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                <title>वसुंधरा राजे को सुप्रीम कोर्ट का झटका, पूर्व सीएम को नहीं मिलेंगी सुविधाएं</title>
                                    <description><![CDATA[बंगला करना पड़ेगा खाली, अन्य सुविधाओं पर भी रोक | Vasundhara Raje राजस्थान सरकार की एसएलपी को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज Edited By Vijay Sharma नई दिल्ली(एजेंसी)। (Vasundhara Raje ) सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सुविधाएं नहीं मिलने के राजस्थान हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>बंगला करना पड़ेगा खाली, अन्य सुविधाओं पर भी रोक | Vasundhara Raje</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>राजस्थान सरकार की एसएलपी को सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज</strong></li>
</ul>
<h5>Edited By Vijay Sharma</h5>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> <strong>(Vasundhara Raje )</strong> सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को आजीवन सुविधाएं नहीं मिलने के राजस्थान हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा है। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को राजस्थान सरकार  की एसएलपी को खारिज कर दिया। राजस्थान सरकार ने  हाइकोर्ट के 4 सितंबर 2019 के फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में स्पेशल लीव पिटिशन (एसएलपी) दायर की थी। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए राजस्थान हाइकोर्ट के फैसले को बरकरार रखा। साथ ही कहा कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के दखल देने का कोई आधार नहीं दिख रहा है। इसके चलते एसएलपी को खारिज किया जाता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">हाइकोर्ट ने यह दिया था फैसला |Vasundhara Raje</h2>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान हाइकोर्ट ने मिलापचंद डांडिया की याचिका पर राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन अधिनियम 2017 को असंवैधानिक व शून्य करार दिया था। इसके तहत सरकार को पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली सुविधाओं को वापस लेना था। इसके चलते पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिलने वाली आजीवन बंगला, टेलीफोन, कार-ड्राइवर, स्टॉफ समेत अन्य सुविधाओं पर रोक लग गई थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">राजे और पहाडिय़ा होंगे प्रभावित</h2>
<p style="text-align:justify;">सुप्रीम कोर्ट के फैसले का राजस्थान की पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और जगन्नाथ पहाडिय़ा पर असर पड़ेगा। फिलहाल दोनों नेताओं को पूर्व मुख्यमंत्री की सुविधाएं राजस्थान सरकार की ओर से दी जा रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भाजपा सरकार ने पारित किया था विधेयक</h2>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान में भाजपा की तत्कालीन सरकार के दौरान राजस्थान मंत्री वेतन अधिनियम 1956 में संशोधन कर राजस्थान मंत्री वेतन संशोधन नियम 2017 के तहत बंगला टेलीफोन समेत कई सुविधाएं पूर्व मुख्यमंत्रियों को देने का विधेयक विधानसभा में पारित किया गया था। इसके मुताबिक पूर्व मुख्यमंत्री को एक सरकारी बंगला, कार, पूर्व सीएम या उनके परिवार के लिए राजस्थान प्रशासनिक सेवा के अधिकारी को बतौर निजी सचिव नियुक्त करने सहित नौ कर्मचारियों का स्टाफ शामिल है।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jan 2020 13:13:15 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाकिस्तान को फिर झटका, आतंक पर व्यापार की चोट</title>
