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                <title>judge - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Delhi Judge Suicide Case: रिश्तेदारों ने उत्पीड़न का आरोप लगाया, अंतिम संस्कार में पत्नी और बच्चे अनुपस्थित</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रीन पार्क स्थित अपने घर में फांसी पर लटके मिले दिल्ली न्यायिक सेवा के अधिकारी के परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/delhi/delhi-judge-suicide-case-relatives-allege-harassment-wife-and-children/article-84184"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2026-05/delhi-judge-suicide-case.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>Delhi Judge Suicide Case: ग्रीन पार्क स्थित अपने घर में फांसी पर लटके मिले दिल्ली न्यायिक सेवा के अधिकारी के परिवार ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि अधिकारी पिछले कुछ दिनों से बहुत तनाव में थे और उन्होंने उत्पीड़न की शिकायत भी की थी। पुलिस ने शनिवार को बताया कि उत्तर-पूर्वी जिले में डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी (डीएलएसए) के सेक्रेटरी के तौर पर काम कर रहे एक न्यायिक अधिकारी अपने दक्षिण दिल्ली स्थित घर पर मृत पाए गए। इसे आत्महत्या का संदिग्ध मामला माना जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकारियों ने बताया कि मृतक की पहचान 30 वर्षीय अमन कुमार शर्मा के रूप में हुई है। वह अपने घर के बाथरूम में फंदे से लटके मिले। पुलिस ने बताया कि शर्मा की पत्नी स्वाति शर्मा, जो खुद भी एक न्यायिक अधिकारी हैं, से पूछताछ की जा रही है और जांच के हिस्से के तौर पर उनका बयान दर्ज किया जा रहा है। पुलिस के अनुसार, प्रेम कुमार शर्मा के बेटे अमन शर्मा ग्रीन पार्क मेन स्थित यू-4ए, पहली मंजिल पर रह रहे थे। यह घटना तब सामने आई जब बी-ब्लॉक डिफेंस कॉलोनी के रहने वाले उनके साले शिवम ने दोपहर करीब 1:45 बजे पुलिस कंट्रोल रूम में फोन किया। फोन आने के बाद पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं और जांच शुरू कर दी।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के अलवर में रविवार को अमन शर्मा का अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव में किया गया। शिवम के पिता राजेश शर्मा ने आरोप लगाया कि अमन ने अपने पिता को बताया था कि वैवाहिक कलह के कारण वह बहुत ज्यादा मानसिक तनाव में है। उन्होंने कहा कि शुक्रवार रात करीब 10 बजे अमन ने अपने पिता को फोन किया और कहा कि वह अब और जीवित नहीं रह सकता। प्रेम सिंह, बिना किसी को बताए, तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हो गए। </p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली पहुंचने पर उन्हें पता चला कि अमन का अपनी पत्नी के साथ झगड़ा चल रहा था। अमन ने उन्हें बताया कि पिछले दो महीनों से उसकी पत्नी और उसकी बहन उसे परेशान कर रही थीं। स्वाति शर्मा की बहन निधि मलिक एक आईएएस अधिकारी हैं और फिलहाल जम्मू में तैनात हैं। राजेश के अनुसार, अमन ने अपने पिता से यह भी कहा था कि निधि मलिक उसकी जिंदगी में दखल दे रही है और उसके घर-परिवार को नियंत्रित कर रही है। उन्होंने आगे आरोप लगाया कि अमन के पिता से उनकी बहू ने कहा था कि अगर वह घर छोड़कर नहीं जाते, तो वह पुलिस को बुला लेगी।</p>
<h4 style="text-align:justify;">झगड़े के बाद बाथरूम में जाकर लगाया फंदा</h4>
<p style="text-align:justify;">राजेश ने कहा कि इसके बाद घर में कहा-सुनी हो गई, इसलिए अमन के पिता दूसरे कमरे में चले गए। उन्होंने बताया कि अमन और स्वाति दूसरे कमरे में झगड़ रहे थे। स्वाति उस पर चिल्ला रही थी, और अमन रो रहा था। थोड़ी देर बाद, वे शांत हो गए। उन्होंने आगे बताया, "जब प्रेम शर्मा दोबारा उस कमरे में गए, तो उन्होंने पूछा कि अमन कहां है। स्वाति ने उन्हें बताया कि उसे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है। इसलिए उन्होंने अमन को फोन किया और उन्हें बाथरूम के अंदर फोन की घंटी बजने की आवाज सुनाई दी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके बाद, उन्होंने बाथरूम का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अमन ने दरवाजा नहीं खोला। उन्होंने दरवाजा खोलने की बहुत कोशिश की। इसके बाद पड़ोसियों ने उन्हें बताया कि शाफ़्ट में एक खिड़की है। थोड़ी देर बाद, उन्होंने खिड़की तोड़ दी और बाथरूम में घुस गए, जहां अमन फंदे से लटका हुआ मिला।" राजेश ने यह भी दावा किया कि इसी दौरान स्वाति की बहन वहां आई और उसे बच्चों को घर से अपने साथ ले गई। मुझे नहीं लगता कि यह आत्महत्या का मामला