<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://www.sachkahoon.com/dispute/tag-3903" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Sach Kahoon Hindi RSS Feed Generator</generator>
                <title>dispute - Sach Kahoon Hindi</title>
                <link>https://www.sachkahoon.com/tag/3903/rss</link>
                <description>dispute RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पीआरटीसी बस चालक व प्राइवेट बस चालक में विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सच कहूँ न्यूज)। बस स्टैंड में सोमवार सुबह पीआरटीसी बस चालक व प्राइवेट बस चालक के बीच विवाद हो गया। विवाद के चलते पीआरटीसी बस का शीशा तोड़ दिया। इसी के साथ शिमला जा रही पीआरटीसी बसे के आगे प्राइवेट बस लगा दी। इससे बस स्टैंड से बसों का आगमन रूक गया। विवाद की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/dispute-between-prtc-bus-driver-and-private-bus-driver/article-33169"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/dispute.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> बस स्टैंड में सोमवार सुबह पीआरटीसी बस चालक व प्राइवेट बस चालक के बीच विवाद हो गया। विवाद के चलते पीआरटीसी बस का शीशा तोड़ दिया। इसी के साथ शिमला जा रही पीआरटीसी बसे के आगे प्राइवेट बस लगा दी। इससे बस स्टैंड से बसों का आगमन रूक गया। विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस कर्मचारी व रोडवेज विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि इससे पहले दोनों पक्षों के बीच तू-तडाक देखने को मिली। पीआरटीसी चालकों द्वारा यह भी आरोप लगाया गया कि प्राइवेट बस को ड्राइवर नहीं, कंडक्टर चला रहा था। जिस कारण यह विवाद हुआ है। कुछ समय तक तर्क वितर्क के सिलसिले के बाद दोनो पक्षों में आपसी समझौता भी हो गया।</p>
<h4 style="text-align:justify;">20 मिनट तक हुआ विवाद</h4>
<p style="text-align:justify;">पीआरटीसी की बस को शिमला जाना था। लेकिन प्राइवेट बस को कंडक्टर चला रहा था। जिसने बस की साइड लगने से शीशा तोड़ दिया। इसके बाद बस के आगे प्राइवेट बस रोक दी। इससे बस स्टैंड में 20 मिनट तक विवाद होता रहा। बस को शिमला नहीं जाने दिया। इससे यात्रियों को भी बस चलने के लिए इंतजार करना पड़ा। वहीं गर्मी में काफी परेशानी झेलनी पड़ी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बस का शीशा तोड़ा</h4>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा रोडवेज सरसा डिपो के यूनियन प्रधान भीम सिंह ने कहा कि पीआरटीसी की बस को शिमला जाना था। लेकिन प्राइवेट बस को कंडक्टर चला रहा था, जिसने बस का शीशा तोड़ दिया। उसके बाद गुंडागर्दी करते हुए बस के आगे प्राइवेट बस रोक दी। हमारी बस को शिमला नहींं जाने दिया। दुर्व्यवहार भी करने लगा। हालांकि दोनों पक्षों में बाद में समझौता हो गया। बस स्टेंड चौकी प्रभारी रण सिंह ने कहा कि दोनो में आपसी विवाद था, जो सुलझ गया। हमारे पास किसी की तरफ से कोई शिकायत नहीं आई है। दोनों पक्षों में राजीनामा हो गया है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/dispute-between-prtc-bus-driver-and-private-bus-driver/article-33169</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/dispute-between-prtc-bus-driver-and-private-bus-driver/article-33169</guid>
                <pubDate>Mon, 09 May 2022 20:39:19 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-05/dispute.jpg"                         length="20833"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नहरी पानी के विवाद को लेकर पूर्व सरपंच को गोली मारकर हत्या</title>
                                    <description><![CDATA[बेटा गंभीर रूप से घायल, हमलावर मौके से फरार हांसी (सच कहूँ/मुकेश)। हिसार जिले के उपमंडल हाँसी के गांव सुल्तानपुर में नहरी पानी के विवाद (Canal Water Dispute) के चलते पूर्व सरपंच की गोली मारकर हत्या कर दी गई। झगड़े में मृतक के पुत्र के सिर में लाठी से वार किया गया, जिससे वह भी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/former-sarpanch-shot-dead-over-canal-water-dispute/article-32400"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-04/canal-water-dispute.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>बेटा गंभीर रूप से घायल, हमलावर मौके से फरार</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हांसी (सच कहूँ/मुकेश)।</strong> हिसार जिले के उपमंडल हाँसी के गांव सुल्तानपुर में नहरी पानी के विवाद (Canal Water Dispute) के चलते पूर्व सरपंच की गोली मारकर हत्या कर दी गई। झगड़े में मृतक के पुत्र के सिर में लाठी से वार किया गया, जिससे वह भी गंभीर रूप से घायल हो गया। घायल पिता-पुत्र को उपचार के लिए हाँसी के नागरिक अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद हिसार रेफर कर दिया। परिजनों ने दोनों को उपचार हेतु हिसार के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया। जहां पूर्व सरपंच ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वहीं उसके बेटे का इलाज किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पुलिस से प्राप्त जानकारी के अनुसार 50 वर्षीय पूर्व सरपंच साधु राम व उसका बेटा सुखबीर वीरवार सुबह करीब 7:15 बजे अपने खेत में पानी लगा रहे थे। इसी दौरान खेत के पड़ोसी मनजीत के साथ पानी को लेकर झगड़ा (Canal Water Dispute) हो गया। इसी दौरान गुस्साए मनजीत ने साधुराम पर अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोली दाग दी। मनजीत द्वारा चलाई गई गोली साधु राम के पेट में लगी और वह गंभीर रूप से घायल हो गया। पिता को बचाने आए उसके बेटे सुखबीर के सिर पर भी मनजीत ने बंदूक के बट से वार कर घायल कर दिया और मौके पर अपनी लाइसेंसी बंदूक को फेंक कर वहां से फरार हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">घायल पिता-पुत्र को उपचार हेतु नागरिक अस्पताल लाया गया, जहां चिकित्सकों ने उनकी गंभीर हालत को देखते हुए प्राथमिक उपचार के बाद हिसार रेफर कर दिया। लेकिन परिजनों ने दोनों को हिसार के एक निजी अस्पताल में भर्ती करवाया, जहां पूर्व सरपंच साधुराम ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया। वही उनके बेटे सुखबीर का इलाज चल रहा है। सूचना मिलने पर सदर पुलिस थाना प्रभारी प्रतीक सिंह ने घटनास्थल का जायजा लिया। वहीं वारदात में प्रयुक्त बंदूक को अपने कब्जे में लेकर मामले की जांच आरंभ कर दी है।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://twitter.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/former-sarpanch-shot-dead-over-canal-water-dispute/article-32400</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/former-sarpanch-shot-dead-over-canal-water-dispute/article-32400</guid>
