<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/coalition/tag-3837" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>coalition - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/3837/rss</link>
                <description>coalition RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>सपा-बसपा गठबंधन से मुश्किल में कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[देश को सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीट देने वाले उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने हाथ मिला लिया है। मसलन अब बुआ-भतीजा लोकसभा की धुरी माने जाने वाले इस प्रदेश में अपना दौर चलाएंगे। दोनों दल 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेगें। कांग्रेस पर कृपा करते हुए अमेठी राहुल गांधी और रायबरेली सीटें […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">देश को सबसे ज्यादा 80 लोकसभा सीट देने वाले उत्तरप्रदेश में समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी ने हाथ मिला लिया है। मसलन अब बुआ-भतीजा लोकसभा की धुरी माने जाने वाले इस प्रदेश में अपना दौर चलाएंगे। दोनों दल 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ेगें। कांग्रेस पर कृपा करते हुए अमेठी राहुल गांधी और रायबरेली सीटें सोनिया गांधी के लिए छोड़ दी हैं। यह दया कांग्रेस को गठबंधन में शामिल किए बिना ही बरती गई है। कांग्रेस 2014 के चुनाव में 7.53 फीसदी मत प्राप्त कर महज दो सीटें जीत पाई थी, जिनमें एक राहुल और एक सोनिया की थी। हालांकि मायावती और अखिलेश यादव ने जिस ढंग से कांग्रेस की उपेक्षा की है, उससे लगता यही है कि अब कांग्रेस पूरे देश में अकेली रहकर हिंदी क्षेत्र में चुनाव लड़ने की रणनीति बनाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इधर हिंदी पट्टी के तीन बड़े राज्यों में सत्ता खोने के बाद भाजपा ने सबक लेते हुए गठबंधन का धर्म उदारता से निभाने का संकेत दिया है। बिहार में जदयू और लोजपा के साथ लोकसभा की सीटों के बंटवारे को लेकर हुआ समझौता इसका गवाह है। राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के अध्यक्ष उपेन्द्र कुशवाहा और तेलगु देशम पार्टी के प्रमुख एवं आंध्र-प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू के राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से बाहर हो जाने से भी भाजपा ने सबक लेते हुए रामविलास पासवान को राज्यसभा की सीट बोनस में दे दी है। दरअसल भारतीय जनता पार्टी कुछ समय से गठबंधन के उस धर्म का पालन करती नहीं दिख रही थी, जिसकी पैरवी अटलबिहारी वाजपेयी किया करते थे। वाजपेयी अपने सहयोगियों को बराबर का साझीदार मानने के आदर्श पर चलते थे, नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की कसौटी सहयोगी दलों को भाजपा के विस्तार का औजार मानता रहा है। इस सिद्धांत को थोपने की कोशिश में भाजपा, सहयोगी दलों को इस दृष्टि से आशंकित करती रही है कि कहीं वह उनके वर्चस्व पर ही स्थापित न हो जाए? सहयोगियों के महत्व को नकारने के संकेत भी भाजपा इन साढ़े चार सालों से देती रही है। चंद्रबाबू नायडू इसके उदाहरण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा की अपने सबसे पुराने व विश्वसनीय सहयोगी शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से भी अनबन चल रही है। महाराष्ट्र की राजनीति की जमीनी पड़ताल करें तो यहां 2014 वाली हवा नदारद है। अरविंद केजरीवाल और शरद यादव किस करवट बैठते हैं, यह कहना फिलहाल मुश्किल है, क्योंकि ये नेता राहुल का नेतृत्व स्वीकारने से कतरा रहे हैं। दूसरे, कांग्रेस और भाजपा से इतर क्षेत्रीय क्षत्रपों के साथ यह संकट है कि अन्य किसी दल का देशव्यापी न तो जनाधार है और न ही संगठन। ऐसे में आम चुनाव के पूर्व इन्हीं में से किसी एक की छत्र-छाया में शरण लेना राजनीतिक मजबूरी है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/congress-in-trouble-with-sp-bsp-coalition/article-7369</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/congress-in-trouble-with-sp-bsp-coalition/article-7369</guid>
                <pubDate>Tue, 15 Jan 2019 08:24:03 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>केजरीवाल का बड़ा ऐलान-अकेले लड़ेंगे 2019 का चुनाव, नहीं बनेंगे महागठबंधन का हिस्सा ​​​​​​</title>