है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">पुलिस कर रही सभी संभावित कोणों से जांच</h3>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, पुलिस ने कहा कि वे इस मामले की जांच सभी संभावित कोणों से कर रहे हैं, भले ही पहली नजर में यह आत्महत्या का मामला ही प्रतीत होता है। सफदरजंग एन्क्लेव पुलिस स्टेशन के एक अधिकारी ने बताया कि शर्मा के फोन रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स का विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि किसी भी असामान्य गतिविधि का पता लगाया जा सके। अधिकारियों ने आगे बताया कि मृतक द्वारा घर और दफ्तर में इस्तेमाल किए जाने वाले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए जब्त कर लिया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">घर के आस-पास के इलाकों से मिले सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जा रही है, ताकि यह पता चल सके कि क्या कोई आगंतुक आया था, या घटना से ठीक पहले कोई उस अधिकारी के साथ था। पुलिस पड़ोसियों और सहकर्मियों के बयान भी दर्ज कर रही है, ताकि उन परिस्थितियों का पता लगाया जा सके जिनके कारण उनकी मृत्यु हुई होगी। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, शर्मा ने इससे पहले शहर में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी और सिविल जज के रूप में कार्य किया था। उन्होंने 2018 में पुणे के एक विश्वविद्यालय से लॉ की डिग्री पूरी करने के बाद, 2021 में न्यायिक सेवाओं में प्रवेश किया था। अधिकारियों ने बताया कि अक्टूबर 2025 में उन्होंने कड़कड़डूमा कोर्ट स्थित उत्तर-पूर्वी जिले की 'जिला विधिक सेवा प्राधिकरण' के पूर्णकालिक सचिव के रूप में कार्यभार संभाला था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">‘पापा, मुझे माफ कर देना...’, सुसाइड से पहले जज अमन कुमार ने अपने पिता को किया था कॉल</h4>
<p style="text-align:justify;">अलवर (एजेंसी)। दिल्ली में युवा जज अमन कुमार शर्मा की आत्महत्या का मामला चर्चा में बना हुआ है। इस बीच अमन की बहन के ससुर राजेश शर्मा ने बताया कि जान देने से पहले अमन ने अपने पिता को कॉल कर माफी मांगी थी और कहा था कि अब उसके पास कोई रास्ता नहीं बचा है।  दरअसल, अमन कुमार शर्मा का पार्थिव शरीर रविवार को राजस्थान के अलवर पहुंचा, जहां उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। उनके पिता एडवोकेट प्रेम कुमार शर्मा ने उन्हें मुखाग्नि दी। इस दुखद घटना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजेश शर्मा के मुताबिक, 1 मई की रात करीब 8 बजे अमन ने अपने पिता को फोन किया था। उन्होंने कहा था, "पापा, मेरे पास अब कोई रास्ता नहीं बचा... यह मेरा आखिरी कॉल है, मुझे माफ कर देना।" इस कॉल के बाद परिवार तुरंत दिल्ली के लिए रवाना हुआ, लेकिन अगले दिन यानी 2 मई को अमन ने आत्महत्या कर ली। परिवार का कहना है कि यह सिर्फ सुसाइड नहीं है, बल्कि इसके पीछे गंभीर वजहें हैं और पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।</p>
<h4 style="text-align:justify;">इंटरकॉस्ट थी शादी</h4>
<p style="text-align:justify;">राजेश शर्मा ने बताया कि अमन की शादी लव मैरिज थी। दोनों की ट्रेनिंग के दौरान पहचान हुई थी। यह इंटरकास्ट शादी थी, जिस पर शुरू में परिवार राजी नहीं था, लेकिन बाद में बच्चों की खुशी के लिए मान गए। शादी के बाद से ही पति-पत्नी के बीच विवाद की बातें भी सामने आ रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/2026-05/delhi-judge-suicide-case.jpg" alt="Delhi Judge Suicide Case" width="1280" height="720"></img></p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>दिल्ली</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 May 2026 20:14:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sarvesh Kumar]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>Supreme Court Judge: न्यायमूर्ति एन कोटिश्वर सिंह, न्यायमूर्ति आर महादेवन ने ली उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश पद की शपथ</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Supreme Court Judge: उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने गुरुवार को न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने शीर्ष अदालत परिसर में आयोजित एक समारोह में दोनों न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई। इस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/justice-n-kotiswar-singh-justice-r-mahadevan-took-oath-as-judges-of-the-supreme-court/article-59988"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-07/supreme-court-judge.