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                <title>medicines - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Shocking News: गर्मी के मौसम में वरदान से कम नहीं है ये रेगिस्तानी फल, शरीर को देता हैं काजू-बादाम से भी ज्यादा ताकत, वजन कम करने के साथ-साथ दूर होती हैं काफी बीमारी</title>
                                    <description><![CDATA[Shocking News: गर्मियों के इस सीजन को कई मायनों में काफी स्पेशल माना जाता हैं, क्योंकि इस मौसम में कई सीजनल फल और सब्जियां बाजार में आते हैं और फलों का राजा आम भी गर्मियों में ही आता हैं। वहीं इन दिनों बीकानेर के बाजार में गूंदा (Gunda) (Gumberry) जमकर बिकता नजर आ रहा हैं, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/these-desert-fruits-are-no-less-than-a-boon-in-the-summer-season/article-57523"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/shocking-news-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Shocking News: गर्मियों के इस सीजन को कई मायनों में काफी स्पेशल माना जाता हैं, क्योंकि इस मौसम में कई सीजनल फल और सब्जियां बाजार में आते हैं और फलों का राजा आम भी गर्मियों में ही आता हैं। वहीं इन दिनों बीकानेर के बाजार में गूंदा (Gunda) (Gumberry) जमकर बिकता नजर आ रहा हैं, इसे गमबैरी या लसोड़ा भी कहा जाता हैं, बता दें कि इस रेगिस्तानी फल में ऐसे औषधीय गुण होते हैं, जिसे जानने के बाद आप भी भागकर गूंदा खरीदने की सोचेंगे।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/if-your-golgappas-do-not-rise-and-become-soft-suddenly-then-follow-this-trick/#google_vignette">Golgappa Recipe: अब आप नहीं कहोगे गोलगप्पे फूलते नहीं, सूजी हो या आटा इस तरीके से हर एक पानीपुरी एक दम परफेक्ट बनेगी</a></p>
<p style="text-align:justify;">वैसे तो भारत में हर सीजन में कई तरह के फल और सब्जियां आते हैं, और हर किसी के अंदर अपने पोषक गुण होते है, लेकिन आज हम जिस रेगिस्तानी फल की बात कर रहे हैं, उसे पावर हाउस भी कहा जाता हैं। वहीं अगर आपने इस गूंदा की खासियत जान ली तो आप भी इसे खरीदने से खुद को नहीं रोक पाएंगे। बता दें की गूंदा की बिक्री गर्मी के मौसम में अपने चरम पर होती हैं, ये रेगिस्तानी फल कुछ ही समय के लिए उपलब्ध होता हैं, लेकिन इसके फायदे आपको सालभर बिमारियों से दूर रखते हैं।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/how-long-should-one-walk-in-the-morning-in-summer-know-the-correct-duration-here/#google_vignette">Walk and Exercise in Summer: गर्मियों में सुबह कितनी देर तक सैर करनी चाहिए? यहां जानें सही अवधि</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">गर्मी में वरदान से कम नहीं है गूंदा | Shocking News</h3>
<p style="text-align:justify;">बता दें की गूंदा की डिमांड गर्मी में काफी बढ़ जाती हैं, ये फल पेट को ठंडक देते हैं, साथ ही इसे खाने से लोगों को थकान भी महसूस नहीं होती, ताजगी और पोषण देने में ये फल सबसे आगे हैं,गर्मियों में चलने वाली लू से गूंदा बचाव करता हैं, अगर आप गर्मियों में इसका सेवन करेंगे तो गर्म हवा के थपेड़ों से बचे रहेंगे। इसमें काफी मात्रा मे फाइबर भी मौजूद रहता हैं, इसकी वजह से पेट की समस्या से भी गूंदा निजात दिलाता हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">डाइटिंग में है मददगार</h3>