                                    <description><![CDATA[यह उचित है कि भारत ने पाकिस्तान के साथ जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के जरिए उस पार से होने वाले सभी तरह के व्यापार को स्थगित कर दिया है। भारत ने यह कठोर कदम तब उठाया जब उसके संज्ञान में आया कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में बैठे हुए कुछ अराजक तत्व अवैध हथियारों, मादक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/shock-pakistan-again/article-8739"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-04/pakisthan.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यह उचित है कि भारत ने पाकिस्तान के साथ जम्मू-कश्मीर में नियंत्रण रेखा (एलओसी) के जरिए उस पार से होने वाले सभी तरह के व्यापार को स्थगित कर दिया है। भारत ने यह कठोर कदम तब उठाया जब उसके संज्ञान में आया कि पड़ोसी देश पाकिस्तान में बैठे हुए कुछ अराजक तत्व अवैध हथियारों, मादक पदार्थों और जाली करंसी भेजने के लिए इस व्यापार मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं। कोई भी देश बर्दाश्त नहीं कर सकता कि उसका पड़ोसी व्यापार के बहाने आतंकवाद की सप्लाई करे। उल्लेखनीय है कि एलओसी व्यापार अभी बारामूला जिले के उरी के सलामाबाद में और पुंछ जिले के चकन-दा-बाग में दो व्यापार केंद्रों से संचालित होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह व्यापार सप्ताह में चार दिन होता है और यह वस्तु विनिमय प्रणाली और शुल्क मुक्त पर आधारित होती है। भारत के इस कदम से पाकिस्तान को करारा झटका लगा है। ध्यान देना होगा कि भारत ने अफगानिस्तान के जरिए भी पाकिस्तान को करारा झटका दिया है। इससे पाकिस्तान का आर्थिक नुकसान होना तय है। एक वक्त था जब पाकिस्तान-अफगानिस्तान दोनों पड़ोसी देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार तकरीबन 5 अरब डॉलर था जो अब घटकर डेढ़ अरब डॉलर पर आ गया है। इसकी सबसे बड़ी वजह ईरान का चाबहार पोर्ट है जिसको भारत के सहयोग से बनाया गया है। दरअसल चारों तरफ से जमीन से घिरे अफगानिस्तान तक सीधी पहुंच देने में पाकिस्तान आनाकानी करता था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका तोड़ निकालने के लिए भारत ने ईरान के रास्ते अफगानिस्तान सामान भेजने का फैसला किया है। इसके लिए भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट में अरबों रुपए का निवेश किया और ईरान से अफगानिस्तान तक सड़क मार्ग का भी निर्माण कराया। चाबहार के आकार लेने से पाकिस्तान का आर्थिक नुकसान बढ़ गया है और अब एलओसी पर व्यापार पर प्रतिबंध लगने से उसकी कमर टूटनी तय है। गौरतलब है कि भारत एलओसी व्यापार के रास्ते पाकिस्तान को चीनी, तेल, केक, पेट्रोलियम आॅयल, टायर, रबड़, कॉटन, कालीन, गलीचा, शॉल और स्टोल, नामदा, गब्बा, केमिकल, स्टेपल फाइबर जैसे औद्योगिक कच्चे माल एवं चाय तथा नमक जैसे घरेलू उत्पादों का निर्यात करता है। इन वस्तुओं के निर्यात से न केवल पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को गति मिलती है बल्कि पाकिस्तानी उपभोक्ताओं को ये वस्तुएं सस्ते दामों में मिल जाती हैं। इसके अलावा एलओसी के रास्ते व्यापार से पाकिस्तान के लाखों लोगों को रोजगार भी प्राप्त होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत द्वारा एलओसी व्यापार पर प्रतिबंध लगने से अब पाकिस्तानी उत्पादों की कीमत बढ़नी तय है और साथ ही महंगाई भी आसमान छूएगी। वैसे भी गौर करें तो भारत के इस सख्त कदम से भारत की आर्थिक सेहत पर बहुत प्रतिकूल असर नहीं पड़ने वाला है। अगर भारत-पाकिस्तान व्यापर पर नजर दौड़ाएं तो पाकिस्तान को होने वाला निर्यात भारत के कुल निर्यात का बहुत छोटा हिस्सा है। आंकड़ों पर गौर करें तो भारत के कुल निर्यात का महज 0.83 प्रतिशत पाकिस्तान को जाता है जबकि पाकिस्तान से हमारा आयात कुल आयात का 0.13 प्रतिशत है। गत वित्त वर्ष में दोनों देशों के बीच 2.67 अरब डॉलर का वस्तु व्यापार हुआ जिसमें निर्यात 2.17 अरब डॉलर तथा आयात 50 करोड़ डॉलर रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के कारोबारी पाकिस्तान की तुलना में छ: गुना तक पाक को निर्यात करते हैं। ध्यान दें तो गत वर्ष भारत ने पाकिस्तान से तरजीही राष्ट्र का दर्जा छीन लिया है और भारत की आर्थिक सेहत पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। लेकिन पाकिस्तान पर उसका असर साफ दिखने लगा है। बाजार के विश्लेषकों की मानें तो भारत द्वारा निर्यात रोके जाने से पाकिस्तान के बाजारों में दैनिक उत्पादों की कीमत बढ़ गयी है। उदाहरण के लिए दूध की कीमत 150 रुपए प्रति लीटर से ऊपर पहुंच गयी है। पाकिस्तान के