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Supreme Court Judge: उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़ ने गुरुवार को न्यायमूर्ति एन. कोटिश्वर सिंह और न्यायमूर्ति आर. महादेवन को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश पद की शपथ दिलाई। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने शीर्ष अदालत परिसर में आयोजित एक समारोह में दोनों न्यायाधीशों को पद की शपथ दिलाई। इस अवसर पर शीर्ष अदालत के अन्य न्यायाधीशों, अनेक वरिष्ठ अधिवक्ताओं समेत कई गणमान्य लोग मौजूद थे।</p>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत में न्यायाधीश बनने से पहले न्यायमूर्ति कोटिश्वर जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति महादेवन मद्रास उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश थे। मूल रूप से मणिपुर उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रहे न्यायमूर्ति सिंह अपने राज्य के पहले न्यायाधीश हैं जिन्हें उच्चतम न्यायालय में न्यायाधीश के पद पर पदोन्नत किया गया। न्यायमूर्ति महादेवन मूलत: तमिलनाडु उच्च न्यायालय से आते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दोनों न्यायाधीशों के शपथ ग्रहण के साथ ही शीर्ष अदालत के लिए कुल निर्धारित 34 न्यायाधीशों की संख्या पूरी हो गई। न्यायमूर्ति अनिरुद्ध बोस के 10 अप्रैल 2024 और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना के 19 मई 2024 को सेवानिवृत्त होने के कारण शीर्ष अदालत में दो न्यायधीश के पद तब से रिक्त थे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की सलाह पर दोनों न्यायाधीशों की नियुक्ति को मंजूरी दी थी। राष्ट्रपति की अनुमति के बाद केंद्र सरकार ने 16 जुलाई को एक अधिसूचना जारी कर दोनों न्यायाधीशों को उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश के पद पर नियुक्त करने की घोषणा की थी। न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली उच्चतम न्यायालय की कॉलेजियम ने 11 जुलाई 2024 को दोनों न्यायाधीशों को शीर्ष अदालत के न्यायाधीश पद पर नियुक्ति की सिफारिश की थी। Supreme Court Judge</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में दक्ष प्रथम" href="http://10.0.0.122:1245/daksh-first-in-powerpoint-presentation-competition/">पावरप्वाइंट प्रेजेंटेशन प्रतियोगिता में दक्ष प्रथम</a></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jul 2024 15:51:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Delhi High Court: जज के लिए मौत की सजा मांगना छात्र को पड़ा भारी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने जज के लिए मौत की सजा की मांग करने वाले आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र को छह महीने जेल की सजा सुनाई है। वहीं न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति शैलिंदर कौर की पीठ ने कहा कि वादी नरेश शर्मा को अपने आचरण और कार्यों पर कोई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-student-found-it-difficult-to-a-the-judge-for-death-sentence/article-54463"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/delhi-high-court.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Delhi High Court: दिल्ली हाईकोर्ट ने जज के लिए मौत की सजा की मांग करने वाले आईआईटी दिल्ली के पूर्व छात्र को छह महीने जेल की सजा सुनाई है। वहीं न्यायमूर्ति सुरेश कुमार कैत और न्यायमूर्ति शैलिंदर कौर की पीठ ने कहा कि वादी नरेश शर्मा को अपने आचरण और कार्यों पर कोई पश्चाताप नहीं है। बता दें कि नरेश के खिलाफ अगस्त में आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू की गई थी।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/team-india-reached-the-semi-finals-anushka-sharma-was-happy-and-said-a-big-thing/">World Cup 2023: सेमी फाइनल में पहुंची टीम इंडिया, खुश हुई अनुष्का शर्मा… और कह दी बड़ी बात….</a></p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में पीठ ने कहा कि नरेश को अदालत की अवमानना अधिनियम-1971 का दोषी पाया गया है जिसके आधार पर उन्हें दो हजार रुपये के जुर्माने के साथ 6 माह की साधारण कारावास की सजा सुनाई जाती है। जुर्माना न देने की सूरत में 7 दिनों की अतिरिक्त साधारण कैद भुगतनी पड़ सकती है। अदालत ने पुलिस को निर्देश दिया है कि शर्मा को हिरासत में लेकर तिहाड़ जेल को सौंपे। पीठ ने शर्मा का दोष बताते हुए कहा कि शर्मा ने अपनी शिकायत में एकल न्यायाधीश को चोर कहा था। इस पर पीठ ने हैरानी व्यक्त करते हुए कहा कि देश का एक जिम्मेदार नागरिक होते हुए उनसे अपेक्षा की जाती है कि वे न्यायालय की गरिमा और कानून की न्यायिक प्रक्रिया को बनाए रखें व अपनी शिकायतों को सभ्य तरीके से पेश रखे। Delhi High Court</p>