<p style="text-align:justify;">अगर आप लंबे समय से वजन घटाने की कोशिश कर रहे हैं और नाकामयाब हो गए हैं, तो आपके लिए गूंदा वरदान साबित हो सकता हैं, इसमें काफी कम कैलोरीज होती हैं, साथ ही फाइबर भी काफी मात्रा में मौजूद होता हैं, इस वजह से इसका सेवन पेट को लंबे समय तक भरा रखता हैं, इसके सेवन से कोलेस्ट्रॉल भी नियंत्रित रहता हैं, शुगर कंट्रोल रखने में भी ये मददगार होता हैं, इतने सारे गुणों की खान गूंदा इन दिनों लोगों की पसंद बने हुए हैं।</p>
<p>अस्वीकरण: लेख में दी गई जानकारी आपकी सामान्य जानकारी के लिए प्रदान की गई है, यह किसी ईलाज का विकल्प नहीं है। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने डॉक्टर से संपर्क कर सकते हैं या किसी एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 May 2024 11:28:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>भारत में नकली दवाओं के जाल में फंस रहे मरीज</title>
                                    <description><![CDATA[यह निर्विवाद है कि व्यक्ति मामूली बीमार होते ही सीधा एलोपैथी के अस्पताल जाना ज्यादा पसंद करता है ताकि तुरंत आराम मिल सके। इन असपतालों में अंग्रेजी दवाओं से चिकित्सा की जाती है। आजकल भारत सरकार और राज्य सरकारों ने हालाँकि अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा दे रखी है। मगर सरकारी अस्पतालों की बदहाली […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-patient-is-trapped-in-the-fake-medicines-traps-india/article-5041"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/fack-medisal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">यह निर्विवाद है कि व्यक्ति मामूली बीमार होते ही सीधा एलोपैथी के अस्पताल जाना ज्यादा पसंद करता है ताकि तुरंत आराम मिल सके। इन असपतालों में अंग्रेजी दवाओं से चिकित्सा की जाती है। आजकल भारत सरकार और राज्य सरकारों ने हालाँकि अस्पतालों में मुफ्त इलाज की सुविधा दे रखी है। मगर सरकारी अस्पतालों की बदहाली और असाध्य रोगों के इलाज के लिए लोगों को निजी अस्पतालों की शरण लेनी पड़ती है। दोनों ही स्थानों पर अंग्रेजी दवाइयों का बोलबाला है। ये दवाइयां आम आदमी की समझ से बाहर है। स्वास्थ्य पर इनके दुष्प्रभाव से हम वाकिफ नहीं है। दवाइयों की कीमत भी गरीब के लिए जानलेवा है। बाजार में कैसी कैसी दवाइयां और उनकी किस्में है इसका पता या तो डॉक्टर को है या केमिस्ट को। आम आदमी को तो खरीदने से ही मतलब है। अंग्रेजी दवाइयों के इस मकड़जाल में पूरा देश फंसा हुआ है। इस भ्रमजाल से निकलने का रास्ता अभी नहीं मिल रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंग्रेजी दवाइयों का गड़बड़झाला भारत में शुरू से ही रहा है। इसके वर्चस्व को तोड़ने की गंभीर कोशिश कभी नहीं हुई जिसके फलस्वरूप इनके दाम मनमाने तरीके से निर्धारित हुए। आम आदमी के समझ से बाहर होने के कारण अंग्रेजी दवाइयों ने खौफनाक ढंग से देश के बाजार पर अपना कब्जा कर लिया। इस जनद्रोह में विदेशी के साथ देशी कम्पनियाँ भी शामिल थी जिन्हे राजतन्त्र का परोक्ष समर्थन शामिल था। इस दौरान नकली और घाटियां दवाइयों का बाजार भी खूब फला फुला। एक रुपए में बनने वाली टेबलेट 100 रुपयों में बेचीं गई।