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                <title>Air Strikes - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>इजरायल ने गाजा पट्टी में हमास के ठिकानों पर किए हवाई हमले</title>
                                    <description><![CDATA[यरुशलम (एजेंसी)। इजरायल ने गाजा पट्टी में हमास के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने खुद इसकी पुष्टि की है। आईडीएफ ने ट्वीट कर कहा, ‘इजरायल की वायुसेना ने खान यूनुस और गाजा शहर में हमास के ठिकानों पर हवाई हमले किए। आतंकवादियों के शिविर और बैठक स्थलों पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/israel-launches-air-strikes-on-hamas-targets-in-the-gaza-strip/article-24487"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/israel.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>यरुशलम (एजेंसी)।</strong> इजरायल ने गाजा पट्टी में हमास के कई ठिकानों पर हवाई हमले किए हैं। इजरायल डिफेंस फोर्सेज (आईडीएफ) ने खुद इसकी पुष्टि की है। आईडीएफ ने ट्वीट कर कहा, ‘इजरायल की वायुसेना ने खान यूनुस और गाजा शहर में हमास के ठिकानों पर हवाई हमले किए। आतंकवादियों के शिविर और बैठक स्थलों पर हवाई हमले किए। इन स्थलों से आतंकवादियों गतिविधियों को अंजाम दिया जा रहा था। वहीं मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि ये हमला फिलिस्तीनी क्षेत्र से दक्षिणी इजरायल में भेजे गए आग लगाने वाले गुब्बारों के जवाब में किया गया। गौरतलब है कि 11 दिनों तक हिंसक संघर्ष के बाद 21 मई को संघर्षविराम लागू किया गया था। इसके बाद से इजरायल और गाजा के बीच संघर्ष की पहली घटना है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Wed, 16 Jun 2021 10:22:58 +0530</pubDate>
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                <title>एयर स्ट्राइक ने बुनियादी मुद्दों को पीछे धकेला</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">इसमें कोई दो राय नहीं है कि मोदी सरकार के पूरे कार्यकाल में विपक्ष एक अदद मुद्दा सरकार को घेरने के लिये तलाश नहीं पाया। ले देकर कांग्रेस राफेल के मुद्दे पर मोदी सरकार को घेरने और चौकीदार चोर है, साबित करने की कोशिशों में पूरी शिद्दत से जुटी है। वो अलग बात है कि राफेल मुद्दे पर एक के बाद एक उसके सारे दांव फेल साबित हो रहे हैं। लोकसभा चुनाव दरवाजे पर पूरे जोर से दस्तक दे रहा है ऐसे में पूरे विपक्ष के पास मोदी सरकार को घेरने के लिये कोई मजबूत मुद्दा नहीं है। विपक्ष के अब तक व्यवहार, आचरण और बयानबाजी से यह स्पष्ट हो गया है कि विपक्ष के पास आम आदमी से जुड़े तमाम मुद्दों को उठाने की बजाय सिर्फ मोदी हटाओ के एजेण्डे पर चुनाव मैदान में उतरने वाला है। भले ही विपक्ष मोदी सरकार को घेरने के लिय तमाम आरोप लगा रहा है लेकिन आरोपों को साबित करने का साहस उसमें नहीं है। अब जब चुनाव की घंटी बज चुकी है तब विपक्ष मोदी हटाओ, मोदी हटाओ का नारा जोर-जोर से लगा रहा है। आम आदमी से जुड़े तमाम मुद्दों की बजाय केवल मोदी हटाने की रट से विपक्ष का भला होता दिखता नहीं है।