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                <title>residents - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>बठिंडा : पेयजल व सीवरेज समस्या से जूझ रहे रामां मंडी के बाशिन्दे</title>
                                    <description><![CDATA[रिफायनरी में से निकलने वाली पेट्रोल, डीजल, तारकोल व अन्य कैमीकलों के साथ भरी गाड़ियां इस सड़क से ही गुजरती हैं जहां कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/residents-of-rama-mandi-struggling-with-drinking-water-and-sewerage-problem/article-11354"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/sewerage-problem.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सीवरेज पिछले 9 महीनों से बंद होने के कारण आ रही समस्या | Sewerage Overflow Problem</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>संबंधित विभागीय अधिकारी नहीं दे रहा समस्या की तरफ ध्यान</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा/रामां मंडी(सतीश जैन)।</strong> रामां मंडी के बाशिन्दे सीवरेज व पेयजल <strong>(Sewerage Overflow Problem)</strong> की समस्या को  लेकर काफी परेशान हैं। पिछले कई महीनों से इसका कोई हल नहीं हो रहा। लोगों ने इस मुश्किल को कई बार नगर कौंसिल और जिला अधिकारियों के ध्यान में लाया परंतु लोगों की मांग अभी तक पूरी नहीं हुई, जिस का खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है। रामसरा रोड पर गौशाला नजदीक एक सीवरेज पिछले 9महीनों से बंद पड़ा है, जिस कारण सीवरेज का पानी ओवरफ्लो हो कर सड़क पर एकत्रित हो रहा है। सीवरेज जाम होने के कारण इस सड़क का काफी हिस्सा टूट गया है और सड़क पर गड्ढे बन गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सड़क के द्वारा अनगिनत वाहन गुजरते हैं क्योंकि बड़ी गाड़ियों के लिए रामां से रिफायनरी तक जाने के लिए यही एक मुख्य सड़क है। रिफायनरी में से निकलने वाली पेट्रोल, डीजल, तारकोल व अन्य कैमीकलों के साथ भरी गाड़ियां इस सड़क से ही गुजरती हैं जहां कभी भी कोई बड़ा हादसा घटित हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों ने कहा कि इस में जान -माल का भी नुक्सान होने से इन्कार नहीं किया जा सकता परंतु विभाग की आंखें भी तब ही खुलती हैं जब कोई हादसा घटित हो जाता है नहीं तो अधिकारी मूक दर्शक बने रहते हैं। लोगों ने मांग की कि मंडी निवासियों को आ रही दिक्कतों की तरफ ध्यान देकर जल्दी हल किया जाए।</p>
<h2>घरों के बाहर भी जमा होने लगा सीवरेज का दूषित पानी |</h2>
<p style="text-align:justify;">नगर कौंसिल पूर्व उप अध्यक्ष विजयपाल ने कहा कि जब से सीवरेज व वाटर सप्लाई का प्रभार नगर कौंसिल से लेकर सीवरेज बोर्ड को दिया है तब से ही लोग परेशान हो रहे हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>कुछ वार्डों की हालत तो इतनी अधिक खराब हो चुकी है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>लोगों के घरों के बाहर सीवरेज का पानी जमा रहता है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>वह लोग घरों से बाहर भी नहीं निकल सकते। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>उन्होंने कहा कि यही हाल वाटर सप्लाई का है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>लोगों को पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिल रहा जो पानी आ रहा है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>उसमें भी गटर के पानी की बदबू आती है।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Nov 2019 20:25:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अबोहर : पानी की समस्या से जूझ रहे वरियाम खेड़ा के निवासी</title>