                <pubDate>Fri, 15 Apr 2022 01:29:12 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2022-04/canal-water-dispute.jpg"                         length="45559"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आज हो सकता है स्टाफ नर्स विवाद का निपटारा</title>
                                    <description><![CDATA[डबवाली तबादला करने के बाद भी स्टाफ नर्स ने नहीं किया ज्वार्इंन दोनों पक्ष अस्पताल में होंगे एकत्रित  सरसा (सच-कहूँ न्यूज)। जिला नागरिक अस्पताल में स्थित महिला प्रसूति वार्ड में नाइट ड्यूटी में तैनात स्टाफ नर्स व सिक्योरिटी गार्ड के गायब रहने के मामले से उपजे विवाद का शुक्रवार को दोनों पक्षों की सहमति से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/today-staff-nurse-dispute-can-be-settled/article-4693"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/cicil.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">डबवाली तबादला करने के बाद भी स्टाफ नर्स ने नहीं किया ज्वार्इंन</h1>
<ul>
<li><strong>दोनों पक्ष अस्पताल में होंगे एकत्रित</strong></li>
</ul>
<p><strong> </strong><strong style="text-align:justify;">सरसा (सच-कहूँ न्यूज)।</strong><span style="text-align:justify;"> जिला नागरिक अस्पताल में स्थित महिला प्रसूति वार्ड में नाइट ड्यूटी में तैनात स्टाफ नर्स व सिक्योरिटी गार्ड के गायब रहने के मामले से उपजे विवाद का शुक्रवार को दोनों पक्षों की सहमति से निपटारा हो सकता है। दोनों पक्षों के मुख्य कर्मचारियों द्वारा मामले को सुलझाने के लिए पहल की गई है। सबकुछ ठीकठाक रहा तो मामला शांति से निपट जाएगा।</span></p>
<p>वहीं अस्पताल प्रबंधन ने बुधवार को ड्यूटी से नदारद रहने वाली स्टाफ नर्स का डबवाली तबादला कर दिया। लेकिन अभी तक स्टाफ नर्स ने ज्वाइन नहीं किया है। हैरानी की बात तो ये है कि कर्मचारी जहां विवाद निपटाने को राजी हुए हैं। वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन कर्मचारियों का विवाद निपटाने की बजाय उन्हें प्रताड़ित करने पर तुला हुआ है।</p>
<h1 style="text-align:center;">लिखित में होगा दोनों पक्षों की ओर से राजीनामा</h1>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल प्रबंधन ने इस पूरे घटनाक्रम को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। घटनाक्रम की जानकारी होते हुए भी अस्पताल प्रबंधन ने मामले को निपटाने की बजाय हवा देने का काम किया है। बुधवार की सुबह अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने आऊटसोर्सिंग कर्मचारियों में सिक्योरिटी गार्ड, महिला वार्ड सर्वेंट व स्वीपर का ड्यूटी चार्ट ऐसा बना दिया, जिसके हिसाब से ड्यूटी करना कर्मचारियों के बस की बात नहीं है। नए ड्यूटी चार्ट को लेकर सभी कर्मचारियों में रोष फैला हुआ है।</p>
<h1 style="text-align:center;">ये बनाया नया ड्यूटी चार्ट</h1>
<p style="text-align:justify;">अस्पताल की मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुभाषिनी जैन ने सभी कर्मचारियों को नया ड्यूटी चार्ट थमा दिया। जिसके मुताबिक सभी कर्मचारियों की लगातार एक माह तक नाइट ड्यूटी लगा दी गई है। जिसे करना कर्मचारियों के बस की बात नहीं है। नए ड्यूटी चार्ट से सभी कर्मचारी परेशान हैं। कर्मचारियों ने साफ कहा है कि अगर ड्यूटी चार्ट नहीं बदला तो वे काम छोड़ देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>आऊटसोर्सिंग कर्मचारियों का नया ड्यूटी चार्ट बनाया गया है। चार्ट के मुताबिक ड्यूटी करनी पड़ेगी। जल्द से जल्द कर्मचारियों का विवाद निपटा दिया जाएगा। </em><br />
<em>-डॉ. सुभाषिनी जैन, मुख्य चिकित्सा अधिकारी</em></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/today-staff-nurse-dispute-can-be-settled/article-4693</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/today-staff-nurse-dispute-can-be-settled/article-4693</guid>
                <pubDate>Fri, 06 Jul 2018 03:56:44 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2018-07/cicil.jpg"                         length="149099"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब हज पर जा सकेंगे लोग, सऊदी अरब ने कतर के हज यात्रियों के लिए खोला बॉर्डर</title>
                                    <description><![CDATA[कारियो । सऊदी अरब ने कतर के उन श्रद्धालुओं के लिए बॉर्डर खोल दिया है, जो इस साल हज के लिए आना चाहते हैं। सऊदी सरकार ने बुधवार को कहा कि वो इस साल हज करने के लिए सऊदी अरब में कतरी तीर्थयात्रियों का स्वागत करेंगे। दरअसल सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/saudi-arabia-opens-border-for-hajj-pilgrims-of-qatar/article-3179"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/qatar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>कारियो ।</strong> सऊदी अरब ने कतर के उन श्रद्धालुओं के लिए बॉर्डर खोल दिया है, जो इस साल हज के लिए आना चाहते हैं। सऊदी सरकार ने बुधवार को कहा कि वो इस साल हज करने के लिए सऊदी अरब में कतरी तीर्थयात्रियों का स्वागत करेंगे। दरअसल सऊदी अरब, मिस्र, बहरीन और संयुक्त अरब अमीरात ने 5 जून को कतर के साथ राजनयिक और कारोबारी संबंध तोड़ लिए थे। ऐसे में उस वक्त शुरू हुए राजनयिक संकट के बीच यह बहुत ही अहम निर्णय है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक विवाद के बीच जून से दोनों देशों के बीच परिवहन और राजनयिक संबंध फिलहाल टूटे हुए हैं। सऊदी की आधिकारिक प्रेस एजेंसी के एक बयान में कहा गया है कि सलवा बॉर्डर कतरी नागरिकों के लिए खुलेगा, जो हज यात्रा पर आना चाहते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">सऊदी न्यूज एजेंसी के मुताबिक सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान और दोहा के दूत के बीच मुलाकात में सीमा संबंधी निर्णय लिए गए हैं, जिसमें शाह सलमान ने आदेश दिया कि कतर के सभी तीर्थयात्रियों को ‘हज के लिए सीमा पार करके सऊदी अरब में प्रवेश की’ इजाजत होगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> कतर में 80% विदेशी रहते हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">सऊदी की आधिकारिक न्यूज एजेंसी के मुताबिक, सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान और दोहा के दूत के बीच मुलाकात के बाद सीमा संबंधी यह निर्णय लिया गया। शाह ने आदेश दिया है कि कतर के तीर्थयात्रियों को तीर्थयात्रा करने के लिए सलवा बॉर्डर पार करके सऊदी अरब में प्रवेश की अनुमति होगी। उन्होंने यह भी आदेश दिया था कि सऊदी विमानन कंपनी के निजी विमानों को दोहा हवाईअड्डा भेजा जाए, ताकि सभी कतरी तीर्थयात्रियों को उसके खर्चे पर लाया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">सऊदी अरब और उसके अरब सहयोगियों ने दोहा पर ‘आतंकवादियों’ का समर्थन करने और ईरान के बहुत करीब होने का आरोप लगाया था, जिसके चलते कतर के साथ हवाई, समुद्री और जमीनी रिश्ते खत्म कर दिए थे और साथ ही आर्थिक प्रतिबंध लगाए थे। कतर ने इन आरोपों से इनकार करते हुए खाड़ी देशों पर उसकी अर्थव्यवस्था का दम घोंटने की कोशिश का आरोप लगाया है। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के अनुसार, 26 लाख की जनसंख्या वाले कतर में 80% विदेशी रहते हैं। यह प्रति व्यक्ति आय के हिसाब से दुनिया का सबसे अमीर देश है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/saudi-arabia-opens-border-for-hajj-pilgrims-of-qatar/article-3179</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/fatafat-news/saudi-arabia-opens-border-for-hajj-pilgrims-of-qatar/article-3179</guid>
                <pubDate>Thu, 17 Aug 2017 06:20:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-08/qatar.jpg"                         length="88149"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देशों के बीच बढ़ता बाड़ाबंदी का चलन</title>
                                    <description><![CDATA[संचार क्रान्ति और सहज आवागमन के चलते ज्यों-ज्यों दुनिया के देश एक-दूसरे के नजदीक आने लगे हैं, त्यों-त्यों दुनिया के देशों के बीच नफरत की दीवारें भी अधिक खड़ी होने लगी है। 1989 में बर्लिन की दीवार टूटने को सारी दुनिया के देशों ने शुभ संकेत के रुप में देखा और यह आशा बंधने लगी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/increasing-hatred-between-countries/article-3041"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/protest-6.jpg" alt=""></a><br /><p>संचार क्रान्ति और सहज आवागमन के चलते ज्यों-ज्यों दुनिया के देश एक-दूसरे के नजदीक आने लगे हैं, त्यों-त्यों दुनिया के देशों के बीच नफरत की दीवारें भी अधिक खड़ी होने लगी है। 1989 में बर्लिन की दीवार टूटने को सारी दुनिया के देशों ने शुभ संकेत के रुप में देखा और यह आशा बंधने लगी कि कोरिया आदि देश भी देर-सवेर एक हो जाएंगे। सपना तो आज भी भारत-पाक के एक होने के देखते रहे हैं, पर दुनिया के देशों के बीच मतभेद दिन-प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। आशा यह थी कि भूमण्डलीकरण, उदारीकरण, निजीकरण और सूचना क्रान्ति एक-दूसरे को जोड़ने और अधिक नजदीक लाने में सहायक होंगे, परस्पर मतभेद कम होंगे, पर ठीक विपरीत आज आतंकवाद, अलगाववाद, सीमा विवाद, सत्ता संघर्ष कम होने के स्थान पर अधिक बढ़ा हैं।</p>
<p>जहां एक क्लिक पर दुनिया के किसी भी देश के बारे में ताजा तरीन जानकारी मिल सकती है, त्वरित जानकारी से सुख-दु:ख में भागीदार बन सकते हैं, वहीं तस्वीर का दूसरा पहलू यह भी हो गया है कि आज दुनिया के देशों के बीच 60 दीवारें खड़ी हो गई है। अब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के मेक्सिको सीमा पर दीवार बनाने के आदेश और यूरोपीय देशों के बीच दीवारों की तैयारियां सोचने को मजबूर कर देती है। अतिआधुनिक, प्रगतिशील होने, शिक्षा के अत्यधिक विस्तार और मानवतावादी होने का बाना पहनने के बावजूद आतंकवाद, पलायन और सीमा संघर्षों के चलते देशोें की सीमाओं पर बाड़ाबंदी चल पड़ी है। देशों में आतंकवादी गतिविधियां तेज हुई है।</p>
<p>1989 में बर्लिन की दीवार टूटने के बाद दुनिया के देशों के बीच 10 दीवारें रह गई थी, पर पिछले दिनों ही क्यूबेक यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट में बताया गया है कि आज दुनिया के देशों के बीच दीवारों या बाड़ाबंदी की संख्या बढ़कर 60 हो गई है। जहां देशों के बीच नफरत और अलगाव की दीवारें कम होनी चाहिए थी, वहीं देशों के सीमाओं पर खिंचती दीवारें कुछ और ही कह रही है। हालांकि इसका सबसे दुर्भाग्यजनक और निराशाजनक पहलू शरणार्थी समस्या और शरणार्थियों द्वारा शरण देने वाले देश में असामाजिक गतिविधियों में लिप्त होने से देखा जा रहा है। इसके अलावा क्षणिक लाभ के लिए पाकिस्तान सहित कई देश अलगाववादियों के शिविर चलाकर प्रशिक्षित करने और दूसरे देश में अलगाववादी गतिविधियों को प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रुप से प्रायोजित कर अशांति का माहौल बनाया जा रहा है। आईएस व अन्य अतिवादियों के कारण भी स्थितियां खराब हुई है।</p>
<p>फ्रांस में शरणार्थियों के कारण आंतरिक आतंकवादी गतिविधियों के चलते दीवार बनाने का निर्णय करना पड़ा, फ्रांस द्वारा दीवार का निर्माण, हंगरी द्वारा सर्बिया क्रोएशिया सीमा पर दीवार, बुल्गारिया द्वारा तुर्की सीमा पर शरणार्थियों को रोकने के लिए दीवार, युनान द्वारा तुर्की सीमा पर शरणार्थियों के प्रवेश को रोकने के लिए दीवार बनाने का निर्णय लिया गया। इसी तरह से घुसपैट के चलते भारत पाक सीमा पर दीवार व बाड़, इजराइल फलस्तीन सीमा पर दीवार, सउदी अरब और इराक के बीच दीवार बाड़ बनाकर आईएस गतिविधियों को रोकना, उत्तर दक्षिण कोरिया के बीच दीवार जग जाहिर है। भारत बांग्लादेश सीमा पर बाड़ आदि सहित दुनिया के देशों द्वारा दीवार या बाड़बंदी को विकल्प के रुप में लिया जा रहा है। हांलाकि अमेरिका -मैक्सिको के बीच बन रही 3200 किमी दीवार को दुनिया की सबसे बड़ी दीवार माना जा रहा है। भारत द्वारा भी बांग्लादेश सीमा पर 2700 किमी बाड़ घुसपैठ को रोकने की बनाई गई है वहीं भारत पाक सीमा पर 750 किमी लंबी बाड़ है।</p>
<p>एक-दूसरे के पडोसी देश होने के नाते विवादों का आपसी समझ से हल खोजने की जगह कंकरीट की दीवारों या लोहे की बाड़ से रोकने का तरीका किसी भी प्रकार से उचित नहीं हो सकता। पर ज्यों ज्यों हथियारों का व्यापार बढ़ता जाएगा, हथियार उत्पादक देश आपसी मतभेदों को बढ़ावा देते हुए अपने कारोबारी हित साधते रहेंगे। दुनिया के देशों को नफरत की दीवार की जगह प्रेम का व्यवहार अपनाना होगा, तभी सही मायनें में दुनिया प्रगतिशील, मानवतावादी बन सकेगी।</p>
<p><em><strong>-डॉ़ राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong></em></p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/increasing-hatred-between-countries/article-3041</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/increasing-hatred-between-countries/article-3041</guid>