</p>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा चुनाव के मद्देनजर मोदी हटाओ की आवाजें तेज होती जा रही हंै। मोदी विरोध में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने तो अपनी संवैधानिक सीमा ही लांघ दी, जब उन्होंने विधानसभा में ही चीख-चीख कर कहा कि भाजपा और मोदी 300 सीट जीतने के लिए कुछ भी कर सकते हैं। वे पुलवामा भी करवा सकते हैं। राष्ट्र की सरकार और सेना के पक्ष में प्रशंसा और सम्मान के प्रस्ताव पारित करने के बजाय विपक्ष के 21 दलों ने निंदा प्रस्ताव पारित किया है। ऐसा लगता है मानो चुनाव जीतने के अलावा हमारे दलों का कोई और सरोकार और लक्ष्य नहीं है। टीवी चैनलों पर भी विपक्षी दलों के प्रवक्ताओं के तर्क वही हैं, जो वे असंख्य बार उठा चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव के पहले उनका सामाजिक, आर्थिक, किसानी, रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि का एजेंडा नेपथ्य में कहीं दफन है, लेकिन एकमात्र एजेंडा सुनाई दे रहा है-मोदी को हटाना है। वर्ष 2014 में सत्ता में आने के बाद से मोदी सरकार पर विपक्ष हमलावर मुद्रा अपनाये है। नोटबंदी और जीएसटी के मुद्दे पर विपक्ष ने जनता की भावनाएं उबारने की तमाम कोशिशें की, लेकिन जनता का साथ उसे नहीं मिला। राहुल गांधी भले ही जनसभाओं में चौकीदार चोर के जुमले उछालते हों, लेकिन इन मुद्दों पर उन्हें कितना जनसमर्थन मिल रहा है वो किसी से छिपा नहीं है। मोदी विरोध का श्रेय लेने की होड़ विपक्ष के नेताओं में इस कदर मची हुई है कि कभी ममता, कभी चंद्रबाबू नायडू धरने पर बैठता है तो कभी कोई अखिलेश चर्चा में रहने का ड्रामा खेलता है। सम्पूर्ण विपक्ष में खुद को मोदी का सबसे बड़ा विरोधी साबित करने की प्रतियोगिता चल रही है। देश की जनता विपक्ष के नेताओं की नाटक, नौटंकी, ड्रामेबाजी और करतबों को ध्यान से देख रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब चुनाव बिल्कुल सिर पर खड़े हैं तो विपक्ष मोदी सरकार को घेरने के मुद्दे तलाशता दिख रहा है। तो वहीं बीजेपी को लगता है कि बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद मोदी की वापसी के मौके पहले के मुकाबले बेहतर हो गए हैं। पुलवामा हमले से पहले बीजेपी ने हिन्दी पट्टी के तीन बड़े राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में हुए विधानसभा चुनावों में विपक्षी कांग्रेस के सामने लगभग मुंह की खा चुकी थी। विपक्षी पार्टियां रफाल, नौकरियां और कृषि संकट जैसे मुद्दों को आक्रामकता से उछाल रही थीं और मोदी को रक्षात्मक मुद्रा को अपनाना पड़ रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">बीजेपी को सत्ता विरोधी लहर का डर भी सता रहा था, लेकिन पुलवामा और बालाकोट के बाद अब स्थिति नाटकीय रूप से बदल चुकी है और मोदी एक बार फिर आतंकवाद का मुद्दा लेकर मंच पर आगे आ गए हैं। पुलवामा हमले के बाद विपक्ष को ही नहीं बल्कि बीजेपी को अपनी चुनावी रणनीति पर दोबारा विचार करने पर मजबूर किया है। इससे पहले पार्टी राम मंदिर और विकास को लोकसभा चुनाव का प्रमुख मुद्दा बनाकर पेश कर रही थी। आरएसएस मंदिर और गाय पर चर्चा में लगा हुआ था। अब यहां ये जानना दिलचस्प होगा कि 22 फरवरी हुई को अपनी आंतरिक बैठक में आरएसएस राम मंदिर जैसे मसलों को पीछे करके आतंकवाद के मुद्दे को आगे ले आया और ऐसे नेता की जरूरत पर जोर दिया जो आतंकवाद से लड़ सके। पुलवामा हमले के बाद विपक्ष मोदी को किसी तरह का फायदा नहीं होने देना चाहता था लेकिन बालाकोट हमले के बाद उसे सरकार का समर्थन करने पर मजबूर होना पड़ा। हालांकि विपक्ष का ये समर्थन ज्यादा दिनों तक नहीं टिक पाया क्योंकि अब बीजेपी और विपक्ष दोनों ही पुलवामा हमले को लेकर राजनीति कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ विपक्षी पार्टियों ने एयर स्ट्राइक पर संदेह जताते हुए सरकार की आलोचना शुरू की तो कुछ ये सवाल पूछ रही हैं कि आत्मघाती हमलावर इतना विस्फोटक लेकर वहां पहुंचा कैसे? इन आरोपों के जवाब में मोदी और बीजेपी ने सवाल पूछने और शक जताने वालों को राष्टÑविरोधी का तमगा देना