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                <title>vegetable - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>vegetable RSS Feed</description>
                
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                <title>Vegetable Prices: बारिश से आसमान छूने लगे सब्जियों के दाम, पपीते से महंगा हुआ खीरा</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले एक सप्ताह से लगभग दुगुने हुए दाम बरनाला/संगरूर (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)। Vegetable Prices: बीते दिनों हुई बारिश के कारण सब्जियों के भाव बेहद बढ़ गए हैं, जिस कारण मध्यवर्गीय परिवारों की रसोई में सब्जियां कुछ दिन से गायब हो गई हैं। सब्जियों के भाव पिछले एक सप्ताह से लगभग दुगुने हो गए हैं।  Vegetable […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/vegetable-prices-have-increased-due-to-rain/article-72918"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/vegetable.jpg" alt=""></a><br /><h3>पिछले एक सप्ताह से लगभग दुगुने हुए दाम</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनाला/संगरूर (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)।</strong> Vegetable Prices: बीते दिनों हुई बारिश के कारण सब्जियों के भाव बेहद बढ़ गए हैं, जिस कारण मध्यवर्गीय परिवारों की रसोई में सब्जियां कुछ दिन से गायब हो गई हैं। सब्जियों के भाव पिछले एक सप्ताह से लगभग दुगुने हो गए हैं।  Vegetable Prices Increased</p>
<p style="text-align:justify;">हासिल की जानकारी के अनुसार लगभग सभी शहरोंं में सब्जियो के भाव आसमान को छूने लगे हैं। संगरूर व बरनाला की मंडियों में भाव बढ़ने के कारण लोगों में इस संबंधी चर्चा जोरों पर हैं। सब्जी विक्रेताओं के अनुसार पहले तो गर्मी के कारण कुछ सब्जियां झुलस गई और इसके बाद किसानों ने धान की रोपाई के लिए पहले बीजी गई सब्जियों को नष्ट कर दिया और अब जो थोड़ा-बहुत सब्जी उत्पादक हैं, वह इसका फायदा लेने में लगे हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऊपर से अब रहती कसर बारिश ने निकाल दी है, जिस कारण सब्जियों की भारी कमी आ गई है। करीब दस दिन पहले सभी सब्जियों के भाव काफी कम होने से लोगों को राहत मिली हुई थी परंतु अब मंडी में सब्जी का भाव सुनकर लोगों को अपनी जेब की तरफ देखना पड़ रहा है। सब्जियां महंगी होने से महिलाओं को अपनी रसोई का बजट बनाना मुश्किल हो गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बरनाला मंडी में सब्जियों के मौजूदा भाव | Vegetable Prices Increased</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं अगर सब्जियों के मौजूदा भाव की बात की जाए तो बरनाला में कद्दू 80 रुपये किला बिक रहा है, तोरी का भाव 100 रुपए किलो तक पहुंच गया है। भिंडी 80 रुपये किलो, प्याज 25 रुपये किलो, खीरा (जपानी) 80 रुपये किलो, पपीता 50 रुपये किलो, आलू 25 रुपये किलो, फलियां 100 रुपये किलो व टमाटर का भाव 40 रुपये किलो बिक रहा है। इसके अलावा संगरूर मंडी में भी लगभग इसी तरह के भाव हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं संगरूर के सब्जी विक्रेता ने बताया कि पहले खेत खाली होने के कारण बड़ी संख्या में किसानों ने सब्जियां बीजी हुई थीं, जिस कारण सब्जियों के भाव कम थे। अब ज्यादातर किसानों ने खेतों में धान की रोपाई कर दी है। वहीं ऊपर बारिश होने से सब्जियों के भाव पर भी बुरा असर पड़ा है। मंडी में प्याज, आलू, टमाटर, यूपी, गुजरात, राजस्थान व महाराष्टÑ से आते हैं, जिनके भाव तेज ही होते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बरनाला की ग्रहणियां कमलजीत कौर, गुरमीत कौर व हरजिन्दर कौर ने बताया कि पिछले दो तीन दिन से सब्जियों के भाव बहुत ज्यादा बढ़ गए हैं, जिससे उन्होंने फिलहाल सब्जियों से किनारा कर लिया है। उन्होंने बताया कि सब्जियों के भाव ने तो फलों को भी पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने मांग की कि सरकार को चाहिए कि एकदम बढ़े भाव को कंट्रोल करने के लिए कोई प्रयास किए जाएं व सब्जियों की ब्लैक मार्केटिंग करने वालों के खिलाफ सख्ती की जाए, ताकि मध्यवर्गीय परिवारोंं को कुछ राहत मिल सके।Vegetable Prices Increased</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="प्रधान ने दी लूट की फर्जी सूचना, पुलिस ने प्रधान के घर से बरामद किया 4.40 लाख" href="http://10.0.0.122:1245/jasrana-police-arrested-the-pradhan/">प्रधान ने दी लूट की फर्जी सूचना, पुलिस ने प्रधान के घर से बरामद किया 4.40 लाख</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Jul 2025 20:15:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Literature: डर लगता है कि कहीं कोई प्याज की सब्जी को नजर न लगा दे&amp;#8230;.</title>
                                    <description><![CDATA[Literature: हमारे गांव में मेरे पड़ोस में एक औरत रहती थी जिसका नाम निक्की था। हम उसे चाची निक्की कहते थे। असल में मेरे मम्मी-पापा उसे चाची कहते थे, और उनकी देखादेखी हम भी उसे चाची ही कहने लगे थे। उसके तीन बेटे थे, जिनमें सबसे छोटा कोई पांच साल का था। चाची लोगों का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/literature/onion-vegetable/article-69365"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-04/literature.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Literature: हमारे गांव में मेरे पड़ोस में एक औरत रहती थी जिसका नाम निक्की था। हम उसे चाची निक्की कहते थे। असल में मेरे मम्मी-पापा उसे चाची कहते थे, और उनकी देखादेखी हम भी उसे चाची ही कहने लगे थे। उसके तीन बेटे थे, जिनमें सबसे छोटा कोई पांच साल का था। चाची लोगों का सूत कातकर, रजाइयां गाँठकर या छोटे-मोटे काम करके गुजारा करती थी। कभी-कभी वह हमारे चूल्हे, तंदूर या आंगन को भी लीप देती थी। मेरी मां उसके पास से खेस भी बनवाती थी। वह अक्सर चरखे पर बैठी रहती थी। कई बार आस-पड़ोस की औरतें उसे अपने साथ दीवारें लीपने के लिए ले जाती थीं। सर्दियों में वह कभी-कभी किसी के कपास या नरमा चुनने चली जाती थी। इससे उसे चार पैसे मिलते थे और वह घर का खर्च चलाती थी। Literature</p>