टेक्सटाइल्स मिलों और औद्योगिक कल-कारखानों के पहिए थमने लगे हैं। ध्यान देना होगा कि अभी तक भारत द्वारा पाकिस्तानी मिलों को सस्ते दामों पर कॉटन उपलब्ध कराया जाता रहा है जिसकी वजह से उसके रेडिमेड उत्पाद अंतर्राष्ट्रीय बाजार में टिके हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन तरजीही राष्ट्र का दर्जा छीने जाने के बाद पाकिस्तान की हालत पतली हो गयी है और अब टेक्सटाइल्स मामले में उसका अंतर्राष्ट्रीय बाजार में टिके रहना मुश्किल हो गया है। सर्जिकल और एयर स्ट्राइक के बाद भी वह भारत विरोधी हरकतों से बाज नहीं आ रहा है। उचित तो यह रहा होता कि भारत एलओसी पर व्यापार प्रतिबंध कदम उसी समय उठा लिया होता जब पाकिस्तान से तरजीही राष्ट्र का दर्जा छीना गया। अब तक पाकिस्तान घुटने के बल होता। ध्यान देना होगा कि जब तक पाकिस्तान आर्थिक रुप से कमजोर नहीं होगा तब तक वह भारत विरोधी गतिविधियों में लगा रहेगा। अकसर देखा जाता है कि भारत में जब भी चुनाव होता है पाकिस्तान अराजक और अलगाववादी तत्वों के जरिए विशेष रुप से जम्मू-कश्मीर में चुनावी प्रक्रिया को बाधित करने का प्रयास करता है। उसका काम जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी संगठनों द्वारा किया जाता है। गौर करें तो इस समय देश में चुनाव चल रहा है। जम्मू-कश्मीर समेत देश के सभी राज्यों में चुनाव के दो चरण पूरे हो चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले दो चरणों में देखा भी गया कि जम्मू-कश्मीर के अराजक व अलगाववादी तत्व किस तरह चुनाव के दिन पत्थरबाजी कर मतदाताओं को डराने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन अच्छी बात यह रही कि जम्मू-कश्मीर के मतदाता बगैर डर-भय के मतदान केंद्रों पर जमे रहे और लोकतंत्र में अपनी आस्था जतायी। यह अलगाववादियों और अराजक तत्वों के मुंह पर करारा तमाचा है। अच्छी बात यह है कि सुरक्षा एजेंसियों ने आमचुनाव से पहले ही जम्मू-कश्मीर के अलगाववादी संगठनों के शीर्ष नेताओं को धर दबोचा है लिहाजा उन्हें चुनाव में बाधा उत्पन्न करने का मौका नहीं मिला। उम्मीद है कि एलओसी के जरिए व्यापार स्थगित होने के बाद जम्मू-कश्मीर में जो अराजक तत्व पाकिस्तानी फंडिंग के दम पर उत्पात मचाए हुए थे उन पर नकेल कसेगी और मतदान भी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विपक्षी दल सरकार की चाहे जितनी भी आलोचना करें लेकिन सच तो यह है कि केंद्र सरकार का यह कदम देर से ही सही पर दुरुस्त है। विपक्षी दलों द्वारा इसमें मीन-मेख नहीं ढूंढ़ना चाहिए। उन्हें ध्यान देना चाहिए कि आखिर सेना द्वारा आॅल आउट मिशन चलाए जाने के बाद भी आतंकी और अलगाववादी तत्वों की तादाद में कमी क्यों नहीं आ रही है? उम्मीद है कि एलओसी पर व्यापार प्रतिबंध लगने से अब अलगाववादियों और अराजक तत्वों के लिए पहले जैसी अनुकूल स्थिति नहीं रहेगी। ध्यान देना होगा कि भारत सरकार ने यह कदम तब उठाया है जब भारतीय सुरक्षा एजेंसियों द्वारा आगाह किया गया है कि पड़ोसी देश पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में एलओसी पर सलामाबाद और चक्का दा बाग के जरिए व्यापार की आड़ में घातक हथियारों की सप्लाई कर रहा है। इस रास्ते से आतंकी भी प्रवेश कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">क्या इससे साबित नहीं होता कि पाकिस्तान भारत विरोधी हरकतों में लगा हुआ है? लेकिन यहां दुर्भाग्यपूर्ण तथ्य यह है कि कुछ राजनीतिक दल विशेष रुप से कांग्रेस, नेशनल कांफ्रेंस और पीडीपी केंद्र सरकार के इस साहसिक कदम की आलोचना कर रहे हैं। उनकी नजर में यह कदम महज चुनावी हथकंडा मात्र है। सच कहें तो इन राजनीतिक दलों ने इस तरह का आरोप जड़कर एक किस्म से अलगाववादी व आतंकी संगठनों सहित दुश्मन देश पाकिस्तान को क्लीन चिट देने का काम कर रहे हैं। यह ठीक नहीं है। इससे भले ही उनकी राजनीति सध रही हो लेकिन वे देश की संप्रभुता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ ही कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>अरविंद जयतिलक </strong></p>
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                <pubDate>Sat, 27 Apr 2019 09:10:56 +0530</pubDate>
