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                <title>surgery - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Surgery: मेडिकल साइंस में ऐसा चमत्कार नहीं देखा होगा, मां के गर्भ में ही की बच्चे की ब्रेन सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। आज हम आपको ऐसी खबर बताने (Surgery) जा रहे हैं जो आज तक मेडिकल साइंस में पहले कभी ऐसा हुआ नहीं। जी हां! चिकित्सकों की एक टीम ने मां के गर्भ में ही पल रहे एक अजन्मे बच्चे की ब्रेन सर्जरी कर चमत्कार किया है। इस तरह की यह दुनिया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/baby-brain-surgery-done-in-mothers-womb/article-47190"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/surgery-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> आज हम आपको ऐसी खबर बताने (Surgery) जा रहे हैं जो आज तक मेडिकल साइंस में पहले कभी ऐसा हुआ नहीं। जी हां! चिकित्सकों की एक टीम ने मां के गर्भ में ही पल रहे एक अजन्मे बच्चे की ब्रेन सर्जरी कर चमत्कार किया है। इस तरह की यह दुनिया की पहली सर्जरी है। सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी डॉक्टरों की एक टीम ने गर्भ में पल रहे बच्चे के मस्तिष्क के अंदर एक दुर्लभ रक्त वाहिका की असामान्य स्थिति का इलाज करने के लिए उसकी ब्रेन-सर्जरी की है। यह सर्जजरी अमेरिकी शहर बोस्टन में डॉक्टरों की एक टीम ने की है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में कहा गया है कि गैलेन मालफॉर्मेशन की नस के रूप में जानी जाने वाली दुर्लभ बीमारी का इलाज करने के लिए सफलतापूर्वक भ्रूण की सर्जरी की गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि गर्भ के अंदर हुई यह सर्जरी अल्ट्रासाउंड-गाइडेड प्रक्रिया थी। यह सर्जरी मार्च में हुई थी लेकिन इसके बारे में पूरी रिपोर्ट गुरुवार को स्ट्रोक जर्नल में प्रकाशित हुई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ऐसे मामलों में मृत्युदर भी 40 फीसदी के करीब होती है | Surgery</h3>
<p style="text-align:justify;">बोस्टन चिल्ड्रन हॉस्पिटल के रेडियोलॉजिस्ट और वीओजीएम के स्पेशलिस्ट डॉ. डैरेन ओरबैक ने सीएनएन को बताया कि ऐसी स्थिति में बच्चे के ब्रेन स्ट्रोक या हार्ट फेल होने का खतरा रहता है। ओरबैक के मुताबिक, आमतौर पर ऐसे मामलों में बच्चे के जन्म लेने के बाद उसका इलाज किया जाता है और उसके ब्रेन में एक कैथेटर डालकर उसके ब्लड सप्लाई की गति को कम किया जाता है। बतौर डॉक्टर इस प्रक्रिया में 50 से 60 फीसदी बच्चे बहुत कमजोर हो जाते हैं और उनकी स्थिति गंभीर हो जाती है। ऐसे मामलों में मृत्युदर भी 40 फीसदी के करीब होती है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 05 May 2023 10:48:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिना चीरा लगाए ढाई साल के बच्चे के दिल में छेद की सफल सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[जन्म से ही ह्दय की बीमारी से ग्रस्त था बच्चा अब बच्चे के ह्दय का आकार हो गया है सामान्य गुरुग्राम(सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)। जन्म से ही ह्दय की बीमारी से ग्रसित एक बच्चे के दिल की सर्जरी करके उसे जीवनदान दिया गया है। मात्र ढाई साल के बच्चे के दिल में जन्म से ही […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/successful-surgery-for-hole-in-childs-heart-without-incision/article-37147"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/heart.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>जन्म से ही ह्दय की बीमारी से ग्रस्त था बच्चा</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>अब बच्चे के ह्दय का आकार हो गया है सामान्य</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम(सच कहूँ/संजय कुमार मेहरा)।