<p style="text-align:justify;">वह मिर्च, मसाला, हल्दी, नमक और सरसों का तेल हमेशा जरूरत के हिसाब से ताजा ही लाती थी और फिर सब्जी बनाती थी। वह इतना तेल लाती थी, जिससे दो या तीन दिन की सब्जी बन जाती। डलियों वाला नमक, साबुत लाल मिर्च, धनिया और हल्दी, जिसे वह वसार कहती थी, को कूँडे में कूटकर सब्जी तैयार करती थी। मैं देखता था कि वह बिना प्याज के ही सब्जी बनाती थी, क्योंकि प्याज भी पैसे से आता था। लहसुन, अदरक और टमाटर डालने का तो सवाल ही पैदा नहीं होता था। फिर भी, मुझे उनकी सब्जी देखने में स्वादिष्ट लगती थी। मैं चाहकर भी उस सब्जी का स्वाद नहीं ले पाता था। कभी-कभी वह सिर्फ प्याज की सूखी सब्जी बनाती थी। Literature</p>
<p style="text-align:justify;">उसे देखकर मेरा मन करता था कि खा लूँ, लेकिन वहां मैं मजबूर हो जाता था। घर आकर मैं अपनी माँ से कहता कि वैसी ही सब्जी बनाएँ, लेकिन मेरी माँ सरसों के तेल की जगह देसी घी, अदरक, लहसुन और प्याज डाल देती थी। वह सब्जी वैसी नहीं बनती थी। मैं रोटी नहीं खाता था। मेरी माँ मुझे डाँटती थी और कभी-कभी हल्का हाथ भी चला देती थी। सेठों का परिवार होने के कारण हम उनसे सब्जी भी नहीं माँग सकते थे। बल्कि कई बार वह मेरी माँ से सब्जी की कटोरी ले जाती थी या मेरी माँ खुद ही उन्हें सब्जी दे देती थी।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर एक बार मैं मंडी में एक फिल्म देखकर आया। शायद उस फिल्म का नाम ‘राजा और रंक’ था। उस फिल्म की कहानी भी कुछ ऐसी ही थी। मेरे मन में उस देसी सब्जी और बड़ी-बड़ी अनछुई चीजें खाने की लालसा बढ़ती गई। लेकिन अब हम घर में सरसों का तेल ही इस्तेमाल करते हैं। मैं अक्सर वैसी सब्जियां बनवा लेता हूँ। आज बच्चों की माँ से मैंने सिर्फ प्याज की सब्जी खाने की इच्छा जाहिर की। उसने तुरंत काम शुरू कर दिया। डर लगता है कि कहीं कोई प्याज की सब्जी को नजर न लगा दे।<br />
<strong>                                                                                                                 – रमेश सेठी बादल</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Snake: सांपों के लिए हैं ये लक्ष्मण रेखा, घर पर छिड़क दें ये बीज, घुसने से डरेगा सांप" href="http://10.0.0.122:1245/lakshman-rekha-for-snakes/">Snake: सांपों के लिए हैं ये लक्ष्मण रेखा, घर पर छिड़क दें ये बीज, घुसने से डरेगा सांप</a></p>
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                                                            <category>साहित्य</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Apr 2025 15:44:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Agriculture : 20 वर्षों से सब्जी उत्पादन से जुड़कर प्रतिवर्ष लाखों का उठा रहा मुनाफा</title>
                                    <description><![CDATA[सब्जियां उगाकर मालामाल हुआ डबवाली का किसान जसपाल || Vegetable Farming अनिल गोरीवाला। जहां किसान जमीन से पैदावार लेने के लिए अनेक प्रकार की पेस्टिसाइड का प्रयोग कर आमदनी वसूल करने में लगा है। वहीं, डबवाली का किसान जसपाल सिंह प्रति एकड़ भूमि से लाखों रुपए की वार्षिक आमदनी ले रहा है। किसान जसपाल सिंह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/dabwali-farmer-jaspal-get-benefit-by-vegetable-farming/article-55754"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/vegetable-farming.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>सब्जियां उगाकर मालामाल हुआ डबवाली का किसान जसपाल || Vegetable Farming</strong></h3>
<div style="text-align:justify;"><strong>अनिल गोरीवाला।</strong> जहां किसान जमीन से पैदावार लेने के लिए अनेक प्रकार की पेस्टिसाइड का प्रयोग कर आमदनी वसूल करने में लगा है। वहीं, डबवाली का किसान जसपाल सिंह प्रति एकड़ भूमि से लाखों रुपए की वार्षिक आमदनी ले रहा है। किसान जसपाल सिंह पिछले 20 वर्षों से अपने 6 एकड़ जमीन में सब्जियां बोकर (Vegetable farming) हर तीन माह की अंतराल पर लाखों रुपए की पैदावार उठा रहा है। इतना ही नहीं, इस किसान की प्रेरणा से आस-पास के किसानों ने भी अपने खेतों को सब्जी का हब बना दिया है।</div>
<div style="text-align:justify;">किसान जसपाल सिंह के अनुसार खेत में सब्जी बोने का कार्य किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। अनुमान है कि डबवाली सब्जी मंडी में 25 प्रतिशत तक सब्जियां इसी क्षेत्र से पहुंच रही हैं। क्षेत्र के किसानों को सब्जी बेचने के लिए अन्य मंडी की तरफ रुख नही करना पड़ता, अपितु किसानों का सब्जी विक्रेताओं से पहले ही अनुबंध हो जाता है। किसान जसपाल सिंह द्वारा 6 एकड़ जमींन में चप्पन कद्दू, गोभी, टमाटर, पेठा, तोरी, तरबूज की काश्त की गई है। किसान ने बताया कि सब्जी बोने की तकनीक कोई मुश्किल नहीं है, परन्तु इसमें खेत की बुआई, निराई, गुडाई का कार्य सही समय पर होना नितांत आवश्यक है।</div>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>वैरायटी: -</strong></h3>