                                    <description><![CDATA[आरोप:  केन्द्र सरकार ने दिल्ली में कराये जाने वाले विकास के कार्यों में रोड़े अटकायें रोहतक (सच कहूँ)। आम आदमी पार्टी के प्रमुख एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि 2019 में भाजपा के खिलाफ संभावित महागठबंधन का वह हिस्सा नहीं बनेंगे। केजरीवाल ने कहा कि जो पार्टियां संभावित महागठबंधन में शामिल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/kejriwal-big-statement-2019-elections-will-not-be-part-of-the-coalition/article-5297"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/kejriwa.jpg" alt=""></a><br /><h2>आरोप:  केन्द्र सरकार ने दिल्ली में कराये जाने वाले विकास के कार्यों में रोड़े अटकायें</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>रोहतक (सच कहूँ)।</strong> आम आदमी पार्टी के प्रमुख एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि 2019 में भाजपा के खिलाफ संभावित महागठबंधन का वह हिस्सा नहीं बनेंगे। केजरीवाल ने कहा कि जो पार्टियां संभावित महागठबंधन में शामिल हो रही है, उनकी देश के विकास में कोई भूमिका नहीं रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि केन्द्र सरकार ने दिल्ली में कराये जाने वाले विकास के कार्यों में रोड़े अटकायें है।</p>
<h2>विधानसभा चुनाव के साथ-साथ लोकसभा की सभी सीटों पर भी चुनाव लड़ेगी</h2>
<p style="text-align:justify;">केजरीवाल ने आज रोहतक में कहा कि उनकी पार्टी हरियाणा में विधानसभा चुनाव के साथ-साथ लोकसभा की सभी सीटों पर भी चुनाव लड़ेगी। उन्होंने कहा कि 2019 में ‘‘वे किसी भी प्रकार के महागठबंधन या अन्य गठबंधन का हिस्सा नहीं बनेंगे।’’ केजरीवाल ने दिल्ली के रूके हुए कामों के लिए केन्द्र की मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहराया और कहा कि उनके हर उस कदम को रोका गया जो आम जनता की भलाई के लिए कहा था। उन्होंने दावा किया,‘‘हमने दिल्ली में शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्रों में क्रांतिकारी काम किये हैं।’’ उन्होंने कहा कि भाजपा धर्म के नाम पर सिर्फ दिखावा कर रही है। उसे लोगों की भावनाओं से कोई लेना-देना नहीं है।</p>
<h2>भाजपा सरकार को भी आड़े हाथों लिया</h2>
<p style="text-align:justify;">केजरीवाल ने हरियाणा की भाजपा सरकार को भी आड़े हाथों लिया। उन्होंने दिल्ली के मुकाबले हरियाणा को विकास के क्षेत्र में जहां पिछड़ा हुआ करार दिया तो वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री को सलाह भी दे डाली कि ‘‘वह हम से सीख ले कि सही मायनों में विकास कैसे होता है।’’ उन्होंने कहा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी की सरकार जब पूर्ण राज्य न होते हुए भी बिजली, पानी, स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में क्रांति ला सकती है तो हरियाणा में खट्टर सरकार ऐसा क्यों नहीं कर सकती है। केजरीवाल ने अम्बाला के शहीद हुए जवान के परिवार के लिए हरियाणा सरकार से एक करोड़ रूपये की आर्थिक सहायता की मांग की।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/kejriwal-big-statement-2019-elections-will-not-be-part-of-the-coalition/article-5297</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/kejriwal-big-statement-2019-elections-will-not-be-part-of-the-coalition/article-5297</guid>
                <pubDate>Fri, 10 Aug 2018 09:51:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-08/kejriwa.jpg"                         length="47049"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आबादी तथा सद्र ने की राजनीतिक गठबंधन बनाने की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[सद्र की पार्टी क्रमश: तीसरे और पहले स्थान पर नजफ, इराक (Varta): इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी तथा इराकी शिया क्लर्क एवं मिलिशिया नेता मुक्तादा अल- सद्र ने राजनीति गठबंधन बनाने की घोषणा की है। दोनों नेताओं ने शनिवार को नजफ में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उनका गठबंधन सांप्रदायिक और जातीय बंटवारे से हटकर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/announcement-of-creation-of-political-coalition-of-population-and-sadr/article-4454"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/bhadar.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सद्र की पार्टी क्रमश: तीसरे और पहले स्थान पर</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नजफ, इराक (Varta):</strong></p>