                <pubDate>Fri, 11 Aug 2017 03:20:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-08/protest-6.jpg"                         length="81043"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देना होगा भारत को रणनीतिक कौशल का परिचय</title>
                                    <description><![CDATA[बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल’ अर्थात् बिम्सटेक देशों के विदेश मंत्रियों का सम्मेलन नेपाल की राजधानी काठमांडू में हो रहा है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जबकि भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर गंभीर तनाव बरकरार है और डोकलाम को लेकर चीन बार-बार भारत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-will-introduce-strategic-ills/article-3021"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/sushma.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बहुक्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिए बंगाल की खाड़ी पहल’ अर्थात् बिम्सटेक देशों के विदेश मंत्रियों का सम्मेलन नेपाल की राजधानी काठमांडू में हो रहा है। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है, जबकि भारत और चीन के बीच डोकलाम को लेकर गंभीर तनाव बरकरार है और डोकलाम को लेकर चीन बार-बार भारत को युद्ध की धमकी दे रहा है। ऐसे में बिम्सटेक देशों के विदेश मंत्रियों का नेपाल में एकत्रित होना न केवल भारत के नजरिये से महत्वपूर्ण है, बल्कि चीन के लिए भी इसके निष्कर्ष मायने रखेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">डोकलाम को लेकर दोनों देशों की रणनीति काफी हद तक इस सम्मेलन के परिणामोें पर निर्भर करेगी। ऐसा कहना इसलिए बेजा नहीं है कि बिम्सटेक के दो महत्वपूर्ण देश नेपाल और श्रीलंका पर चीन लगातार डोरे डाल रहा है। अगर चीन भारत के इन दो प्रमुख पड़ोसियों को अपने पक्ष में करने में सफल हो जाता है, तो दक्षिण एशिया की सामरिक स्थिति उसके अनुकूल हो जाएगी, जिसका उपयोग वह भारत को धमकाने या झुकाने में करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">बिम्सटेक (बे आॅफ बंगाल इनीशिएटिव फॉर मल्टी सेक्टोरल टेक्निकल एंड इकोनॉमिक को-आॅपरेशन) सात देशों का एक उपक्षेत्रीय मंच है, जिसका गठन इस उम्मीद के साथ किया गया था कि यह आर्थिक गतिविधियों के द्वारा दक्षिण एशिया और दक्षिण-पूर्व एशिया को जोड़ने का काम करेगा। वर्ष 1994 में थाईलैण्ड ने बांग्लादेश-भारत-श्रीलंका (बिम्सटेक) सहयोग समूह गठित करने की दिशा में पहल की जिसका उद्देश्य बंगाल की खाड़ी से सटे दक्षिण-पूर्वी और दक्षिण एशियाई देशों में उप-क्षेत्रीय आधार पर आर्थिक सहयोग की संभावनाओं का पता लगाना था। द्विपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग की दिशा में कार्य करने के उदेश्य से 6 जून 1997 को बैंकॉक (थाईलैण्ड) में बिम्सटेक की स्थापना की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">दिसंबर 1997 में म्यांमार और फरवरी 2004 को नेपाल तथा भूटान के शामिल होने के साथ ही इसकी सदस्य संख्या सात हो गयी है। इसका लक्ष्य व्यापार, निवेश, उद्योग, तकनीक, मानव संसाधनों का विकास, पर्यटन, कृषि, ऊर्जा, मूल आर्थिक ढांचा और परिवहन के क्षेत्र में विशिष्ट सहयोगी परियोजनाओं की पहचान करना है। यद्यपि सदस्य देशों में घनिष्ठ, सांस्कृतिक, सामाजिक, और आर्थिक संबंधों का इतिहास रहा है। फिर भी सार्क व नाम की तरह इसके सदस्य देशों में भी आपसी मतभेद व मनमुटाव पाया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">विदेश मंत्री सुषमा स्वराज की यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है, जबकि नेपाल मेंं अस्थिरता का माहौल है। स्वराज की यात्रा के करीब दो सप्ताह बाद ही नेपाल के नए प्रधानमंत्री शेरबहादुर देउबा 23 अगस्त को दिल्ली आ रहे हैं। वे पांच दिन यहां रहेंगे। इस यात्रा के दौरान उनका प्रधानमंत्री देउबा से मिलने का भी कार्यक्रम है। देउबा की भारत यात्रा से पहले 14 अगस्त को चीन के उपप्रधानमंत्री वांग यांग भी नेपाल पहुंच रहे हैं। ऐसे में स्वराज को अपने ओजस्वी विचार और वाणी से नेपाली नेतृत्व को विश्वास दिलाना होगा कि भारत, नेपाल के महत्व को अच्छे से समझता है, वह कभी नेपाली हितों की अनदेखी नहीं कर सकता है। चीन की नेपाल में दिलचस्पी बढ़ना भारत के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। पिछले दिनों नेपाल ने चीन के नए सिल्क रूट योजना में शामिल होने संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर कर भारत की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। नेपाल के साथ हुए समझौते के बाद चीन काठमांडू से तिब्बत के ल्हासा तक रेलवे नेटवर्क सहित कई अन्य परियोजनाओं में भारी निवेश करना चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">श्रीमती स्वराज को इस दिशा में भी प्रयास करना होगा कि वे बिम्सटेक के बाकी सदस्य देशों को भी चीनी प्रभाव क्षेत्र से निकाल कर भारत के पाले में खड़ा कर सकें। बांग्लादेश में भी चीन ने रूचि लेना शुरू कर दिया है। हाल ही में चीन ने बांग्लादेश को चार प्रशिक्षण विमान दिये हैं। दो पनडुब्बियों को लेकर दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। इसके अतिरिक्त बंगाल की खाड़ी में बांग्लादेश के लिए एक तेल पाइपलाइन लगाने की योजना पर काम कर रहा है। कुल मिलाकर चीन चारों ओर से भारत को घेरने की दिशा में काम कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">हाल ही में उसने श्रीलंका के साथ दक्षिण समुद्री बंदरगाह हम्बनटोटा को लेकर 1.1 अरब डॉलर का समझौता किया है। हम्बनटोटा बंदरगाह को हिन्द महासागर में चीन की बढ़ती रूचि के तौर पर देखा जा रहा है। आशंका इस बात की भी है कि चीन की वन बेल्ट वन रोड योजना को आगे बढ़ाने में हम्बनटोटा बंदरगाह की अहम् भूमिका हो सकती। यह समझौता पिछले कई महीनों से अधरझूल में था। श्रीलंका की ओर से इस बात की चिंता जताई जा रही थी कि कहीं इस बंदरगाह का इस्तेमाल चीन अपने सामरिक उदेश्यों के लिए न करने लगे। लेकिन अब चीन की ओर से इस बात का आश्वासन दिये जाने के बाद कि वह बंदरगाह का प्रयोग केवल व्यावसायिक उदेश्यों के लिए ही करेगा तथा किसी भी बाहरी शक्ति को यहां नोसेना का बेस बनाने की इजाजत नहीं देगा। इस आश्वासन के बाद दोनों देशों के बीच यह समझौता हो सका।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के लिए चिंता की बात यह है कि चीन दक्षिण में उसके और करीब आ गया है। कुल मिलाकर बिम्सटेक विदेश मंत्रियों की इस बैठक में भारत को बडेÞ रणनीतिक कौशल से अपने पड़ौसियों को अपने अनुकूल करना होगा। देखना यह है कि तेज तर्रार और ओजस्वी वक्ता के रूप में देश और दुनिया में पहचान रखने वाली भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज काठमांडू से क्या ला पाती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