<div style="text-align:justify;">जसपाल सिंह द्वारा पिछले 12 वर्षों से गोभी की मन्नेर किस्म की काश्त की जा रही है। वर्तमान में 1 एकड़ में मन्नेर किस्म का उत्पादन सवा लाख रुपए तक हुआ है। इस गोभी किस्म का समय गर्मी के मौसम में 3 माह व सर्दी के मौसम में ढाई माह है। इस अवधि में गोभी पूरी तरह से तैयार हो जाती है। यह किस्म जून से शुरू होकर अप्रैल तक बोई जाती है। जिसका बाजार का भाव 40 रुपए प्रति किलो तक संभावित रहता है। सब्जी के पौधों पर मौसम का प्रभाव अवश्य दिखाई देता है, इसलिए पौधे की समयानुसार देखभाल जरूरी है।</div>
<div style="text-align:justify;">तोरी की सत्या व अनिता नामक कम्पनी की किस्म की पैदावार से किसान जसपाल सिंह प्रति एकड़ ढाई लाख की पैदावार ले रहा है। जिसका बाजारी भाव 15 रुपए से लेकर 60 रुपए प्रति किलो से हिसाब मिल जाता है। यह दोनों किस्म जनवरी से जून तक गर्मियों में तैयार हो जाती है। बैंगन की चूं-चूं माइको नामक वैरायटी भी अच्छी पैदावार के लिए कारगर है। प्रति एकड़ में प्रति वर्ष डेढ़ लाख रुपए की आमदन हो रही है।</div>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>पनीरी लगाने की विधि</strong></h4>
<div style="text-align:justify;">खेत को समतल कर उसमें तव्वियां व कल्टीवेटर से जमींन को तैयार कर इसमें मेढ़ बना लें। हाथों से पनीरी को रोपित किया जाता है। मेंढों में पौधों की वृद्वि के अनुसार सिंचाई की जाती है।</div>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 29 Mar 2024 10:31:01 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सब्जियों के दाम पूरे उफान पर</title>
                                    <description><![CDATA[अबोहर (सच कहूँ न्यूज)। इस समय महंगाई पूरे उफान पर है। भले ही घी व तेल के दाम घट गए हो, लेकिन सब्जियों (Vegetables) के दाम पूरे उफान पर है। हालात ये है कि गरीब वर्ग खाए तो आखिर क्या खाए, क्योंकि कोई भी दाल 100 रुपए किलो से कम नहीं है। सब्जी के दाम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/vegetable-prices-on-full-swing/article-50575"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/vegetables1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> इस समय महंगाई पूरे उफान पर है। भले ही घी व तेल के दाम घट गए हो, लेकिन सब्जियों (Vegetables) के दाम पूरे उफान पर है। हालात ये है कि गरीब वर्ग खाए तो आखिर क्या खाए, क्योंकि कोई भी दाल 100 रुपए किलो से कम नहीं है। सब्जी के दाम भी सातवें आसमान पर छू रहे हैं। अब तो सब्जी को तड़का लगाना मुश्किल हो चला है। वहीं, टमाटर के बढ़े दामों को लेकर भी लोग काफी खिल्ली उड़ा रहे हें। लोगों को हांस्य वीडियो टमाटरों को लेकर बनाया जा रहा है। Abohar News</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार इस समय परचून रेट में टमाटर 180 रुपए लेकर 200 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिक रहे हैं। इसके अलावा सब्जियों को तड़का लगाने में अह्म मानी जाने वाली अदरक के दाम 300 रुपए के करीब पहुंच गए हैं। सब्जी विक्रेता ओमप्रकाश वाट्स ने बताया कि फूल गोभी 100 रुपए, पत्तागोभी 50 रुपए, हरी मिर्च 60 रुपए, तोरी 40 रुपए, करेला 40 रुपए, अरबी 60 रुपए, नींबू 60 रुपए, रामकेला आचारी आम 60 से लेकर 70 रुपए, ककड़ी 20 रुपए, पालक 20 रुपए गुट्टी, आलू 20 रुपए, प्याज 25 रुपए, लोकी 30 रुपए, ग्वार फली 80 रुपए, चावला फली 50 रुपए, लहसून 200 रुपए, चिब्बड़ 40 रुपए सहित अन्य सब्जियों के दाम बढ़े हुए है। उन्होंने बताया कि अभी सब्जियों के दामों में कोई राहत की उम्मीद नहीं है। Abohar News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="कोर्ट के आदेश पर खोला गया सीज गोदाम, कब्जे में लिया सामान" href="http://10.0.0.122:1245/seized-godown-opened-on-the-orders-of-the-court/">कोर्ट के आदेश पर खोला गया सीज गोदाम, कब्जे में लिया सामान</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/vegetable-prices-on-full-swing/article-50575</link>
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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2023 20:42:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अचानक कैसे बढ़ गए टमाटर के दाम, जानिए क्या है असली वजह?</title>
                                    <description><![CDATA[पानीपत (सच कहूँ/सन्नी कथूरिया)। जून महीने में मानसून की शुरुआत होते ही लगातार पिछले तीन-चार दिनों से बारिश हो रही है जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है वहीं लगातार हो रही बारिश (Rain) से मुसीबत भी सामने आ रही है जगह-जगह जलभराव के कारण लोगों को परेशानियों का सामना तो करना पड़ रहा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/tomatoes-become-expensive/article-49420"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/tomato.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पानीपत (सच कहूँ/सन्नी कथूरिया)।</strong> जून महीने में मानसून की शुरुआत होते ही लगातार पिछले तीन-चार दिनों से बारिश हो रही है जहां लोगों को गर्मी से राहत मिली है वहीं लगातार हो रही बारिश (Rain) से मुसीबत भी सामने आ रही है जगह-जगह जलभराव के कारण लोगों को परेशानियों का सामना तो करना पड़ रहा है लेकिन इसके साथ साथ सब्जी में मुंह का स्वाद देने वाला टमाटर का रेट आसमान को छू रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बरसात से पहले टमाटर मार्केट में 30 से 40 प्रति किलो भाव बिका करता था लेकिन बरसात के बाद टमाटर का रेट 100 से 120 तक पहुंच गया है। लगातार हो रही बारिश से सब्जियों के भाव में काफी उछाल आ गया है आम नागरिक को टमाटर खरीदने के लिए भी सोचना पड़ रहा है। Tomato</p>
<h3 style="text-align:justify;">टमाटर हुए महंगे… खरीदारी हुई कम | Tomato</h3>