<p style="text-align:justify;">इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल-अबादी तथा इराकी शिया क्लर्क एवं मिलिशिया नेता मुक्तादा अल- सद्र ने राजनीति गठबंधन बनाने की घोषणा की है। दोनों नेताओं ने शनिवार को नजफ में संवाददाता सम्मेलन में बताया कि उनका गठबंधन सांप्रदायिक और जातीय बंटवारे से हटकर होगा। उल्लेखनीय है कि इससे पहले श्री सद्र तथा शिया मिलिशिया कमांडर हादी अल-अमिरी ने गठबंधन बनाने की घोषणा की थी। श्री अमिरी इरान के नजदीकी माने जाते हैं और उनकी पार्टी गत मई महीने में हुए संसदीय चुनावों में दूसरे स्थान रही है। वहीं श्री अबादी तथा श्री सद्र की पार्टी क्रमश: तीसरे और पहले स्थान पर रही है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/announcement-of-creation-of-political-coalition-of-population-and-sadr/article-4454</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/announcement-of-creation-of-political-coalition-of-population-and-sadr/article-4454</guid>
                <pubDate>Sun, 24 Jun 2018 09:13:22 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-06/bhadar.jpg"                         length="42996"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जरूरी था गठबंधन का विखंडन</title>
                                    <description><![CDATA[विष्णुगुप्त भाजपा और पीडीपी गठबंधन का विखंडन कोई अस्वाभाविक राजनीति घटना नहीं है। भाजपा और पीडीपी के गठबंधन का टूटना तो निश्चित था। निश्चित तौर पर पीडीपी के साथ गठबंधन की राजनीति भाजपा के लिए दुस्वप्न की तरह साबित हुई है और खासकर महबूबा सईद की भारत विरोधी बयानों के प्रबंधन में भाजपा पूरी तरह […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/it-was-necessary-to-break-the-coalition/article-4350"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/kasmir.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>विष्णुगुप्त</strong></p>
<p>भाजपा और पीडीपी गठबंधन का विखंडन कोई अस्वाभाविक राजनीति घटना नहीं है। भाजपा और पीडीपी के गठबंधन का टूटना तो निश्चित था। निश्चित तौर पर पीडीपी के साथ गठबंधन की राजनीति भाजपा के लिए दुस्वप्न की तरह साबित हुई है और खासकर महबूबा सईद की भारत विरोधी बयानों के प्रबंधन में भाजपा पूरी तरह से विफल साबित हुई थी।</p>
<p>भाजपा की यह सोच पूरी तरह से कमजोर साबित हुई कि पीडीपी के साथ गटजोड कर एक मजबूत और टिकाउ सरकार देकर कश्मीर में पार्टी का जनाधार विकसित किया जाये और खासकर पाकिस्तान को एक करारा जवाब दिया जाये। दुनिया मे यह स्थापित किया जाये कि कश्मीर में मजबूत लोकतंत्र कायम है, हमारा लोकतंत्र जन उम्मीदो को आधार देने के लिए कामयाब है।</p>
<p>यह सही है कि दुनिया को यह अहसास दिलाया गया कि पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद और आतंकवाद की हिंसा के बावजूद हम मानवाधिकार को सर्वश्रेष्ठ प्राथमिकता में शामिल कर रखे है पर आतंरिक तौर पर यह गठबंधन उम्मीदों पर खरा नहीं उतर रहा था, पीडीपी और महबूबा मुफ्ती तो अपनी छवि चमकाने में लगी हुई थी, समय-समय पर उसके विधायाकों और पार्टी नेताओं के राष्ट्र विरोधी बोल सनसनी पैदा करते थे और भाजपा के जनाधार को ललकार कर उसे कमजोर भी करते थे।</p>
<p>महबूबा मुफ्ती की प्राथमिकता आतंकवाद को रोकने में कतई नही थी, कश्मीर में आतंकवाद पर नियंत्रण लगाने का काम करने का अर्थ, अपने जनाधार में आग लगाने जैसा है, कश्मीर में जो दल जितना देश को गाली देगा और जितना पाकिस्तान के पक्ष में दंडवत होगा वह उतना ही जनाधार विकसित करता है। इसीलिए कभी पीडीपी तो कभी नेशनल कांन्फ्रेंस भारत की एकता और अखंडता विरोधी बयान देकर सनसनी फैलाते हैं।</p>