</strong> जन्म से ही ह्दय की बीमारी से ग्रसित एक बच्चे के दिल की सर्जरी करके उसे जीवनदान दिया गया है। मात्र ढाई साल के बच्चे के दिल में जन्म से ही छेद था। इसलिए उसका शारीरिक विकास नहीं हो पा रहा था। सर्जरी के बाद बच्चे का जीवन और उसके ह्दय का आकार सामान्य हो गया है। वह पूरी तरह से ठीक है। खास बात यह है कि इस सर्जरी प्रक्रिया के दौरान बच्चे के शरीर में कोई चीरा नहीं लगाया गया। पारस अस्पताल के पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी विशेषज्ञ डॉ. दीपक ठाकुर के मुताबिक जब बच्चे को अस्पताल में लाया गया तो उसका का वजन मुश्किल से 8 किलोग्राम था। इससे पहले उसे शहर के अन्य बाल रोग अस्पतालों में ले जाया गया था। बच्चे की छाती में बार बार इन्फेक्शन हो रहा था। इसके अलावा उसमें जन्मजात हृदय की बीमारी होने से उसका विकास बाधित हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">कार्डिएक साइंस डिपार्टमेंट ने बच्चे की विस्तार से जांच की। फिर जो बच्चे को समस्या थी उसके लिए समाधान सुझाया गया। जांच में पता चला कि बच्चे के दिल में छेद है। बच्चे के माता-पिता को उसके बचे जीवन के स्थायी इलाज के लिए एक बार इंटरवेंशन प्रक्रिया को करवाने की सलाह दी गई। बाल रोग विशेषज्ञों ने जन्मजात हृदय की बीमारी को ठीक करने के लिए प्रक्रिया को अंजाम दिया। यह पूरी प्रक्रिया आधे घंटे चली। बच्चे को सिर्फ प्रक्रिया के दौरान ही बेहोश किया गया था। इस दौरान कोई वेंटिलेटर की जरूरत नहीं पड़ी। प्रक्रिया के तुरंत बाद हृदय के कामकाज में सुधार देखने को मिला। उसके हृदय का आकार नॉर्मल हो गया। प्रक्रिया के एक घंटे बाद बच्चा पूरी तरह से होश में आ गया और वह फिर दूध भी पीने लग गया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>समय पर उपचार नहीं होता तो रुक सकती थी ह्दय गति</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">डॉ. दीपक ठाकुर के मुताबिक अगर बच्चे में बीमारी का इलाज लंबे समय तक नहीं होता तो उसकी हृदय गति रुकने की संभावना भी बहुत ज्यादा थी। पेटेंट डक्टस आटेरीओसस एक प्रकार की हृदय की समस्या होती है। इस बीमारी को आसान भाषा में दिल में छेद के रूप में जाना जाता है। जन्मजात हृदय बीमारी होने पर बच्चों के हृदय के आकार या कामकाज में समस्या आ जाती है। यह समस्या होने से हृदय, फेफड़ों और शरीर के माध्यम से खून का प्रवाह प्रभावित होता हैं। इस वजह से सांस लेने में कठिनाई, अपर्याप्त वजन बढ़ना, शरीर का नीला पड़ना, दूध पीने में कठिनाई होना, हार्ट डिस्फंक्शन, हाई ब्लड प्रेशर और असामान्य दिल को धड़कन जैसे लक्षण महसूस होते हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 28 Aug 2022 11:47:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मैनचेस्टर में हुई साहा की सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[सनराइजर्स हैदराबाद के कई मैचों में भी नहीं खेले लंदन (एजेंसी)। भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्धिमान साहा की मैनचेस्टर में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के मेडिकल स्टाफ के निरीक्षण में सर्जरी कराई गई है। भारतीय टेस्ट टीम के नियमित विकेटकीपर साहा के कंधे में चोट है जिसके कारण वह इंग्लैंड के खिलाफ बुधवार से शुरु […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/sports/surgery-of-saha-in-manchester/article-5127"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/saha-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">सनराइजर्स हैदराबाद के कई मैचों में भी नहीं खेले</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>लंदन (एजेंसी)।