<p style="text-align:justify;">पिछले कई दिनों से टमाटर के दाम बेहद ही ज्यादा हैं और 100-120 या फिर इससे भी ऊंचे दाम पर सब्जी मंडी में बेचा जा रहा है. जब भी लोग मार्केट में टमाटर की तरफ खरीदने के लिए बढ़ते हैं तो वो अपने कदम पीछे हटा लेते हैं. फिलहाल, लोग टमाटर को देखकर अब मुंह फेरने लगे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बरसात ने बिगाड़े… टमाटर के रेट</h3>
<p style="text-align:justify;">सब्जी विक्रेता ने चुघ बताया कि टमाटर दूसरे राज्यों से आता है भारी बारिश होने के कारण बड़े स्तर पर फसलें खराब हो गई हैं जिस कारण से टमाटर के साथ-साथ और भी सब्जियों के भाव में बढ़ोतरी हो रही है। इस समय टमाटर का भाव सबसे महंगा चल रहा है ग्राहक भी रेट पूछ कर खाली हाथ लौट जाता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भाव बढ़ने के साथ-साथ नुकसान भी ज्यादा</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरे सब्जी विक्रेता अश्वनी से बात की गई तो उन्होंने कहा कि बरसात से पहले टमाटर के रेट बहुत कम थे बरसात के बाद रेट बढ़ते जा रहे हैं अगर ऐसा ही चलता रहा तो टमाटर 150 रुपए तक पहुंच सकता है। बरसात के कारण टमाटर के रेट तो बढ़ रहे हैं लेकिन ग्राहक ना होने के कारण टमाटर खराब भी बहुत हो रहे हैं जिससे उनका नुकसान भी काफी हो रहा है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा बने टीचर्स को मिलेगी तीन छुट्टी" href="http://10.0.0.122:1245/teachers-who-are-part-of-the-training-program-will-get-three-holidays/">ट्रेनिंग प्रोग्राम का हिस्सा बने टीचर्स को मिलेगी तीन छुट्टी</a></p>
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                                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jun 2023 17:33:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सब्जियों पर महंगाई की हुई ‘बारिश’</title>
                                    <description><![CDATA[बरनाला सब्जी मंडी में खरीददारी रही आधी, टमाटर के दामों में आया उछाल बरनाला (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)। इन दिनों लोगों पर महंगाई (Dearness) की मार पड़ रही है, वह भी सब्जियों के रूप में, जिस कारण लोगों का रोटी का स्वाद भी गायब हो गया है। सब्जियों के आसमान छू रहे भाव ने गरीबोंं की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/half-of-shopping-in-barnala-vegetable-market/article-49373"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/vegetable.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">बरनाला सब्जी मंडी में खरीददारी रही आधी, टमाटर के दामों में आया उछाल</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>बरनाला (सच कहूँ/गुरप्रीत सिंह)।</strong> इन दिनों लोगों पर महंगाई (Dearness) की मार पड़ रही है, वह भी सब्जियों के रूप में, जिस कारण लोगों का रोटी का स्वाद भी गायब हो गया है। सब्जियों के आसमान छू रहे भाव ने गरीबोंं की सब्जी में पौष्टिक हरी सब्जियां व तड़के में लाल टमाटर गायब कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ मध्यवर्गीय परिवारों ने भी जरूरत अनुसार ही सब्जी खरीदनी शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार बरनाला की सब्जी मंडी में मौजूद सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि पिछले दो दिनों से सब्जियों के भाव में अचानक तेजी आ गई है। Vegetable</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि हिमाचल, उत्तराखंड और अन्य राज्यों में भारी बारिश होने से सब्जियां बड़े स्तर पर खराब हो गई हैं और जिस कारण उनके भाव में अचानक विस्तार नजर आने लगा है। इनमें सबमें टमाटर का भाव सबसे ज्यादा महंगा हो गया है। आज से दस दिन पहले जहां टमाटर 15 रुपए प्रति किलो बिक रहा था, लेकिन आज इसका भाव 70-80 रुपए तक पहुंच गया है। बरनाला के सब्जी विके्रता जगसीर सिंह ने बताया कि सब्जियों के भाव में तेजी आने से लोगों ने सब्जी से मुंह फेरना शुरू कर दिया है। उन्होंने बताया कि हर रोज सब्जी खरीदने वाले उनसे अब महज आधी सब्जी ही खरीद के लेकर जा रहे हैं, जिस कारण वह भी 50 फीसदी सब्जी ही खरीद रहे हैं। Barnala News</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि ज्यादा रही सब्जियां जल्दी खराब हो जाती हैं। उन्होंने बताया कि शिमला मिर्च का भाव भी 40 से 50 रुपये किलो हो गया है। खीरा जो 15 से 20 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, अब उसका भाव 40 रुपये प्रति किलो हो गया है। नींबू का भाव 40 रुपए 250 ग्राम, फलियोंं का भाव 100 रुपये प्रति किलो से अधिक चल रहा है। इस संबंधी शहरी हरदेव सिंह ने बताया कि वह हर रोज सब्जी बनाते हैं लेकिन पिछले दो दिनों से उन्होंने सब्जी से दूरी बना ली है। उन्होंने कहा कि हम टमाटर भी जरूरत अनुसार ही खरीद रहे हैं क्योंकि टमाटर ही सबसे ज्यादा महंगा है। उन्होंने कहा कि सरकार को लोगों की इन छोटी-छोटी जरूरतों का ख़्याल रखना चाहिए क्योंकि इनका असर आमजन की जेब पर अधिक पड़ता है। Vegetable</p>
<h3 style="text-align:justify;">अगर टमाटर 80 रुपये ही खरीदने पड़ गए तो सेब नहीं खा लेंगे | Barnala News</h3>
<p style="text-align:justify;">टमाटर के आसमान चढ़े भाव ने सभी को परेशान कर दिया है। इस संबंधी कई लोगों का कहना है कि अगर 80 रुपये किलो टमाटर ही खरीदने हैं तो थोड़े रूपये और डालकर सेब ही क्यों न खरीदे जाएं। वहीं पपीते का भाव भी 40 रुपये प्रति किलो, तरबूज का भाव 20 रुपए प्रति किलो और हरा नारियल 40 रुपये प्रति पीस है। टमाटर ने इन सभी चीजों को पीछे छोड़ दिया है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="भाजपा सरकार में हो रहा देश और प्रदेश का विकास: डॉ अनिल अग्रवाल" href="http://10.0.0.122:1245/the-development-of-the-country-and-the-state-is-happening-in-the-bjp-government-dr-anil-agarwal/">भाजपा सरकार में हो रहा देश और प्रदेश का विकास: डॉ अनिल अग्रवाल</a></p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jun 2023 16:16:45 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>श्रीलंका : हरी मिर्च 700 रुपये और आलू 200 रुपये किलो</title>