शुरू कर दिया है। मोदी की सुरक्षा रणनीति से उलझा विपक्ष अब जवाबी रणनीति की योजना बना रहा है। कांग्रेस का दावा है कि उसके पास सरकार पर हमला करने के लिए बहुत से मुद्दे हैं और उनमें से ज्यादातर मुद्दे खुद बीजेपी ने पैदा किए हैं। इसके अलावा, पिछले दो दिनों में विपक्ष एयर स्ट्राइक के सबूत की मांग को लेकर एकजुट हुआ है। विपक्ष के पास दूसरा विकल्प है- सरकार की विचारधारा और फैसलों को चुनौती देने वाली आवाजों को देश भर से सामने लेकर आना। विरोधी पार्टियों की तीसरी रणनीति ये हो सकती है कि वो रफाल, नौकरियों, ग्रामीण और कृषि संकट जैसे मुद्दों को जोरशोर से वापस लाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसा भी हो सकता है कि विपक्ष पुलवामा हमले के संदर्भ में खुफिया विफलता को हथियार बनाकर सरकार को घेरे। विपक्ष की ये रणनीति इसलिए भी कारगर साबित हो सकती है क्योंकि पुलवामा हमले के बाद खुफिया विफलता की बात खुद जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने स्वीकार की थी। अगर विपक्ष ऐसा करने में कामयाब होता है तो चुनाव से दो महीने पहले तक बीजेपी के लिए हालात मुश्किल हो जाएंगे। अब विपक्ष के सामने चुनौती ये है कि कैसे वो बीजेपी द्वारा सामने लाए गए मुद्दे को पीछे धकेलकर पुराने मुद्दों को सामने लाए। इसमें कोई दो राय नहीं है कि रोजगार सृजन में सरकार अपने वादे से कोसों दूर है। नोटबंदी ने रही-सही कसर भी पूरी कर दी और असंगठित क्षेत्र से लेकर कुटीर उद्यमियों तक के लिए नोटबंदी ने परेशानियों बढ़ायी।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी सरकार कालाधन और भ्रष्टाचार पर नकेल के वादे चारों खाने चित्त नजर आ रही है। आखिर में सवाल ये है कि क्या ये रणनीतियां कारगर साबित होंगी? विपक्ष कमजोर स्थिति में है क्योंकि कोई नहीं जानता कि ऐसे भावनात्मक ज्वार वाले माहौल में जनता किस ओर जाएगी। बीजेपी की राष्ट्रवादी विचारधारा पर सवाल उठाना खतरनाक हो सकता है। क्या जनता राष्ट्रवाद की ओर जाकर मोदी के लिए वोट करेगी या वो नौकरियों और कृषि संकट के बारे में सोचेगी? ये तो उसी दिन पता चलेगा जब चुनाव के नतीजे आएंगे। इस वक्त विपक्ष की जरूरत है अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए सही रास्ते की तलाश करना और एकजुटता बनाए रखना। चुनावी रैलियों में जिस तरह पीएम मोदी विपक्ष पर बरस रहे हैं उससे साफ है कि कम से कम उन्होंने 2019 के लिए अपने मुद्दे तय कर लिए हैं। सवाल यह है कि जनता इन मुद्दों को कैसे लेगी? क्या मोदी हटाओ की बात इंदिरा हटाओ जैसी नहीं सुनाई देती? क्या विपक्ष के पास पीएम का कोई चेहरा न होना, बीजेपी के पक्ष में जाएगा ? या फिर मुद्दों की बजाय मोदी हटाओ का नारा लगाते विपक्ष को देश की जनता एक बार फिर से विपक्ष में ही खड़ा रखेगी।<br />
<em><strong>आशीष वशिष्ठ</strong></em></p>
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                <pubDate>Mon, 11 Mar 2019 14:18:58 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>आतंक के ठिकानों पर एयर स्ट्राइक</title>
                                    <description><![CDATA[आतंकी हमले का बदला भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान से 12 दिनों बाद ले लिया 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ कॉन्वॉय पर हुए आतंकी हमले का बदला भारतीय (Air strikes at terror location) वायु सेना ने पाकिस्तान से 12 दिनों बाद ले लिया। मंगलवार सुबह जैसे ही देशवासियों ने आंखें खोली तब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1>आतंकी हमले का बदला भारतीय वायु सेना ने पाकिस्तान से 12 दिनों बाद ले लिया</h1>