<strong>–<em>एनके सोमानी</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-will-introduce-strategic-ills/article-3021</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-will-introduce-strategic-ills/article-3021</guid>
                <pubDate>Thu, 10 Aug 2017 03:16:16 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-08/sushma.jpg"                         length="28489"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निराकण की ओर राम मंदिर विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[अयोध्या के राम जन्मभूमि स्थल विवाद का मुद्दा लगता है अब निराकरण की ओर बढ़ रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अगस्त से इस विवाद की नियमित सुनवाई का निर्णय लिया है। तीन न्यायमूर्तियों की पीठ राम मंदिर बाबरी ढांचा शीर्षक विवाद का हल निकालेगी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध दायर याचिका पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ram-mandir-dispute-towards-cancellation/article-2972"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/ram-mandir.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अयोध्या के राम जन्मभूमि स्थल विवाद का मुद्दा लगता है अब निराकरण की ओर बढ़ रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने 11 अगस्त से इस विवाद की नियमित सुनवाई का निर्णय लिया है। तीन न्यायमूर्तियों की पीठ राम मंदिर बाबरी ढांचा शीर्षक विवाद का हल निकालेगी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय के फैसले के विरुद्ध दायर याचिका पर जल्द सुनवाई के लिए याचिकाकर्ता एवं भाजपा नेता सुब्रह्मण्यम स्वामी ने पहल की थी। तब मुख्य न्यायाधीश जेएस खेहर ने जल्दी सुनवाई का भरोसा दिया था। हालांकि छह साल से लंबित इस विवाद को पक्षकारों की आपसी सहमति से सुलझाने के लिए भी न्यायालय ने आग्रह किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही अदालत ने यह भरोसा भी दिया था कि अदालत के बाहर मामला सुलझाने के लिए वादी-प्रतिवादी बैठते हैं तो अदालत मध्यस्थता करने को तैयार है। इस टिप्पणी का मंदिर आंदोलन से जुड़े सभी हिंदू सर्मथकों ने समर्थन किया था, लेकिन मुस्लिम समुदाय विभाजित दिखा था। पिछले 68 साल से यह विवाद विभिन्न अदालतों से होता हुआ शीर्ष न्यायालय की दहलीज पर आकर ठिठक गया था, जो अब आगे बढ़ता नजर आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अयोध्या विवाद देश के हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच लंबे समय से तनाव का कारण बना हुआ है। इस मुद्दे ने देश की राजनीति को भी प्रभावित किया है। विश्व हिंदू परिषद् अयोध्या में उस विवादित स्थल पर मंदिर बनाना चाहती है, जहां पहले एक कथित रूप से मस्जिद थी। जबकि मुस्लिमों का पक्ष है कि यहां मंदिर होने के कोई साक्ष्य नहीं हैं। हालांकि पुरातत्वीय साक्ष्यों और लोक साहित्य से यह प्रमाणित होता है कि 1528 में एक ऐसे स्थल पर हिंदुओं को अपमानित करने की दृष्टि से मस्जिद का निर्माण कराया गया, जहां भगवान राम की जन्मस्थली थी। 1528 में मुगल बादशाह बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी। इस कारण इसे बावरी मस्जिद कहा जाता है। 1859 में चालाकी बरतते हुए ब्रिटिश शासकों ने विवादित स्थल पर रोक लगा दी और विवादित परिसर क्षेत्र में दो हिस्से करके हिंदुओं और मुस्लिमों को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।</p>
<p style="text-align:justify;">आजादी के बाद 1949 में मस्जिद में भगवान राम की मूर्तियां पाई गई। एकाएक इन मूर्तियों के प्रकट होने पर मुस्लिमों ने विरोध जताया। दोनों पक्षों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया। नतीजतन सरकार ने इस स्थल को विवादित घोषित कर ताला डाल दिया और दोनों संप्रदाओं के प्रवेश पर रोक लगा दी। इसके परिणामस्वरूप मुस्लिमों ने बावरी मस्जिद संघर्ष समिति बना ली। 1989 में राम मंदिर निर्माण के लिए विहिप ने अभियान तेज किया और विवादित स्थल के नजदीक मंदिर की नींव रख दी। 1990 में विहिप के कार्यकतार्ओं ने विवादित ढांचे को क्षति पहुंचाने की कोशिश की, लेकिन तबके प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने बातचीत से मामला सुलझाने की कोशिश की, किंतु कोई हल नहीं निकला। अतत: 1992 में भाजपा, विहिप और शिवसेना के कार्यकर्ताओं ने 6 दिसंबर को विवादित ढांचे को ढहा दिया। इस समय केंद्र में कांग्रेस के पीवी नरसिंहराव प्रधानमंत्री थे।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि पुरातत्वीय साक्ष्यों, निर्मोही अखाडे़ और गोपाल सिंह विशारद द्वारा मंदिर के पक्ष में जो सबूत और शिलालेख अदालत में पेश किए गए थे, उनसे यह स्थापित हो रहा था कि विध्वंस ढांचे से पहले उस स्थान पर राममंदिर था। जिसे आक्रमणकारी बाबर ने हिन्दुओं को अपमानित करने की दृष्टि से शिया मुसलमान मीर बांकी को मंदिर तोड़कर मस्जिद बनवाने का हुक्म दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">सर्वोच्च न्यायालय में अपील किए जाने के बाद अदालत में यथास्थिति बनाए रखने का फैसला दिया था। दरअसल, विवादित भूमि 2.77 एकड़ के एक हिस्से पर इस्लाम के दावे को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा मंजूर किए जाने से जो मतांतर सामने आया था, वह असंतोष व शीर्ष न्यायालय में अपील का प्रमुख आधार था। इसी बिना पर स्थगन देते हुए न्यायमूर्ति आफताब आलम और आरएम लोढ़ा की संयुक्त पीठ ने कहा था कि किसी भी पक्ष ने जब विवादित भूमि बंटवारे की मांग नहीं की थी, फिर यह अजीब व चकित कर देने वाला हाईकोर्ट ने आदेश क्यों दिया ? जबकि फैसला भूमि के मालिकाना हक पर केंद्रित रहना था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस वजह से इस फैसले को एक नया आयाम मिला और यह विचित्रता की श्रेणी में आ गया। हालांकि न्यायाधीश धर्मवीर शर्मा ने जरूर संपूर्ण विवादित भूमि हिन्दुओं को सौंपने का फैसला दिया था। सर्वोच्च न्यायालय ने स्थगन देते समय विवादित भूमि के अह्म पहलू को रेखांकित कर यह जाहिर कर दिया था कि अब जो फैसला आएगा वह भूमि के मालिकाना हक को तय करते हुए, एक सर्वमान्य फैसला होगा और भूमि का बंटवारा संप्रदायों के अनुसार नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विवादित परिसर ढांचे से जुड़ा सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह था कि किसी मंदिर अथवा धार्मिक स्थल को तोड़कर बाबरी मस्जिद बनाई गई थी अथवा नहीं ? इसे हाईकोर्ट के फैसले का संयोग कहिए या विलक्षणता कि तीनों न्यायमूर्तियों ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की रिपोर्ट व जुटाये साक्ष्यों के आधार पर निर्विवाद रूप से यह माना है कि राम के बाल रूप में जिस स्थल पर राम की मूर्ति स्थापित है, वही स्थल रामजन्म भूमि है। विवादित ढांचे के विध्वंस के बाद बाबरी संघर्ष समिति की भी यही प्रमुख मांग थी कि पहले यह तय किया जाए कि यही स्थल रामजन्म भूमि है। यह भी सुनिश्चित हो कि बाबरी मस्जिद के वजूद में आने से पहले यहां कोई मंदिर था और यह भी तय किया जाए मस्जिद निर्माण के लिए मंदिर तोड़ा गया था ?</p>