                                    <description><![CDATA[कोलंबो। कोरोना महामारी के बीच पड़ोसी देश श्रीलंका मुश्किलों में घिर गया है। देश में हालात इस कदर बेकाबू हो गए हैं कि लोगों के भूखे मरने की नौबत आ गई है। श्रीलंका दिवालियेपन की कगार पर पहुंच चुका है और खाने-पीने के सामान की खरीद आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/green-chillies-rs-700-and-potatoes-rs-200-per-kg-in-sri-lanka/article-29881"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/vegetable-price-in-sri-lanka.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कोलंबो।</strong> कोरोना महामारी के बीच पड़ोसी देश श्रीलंका मुश्किलों में घिर गया है। देश में हालात इस कदर बेकाबू हो गए हैं कि लोगों के भूखे मरने की नौबत आ गई है। श्रीलंका दिवालियेपन की कगार पर पहुंच चुका है और खाने-पीने के सामान की खरीद आम आदमी की पहुंच से बाहर होती जा रही हैं। महंगाई के चलते लोग बेबस हो गए हैं। श्रीलंका के एडवोकाटा इंस्टीट्यूट ने महंगाई को लेकर आंकड़े जारी किए हैं, जिसमें बताया गया है कि खाद्यान्न वस्तुओं की कीमत में एक महीने में ही 15 प्रतिशत का इजाफा हुआ है। इसकी मुख्य वजह सब्जियों के दामों में बढ़ोत्तरी बताई जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रीलंका में 100 ग्राम मिर्च की कीमत जहां 18 (श्रीलंकाई) रुपए थी। वहीं अब ये बढ़कर 71 (श्रीलंकाई) रुपए हो गई है। यानी एक किलो मिर्च की कीमत 710 रुपए हो गई है। एक ही महीने में मिर्च की कीमत में 287 फीसदी का इजाफा हुआ है। वहीं बैंगन की कीमतों में 51%, लाल प्याज 40%, बींस, टमाटर के रेटों में 10 प्रतिशत इजाफा हुआ है। इसके साथ ही आलू 200 रुपए किलो मिल रहा है। लोग सूखे दूध तक को तरस गए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सब्जियों के दाम प्रति किलो (श्रीलंकाई रूपए में)</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>टमाटर —200 रुपए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बैंगन –160 रुपए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>भिंडी —200 रुपए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>करेला —160 रुपए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बींस —320 रुपए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>बंदगोभी— 240 रुपए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>गाजर —200 रुपए</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>कच्चा केला —120 रुपए</strong></li>
</ul>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 12 Jan 2022 12:03:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>लॉकडाउन में सब्जी के दाम औंधे मुंह गिरे</title>
                                    <description><![CDATA[Vegetable Prices | किसानों का दर्द है कि मुनाफा तो अब दूर की बात लखनऊ। लाकडाउन के दौरान सब्जियों के लगातार गिरते भाव ने गृहस्थ महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान ला दी है जबकि पहले से आर्थिक तंगी के शिकार किसानो की माली हालत दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। लखनऊ में आलू और […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/vegetable-prices-fell-in-lockdown-2/article-14827"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/black-marketing-vegetable1.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">Vegetable Prices | किसानों का दर्द है कि मुनाफा तो अब दूर की बात</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>लखनऊ।</strong> लाकडाउन के दौरान सब्जियों के लगातार गिरते भाव ने गृहस्थ महिलाओं के चेहरे पर मुस्कान ला दी है जबकि पहले से आर्थिक तंगी के शिकार किसानो की माली हालत दिन पर दिन बिगड़ती जा रही है। लखनऊ में आलू और प्याज के दाम फुटकर दुकानो में 15 रूपये प्रति किलो तक जा पहुंचे है वहीं हरी सब्जियां भी 10 से 12 रूपये और खीरा मात्र एक रूपये में बिक रहा है। लखनऊ के ग्रामीण इलाकों मे सैकड़ों किसान सब्जी उगा कर अपने परिवार का पेट पालते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मंडियों और बाजार के बंद होने से उनके सामने समस्या यह है कि खेतों मे तैयार सब्जियों की फसल को आखिर कहां बेंचे। किसानों का दर्द है कि मुनाफा तो अब दूर की बात है, सिंचाई का खर्च ही निकल आये तो ही बहुत है। लाकडाऊन से सब्जियों को खेतों से मंडियों तक.नहीं पहुंचा पा रहे हैं। आम दिनों मे इस समय लंबा आर्डर रहता था। होटल और रेस्टोरेंट के अलावा शादियों के कारण भी अच्छे भाव मिल जाते थे। राजधानी के मोहनलालगंज,सरोजनी नगर के गांव के सैंकड़ों किसान इस काम मे लगे हैं। मोहनलालगंज मे साप्ताहिक बाजार लाकडाऊन के कारण बंद करा दिया गया। बंदी के कारण जब सब्जी का संकट खडा हुआ तो प्रशासन ने एक बार फिर बाजार लगवाने की कोशिश की लेकिन भीड़ और सोशल डिसटेंसिंग का पालन नहीं हो पाने के कारण बाजार को फिर बंद करा दिया गया।</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2020 09:35:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टमाटर 60, 100 रुपये पहुंच गई भिंडी</title>