<p style="text-align:justify;">अदालत ने कहा कि अवमाननाकर्ता को कारण बताओ नोटिस जारी होने के बावजूद उसने अत्यधिक अपमानजनक जवाब दायर किया। इस दौरान अवमाननाकर्ता ने आक्रोश में आकर याचिकाओं को प्राथमिकता दी। यह टिप्पणी अदालत ने 20 जुलाई को पारित एकल पीठ के आदेश को चुनौती देने वाली नरेश शर्मा की अपील पर सुनवाई करते हुए की। इससे पहले नरेश शर्मा ने एकल न्यायाधीश के समक्ष आरोप लगाया था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत उनके मौलिक अधिकार का उल्लंघन किया जा रहा है। नरेश शर्मा द्वारा अपील दायर कर 20 जुलाई के एकल पीठ के निर्णय को चुनौती दी थी। लेकिन एकल पीठ ने नरेश शर्मा की याचिका को खारिज कर दिया और उस पर 30 हजार रुपये का जुर्माना लगाया दिया था। नरेश ने उक्त याचिका में आरोप लगाया था कि भारत के संविधान के अनुच्छेद-21 के तहत उनके मौलिक अधिकार का हनन किया जा रहा है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 03 Nov 2023 12:52:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Chandigarh News: पंजाब व हरियाणा उच्च न्यायालय में 3 अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त</title>
                                    <description><![CDATA[Chandigarh News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन अधिवक्ताओं को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court) का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर नियुक्ति संबंधी की घोषणा की। अधिसूचना के मुताबिक अधिवक्ता सुमीत गोयल, सुदीप्ति शर्मा और कीर्ति सिंह को […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/3-additional-judges-appointed-in-punjab-and-haryana-high-court/article-54457"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-11/chandigarh-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Chandigarh News: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने तीन अधिवक्ताओं को पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय (Punjab and Haryana High Court) का अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त किया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर नियुक्ति संबंधी की घोषणा की। अधिसूचना के मुताबिक अधिवक्ता सुमीत गोयल, सुदीप्ति शर्मा और कीर्ति सिंह को पदोन्नत कर अतिरिक्त न्यायाधीश बनाया गया है। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय की कालेजियम ने 17 अक्टूबर को तीनों अधिवक्ताओं को पदोन्नत करने की सिफारिश की थी।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/schools-closed-for-two-days-due-to-increasing-air-pollution-in-delhi/">School Closed: दो दिन स्कूल बंद, सरकार का निर्देश, बच्चों की हुई मौज</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">पटना हाई कोर्ट में दो न्यायाधीश नियुक्त</h3>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पटना उच्च न्यायालय में दो न्यायाधीशों की नियुक्ति की है। न्यायिक अधिकारियों – रुद्र प्रकाश मिश्रा और रमेश चंद मालवीय को पदोन्नत कर न्यायाधीश बनाया गया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर उनकी नियुक्ति से संबंधी यह घोषणा की। उच्चतम न्यायालय की कालेजियम ने 17 अक्टूबर को दोनों न्यायिक अधिकारियों के नामों की सिफारिश की थी। Chandigarh News</p>
<h3 style="text-align:justify;">तीन उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों की नियुक्ति की सिफारिश</h3>
<p style="text-align:justify;">उच्चतम न्यायालय कालेजियम ने उत्तराखंड, ओड़िशा और मेघालय उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीश की नियुक्ति की सिफारिश की है। शीर्ष अदालत के मुख्य न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति संजीव खन्ना की कालेजियम ने गुरुवार को न्यायमूर्ति रितु बाहरी को उत्तराखंड, न्यायमूर्ति चक्रधारी शरण सिंह को ओड़िशा और न्यायमूर्ति एस वैद्यनाथन को मेघालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश करने का फैसला लिया। न्यायमूर्ति बाहरी पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय, न्यायमूर्ति सिंह पटना उच्च न्यायालय और न्यायमूर्ति वैद्यनाथन मद्रास उच्च न्यायालय के न्यायाधीश हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में सात न्यायाधीशों की