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                <title>Inspiration - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>20 वर्ष पूर्व दोनों हाथ खोए, लेकिन हौंसला नहीं, 13 वर्षां से Sach Kahoon वितरण की सेवा कर रहा जसपाल इन्सां </title>
                                    <description><![CDATA[पाठक बोले: जसपाल की सराहनीय सेवाओं को सलाम || Jaspal Insan ओढां, (सरसा) राजू। कहावत है कि अगर हौसला बुलंद और इरादों में जान हो तो इस जहाँ में कुछ भी असंभव नहीं है। 42 वर्षीय जसपाल इन्सां (Jaspal Insan) ने 20 वर्ष एक हादसे में दोनों हाथ खो दिए थे, लेकिन हौसला नहीं। हिम्मत, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/inspirational-story-of-jaspal-insan/article-58561"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-06/jaspal-insan.jpeg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>पाठक बोले: जसपाल की सराहनीय सेवाओं को सलाम || Jaspal Insan</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>ओढां, (सरसा) राजू।</strong> कहावत है कि अगर हौसला बुलंद और इरादों में जान हो तो इस जहाँ में कुछ भी असंभव नहीं है। 42 वर्षीय जसपाल इन्सां (Jaspal Insan) ने 20 वर्ष एक हादसे में दोनों हाथ खो दिए थे, लेकिन हौसला नहीं। हिम्मत, हौसले व आत्मविश्वास को जसपाल ने ऐसे समेटा की दिव्यांगता भी उसके सामने नतमस्तक हो गई। इस शख्स से सच-कहूँ संवाददाता राजू ओढां ने विशेष बातचीत की।</p>
<p style="text-align:justify;">सरसा जिला के गांव मलिकपुरा निवासी जसपाल इन्सां ने बताया कि जब उसके साथ ये हादसा हुआ उस समय उसकी उम्र करीब 22 वर्ष की थी। इस हादसे ने उसकी जिंदगी में अंधेरा सा भर दिया। उसे ये समझ नहीं आ रहा था कि वह हाथों के बगैर अब कैसे जीएगा, कैसे उसकी जिंदगी कटेगी। इन सवालों के अंधेरे में फंसे जसपाल के लिए पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन वचन आशा की किरण साबित हुए। जिसके बाद उसने इन परिस्थितियों से लड़ने का फैसला लिया। इस फैसले ने जसपाल की अंधेरी जिंदगी में उजाला भर दिया।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>13 वर्षां से दे रहा है निरंतर सेवा, बना रखा है स्पेशल थैला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">जसपाल ने जिस दिन से गांव में सच-कहूँ वितरण की सेवा संभाली है तब से वह पिछले निरंतर 13 वर्षांे से सराहनीय सेवा दे रहा है। पहले सच-कहूँ नेशनल हाईवे पर गांव मिठड़ी में उतरता था जो उनके गांव से करीब 4 किलोमीटर दूर पड़ता है। अलसुबह उठकर नारा लगाकर वह पैदल ही सच-कहूँ लेने चला जाता। लेकिन कुछ समय बाद अखबार का बंडल उसके घर आना शुरू हो गया। सुबह करीब साढ़े 5 बजे जसपाल के पास सच-कहूँ का बंडल पहुंच जाता है। जसपाल ने अपनी सुविधा के अनुसार स्पेशल थैला बना रखा है। जिसमें अखबार रखकर वह पैदल ही गांव में वितरण के लिए निकल पड़ता है। जसपाल करीब एक घंटे में ये सेवा पूरी कर लेता है। जसपाल गले में डाले गए स्पेशल थैले से मुंह से अखबार निकालता है और अपने कटे हुए दोनों हाथों से सत्कार सहित पाठक को सौंप देता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>नहीं कोई परेशानी </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">जसपाल एक अलग ही जोश के साथ सच-कहूँ वितरण की सेवा करता है। जसपाल ने पूछे जाने पर बताया कि उसे सच-कहूँ वितरण में कोई परेशानी नहीं। उसे ये हौसला उसके गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने दिया है। वह जो भी कुछ कर रहा है वो पूज्य गुरु जी की रहमत से ही संभव हो पा रहा है। सच-कहूँ के पाठकों के मुताबिक गांव में सुबह समय पर अखबार का वितरण हो रहा है। पाठकों ने जसपाल के जज्बे को सलाम करते हुए उसकी सराहना की है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>मैं करुंगा ये सेवा  </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गांव मलिकपुरा में सच-कहूँ वितरण सुबह देर से होने के चलते नामचर्चा में साध-संगत विचार विमर्श कर रही थी। इसी दौरान जसपाल ने ये सेवा करने की बात कहते हुए खड़े होकर नारा लगा दिया। ये देखकर उपस्थित साध-संगत आश्चर्यचकित रह गई। उन्होंने जसपाल से कहा कि वह बगैर हाथों के ये सेवा कार्य कैसे करेगा। दूसरा वह कोई वाहन भी नहीं चला सकता। सच-कहूँ 4 किलोमीटर दूर से लाना भी पड़ेगा। लेकिन जसपाल ने यह कहकर सभी को नि:शब्द कर दिया कि करने वाले तो पूज्य गुरु जी हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>20 वर्ष पूर्व खो दिए थे दोनों हाथ </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">करीब 20 वर्ष पूर्व घर के निकट ट्रांसफार्मर पर फ्यूज लगाते समय जसपाल को अचानक करंट लग गया था। इस हादसे में उसे कोहनी से ऊपर तक दोनों हाथ खोने पड़े। हादसे के 2 दिन बाद परिजनों ने जसपाल की शादी के विषय में बातचीत करने जाना था। लेकिन शायद किस्मत को ये स्वीकार न था। जसपाल ने बताया कि उसे जिंदगी से अब कोई गिला नहीं है। जो लोग कई बार विकट परिस्थितियां आने के बाद हौसला छोड़ देते हैं उन लोगोंं से जसपाल ने अपील करते हुए कहा कि हौसला न छोड़ें। हिम्मत-हौसला है तो सब-कुछ है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jun 2024 11:34:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Project Chetna : लापता लोगों का पता लगाने के लिए तकनीकी नवाचार</title>