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                <title>उपचुनाव परिणाम भाजपा की उम्मीदों को झटका</title>
                                    <description><![CDATA[गत 3 नवम्बर को हुए कर्नाटक उपचुनावों में भाजपा की उम्मीदों को जबरदस्त झटका लगा है। तीन लोकसभा और दो विधानसभा सीटों पर हुए इन उपचुनावों में कांग्रेस-जेडीएस 4 सीटों पर जबकि भाजपा केवल एक सीट पर विजय पताका लहराने में सफल हो सकी। अगले वर्ष होने जा रहे लोकसभा चुनावों और चंद दिनों के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/bye-election-results-shock-the-bjps-hopes/article-6552"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/bye-election-results-shock-the-bjps-hopes-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गत 3 नवम्बर को हुए कर्नाटक उपचुनावों में भाजपा की उम्मीदों को जबरदस्त झटका लगा है। तीन लोकसभा और दो विधानसभा सीटों पर हुए इन उपचुनावों में कांग्रेस-जेडीएस 4 सीटों पर जबकि भाजपा केवल एक सीट पर विजय पताका लहराने में सफल हो सकी। अगले वर्ष होने जा रहे लोकसभा चुनावों और चंद दिनों के भीतर हो रहे पांच विधानसभा चुनावों के मद्देनजर भाजपा के लिए यह एक बड़ा आघात है। हालांकि उपचुनावों का असर इतना व्यापक नहीं माना जाता किन्तु पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उपचुनावों के परिणामों को कमतर भी नहीं आंका जा सकता। प्रतिष्ठा की लड़ाई बन चुके कर्नाटक उपचुनाव में कांग्रेस-जेडीएस को मिली बम्पर जीत को दिवाली बोनस बताया जा रहा है, वहीं गठबंधन के इस बेहतरीन प्रदर्शन से भाजपा के लिए मुश्किल हालात पैदा हो गए हैं। भाजपा केवल अपनी ही शिमोगा सीट को बरकरार रखने में सफल रही है लेकिन उसे भाजपा का गढ़ मानी जाने वाली दूसरी लोकसभा सीट बेल्लारी गंवानी पड़ी और विधानसभा की दोनों सीटों पर भी हार का मुंह देखना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;">1999 में सोनिया गांधी ने भाजपा की सुषमा स्वराज को बेल्लारी में परास्त किया था किन्तु 2004 के लोकसभा चुनाव में भाजपा कांग्रेस से यह सीट छीनने में सफल रही थी और तभी से वह इस सीट पर काबिज थी लेकिन पूरे 14 साल बाद कांग्रेस अब भाजपा यह किला ढ़हाने में सफल हो गई है, इसलिए कांग्रेस की यह एक बड़ी सफलता मानी जा रही है। इससे एक ओर जहां कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन की सफलता पर मोहर लगी है, वहीं भाजपा के घटते प्रभाव का भी स्पष्ट संकेत मिलता है। मांडया लोकसभा सीट पर जनता दल (एस) उम्मीदवार ने जीत दर्ज की और दो विधानसभा सीटों जमखंडी तथा रामनगरम पर भी क्रमश: कांग्रेस व जेडीएस अपना कब्जा बरकरार रखने में सफल रहे। बता दें कि 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को कर्नाटक की कुल 28 सीटों में से 17 सीटों पर जीत हासिल हुई थी जबकि कांग्रेस को 9 तथा एच डी कुमारस्वामी की जेडीएस को 2 सीटें मिली थी। फिलहाल जिन पांच सीटों पर उपचुनाव हुए, उनमें से 4 सीटें इस्तीफा दिए जाने के कारण और एक सीट विधायक के निधन के बाद खाली हुई थी। जामखंडी सीट से कांग्रेस विधायक सिद्दू न्यामगौड़ा का निधन हो गया था जबकि रामनगरम सीट सीएम कुमारस्वामी के इस्तीफे के बाद, बेल्लारी सीट भाजपा के श्रीमुलु, शिमोगा सीट भाजपा के बी एस येदियुरप्पा तथा मांडया सीट कांग्रेस के सी एस पुद्दाराजू के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बेल्लारी लोकसभा क्षेत्र खनन उद्योग के विवादित रेड्डी बंधुओं का मजबूत गढ़ माना जाता है, जहां कांग्रेस उम्मीदवार वी एस उगरप्पा ने भाजपा प्रत्याशी जे. शांता को 243161 मतों के बड़े अंतर से पराजित किया जबकि मांड्या लोकसभा सीट पर जेडीएस के एल आर शिवरामेगौड़ा ने रिकॉर्ड 324943 वोटों के अंतर से भाजपा उम्मीदवार को हराकर बाजी मारी। शिमोगा लोकसभा सीट भाजपा के दिग्गज नेता बी एस येदियुरप्पा का गढ़ मानी जाती है, जहां उन्हीं के पुत्र भाजपा प्रत्याशी बीवाई राघवेंद्र जेडीएस के मधु बंगारप्पा को 52148 वोटों के अंतर से हराने में सफल रहे। रामनगरम विधानसभा सीट से मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की पत्नी अनिता कुमारस्वामी जबकि जामखंडी विधानसभा सीट से कांग्रेस के आनंद सिद्दू न्यामागौड़ा ने भाजपा प्रत्याशियों को परास्त कर शानदार जीत दर्ज की।</p>