नियुक्ति</h3>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के लिए सात न्यायाधीशों की नियुक्ति की है। अधिवक्ताओं – विनय सराफ और विवेक जैन, न्यायिक अधिकारियों – राजेंद्र कुमार वाणी, प्रमोद कुमार अग्रवाल, बिनोद कुमार द्विवेदी, देवनारायण मिश्र और गजेंद्र सिंह को पदोन्नत कर न्यायाधीश बनाया गया है। केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग ने एक अधिसूचना जारी कर उनकी नियुक्तियों से संबंधी की घोषणा की। उच्चतम न्यायालय की कालेजियम ने 07 अक्टूबर को पांचों नामों की सिफारिश की थी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>चंडीगढ़</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/chandigarh/3-additional-judges-appointed-in-punjab-and-haryana-high-court/article-54457</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Nov 2023 10:37:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इलाहाबाद उच्च न्यायालय में 10 न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने 10 अतिरिक्त न्यायाधीशों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। शीर्ष अदालत की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान के अनुसार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी, न्यायमूर्ति सुभाष चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति सुभाष चंद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/recommendation-to-appoint-10-judges-in-allahabad-high-court/article-33779"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-05/allahabad-highcourt.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम ने 10 अतिरिक्त न्यायाधीशों को इलाहाबाद उच्च न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त करने की सिफारिश की है। शीर्ष अदालत की ओर से जारी एक बयान में यह जानकारी दी गई है। बयान के अनुसार, इलाहाबाद उच्च न्यायालय के अतिरिक्त न्यायाधीशों- न्यायमूर्ति संजय कुमार पचौरी, न्यायमूर्ति सुभाष चंद्र शर्मा, न्यायमूर्ति सुभाष चंद ( स्थानांतरण पर झारखंड उच्च न्यायालय में कार्यरत), न्यायमूर्ति सरोज यादव, न्यायमूर्ति मोहम्मद असलम, न्यायमूर्ति अनिल कुमार ओझा, न्यायमूर्ति साधना रानी (ठाकुर), न्यायमूर्ति सैयद आफताब हुसैन रिजवी, न्यायमूर्ति अजय त्यागी और न्यायमूर्ति अजय कुमार श्रीवास्तव (एक) को स्थायी न्यायाधीश बनाने की सिफारिश की गई है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 May 2022 10:05:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>संगरूर : अनूबा जिन्दल बनी जज</title>
                                    <description><![CDATA[अनूबा ने कहा कि मेरी कामयाबी के पीछे मेरे माता-पिता व मेरे गांव के लोगों और अध्यापकों का भी बड़ा सहयोग रहा है।
उन्होंने बताया कि मेहनत व दृढ़ इरादे से हर मंजिल को हासिल किया जा सकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/anuba-jindal-becomes-judge/article-11339"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-11/judge.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">अनूबा जिन्दल का गांव पहुंचने पर शानदार स्वागत | <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Anuba Jindal</span></span></h1>
<p><strong>संगरूर/लौंगोवाल(कृष्ण लौंगोवाल)।</strong> बात चाहे एवरेस्ट पर तिरंगां फहराने की हो या अंतरिक्ष पर कदम रखने <strong>(Anuba Jindal)</strong> की हो या किसी स्थान व बड़ा रूतबा हासिल करने की हो हमेशा ही बेटियों ने भारत देश का नाम रौशन किया है, जिसकी जीती-जागती मिसालें हैं। ऐसी ही मिसाल पैदा की कस्बा लोंगोवाल की बेटी ने अनूबा जिंदल ने। साधारण परिवार की होनहार बेटी व शहीद भाई द्याला जी स्कूल लोंगोवाल की छात्रा अनूबा जिन्दल बेटी राम गोपाल पाला के जज बनने उपरांत आज पहली बार लौंगोवाल पहुंचने पर शानदार स्वागत और सम्मान किया गया।</p>
<p>राजस्थान न्यायिक परीक्षा-2019 पास कर जज के पद पर पहुंची अनूबा आज जैसे ही लोंगोवाल पहुंची तो बड़ी संख्या में कस्बा निवासियों और शुभ चिंतकों ने स्थानीय अनाज मंडी पहुंच कर अनूबा का शानदार स्वागत किया। जहाँ उसका गुलदस्तों और फूलों के हार पहन कर स्वागत किया गया।  इस मौके ब्रह्म कुमारी बहन मीरा पूर्व चेयरमैन जीत सिंह सिद्धू, कौंसिल प्रधान जगदेव सिंह सिद्धू,अमरजीत सिंह, विजय गोयल, देविन्द्र विशिष्ट, आढ़ती नेता तरसेम व बड़ी संख्या में गांव वासी उपस्थित थे।</p>
<h2><strong> मेरी कामयाबी के पीछे मेरे माता-पिता व लोगों और अध्यापकों का भी बड़ा सहयोग : </strong>अनूबा</h2>
<ul>