                                    <description><![CDATA[– Project Chetna – विश्व जनसंख्या समीक्षा 2023 के अनुसार, भारत में हर महीने 64,851 लोग लापता हो जाते हैं। इस तथ्य से प्रेरित होकर एक युवा छात्र ने इसके बारे में कुछ करने का फैसला किया। अक्षय रिडलान (जो 2019 में यूपीएससी के अभ्यर्थी थे) परीक्षा की तैयारी के लिए हर सुबह अखबार पढ़ते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/project-chetna-for-missing-people/article-56113"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/project-chetna.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Project Chetna –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">विश्व जनसंख्या समीक्षा 2023 के अनुसार, भारत में हर महीने 64,851 लोग लापता हो जाते हैं। इस तथ्य से प्रेरित होकर एक युवा छात्र ने इसके बारे में कुछ करने का फैसला किया। अक्षय रिडलान (जो 2019 में यूपीएससी के अभ्यर्थी थे) परीक्षा की तैयारी के लिए हर सुबह अखबार पढ़ते थे। तभी उनकी नजर लापता लोगों की खबर पर पड़ी। तब वह केवल 20 वर्ष के थे। अपने प्रियजनों से बिछड़े हुए लोगों के परिवारों का दु:ख देखकर उन्हें बहुत कष्ट हुआ। इस समस्या को प्रभावी ढंग से समाप्त करने के लिए उन्होंने प्रौद्योगिकी-आधारित समाधान बनाने का निर्णय लिया। अक्षय ने 12 सितंबर 2023 को प्रोजेक्ट ‘चेतना’ (Project Chetna) लॉन्च किया और इसके माध्यम से वह एक क्यूआर टैग लेकर आए, जिसे एक पेंडेंट के अंदर गर्दन के चारों ओर पहना जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">स्कैन करने पर ये क्यूआर कोड इसे पहनने वाले व्यक्ति के बारे में संपर्क विवरण और चिकित्सा जानकारी प्रदान करते हैं। इन टैगों का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं वाले कमजोर रोगियों और नागरिकों की मदद करना है। अक्षय कहते हैं, ‘जब लोग खो जाते हैं, तो यह क्यूआर टैग उनकी चिकित्सा स्थिति, आपातकालीन संपर्क और घर का पता जैसी आवश्यक जानकारी प्रदान कर सकता है। दरअसल, क्यूआर टैग डिमेंशिया से पीड़ित लोगों के लिए बीमा है। मैंने यह तंत्र इसलिए बनाया ताकि पहचान की प्रक्रिया तेज हो और लापता नागरिक जल्द ही घर आ सकें। आपको बस लॉग इन करना है, रजिस्टर पर क्लिक करना है, जिस व्यक्ति के लिए आप इसे बना रहे हैं उसका व्यक्तिगत विवरण भरना है और आपको क्यूआर पेंडेंट मिल जाएगा। कोई भी व्यक्ति जिसके पास फोन है वह कोड को स्कैन कर जानकारी प्राप्त कर सकता है।’</p>
<p style="text-align:justify;">अक्षय ऐसी तकनीक भी बना रहे हैं, जो किसी के भी क्यूआर स्कैन करने पर आपको अलर्ट कर देगी। उदाहरण के लिए, यदि मुंबई से कोई व्यक्ति भटककर बेंगलुरु चला गया है। अगर वहां कोई क्यूआर स्कैन करेगा, तो आपको नोटिफिकेशन मिल जाएगा। इससे लापता होने वाले लोगों की जान बचाने में मदद मिलेगी। उन्होंने अपने प्रोजेक्ट का नाम ‘चेतना’ रखा क्योंकि इसका उद्देश्य उन लोगों की मदद करना है जो अपनी चेतना खो चुके हैं। क्यूआर आधारित डिजिटल पहचान प्रणाली में प्रत्येक पेंडेंट बनाने में अक्षय को 200 रुपये का खर्च आता है और उन्होंने अब तक 100 पेंडेंट मुफ्त में दिए हैं। अक्षय ने इससे पहले फरवरी 2023 में पालतु कुत्तों के लिए भी ऐसे क्यूआर टैग बनाए थे। उनके कुत्ते के लापता होने के बाद उन्हें ऐसा करने की प्रेरणा मिली। यह विशेष क्यूआर कोड जानवर का नाम, लिंग, देखभाल करने वाले का नाम, फोन नंबर और टीकाकरण/नसबंदी का इतिहास बताता है। हालांकि ये दोनों नवाचार उपयोगी है, लेकिन बड़े पैमाने पर सफल होने के लिए इन्हें बहुत अधिक जागरूकता की आवश्यकता है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Apr 2024 11:17:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कड़वा बोलने वाले अफसर हो हुआ अपनी गलती का अहसास</title>
                                    <description><![CDATA[डेरा सच्चा सौदा, सरसा में भवन निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा था। सेवादार भाई पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार तन्मयता से सेवा में जुटे हुए थे। नई दीवारों पर टीप करने के लिए 50 बोरी सीमेंट की आवश्यकता थी। उन दिनों सीमेंट बाजार में बहुत ही कम मिलता था। सीमेंट का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/bitter-speaking-officer-has-realized-his-mistake/article-30652"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/saha-mastana-ji-maharaj1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">डेरा सच्चा सौदा, सरसा में भवन निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा था। सेवादार भाई पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज के हुक्मानुसार तन्मयता से सेवा में जुटे हुए थे। नई दीवारों पर टीप करने के लिए 50 बोरी सीमेंट की आवश्यकता थी। उन दिनों सीमेंट बाजार में बहुत ही कम मिलता था। सीमेंट का परमिट प्रशासन से आवश्यकतानुसार लेना होता था। परमिट देने का कार्य तहसीलदार के जिम्मे था। आप जी ने सरसा शहर के ही एक भक्त खुशी राम की ड्यूटी लगाई कि वह सीमेंट प्राप्त करने की अर्जी लिखवार कर तहसीलदार के पास जाए और उसे सीमेंट का परमिट देने के लिए कहे। उसने तहसील कार्यालय जाकर तहसीलदार को सीमेंट पाने की अर्जी दी।</p>
