रखने के लिए कठिन परिश्रम करना होगा। भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरा लालू परिवार अपना राजनीतिक वजूद बचा पायेगा, यह सम्भावना अत्यंत क्षीण दिखाई पड़ती है।</p>
<p style="text-align:justify;">निश्चित तौर पर कहा जा सकता है कि नीतीश कुमार का राष्ट्रीय जनतान्त्रिक गठबंधन में जाना प्रधानमन्त्री मोदी और भाजपा के लिए सर्वाधिक लाभदायक है। साम्प्रदायिकता और धर्मनिरपेक्षता के नाम पर एकजुट होने वाले विपक्ष का तुरुप का इक्का अब भाजपानीत गठबंधन के साथ है।</p>
<p style="text-align:justify;">नीतीश के समर्थन से प्रधानमन्त्री मोदी की स्वीकार्यता में वृद्धि हुई है। इस घटनाक्रम से जहाँ विपक्ष बिखर गया है वहीं इसका फायदा न केवल भाजपा को राज्यसभा में होनेवाला है बल्कि भाजपा के लिए 2019 के लोकसभा चुनावों की राह आसान होती नजर आ रही है। यही नहीं, बिहार की जनता के एक बड़े हिस्से को नीतीश ने भाजपा के साथ जोड़ दिया है जो आनेवाले चुनावों में भाजपा के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-डॉ. कुलदीप कुमार मेहंदीरत्ता</strong></em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jul 2017 23:50:55 +0530</pubDate>
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                <title>लालू यादव के 12 ठिकानों पर CBI का छापा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली: सीबीआई ने शुक्रवार को आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव के 12 ठिकानों पर छापा मारा। पटना में लालू-राबड़ी के घर की भी तलाशी ली गई। सीबीआई ने पूर्व रेलमंत्री लालू यादव, राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी और आईआरसीटीसी के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ केस दर्ज किया है। साल 2006 में रेलवे का होटल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/cbi-raid-on-lalu-yadavs-12-bases/article-2037"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/lalu-parsad-yadav.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली:</strong> सीबीआई ने शुक्रवार को आरजेडी चीफ लालू प्रसाद यादव के 12 ठिकानों पर छापा मारा। पटना में लालू-राबड़ी के घर की भी तलाशी ली गई। सीबीआई ने पूर्व रेलमंत्री लालू यादव, राबड़ी देवी, बेटे तेजस्वी और आईआरसीटीसी के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर के खिलाफ केस दर्ज किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">साल 2006 में रेलवे का होटल निजी कंपनी को देने के मामले में तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद यादव की मुसीबत बढ़ गई हैं। राष्ट्रीय जनता दल के नेता लालू प्रसाद यादव के घर पर सीबीआई अफसरों का जमावड़ा लगा हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">पटना स्थित लालू के घर पर सीबीआई के दो दर्जन से ज्यादा अधिकारी मौजूद है और जांच चल रही है। इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने फोन कर अधिकारियों को पटना से राजगीर मिलने के लिए बुलाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बेनामी प्रॉपर्टी के शक में दिल्ली-एनसीआर में बड़ी कार्रवाई की थी। इस दौरान लालू यादव से जुड़े कारोबारियों के ठिकानों पर छापेमारी हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">आईटी अफसरों ने बताया था दिल्ली-गुड़गांव और आसपास के इलाकों के 22 ठिकानों पर छापेमारी हुई। लालू यादव के करीबी रियल एस्टेट कारोबारियों के ठिकानों की तलाशी ली गई। इसमें आरजेडी सांसद प्रेमचंद गुप्ता भी शामिल हैं। लालू यादव पर बेनामी प्रॉपर्टी और टैक्स चोरी के आरोप लगे हैं। डिपार्टमेंट को शक है कि बेनामी प्रॉपर्टी 1000 करोड़ की हो सकती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">लालू के साथ दो कंपनियों पर भी छापेमारी</h2>
<p style="text-align:justify;">सीबीआई ने जिन दो कंपनियों पर छापे मारे हैं, इनमें डिलाइट मार्केटिंग प्राइवेट लिमिटेड, जोकि अब लारा प्रोजेक्ट प्राइवेट लिमिटेड हो गई है और सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड पर छापेमारी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">केंद्रीय जांच एजेंसी ने लालू यादव, राबड़ी देवी, तेज प्रताप यादव और आईआरसीटीसी के तत्कालीन एमडी पीके गोयल और सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के दो डायरेक्टरों विनय कोचर और विजय कोचर के साथ सरला गुप्ता के यहां छापेमारी की है।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि पटना सचिवालय के पास बीरचंद पटेल मार्ग पर स्थित सुजाता होटल्स प्राइवेट लिमिटेड के ठिकाने पर सीबीआई ने छापा मारा । इसके साथ ही विनय और विजय कोचर की कंपनियों के विभिन्न पतों पर छापेमारी हुई है।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 22:54:28 +0530</pubDate>
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                <title>लालू ने सुशील पर मानहानि का मुकद्दमा दायर करने की दी धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[लालू प्रसाद यादव और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी के बीच जंग जारी पटना: जमीन गिफ्ट के मामले को लेकर आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी के बीच जंग जारी है। लालू यादव ने सुशील मोदी पर मानहानि का मुकद्दमा दायर करने की धमकी दी तो सुशील […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/lalu-threatens-to-file-lawsuit-against-sushil/article-2033"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/lalu-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">लालू प्रसाद यादव और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी के बीच जंग जारी</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>पटना: </strong>जमीन गिफ्ट के मामले को लेकर आरजेडी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव और बीजेपी के वरिष्ठ नेता सुशील कुमार मोदी के बीच जंग जारी है। लालू यादव ने सुशील मोदी पर मानहानि का मुकद्दमा दायर करने की धमकी दी तो सुशील मोदी ने जवाब में कह डाला कि जिसका मान सम्मान होगा वही मानहानि का मुकद्दमा कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सुशील मोदी ने आरोप लगाया था कि जब तेजप्रताप 4 साल के थे तब उन्हें 13 एकड़ 12 डिसमिल जमीन रमा देवी ने दान में दी थी। लालू के इस जवाब पर सुशील मोदी फिर पलटवार किया। सुशील मोदी ने कहा कि आखिर 15 महीने बाद लालू यादव ने रजिस्ट्री क्यों कैंसिल कराई।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> लालू की बेटी मीसा भारती से पूछताछ</h2>
<p style="text-align:justify;">वहीं रमा देवी ने इस मामले पर कहा था कि उन्होंने अपने पति के कहने पर जमीन गिफ्ट की थी। हालांकि, रमा देवी ने जब जमीन गिफ्ट की थी तब वो सक्रिय राजनीति में नहीं थीं। सुशील कुमार मोदी लगातार लालू के परिवार पर आरोप लगा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं दूसरी तरफ बेनामी संपत्ति के कई मामलों में लालू के परिवार के ठिकानों पर सीबीआई और ईडी भी रेड कर चुकी है। यहां तक कि लालू की बेटी मीसा भारती से पूछताछ भी की जा चुकी है।</p>
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</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 22:32:25 +0530</pubDate>
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