<p style="text-align:justify;">इन परिणामों से कर्नाटक में तो कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन को मजबूत बनाने में मदद मिलेगी ही, 2019 के आम चुनावों के लिए भी गठबंधन को नई ऊर्जा मिलने की संभावनाएं जताई जाने लगी हैं। लोकसभा चुनाव से पहले गठबंधन की ताकत, गठबंधन की पार्टियों का आपसी तालमेल और जनता पर गठबंधन की राजनीति का असर भी देखने को मिला है, जो आने वाले दिनों में कांग्रेस के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकता है। राजनीतिक हलकों में कयास लगाए जाने लगे हैं कि आगामी लोकसभा चुनावों के दौरान गठबंधन की राजनीति को और आगे बढ़ाने में कांग्रेस को अब अपेक्षित मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री कुमारस्वामी तो उपचुनावों में जीत के बाद कह भी चुके हैं कि लोकसभा चुनाव भी दोनों पार्टियां मिलकर लड़ेंगी। उपचुनावों में हालांकि बेल्लारी को छोड़कर शेष सभी चारों सीटों पर भाजपा, कांग्रेस व जेडीएस ने पूर्ववत पकड़ बनाए रखी है लेकिन पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों के चुनावी माहौल में कर्नाटक में कुल पांच में से चार सीटों पर भाजपा का हार जाना उसके लिए अच्छा संकेत नहीं माना जा सकता। उपचुनाव परिणामों ने भाजपा की विधानसभा में ताकत बढ़ाने की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। उपचुनाव के बाद 224 सदस्यीय कर्नाटक विधानसभा में कांग्रेस-जेडीएस के विधायकों की संख्या अब 120 हो गई है जबकि भाजपा के पास कुल 104 विधायक हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">निश्चित रूप से कांग्रेस अब इन परिणामों को आसन्न चुनावों में अपने पक्ष में भुनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ेगी किन्तु भाजपा के लिए यह एक बड़ी चेतावनी है और चुनाव परिणामों के बाद कर्नाटक में पार्टी के वरिष्ठतम नेता बी एस येदियुरप्पा ने भाजपा की स्थिति स्पष्ट भी कर दी है कि नतीजे भाजपा के लिए चेतावनी है और पार्टी को सही दिशा में काम करने की जरूरत है। बीते कुछ सालों में विभिन्न राज्यों में हुए उपचुनावों में अधिकांश में नतीजे भाजपा के पक्ष में नहीं रहे हैं। पिछले साढ़े चार वर्षों में भाजपा को 10 चुनावों में पराजय का मुंह देखना पड़ा है। कर्नाटक उपचुनाव में तो पराजय का सामना करने के बाद भाजपा के माथे पर चिंता की लकीरें उभरना स्वाभाविक ही है क्योंकि चंद ही दिनों में पांच राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना में विधानसभा चुनाव होने हैं और कर्नाटक उपचुनावों के नतीजों का कुछ असर तो इन विधानसभा चुनावों पर भी पड़ना तय माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, कर्नाटक के नतीजों से एक बात तो साफ हो गई है कि कांग्रेस अगर भाजपा विरोधी दलों के साथ गठबंधन के अपने प्रयत्नों में सफल हो जाती है तो आम चुनावों में वह भाजपा पर भारी पड़ सकती है और उपचुनाव के नतीजों के बाद महागठबंधन की सोयी हुई उम्मीदों को फिर बल मिलने लगा है। भाजपा के लिए चिंता की स्थिति इसलिए भी बनती जा रही है कि जिन मुद्दों को लेकर कांग्रेस को घेरते हुए देशभर में कांग्रेस विरोधी माहौल बनाकर उसने 2014 का लोकसभा चुनाव जीता था, आज वही मुद्दे उसके गले की फांस बनते जा रहे हैं। आतंकवाद, पाकिस्तान, महंगाई, पैट्रोल-डीजल व रसोई गैस की कीमतें, किसानों की समस्याएं, भ्रष्टाचार इत्यादि जिन मुद्दों को लेकर पिछले चुनाव में भाजपा आक्रामक थी, भाजपा नेताओं के उन्हीं पुराने बयानों को लोग अब सोशल मीडिया पर वायरल कर पार्टी से सवाल पूछ रहे हैं कि इन सभी मुद्दों का क्या हुआ और भाजपा की विड़म्बना यह है कि उसके पास साढ़े चार साल सत्ता में रहने के बावजूद इनमें से किसी भी सवाल का कोई स्पष्ट जवाब नहीं है। अब देखना होगा कि भाजपा इस नुकसान की पूर्ति के लिए किस प्रकार की रणनीति बनाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>योगेश कुमार गोयल</strong></em></p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 10 Nov 2018 11:44:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केंद्रिय कर्मचारियों को झटका, ओवरटाइम भत्ता बंद</title>