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन रक्षक दवाइयों के दाम आसमान को छूने लगे। राजनीतिक पार्टियों और सामाजिक संगठनों ने इस लूट के खिलाफ कभी जोरदार आवाज बुलंद नहीं की। दवा कम्पनियाँ अपने राजनीतिक आकाओं के हित साधने लगी। यही नहीं घटिया और नकली दवाओं का बाजार भी खूब गर्म हुआ। मानव स्वास्थ्य के साथ सरेआम खिलवाड़ हुआ। बड़ी संख्यां में लोग मौत के मुहं में समां गए तब जाकर राज की निंद्रा टूटी। मगर आपाधापी की कारवाही के आगे कुछ नहीं हुआ। नरेंद्र मोदी की सरकार आने के बाद इस गड़बड़झाले को समझने का प्रयास अवश्य हुआ। दवाइयां कुछ हद तक सस्ती हुई मगर अभी भी आसमान काले रंग से रंगा हुआ है। इसे समझने के लिए सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीश की अध्यक्षता में किसी आयोग के गठन की जरुरत है जो देख और समझ कर दवा बाजार के गड़बड़झाले के चक्रव्यूह में सेंध लगा सके। सबसे पहले दवाओं के तिलिस्म को समझने की जरुरत है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक रिपोर्ट के अनुसार दुनिया में लगभग 200 बिलियन डालर का घटिया और नकली दवाओं एवं वैक्सीन का धंधा है। एशिया में बिकने वाली 30 प्रतिशत दवाएँ नकली या घटिया हैं। भारत में बिकने वाली हर पाँच गोलियों के पत्तों में में से एक नकली है। इन दवाइयों से हर वर्ष लगभग 5 प्रतिशत धनहानि देश को होती है और ये धंधा बेरोकटोक चल रहा है और असली दवाइयों के व्यापार से भी ज्यादा तरक्की कर रहा है। दो वर्ष पहले के एक सर्वे से पता चला है कि एशिया घटिया और नकली दवाइयों का सबसे बड़ा उत्पादक है। नकली दवाइयों और वैक्सीनों से हर वर्ष लगभग 10 लाख लोग काल के गाल में समा जाते है। भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय की माने तो भारत में 5 प्रतिशत दवाएँ चोर दरवाजे वाली एवं ०.3 प्रतिशत नकली हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में 10,500 दवा कंपनियां हैं, लेकिन 1400 दवा कंपनियां ही डब्ल्यूएचओ जीएमपी सटीर्फाइड हैं।दवा एक केमिकल होता है। रसायन होता है। दवा कंपनियां अपने मुनाफा एवं विपरण में सहुलियत के लिए इन रसायनों को अलग से अपना ब्रांड नाम देती है। जैसे पारासेटामल एक साल्ट अथवा रसायन का नाम है लेकिन कंपनिया इसे अपने हिसाब से ब्रांड का नाम देती हैं और फिर उसकी मार्केंटिंग करती है। ब्रांड का नाम ए हो अथवा बी अगर उसमें पारासेटामल साल्ट है तो इसका मतलब यह है कि दवा पारासेटामल ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दवाओं के दुष्प्रभावों का अध्ययन करने वाली संस्था फामार्कोपिया कमीशन ने 105 तरह की दवाओं को लेकर अलर्ट जारी किया है। इन दवाओं से आप किडनी लीवर और हार्ट के गंभीर मरीज बन सकते हैं। ये दवाएं ऐसी हैं जिन्हें हम सामान्यतौर पर खाते रहते हैं और डॉक्टर से कई बार पूछने की जहमत तक नहीं उठाते। फार्मा कंपनियों को भी अब सिगरेट पैकेट की तरह वैधानिक चेतावनी दवाओं के लिए भी जारी करनी पड़ सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>बाल मुकुन्द ओझा</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 29 Jul 2018 02:18:25 +0530</pubDate>
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                <title>नरमा पट्टी पर सफेद मक्खी ने बरपाया कहर</title>
                                    <description><![CDATA[समस्या: किसानों को मिल रहे नकली बीज व दवाएं : शिंगारा सिंह मान नथाना (गुरजीवन सिद्धू)। चाहे सरकार व कृषि विभाग किसानों को अच्छी कीड़ेमार दवाएं, बीज, खादें आदि मुहैया करवाने का लाख दावा करें, परंतु सच्चाई यह है कि किसानों की परेशानियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। क्षेत्र में नरमे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/fake-seeds-and-medicines-to-farmers/article-2080"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/cotton.