<p style="text-align:justify;">तहसीलदार ने अर्जी पढ़कर उससे पूछा कि क्या यह वही सच्चा सौदा है, जहां मकान बनाते और गिराते हैं? सेवादार के ‘हां जी’ कहने पर तहसीलदार ने अर्जी को फैंकते हुए कहा सीमेंट का परमिट नहीं मिलेगा। भक्त खुशी राम उठकर वापिस चलने लगा तो तहसीलदार बोला कि पांच बोरियों का परमिट तो ले जाओ। सेवादार ने कहा हमें तो पचास बोरियों का ही परमिट चाहिए। फिर तहसीलदार ने बिल्कुल ही मना कर दिया और वह वापिस दरबार आ गया। आप जी ने पूछा, ‘‘परमिट लाए हो?’’ वह बोला कि आपजी ने दिलवाया ही नहीं है? आप जी ने फरमाया, ‘‘पुट्टर ! सब्र रख।’’</p>
<p style="text-align:justify;">तहसीलदार ने अपने साथी अफसरों के साथ उक्त घटना की चर्चा की और बताया कि मुझसे ऐसा हुआ है। उनमें से एक-दो अफसर शहनशाह के प्रति श्रद्धा भाव रखते थे। उन्होंने अपने साथी तहसीलदार को कहा कि तुझसे भारी गलती हुई है। इसी रविवार को हम सभी एकत्रित होकर पूजनीय शाह मस्ताना जी के पास आश्रम में दर्शनों के लिए चलेंगे और इस गलती की माफी मांगेेंगे। रविवार को दो जीपों में सवार होकर अधिकारीगण सरसा आश्रम में आ पहुुंचे। उन्होंने आदरपूर्वक दाता जी को बताया कि हम गलती की माफी मांगने आए हैं। आप जी ने उन सभी अफसरों को सम्मानपूर्वक चाय पिलवाई। फिर उन्होंने आप जी से आश्रम दिखाने की इच्छा प्रकट की। इस पर आप जी उन्हें आश्रम दिखाने लगे।</p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Feb 2022 06:05:25 +0530</pubDate>
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                <title>प्यारे सतगुरू जी ने सीआईडी अधिकारियों के भ्रम को किया दूर</title>
                                    <description><![CDATA[वे बाहर के सीआईडी के लोग हैं, असीं हुए अंदर के सीआईडी।’’ वे लोग चकित रह गए कि इनको कैसे मालूम हुआ क्योंकि उनकी बात गोपनीय थी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/dear-satguru-ji-removed-the-confusion-of-cid-officers/article-28528"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/mastana-ji-23.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>सन् 1958, दिल्ली </strong></h3>
<p style="text-align:justify;">परम पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज जीवोद्धार के लिए दिल्ली में पुराने सत्संगी श्री रक्खा राम जी के निवास स्थान पर कुछ दिनों से ठहरे हुए थे। कुछ सेवादार भी साथ थे। रात को रोज मजलिस लगती। नए-पुराने सत्संगियों को जैसे ही पता चला कि सच्चे सौदे वाले महाराज जी यहां पधारे हुए हैं तो संगत रोज बढ़ने लगी। दिल्ली के सीआईडी विभाग वालों को पता चला कि यहां एक मस्त फकीर आया हुआ है। वह किसी से चंदा नहीं लेता है, न ही मात्था टिकवाता है और सच्चाई पर चलने का उपदेश देता है। वह फकीर सोना, चांदी, नोट आदि सामान बांटता है। मकान भी नए बनवाता व गिरवाता है। ऐसा करने के लिए उसके पास पैसा कहां से आता है? वह कहता है कि यह सतगुरू का गैबी अटूट खजाना है। यह गैबी गुप्त खजाना क्या है? कहां है? उस राज का खुलासा होना चाहिए। अंतर्यामी सतगुरू जी ने शाम के समय एक सेवादार से कहा, ‘‘जाकर देखो टोकरी में कितने मालटे पड़े हैं?’’ उसने बताया कि पांच-छ: रखे हुए हैं। आप जी ने सेवादार को कहा, ‘‘दस मालटे टोकरे में पूरे कर लो।’’ उसने वैसा ही किया। रात को मजलिस में सीआईडी के 10 अफसर व कर्मचारी सादी पोशाक में आकर साध-संगत में अलग-अलग जगहों पर बैठ गए और वहां बैठे भक्तों से आप जी के बारे में पूछताछ करने लगे। मजलिस शुरू हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">भजन गाए जा रहे थे-‘ध्यान सतगुरू से जो तू लगाए, जीवन तेरा सुधर जाए…।’ तथा ये कहानी है अंदर वाले जिंदाराम की…। बताया गया कि जिस समय इन्सान नाम-शब्द प्राप्त कर लेता है और सच्चे सौदे के नियमों को अच्छी तरह समझकर अपना लेता है तो उसे फिर दु:खों और कठिनाईयों भरे रास्ते पर नहीं चलना पड़ता। जीव सुख के मार्ग की ओर अग्रसर हो जाता है। ऐसा देख सुनकर सीआईडी कर्मचारियों के दिलों पर गहरा प्रभाव पड़ा। शहनशाह शाह मस्ताना जी थोड़ी देर बाद स्टेज पर पधारे और आई हुई साध-संगत का नारा स्वीकार किया। सांई जी भक्तों को समझाने लगे कि उस आदमी का संग करो जो मालिक के प्रेम की आग में जलता हो तथा जिसके अंदर मालिक के मिलने की सच्ची तड़प हो। काफी समय से चल रही रूहानी मजलिस के दौरान घट-घट के जाननहार शहनशाह जी ने फरमाया, ‘‘आप सीआईडी के कुछ लोग आए हुए हैं। वे बाहर के सीआईडी के लोग हैं, असीं हुए अंदर के सीआईडी।’’ वे लोग चकित रह गए कि इनको कैसे मालूम हुआ क्योंकि उनकी बात गोपनीय थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बाहर की और अंदर की सीआईडी क्या होती है? आप जी ने आगे फरमाया, ‘‘काल की सीआईडी बाहर की और परमेश्वर की सीआईडी अंदर की। वरी! अपना दोनों का महकमा एक ही है। इसलिए घबराओ न, असी अपना कार्य करते हैं तुसी अपना कार्य करो। तुम को माल्टा खिलाते हैं।’’ सेवादार से माल्टों वाली टोकरी मंगवाई और आप जी ने अपने पवित्र कर-कमलों से सीआईडी वालों को अकेले-अकेले इशारे से बुलाकर एक एक माल्टा दिया तथा साथ में भरपूर प्यार भरी दृष्टि भी डालते रहे। दस माल्टे पूरे करने वाले सेवादार को भी समझ में आ गया कि दाता जी ने पहले ही इतने माल्टे क्यों रखवाए थे? सीआईडी के कर्मचारियों का भ्रम दूर हो गया। उनको समझ में आ गया कि यहां तो केवल रूहानियत का ही व्यापार होता है। राम नाम का ही प्रचार-प्रसार होता है। अंदर वाला जिंदाराम ही गैबी खजाना है। पूजनीय शहनशाह शाह मस्ताना जी महाराज उच्च कोटि के फकीर हैं। सतगुरू का धन-धन करते हुए वे लोग वापिस चले गए।</p>