                                    <description><![CDATA[ सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप फैसला Central, Employees, Shock, Over Time, Allowance, Closes नई दिल्ली (एजेंसी) । केंद्र सरकार ने परिचालन कर्मियों (ऑपरेशनल स्टाफ) को छोड़कर अपने बाकी कर्मचारियों का ओवरटाइम भत्ता बंद करने का फैसला किया है।कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मद्देनजर यह कदम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/central-employees-shock-overtime-allowance-closes/article-4528"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/center-news.jpg" alt=""></a><br /><h2> सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के अनुरूप फैसला</h2>
<h1>Central, Employees, Shock, Over Time, Allowance, Closes</h1>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी) ।</strong> केंद्र सरकार ने परिचालन कर्मियों (ऑपरेशनल स्टाफ) को छोड़कर अपने बाकी कर्मचारियों का ओवरटाइम भत्ता बंद करने का फैसला किया है।कार्मिक मंत्रालय द्वारा जारी आदेश के मुताबिक, सातवें वेतन आयोग की सिफारिशों के मद्देनजर यह कदम उठाया गया है। यह आदेश भारत सरकार के सभी मंत्रालयों, विभागों, उनसे संबद्ध और अधीन आने वाले कार्यालयों पर लागू होगा परिचालन कर्मियों में ऐसे सभी गैर-मंत्रालयी अराजपत्रित केंद्रीय कर्मी शामिल हैं जो सीधे तौर पर कार्यालयों के सुचारू संचालन में शामिल हैं। इनमें वे कर्मी भी शामिल हैं जिन पर विद्युत और यांत्रिक उपकरणों के संचालन की जिम्मेदारी है।</p>
<h2>कर्मियों की सूची तैयार करने का आदेश</h2>
<h1>Central, Employees, Shock, Over Time, Allowance, Closes</h1>
<p>मंत्रालयों एवं विभागों की संबंधित प्रशासनिक शाखा को सभी परिचालन कर्मियों की सूची तैयार करने का आदेश दिया गया है। इसमें किसी श्रेणी विशेष के कर्मचारियों को परिचालन कर्मियों की सूची में शामिल करने का कारण भी बताना होगा। सरकार ने ओवरटाइम प्रदान करने के लिए इसे बायोमेट्रिक अटेंडेंस से जोड़ने का फैसला भी किया है। इसके अलावा ओवरटाइम की दरों को संशोधित भी नहीं किया जाएगा। इसका भुगतान 1991 में जारी आदेश के मुताबिक ही किया जाएगा।</p>
<h2>फैसले को लेकर कर्मचारियों को रोष बढ़ने लगा</h2>
<p>केन्द्रिय कर्मचारियों को  ओवरटाइम का भुगतान तभी किया जाएगा जबकि संबंधित कर्मचारी को उसके वरिष्ठ अधिकारी ने किसी अत्यावश्यक कार्य के लिए लिखित में कार्यालय में अतिरिक्त समय तक रुकने का आदेश दिया हो।यदि कर्मचारी अपनी मर्जी से कार्य करता है उसका कोई भुगतान नहीं किया जाएगा। सरकार के इस फैसले को लेकर कर्मचारियों को रोष बढ़ने लगा है इसके साथ ही उनकी मुसिबतें भी बढ़ जाएंगी।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Jun 2018 09:02:28 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मजदूरों से भरी बस में करंट 20 मजदूर झुलसे</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर (एजेंसी)। राजस्थान के भरतपुर जिले के भुसावर में आधी रात के बाद मजदूरों से भरी बस के हाईपावर बिजली के तारों से छु जाने के कारण उसमें करंट प्रवाहित होने से बीस से ज्यादा मजदूर घायल हो गये। बस में करंट लगने से वहां हाहाकार मच गया और मजदूरों में हंडकप मच गया। घायलों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/electricity-shock-20-laborers-injuried-bus/article-4012"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/bus.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (एजेंसी)। </strong>राजस्थान के भरतपुर जिले के भुसावर में आधी रात के बाद मजदूरों से भरी बस के हाईपावर बिजली के तारों से छु जाने के कारण उसमें करंट प्रवाहित होने से बीस से ज्यादा मजदूर घायल हो गये। बस में करंट लगने से वहां हाहाकार मच गया और मजदूरों में हंडकप मच गया। घायलों में महिलाएं और बच्चे भी शामिल है। बस में झुलसे मजदूरों को स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया गया जिसमें से पांच लोगों की हालत गंभीर बनी हुयी है। हादसे के बाद मौके पर पहुचें ग्रामीणों और पुलिस ने बचाव व राहत कार्य करते हुये बस में फंसे मजदूरों को बाहर निकाला। हादसे के बाद वहां