<li><strong>अनूबा ने कहा कि मेरी कामयाबी के पीछे मेरे माता-पिता व मेरे गांव के लोगों और अध्यापकों का भी बड़ा सहयोग रहा है।</strong></li>
<li><strong> उन्होंने बताया कि मेहनत व दृढ़ इरादे से हर मंजिल को हासिल किया जा सकता है। </strong></li>
<li><strong>इस मौके अग्रवाल सभा जिला संगरूर की तरफ से प्रधान मोहन लाल शाहपुर प्रेम गुप्ता मनप्रीत के अलावा लोंगोवाल की अलग -अलग संगठनों व गणमान्यजनों ने जज अनूबा जिन्दल का सम्मान किया।</strong></li>
</ul>
<p> </p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/anuba-jindal-becomes-judge/article-11339</link>
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                <pubDate>Fri, 29 Nov 2019 21:00:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तीन तलाक: एक कुप्रथा का अंत</title>
                                    <description><![CDATA[मुस्लिम समाज में तीन तलाक को लेकर जिस प्रकार से महिलाएं प्रताड़ना का शिकार हो रहीं थी, आज उससे छुटकारा मिल गया। देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था उच्चतम न्यायालय ने तीन तलाक के मामले में अभूतपूर्व निर्णय देते हुए इस कुप्रथा पर छह महीने के लिए रोक लगा दी है। न्यायालय का यह निर्णय वास्तव में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/triple-divorce-the-end-of-a-pagan/article-3304"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/triple-talak.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मुस्लिम समाज में तीन तलाक को लेकर जिस प्रकार से महिलाएं प्रताड़ना का शिकार हो रहीं थी, आज उससे छुटकारा मिल गया। देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था उच्चतम न्यायालय ने तीन तलाक के मामले में अभूतपूर्व निर्णय देते हुए इस कुप्रथा पर छह महीने के लिए रोक लगा दी है। न्यायालय का यह निर्णय वास्तव में मुस्लिम समाज की महिलाओं के उत्थान के लिए स्वागत योग्य कदम है। पांच न्यायाधीशों के एक पैनल ने इस पूरे मामले की सुनवाई की। तीन जजों ने तीन तलाक को असंवैधानिक करार दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">तीन तलाक के मामले में न्यायालय के निर्णय से मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए अच्छे दिनों की शुरूआत कहा जा रहा है। हालांकि मुस्लिम धर्म गुरुओं ने कई बार तीन तलाक की असामाजिक प्रथा को जायज ठहराने की वकालत करते हुए कहा था कि यह मुसलमानों के मजहब का आंतरिक मामला है, लेकिन यह भी सच है कि कई मुस्लिम देशों ने इस कुप्रथा को समाप्त करके विकास के मार्ग पर कदम बढ़ाए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें सबसे बड़ा तर्क यह भी है कि जब मुस्लिम देश तीन तलाक की प्रथा को समाप्त करने का कदम उठा सकते हैं, तब गैर मुस्लिम देश भारत में इस प्रथा को आसानी से समाप्त किया जा सकता है। सवाल यह भी है कि अगर यह मुस्लिम समाज के धर्म का हिस्सा है, तब इसे मुस्लिम देशों में समाप्त क्यों किया गया। वास्तव में यह कोई प्रथा है ही नहीं, यह तो मुस्लिम समाज में वर्षों से चली आ रही एक ऐसी कुप्रथा थी, जिससे मुसिलम समाज की महिलाएं प्रताड़ित हो रही थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस्लामिक देशों की तरह ही भारत में भी प्रताड़ना का शिकार हुई महिलाओं ने इस कुप्रथा के विरोध में आवाज भी उठाई, लेकिन मुस्लिम समाज के ठेकेदारों द्वारा उनकी दर्दनाक आवाज को अनसुना कर दिया गया। मुस्लिम महिलाओं के दर्द को भारतीय जनता पार्टी ने महसूस किया और उत्तरप्रदेश के विधानसभा चुनावों में इसको मुद्दा बनाया। कहा जाता है कि इस चुनाव में इन प्रताड़ित महिलाओं का भाजपा को भरपूर समर्थन मिला, जिसके परिणाम स्वरुप भाजपा को अपेक्षा से भी अधिक सफलता मिली। इस बात से यह संकेत भी मिलता है कि मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए तीन तलाक की समस्या बहुत बड़ी थी। इसकी आग भी अंदर ही अंदर सुलग रही थी, लेकिन किसी ने इससे छुटकारा पाने की पहल नहीं की।</p>