<p>अब यहां प्रश्न उठता है कि अचानक गठबंधन तोडने के लिए भाजपा तैयार क्यों हुई? क्या मुफ्ती महबूबा सईद मनमानी पर उतर आयी थी? क्या मुफ्ती मोहम्मद सईद भाजपा की सभी बातें और भाजपा की सभी नीतियों को अनसुनी करती थी? क्या मुफ्ती महबूबा आतंकवाद को बढावा दे रही थी? रमजान के दौरान एक तरफा युद्ध विराम के लिए मुफ्ती मोहम्मद सईद ने विशेष दबाव बनाया?</p>
<p>कांग्रेस अपने आप को इस संकट की कसौटी पर किस तरह से नियंत्रित करेगी? राष्ट्रपति शासन के दौरान भाजपा अपने जमीदोंज हुए विचार और जनाधार को किस र्प्रकार से वापस लायेगी? आतंकवादी संगठन इस राजनीतिक परिस्थिति में किस प्रकार से हिंसक राजनीति को अंजाम देंगे, क्या आतंकवादी हिंसा कमजोर होगी? सबसे बडी बात पाकिस्तान की है, पाकिस्तान अपनी आतंकवादी मानसिकता का किस प्रकार से विस्फोट करता है? पाकिस्तान दुष्प्रचार की कूटनीतिक खेल-खेल सकता है, जिसका मुकाबला भारत सरकार को करना पडेगा।<br />
यह सीधे तौर पर भाजपा की विफलता है, भाजपा की राजनीतिक सोच की विफलता है।</p>
<p>गठबंधन की कोई सुखद परिणाम की उम्मीद थी नही। उम्मीद क्यों नहीं थी? उम्मीद इसलिए नही थी कि दोनो के विचार और चरित्र में कोई दूर-दूर तक समानता नहीं था। पीडीपी की सोच जहां अलगववादी के प्रति नरम थी वहीं आतंकवाद विरोध की है, धारा 370 विरोधी की है, समान नागरिक संहिता की पक्षधर है। ऐसे दो ध्रुव पर केन्द्रित पार्टियों के बीच गठबधन कोई मधुर कैसे हो सकता है?</p>
<p>सबसे बडी बात यह है कि भाजपा ने गलत सोच विकसित कर ली थी। भाजपा को स्वर्णिम सफलता जो मिली थी वह स्वर्णिम सफलता पीडीपी के साथ गठबंधन करने के लिए नहीं मिली थी, भाजपा को स्वर्णिम सफलता पीडीपी के आतंकवादी समर्थक नीति को जमींदोज करने के लिए मिली थी, नेशनल कांन्फ्रेंस की बिगडैल बोल को जमींदोज करने के लिए मिली थी, आतंकवादियों का उसके मांद में जाकर सबक सिखाने के लिए मिली थी, पाकिस्तान को जैसे को तैसे स्थिति में जवाब देने के मिली थी। रमजान के अवसर पर एक तरफा युद्ध विराम का नाटक भाजपा के लिए भारी पड़ गया, आतंकवादियों ने अपनी शक्ति बढाई।</p>
<p>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की छवि और उनके पराक्रम पर भी प्रश्न चिन्ह खडा हुआ था। नरेन्द्र मोदी जब प्रधानमंत्री नहीं थे और प्रधानमंत्री पद के लिए उन्हें उनकी पाटी ने प्रस्तावित किया था तब उनकी अवधारणा क्या थी, उनके तेवर क्या थे, वे पाकिस्तान और आतंकवादियों के खिलाफ किस प्रकार से दहाडते थे। वे कहते थे कि आतंकवादियों और पाकिस्तान को जवाब देने के लिए देश को 56 इंच का सीना चाहिए, मनमोहन सिंह के पास 56 इंच का सीना नहीं है। नरेन्द्र मोदी यह भी कहते थे कि जब वे सत्ता मे आयेंगे तब आतंकवादियों और पाकिस्तान को सबक सिखायेंगे और पाकिस्तान भारत की ओर मुंह करने के पीछे सौ बार सोचेगा।</p>
<p>नरेन्द्र मोदी सत्ता में आये, प्रधानमंत्री की कुर्सी उन्हें मिल गयी। पर उनका 56 इंच का सीना कभी दिखा नहीं। आतंवादियों को जवाब देने में उनकी वीरता कहीं झलकी नहीं। पाकिस्तान पहले से भी अराजक और बेखौफ गया। पाकिस्तान आतंकवादियों को नियंत्रित करने, आईएसआई को नियंत्रित करने की जिम्मेदारी नहीं दिखायी। सबसे बडी बात यह है कि नरेन्द्र मोदी बिन बुलाये पाकिस्तान चले गये। नवाज शरीफ के दावत खाने से उनकी छवि खराब हुई। जनता के बीच संदेश गया कि नरेन्द्र मोदी भी कांग्रेस की भूमिका में कैद हो गये हैं, कश्मीर और पाकिस्तान की समस्या को नियंत्रित करने के लिए मोदी के पास भी कोई वीरतापूर्ण आत्म बल नही है। इतिहास भी यही कहता है कि जब-जब भारत ने पाकिस्तान के साथ उदारता दिखायी है, तब-तब भारत की पीठ में पाकिस्तान ने छूरा भोका है। पाकिस्तान कोई वार्ता नहीं बल्कि शक्ति और हिंसा की भाषा ही समझता है।</p>
<p>भाजपा गठबंधन नहीं तोडती तो फिर भाजपा को कितना नुकसान होता? भाजपा अगर गठबंधन नहीं तोडती तो फिर भाजपा को अतुलनीय नुकसान होता, जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद की दिन-प्रतिदिन बढती धटना से देशभर में गुस्सा और आक्रोश था। विरोधी विचार धारा वाले लोग मोदी पर तो आतंकवाद के सामने घुटने टेकने और पाकिस्तान के सामने सर्मपण करने के आरोप तो लगाते ही थे पर राष्ट्रवादी खेमा जो नरेन्द्र मोदी और भाजपा की शक्ति के केन्द्र में है, भी कम आक्रोशित नहीं था। राष्ट्रवादी खेमे का आक्रोश ही भाजपा के लिए चिंता की बात थी। सबसे बडी भूमिका जम्मू संभाग ने निभायी है।</p>