                                    <description><![CDATA[कालाबाजारी: दो दिन के अंदर ही सब्जियों के रेट तीन से चार गुणा बढ़ गए, अब इसे मजबूरी कहे या फिर बीमारी का डर, लोगों के सामाने महंगी दरों पर सब्जी खरीदना ही मजबूरी है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/tomato-reaches-rs-60-ladyfinger-reaches-rs-100/article-13864"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/black-marketing-vegetable.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">विडंबना। मजबूरी का फायदे उठा रहे कालाबाजारी करने वाले, तीन से चार गुणा बढे सब्जियों के रेट (Black marketing vegetable)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक (नवीन मलिक/सच कहूँ)।</strong> जनता कफ्यू के बाद सोमवार को फल-सब्जियों की मंडी खुली तो रेट सुनकर लोग हैरान हो गए। दो दिन के अंदर ही सब्जियों के रेट तीन से चार गुणा बढ़ गए, जिससे लोगों पर महंगाई की मार पड़ रही है। अब इसे मजबूरी कहे या फिर बीमारी का डर, लोगों के सामाने महंगी दरों पर सब्जी खरीदना ही मजबूरी है। एक तरफ तो प्रशासन दावा कर रहा है कि कालाबाजारी करने वालो के खिलाफ कड़ी कारवाई की जाएगी, लेकिन सब्जी आढ़तियों को किसी का कोई डर नहीं दिख रहा है। आढ़तियों का तो यहां तक कहना है कि स्थिति अगर यही रही तो दस गुणा तक सब्जियों के रेट बढ़ जाएंगे।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इसके पीछे कालाबाजारी व लोगों द्वारा स्टॉक एकत्रित करना है।</li>
<li style="text-align:justify;">स्थिति यह है कि 10 से 15 रुपए बिकने वाला आलू ही 40 रुपए पार कर गया है।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;">स्टॉक एकत्रित के चलते बढ़े है सब्जियों के रेट</h4>
<p style="text-align:justify;">भिंडी के रेट ने तो कमाल ही कर दिया और सौ रुपए जा पहुंचा है। इसी तरह टमाटर ने दामों ने भी महंगाई को छुआ और 10 रुपए से 60 रुपए जा पहुंचा। तीन दिन पहले 10 से 15 रुपए बिकने वाला आलू ही 40 रुपए जा पहुंचा। 30 रुपए बिकने वाली घिया भी 50 रुपए के करीब जा पहुंची। खरीददारों का कहना था कि आखिर करे तो क्या करें। अब प्याज से कुछ राहत मिली थी, लेकिन दो दिन के अंदर ही प्याज पुराने रेटों की तरफ जा पहुंचा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सोमवार को मंडियों में प्याज की कीमत 40 से 50 रुपए रही।</li>
<li style="text-align:justify;">शिमला मिर्च 50 से 70 रुपए, खीरा 15 से 40 रुपए, 8 रुपए मिलने वाली पालक भी 30 रुपए जा पहुंची है।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;">आढ़ती बोले-यही स्थिति रही तो बिगड़ जाएंगे हालात</h4>
<p style="text-align:justify;">सब्जी आढ़ती रामदास ने बताया कि कुछ व्यापारियों ने स्टॉक कर लिया है, जिसके कारण रेटों में बढ़ोतरी हुई है, अगर स्थिति यही रही और प्रशासन ने ध्यान नहीं दिया तो 10 गुणा तक सब्जियों के रेट बढ़ जाएगे। सब्जी व्यापारी महेन्द्र ने बताया कि बेल वाली सब्जियों की शुरूआत हुई थी और रेट भी काफी कम थे, लेकिन कोरोना वायरस के चलते दो दिन के अंदर ही 3 से 4 गुणा बढ़ोत्तरी हुई है। यहां तक बैंगन, घिया, गोभी भी बीस से 25 रुपए महंगी हुई है। सोमवार को मंडियों में खरीदारों की भीड़ उमड़ पड़ी थी और थोड़ी देर में सब्जियां हाथों हाथ बिकी है, लेकिन खरीददार महंगाई का रोना रो रहे हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">गृहणी पूजा, कोमल, कविता, अंजली, सोनिया, शीतल आदि ने बताया हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">पहले ही महंगाई ने बजट बिगाड़ रखा था।</li>
<li style="text-align:justify;">अब दो दिन के अंदर जो सब्जियों के रेटों में बढ़ोतरी हुई है।</li>
<li style="text-align:justify;">उससे बजट पूरी तरह से बिगड़ गया है।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;">परचून के सामान में भी बढ़ोतरी</h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">कोरोना वायरस को लेकर परचून के रेटों में भी दुकानदारों ने 10 से 20 रुपए बढ़ा दिए हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">अधिकतर दालों के रेटों में भी इजाफा किया है।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही आटे का रेट में भी चार से पांच रुपए बढ़ोतरी की है।</li>
<li style="text-align:justify;">लोगों की मांग है कि प्रशासन को इस और ध्यान देना चाहिए, ताकि लोग मजबूरी का फायदा न उठा सके।</li>
</ul>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Mar 2020 18:13:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>10 दिन के लिए दूध-सब्जी का इंतजाम कर लें शहरवासी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (संदीप कम्बोज)। अब तक आपने राजनीतिक या गैर राजनीतिक संगठनों के भारत या किसी राज्य के बंद के दौरान सिर्फ शहरों में ही बाजार बंद होते देखे होंगे, लेकिन अब गांवों में भी इसकी झलक देखने को मिलेगी। इस आंदोलन में न तो हिंसा होगी न बाजार बंद होंगे वो भी एक दिन या […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/townspeople-arrange-the-mile-and-vegetable-for-ten-days/article-3826"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/vegitable.