<p style="text-align:justify;">14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में सीआरपीएफ कॉन्वॉय पर हुए आतंकी हमले का बदला भारतीय (Air strikes at terror location) वायु सेना ने पाकिस्तान से 12 दिनों बाद ले लिया। मंगलवार सुबह जैसे ही देशवासियों ने आंखें खोली तब उन्हें खबर पता चली की भारतीय वायुसेना ने पीओके में घुसकर आंतकी कैंपों पर हमला किया है। खबर के फैलते ही पूरे देश में खुशी की लहर दौड़ गयी। देशवासियों को इस बात की तसल्ली और खुशी दोनों हुई कि भारत सरकार ने सीआरपीएफ के शहीद सैनिकों की शहादत का बदला ले लिया है। भारत और पाकिस्तान के विदेश मंत्रालयों ने वायुसेना की कार्यवाही की पुष्टि कर दी है। मतलब साफ है कि भारत ने 14 फरवरी को पुलवामा में हुये आंतकी हमले का जवाब दुश्मन के घर में घुसकर दिया है।</p>
<h2>भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ की बड़ी कार्रवाई</h2>
<p style="text-align:justify;">पुलवामा हमले के 12 दिन बाद भारतीय वायुसेना ने पाकिस्तान के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुये रात्रि की अंतिम प्रहर 3.30 बजे मिराज-2000 (Air strikes at terror location) लड़ाकू विमानों ने नियंत्रण रेखा (एलओसी) के पार पाक के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में घुसकर हमला किया। 12 मिराज विमानों ने 1000 किलो बम बरसाए। इसमें कई आतंकी कैंप तबाह हुए हैं। भारतीय वायुसेना ने बालाकोट, चकोटी, मुजफ्फराबाद में जैश के ठिकाने तहस-नहस कर दिये हैं। भारतीय वायु सेना ने जैश का कंट्रोल रूम अल्फा-3 उड़ा दिया गया। मीडिया खबरों के अनुसार इस हवाई कार्यवाही में आंतकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के 200 से 300 तक आंतकी मारे गये हैं। भारत ने बालाकोट में जैश-ए-मोहम्मद का सबसे बड़ा प्रशिक्षण शिविर को ध्वस्त किया है। इस आॅपरेशन में जैश-ए-मोहम्मद में बड़ी संख्या में आतंकवादी, प्रशिक्षक, सीनियर कमांडर, फिदायीन हमला करने वाले जिहादी मारे गए।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि बालाकोट पाकिस्तान के प्रांत खैबर पख्तूनख्वाह में स्थित है। हमले वाली जगह एलओसी से करीब 50 किलोमीटर दूर है। पीओके में पाकिस्तान प्रशिक्षित आतंकियों के लांच पैड हैं। पाकिस्तानी सेना आतंकियों को सीमा पर फायरिंग कर या मौका देखकर कश्मीर में भेजती रही है। पाकिस्तान हमेशा इन संगठनों की अपने देश में मौजूदगी से इनकार करता आया है. पाकिस्तान को कई बार सबूत भी दिए गए लेकिन उसने आतंकी संगठन के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। पाकिस्तानी सेना के मेजर जनरल आसिफ गफूर ने भारतीय वायुसेना के गुलाम कश्मीर में बमबारी की कथित तस्वीरें ट्वीट की हैं। भारत के विेदेश मंत्रालय ने प्रेस कांफ्रेंस के माध्यम से इस हमले की पुष्टि की है। वास्तव में पुलवामा हमले के बाद पूरे देश में पाकिस्तान को लेकर गुस्से का माहौल था। देशवासी सड़कों पर तिरंगा लेकर निकल पड़े थे।</p>
<p style="text-align:justify;">देशभर से पाकिस्तान को सख्त सबक सिखाने की मांग उठ रही थी। करोड़ों देशवासियों की भावनाओं के मद्देनजर ये जरूरी हो गया था कि सरकार पाकिस्तान में शरण पाये आंतकियों पर कड़ी कार्यवाही करे। पुलवामा में सीआरपीफ पर आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान पर कूटनीतिक वार के साथ ही कारोबारी झटका देते हुए उससे ह्यमोस्ट फेवर्ड नेशनह्ण का दर्जा वापस ले लिया था। वर्ल्ड ट्रेड आॅर्गनाइजेशन में शामिल वे देश जो उसके जनरल अग्रीमेंट आॅन टैरिफ्स ऐंड ट्रेड