<p>जम्मू संभाग ही भाजपा की शक्ति के केन्द्र मे है। भाजपा को स्वर्णिम सफलता जम्मू संभाग की ही देन है। भाजपा की सभी सीटें जम्मू संभाग से मिली हुई है। लोकसभा की छह में से जो तीन सीटें भाजपा को मिली थी वह तीनों सीटे जम्मू संभाग की हैं। अगर भाजपा ने पीडीपी का गठबंधन समाप्त नहीं होता तो फिर जम्मू संभाग की राजनीति शक्ति भाजपा से दूर हो जाती। राष्ट्रपति शासन के दौरान आतंकवाद और पाकिस्तान परस्त राजनीति के पंख को मरोडना होगा, पाकिस्तान की आतंकवादी मानसिकता का भी सैनिक हल ढुढना होगा, अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर भाजपा और मोदी को और भी नुकसान होगा।</p>
<h4><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">HINDI NEWS </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">FACEBOOK</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">TWITTER</a> पर फॉलो करें।</strong></h4>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/it-was-necessary-to-break-the-coalition/article-4350</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/it-was-necessary-to-break-the-coalition/article-4350</guid>
                <pubDate>Thu, 21 Jun 2018 09:08:45 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-06/kasmir.jpg"                         length="104008"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोक सभा चुनावों की तैयारी में मुद्दे गायब, गठबंधन पर जोर</title>
                                    <description><![CDATA[देश की केंद्रीय सरकार में 2019 की लोकसभी चुनाव संबंधी घड़ियां जा रही हैं रणनीतियों का पूरा गठबंधन बन गया है। भाजपा ने सत्ता में चुनाव के बावजूद अपने भाईचारे को जोड़े रखने के लिए मुहिम छेड़ दी है। ये मुहिम लगभग सहयोगी पार्टियों से हां करवाना ही है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का आज […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/issues-missing-preparations-lok-sabha-elections-emphasis-on-coalition/article-4006"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/loc.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश की केंद्रीय सरकार में 2019 की लोकसभी चुनाव संबंधी घड़ियां जा रही हैं रणनीतियों का पूरा गठबंधन बन गया है। भाजपा ने सत्ता में चुनाव के बावजूद अपने भाईचारे को जोड़े रखने के लिए मुहिम छेड़ दी है। ये मुहिम लगभग सहयोगी पार्टियों से हां करवाना ही है। भाजपा अध्यक्ष अमित शाह का आज अकाली दल के प्रमुख सुखबीर बादल से मुलाकात का प्रोग्राम है। बिहार में भाजपा नेता सुशील मोदी ने नितीश को एनडीए का चेहरा कहकर भाजपा और जनता दल यू की जोड़ी बनाने का प्रयास किया है। पिछले दिनों नितीश ने नोटबंदी पर सवाल खड़े करके भाजपा नेताओं की चिंता बढ़ा दी थी। इसी तरह महाराष्टÑ में शिव सेना को मनाने की कोशिश की जा रही है। इधर कांग्रेस 2019 में भाजपा को सरकार से बाहर रखने के लिए विरोधी पार्टियों से गठबंधन के लिए सरगर्म हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसकी शुरूआत कर्नाटक में सरकार बनान से हो चुकी है। दरअसल कर्नाटक और उपचुनावों के नतीजों के बाद भाजपा 2019 के चुनावों के लिए सरगर्मी से काम कर रही है। तृणमूल कांग्रेस, बसपा, राष्टÑीय जनता दल, समाजवादी पार्टी, तेलगू देशम पार्टी, भाजपा के खिलाफ एकजुट हो गई हैं। कांग्रेस की सख्त विरोधी रही आम आदमी पार्टी ने भी कांग्रेस के साथ चलने का मन बना लिया है। ऐसे हालातों में भाजपा के लिए सबसे जरूरी चीज अपने सहयोगी दलों को साथ रखना है।</p>
<p style="text-align:justify;">तेलगू देशम पार्टी ने भाजपा से सिर्फ नाता नहीं तोड़ा बल्कि केंद्र की आलोचना भी की है। अकाली दल के प्रमुख नेता नरेश गुजराल ने कई बार भाजपा पर सहयोगी पार्टियों को नजरअंदाज क रने का दोष लगाकर नई चर्चा छेड़ दिया थी। इसलिए भाजपा प्रधान किसी तरह की कमी नहीं छोड़ना चाहते। संसदीय प्रणाली में गिनती का महत्व बढ़ गया है और मुद्दों की अहमियत घट गई है। गठबंधन की मजबूती की मुहिम में क्षेत्रीय पार्टियों की कदर बढ़ गई है पर मुद्दों पर सारे चुप हैं। राजनीति के मौजूदा रुझान ने आम आदमी को नजरअंदाज कर दिया है और कुर्सी ही बड़ा उद्देश्य बन गई है। किसके साथ जाना है की चर्चा है मुद्दों की शर्त गायब है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/issues-missing-preparations-lok-sabha-elections-emphasis-on-coalition/article-4006</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/issues-missing-preparations-lok-sabha-elections-emphasis-on-coalition/article-4006</guid>