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (संदीप कम्बोज)। </strong>अब तक आपने राजनीतिक या गैर राजनीतिक संगठनों के भारत या किसी राज्य के बंद के दौरान सिर्फ शहरों में ही बाजार बंद होते देखे होंगे, लेकिन अब गांवों में भी इसकी झलक देखने को मिलेगी। इस आंदोलन में न तो हिंसा होगी न बाजार बंद होंगे वो भी एक दिन या कुछ घंटों के लिए नहीं, बल्कि पूरे दस दिन तक गांव बंद रहेंगे। यदि 10 दिन तक गांव बंद रहते हैं तो शहरवासियों को समस्या आना लाजिमी है। तो इसलिए सभी शहरवासी आज व कल तक अगले 10 दिनों के लिए दूध, सब्जीयों व फलों आदि का इंतजाम कर लें क्योंकि बाद में उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करवाने समेत किसानों से जुड़े अनेक मुद्दों पर एक जून से देश भर में किसान संगठनों द्वारा शुरू किया जा रहा यह राष्ट्रव्यापी आंदोलन अपने आप में अनोखा होगा क्योंकि न ही तो गांवों के बाजार खुलेंगे और न ही शहरों में आवाजाही होगी। गांवों से शहरों को जाने वाले दूध, सब्जी, फलों की सप्लाई पूरी तरह से बंद कर दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में पहली बार होने जा जा रहे इस ‘गांव बंद’ आंदोलन को सफल बनाने को लेकर हर राज्य के किसान संगठनों ने एड़ी चोटी का जोर लगा रखा है। उल्लेखनीय है कि हाल ही चंडीगढ़ में देश के बड़े किसान संगठनों की बैठक हुई है, जिसमें किसानों की मांगों पर केन्द्र सरकार और राज्य सरकारों का ध्यान आकृष्ट करने के लिए एक से दस जून तक गांव बंद करने का फैसला लिया गया। इस फैसले के बारे में सभी राज्यों के किसान संघों द्वारा गांव-गांव, घर-घर जाकर किसानों को अवगत कराया जा रहा है। हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तर प्रदेश में भी एक से दस जून तक गांव बंद की तैयारियां चल रही हंै।</p>
<h3 style="text-align:justify;">केवल बाजार बंद, रोड जाम नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">गांव बंद के दौरान बाजार बंद रखे जाएंगे। किसी को परेशानी ना हो, इसके लिए सड़क व यातायात मार्ग नहीं रोका जाएगा। इस दौरान दूध-अनाज व सब्जियों की बिक्री बंद रखी जाएगी। शहरों से किसी भी तरह की खरीदारी नहीं की जाएगी। शीतल पेय पदार्थों का बहिष्कार किया जाएगा। इसके अलावा शहर से दवाइयों को छोड़ अन्य वस्तुओं की खरीद भी किसानों द्वारा नहीं<br />
की जाएगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">ट्विटर से शुरू हुई मुहिम जनआंदोलन में बदली</h4>
<p style="text-align:justify;">पूर्ण कर्जमाफी और फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लागत का डेढ़ गुना तय करने की मांगों को लेकर किसानों द्वारा एक जून से 10 जून तक बुलाए गए गांव बंद आंदोलन की शुरूआत सोशल साईट ट्विटर से हुई जो कि कुछ ही घंटों में टॉप ट्रेंडिंग में पहुंच गई। किसानों ने सबसे पहले ट्विटर पर ही ऐलान किया है कि पहली जून से दस जून तक ‘ग्राम बंद’ का आयोजन किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान गांव से शहर को दूध, सब्जी आदि की सप्लाई नहीं की जाएगी। इस मुहिम के लिए ट्विटर पर देशभर से लाखों युवा किसानों ने खूब ट्वीट किए हैं। किसान नेताओं ने ट्वीटर पर लिखा है कि केंद्र के साथ ही राज्य सरकारें किसानों की लगातार अनदेखी कर रही हैं। गांव बंद के दौरान किसान गांव में ही मौजूद रहेंगे, लेकिन इस दौरान दूध के साथ फल, सब्जियों और खाद्यान्न की बिक्री नहीं की जाएगी। किसानों ने ट्विटर पर फसलों की बबार्दी से जुड़ी अखबारों की खबरें और तस्वीरें भी पोस्ट की हैं। ट्वीट करने वालों में वेस्ट यूपी, मध्य प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, तमिलनाडु के किसान भी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>यह हैं किसानों की मुख्य मांगें</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करवाना</li>
<li style="text-align:justify;"> किसानों की कर्जा मुक्ति</li>
<li style="text-align:justify;"> सुनिश्चित आय</li>
<li style="text-align:justify;"> किसान सब्सिड़ी को बहाल करना</li>
<li style="text-align:justify;"> फसलों का उचित समर्थन मूल्य तय करवाना</li>
<li style="text-align:justify;"> सिंचाई की सुविधाएं बढ़ाई जाएं</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 May 2018 21:06:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>टमाटरों के बढ़े भाव से बिगड़ा सब्जी का जायका</title>
                                    <description><![CDATA[महंगाई: 15 रुपए किलो वाला टमाटर हुआ 60 रुपए किलो सरदूलगढ़(गुरजीत सिंह)। दिनो दिन बढ़ रही महंगाई ने लोगों का कंचूमर निकाल कर रख दिया है। इन दिनों में रोजमर्रा का प्रयोग में आने वाली वस्तुओं के भावा काफी तेज हो गई है। अन्य सब्जियों के साथ-साथ टमाटर के कुछ ही दिनों में चार गुणा तक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/economic-losses-to-vegetable-vendors/article-2120"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/tmatar.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">महंगाई: 15 रुपए किलो वाला टमाटर हुआ 60 रुपए किलो</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरदूलगढ़(गुरजीत सिंह)।</strong> दिनो दिन बढ़ रही महंगाई ने लोगों का कंचूमर निकाल कर रख दिया है। इन दिनों में रोजमर्रा का प्रयोग में आने वाली वस्तुओं के भावा काफी तेज हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अन्य सब्जियों के साथ-साथ टमाटर के कुछ ही दिनों में चार गुणा तक बढ़े भाव ने तो सब्जी का स्वाद ही बिगाड़ कर रख दिया है घरेलू ग्रहणियां टमाटरों आदि के बढ़े भाव कारण रसोई के बजट का संतुलन बनाकर रखने में असमर्थ हो रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी अनुसार पिछले दिनों में ही टमाटर के भाव में 45 रुपए प्रतिकिलो का विस्तार होने के कारण रिटेल दुकानदारों व रेहड़ियों वालों की लागत बढ़ गई जबकि लाभ कम हो गया है।</p>
<h2>सब्जी विक्रेताओं को हो रहा आर्थिक नुकसान</h2>
<p>दूसरी तरफ किसानों का कहना है कि मार्केट में आई तेजी से किसानों को कोई फायदा नहीं होता क्योंकि उनको उनकी फसल का सही भाव नहीं मिलता, जबकि सब्जियों के बढ़ भावों का सारा फायदा बड़े व्यापारी ले जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी सब्जी विक्रेता प्रेम कुमार का कहना है कि टमाटर में तेजी आने के कारण जहां दुकानदारों की लागतें बढ़ गई हैं वहीं रिटेल दुकानदारों के मुनाफे भी कम हो गए हैं व टमाटर की बिक्री पर भी प्रभाव पड़ा है,</p>