भुसावर, बैर और हेलेना से मंगायी गयी एम्बुलेंसों से मजदूरों को अस्पताल पहुंचाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">हादसे की जानकारी मिलते ही वरिष्ठ प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंच गये और बिजली बंद कराकर प्रभावितों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस के अनुसार उत्तर प्रदेश के पीलीभीत के 50 से अधिक मजदूर दौसा के महुआ तहसील में एक ईंट भट्टे पर काम करते है तथा बस से अपने गांव जा रहे थे। पुलिस के अनुसार बस सड़क के किनारे दोनों तरफ झुल रहे तारों की चपेट में आ गयी जिससे बस में करंट फैल गया। पुलिस ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दी है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 07 Jun 2018 13:15:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कम पैसों में मिले सफर सुविधा तो कोई ज्यादा पैसे क्यों दे</title>
                                    <description><![CDATA[संकटनिजी बसों के सस्ते सफर कारण पीआरटीसी की आमदन में ईजाफा मुश्किल भटिंडा (अशोक वर्मा)। भटिंडा क्षेत्र में निजी बस मालिकों द्वारा सस्ते में सफर करवाने की चलाई गुप्त योजना ने पीआरटीसी को रगड़े लगाने का इंतजाम कर दिया है। माना जा रहा था कि किराया बढ़ने से पीआरटीसी की आमदन बढ़ेगी, किन्तु इस योजना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/booking-of-bathinda-depot-felt-shock/article-1452"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/prtc.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">संकटनिजी बसों के सस्ते सफर कारण पीआरटीसी की आमदन में ईजाफा मुश्किल</h2>
<p><strong>भटिंडा (अशोक वर्मा)।</strong> भटिंडा क्षेत्र में निजी बस मालिकों द्वारा सस्ते में सफर करवाने की चलाई गुप्त योजना ने पीआरटीसी को रगड़े लगाने का इंतजाम कर दिया है। माना जा रहा था कि किराया बढ़ने से पीआरटीसी की आमदन बढ़ेगी, किन्तु इस योजना कारण विभाग को तो कोई लाभ होता दिखाई नहीं दे रहा, उल्टा मालवे में काफी रूट प्रभावित होने के आसार बन गए हैं। माना जा रहा है कि भटिंडा डिपो की बुकिंग को तो झटका लगना तय है। पीआरटीसी के एक कडंक्टर ने अपना नाम गुप्त रखने की शर्त पर यह उक्त बात को स्वीकारा भी है।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्णनीय है कुछ समय से निजी बस चालकों ने अपनी बसों की बुकिंग ही ठेके पर दी हुई है, जिस कारण यह लोग कमाई के लिए सस्ते भाव पर लोगों को सफर करवा रहे हैं। पता चला है कि निजी बस वालों द्वारा मुसाफिरों के साथ मौके पर ही सौदा तय कर लिया जाता है और कम किराए पर ही वह सवारी ले जाते हैं।</p>
<h2><strong>बसों की बुकिंग ठेके पर होने के कारण कडंक्टर देने लगे हैं छूट</strong></h2>
<p>निजी बस मालिकों की इस नीति के चलते लंबे रूट पर जाने वाली सवारी को खर्च कम पड़ता है। जानकारी अनुसार भोग अथवा शादी पर जाने के लिए एकत्रित हुई सवारियों तथा रोजाना सफर करने वाले मुसाफिरों को विशेष छूट मिलती है। सूत्रों के मुताबिक भटिंडा से चंडीगढ़ चलने वाली निजी ए.सी. बस में 50 रुपयेप्रति सवारी व भटिंडा से लुधियाना तक आम बस में 10 से 15 रुपये प्रति सवारी की छोट दी जा रही है, जबकि अन्य छोटे- मोटे रूटों पर भी कडंक्टर कम पैसे लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भटिंडा से बरनाला रूट पर रोजाना सफर करने वालों को 5 से 10 रुपये तक किराये में छूट मिल जाती है। भटिंडा से चंडीगढ़ तक आम बस का किराया 210 रुपये है, जबकि ए.सी. बस का किराया 320 रुपये है। सफर महंगा होने के कारण सवारी ए.सी. बस में नहीं बैठती, जिस कारण निजी बसों वाले ए.सी. सफर में छूट दे रहे हैं।</p>
<h2><strong>किराया बढ़ने से पीआरटीसी की बुकिंग के आसार हुए कम</strong></h2>