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                                                            <category>आध्यात्मिक</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/spiritual/dear-satguru-ji-removed-the-confusion-of-cid-officers/article-28528</link>
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                <pubDate>Sun, 21 Nov 2021 14:53:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>सच्चे सतगुुरू जी ने की भक्त की संभाल</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश के एक गांव गेजा से श्री मामराज ने जब पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज से नाम लिया तो उसका जीवन ही बदल गया। सतगुरू जी की याद और दर्शन पाने की तड़प उसे हर समय रहती थी। वह सभी मासिक सत्संगों पर डेरा सच्चा सौदा, सरसा पहुंचने को तैयार रहता। कई बार तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/true-satguru-ji-took-care-of-the-devotee/article-28294"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/mastana-ji-21.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश के एक गांव गेजा से श्री मामराज ने जब पूजनीय शाह मस्ताना जी महाराज से नाम लिया तो उसका जीवन ही बदल गया। सतगुरू जी की याद और दर्शन पाने की तड़प उसे हर समय रहती थी। वह सभी मासिक सत्संगों पर डेरा सच्चा सौदा, सरसा पहुंचने को तैयार रहता। कई बार तो उत्तर प्रदेश से सरसा के लिए पैदल ही चल पड़ता। सतगुरू के दर्शन पाना ही उसका लक्ष्य होता। शाही दरबार में आकर उसे दुनिया भर की खुशियां प्राप्त होती। मासिक सत्संग में अभी चार-पांच दिन ही शेष थे। भक्त मामराज को अपने मुर्शिद के पास जाने की प्रबल इच्छा पैदा हुई। अकेला ही वह सरसा के लिए घर से पैदल चल पड़ा। दिल के अंदर सतगुरू की प्यारी यादें संजोए, ख्यालों में पिछले मासिक रूहानी सत्त्संगों की मधुर यादों को ताजा करता हुआ अपनी मंजिल की ओर बढ़ रहा था। सत्संगी मामराज अपने सारे फिक्र उस फिक्र करने वाले स्वामी को सौंपकर बेफिक्र था।</p>
<p style="text-align:justify;">रास्ते में एक गांव में सांयकाल उस भक्त ने पानी पिया तथा वहां पड़Þी चारपाई पर बैठ गया। भक्त मामराज को नींद आ गई। वह घर एक चौधरी का था। उन लोगों ने उसे चोर समझकर एक कमरे में बंद कर दिया और सोचा कि सुबह पुलिस थाने में दे आएंगे। वह कमरे में बंद था। सतगुरू जी से सहायता की पुकार करते हुए सुमिरन पर बैठ गया। उसको अपने मुर्शिद पर पूर्ण श्रद्धा एवं विश्वास था। आधी रात के समय उस परिवार के मुखिया का लड़का उठकर अपने पिता के पास आकर कहने लगा कि मुझे एक सफेद कपड़ों वाले, सफेद दाढ़ी वाले बाबा जी अपनी डंगोरी से कुछ कहते हैं। चौधरी ने अपने लड़के को बताया कि जो बेटा सो जा, सपना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">परंतु उस लड़के के साथ तीन बार ऐसा हुआ और लड़का बोला कि बाबा जी ने कहा है कि हमारे आदमी को बिना कसूर तुमने क्यों पकड़ा? फिर उस परिवार को सारी बात समझ में आई। तुरंत भक्त मामराज के पास परिवार के सदस्य आए और सारी बात उससे पूछी कि तू कहां से आया है और तूने कहां जाना है? सफे द दाढ़ी वाले, बाबा जी कौन हैं? सारी बात पता चलने पर चौधरी परिवार को अपनी नादानी पर पश्चाताप हुआ और वे माफी मांगने लगे। वहां से भक्त मामराज फिर पैदल खुशी-खुशी सतगुरू जी के दर की ओर चल पड़ा।</p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Nov 2021 07:05:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सच्चे सतगुरू जी ने शिष्य को बख्शी नई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[मैं लगभग 13-14 साल का था। हमने अभी नया घर बनाया था। घर बनाने के 5 दिन बाद मैं मकान की छत पर पानी से तराई कर रहा था कि अचानक मेरा पैर फिसल गया और मैं छत से 12 फुट की ऊंचाई से पीठ के बल गिर गया। मुझे ऐसा लगा जैसे पूजनीय परम […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">मैं लगभग 13-14 साल का था। हमने अभी नया घर बनाया था। घर बनाने के 5 दिन बाद मैं मकान की छत पर पानी से तराई कर रहा था कि अचानक मेरा पैर फिसल गया और मैं छत से 12 फुट की ऊंचाई से पीठ के बल गिर गया। मुझे ऐसा लगा जैसे पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने मुझे अपनी गोद में उठाकर धीरे से जमीन पर लिटा दिया हो। उसके बाद मैं बेहोश हो गया। मेरे घर वालों ने सोचा कि लड़का तो मर गया। सभी रोने लगे। यह बात किसी भाई ने पूजनीय परम पिता जी को बता दी। यह सुनकर पूजनीय परम पिता जी ने सत ब्रह्मचारी सेवादार को भेजा और फरमाया, ‘‘परिवार को कहना, फिक्र न करें।</p>
<p style="text-align:justify;">’’ जब वह सेवादार हमारे घर पहुंचा और पूजनीय परम पिता जी का फरमान बताया तो उसी समय मुझे होश आ गया और मैंने कहा, मुझे कुछ नहीं हुआ। मैं बिल्कुल ठीक हूं। जब मैं छत से गिरा तो मुझे पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज ने अपने पावन कर-कमलों में ले लिया था। यह सुनकर सारा परिवार स्तब्ध रह गया। अगले दिन पूजनीय परम पिता जी कल्याण नगर आए और फरमाया, ‘‘बेटा, हम सारी रात नहीं सोए क्योंकि काल ने तुम्हारा विश्वास तुड़वाने के लिए अपनी चाल चली परंतु दयाल ने भी मुंहतोड़ जवाब दिया।’’ इस प्रकार पूजनीय परम पिता जी ने मुझे खंरोच तक भी नहीं आने दी तथा अपनी रहमत से मुझे मौत के मुंह से बचा लिया। मैं सच्चे सतगुरू के उपकारों को जीवनभर नहीं भुला सकता।</p>