                                    <description><![CDATA[विभाग की अनदेखी से जीवनदायी हजारों लीटर पानी बर्बाद हुआ जा रहा है।
पानी के रिसाव से सड़क पर गड्ढे भी बन चुके हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/residents-of-variyam-kheda-struggling-with-water-problem/article-10704"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/water-02.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">जल सप्लाई भूमिगत पाईप टूटे होने से नहीं पहुंच रहा लोगों के घरों में पानी | Water Leakage</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही से घरों में गंदा पानी पीने को भी मजबूर हैं ग्रामीण</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर(सच कहूँ/सुधीरअरोड़ा)।</strong> बेसक राज्य सरकार द्वारा संबंधित विभाग को पानी बचाने के लिए सख्त निर्देश जारी किए हुए हैं परन्तु जमीनी स्तर पर सरकारी आदेशों को अमली रूप देने का कोई भी प्रयास करने की बजाय सिर्फ आदेश ही दिए देखे जा रहे है। इसलिए विधानसभा हल्का बल्लुआना के गांव वरियाम खेड़ा में वर्षों से जगह-जगह भूमिगत टूटी हुई पाईप लाइन विभाग के कर्मचारियों की लापरवाही से ठीक न होने के कारण घरों में दूषित पानी सप्लाई हो रहा है, जिसे पीने व अन्य उपयोग के लिए ग्रामीण मजबूर हुए पड़े हैं। अनेकों बार शिकायत के बाद भी कोई सुनवाई नही की जा रही।</p>
<p style="text-align:justify;">पानी भी रोजाना सप्लाई के समय सड़क में फैल रहा है। जोकि विभाग की अनदेखी से जीवनदायी हजारों लीटर पानी बर्बाद हुआ जा रहा है। पानी के रिसाव से सड़क पर गड्ढे भी बन चुके हैं। जिससे इस मार्ग से गुजरने वाले राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। गांववासियों का कहना है कि पानी रिसाव के कारण हाल ही में नवनिर्वित वॉटर वर्क्स के आगे से दलमीर खेड़ा सडक मार्ग से गुजरती सड़क पर गड्ढे होने से टूटना शुरू हो गयी है। लीकेज होने के कारण कई बार पानी की सप्लाई भी दूषित होती है।</p>
<h2><strong>लीकेज की समस्या को नही किया जा रहा ठीक, नवनिर्वित सड़क हो रही क्षतिग्रस्त</strong></h2>
<p style="text-align:justify;">लेकिन संबंधित विभाग की ओर से इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। उनका कहना है कि हर 1, 2 महीनों से पानी के बिल तो आ जाते है परंतु उनके घरों तक पूरा पानी नही पहुंच पाता और फिर लोग बिल किस चीज का भरें। वहीं लीकेज होने से वाटर सप्लाई कर्मचारी द्वारा पानी का प्रेशर पूरा नही छोड़ा जाता। क्योंकि लीकेज की वजह से पानी ज्यादा छोडे जाने से सड़क पर पानी लबालब भर जाता है, जिससे 2 घण्टे की बजाय 4 घण्टे पानी कम प्रेशर के साथ छोड़ा जाना मुनासिब समझा जा रहा है, जिससे विभाग द्वारा बिजली भी अधिक खपत की जा रही है। गांववासियों ने संबंधित उच्चाधिकारियों से पाइप लाइन का लीकेज सही करवाने के साथ इस तरह की लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की है।क्योंकि पानी की बबार्दी होने से उन्हें कोई फर्क नही पड़ रहा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">ऐसी लीकेज होती रहती है कोई बड़ी बात नही: जेई | Water Leakage</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>इस संबंधित हमारे प्रतिनिधि द्वारा कई बार जेई प्रवेश कुमार को अवगत करवाया जा चुका है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इस बारे 15 दिन पहले बताया तो कहा कि इस समस्या का हल आज ही करवा देते </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>फिर आज द्वारा इसी सबंधी प्रश्न किया गया तो कहते ये कोई बड़ी बात </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>नही हमारे विभाग के कार्य मे ऐसी लीकेज होती रहती है करवा देंगे। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जब लोग बिल भरेंगे उसमें 25 प्रतिशत हम इन कार्यो में खर्च कर सकते हैं।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Oct 2019 16:04:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मूल निवासियों द्वारा बाहरी लोगों का विरोध</title>
                                    <description><![CDATA[1947 से पूर्व भारत में अंग्रेजों को उखाड़ फेंकों के नारे सुनाई देते थे और उन नारों में राष्ट्रवाद की झलक होती थी। सभी लोग भारत को एकजुट और धर्मनिरपेक्ष बनाने का संकल्प लेते थे। किंतु वर्ष 2018 में मेरे भारत महान में अन्य राज्यों के बाहरी आम आदमियों को खदेड़ने की बात हो रही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/residents-opposing-outsiders/article-6283"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/residents-opposing-outsiders-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">1947 से पूर्व भारत में अंग्रेजों को उखाड़ फेंकों के नारे सुनाई देते थे और उन नारों में राष्ट्रवाद की झलक होती थी। सभी लोग भारत को एकजुट और धर्मनिरपेक्ष बनाने का संकल्प लेते थे। किंतु वर्ष 2018 में मेरे भारत महान में अन्य राज्यों के बाहरी आम आदमियों को खदेड़ने की बात हो रही है और उन पर संबंधित राज्यों के मूल निवासियों द्वारा कर्फ्यू लगाया जा रहा है। इसमें क्षेत्रीय देशभक्ति की छाप है। हर कोई अपने-अपने राज्य को अधिक स्थानीय बनाने की बातें कर रहा है। गुजरात से हाल ही में बिहारियों और उत्तर प्रदेश के भैया लोगों के पलायन का कारण पिछले सप्ताह राज्य के साबरकांठा जिले में एक बिहारी युवक द्वारा 14 वर्षीय युवती के साथ बलात्कार की घटना है। इससे राज्य में क्षेत्रवाद की भावनाएं भड़क गयी और लोग गुजरात गुजरातियों के लिए और उत्तरी भारतीयों को बाहर भेजो की बातें करने लग गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसके चलते गरीब प्रवासी मजदूरों को पीटा जा रहा है, उन पर हमला किया जा रहा है और उन्हें धमकी दी जा रही है हालांकि मुख्यमंत्री रूपाणी ने उनकी सुरक्षा और हमलावरों के खिलाफ कार्रवाई करने का आश्वासन दिया है। इसी तरह अक्तूबर 2014 में बंगलुरू में पूर्वोत्तर क्षेत्र के लोगों के विरुद्ध अभियान चला था। उस समय कन्नड न बोलने के कारण पूर्वोत्तर के दो छात्रों की पिटायी की गयी थी और उनसे पूछा गया था कि क्या वे जापानी, चीनी या कोरियाई हैं। इससे पूर्वोत्तर क्षेत्र में आक्रोश फैल गया था। मुंबई में कुछ वर्षों के अंतराल में उत्तर भारतीयों के विरुद्ध ऐसा अभियान चलता रहता है। पंजाब और असम में भी बिहारियों के साथ यही बर्ताव होता है। प्रश्न उठता है कि क्या हम जातिवादी हैं? क्या क्षेत्रवाद हमारी मानसिकता में बैठ गया है? घृणा फैलाने वालों पर कैसे नियंत्रण किया जाए? क्या हमारे राजनेता इस क्षेत्रवाद के प्रभावों को समझते हैं? क्या इससे लोगों में क्षेत्रीय आधार पर और मतभेद नहीं बढेंÞगे?</p>