</strong> भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज रिद्धिमान साहा की मैनचेस्टर में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के मेडिकल स्टाफ के निरीक्षण में सर्जरी कराई गई है। भारतीय टेस्ट टीम के नियमित विकेटकीपर साहा के कंधे में चोट है जिसके कारण वह इंग्लैंड के खिलाफ बुधवार से शुरु हुई पांच टेस्टों की सीरीज़ के लिए भी राष्ट्रीय टीम का हिस्सा नहीं बन पाए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारतीय टीम बर्मिंघम में फिलहाल अपना पहला टेस्ट खेल रही है। साहा की जगह दिनेश कार्तिक विकेटकीपिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं जबकि रिषभ पंत अन्य विकेटकीपर हैं। 33 साल के साहा इससे पहले अफगानिस्तान के खिलाफ बेंगलुरु में खेला गया एकमात्र टेस्ट और आईपीएल में सनराइजर्स हैदराबाद के कई मैचों में भी नहीं खेले थे। उस समय उनके अंगूठे में चोट को वजह बताया गया था लेकिन बाद में जांच के बाद पता चला कि उनके कंधे की मांसपेशियों में चोट है।</p>
<h1 style="text-align:center;">जल्द स्वास्थ्य की कामना करते हैं: बीसीसीआई</h1>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि साहा की चोट की सही जांच नहीं कर पाने के लिए बेंगलुरु स्थित राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी (एनसीए) के फिजियो को दोषी पाया गया था, जिसके कारण साहा को सर्जरी से गुजरना पड़ा है। वहीं सर्जरी के बाद अब विकेटकीपर बल्लेबाज़ को करीब दो महीने तक रिहैबिलिटेशन से भी गुजरना होगा जिसके बाद ही वह मैदान पर वापसी कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीसीसीआई ने अपने ट््वीटर अकाउंट पर साहा की अस्पताल में तस्वीर साझा करते हुए लिखा कि हम साहा के जल्द स्वास्थ्य की कामना करते हैं। मैनचेस्टर में बीसीसीआई की मेडिकल टीम के निरीक्षण में उनकी लेबरल सर्जरी कराई गई है। कंधे की चोट के कारण उनका इस वर्ष के आखिरी में आस्ट्रेलिया में होने वाली टेस्ट सीरीज़ में खेलना भी संदिग्ध माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">साहा महेंद्र सिंह धोनी के दिसंबर 2014 में टेस्ट क्रिकेट से संन्यास के बाद से ही भारतीय टेस्ट टीम में विकेटकीपर की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने अब तक 32 टेस्ट खेले हैं जिनमें 1164 रन बनाए हैं।</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>खेल</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/sports/surgery-of-saha-in-manchester/article-5127</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Aug 2018 07:34:31 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हैदराबाद में दुनिया की पहली कोरोनरी बाइपास सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी पत्रिका ने भी इसकी पुष्टि की हैदराबाद  हैदराबाद में प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक भटनागर ने दुनिया की पहली कोरोनरी बाइपास सर्जरी को यहां सनशाइन हार्ट इंस्टीट्यूट में सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस सर्जरी में उनका सहयोग डॉ. शुभी भटनागर ने किया। हैदराबाद स्थित सनशाइन अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. नागार्जुन यारलागड्डा ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/first-coronary-bypass-surgery/article-4440"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/sarjari.jpg" alt=""></a><br /><h1>अमेरिकी पत्रिका ने भी इसकी पुष्टि की</h1>
<p><strong>हैदराबाद </strong></p>
