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                <title>Gujarat News: विशेष सुनवाई: दुराचार पीड़िता की गर्भपात की याचिका टालने पर सुप्रीम कोर्ट नाराज</title>
                                    <description><![CDATA[Gujarat News: नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने एक दुराचार पीड़िता की गर्भपात कराने की उसकी याचिका को 12 दिनों तक टालने पर गुजरात उच्च न्यायालय की शनिवार को कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे मामले में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं, बल्कि तत्परतापूर्वक निपटा जाना चाहिए। गुजरात उच्च न्यायालय में सुनवाई टालने का […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-displeased-over-gujarat/article-51381"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/supreme-court-of-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Gujarat News: नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने एक दुराचार पीड़िता की गर्भपात कराने की उसकी याचिका को 12 दिनों तक टालने पर गुजरात उच्च न्यायालय की शनिवार को कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि ऐसे मामले में किसी प्रकार की लापरवाही नहीं, बल्कि तत्परतापूर्वक निपटा जाना चाहिए। गुजरात उच्च न्यायालय में सुनवाई टालने का आदेश 17 अगस्त को पारित किया गया था। न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति उज्जल भुइयां की पीठ ने गुजरात के एक मामले में ‘विशेष सुनवाई’ करते हुए भ्रूण को हटाने की संभावना का पता लगाने के लिए भरूच की एक मेडिकल बोर्ड से एक नई रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। Gujarat News</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने कहा कि वह इस मामले में सोमवार को अगली सुनवाई कर इस मसले पर विचार करेगी। पीड़िता के अधिवक्ता ने पीठ के समक्ष कहा कि उच्च न्यायालय ने मामले की तारीख 23 अगस्त तय की है, जिससे उसकी गर्भावस्था 28 सप्ताह की हो जाएगी। अधिवक्ता ने हालांकि कहा कि, याचिका सात अगस्त को दायर कई और 11 अगस्त को सुनवाई हुई थी। उन्होंने शीर्ष अदालत के समक्ष यह भी कहा कि याचिकाकर्ता महिला को चार अगस्त को अपनी गर्भावस्था के बारे में पता चला और उसने सात अगस्त को उच्च न्यायालय के समक्ष रिट याचिका दायर की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने शीर्ष अदालत की पीठ के समक्ष यह भी कहा कि इस मामले में उच्च न्यायालय का आदेश रिकॉर्ड पर भी उपलब्ध नहीं था। शीर्ष अदालत की पीठ ने उच्च न्यायालय का आदेश उपलब्ध नहीं होने की याचिकाकर्ता के वकील की बात पर कहा, ‘‘अगर विवादित आदेश मौजूद ही नहीं है तो हम कोई आदेश कैसे पारित कर सकते हैं। इस मामले को स्थगित करने में मूल्यवान दिन बर्बाद हो गए हैं। देखिए, ऐसे मामलों में तात्कालिकता की भावना होनी चाहिए न कि उदासीन रवैया। हमें ऐसी टिप्पणियाँ करने के लिए खेद है।</p>
<p style="text-align:justify;">हम इसे सोमवार को पहले मामले के रूप में सूचीबद्ध करेंगे।’’ शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि चूंकि कीमती समय पहले ही बर्बाद हो चुका है, इसलिए भरूच के मेडिकल बोर्ड से नई रिपोर्ट मांगी जा सकती है। न्यायमूर्ति नागरत्ना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा, ‘‘हम याचिकाकर्ता को एक बार फिर से पूछताछ के लिए केएमसीआरआई के समक्ष उपस्थित होने का निर्देश देते हैं और नवीनतम स्थिति रिपोर्ट कल रविवार शाम छह बजे तक इस अदालत में प्रस्तुत की जा सकती है।’’</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Social Media News: अश्लील पोस्ट पर माफी नहीं सजा मिलेगी: सुप्रीम कोर्ट" href="http://10.0.0.122:1245/obscene-posts-will-be-punished-supreme-court/">Social Media News: अश्लील पोस्ट पर माफी नहीं सजा मिलेगी: सुप्रीम कोर्ट</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2023 19:54:30 +0530</pubDate>