<p style="text-align:right;"><strong><em>-श्री राकेश धवन, कल्याण नगर, सरसा (हरियाणा)</em></strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/true-satguru-ji-gave-new-life-to-the-disciple-2/article-28025</link>
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                <pubDate>Sun, 31 Oct 2021 05:03:44 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेत्रहीनता के बावजूद शैक्षणिक उपलब्धियों की तरफ लगातार आगे बढ़ रही रमनदीप कौर</title>
                                    <description><![CDATA[यूपीएससी परीक्षा पास कर एक होनहार अधिकारी बनना है रमनदीप कौर का सपना यूट्यूब के सहारे कर रही यूपीएससी की तैयारी यूजीसी नैट की परीक्षा पहली बार में ही कर चुकी है पास बुढ़लाडा(सच कहूँ/संजीव तायल)। अगर दिल में जुनून हो कुछ कर दिखाने का, तो बड़ी से बड़ी बाधा भी उसकी राह नहीं रोक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/despite-blindness-ramandeep-kaur-continues-to-progress-towards-academic-achievements/article-27277"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/inspiration.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">यूपीएससी परीक्षा पास कर एक होनहार अधिकारी बनना है रमनदीप कौर का सपना</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>यूट्यूब के सहारे कर रही यूपीएससी की तैयारी</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>यूजीसी नैट की परीक्षा पहली बार में ही कर चुकी है पास</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>बुढ़लाडा(सच कहूँ/संजीव तायल)।</strong> अगर दिल में जुनून हो कुछ कर दिखाने का, तो बड़ी से बड़ी बाधा भी उसकी राह नहीं रोक सकती। आज के वैज्ञानिक युुग में भी कई लोग लड़कियों को बोझ समझते हैं परन्तु कुछ ऐसे माता-पिता भी हैं जो बेटी को भगवान की दी हुई नियामत समझते हुए बेटों के समान अवसर उपलब्ध करवा रहे हैं। जिला मानसा के बुढलाडा शहर के निवासी एक दैनिक वेतन भोगी मजदूर बिल्लू सिंह और शिन्दर कौर भी ऐसे आशावादी लोगों में से एक हैं, जिन्होंने अनेकों परेशानियों के बावजूद अपनी सौ प्रतिशत नेत्रहीन बेटी का पूरे लाड-प्यार से पालन-पोषण ही नहीं किया बल्कि उसको पैरों पर खड़ा करने के लिए उच्च स्तरीय पढ़ाई भी करवाई।</p>
<p style="text-align:justify;">25 वर्षीय नेत्रहीन रमनदीप कौर बेशक यह दुनिया को देखने के योग्य नहीं है परन्तु वह अपने माता-पिता पर गर्व महसूस करती है और उनको ही अपने दोनों नेत्र मानती है, जिनके द्वारा वह आज एमए (राजनीति शास्त्र) और यूजीसी नैट की परीक्षा पास कर इन दिनों ‘जातीवाद और राजनीति’ विषय पर पीएचडी करने के साथ-साथ वह देश की उच्च कोटी की यूपीएससी परीक्षा की तैयारी कर रही है, वो भी बिना किसी खास सुविधा के सिर्फ यू ट्यूब के सहारे अपनी तैयारी कर रही रमनदीप कौर का कहना है कि वह यूपीएससी परीक्षा पास कर एक होनहार अधिकारी बनना चाहती है, जिससे अपने मुकद्दरों के सहारे बैठे लोगों को बताया जा सके कि यदि आप मेहनत करने का दम रखते हो तो कोई भी बड़ी से बड़ी मुसीबत आपके रास्ते का रोड़ा नहीं बन सकती।</p>
<h4 style="text-align:justify;">रमनदीप कौर को स्कूलों में नहीं मिला था दाखिला</h4>
<p style="text-align:justify;">रमनदीप के पिता बिल्लू सिंह और माता शिन्दर कौर ने बताया कि उनकी बेटी जन्म से ही पूरी तरह नेत्रहीन थी, इस बेटी के 4-5 की होने पर इसका दाखिला करवाने के लिए कुछ स्कूलों में गए परन्तु सभी ने रमनदीप कौर को दाखिला देने से इन्कार कर दिया परन्तु उनके घर के नजदीक सरकारी प्राथमिक स्कूल किला मोहल्ला के उस समय के मुख्य अध्यापिका भरपूर कौर ने हमारी बेटी को पढ़ाने की हामी भर दी और जिन्होंने अपनी मेहनत से रमनदीप कौर को पाँचवी कक्षा पास करवाकर बुढलाडा में ही आठवीं करने उपरांत इसे आगे वाली पढ़ाई के लिए पटियाला में ब्लांईड स्कूल में दाखिल करवा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां से 12वीं पास करने और चण्डीगढ़ के डीएवी कॉलेज से बीए और पंजाब यूनिवर्सिटी से एमए (राजनीति शास्त्र) पास कर यूजीसी नैट की परीक्षा पहली बार में ही पास करने में सफल हो सकी है। मजदूर बिल्लू सिंह का कहना है कि ऐसे विशेष जरूरतमंद परिवारों को सरकार कम से -कम 10 हजार रुपए महीना खर्च के तौर पर दे, जिससे वह बुढापे में भी अपने दिन आसानी से काट सकें।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/despite-blindness-ramandeep-kaur-continues-to-progress-towards-academic-achievements/article-27277</link>