<p>रामपुरा निवासी हरदीप कुमार शर्मा ने बताया कि रामपुरा से चंडीगढ़ तक ए.सी. बसों वाले 50 रुपये और भटिंडा से लुधियाना तक ए.सी. बसों वाले 30 रुपये तक कम ले लेते हैं। इस हिसाब से निजी बसों में सफर सस्ता पड़ता है और सरकारी बसों में सफर महंगा पड़ता है। ट्रांसपोर्टर तीर्थ सिंह दयालपुरा मिर्जा ने कहा कि जब सवारी को कम पैसों में सफर की सुविधा मिलती है तो कोई ज्यादा पैसे क्यों देगा। उन्होंने कहा कि इस सुविधा ने खुद बस चलाने वालों का भी नुक्सान किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">उल्लेख्नीय है कि पंजाब में बीते शनिवार को बस किराए में तीन पैसे प्रति किलोमीटर की बढ़ौतरी हुई है। अब यह किराया बढ़कर 1 रुपये 2 पैसे प्रति किलोमीटर हो गया है, जबकि पहले किराया 99 पैसे प्रति किलोमीटर था। सूत्रों के मुताबिक निजी बस मालिकों द्वारा अपने मुलाजिमों को बुकिंग ठेके पर देने के बाद ही बस किराए में छूट देने का सिलसिला शुरू हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">काफी समय पहले भी इस तरह छूट देने का काम शुरू हुआ था, तब निजी बस आपरेटर यूनियन ने ही इस पर नकेल डालने की मुहिम चलाई थी। इस मुहिम ने कुछ समय रंग दिखाया, किन्तु बाद में सब पहले की तरह चलने लगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">छूट नहीं देनी चाहिए: यूनियन नेता</h2>
<p style="text-align:justify;">निजी बस आपरेटर यूनियन के महासचिव खुशकरन सिंह का कहना है कि गत समय दौरान चलाई मुहिम ने काफी रंग दिखाया था, लेकिन अब निजी बस मालिकों द्वारा बुकिंग का काम ठेके पर देने के कारण फिर से कडंक्टर छोट देने लगे हैं, जो कि नहीं देनी चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पीआरटीसी की बुकिंग प्रभावित नहीं होगी: एमडी</h2>
<p style="text-align:justify;">पीआरटीसी के मैनेजिंग डायरेक्टर एमएस नारंग का कहना है कि कहीं इका-दुका जगहों पर प्रभाव हो सकता है, किन्तु आल ओवर प्रत्येक माह 72 लाख रुपये की आमदन बढ़ेगी। उन्होंने बताया कि नियमों अनुसार कोई भी निजी बस मालिक किराये में छूट नहीं दे सकता। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई मामला अभी तक उनके ध्यान में नहीं आया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Tue, 20 Jun 2017 21:39:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पाक पीएम नवाज शरीफ को झटका</title>
                                    <description><![CDATA[पनामा लीक्स मामला: पाक सुप्रीम कोर्ट ने दिए जांच के आदेश इस्लामाबाद (एजेंसी)। पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पनामा पेपर्स लीक मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिवार के सदस्यों के विरुद्ध आरोपों की न्यायिक जांच का फैसला किया है और इसके लिए वह जांच आयोग की नियुक्ति करेगी। जांच आयोग के अध्यक्ष तथा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/pak-pm-nawaz-sharif-shock/article-242"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-11/nawaj-sahreef.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पनामा लीक्स मामला: पाक सुप्रीम कोर्ट ने दिए जांच के आदेश</strong><br />
<strong>इस्लामाबाद (एजेंसी)।</strong> पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने पनामा पेपर्स लीक मामले में प्रधानमंत्री नवाज शरीफ और उनके परिवार के सदस्यों के विरुद्ध आरोपों की न्यायिक जांच का फैसला किया है और इसके लिए वह जांच आयोग की नियुक्ति करेगी। जांच आयोग के अध्यक्ष तथा उसके सदस्यों का फैसला स्वयं सुप्रीम कोर्ट करेगी। आयोग को देश की सबसे बड़ी अदालत जैसे ही अधिकार प्राप्त होंगे। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पाकिस्तान मुस्लिम लीग तथा पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ से जांच आयोग के बारे में सुझाव मांगा।<br />
दोनों पक्षों के बीच आयोग के अधिकार क्षेत्र के बारे में एक राय नहीं होती है तो कोर्ट इस संबंध में स्वयं निर्णय करेगी। सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस अनवर जहीर जमाली ने इस मामले में दोनों पक्षों से संयम बरतने को कहा। उन्होंने कहा कि पनामा पेपर्स लीक का पूरे देश पर असर हुआ है अत: देश को अशांति तथा संकट से बचाना होगा। मामले की सुनवाई पाँच जजों की पीठ कर रही है। सुप्रीम कोर्ट आयोग के अध्यक्ष तथा उसके सदस्यों के बारे में निर्णय करेगी। दोनों पक्षों के बीच आयोग की नियुक्ति पर सहमति है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Nov 2016 21:52:05 +0530</pubDate>
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