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                <title>नये संसद भवन का उद्घाटन राष्ट्रपति से कराने की याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने भारत के राष्ट्रपति से यहां नवनिर्मित (New Parliament Building) संसद भवन का उद्घाटन कराने के लिए लोकसभा सचिवालय को निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की अवकाशकालीन पीठ ने अधिवक्ता सी आर जया सुकिन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/petition-to-inaugurate-the-new-parliament-house-from-the-president-rejected/article-48104"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-05/new-parliament-building1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने भारत के राष्ट्रपति से यहां नवनिर्मित (New Parliament Building) संसद भवन का उद्घाटन कराने के लिए लोकसभा सचिवालय को निर्देश देने की मांग वाली एक जनहित याचिका शुक्रवार को खारिज कर दी। न्यायमूर्ति जे. के. माहेश्वरी और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की अवकाशकालीन पीठ ने अधिवक्ता सी आर जया सुकिन की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत के सुनवाई करने से इनकार के बाद याचिकाकर्ता ने पीठ की सहमति के बाद अपनी याचिका वापस ले ली।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने हालांकि, याचिकाकर्ता से पूछा कि संसद (New Parliament Building) की इमारत के उद्घाटन में उनकी भूमिका कैसी थी। याचिकाकर्ता ने राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण बताने वाली दलीलें देते हुए कहा कि वह (द्रौपदी द्रौपदी मुर्मू) संसद की प्रमुख हैं। याचिकाकर्ता ने अपनी याचिका में दावा किया है कि लोकसभा सचिवालय ने नए संसद भवन के उद्घाटन के लिए राष्ट्रपति को आमंत्रित नहीं करके संविधान का उल्लंघन किया है। याचिका में यह भी कहा गया है कि राष्ट्रपति भारत के पहले नागरिक और संसद की संस्था के प्रमुख हैं। संसद में भारत के राष्ट्रपति और सर्वोच्च विधायिका के दो सदन – राज्यसभा और लोकसभा शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में कहा गया है, “देश के बारे में सभी (New Parliament Building) महत्वपूर्ण निर्णय भारतीय राष्ट्रपति के नाम पर लिए जाते हैं, हालांकि, इनमें से अधिकांश भारतीय संविधान के अनुच्छेद 74 के अनुसार मंत्रिपरिषद (सीओएम) द्वारा दी गई सलाह पर लिए हैं।” याचिकाकर्ता सुकिन ने कहा, “लोकसभा सचिवालय द्वारा 18 मई को जारी किया गया बयान और नए संसद भवन के उद्घाटन के बारे में लोकसभा महासचिव द्वारा जारी किया गया निमंत्रण रिकॉर्डों के उचित अध्ययन के बिना और बिना सोच विचार के मनमाने ढंग से जारी किया गया है।” गौरतलब है कि नवनिर्मित संसद भवन का उद्घाटन रविवार (28 मई ) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा किया जाना प्रस्तावित है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पीएसईबी ने दसवीं के नतीजों किए घोषित, इन आसान स्टेप्स से कर सकते हैं चेक" href="http://10.0.0.122:1245/punjab-board-pseb-class-10th-result-2023-declared/">पीएसईबी ने दसवीं के नतीजों किए घोषित, इन आसान स्टेप्स से कर सकते हैं चेक</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 26 May 2023 19:31:32 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने देशमुख की जमानत याचिका पर शीघ्र सुनवाई का दिया निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय से कहा कि वह ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ के आरोपों से घिरे महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता अनिल देशमुख की जमानत याचिका पर शीघ्र सुनवाई करे। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न की पीठ ने एनसीपी नेता देशमुख (Deshmukh’s […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-directs-for-early-hearing-on-deshmukhs-bail-plea/article-34045"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/deshmukhs-bail-plea.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को बॉम्बे उच्च न्यायालय से कहा कि वह ‘मनी लॉन्ड्रिंग’ के आरोपों से घिरे महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) नेता अनिल देशमुख की जमानत याचिका पर शीघ्र सुनवाई करे। न्यायमूर्ति अजय रस्तोगी और न्यायमूर्ति बी. वी. नागरत्न की पीठ ने एनसीपी नेता देशमुख (Deshmukh’s Bail Plea) की गुहार पर शीघ्र सुनवाई के लिए उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने की अनुमति देते हुए संबंधित पीठ को तेज गति से सुनवाई करने का निर्देश दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने इसके साथ ही देशमुख की जमानत याचिका पर उच्च न्यायालय के बार-बार स्थगन संबंधि (देशमुख द्वारा) सवाल उठाने वाली याचिका का निस्तारण कर दिया। याचिकाकर्ता की ओर से वकील वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत के समक्ष कहा कि वह ( देशमुख) 73 साल के हैं। बहुत बीमार हैं। उनकी याचिका 25 मार्च को दायर की गई थी लेकिन अभी तक सुनवाई नहीं हुई है। सिब्बल ने दलीलें देते पीठ के समक्ष अनुरोध किया,‘मैं (Deshmukh’s Bail Plea) (देशमुख) केवल यह चाहता हूं कि मेरे आवेदन पर सुनवाई हो। इसे फिर से सुनवाई करने पर विचार किया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने इस तथ्य पर गौर किया कि महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री की जमानत याचिका सुनवाई के लिए तीन मौकों पर सूचीबद्ध किया गया था, लेकिन समय अभाव के कारण इस पर सुनवाई नहीं हो सकी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 31 May 2022 20:00:49 +0530</pubDate>
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                <title>एलआईसी आईपीओ विवाद पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम राहत देने से इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को जीवन बीमा निगम (एलआईसी) (LIC IPO Dispute) की पांच फीसदी हिस्सेदारी आईपीओ के माध्यम से बेचने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर याचिकाकर्ता बीमा धारकों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-refuses-to-grant-interim-relief-on-lic-ipo-dispute/article-33313"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/lic-ipo-dispute.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने गुरुवार को जीवन बीमा निगम (एलआईसी) (LIC IPO Dispute) की पांच फीसदी हिस्सेदारी आईपीओ के माध्यम से बेचने के सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर याचिकाकर्ता बीमा धारकों को अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति पी. एस. नरसिम्हा की खंडपीठ ने इस मामले को संविधान पीठ के समक्ष भेज दिया, जहां वित्त अधिनियम 2021 को धन विधेयक के रूप में पारित करने का मामला लंबित है। खंडपीठ ने पहले से लंबि त मामले के साथ इसे ‘टैग’ कर दिया। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने केंद्र सरकार और एलआईसी को नोटिस जारी करके आठ सप्ताह के भीतर अपना पक्ष रखने को कहा।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता थॉमस फ्रैंको समेत कुछ पॉलिसी धारकों ने आईपीओ की प्रक्रिया को एलआईसी अधिनियम का उल्लंघन का आरोप लगाते कानून में संशोधन को शीर्ष अदालत में चुनौती दी थी। शीर्ष न्यायालय ने अंतरिम राहत देने से इनकार करते हुए कहा, “याचिकाओं में कोई दम नहीं है। इसलिए हम इस मामले में कोई आदेश पारित करने को इच्छुक नहीं हैं।”</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं ने यह दावा करते हुए उच्चतम न्यायालय दरवाजा खटखटाया था कि चूंकि धन विधेयक से संबंधित एक मामला संविधान पीठ के समक्ष लंबित है, इसलिए इस मामले पर भी उस पीठ को ही निर्णय लेना चाहिए। सुनवाई के दौरान याचिकाकतार्ओं की ओर से दलील देते हुए कहा गया कि एलआईसी अधिनियम (LIC IPO Dispute) में संशोधन ने पॉलिसी धारकों के हितों को गंभीर खतरे में डाल दिया है। केंद्र ने कहा कि धन विधेयक 15 महीने पहले 28 मार्च, 2021 को पारित किया गया था। याचिकाकर्ता अदालत में इतने बड़े अंतराल के बाद चुनौती नहीं दे सकते।</p>
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                <pubDate>Thu, 12 May 2022 19:49:35 +0530</pubDate>
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                <title>सुप्रीम कोर्ट ने देखमुख की याचिका पर सुनवायी करने से क्यों किया इन्कार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। पूर्व गृहमंत्री ने अपने खिलाफ लगे आरोपों पर सीबीआई और ईडी जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट संबंधित अदालत में पेश करने का आदेश दोनों एजेंसियों को देने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/why-did-the-supreme-court-refuse-to-hear-dekhmukhs-petition/article-28485"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/anil-deshmukhs.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने महाराष्ट्र के पूर्व गृहमंत्री अनिल देशमुख की याचिका पर विचार करने से इनकार कर दिया। पूर्व गृहमंत्री ने अपने खिलाफ लगे आरोपों पर सीबीआई और ईडी जांच की प्रारंभिक रिपोर्ट संबंधित अदालत में पेश करने का आदेश दोनों एजेंसियों को देने के लिए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। न्यायमूर्ति एस के कौल और एम एम सुंदरेश की पीठ ने आदेश देते हुए देखमुख को संबंधित अदालत में गुहार लगाने को कहा। पीठ ने कहा कि वह इस मामले में सुनवायी के लिए उत्सुक नहीं है, उन्हें संबंधित अदालत में जाना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h3>