<p style="text-align:justify;">जिस कारण उनको आर्थिक नुक्सान भी उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि टमाटर का उपयोग हर सब्जी में किया जाता है और यह लाना पड़ता है परंतु बिक्री न होने के कारण शाम को खराब हो जाता है, जिस कारण दुकानदारों व रेहड़ी वालों को आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">रास्ते बंद होने के कारण आई तेजी</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी जब सब्जी मंडी के आढ़तियों ब्रिज लाल अरोड़ा से सम्पर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि कई क्षेत्रों में अधिक बरसात होने से रास्ते बंद होने के कारण टमाटरों सहित अन्य सब्जियों अधिक न आने कारण भाव में तेजी आई है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सब्जियों में टमाटर के इस्तेमाल में होने लगी कमी : कौंसलर</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंधी में कौंसलर तेजा सिंह सेवानिवृत कैप्टन का कहना है कि इस महंगाई से रसोई का सारा बजट बिगड़ गया है उन्होंने कहा कि कुछ दिनों में ही टमाटर जो 10 से 15 रुपए के दरमियान प्रति किलो मिल रहा था उसकी आज कीमत 60 रुपए किलो हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि टमाटर का उपयोग तकरीबन हर सब्जी में किया जाता है, जिस कारण टमाटर महंगा होने से जहां टमाटर का कम इस्तेमाल होने लगा है वहीं कई सब्जियों में मजबूरी बस अमचूर डालना पड़ता है। महंगे हुए टमाटरों ने सब्जी का स्वाद बिगाड़ दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jul 2017 01:23:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>हिमाचल प्रदेश की महंगी सब्जियां खाने को मजबूर पंजाब निवासी</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश कारण सब्जियां हुई खत्म, आने वाले दिनों में भाव और बढ़ने के आसार संगरूर (गुरप्रीत सिंह)। पंजाब में इन दिनों लोक्ल सब्जियों का काल पड़ने के कारण लोगों को मजबूरन दूसरे राज्यों से आ रही सब्जियां महंगे भाव पर खरीद कर खाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ज्यादातर शहरों में जो सब्जियां […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/punjab-residents-forced-to-eat-expensive-vegetables-in-himachal-pradesh/article-2041"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/vagitable-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">बारिश कारण सब्जियां हुई खत्म, आने वाले दिनों में भाव और बढ़ने के आसार</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर (गुरप्रीत सिंह)।</strong> पंजाब में इन दिनों लोक्ल सब्जियों का काल पड़ने के कारण लोगों को मजबूरन दूसरे राज्यों से आ रही सब्जियां महंगे भाव पर खरीद कर खाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्यादातर शहरों में जो सब्जियां आ रही है, उनमें मुख्य तौर पर हिमाचल प्रदेश से ही आ रही हैं, जिस कारण आने वाले दिनों में सब्जियों के भाव और बढ़ने के आसार हैं। पंजाब के विभिन्न शहरों में इन दिनों सब्जियों के भाव आसमान को छू रहे हैं, जिसका कारण गत दिनों हुई बारिश है।</p>
<p style="text-align:justify;">शहर के सुनामी गेट स्थित सब्जी मंडी में सब्जी व फ्रूट का काम करने वाले मुकेश कुमार ने बताया कि वैसे तो सभी सब्जियों के भाव दोगुणा हो गए हैं, परंतु सबसे अधिक टमाटर महंगा हुआ है। पिछले सप्ताह टमाटर का भाव 20 रुपये था, जो अब बढ़ कर 50 से 60 तक पहुंच गयाहै। चार से पांच रुपये किलो बिकने वाला कद्दू 30 रुपये किलो तक पहुंच गया है,</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि गोभी व बैंगन अपने पुराने भाव पर टिके हुए हैं। भिंडी दस रुपये से 20 रुपये किलो, करेला 10 रुपये से 30 रुपये तक पहुंच गया है। हालांकि आलू व प्याज दोनों अपने पुराने भाव 10 से 15 रुपये किलो के हिसाब से ही बिक रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि गत सप्ताह 5 से 10 रुपये किलो बिकने वाली गोभी अब 30 रुपये किलो, 40 रुपये विकने वाला मटर अब 120 रुपये किलो के हिसाब से बिक रहा है। सलाद के तौर पर प्रयोग में आने वाला खीरा व तर (ककड़ी) के भाव भी 10 रुपये से उछल कर 30 रुपये किलो तक पहुंच गए हैं। इसके अतिरिक्त धनिया भी 50 रुपये से बढ़ कर 100 रुपये किलो तक जा पहुंचा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं आम लोग</h2>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में शहर निवासी हरजिन्द्र सिंह, मुकेश कुमार व नत्थू लाल ने कहा कि सब्जियों के भाव बढ़ने के कारण वह गत कईदिनों से खाने में सिर्फ दाल तक ही सीमित हैं। आम दिनों में 5 रुपये किलो बिकने वाला कद्दू आज 30 रुपये किलो बिक रहा है, जिसे खरीदना आम लोगों के वश से बाहर की बात है। सरकार को चाहिए कि सब्जियों के भाव कंट्रोल रखने के लिए इस तरफ ध्यान दें।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कैसे बढ़े सब्जियों के भाव</h2>
<p style="text-align:justify;">सब्जियों के भाव में अचानक आई तेजी संबंधी सब्जी व्यापारी राज कुमार अरोड़ा, जो कि सब्जी मंडी संगरूर के अध्यक्ष भी हैं, ने बताया कि गत दिनों हुई बारिश कारण लोक्ल सब्जियां लगभग खत्म हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज शहरों में जो सब्जियां आ रही है, वह सभी हिमाचल प्रदेश से आ रही हैं। इस समय सिर्फ हिमाचल से ही सब्जियां आने के कारण भाव में तेजी आई है। उन्होंने बताया कि इन दिनों गर्मी अधिक होने के कारण भी लोक्ल सब्जियां न के बराबर होती हैं। हिमाचल में भी अधिक बारिश होने के कारण आने वाले दिनों में सब्जियों के भाव में और तेजी आने की संभावना है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Thu, 06 Jul 2017 23:21:18 +0530</pubDate>
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