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                <title>Section 144 - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>विश्व हिंदू परिषद की ब्रजमंडल यात्रा पर उग्र हुई भीड़, पथराव कर 40 गाड़ियां की स्वाहा</title>
                                    <description><![CDATA[हरियाणा के नूंह की सीमाएं सील, इंटरनेट बंद, धारा 144 लागू | Nuh News नूंह (सच कहूँ न्यूज)। सोमवार को हरियाणा के जिला नूंह (Nuh) में विश्व हिंदू परिषद और मातृशक्ति दुर्गा वाहिनी द्वारा निकाली जा रही ब्रजमंडल यात्रा पर एक उग्र भीड़ ने पथराव कर बवाल मचा दिया और इसी दौरान दो गुटों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/nuh-borders-sealed-internet-closed-section-144-applied/article-50655"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/nuh-news.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">हरियाणा के नूंह की सीमाएं सील, इंटरनेट बंद, धारा 144 लागू | Nuh News</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नूंह (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सोमवार को हरियाणा के जिला नूंह (Nuh) में विश्व हिंदू परिषद और मातृशक्ति दुर्गा वाहिनी द्वारा निकाली जा रही ब्रजमंडल यात्रा पर एक उग्र भीड़ ने पथराव कर बवाल मचा दिया और इसी दौरान दो गुटों में टकराव हो गया और बाद में तीन दर्जन से अधिक गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया। इस दौरान पुलिस पर भी पथराव किया गया। इस घटना में बहुत से लोग एवं पुलिस कर्मचारी घायल हो गए हैं। दो लोगों की मौत की भी सूचना है। लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। हालात इतने खराब हो गए थे कि नूंह जिला प्रशासन को हालात से निपटने के लिए दूसरे जिलों से पुलिस फोर्स बुलानी पड़ी। बिगड़े हालातों को देखते हुए पूरे जिले में धारा 144 लगाते हुए दो अगस्त तक इंटरनेट भी बंद कर दिया गया है। नूंह जिले की सीमाएं सील कर दी गई हैं। Nuh News</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार नूंह के नल्हड़ शिव मंदिर से ब्रजमंडल यात्रा फिरोजपुर-झिरका की तरफ रवाना हुई थी। यात्रा तिरंगा पार्क के पास पहुंची ही थी कि वहां पहले से ही इकट्ठा हुई भीड़ ने सामने से आ रही यात्रा पर पथराव करना शुरू कर दिया। इसके बाद दोनों में भीषण टकराव हो गया। पथराव की सूचना मिलते ही भारी पुलिस फोर्स मौके पर रवाना हो गई। जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर को सबसे पहले तिरंगा पार्क के पास हिंसा भड़की और फिर देखते ही देखते पूरे नूंह शहर में हिंसा फैल गई। इस दौरान पुराना बस स्टैंड, होटल बाइपास, मेन बाजार, अनाज मंडी और गुरुग्राम-अलवर हाईवे पर एक के बाद एक गाड़ियां फूंक दी गई। अभी भी नूंह के नल्हड़ शिव मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में उपद्रवियों की भीड़ जमा है। दोपहर तक 40 से ज्यादा वाहन आगजनी का शिकार हो गए। इनमें कारों के अलावा बसें, बाइक, स्कूटी और दूसरे वाहन शामिल रहे। आग के कारण नूंह शहर धुआं-धुआं नजर आया।</p>
<p style="text-align:justify;">हिंसा की चिंगारी भड़कते भड़कते मंदिरों तक भी पहुंच गई। ऐसे में उपद्रवियों ने कई जगह मंदिरों को भी नहीं छोड़ा, उनमें तोड़फोड़ करने के साथ ही आगजनी की कोशिश भी की गई। नूंह सिटी में पलड़ी रोड श्मशान घाट के पास काली माता मंदिर में उपद्रवियों ने खूब तोड़फोड़ मचाई। भीड़ इतनी उग्र हो गई थी कि उसने मंदिर के आसपास के घरों पर भी जमकर पत्थराव किया ताकि वहां से कोई बाहर न निकल सके। हिंसा को देखते हुए पूरे नूंह शहर की मार्केट बंद हो गई। देखते ही देखते नूंह सिटी के मेन मार्केट के अलावा नया बाजार, गली बाजार और होडल बाइपास समेत शहर के दूसरे मार्केट भी दुकानदारों ने बंद कर दिए। नूंह चौक पर तो शाम 5 बजे तक सबसे ज्यादा तनाव बना रहा। हिंसा के कारण शहर के ज्यादातर इलाकों में भय और तनाव का माहौल बना रहा। जिला प्रशासन ने स्थिति को कंट्रोल करने के लिए साथ लगते पलवल, फरीदाबाद और रेवाड़ी जिलों से पुलिस की 10 कंपनियां बुला ली हैं। Nuh News</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व हिन्दू परिषद की ब्रजमंडल यात्रा के दौरान हिंसा फैलते ही आसपास के ग्रामीण इलाकों से युवाओं के ग्रुप नूंह शहर की निकल आए और हथियारों से लैस होकर रास्ते में आने वाले वाहनों में तोड़फोड़ और लूटपाट मचा दी। उपद्रवियों ने कई जगह पुलिस टीमों पर भी हमला किया। नूंह में फैली हिंसा के बाद हालात इतने खराब हो गए कि