                <pubDate>Thu, 07 Jun 2018 12:07:57 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-06/loc.jpg"                         length="79787"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भाजपा को पटखनी देने क्षेत्रीय दलों से गठबंधन की जुगत में कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश में हाल के उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के खिलाफ संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार की जीत के बाद कांग्रेस आगामी 2019 के आम चुनाव में केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा नीत सरकार को सत्ता से हटाने के लिए अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने की रणनीित पर विचार कर रही है। विभिन्न […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/congress-in-the-wake-of-coalition-with-regional-parties/article-3932"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/rahul.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>उत्तर प्रदेश में हाल के उपचुनावों में भारतीय जनता पार्टी(भाजपा) के खिलाफ संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार की जीत के बाद कांग्रेस आगामी 2019 के आम चुनाव में केंद्र में सत्तारूढ़ भाजपा नीत सरकार को सत्ता से हटाने के लिए अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने की रणनीित पर विचार कर रही है। विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन को लेकर कांग्रेस की उत्सुकता को उसकी पूर्व की ‘एकला चलो’ की नीति में बदलाव के रूप में देखा।</p>
<p style="text-align:justify;">पार्टी सूत्रों ने कहा कि उत्तर प्रदेश में कैराना लोकसभा और नूरपुर विधानसभा सीटों पर संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार खड़ा करने की रणनीति की जबरदस्त सफलता के मद्दनेजर कांग्रेस समूचे देश में विभिन्न सीटों पर क्षेत्रीय विपक्षी दलों के साथ गठबंधन की संभाव्यता पर गौर कर रही है। इसी सप्ताह कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि सभी राज्यों के लिए एक समान रणनीति नहीं हो सकती।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल पार्टी 2019 लोकसभा चुनाव में भाजपा विरोधी मतों को अपनी ओर मिलाने की रणनीति पर काम कर रही है। सूत्रों ने कहा कि कांग्रेस करीब 400 लोकसभा सीटों पर क्षेत्रीय दलों के साथ गठबंधन की संभावना पर नजर रखे हुए है।इसके अलावा वह इसी साल के अंत में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में होने जा रहे विधानसभा चुनाव में अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन के लिए विचार कर रही है। इन दोनों राज्यों में वर्तमान में भाजपा की ही सरकारें हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि कांग्रेस मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव के लिए बहुजन समाज पार्टी(बसपा) से गठबंधन की दिशा में काम कर रही है। पार्टी के वरिष्ठ नेता कमलनाथ एवं ज्योतिरादित्य सिंधिया ने मध्य प्रदेश में चुनाव पूर्व गठबंधन के लिए बसपा प्रमुख मायावती और वरिष्ठ बसपा नेता सतीश मिश्रा से भी बात की है। छत्तीसगढ़ में भी भाजपा के विरोधी मतों को अपने खाते में बटोरने के लिए ऐसे ही गठबंधन का प्रयास किया जा रहा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/congress-in-the-wake-of-coalition-with-regional-parties/article-3932</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/congress-in-the-wake-of-coalition-with-regional-parties/article-3932</guid>
                <pubDate>Sun, 03 Jun 2018 13:05:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-06/rahul.jpg"                         length="19637"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेज होती गठबंधन की राजनीति</title>