<p style="text-align:justify;">बाद में इस सर्वेक्षण की जिम्मेवारी एएसआई को सौंपी गई। इसने विवादित रामजन्म भूमि, बाबरी मिस्जद परिसर के नीचे उत्खनन का कार्य कराया और 5 अगस्त 2003 को खुदाई की 574 पन्ने की रिपोर्ट न्यायालय को सौंप दी। इस खुदाई में जो पुरातत्वीय साक्ष्य मिले उनसे तय हुआ कि तोड़े गए ढांचे के नीचे ग्यारहवीं सदी के हिन्दुओं के धार्मिक स्थल से जुड़े साक्ष्य बड़ी संख्या में मौजूद हैं। अनेक शिलालेख और भगवान शंकर की मूर्ति मिलने के सबूत भी न्यायालय में पेश किए गए। परिसर का राडार सर्वेक्षण भी कराया गया। इसी से तय हुआ कि ढांचे के नीचे एक और ढांचा है। इन्हीं साक्ष्यों के बूते हाईकोर्ट के तीनों न्यायमूर्तियों ने बहुमत से माना कि विवादित स्थल का केंद्रीय स्थल रामजन्म भूमि है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>हालांकि पुरातत्वीय साक्ष्यों और लोक साहित्य से यह प्रमाणित होता है कि 1528 में एक ऐसे स्थल पर हिंदुओं को अपमानित करने की दृष्टि से मस्जिद का निर्माण कराया गया, जहां भगवान राम की जन्मस्थली थी। 1528 में मुगल बादशाह बाबर ने यह मस्जिद बनवाई थी। इस कारण इसे बावरी मस्जिद कहा जाता है। 1859 में चालाकी बरतते हुए ब्रिटिश शासकों ने विवादित स्थल पर रोक लगा दी और विवादित परिसर क्षेत्र में दो हिस्से करके हिंदुओं और मुस्लिमों को प्रार्थना करने की अनुमति दे दी।</em></p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-प्रमोद भार्गव</strong></em></p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ram-mandir-dispute-towards-cancellation/article-2972</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/ram-mandir-dispute-towards-cancellation/article-2972</guid>
                <pubDate>Tue, 08 Aug 2017 03:33:17 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-08/ram-mandir.jpg"                         length="81381"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसी भी मुद्दे अथवा विवाद का हल सिर्फ बातचीत: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। चीन के साथ चल रहे डोकलाम विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों में चीन को घेरा है। नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि मुश्किल मुद्दों, विवादों को सिर्फ बातचीत के रास्ते ही सुलझाया जा सकता है। उन्होंने खुद को प्राचीन भारत की परंपरा में यकीन करने वाला बताया। मोदी ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/conversation-the-solution-of-any-issue-modi/article-2907"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/modi-in-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नई दिल्ली।</strong> चीन के साथ चल रहे डोकलाम विवाद के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इशारों में चीन को घेरा है। नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि मुश्किल मुद्दों, विवादों को सिर्फ बातचीत के रास्ते ही सुलझाया जा सकता है। उन्होंने खुद को प्राचीन भारत की परंपरा में यकीन करने वाला बताया। मोदी ने कहा कि ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि ‘यह एक पुरानी भारतीय अवधारणा है जिसमें संवाद और बहस पर विचारों के आदान-प्रदान के मॉडल को अपनाया गया है। जिसमें किसी भी मुद्दे को बातचीत के जरिए हल किया जाता था।’</p>
<p>‘संवाद-ग्लोबल इनिशिएटिव ऑन कॉन्फ्लिक्ट अवॉयडेंस एंड एंटरटेनमेंट कॉन्शियसनेस’ कार्यक्रम को वीडियो मैसेज के जरिए संबोधित करते हुए पीएम ने कहा, “21वीं सदी में दुनिया के सभी देश एक-दूसरे से जुड़े हुए और एक-दूसरे पर निर्भर हैं। फिर भी यह सदी आतंकवाद और जलवायु परिवर्तन (climate change) जैसी वैश्विक चुनौतियों का सामना कर रही है। मुझे भरोसा है कि इसका हल एशिया की सबसे पुरानी बातचीत और चर्चा की परंपरा से ही निकलेगा।”</p>
<h2>भारत-चीन के बीच सिक्किम में सीमा विवाद</h2>
<p>गौरतलब है कि भारत-चीन के बीच सिक्किम में सीमा विवाद काफी बढ़ चुका है। चीन, भूटान के डोकलाम में सड़क बना रहा है और भारत ने इसका जोरदार विरोध कर रहा है।</p>
<p>भूटान का डोकलाम पठार भारत (सिक्किम), चीन, भूटान के ट्राइजंक्शन पर है। डोकलाम को चीन डोंगलांग कहता है। इस इलाके में चीन की दखलंदाजी और सड़क बनाकर अपनी स्थिति मजबूत करने से भारत और भूटान को परेशानी है।</p>
<p>मोदी ने कहा, “तर्क शास्त्र (डिबेट) प्राचीन भारत का ही कॉन्सेप्ट है, बातचीत और चर्चा के जरिये इसे पाया गया और यह विवादों को खत्म करने और विचारों को एक-दूसरे से साझा करने का मॉडल बना।”<br />
– “भारत में मानवता का लंबा इतिहास रहा है, कई धर्मों, सभ्यताओं और अध्यात्म में इसकी गहरी जड़ें हैं। इसके रास्ते ही हमनें कई सवालों के जवाब खोजे हैं।”</p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/conversation-the-solution-of-any-issue-modi/article-2907</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/other-news/conversation-the-solution-of-any-issue-modi/article-2907</guid>
                <pubDate>Sat, 05 Aug 2017 03:34:43 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-08/modi-in-meeting.jpg"                         length="19998"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मुंबई: एयरपोर्ट पर नमाज पढ़ने को लेकर बवाल</title>