<p style="text-align:justify;">लिहाजा यह समस्या और विकरालता की ओर ही बढ़ती चली गई। इसके बाद मुस्लिम समाज की महिलाओं ने काफी हिम्मत करके सर्वोच्च न्यायालय में इस उम्मीद के साथ याचिका लगाई कि उन्हें यहां से न्याय अवश्य ही मिलेगा। और हुआ भी ऐसा ही। यह सच है कि भारतीय संविधान में महिलाओं को जो अधिकार प्राप्त हैं, वह अधिकार मुस्लिम महिलाओं को नहीं थे। मुस्लिम महिलाओं ने संवैधानिक अधिकारों की मांग के लिए न्यायिक लड़ाई लड़ी, जिसमें एक विजय उन्होंने प्राप्त कर ली। मुस्लिम समाज में तीन तलाक के दंश को भोगने वाली महिलाओं ने आज बहुत बड़ी विजय प्राप्त कर ली। मुस्लिम समाज की यह महिलाएं मामले को न्यायालय लेकर गर्इं। जिनमें तलाकशुदा शायरा बानो ने तीन तलाक, बहुविवाह और निकाह हलाला को गैरकानूनी घोषित करने की मांग की। इसी प्रकार हावड़ा की इशरत जहां को फोन पर तलाक दे दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">जाकिया सोमन ने तो बाकायदा इसके विरोध में हस्ताक्षर अभियान चलाया और प्रधानमंत्री को एक ज्ञापन भी दिया। जयपुर की आफरीन रहमान तथा उत्तरप्रदेश के रामपुर की गुलशन परवीन भी ऐसी ही महिलाओं में शामिल हैं, जिन्होंने हिम्मत का काम किया है और मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए एक उदाहरण  प्रस्तुत किया है। और देश से तीन तलाक की कुप्रथा का अंत हो गया। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान, बांग्लादेश, अफगानिस्तान और श्रीलंका समेत 22 देश इसे समाप्त कर चुके हैं। दूसरी ओर भारत में मुस्लिम संगठन शरीयत का हवाला देकर तीन तलाक को बनाए रखने के लिए मजहबी कानून को ही मानने की बात करते हैं। इसका अर्थ साफ है कि मुस्लिम समाज के धर्म गुरु इस समस्या को सुलझाना ही नहीं चाहते। जबकि मुस्लिम समाज की महिलाएं इस कुप्रथा से छुटकारा पाना चाहती हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यसभा की पूर्व उपसभापति नजमा हेपतुल्ला और पूर्व सांसद सुहासिनी अली तीन तलाक के बारे में स्पष्ट रुप से इसे मुस्लिम महिलाओं के लिए घातक मान चुकी हैं। इनका कथन तीन तलाक को गैर इस्लामिक मानता है। तीन तलाक के बारे में सर्वोच्च न्यायालय का निर्णय मुस्लिम समाज की उन महिलाओं की प्रताड़ना को कम करने का एक उपचार है जो तीन तलाक के दंश को भोग रही थीं। सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी ओर से निर्णय देकर फिलहाल गेंद केन्द्र सरकार के पाले में डाल दी है। न्यायालय ने साफ कर दिया है कि अब केन्द्र सरकार को छह महीने के अंदर कोई कानून बनाकर मुस्लिम महिलाओं के लिए नीति बनानी चाहिए। न्यायालय ने यह भी कहा है कि अगर कानून छह महीने में नहीं बना तो तीन तलाक पर न्यायालय का आदेश जारी रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि भारत में तीन तलाक के मामले को लेकर लम्बे समय से बहस जैसा वातावरण बना हुआ था, जिसमें पक्ष और विपक्ष दोनों प्रकार के स्वर सुनाई दे रहे थे। मुस्लिम समाज के कुछ कट्टरपंथी इसे मजहब का आवश्यक अंग मानने की वकालत कर रहे थे, वहीं कुछ लोग इसके विरोध में भी थे। कई मुस्लिम संस्थाओं ने तीन तलाक को मानने वालों का सामाजिक बहिष्कार तक करने का निर्णय भी किया है। इसलिए यह तो कहा जा सकता है कि तीन तलाक जैसी कुप्रथा को समाप्त करने के लिए मुस्लिम समाज स्वयं भी आगे आ रहा था, लेकिन इसके विपरीत कुछ लोग राजनीतिक रुप से लाभ प्राप्त करने के उद्देश्य से समाज में इस कुप्रथा को जिन्दा रखना चाह रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे बड़ा सवाल यह भी है कि जिस मजहबी कानून की बात मुसलमान समाज के धर्म गुरु कर रहे हैं, वह कानून स्वतंत्र भारत की देन नहीं है। वास्तविकता यह है कि यह कानून अंग्रेजों ने भारतीय समाज के बीच फूट डालने के लिए 1934 में बनाया था। इस कानून के कारण ही मुसलमान भारतीयता से दूर रहकर केवल अपने मजहब को ही महत्व देता रहा है। सवाल यह भी है कि 1934 में बनाए गए इस कानून को स्वतंत्रता के बाद भारतीय परिवेश में परिवर्तित किया जाना चाहिए था, लेकिन देश में राजनीतिक स्वार्थों ने ऐसा नहीं होने दिया। जिसका परिणाम मुस्लिम समाज की महिलाओं को 70 सालों तक भुगतना पड़ा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/triple-divorce-the-end-of-a-pagan/article-3304</link>
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                <pubDate>Wed, 23 Aug 2017 00:32:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आधार मामला:  निजता के अधिकार पर 9 सदस्यीय संविधान पीठ कल करेगी सुनवाई</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। विशिष्ट पहचान संख्या (आधार) की अनिवार्यता को निजता के अधिकारों का उल्लंघन मानने या न मानने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ विचार करेगी। आधार की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के लिए गठित सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आधार की अनिवार्यता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/aadhaar-case-supreme-court-will-hearing-on-the-right-of-privacy/article-2419"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/sc2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> विशिष्ट पहचान संख्या (आधार) की अनिवार्यता को निजता के अधिकारों का उल्लंघन मानने या न मानने के मसले पर