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                <pubDate>Tue, 28 Sep 2021 15:46:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पूज्य गुरू जी ने जीव को बख्शी नई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रेमी बलविन्द्र सिंह इन्सां सुपुत्र श्री गुरनाम सिंह निवासी सफीपुर खुर्द ब्लॉक दिड़बा जिला संगरूर(पंजाब)। प्रेमी अपने प्यारे सतगुरू संत डॉ. एमएसजी (पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां) की अपार रहमत का एक जबरदस्त करिश्मा इस प्रकार वर्णन करता है। प्रेमी जी ने उपरोक्त घटना क्रम के बारे में लिखित में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/revered-guru-ji-gave-new-life-to-the-soul/article-27113"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/pita-ji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रेमी बलविन्द्र सिंह इन्सां सुपुत्र श्री गुरनाम सिंह निवासी सफीपुर खुर्द ब्लॉक दिड़बा जिला संगरूर(पंजाब)। प्रेमी अपने प्यारे सतगुरू संत डॉ. एमएसजी (पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां) की अपार रहमत का एक जबरदस्त करिश्मा इस प्रकार वर्णन करता है। प्रेमी जी ने उपरोक्त घटना क्रम के बारे में लिखित में बताया कि घटना 17 मई 1998 की है। उस दिन सुबह-सवेरे मैं अभी घर पर ही था कि अचानक मुझे, मेरे कानों में यह बात सुनाई दी कि ‘भाई’, आज तेरा एक्सीडेंट होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आवाज बहुत ही प्रभावी थी। मुझे बहुत ही डर लगने लगा कि बाहर गया तो कहीं सचमुच ही एक्सीडैंट न हो जाए, और पता नहीं क्या होगा? मैंने निश्चय किया कि आज बाहर जाते ही नहीं। मैं इसी सोच में था कि इतने में मेरे बापू जी कहने लगे, बलविन्द्र, तू स्कूटर ले जा और दिड़बा मंडी से कपड़ा लेकर आ। मैंने बापू जी से कहा कि बापू आज मैं साईकिल भी नहीं चलाऊंगा। परंतु ज्यादा मजबूर करने पर मैं सूट का कपड़ा लेने के लिए बस पर बैठकर दिड़बा मंडी गया। उन दिनों में मैं एक टेलर मास्टर ‘पटियाला टेलर्स’ की दुकान पर कमिशन पर काम करता था। वहां से मुझे मेरे उस्ताद ने किसी के यहां से नाप वाली कॉपी लाने के लिए कहा। मैंने अपने उस्ताद को भी जवाब दे दिया कि मैंने आज ना ही बाईक पर और ना ही साईकिल पर चढ़ना है।</p>
<p style="text-align:justify;">मैंने उसे अपना अंदर का भय जाहिर कर दिया कि आज मेरा एक्सीडैंट हो सकता है, मरे को चोट वगैरह भी लग सकती है। लेकिन वह कहने लगा कि तू जग्गी को साथ लेकर जा और जाकर कॉपी ले आ। कॉपी जरूरी चाहिए थी कुछ नाप वगैरह देखने थे, कटाई आदि करना थी। तब मैं उसे (अपने उस्ताद को) जवाब नहीं दे सका और साईकिल पर कॉपी लेने चला गया। साईकिल वह लड़का चला रहा था और मैं आगे डंडे पर बैठ गया, नाप वाली कॉपी लेकर जब हम वापिस आ रहे थे, पातड़ां-संगरूर मेन रोड़ से सामने से एक मारूति वैन आ रही थी, मैंने अपने अंदर का भय प्रकट करते हुए साथ वाले लड़के से कहा कि वह मारूति वैन अपने ऊपर चढ़ेगी, ऐसा लगता है।</p>
<p style="text-align:justify;">वह कहता कि नहीं यार, ऐेसे कैसे! लेकिन मुझे तो अंदर का भय सता रहा था, मैंने तो आगे बैठे हुए साईकिल की ब्रेक लगाई और वैन से काफी दूर पर अपनी साईकिल रोक ली। वह कहे कि वैन रोड़ छोड़कर इतनी दूर कैसे आएगी? हमने देखा कि एक बुजुर्ग व्यक्ति साईकिल पर वैन के सामने आ गया, मारूति वाले ने जैसे ही कट मारा, मारूति उसके साईकिल को हिट करते हुए सीधे ही हमारी तरफ (जबकि हम सड़क से नीचे खड़े थे) आ गई। मैंने उस लड़के से कहा कि अब यह मारूति अपने ऊपर चढेगी ही चढ़ेगी और सचमुच देखते ही देखते वैन हमारे साईकिल पर आ चढ़ी और मुझे साईकिल पर आगे डंडे पर बैठे हुए को अपने साथ खींचकर ले गई।</p>
<p style="text-align:justify;">तुरंत मेरे मुंह से ‘धन-धन सतगुरू तेरा ही आसरा’ का नारा निकला। मेरी आंखों के आगे एक दम से अंधेरा छा गया(घबराहट के कारण) ड्राईवर ने गाड़ी को रोकने की कोशिश तो शायद की होगी लेकिन गाड़ी उससे रूकी नहीं, क्योंकि वह भी बहुत ही घबरा गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">वह दो जनों के साईकिल में टक्कर मार चुका था और इसी घबराहट के चलते गाड़ी वो नियंत्रित नहीं कर पाया था और गाड़ी उसने आगे गंदे नाले की पुली में ठोक दी और फिर गाड़ी भी वहीं रूक गई। गाड़ी ने अपनी टक्कर से मुझे नाले में से घसीट कर नाले के बाहर फैं क दिया। इतना सबकुछ मात्र कुछ पलों में ही हो गया था। जब मुझे होश आया, मैंने देखा तो गाड़ी ऐन बिल्कुल मेरे सिर के पास रूकी हुई थी। इतने में सच्चे दाता पूज्य गुुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने साक्षात् मुझे दर्र्शन दिए, सच्चे पातशाह जी ने फरमाया, बेटा ठीक-ठाक है? मैंने अर्ज की, कि पिता जी आपजी रहमत से ठीक हूं जी। इसके उपरांत शहनशाह जी ने मुझे स्वयं ही बाहर निकाला और फरमाया, ‘अच्छा भाई हम चलते हैं।’ मैंने अपने आपको गंदे नाले से बाहर सुरक्षित पाया।</p>
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                <pubDate>Thu, 23 Sep 2021 09:52:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सच्चे सतगुरू जी ने नाम देकर छुड़वाया नशा</title>
                                    <description><![CDATA[गांव धन्न सिंह खाना में अवतार सिंह नामक व्यक्ति था। वह शराब व मांस का अत्यधिक सेवन करता था और गलियों में गिरा रहता था। किसी सत्संगी ने उसे नाम लेने के लिए कहा कि तू नाम ले ले, तेरी चौरासी कट जाएगी और शराब और मांस आदि चीजों से बच जाएगा। उसने सत्संगी से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/true-satguru-ji-got-rid-of-intoxication-by-giving-gurumantra/article-27009"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/shah-satnam-singh-ji-mahara.