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">समस्या: किसानों को मिल रहे नकली बीज व दवाएं : शिंगारा सिंह मान</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नथाना (गुरजीवन सिद्धू)।</strong> चाहे सरकार व कृषि विभाग किसानों को अच्छी कीड़ेमार दवाएं, बीज, खादें आदि मुहैया करवाने का लाख दावा करें, परंतु सच्चाई यह है कि किसानों की परेशानियां कम होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। क्षेत्र में नरमे के नीचे क्षेत्रफल को पहले बरसात के पानी ने बर्बाद कर दिया व अब पड़ी सफेद मक्खी ने किसानों को पूरी तरह से परेशान कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हर रोज किसी न किसी गांव में किसानों द्वारा बेबसी की हालत में पुत्रों की तरह पाली नरमे की फसल को नष्ट करने का दुखदायी समाचार सुनने को मिल रहा है। नथाना के एक किसान जगमीत सिंह पुत्र गुरजंट सिंह ने सफेद मक्खी की मार नीचे आई अपनी तीन एकड़ नरमे की फसल नष्ट कर दी है।</p>
<h2>किसानों ने सफेद मक्खी से परेशान होकर नष्ट किया नरमा</h2>
<p>इसी तरह गांव नाथपुरा के किसान गुरमीत सिंह पुत्र लछमण सिंह ने सफेद मक्खी के हमले के कारण दो एकड़ नरमे की फसल नष्ट कर दी है। जगमीत सिंह ने बताया कि उसने अपनी फसल को बचाने के लिए खेती विशेषज्ञों की शिफारिश अनुसार कई किस्म की कीटनाशक दवाओं का छिड़काव फसल पर किया परंतु किसी भी दवा ने कोई प्रभाव नहीं दिखाया,</p>
<p style="text-align:justify;">जिस कारण मजबूरन उसको अपनी फसल नष्ट करनी पड़ी। बरसात की मार झेल रहे गांव बज्जोआना के किसान निर्मल सिंह पुत्र बिक्कर सिंह, मेजर सिंह पुत्र जोगिन्द्र सिंह, सुखदीप सिंह पुत्र सुखदेव सिंह ने अपनी 6-6 एकड़ क्षेत्रफल में बीजी नरमे की फसल नष्ट कर दी है। इस तरह हजारों रुपए की फसल पालन पर हुआ खर्च उनके सिर चढ़ गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नरमा नष्ट करने की नौबत नहीं आई: डॉ. बराड़</h2>
<p style="text-align:justify;">जब सफेद तेले संबंधी डॉ. जतिन्दर सिंह बराड़ से बातचीत की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा केस उनके ध्यान में नहीं आया परन्तु उन्होंने किसानों से अपील की है कि नरमे को नष्ट न किया जाए। थोड़ा-बहुत तेला तो आसपास धान में ठहरे पानी कारण ही हो जाता है और पिछले सीजन दौरान सफेद तेले का प्रकोप अधिक था।</p>
<p style="text-align:justify;">किसी भी चीज को एकदम खत्म नहीं किया जा सकता, परंतु अभी तक नरमा नष्ट की नौबत नहीं आई। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि नरमा नष्ट करने से पहले कृषि विभाग के स्काउट या संबंध्ति खेती विकास अधिकारी से जरूर सम्पर्क करें, जिससे जो भी समस्या हो उसको हल किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>अकाली-भाजपा सरकार समय भी किसानों को कीटनाशक, खादें और बीज नकली दिया जा रहा था परंतु चुनावों के समय किसान हितैषी होने का ढिंडोरा पीटने वाली कांग्रेस पार्टी की सरकार अब क्यों हाथ पर हाथ रखकर बैठी है, क्यों नहीं कीटनाशक सफेद मक्खी का खात्मा कर रही। बाजारों में शरेआम किसानों को यह सब कुछ नकली दिया जा रहा है, जिस कारण पिछले समय दौरान भी नरमे की फसल पर सफेद मच्छर का हमला नहीं रुका था, उसी तरह ही अब भी जारी है।</em></p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-किसान यूनियन जिला प्रधान शिंगारा सिंह मान</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/fake-seeds-and-medicines-to-farmers/article-2080</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2017 00:43:23 +0530</pubDate>
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