<p style="text-align:justify;">हैदराबाद में प्रसिद्ध हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रतीक भटनागर ने दुनिया की पहली कोरोनरी बाइपास सर्जरी को यहां सनशाइन हार्ट इंस्टीट्यूट में सफलतापूर्वक अंजाम दिया है। इस सर्जरी में उनका सहयोग डॉ. शुभी भटनागर ने किया। हैदराबाद स्थित सनशाइन अस्पताल के चिकित्सा निदेशक डॉ. नागार्जुन यारलागड्डा ने शनिवार को संवाददाताओं से बातचीत में इस ऐतिहासिक सर्जरी को इस प्रकार की दुनिया की पहली बाइपास सर्जरी बताया और कहा कि इसके बारे में अमेरिका से प्रकाशित होने वाली कार्डियेक सर्जरी(हृदय शल्य चिकित्सा) केे क्षेत्र में प्रतिष्ठित पत्रिका ‘एनल्स ऑफ थोरेसिक सर्जरी’ के जुलाई 2018 अंक में प्रकाशित किया गया है।उन्होंने दावा किया कि इस प्रकार की सर्जरी पहले कभी नहीं की गयी और चिकित्सा साहित्य में इस ऑपरेशन का कोई विवरण नहीं है। अमेरिकी पत्रिका ने भी इसकी पुष्टि की है।</p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/first-coronary-bypass-surgery/article-4440</link>
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                <pubDate>Sun, 24 Jun 2018 00:13:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सर्जरी कर डॉक्टरों ने बद्रीलाल के गले से निकली  92 पिने</title>
                                    <description><![CDATA[फरीदाबाद।  पिनमैन के नाम से मशहूर बद्रीलाल मीणा को डॉक्टरों ने इलाज कर नई जिंदगी दी है। बद्रीलाल के शरीर में लगभग 150 से ज्यादा पिन, निडिल और कील धंसी हुई थी। काफी समय से शरीर में होने से कुछ पिन में तो जंग भी लग चुका था। फरीदाबाद के एशियन अस्पताल में शुक्रवार को […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/doctors-remove-92-pins-in-badri-lal-throat-by-surgery/article-2090"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/badrilal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>फरीदाबाद।</strong>  पिनमैन के नाम से मशहूर बद्रीलाल मीणा को डॉक्टरों ने इलाज कर नई जिंदगी दी है। बद्रीलाल के शरीर में लगभग 150 से ज्यादा पिन, निडिल और कील धंसी हुई थी। काफी समय से शरीर में होने से कुछ पिन में तो जंग भी लग चुका था। फरीदाबाद के एशियन अस्पताल में शुक्रवार को बद्रीलाल की सर्जरी हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">सर्जरी लगभग 6 घंटे तक चली जिसमे डॉक्टरों ने बद्रीलाल के गले से 92 पिनों को निकाला। के शरीर के बाकी हिस्सों में धंसी पिनों को बाद में निकाला जाएगा। डॉक्टरों के अनुसार सर्जरी में काफी जोखिम था इसमें मरीज की जान जा सकती थी लेकिन फिलहाल बद्रीलाल स्वस्थ हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कोई भी डॉक्टर सर्जरी के लिए नहीं था तैयार</h2>
<p style="text-align:justify;">बद्रीलाल बूंदी के रहने वाले है तथा रेलवे में पानी सप्लाई का काम करते थे। वह लगभग  6 महीने से इलाज के लिए कई अस्पतालों में चक्कर लगा चुके है लेकिन कोई भी डॉक्टर सर्जरी के लिए तैयार नहीं  था। बद्रीलाल की सेहत भी काफी बिगड़ गई थी और लगभग 30 किलो वजन भी कम हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सीटी स्कैन और एंडोस्कोपी के द्वारा पता चला कि शरीर के अलग-अलग अंगों में 150 से भी अधिक पिनें धंसी हैं। बद्रीलाल का कहना  हैं कि ‘मेरे शरीर में ये पिनें कहां से आईं, मुझे कुछ पता नहीं है। मुझे डायबिटीज थी, इसके चलते साल भर पहले मैंने डॉक्टर को दिखाया तो जांच के द्वारा पता चला कि शरीर में पिनें धंसी हुई हैं। इतनी पिनें और कीलें देखकर डॉक्टर खुद हैरान थे। क्योंकि कुछ पिनें उनके सांस नली, खाने की नली, ईसोफेगस, दिमाग को खून पहुंचाने वाली मुख्य धमनी में धंसी हुईं थी।’</p>
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                <pubDate>Sat, 08 Jul 2017 04:05:16 +0530</pubDate>
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