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">गांव धन्न सिंह खाना में अवतार सिंह नामक व्यक्ति था। वह शराब व मांस का अत्यधिक सेवन करता था और गलियों में गिरा रहता था। किसी सत्संगी ने उसे नाम लेने के लिए कहा कि तू नाम ले ले, तेरी चौरासी कट जाएगी और शराब और मांस आदि चीजों से बच जाएगा। उसने सत्संगी से कहा कि अगर सच्चे सौदे वाले बाबा जी मुझे कोई रहमत दिखाएं तो मैं नाम ले लूंगा। यह सुनकर वह सत्संगी चुप हो गया। अचानक कुछ दिनों बाद पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज ने गांव कोटफत्ते में सत्संग दे दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">वह व्यक्ति और उसकी पत्नी दोनों सत्संग पर गए, उन्होंने सत्संग सुना। उस व्यक्ति ने अपनी पत्नी से कहा कि तू नाम ले ले। मुझे संतों की संंगत तो बहुत अच्छी लगी पर मैं नाम बाद में लूंगा। उसकी पत्नी ने नाम ले लिया और वापिस घर आ गए। उसकी पत्नी सतगुुरू से यही मांगती थी कि मेरा पति भी नाम ले ले और फिर हम सत्संग करवाएंगे। एक दिन वह व्यक्ति रात को लेटा हुआ था । उसने देखा कि उसके चारों तरफ बहुत ही प्रकाश हो रहा है और वह रोशनी बहुत ही सुंदर लग रही थी जो उसने पहले कभी नहीं देखी। फिर उसने क्या देखा कि हाथ में लाठी, सिर पर सुंदर टोपी, सफेद कपड़े, लम्बी दाढ़ी और मनमोहक स्वरूप वाले पूजनीय परम पिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज उसके पास आए और फरमाया कि बेटा! तू अब जाग।</p>
<p style="text-align:justify;">तेरा नाम शब्द लेने का समय आ गया है। कल सच्चा सौदा आश्रम में सत्संग है। तू जाकर नाम ले आ। यह दृश्य देखकर वह हैरान हो गया। वह उठकर अपनी पत्नी को कहने लगा कि मुझे सत्संग में सरसे जाना है। उसकी पत्नी यह सब देखकर हैरान हो गई। उसने तैयारी कर दी और वह सरसा की तरफ चल पड़ा। गाड़ी से सफर करके वह भटिंडा पहुंचा और वहां जाकर उसकी आंख लग गई। वहां उसे सरसा के लिए गाड़ी बदलनी थी। गाड़ी के चलने में सिर्फ दो मिनट ही रह गए और वह सोया ही रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">पूजनीय परम पिता जी ने फिर उस सत्संगी के पास आकर कहा कि भाई, तू सोया पड़ा है। तेरी गाड़ी का तो टाईम हो चुका है। उठ, जल्दी कर। वह तुरंत खड़ा हो गया लेकिन तब तक सरसा जाने वाली गाड़ी का समय बीत चुका था। वह आधा घंटा लेट हो चुका था। वह निराश हो गया पर उसने सोचा कि शायद गाड़ी खड़ी हो इसलिए उसने एक टीटी से पूछा कि क्या सरसा जाने वाली गाड़ी चली गई है? उसने कहा कि भाई शायद तेरे इंतजार में ही खड़ी है, उसका इंजन नहीं चल रहा। वह भागकर गाड़ी में बैठ गया और गाड़ी उसी वक्त चल पड़ी। उसने सतगुरू जी का लाख-लाख धन्यवाद किया और कहने लगा कि मालिक तूने मुझ जैसे तुच्छ इन्सान के लिए इतनी बड़ी गाड़ी रोक दी। तेरा यह अहसान मैं जीवन भर नहीं भुला सकता। फिर उसने सत्संग सुना और नाम-शब्द ले लिया।</p>
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                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Sep 2021 06:03:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उरी में आतंकी हमला</title>
                                    <description><![CDATA[पांच साल पहले आज ही के दिन 18 सितंबर 2016 को उरी में हमला हुआ था। सुबह साढ़े पांच बजे जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकवादियों ने सेना के ब्रिगेड हेडक्वार्टर्स पर हमला किया था। हमले में 19 जवान शहीद हुए। कई घायल हुए। सेना ने 6 घंटे तक चली इस मुठभेड़ में चारों आतंकियों को ढेर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/terrorist-attack-in-uri/article-26955"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/terrorist-attack-in-uri.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पांच साल पहले आज ही के दिन 18 सितंबर 2016 को उरी में हमला हुआ था। सुबह साढ़े पांच बजे जैश-ए-मोहम्मद के चार आतंकवादियों ने सेना के ब्रिगेड हेडक्वार्टर्स पर हमला किया था। हमले में 19 जवान शहीद हुए। कई घायल हुए। सेना ने 6 घंटे तक चली इस मुठभेड़ में चारों आतंकियों को ढेर किया था। इसके दस दिन बाद भारतीय सेना के 150 कमांडोज 28-29 सितंबर की आधी रात पीओके में दुश्मन की सीमा में घुसे। इस आॅपरेशन में कम से कम 40 आतंकियों को मार गिराया गया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>न्यूयॉर्क टाइम्स की शुरूआत</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">द न्यूयॉर्क टाइम्स की शुरूआत 18 सितंबर 1851 को हुई। पत्रकार और नेता हेनरी जार्विस रेमंड और पूर्व बैंकर जॉर्ज जोन्स ने इसकी शुरूआत की। टाइम्स को पहले रेमंड, जोन्स एंड कंपनी प्रकाशित करती थी। शुरूआती कॉपी में तो प्रकाशन के उद्देश्यों और उसकी पोजिशन को स्पष्ट किया गया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>इंटरनेट पर साइट्स को पहचान देने वाली संस्था</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">आईसीएएनएन यानी इंटरनेट कॉपोर्रेशन फॉर असाइन्ड नेम्स और नंबर्स वह संस्था है जो इंटरनेट प्रोटोकॉल या डोमेन नेम सिस्टम (डीएनएस) को कोआॅर्डिनेट करती है। यह 18 सितंबर,1998 के दिन बनी थी। इंटरनेट पर यदि आपको कोई साइट खोलना है या किसी को मैसेज करना है तो आपको उसका पता चाहिए होता है, उसी पते को कोआॅर्डिनेट करने वाली संस्था है आईसीएएनएन और इसे इंटरनेट की फोनबुक भी कहते हैं। शुरूआत में यह संस्था अमेरिकी सरकार का हिस्सा थी। बाद में इसे अलग एनजीओ में बदल दिया। लेकिन, यह समझना जरूरी है कि इंटरनेट पर किसी एक व्यक्ति, संगठन या सरकार का नियंत्रण नहीं है। आईसीएएनएन कम्युनिटी ग्लोबल लेवल पर इंटरनेट से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मैनेज करती है। इस कम्युनिटी में सरकारों, रजिस्ट्री, रजिस्ट्रार, कमर्शियल यूजर्स, नॉन-कमर्शियल यूजर्स और व्यक्तिगत इंटरनेट यूजर्स के प्रतिनिधि शामिल हैं।</p>