<p style="text-align:justify;">पूर्व गृहमंत्री देशमुख ने अपने खिलाफ लगे मनी लॉड्रिंग एवं भ्रष्टाचार आरोपों के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय को उनकी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट संबंधित अदालत में पेश करने के लिए दोनों केंद्रीय एजेंसियों को आदेश देने का अनुरोध किया था। वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने देखमुख का पक्ष रखते हुए दो सदस्यीय पीठ से गुजारिश की कि वह दोनों एजेंसियों को प्रारंभिक जांच रिपोर्ट अदालत में पेश करने का आदेश दे।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Nov 2021 08:04:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के अवकाशप्राप्त न्यायाधीश की निगरानी में होगी लखीमपुर खीरी हत्याकांड की जांच</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि लखीमपुर खीरी हत्याकांड की विशेष जांच दल (एसआईटी) जांच की निगरानी के लिए उसके द्वारा प्रस्तावित अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार राजी हो गई है और अब न्यायालय मंगलवार या बुधवार को संभावित न्यायाधीशों से संपर्क करने के बाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/investigation-of-lakhimpur-kheri-murder-case-will-be-done-under-the-supervision-of-retired-judge-of-punjab-haryana-high-court/article-28397"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/supreme-court-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को कहा कि लखीमपुर खीरी हत्याकांड की विशेष जांच दल (एसआईटी) जांच की निगरानी के लिए उसके द्वारा प्रस्तावित अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों के नाम पर उत्तर प्रदेश सरकार राजी हो गई है और अब न्यायालय मंगलवार या बुधवार को संभावित न्यायाधीशों से संपर्क करने के बाद एक न्यायाधीश को जांच निगरानी की जिम्मेदारी सौंप देगी। मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन ने तीन अक्टूबर को चार किसानों समेत आठ अन्य लोगों की मृत्यु के मामले की निष्पक्ष जांच के लिए दायर जनहित याचिका की आज की सुनवाई के दौरान उत्तर प्रदेश सरकार की सहमति व्यक्त किए जाने के बाद कहा, ‘अब हम उच्चतम न्यायालय या उच्च न्यायालय के एक अवकाश प्राप्त न्यायाधीश को जांच की निगरानी के लिए नियुक्त करने के लिए पूरी तरह से स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा, ‘हमें न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन या अन्य अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों से संपर्क संपर्क करना है। जो न्यायाधीश सहमत होंगे उनकी नियुक्ति कर दी जाएगी। पीठ ने पिछली सुनवाई के दौरान आठ नवंबर को पंजाब एवं हरियाणा के अवकाश प्राप्त न्यायाधीशों न्यायमूर्ति राकेश कुमार जैन और न्यायमूर्ति रंजीत सिंह के नामों का प्रस्ताव एसआईटी जांच निगरानी के लिए उत्तर प्रदेश सरकार के समक्ष रखा था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">तब सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने कहा था कि वह अगली सुनवाई यानी 15 नवंबर को राज्य सरकार का पक्ष रखेंगे। आज की सुनवाई के दौरान हरीश साल्वे ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार को राज्य या इस राज्य के बाहर के किसी न्यायाधीश की निगरानी में जांच कराने में कोई आपत्ति नहीं है। पीठ अपनी मर्जी से जांच की निगरानी के लिए न्यायाधीश का नाम तय कर सकती है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Nov 2021 18:29:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने मोदी के महत्वाकांक्षी चारधाम परियोजना पर फैसला रखा सुरक्षित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 12000 करोड़ रुपए की चारधाम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना पर सुनवाई के बाद गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत से उत्तराखंड के करीब 900 किलोमीटर के इस राजमार्ग परियोजना के तहत सड़कों की चौड़ाई को साढ़े पांच […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-reserves-its-decision-on-modis-ambitious-chardham-project/article-28280"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/supreme-court1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की