<p style="text-align:justify;">आज के प्रतिस्पर्धी लोकतंत्र में यदि जातिवादी राजनीति से चुनावी लाभ मिलता है तो क्षेत्रवादी राजनीति के माध्यम से मतदाताओं का धु्रवीकरण होता है और कोई इस बात की परवाह नहीं करता कि इसके परिणाम विनाशक हैं। इससे हिंसा फैल सकती है और इसके चलते क्षेत्रवाद और सांप्रदायिकता बढ़ सकती है। क्षेत्रवाद की शुरूआत साठ के दशक के आरंभ में तमिलनाडू से हुई जहां पर द्रमुक के गठन के साथ राज्य की जनता केन्द्र से कट सी गयी थी। बाद में द्रमुक का विभाजन हुआ और अन्नाद्रमुक नई पार्टी बनी। उसके बाद महाराष्ट्र में क्षेत्रवाद ने अपना सिर उठाया तथा कार्टूनिस्ट बाल ठाकरे मराठियों के स्वयंभू हितैषी बने और उनकी शिव सेना ने मराठी मानुष का नारा दिया और उनके अनुसार मुंबई में 28 प्रतिशत महाराष्ट्रियों को छोड़कर सब लोग बाहरी थे और उनके इस अभियान का पहला शिकार दक्षिण भारत के कुशल श्रमिक बने जिन्हें लुंगीवाला कहा गया और उनके व्यवसाय पर हमला किया गया। उसके बाद गुजरातियों का नंबर आया।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर उत्तरी भारतीय, उत्तर प्रदेश के भैया और बिहारी लोगों का नंबर आया। 70 के दशक में असम में विदेशी नागरिकों के विरुद्ध अभियान चला जब आॅल असम स्टूडेंटस यूनियन ने अवैध बंगलादेशी प्रवासियों को बाहर खदेड़ने के लिए आंदोलन चलाया और इसके चलते राज्य की कांग्रेस सरकार की हार हुई और असम गण परिषद् की सरकार बनी। नागालैंड और मणिपुर में छात्र चाहते हैं कि सभी गैर-नागा और गैर-मणिपुरी राज्य छोड़ दें। इन राज्यों में क्षेत्रवाद बढ़ता ही चला गया।<br />
नवंबर 2003 में असम में 20 हजार बिहारी छात्रों को गोहाटी में भर्ती परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया और इसका बदला बिहारियों ने पूर्वोत्तर क्षेत्र की ट्रेनों को रोककर और वहां के लोगों को पीटकर दिया। उसके बाद असमियों ने 52 बिहारियों को मार गिराया और इसमें उल्फा और आॅल बोडो स्टूडेंट यूनियन भी शामिल हो गया और उनका नारा था सभी हिन्दी भाषी असम छोडें जबकि बिहारियों ने नारा दिया असमियों को पकड़ो और मारो।</p>
<p style="text-align:justify;">इस स्थिति में केवल स्थानीय लोगों को ही दोष क्यों दें? हमारे नेता भी क्षेत्रवाद में विश्वास करते हैं। वर्ष 1999 के लोक सभा चुनाव में भाजपा ने लखनऊ से कांग्रेस के उम्मीदवार तथा जम्मू कश्मीर के पूर्व सदर- -ए-रियासत कर्ण सिंह को बाहरी उम्मीदवार बताया और वाजपेयी को स्थानीय उम्मीदवार बताया जबकि लखनऊ और वाजपेयी के जन्म स्थान ग्वालियर के बीच काफी दूरी है। इसी तरह संघ ने हिमाचल में वाजपेयी को स्थानीय बताया। वे मनाली से बहुत प्रेम करते थे। पार्टियों और नेताओं द्वारा क्षेत्रवाद को बढ़ावा दिया गया। पूर्व प्रधानमंत्री और किसान नेता चरण सिंह ने किसानों की पार्टी जनता पार्टी का गठन किया तो देवीलाल ने हरियाणा में लोक दल का गठन किया। पंजाब में बादल ने अकाली दल का, आंध्र में एनटी रामाराव ने तेलुगु देशम का, पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी ने तूणमूल कांग्रेस और ओडिशा में नवीन पटनायक ने बीजद का गठन किया और इन सबका एक ही नारा था – हम स्थानीय हैं, हमें शासन करना चाहिए। दिल्ली दूर है।</p>
<p style="text-align:justify;">
मंडलीकरण ने क्षेत्रवाद को और बढ़ावा दिया और इसके बाद मेड इन इंडिया नेताओं मायावती, मुलायम, लालू आदि ने इसे और हवा दी। अब मतदाता केन्द्रीय पार्टियों को पसंद नहीं करते। वे अपनी बिरादरी को पसंद करते हैं। हमारे देश में केवल जातियां और उपजातियां ही नहीं हैं अपितु हमें बिहारी, हरियाणवी, उत्तर प्रदेश का भैया, मद्रासी आदि की समस्याओं से निपटना पड़ता है। हमारे देश में भाषा, खानपान, रीति रिवाज अलग-अलग हैं और हमरी विशद क्षेत्रीय विविधता का उपयोग विभिन्न समुदायों को एक दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने के लिए किया गया। इसका उदाहरण यह है कि उत्तर भारतीय मद्रासी और उनकी भोजन की आदतों को पसंद नहीं करते। जबकि दक्षिण भारतीय सोचते हैं कि पंजूस जोर-जोर से बोलते हैं और केवल भांगडा कर सकते हैं। बंगाली स्वयं को बुद्धिजीवी समझते हैं तो बिहारियों से आईएएस बनने की अपेक्षा की जाती है। पश्चिम में गुज्जू हैं तो उत्तर प्रदेश में भैया और इसके चलते लोगों में मतभेद बढते जाते हैं और स्थानीय लोग बाहरी लोगों के प्रति भेदभाव करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
नि:संदेह देश के नागरिकों को संपूर्ण देश में रोजगार के समान अवसर मिलने चाहिए। समस्या तब होती है जब स्थानीय लोग अपना हिस्सा मांगते हैं और यह कुछ हद तक सही भी है क्योंकि बाहरी राज्य के लोग किसी अन्य राज्य में छोटी-मोटी नौकरी के लिए क्यों आवेदन करते हैं। यदि स्वीपर या हेल्पर की नौकरी भी बाहरी लोगों को दी जाने लगे तो स्थानीय लोग कहां जाएंगे? क्या वे आतंकवादी बनें और बंदूक उठाएं? क्या इससे राष्ट्रीय एकता मजबूत होगी? जो राज्य आतंकवाद ग्रस्त हैं उनके आंकडों से पता चलता है कि बेरोजगार स्थाानीय युवक आतंकवादी संगठनों में शामिल हो रहे हैं क्योंकि उनके रोजगार को बाहरी लोग छीन रहे हैं तथा कश्मीर और उत्तर-पूर्व इसके उदाहरण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
गत वर्षों में हमारे नेताओं ने क्षेत्रवाद को बढ़ावा दिया है। उन्होंने क्षेत्रवाद को राष्ट्रीय एकता से भी अधिक महत्व दिया। आदर्श स्थति यह है कि प्रत्येक भारतीय को देश के किसी भी हिस्से में रहने का अधिकार है और वह वहां अपनी आजीविका अर्जित कर सकता है। हम ऐसे भारत की कल्पना करते हैं जो समानता में विश्वास करे तथा जो सभी वर्गों, जातियों और समुदायों को समान अवसर दे। हमें इस बात को ध्यान में रखना पडेगा कि भारत राज्यों का संघ है और इस बाहरी मुद्दे का निराकरण किया जाना चाहिए। अन्यथा क्षेत्रवाद देश को बांट देगा। किसी समुदाय या क्षेत्रीय लोगों के विरुद्ध हिंसा के मामलों से कडाई से निपटा जाना चाहिए। देश में एक कठोर रंगभेद विरोधी कानून होना चाहिए और हर तरह के भेदभाव, हमलों, धमकियों आदि की निंदा की जानी चाहिए। कानून मंत्रालय को अपने घरों से दूर रह रहे क्षेत्रीय अल्पसंख्यकों के विरुद्ध हो रही हिंसा के विरुद्ध कठोर कानून बनाना चाहिए। क्षेत्रीय असहिष्णुता को बिल्कुल नहीं सहा जाना चाहिए और इस बारे में स्पष्ट संदेश दिया जाना चाहिए कि हमें गोरा, काला, हिन्दू, मुस्लिम, मद्रासी, पंजाबी आदि के भय से ऊपर उठना होगा। हमें बॉलीवुड के इस गाने को गुनगुनाना होगा कि: हम बिहारी हैं तो क्या हुआ दिलवाले हैं।  <em><strong>पूनम आई कौशिश</strong></em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Oct 2018 14:19:56 +0530</pubDate>
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                <title>हिमाचल प्रदेश की महंगी सब्जियां खाने को मजबूर पंजाब निवासी</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश कारण सब्जियां हुई खत्म, आने वाले दिनों में भाव और बढ़ने के आसार संगरूर (गुरप्रीत सिंह)। पंजाब में इन दिनों लोक्ल सब्जियों का काल पड़ने के कारण लोगों को मजबूरन दूसरे राज्यों से आ रही सब्जियां महंगे भाव पर खरीद कर खाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ज्यादातर शहरों में जो सब्जियां […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/punjab-residents-forced-to-eat-expensive-vegetables-in-himachal-pradesh/article-2041"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/vagitable-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">बारिश कारण सब्जियां हुई खत्म, आने वाले दिनों में भाव और बढ़ने के आसार</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर (गुरप्रीत सिंह)।