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                <pubDate>Sat, 18 Sep 2021 15:39:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>‘‘बेटा, धरती को बुरा नहीं कहते। देखना, कुछ समय लगेगा यह जमीन एक दिन तुम्हें हीरे-मोती देगी’’</title>
                                    <description><![CDATA[सन् 1985 की बात है। उस समय पंजाब में आतंकवाद का बोलबाला था। हम पूजनीय परम पिता जी के पास आए और अपने काम-धन्धे के बारे में बताया। पूजनीय परम पिता जी फरमाने लगे, ‘‘बेटा, पंजाब के हालात अभी ठीक नहीं है। हम एक सलाह देते हैं कि अपने आभूषण आदि सब बेचकर जमीन खरीद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">सन् 1985 की बात है। उस समय पंजाब में आतंकवाद का बोलबाला था। हम पूजनीय परम पिता जी के पास आए और अपने काम-धन्धे के बारे में बताया। पूजनीय परम पिता जी फरमाने लगे, ‘‘बेटा, पंजाब के हालात अभी ठीक नहीं है। हम एक सलाह देते हैं कि अपने आभूषण आदि सब बेचकर जमीन खरीद लो क्योंकि ये जानलेवा होते हैं, जमीन न तो चोरी हो सकती है और न ही खोने का डर।’’ इसके बाद हम समालसर वापिस आ गये और शहनशाह जी के वचन मानकर सारे आभूषण बेच दिये और जमीन देखने लगे। हमें कुछ समझ नहीं आ रहा था कि जमीन कहाँ पर लें। काफी मेहनत के बाद हमें किसी ने गाँव अरनियां वाली (सिरसा) के मोड़ पर जमीन दिखाई।</p>
<p style="text-align:justify;">यहाँ पर 10-10 फुट के टीले थे लेकिन जमीन बहुत सस्ती मिल रही थी इसलिए हमें जमीन पसन्द आ गई। फिर हम पूजनीय परम पिता जी के पास आशीर्वाद लेने गये और बताया कि पिता जी जमीन तो खरीद ली है, लेकिन टीले ही टीले हैं पैदावार की दृष्टि से अच्छी नहीं है। इस पर पूजनीय परम पिता जी फरमाने लगे, ‘‘बेटा, धरती को बुरा नहीं कहते। देखना, कुछ समय लगेगा यह जमीन एक दिन तुम्हें हीरे-मोती देगी।’’ यह सुनकर मैंने पूजनीय परम पिता जी से माफी माँगी। समय आने पर शहनशाह जी के उपरोक्त वचन सौ प्रतिशत सच हुए। आज इस जमीन की कीमत पहले से कई गुणा बढ़ चुकी है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong><em>-श्रीमती शशि बाला, शाहपुर बेगू, सरसा</em></strong></p>
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                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
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                <pubDate>Tue, 14 Sep 2021 05:48:21 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जतीन्द्रनाथ ने भूख से मरना चुना</title>
                                    <description><![CDATA[जतींद्र नाथ दास 1904 में पैदा हुए था। इनको जतिन भी कहते हैं, पैदाइश की जगह कलकत्ता। बहुत हल्की उम्र में बंगाल का क्रांतिकारी ग्रुप ‘अनुशीलन समिति’ ज्वाइन कर लिया। केवल 16 साल की उम्र थी, जब आंदोलन के चलते दो बार जेल जा चुके थे। गांधी के असहयोग आंदोलन में भी चले गए थे। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/revolutionary-jatindranath-chose-to-die-of-hunger/article-26774"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/jatindra-nath-das.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जतींद्र नाथ दास 1904 में पैदा हुए था। इनको जतिन भी कहते हैं, पैदाइश की जगह कलकत्ता। बहुत हल्की उम्र में बंगाल का क्रांतिकारी ग्रुप ‘अनुशीलन समिति’ ज्वाइन कर लिया। केवल 16 साल की उम्र थी, जब आंदोलन के चलते दो बार जेल जा चुके थे। गांधी के असहयोग आंदोलन में भी चले गए थे। सन 1929 में आज ही की तारीख यानी 13 सितंबर को वो लाहौर जेल में शहीद हुए। 14 जून सन 1929 में जतींद्र अरेस्ट किए गए। डाल दिए गए लाहौर जेल में। उन्होंने कुबूल किया था कि उन्होंने बम बनाए, भगत सिंह और बाकी साथियों के लिए। वहां जेल में भारतीय राजनैतिक कैदियों की हालत एकदम खराब थी। उसी तरह के कैदी यूरोप के हों, तो उनको कुछ सुविधाएं मिलती थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां के लोगों की जिंदगी नरक बनी हुई थी। उनके कपड़े महीनों नहीं धोए जाते थे। तमाम गंदगी में खाना बनता और परोसा जाता था। धीरे-धीरे भारतीय कैदियों में गुस्सा भरता गया और कुछ लोगों ने आमरण अनशन शुरू कर दिया माने मांग पूरी न होने तक खाना-पीना सब बंद। मांग ये थी कि बराबरी मिले, राजनैतिक कैदियों को। कुछ लोगों ने भूख हड़ताल शुरू की, उनकी हालत खराब हुई तो बाकी कैदी भी हड़ताल पर चले गए। उन्होंने इस शर्त पर भूख हड़ताल शुरू की कि ‘जीत या मौत’।</p>
<p style="text-align:justify;">26 जुलाई को आठ-दस आदमियों ने जतिन को दबोच लिया और नली के सहारे पेट में दूध डालना शुरू किया। दूध पेट की बजाये फेफड़ों में चला गया और जतिन-दा छटपटा उठे। उनके साथियों ने बहुत हल्ला किया लेकिन जब डॉक्टर पूरे आधे घंटे बाद दवाई लेकर आया तो जतिन ने दवाई लेने से साफ-साफ मना कर दिया। वे दृढ़ता से अपने साथियों से बोले- अब मैं उनकी पकड़ में नहीं आऊंगा। फिर वो कयामत का दिन आया। 13 सितंबर, इंसान बिना पानी पीये एक हफ्ता जिंदा रहता है। जतींद्र 63 दिन ऐसे ही झेल गए और फिर उनकी जिंदगी जीत गई।</p>
<p> </p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Sep 2021 11:01:21 +0530</pubDate>
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