महत्वाकांक्षी 12000 करोड़ रुपए की चारधाम राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना पर सुनवाई के बाद गुरुवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। केंद्र सरकार ने शीर्ष अदालत से उत्तराखंड के करीब 900 किलोमीटर के इस राजमार्ग परियोजना के तहत सड़कों की चौड़ाई को साढ़े पांच से 10 मीटर करने की अनुमति मांगी है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने साढ़े पांच मीटर तक चौड़ी करने की इजाजत दी थी। न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने सुनवाई के बाद केंद्र सरकार और गैर सरकार संगठन (एनजीओ) सिटीजंस फॉर ग्रीन दून को अपने लिखित सुझाव अगले दो दिनों में शीर्ष अदालत के समक्ष पेश करने को कहा है। इसके बाद पर्यावरण सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा के विभिन्न बिंदुओं पर विचार के बाद खंडपीठ अपना फैसला सुनाएगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने सितंबर 2020 में केंद्र सरकार को उसकी 2018 की अधिसूचना के अनुपालन के मद्देनजर सड़क की चौड़ाई साढ़े पांच मीटर रखने का आदेश दिया था। केंद्र सरकार ने भारत-चीन सीमा पर गत एक वर्ष में बदले हुए हालात के मद्देनजर सैन्य सुरक्षा घेरा मजबूत करने का हवाला देते हुए सड़क की चौड़ाई 10 मीटर करने की मांग की है। पर्यावरण के मुद्दों पर काम करने वाली एनजीओ सिटीजंस फॉर ग्रीन दून- केंद्र सरकार की इस मांग का यह कहते हुए विरोध कर रही है कि सड़कों की चौड़ाई बढ़ाने से पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होगी। पहाड़ी इलाके में भूस्खलन की घटनाएं बढ़ जाएंगी। हिमालय क्षेत्र में सड़कों की चौड़ाई बढ़ने से दुर्लभ जलीय जीव एवं जानवरों के अस्तित्व का खतरा बढ़ जाएगा। निर्माण कार्य से ग्लेशियर के पिघलने की आशंका है। इस वजह से गंगा और उसकी विभिन्न सहयोगी नदियों के जल स्तर में वृद्धि से देशभर में जान माल का भारी नुक्सान होने की प्रबल संभावना है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पिछली सुनवाई में क्या हुआ था</h4>
<p style="text-align:justify;">पिछली सुनवाई के दौरान खंडपीठ के समक्ष केंद्र सरकार का पक्ष रखते हुए अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा था कि पिछले एक साल में भारत-चीन सीमा पर जमीनी स्थिति में एक बड़ा बदलाव आया है। इस वजह से सैनिकों और सैन्य साजोसामान के लिए निर्धारित स्थान पर लाने ले जाने के वास्ते प्रस्तावित सड़क की चौड़ाई बढ़ाना अनिवार्य हो गया है। उन्होंने सुनवाई के दौरान कहा था कि 1962 जैसे चीन से युद्ध के हालात मुकाबला करने के लिए राजमार्ग चौड़ीकरण अब अनिवार्य हो गया है। राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से अनुमति दी जानी चाहिए। एनजीओ ने परियोजना में निर्माण कार्य के दौरान बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई समेत पर्यावरण के खतरे से जुड़े कई सवाल उठाए थे।</p>
<h4 style="text-align:justify;">पीएम ने किया था इस परियोजना का शुभारंभ</h4>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 27 दिसंबर 2016 को इस परियोजना के कार्य का शुभारंभ किया था। यह परियोजना दिसंबर 2021 तक पूरा करने की योजना थी। 889 किलोमीटर चार धाम राजमार्ग सड़क परियोजना से उत्तराखंड में चार हिंदू तीर्थस्थल- बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री को हर मौसम में बेहतर तरीके से आपस में जुड़ जाएंगे। इसे ऑल वेदर राजमार्ग परियोजना भी कहा गया है। इस परियोजना को करीब 12000 करोड़ रुपए अनुमानित लागत के साथ शुरू की गई थी। परियोजना के शुभारंभ के अवसर पर कहा गया था कि इससे लाखों श्रद्धालुओं को हर मौसम चारधाम की यात्रा करने में सहूलियत होगी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Nov 2021 17:09:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>&amp;#8230;सरकार हमारे धैर्य की परीक्षा न ले : सुप्रीम कोर्ट</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न न्यायाधिकरणों में रिक्त पदों पर भर्ती नहीं किए जाने पर केन्द्र सरकार को सोमवार को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि उसके धैर्य की परीक्षा न ली जाये। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमन, न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की खंडपीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/government-should-not-test-our-patience-supreme-court/article-26585"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/no-intention-to-stop-high-court-hearing-on-corona-supreme-court.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने विभिन्न न्यायाधिकरणों में रिक्त पदों पर भर्ती नहीं किए जाने पर केन्द्र सरकार को सोमवार को कड़ी फटकार लगाई और कहा कि उसके धैर्य की परीक्षा न ली जाये। मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमन, न्यायमूर्ति डी.वाई. चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव की खंडपीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के जरिये केंद्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए आगाह किया कि यदि नियुक्तियों में ढीला-ढाला रवैया अपनाया गया तो सरकार के खिलाफ अदालत की अवमानना से संबंधित कार्रवाई शुरू की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति रमन ने कहा, ‘इस अदालत के फैसले के लिए कोई सम्मान नहीं है। आप हमारे धैर्य की परीक्षा ले रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि सरकार ने कुछ व्यक्तियों के नियुक्त किये जाने की बात कही है, लेकिन कितने व्यक्ति नियुक्त हुए हैं। वे नियुक्तियां कहां हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">न्यायमूर्ति रमन ने चेतावनी देते हुए कहा, ‘हमारे पास तीन विकल्प हैं। पहला, हम कानून पर रोक लगा दें। दूसरा, हम न्यायाधिकरणों को बंद करने का आदेश दें और उसकी शक्ति उच्च न्यायालय को सौंप दें। तीसरा विकल्प यह है कि हम खुद ही नियुक्तियां कर दें।’</p>
<p style="text-align:justify;">सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति राव ने भी कहा कि न्यायाधिकरणों के सदस्यों की नियुक्तियां न करके सरकार ने इन्हें प्रभावहीन बना दिया है। न्यायालय ने सरकार को एक मौका और देते हुए मामले की सुनवाई के लिए 13 सितम्बर की तारीख मुकर्रर की।</p>
<p style="text-align:right;"><span style="color:#0000ff;"><strong>‘हमारे पास तीन विकल्प हैं। पहला, हम कानून पर रोक लगा दें। दूसरा, हम न्यायाधिकरणों को बंद करने का आदेश दें और उसकी शक्ति उच्च न्यायालय को सौंप दें। तीसरा विकल्प यह है कि हम खुद ही नियुक्तियां कर दें।’</strong></span><br />
<span style="color:#0000ff;"><strong>-मुख्य न्यायाधीश एन.वी. रमन</strong></span></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Sep 2021 20:43:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पेगासस मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई मंगलवार तक टली</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय ने पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई मंगलवार तक स्थगित कर दी है और केंद्र सरकार से पूछा कि वह पेगासस स्पाइवेयर के कथित इस्तेमाल को लेकर अतिरिक्त हलफनामा दायर करना चाहती है? मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सोमवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश हो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय ने पेगासस जासूसी मामले की सुनवाई मंगलवार तक स्थगित कर दी है और केंद्र सरकार से पूछा कि वह पेगासस स्पाइवेयर के कथित इस्तेमाल को लेकर अतिरिक्त हलफनामा दायर करना चाहती है? मुख्य न्यायाधीश एन वी रमन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सोमवार को केंद्र सरकार की ओर से पेश हो रहे सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा कि वह जानना चाहती है कि क्या केंद्र सरकार पेगासस स्पाइवेयर के कथित इस्तेमाल पर अतिरिक्त हलफनामा दायर करना चाहती है? खंडपीठ ने केंद्र सरकार से यह स्पष्टीकरण आज दायर दो पृष्ठों के संक्षिप्त हलफनामे के परिप्रेक्ष्य में मांगा।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं-वरिष्ठ पत्रकार एन राम और शशि कुमार की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल एवं अन्य याचिकाकतार्ओं के वकीलों ने भी सुनवाई के दौरान एक ही सवाल खड़े किए कि केंद्र सरकार इस सवाल का जवाब देने से बच रही है कि क्या उसकी किसी एजेंसी ने कभी भी पेगासस स्पाइवेयर का इस्तेमाल किया है। याचिकाकर्ताओं के वकीलों ने न्यायालय से अनुरोध किया कि वह केंद्र सरकार को इस मामले में स्पष्ट जवाब देने का निर्देश दे। सॉलिसिटर जनरल ने दलील दी कि यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा है और केवल एक हलफनामे के जरिए इसका उत्तर नहीं दिया जा सकता। करीब दो घंटे की सुनवाई के बाद खंडपीठ ने मामले की सुनवाई कल तक के लिए टालते हुए केंद्र सरकार से पूछा कि क्या वह अतिरिक्त हलफनामा दायर करने को लेकर अपना हृदय परिवर्तन कर सकती है?