                                    <description><![CDATA[सीआईएसएफ कर्मी व सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज मुंबई: मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शनिवार को नमाज़ अदा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, एक यात्री का आरोप है कि कुछ मुस्लिम यात्री एयरपोर्ट पर बीच रास्ते पर ही नमाज़ पढ़ने बैठ गए। इससे होने वाली परेशानी के चलते कुछ यात्रियों ने विरोध किया। हालांकि, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/dispute-for-praying-namaz-mumbai-international-airport/article-2151"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/bjp-leader.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">सीआईएसएफ कर्मी व सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ शिकायत दर्ज</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई:</strong> मुंबई इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर शनिवार को नमाज़ अदा करने को लेकर विवाद खड़ा हो गया। दरअसल, एक यात्री का आरोप है कि कुछ मुस्लिम यात्री एयरपोर्ट पर बीच रास्ते पर ही नमाज़ पढ़ने बैठ गए। इससे होने वाली परेशानी के चलते कुछ यात्रियों ने विरोध किया।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, एयरपोर्ट पर नमाज़ के लिए विशेष रूम की व्यवस्था भी है। नमाज़ अदा करने वाले यात्रियों के पास CISF के जवान तैनात थे और वह अन्य यात्रियों को मुस्लिम यात्रियों से दूर हो कर आने-जाने के लिए कह रहे थे। बीजेपी नेता विनीत गोयनका ने इस पर आपत्ति उठाई और एयरपोर्ट पर ही धरने पर बैठ गए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एयरपोर्ट पर जब अलग से इसके लिए जगह है, तो गैंगवे में नमाज क्यों पढ़ी जा रही है</h3>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार शनिवार की रात 8.10 बजे बीजेपी नेता विनीत गोयनका अपनी पत्नी के साथ मुंबई एयरपोर्ट से दिल्ली के लिए एयर इंडिया की फ्लाइट पकड़ने जा रहे थे। तभी अचानक 2 व्यक्ति गैंगवे में नमाज पढ़ने लगे।</p>
<p style="text-align:justify;">गोयंका ने इसका विरोध किया। साथ ही सामान की जांच के समय गोयनका ने इसकी शिकायत सीआईएसएफ जवानों से की। गोयनका ने कहा कि एयरपोर्ट पर जब अलग से इसके लिए जगह है, तो गैंगवे में नमाज क्यों पढ़ी जा रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जवान ने कैमरा छीनने की की कोशिश</h2>
<p style="text-align:justify;">विनीत का आरोप है कि उनकी पत्नी ने जब धरना प्रदर्शन की तस्वीर को कैमरे में कैद करना चाहा तो जवान ने कैमरा छीनने की कोशिश की। गोयनका ने इसके खिलाफ़ शिकायत केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को भी खत लिखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही सीआईएसएफ के स्थानीय प्रमुख को भी शिकायती आवेदन दिया । हालांकि अभी तक सीआईएसएफ का पक्ष सामने नहीं आया है। गोयनका मुंबई से दिल्ली AI 101 फ्लाइट से जाने वाले थे। उन्होंने रात 8 बजे से साढ़े 10 बजे तक धरना दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके चलते फ्लाइट छूट गई। उन्होंने सीआएसएफ ऑफिस में रिपोर्ट दर्ज कराई है। शिकायत दो सीआईएसएफ कर्मियों इंस्पेक्टर शशि कुमार और सब-इंस्पेक्टर एचएस रावत के खिलाफ दर्ज कराई है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/dispute-for-praying-namaz-mumbai-international-airport/article-2151</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/other-news/dispute-for-praying-namaz-mumbai-international-airport/article-2151</guid>
                <pubDate>Sun, 09 Jul 2017 23:01:20 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-07/bjp-leader.jpg"                         length="32207"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बातचीत के जरिए सुलझे, भारत-चीन सीमा विवाद</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व की दो बड़ी महाशक्ति, भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर आपसी रिश्ते एक बार फिर तनावपूर्ण हो गये हैं। दुखद यह है कि संबंध सुधारने की दिशा में कोई भी पक्ष पहल करता नहीं दिख रहा है। जर्मनी के हैम्बर्ग में शुरू हुए, जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान नरेंद्र मोदी और […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-china-border-dispute-resolved-through-talks/article-2114"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/china-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विश्व की दो बड़ी महाशक्ति, भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर आपसी रिश्ते एक बार फिर तनावपूर्ण हो गये हैं। दुखद यह है कि संबंध सुधारने की दिशा में कोई भी पक्ष पहल करता नहीं दिख रहा है। जर्मनी के हैम्बर्ग में शुरू हुए, जी-20 शिखर सम्मेलन के दौरान नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच द्विपक्षीय वार्ता की उम्मीद जगी थी लेकिन,</p>
<p style="text-align:justify;">चीन के विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में पहले ही स्पष्ट कर दिया गया कि सीमा पर माहौल खराब होने की वजह से उनकी आधिकारिक मुलाकात नहीं हो सकती। लिहाजा, शुक्रवार को दोनों राष्ट्राध्यक्षों के आपस में मिलने के बाद भी वह मुलाकात अधूरी और केवल औपचारिकता भर रह गई।</p>
<p style="text-align:justify;">स्पष्ट है कि सीमा विवाद को लेकर चीन जिस तरह का अड़ियल रुख अपना रहा है, उससे विवाद के लंबे समय तक बढ़ने के आसार नजर आ रहे हैं। उल्लेखनीय है कि जी-20 शिखर सम्मेलन में द्विपक्षीय कूटनीतिक मुलाकात से इनकार करने से पूर्व, चीन ने भारतीय पत्रकारों का तिब्बत दौरा भी रद्द कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, चीन के आमंत्रण पर ही भारतीय पत्रकारों का एक दल 8 जुलाई से 15 जुलाई तक तिब्बत दौरे पर जाने वाला था, लेकिन सीमा विवाद का हवाला देकर चीन ने इस दौरे को भी रद्द कर दिया है। चीन के इस तरह के दोयम रवैये से लगता है कि वास्तव में वह इस विवाद का स्थाई हल नहीं चाहता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और चीन, एक दूसरे के पड़ोसी देश जरुर हैं लेकिन, दोनों देशों के मध्य भौगोलिक क्षेत्र को लेकर तनाव वर्षों से कायम रहा है। दोनों के मध्य सीमा विवाद को सुलझाने के लिए 1914 में मैकमोहन रेखा खींची गई थीं</p>