</strong> पंजाब में इन दिनों लोक्ल सब्जियों का काल पड़ने के कारण लोगों को मजबूरन दूसरे राज्यों से आ रही सब्जियां महंगे भाव पर खरीद कर खाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्यादातर शहरों में जो सब्जियां आ रही है, उनमें मुख्य तौर पर हिमाचल प्रदेश से ही आ रही हैं, जिस कारण आने वाले दिनों में सब्जियों के भाव और बढ़ने के आसार हैं। पंजाब के विभिन्न शहरों में इन दिनों सब्जियों के भाव आसमान को छू रहे हैं, जिसका कारण गत दिनों हुई बारिश है।</p>
<p style="text-align:justify;">शहर के सुनामी गेट स्थित सब्जी मंडी में सब्जी व फ्रूट का काम करने वाले मुकेश कुमार ने बताया कि वैसे तो सभी सब्जियों के भाव दोगुणा हो गए हैं, परंतु सबसे अधिक टमाटर महंगा हुआ है। पिछले सप्ताह टमाटर का भाव 20 रुपये था, जो अब बढ़ कर 50 से 60 तक पहुंच गयाहै। चार से पांच रुपये किलो बिकने वाला कद्दू 30 रुपये किलो तक पहुंच गया है,</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि गोभी व बैंगन अपने पुराने भाव पर टिके हुए हैं। भिंडी दस रुपये से 20 रुपये किलो, करेला 10 रुपये से 30 रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि आलू व प्याज दोनों अपने पुराने भाव 10 से 15 रुपये किलो के हिसाब से ही बिक रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि गत सप्ताह 5 से 10 रुपये किलो बिकने वाली गोभी अब 30 रुपये किलो, 40 रुपये विकने वाला मटर अब 120 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा है। सलाद के तौर पर प्रयोग में आने वाला खीरा व तर (ककड़ी) के भाव भी 10 रुपये से उछल कर 30 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। इसके अतिरिक्त धनिया भी 50 रुपये से बढ़ कर 100 रुपये किलो तक जा पहुंचा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं आम लोग</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में शहर निवासी हरजिन्द्र सिंह, मुकेश कुमार व नत्थू लाल ने कहा कि सब्जियों के भाव बढ़ने के कारण वह गत कईदिनों से खाने में सिर्फ दाल तक ही सीमित हैं। आम दिनों में 5 रुपये किलो बिकने वाला कद्दू आज 30 रुपये किलो बिक रहा है, जिसे खरीदना आम लोगों के वश से बाहर की बात है। सरकार को चाहिए कि सब्जियों के भाव कंट्रोल रखने के लिए इस तरफ ध्यान दें।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कैसे बढ़े सब्जियों के भाव</h2>
<p style="text-align:justify;">सब्जियों के भाव में अचानक आई तेजी संबंधी सब्जी व्यापारी राज कुमार अरोड़ा, जो कि सब्जी मंडी संगरूर के अध्यक्ष भी हैं, ने बताया कि गत दिनों हुई बारिश कारण लोक्ल सब्जियां लगभग खत्म हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज शहरों में जो सब्जियां आ रही है, वह सभी हिमाचल प्रदेश से आ रही हैं। इस समय सिर्फ हिमाचल से ही सब्जियां आने के कारण भाव में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि इन दिनों गर्मी अधिक होने के कारण भी लोक्ल सब्जियां न के बराबर होती हैं। हिमाचल में भी अधिक बारिश होने के कारण आने वाले दिनों में सब्जियों के भाव में और तेजी आने की संभावना है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 23:21:18 +0530</pubDate>
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