</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 Aug 2021 16:10:06 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुप्रीम कोर्ट ने वार्षिक फीस लेने के दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश पर रोक से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पिछले साल के कोविड-19 लॉकडाउन के बाद निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों से वार्षिक एवं विकास शुल्क लेने की इजाजत देने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूति दिनेश माहेश्वरी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/supreme-court-refuses-to-stay-delhi-high-courts-order-to-collect-annual-fees/article-24770"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/supreme-court-dismisses-the-charge-of-pick-and-choose-in-the-registry.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने सोमवार को पिछले साल के कोविड-19 लॉकडाउन के बाद निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों के छात्रों से वार्षिक एवं विकास शुल्क लेने की इजाजत देने वाले दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। शीर्ष अदालत के न्यायाधीश न्यायमूर्ति एएम खानविलकर, न्यायमूति दिनेश माहेश्वरी और न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस की पीठ ने उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने की दिल्ली सरकार की दलील पर सुनवाई करते हुए कहा, ‘हम आपको स्टे देने के इच्छुक नहीं हैं।</p>
<h4 style="text-align:center;"><strong>सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के समक्ष अपनी शिकायतें उठाने का भी दिया निर्देश </strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पीठ दिल्ली के शिक्षा निदेशालय (डीओई) के इस विचार से सहमत नहीं थी कि उसके पास निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूलों द्वारा शुल्क लगाने को विनियमित करने की शक्ति है और उच्च न्यायालय के आदेश में वार्षिक और विकास शुल्क लेने पर रोक लगाई गई है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को उच्च न्यायालय की एक खंडपीठ के समक्ष अपनी शिकायतें उठाने का भी निर्देश दिया, जो अभी भी पिछले महीने के आदेश की जांच कर रही है, जिसे एकल-न्यायाधीश पीठ द्वारा जारी किया गया था। दिल्ली उच्च न्यायालय की एक अवकाशकालीन पीठ में सात जून को न्यायाधीश रेखा पल्ली और न्यायमूर्ति अमित बंसल ने स्पष्ट किया था कि अदालत एकल-न्यायाधीश पीठ के 31 मई के आदेश पर कोई रोक लगाने के लिए इच्छुक नहीं है और केवल अन्य पक्षों से जवाब मांगेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला:</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि पीठ ने 450 निजी स्कूलों का प्रतिनिधित्व करने वाले एक्शन कमेटी से कहा कि वह एकल न्यायाधीश के आदेश के फैसले खिलाफ आप सरकार और छात्रों की याचिकाओं पर अपना रुख स्पष्ट करे, जिसे आम आदमी पार्टी सरकार, छात्रों और एक गैर सरकार संगठन (एनजीओ) की अपील पर पहले चुनौती दी गई थी। न्यायमूर्ति जयंत नाथ ने 31 मई के फैसले में गैर सहायता प्राप्त निजी स्कूलों को बच्चों से वार्षिक और विकास शुल्क लेने की अनुमति प्रदान कर दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन पिछले साल राष्ट्रीय राजधानी में लॉकडाउन खत्म होने के बाद की अवधि में देय राशि में 15 फीसदी की कमी की बात कही जिसमें प्रयोग ने नहीं लाई गई सुविधा जैसे पानी और बिजली है। दिल्ली सरकार ने अपनी अपील में कहा था कि विकास शुल्क जैसे अतिरिक्त शुल्क को रोक दिया गया था क्योंकि डेढ़ साल से अधिक समय तक स्कूल बंद रहने पर स्कूलों में सुधार और रखरखाव की आवश्यकता नहीं पड़ी थी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Jun 2021 16:58:11 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>ईएमआई में नहीं मिलेगी राहत, लोन मोरेटोरियम आगे बढ़ाने से ‘सुप्रीम’ इंकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कोरोना की दूसरी लहर में आर्थिक संकट से जूझ रहे और ईएमआई में राहत की उम्मीद पाले लोगों को शुक्रवार को उस समय झटका लगा जब उच्चतम न्यायालय ने लोन मोरेटोरियम योजना को आगे बढ़ाने तथा ब्याज माफी संबंधित याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/there-will-be-no-relief-in-emi-supreme-refuses-to-pursue-loan-moratorium/article-24371"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-06/loan-moratorium.