<p style="text-align:justify;">बावजूद इसके, भारत-चीन सीमा पर गतिरोध पिछले कई दशकों से जारी है। दरअसल, जम्मू कश्मीर से लेकर अरुणाचल प्रदेश तक चीन के साथ जुड़ी भारत की 3,488 किमी की लंबी सीमा हमेशा से विवादों का केंद्र रही है। गौरतलब यह भी है कि इस सीमा विवाद को लेकर 1962 और 1967 में दोनों देशों के बीच युद्ध भी हो चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि, हाल के वर्षों में यह देखा जा रहा है कि चीन का भारत में अवैध प्रवेश तथा भारतीय भूमि के अतिक्रमण के अपने नापाक मंसूबों को जाहिर करने से बाज नहीं आ रहा है। इसी क्रम में, कभी चीनी सेना जबरन भारतीय सीमा के अंदर तक घुस आती है तो कभी, उनके सैनिक भारतीय बंकर को नष्ट कर देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत के प्रति चीन हमेशा से दोहरा रवैया अपनाता रहा है। 1954 के ऐतिहासिक पंचशील समझौते और पंडित नेहरू के भाईचारे पर केंद्रित, ‘भारतीय-चीनी भाई-भाई’ के नारे को धता बताते हुए चीन ने 1962 में भारत से युद्ध किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, इसके पांच वर्ष बाद 1967 में भी चीन भारत पर आक्रमण की फिराक में था लेकिन, भारतीय सैनिकों ने उनके इस मंसूबे पर पानी फेर दिया था। खैर, दोनों युद्ध को हुए सालों बीत चुके हैं</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन, अब भी दोनों सरकारें 1962 के युद्ध का हवाला देकर एक-दूसरे को नसीहत देती दिख रही हैं। जबकि, पिछले 55 सालों में दोनों देशों की राजनीति और अर्थव्यवस्था में काफी बदलाव आ चुका है लेकिन, चीन के अड़ियल रवैये पर किसी तरह का बदलाव नहीं आया है। 2013 में लद्दाख में सीमा विवाद को लेकर दोनों देशों के बीच गतिरोध करीब 21 दिनों तक बरकरार रहा था लेकिन, इस बार सिक्किम में उत्पन्न टकराव के एक महीने बाद भी कोई पक्ष शांति की पहल करता नहीं दिख रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">मौजूदा टकराव की शुरूआत तब हुई, जब तिब्बत-भारत-भूटान मार्ग पर, चीन ने बिना किसी की अनुमति से सामरिक सड़क बनाने की शुरूआत कर दी जो, 1890 में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार और चीन की किंग सरकार के बीच हुए सीमा समझौते का साफ उल्लंघन था। इस पर, भूटान और भारत ने आपत्ति जताई।</p>
<p style="text-align:justify;">अवैध सड़क निर्माण रोकने के लिए भारत ने अपने सैनिक भेज दिये। जवाब में चीन ने भी ऐसा ही किया। इसके बाद से, सिक्किम का डोकालाम पठार क्षेत्र ‘रेड जोन’ में तब्दील हो चुका है। आलम यह है कि विवादित क्षेत्र में हजारों भारतीय तथा चीनी सैनिक गश्त लगा रहे हैं। चीन के साथ सबसे बड़ी परेशानी यह है कि वह उन्हीं समझौतों को मानता है, जो उसके पक्ष में होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन 1890 के उक्त समझौते को मानने से हमेशा से इंकार करता आया है। दूसरी तरफ, 2007 में भूटान से हुई मैत्री संधि के तहत भारत और भूटान ने एक-दूसरे के राष्ट्रीय हितों में निकटता से साथ देने का वादा किया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी बाबत, भारत ने विवादित स्थल पर सड़क निर्माण से चीन को रोका क्योंकि, इससे भारत की सुरक्षा व संचार व्यवस्था की गोपनीयता को भी खतरा हो सकता था। फिलहाल, दोनों देशों द्वारा जारी बयानों और विवादित स्थल पर बंदूकधारी हजारों सैनिकों को देखकर रिश्तों की तल्खी का अंदाजा लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उधर, चीनी अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ के संपादकीय में दोनों देशों के मध्य युद्ध की नौबत आने की संभावना भी व्यक्त कर दी गई है। चीन के इसी सरकारी अखबार के माध्यम से भारत को रोजाना धमकियाँ भी मिल रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन और भारत विश्व के दो सर्वाधिक जनसंख्या वाले तथा विशाल अर्थव्यवस्था के साथ तेजी से उभरते एशियाई राष्ट्र भी हैं लेकिन, चीन के साथ दिक्कत यह है कि उसे भारत की आर्थिक उन्नति तथा अमेरिका से मीठे संबंध व निकटता हमेशा से चुभती रही है। ‘वन बेल्ट, वन रोड’ फोरम से भारत के बहिष्कार के बाद से ही चीन आग-बबूला हो उठा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन की दादागिरी का अपना एक अलग इतिहास रहा है। अपने पड़ोसी देशों की जमीन पर धौंस जमाना उसकी पुरानी फितरत रही है। दक्षिणी चीन सागर पर एकाधिकार को लेकर फिलीपींस, ताइवान, वियतनाम, इंडोनेशिया और अन्य राष्ट्रों के साथ उसका विवाद उल्लेखनीय है। वहीं, जापान के साथ पूर्वी चीन सागर के द्वीपों को लेकर वह झगड़ता रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि, ताइवान पर भी वह अपना पूरा अधिकार जमाना चाहता है। इसी तरह, उत्तर कोरिया, नेपाल, रुस के कुछ हिस्सों पर वह अपना दावा करता आया है। चीन के इस रवैये की वजह से उसकी आलोचना संपूर्ण विश्व में होती रहती है।</p>
<p style="text-align:justify;">अगर, मौजूदा परिस्थिति की बात की जाए तो, दोनों देश (भारत और चीन) सामरिक मोर्चे पर पूरी तरह सक्षम हैं। इस मामले में, किसी एक को कम आंकना गलत होगा। दोनों के पास युद्ध के लिए अत्याधुनिक हथियार और आवश्यक तकनीक दोनों मौजूद हैं लेकिन,</p>
<p style="text-align:justify;">मूल सवाल यह है कि क्या इस सीमा विवाद का हल केवल युद्ध है? क्या बातचीत के जरिये इसे सुलझाने का प्रयास नहीं किया जाना चाहिए? युद्ध समस्या का स्थाई हल नहीं है क्योंकि, युद्ध से तात्कालिक लाभ तो हो सकता है लेकिन, इसके दूरगामी परिणाम दोनों देशों के लिए विपरीत होंगे। विडंबना है कि जब दुनिया में अमन, शांति और सौहार्द की बातें हो रही हैं तब,</p>
<p style="text-align:justify;">दो पड़ोसी एशियाई देश एक-दूसरे के प्रति परस्पर सहयोग की भावना रखने की बजाय, युद्ध करने पर आमादा दिख रहे हैं। भारत और चीन को एक-दूसरे का प्रतिद्वंद्वी नहीं, साझेदार बनने पर जोर देना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत-चीन सीमा विवाद से इतर देखें, तो ज्ञात होता है कि आज पूरी दुनिया ही बारुद के ढेर पर बैठी है। ऐसे में, एक चिंगारी लगने मात्र से सृष्टि खाक हो जाएगी। राजनीतिक विश्लेषक मान रहे हैं कि तृतीय विश्व युद्ध अब अधिक दूर नहीं है। यह जानने-समझने के बावजूद, आज विश्व में विभिन्न राष्ट्रों के बीच तनातनी के माहौल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अत्याधुनिक हथियारों की बदौलत, एक दूसरे पर विजय प्राप्त करने की लालसा ने एक-दूसरे के प्रति विद्वेष की भावना उत्पन्न की है। विडंबना है कि विश्व के अधिकांश राष्ट्र आज लोकतांत्रिक व्यवस्था को अंगीकार कर रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ, कमजोर देशों पर एकाधिकार की संकीर्ण सोच विश्व शांति के लिए खतरा साबित हो रही है। ऐसी परिस्थिति में, संयुक्त राष्ट्र संघ की भूमिका महत्वपूर्ण हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सुधीर कुमार</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-china-border-dispute-resolved-through-talks/article-2114</link>
                <guid>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-china-border-dispute-resolved-through-talks/article-2114</guid>
                <pubDate>Sun, 09 Jul 2017 00:41:51 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://www.sachkahoon.com/media/2017-07/china-2.jpg"                         length="20969"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        