का हिस्सा हैं, एक दूसरे को कस्टम ड्यूटी में राहत के लिहाज से यह दर्जा देते हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों ने पुलवामा आतंकी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं सरकार ने सरकारी सुरक्षा के दायरे में रहकर आतंकियों की भाषा बोलने वाले हुर्रियत के कट्टरपंथी गुट के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी समेत 18 हुर्रियत नेताओं की सुरक्षा जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने वापस ले ली थी।राज्य के 155 राजनीतिक नेताओं व कार्यकतार्ओं की सुरक्षा भी घटा दी। तीन दिन पहले जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने हुर्रियत के उदारवादी गुट के चेयरमैन मौलवी मीरवाइज उमर फारूक समेत पांच अलगाववादियों की सुरक्षा भी वापस ले ली थी। वहीं शांति बनाये रखने के लिये कई अलगाववादी नेताओं को जेलों में डाल दिया गया। इन सबके बीच केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा था कि सरकार पूर्वी नदियों के भारत के हिस्से के पानी को पाकिस्तान में नहीं जाने देगी।</p>
<p style="text-align:justify;">गडकरी ने रावी, सतलुज, ब्यास नदी के पानी को पाकिस्तान में बहने से रोकने के ऐलान का जिक्र करते हुए कहा था दोनों देशों के बीच इस संबंध में संधि आपसी समझ और प्रेम पर आधारित थी लेकिन आतंकवाद को समर्थन के साथ ऐसा नहीं हो सकता। लेकिन आंतकवाद से गहरे तक चोटिल भारतीय जनमानस इन कार्यवाहियों को पर्याप्त नहीं मान रहा था। देशवासियों में इस बात का गुस्सा अंदर तक भरा था कि पाक की मदद से आंतकी आये दिन हमारे सैनिकों पर हमला करते रहते हैं। आंतकियों ने ही कश्मीर को माहौल पूरी तरह खराब कर रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलवामा में हुये हमले के बाद देशवासियों के गुस्से और कार्यवाही की मांग के भारी दबाव के चलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सेना को पूरी छूट दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि पाकिस्तान को करारा जवाब दिया जाएगा और उन्होंने ऐसा कर दिखाया है। भारतीय सेना ने पुलवामा हमले के 100 घंटों के भीतर हमले के मास्टरमाइंड कामरान गाजी को मार गिराया। सेना को 14 फरवरी को पुलवामा हमले के बाद से ही कामरान की तलाश थी और चार दिनों के बाद आखिरकार सफलता मिल ही गई। कामरान ही वह दहशतगर्द था, जिसका दिमाग सीआरपीएफ जवानों का काफिले पर पुलवामा में हुए आत्मघाती हमले के पीछे था।</p>
<p style="text-align:justify;">उसने पाकिस्तान में बैठे अपने आका मसूद अजहर के इशारे पर वारदात को अंजाम दिया था। पुलवामा में हुए आतंकी हमले को लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी और इसमें पाकिस्तान का हाथ होने से इनकार किया था। इमरान खान ने यह भी कहा कि अगर भारत युद्ध करेगा तो पाकिस्तान सोचेगा नहीं, बल्कि जवाब देगा, क्योंकि पाकिस्तान के पास इसके अलावा कोई विकल्प नहीं रहेगा। भारतीय सेना ने 1999 में कारगिल जंग में मिराज-2000 विमानों की बमबारी कर सबसे ऊंची चोटी टाइगर हिल पर अवैध रूप से कब्जा जमाए आतंकियों को नेस्तनाबूद किया था। मिराज विमानों से लेजर गाइडेड बम म्युनिशन गिराए गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">कारगिल जंग के दौरान ये बम इजरायल से खरीदे गए थे। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद समेत अन्य इलाकों में तड़के की गई एयर स्ट्राइक के माध्यम से सेना ने साफ कर दिया है कि भारतीय लोकतंत्र आतंकवाद के खिलाफ नरमी नहीं बरतेगा। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने पिछले दिनों बयान दिया था कि पुलवामा हमले का पाकिस्तान से कोई लेना-देना नहीं है। हम आतंक पर बातचीत करने को तैयार हैं। अगर भारत ने हमला किया तो इसका करारा जवाब दिया जाएगा। भारत ये बात खुद सोचे कि कश्मीर के युवा मरने-मारने पर क्यों उतर आए? इमरान ने कहा कि यह नया पाकिस्तान है, हम स्थायित्व चाहते हैं। फिर हम क्यों आतंकवाद की तरफ जाएंगे ? भारत की एयर स्ट्राइक के बाद पाकिस्तान का रूख देखने वाला होगा। सेना सहित सुरक्षा बल पाकिस्तान की हर गतिविधि पर कड़ी नजरें गड़ाएं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारों के मुताबिक, भारतीय सेना की इस एयर स्ट्राइक से दुश्मन का पिछली बार की सर्जिकल स्ट्राइक से अधिक नुकसान किया है। साथ ही पूरी दुनिया को भारत ने इस कार्रवाई के माध्यम से यह भी संदेश दिया है कि पाकिस्तान और आतंकवाद वैश्विक शांति के लिए खतरा है। इस एयर स्ट्राइक के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कुशल नेतृत्व को भी नई पहचान मिली है। उन्होंने दुनिया को दिखाया है कि भारत आतंक के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई करने को तत्पर है। जिस तरह से यह कार्रवाई हुई है इसे साफ है कि भारत पाकिस्तान का दुश्मन नहीं बल्कि आतंकियों का दुश्मन है। और आतंकवादी ठिकानों को नेस्तनाबूद करने का जो काम किया है, इससे देश को मजबूती मिलेगी। वायुसेना ने जबरदस्त पराक्रम किया है, उसके लिए उन्हें बहुत बधाई।<br />
<strong>लेखक: राजेश माहेश्वरी</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 27 Feb 2019 14:09:27 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>गठबंधन सेना के हवाई हमलों में 600 नागरिक की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[2014 और मई 2017 के बीच सीरिया तथा इराक में हवाई हमले वाशिंगटन। अमेरिका के नेतृत्व में गठबंधन सेना की ओर से इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादियों को निशाना बनाकर वर्ष 2014 से अब तक सीरिया और इराक में किए गए हवाई हमलों में कम से कम 600 नागरिक मारे गए हैं। गठबंधन सेना की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/600-civilians-are-killed-in-coalition-air-strikes/article-2072"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/air-attack.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">2014 और मई 2017 के बीच सीरिया तथा इराक में हवाई हमले</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका के नेतृत्व में गठबंधन सेना की ओर से इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादियों को निशाना बनाकर वर्ष 2014 से अब तक सीरिया और इराक में किए गए हवाई हमलों में कम से कम 600 नागरिक मारे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गठबंधन सेना की ओर से कल जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2014 और मई 2017 के बीच सीरिया तथा इराक में किए गए हवाई हमले में कम से कम 603 नागरिक मारे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि निगरानी समूहों की ओर से उपलब्ध कराये गये आंकड़े से यह काफी कम है। एयरवार्स निगरानी समूह के अनुसार गठबंधन सेना की ओर से किये गये हवाई हमलों में कम से कम 4354 नागरिक मारे गये हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आईएस के खिलाफ जब से अभियान शुरू किया गया है तब से 22000 हवाई हमले किये गये हैं जिनमें से 727 हवाई हमलों में नागरिक हताहत हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Jul 2017 23:37:56 +0530</pubDate>
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