सुप्रीम कोर्ट की नौ सदस्यीय संविधान पीठ विचार करेगी। आधार की अनिवार्यता को चुनौती देने वाली याचिकाओं की सुनवाई के लिए गठित सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने आधार की अनिवार्यता को निजता के अधिकारों का उल्लंघन मानने या न मानने का मसला मंगलवार को नौ सदस्यीय संविधान पीठ को सुपुर्द कर दिया। पिछले दिनों न्यायमूर्ति जस्ती चेलमेश्वर की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने याचिकाकर्ताओं को इस मामले में संविधान पीठ के गठन के लिए मुख्य न्यायाधीश से अनुरोध करने की सलाह दी थी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">याचिकाकर्ताओं ने आयकर अधिनियम की धारा 139(एए) को दी चुनौती</h2>
<p style="text-align:justify;">5 सदस्यीय संविधान पीठ ने इस मामले में सुनवाई करते हुए आधार की अनिवार्यता को निजता के अधिकारों का उल्लंघन मानने या न मानने के मसले के निर्धारण का जिम्मा नौ सदस्यीय संविधान पीठ को सुपुर्द कर दिया। अब नौ-सदस्यीय संविधान पीठ इस मुद्दे पर आज सुनवाई करेगी। याचिकाकर्ताओं ने आयकर अधिनियम की धारा 139(एए) को चुनौती दी है, जिसमें पैन कार्ड बनवाने और आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए आधार को अनिवार्य बनाया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jul 2017 06:45:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>जज कम, कोर्ट रूम ज्यादा, कैसे हो मुकदमों का निपटारा</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। करीब सवा दो करोड़ लंबित मामलों को निपटाने की जद्दोजहद कर रही देश की अधीनस्थ अदालतों में कोर्टरूम ज्यादा हैं पर वहां बैठने वाले न्यायाधीश कम हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार दिसम्बर 2016 के अंत तक निचली अदालतों में अदालत कक्षों की संख्या 17,300 थीं, जबकि न्यायिक अधिकारियों की संख्या 16,413 थीं। सरकार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> करीब सवा दो करोड़ लंबित मामलों को निपटाने की जद्दोजहद कर रही देश की अधीनस्थ अदालतों में कोर्टरूम ज्यादा हैं पर वहां बैठने वाले न्यायाधीश कम हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार दिसम्बर 2016 के अंत तक निचली अदालतों में अदालत कक्षों की संख्या 17,300 थीं, जबकि न्यायिक अधिकारियों की संख्या 16,413 थीं। सरकार जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए तीन हजार और कोर्टरूम बनवा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इनके बनकर पूरा होने जाने के बाद अदालत कक्षों की कुल संख्या 20 हजार को पार कर जाएगी। विधि मंत्रालय के सूत्रों ने बताया कि सरकार ने जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में दो करोड़ 16 लाख लंबित मुकदमों को ध्यान में रखते हुए हाईकोर्टों को पत्र लिखकर यथाशीघ्र न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाने की सलाह दी है। सरकार ने इसके लिए कम से कम छह हजार न्यायाधीशों की भर्ती करने को कहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं 60 हजार मामले</h3>
<p style="text-align:justify;">नवीनतम आंकड़े बताते हैं कि निचली अदालतों के अलावा देश के 24 हाईकोर्टों में 40 लाख और सुप्रीम कोर्ट में 60 हजार मामले लंबित हैं। जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में नियुक्तियां हाईकोर्टों के जिम्मे है, इसमें केंद्र एवं राज्य सरकारों की कोई महत्वपूर्ण भूमिका नहीं है। पिछले दो वर्ष में इन अदालतों में रिक्तियों की संख्या तेजी से बढ़ी है और यह 4000 से बढ़कर 5800 पर पहुंच गई है। विभिन्न शासकीय एवं न्यायिक सुधारों के बावजूद न्यायिक अधिकारियों के पद रिक्त पड़े हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> जिला अदालतों में बढ़ेगी जजों की संख्या</h3>
<p style="text-align:justify;">देश की बढ़ती आबादी एवं मुकदमा दायर करने की बढ़ती प्रवृत्तियों से सामंजस्य बिठाने के लिए सरकार ने जिला एवं अधीनस्थ अदालतों में जजों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके लिए सरकार ने 2013 में जजों के लिए 19 हजार 500 निर्धारित पदों को 2016 में बढ़ाकर 22 हजार 288 किया है।</p>
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                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/other-news/how-will-the-be-decision-of-lawsuit-by-being-less-judge/article-2131</link>
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                <pubDate>Sun, 09 Jul 2017 05:53:12 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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