                                    <description><![CDATA[गुजरात विधानसभा चुनाव और उपचुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देने के बाद भाजपा विरोधी दलों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। अभी हाल ही में देश के सबसे बड़े राज्यं उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीटों पर सपा को मिली जीत के बाद विपक्ष को अपना भविष्य उज्जवल दिखाई दे रहा है। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/fierce-coalition-politics/article-3685"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/hand.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गुजरात विधानसभा चुनाव और उपचुनाव में भाजपा को कड़ी टक्कर देने के बाद भाजपा विरोधी दलों का आत्मविश्वास सातवें आसमान पर है। अभी हाल ही में देश के सबसे बड़े राज्यं उत्तर प्रदेश की गोरखपुर और फूलपुर संसदीय सीटों पर सपा को मिली जीत के बाद विपक्ष को अपना भविष्य उज्जवल दिखाई दे रहा है। अगर ये कहा जाए कि यूपी उपचुनाव ने आगामी लोकसभा चुनावों के लिए एक नई भूमिका तैयार कर दी है तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी। बसपा और सपा का गठबंधन इशारा कर रहा है कि भाजपा के लिए यूपी में डगर बहुत कठिन होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इन दिनों देश के अन्य कई भागों में भी भाजपा को भारी नाराजगी का सामना करना पड़ रहा है। नाराज मतदाताओं का मानना है कि जिस मोदी लहर से यह पार्टी सत्ता में आई थी, वे दावे केवल भाषणबाजी तक सीमित होकर रह गये। तमाम महकमों में भ्रष्टाचार ज्यों का त्यों है, तरीके बदल गये हैं। कश्मीर में आतंकवाद बढ़ा है। सीमा पर जवान पहले से ज्यादा शहीद हो रहे हैं। नक्सलवाद खत्म नहीं हुआ। देखा जाए तो ंराज्यसभा चुनाव इतने महत्त्वपूर्ण कभी साबित नहीं हुए, जितने इस बार हुए। देश की आजादी के बाद पहली बार भाजपा राज्यसभा में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर पुख्ता हुई है और कांग्रेस की संख्या 50 सांसदों से भी कम हो गई है। राज्यसभा चुनाव से पहले भाजपा के 58 सांसद थे, जो अब बढ़कर 70 हो गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा नेतृत्व वाले एनडीए के सांसदों की संख्या भी 89 तक (पहले 77 थी) पहुंच गयी है। कांग्रेस का वर्चस्व संसद के उच्च सदन में समाप्त हो गया है। उसके सांसद 54 से घटकर 46 पर आ गये हैं। यूपीए सांसद भी 60 से कम होकर 52 तक लुढ़क आए हैं। अलबत्ता अन्य सांसदों की ताकत अब भी 102 हो गयी है। जो विभिन्न विधायी और बहस तलब मुद्दों पर निर्णायक साबित होगी। राज्यसभा में 245 सांसद होते हैं, जिनमें से 233 चुनकर आते हैं और 12 को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा बहुमत का आंकड़ा 123 है। भाजपा-एनडीए अब भी बहुमत से बहुत दूर हैं, लेकिन फासले सिमट रहे हैं। अब राज्यसभा में जो समीकरण बन रहे हैं, उनके मद्देनजर 2019 तक भाजपा-एनडीए बहुमत के और भी करीब पहुंचेंगे। जिस तरह भूमि अधिग्रहण अध्यादेश (बाद में बिल) और तीन तलाक विधेयक पर मोदी सरकार को संसद के उच्च सदन में मुंह की खानी पड़ी थी, कमोबेश अब ऐसे मौके कम ही होंगे, लेकिन अन्य सांसद भी वैचारिक तौर पर भाजपा-मोदी-विरोधी हैं, लिहाजा राज्यसभा में भी बहुमत का आंकड़ा छूने के मद्देनजर सत्तारूढ़ पक्ष को अन्य दलों के साथ बेहतर तालमेल बनाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे महत्त्वपूर्ण उप्र के राज्यसभा चुनाव रहे, जिसमें अखिलेश यादव की सपा मायावती की बसपा के उम्मीदवार भीमराव अंबेडकर को जिता नहीं सकी। एक बार फिर साबित हो गया कि सपा के वोट बसपा की ओर शिफ्ट नहीं होते हैं। यह जातीय, संस्कारी, परंपरागत पूर्वाग्रह हैं। जबकि बसपा ने अपने वोट बैंक के जरिए सपा को गोरखपुर और फूलपुर सरीखी महत्त्वपूर्ण लोकसभा सीटें जितवा कर साबित किया था कि बसपा के वोट सपा की ओर शिफ्ट हो सकते हैं। हालांकि उप्र की ही कैराना लोकसभा सीट पर उपचुनाव के लिए दोनों दल करार घोषित कर चुके हैं। राज्यसभा चुनाव हारने के बाद बसपा अध्यक्ष मायावती ने दावा किया है कि समझौता जारी रहेगा। उन्होंने सपा-बसपा गठबंधन के बजाय दोस्ती शब्द का इस्तेमाल किया है। दावा यह भी किया है कि अब दोनों दल नई रणनीति के जरिए भाजपा को हराएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव विशेषज्ञों के आकलन सामने आए हैं कि यदि उप्र में ही सपा-बसपा में गठबंधन हो जाए, तो भाजपा-एनडीए की कमोबेश 50 लोकसभा सीटें कम हो सकती हैं। 2014 में भाजपा-एनडीए ने उप्र की 80 में से 73 लोकसभा सीटें जीती थीं। इन आकलनों के मुताबिक, सपा-बसपा गठबंधन भाजपा-एनडीए को तगड़ा झटका देने में समर्थ है। अब सवाल यह है कि राज्यसभा चुनाव के बाद क्या यह गठबंधन होगा? यदि देश के सबसे बड़े राज्य में यह चुनावी गठबंधन नहीं होगा, तो राष्ट्र स्तर पर विपक्ष का महागठबंधन कैसे आकार लेगा?</p>