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कोरोना की दूसरी लहर में आर्थिक संकट से जूझ रहे और ईएमआई में राहत की उम्मीद पाले लोगों को शुक्रवार को उस समय झटका लगा जब उच्चतम न्यायालय ने लोन मोरेटोरियम योजना को आगे बढ़ाने तथा ब्याज माफी संबंधित याचिका खारिज कर दी। न्यायमूर्ति अशोक भूषण की अध्यक्षता वाली पीठ ने संबंधित याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया कि यह नीतिगत मामला है और न्यायालय सरकार की नीतियों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती। शीर्ष न्यायालय ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को अपनी मांग के लिए केंद्र सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पास जाना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका में नए ऋण स्थगन, ऋण पुनर्गठन योजना के तहत समय दिये जाने और बैंकों की ओर से गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की घोषणा पर अस्थायी रोक लगाने का अनुरोध किया गया था। याचिका में न्यायालय से यह कहते हुए तत्काल राहत दिये जाने की मांग की गयी कि वर्तमान में अत्यधिक वित्तीय संकट झेल रहे आम आदमी के लिए केंद्र और आरबीआई की ओर से पर्याप्त उपाय नहीं किए गए हैं। याचिकाकर्ता ने अदालत से तत्काल राहत की मांग की क्योंकि केंद्र और भारतीय रिजर्व बैंक (फइक) ने आम आदमी की मदद के लिए पर्याप्त उपाय नहीं किए हैं जो वर्तमान में अत्यधिक वित्तीय तनाव में हैं।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Jun 2021 17:56:33 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>12वीं की परीक्षा कराने को लेकर सुप्रीम कोर्ट में हस्तक्षेप याचिका</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। बारहवीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षाओं का परिणाम ग्रेडिंग के आधार पर घोषित करने संबंधी याचिका के उलट केरल के एक शिक्षक ने परीक्षा का आयोजन सुनिश्चित कराने को लेकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। केरल के गणित शिक्षक टोनी जोसेफ ने वकील जोस अब्राहम के जरिये एक हस्तक्षेप […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/intervention-petition-in-the-supreme-court-for-the-12th-examination/article-23734"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/cbse-exam.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)</strong>। बारहवीं कक्षा की बोर्ड की परीक्षाओं का परिणाम ग्रेडिंग के आधार पर घोषित करने संबंधी याचिका के उलट केरल के एक शिक्षक ने परीक्षा का आयोजन सुनिश्चित कराने को लेकर उच्चतम न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। केरल के गणित शिक्षक टोनी जोसेफ ने वकील जोस अब्राहम के जरिये एक हस्तक्षेप याचिका दायर करके कहा है कि वह शिक्षक हैं और अपने छात्रों के भविष्य के बारे में चिंतित हैं। हस्तक्षेप याचिकाकर्ता ने कहा है कि बारहवीं कक्षा की परीक्षा करियर को नया आयाम देने वाली होती है। इतना ही नहीं उच्च शिक्षा संस्थानों में प्रवेश इस परीक्षा के परिणाम पर निर्भर करता है। ऐसी स्थिति में परीक्षा रद्द करने से उन मेहनती छात्रों के साथ अन्याय होगा, जिन्होंने बोर्ड परीक्षा के लिए कड़ी मेहनत की है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है पूरा मामला:</h4>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकर्ता का कहना है कि छात्रों और शिक्षकों के अलावा शिक्षाविदों और संस्थानों के प्रमुखों का एक बड़ा वर्ग परीक्षा आयोजित करने के पक्ष में है। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि जीवन में तीन-चार महीने की देरी से ही, लेकिन परीक्षा आयोजित की जानी चाहिए। गौरतलब है कि ममता शर्मा की एक मूल याचिका शीर्ष अदालत में लंबित है, जिसमें उन्होंने कोरोना महामारी के कारण बारहवीं की बोर्ड परीक्षाएं रद्द करने और आंतरिक ग्रेडिंग के आधार पर परिणाम घोषित करने के निर्देश देने की मांग की है।</p>
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                <pubDate>Tue, 18 May 2021 19:36:59 +0530</pubDate>
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