<p style="text-align:justify;">सपा-बसपा की तो नई-नई दोस्ती है, दोनों की मजबूरी है, देखते हैं कि यह समझौता गठबंधन में तबदील होता है या नहीं अथवा यारी कब तक, कहां तक खिंचती है? पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मोदी विरोधी मुहिम को फिलवक्त लीड कर रही हैं। पिछले दिनों ममता ने दिल्ली में डेरा डालकर मोदी विरोध के लिए खेमेबंदी की। इस सारी मशक्कत में एक अहम प्रश्न यह है कि अभी चुनाव को लगभग एक साल का समय है। इससे पूर्व भी तीसरा मोर्चा बनाने की कोशिशें देश में हुई हैं, जो परवान नहीं चढ़ पायी है। ऐसे में 2019 से पूर्व क्या विपक्ष एकजुट होकर भाजपा को चुनौती देगा या फिर पूर्व की भांति एकजुटता की सारी कोशिशें धाराशायी हो जाएंगी। वहीं विपक्ष को लीड कौन करेगा इस पर भी मामला फंसना और तकरार होना लाजिमी है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/fierce-coalition-politics/article-3685</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/fierce-coalition-politics/article-3685</guid>
                <pubDate>Sat, 31 Mar 2018 01:30:53 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-03/hand.jpg"                         length="60287"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गठबंधन सेना के हवाई हमलों में 600 नागरिक की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[2014 और मई 2017 के बीच सीरिया तथा इराक में हवाई हमले वाशिंगटन। अमेरिका के नेतृत्व में गठबंधन सेना की ओर से इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादियों को निशाना बनाकर वर्ष 2014 से अब तक सीरिया और इराक में किए गए हवाई हमलों में कम से कम 600 नागरिक मारे गए हैं। गठबंधन सेना की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/600-civilians-are-killed-in-coalition-air-strikes/article-2072"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/air-attack.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">2014 और मई 2017 के बीच सीरिया तथा इराक में हवाई हमले</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>वाशिंगटन।</strong> अमेरिका के नेतृत्व में गठबंधन सेना की ओर से इस्लामिक स्टेट (आईएस) के आतंकवादियों को निशाना बनाकर वर्ष 2014 से अब तक सीरिया और इराक में किए गए हवाई हमलों में कम से कम 600 नागरिक मारे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गठबंधन सेना की ओर से कल जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक अगस्त 2014 और मई 2017 के बीच सीरिया तथा इराक में किए गए हवाई हमले में कम से कम 603 नागरिक मारे गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि निगरानी समूहों की ओर से उपलब्ध कराये गये आंकड़े से यह काफी कम है। एयरवार्स निगरानी समूह के अनुसार गठबंधन सेना की ओर से किये गये हवाई हमलों में कम से कम 4354 नागरिक मारे गये हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आईएस के खिलाफ जब से अभियान शुरू किया गया है तब से 22000 हवाई हमले किये गये हैं जिनमें से 727 हवाई हमलों में नागरिक हताहत हुए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/600-civilians-are-killed-in-coalition-air-strikes/article-2072</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/other-news/600-civilians-are-killed-in-coalition-air-strikes/article-2072</guid>
                <pubDate>Fri, 07 Jul 2017 23:37:56 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-07/air-attack.jpg"                         length="24953"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        