व्यापारी भी खौफजदा नजर आए। नूंह अनाज मंडी में कुछ व्यापारियों से लूटपाट की बात सामने आई। हालांकि आधिकारिक रूप से इसकी पुष्टि नहीं हो पाई। Nuh News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="सामाजिक संस्था ने बाइक चालकों को बांटे हेलमेट" href="http://10.0.0.122:1245/traffic-awareness-program-organized-by-udaan-minority-education-and-welfare-society/">सामाजिक संस्था ने बाइक चालकों को बांटे हेलमेट</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2023 20:04:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>चुनाव को लेकर आदर्श अचार संहिता लागू, धारा 144 प्रभावी</title>
                                    <description><![CDATA[श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। पंचायतीराज संस्थाओं में जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य के आम चुनाव-2021 की घोषणा 24 नवम्बर 2021 को हो जाने के कारण आदर्श अचार संहिता लागू हो गई है। उक्त चुनाव शान्तिपूर्णक, स्वतां, निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराये जाने व पंचायत क्षेत्रों में सभी मतदाता विशेषकर कमजोर वर्ग के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/model-code-of-conduct-implemented-for-elections-section-144-is-effective/article-28692"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/section-144.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पंचायतीराज संस्थाओं में जिला परिषद एवं पंचायत समिति सदस्य के आम चुनाव-2021 की घोषणा 24 नवम्बर 2021 को हो जाने के कारण आदर्श अचार संहिता लागू हो गई है। उक्त चुनाव शान्तिपूर्णक, स्वतां, निष्पक्ष एवं सुव्यवस्थित ढंग से सम्पन्न कराये जाने व पंचायत क्षेत्रों में सभी मतदाता विशेषकर कमजोर वर्ग के मतदाता बिना किसी आंतक व भय के अपने संवैधानिक मताधिकार का प्रयोग कर सके, इस हेतु शांति एवं कानून व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए धारा 144 प्रभावी कर दी गई है। राज्य निर्वाचन आयोग से प्राप्त निर्देशों की पालना में जिला मजिस्टेऊट श्री जाकिर हुसैन ने दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 144 के अन्तर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए प्रतिबन्धात्मक आदेश जारी किए है।</p>
<p style="text-align:justify;">आदेशानुसार कोई भी व्यक्ति ग्रामीण क्षेत्र में अपने पास विस्फोटक पदार्थ, आग्नेय शस्त्र जैसे रिवाल्वर, पिस्तौल, राइफल, बन्दूक एवं एम.एल. गन आदि एवं अन्य हथियार जैसे गंडासा, फरसा, तलवार, भाला, कृपाण, चाकू, छुरी, बरछी, गुप्ती, खाखरी, वल्लभ, कटार, धारिया, बघनख (शेरपंजा) जो किसी धातु से शस्त्र के रूप में बना हो आदि एवं मोटे घातक हथियार, लाठी आदि सार्वजनिक स्थलों पर प्रदर्शन नहीं करेगा। परन्तु वे व्यक्ति जो नि:शक्त अथवा अतिवृद्ध है जो लाठी के सहारे के बिना नहीं चल सकते है वे लाठी का प्रयोग सहारा लेने हेतु कर सकेगें एवं सिख समुदाय के व्यक्तियों को उनकी धार्मिक परम्परा के अनुसार नियमान्तर्गत निर्धारित कृपाण रखने की छूट रहेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि कोई भी व्यक्ति साम्प्रदायिक सद्भावना को ठेस पहुचाने वाले नारे नहीं लगायेगा, न ही इस प्रकार का भाषण, उद्बोधन देगा, न ही ऐसे पेम्पलेट , पोस्टर चुनाव सामग्री छपवायेगा या वितरण करेगा या वितरित करवायेगा, न ही ऐसे ऑडियो, विडियो कैसेट के माध्यम से किसी प्रकार का प्रचार-प्रसार करेगा अथवा करायेगा। कोई भी व्यक्ति किसी भी सार्वजनिक स्थान पर, मदिरा का सेवन नही करेगा, न ही अन्य व्यक्ति किसी को सेवन करवायेगा तथा अधिकृत विक्रेताओं को छोडकर कोई भी व्यक्ति निजी उपयोग के कारण छोड़कर किसी अन्य उपयोग हेतु सार्वजनिक स्थलों में से मदिरा लेकर आवागमन नहीं करेगा। आदेशानुसार यह आदेश पर्वों के दौरान पुलिस स्वीकृति के तहत आयोजित धार्मिक समारोह, जुलूसों व कार्यक्रमों पर लागू नही होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई भी व्यक्ति सम्बन्धित अतिरिक्त जिला कलक्टर (सतर्कता)/ उपखण्ड मजिस्ट्रेट की लिखित पूर्व अनुमति के बिना जुलूस, सभा एवं सार्वजनिक मिटिंग का आयोजन नहीं कर सकेगा, परन्तु यह प्रतिबन्ध विवाह समारोह, शवयात्रा पर लागू नहीं होगा। कोई भी व्यक्ति सम्बन्धित अतिरिक्त कलक्टर (सतर्कता)/ उपखण्ड मजिस्ट्रेट की पूर्व अनुमति के बिना लाउडस्पीकर, एम्पली फायर, रेडियों, टेप अथवा अन्य ध्वनि प्रसारक यन्त्रों का उपयोग नहीं कर सकेगा। यह आदेश उन व्यक्तियों पर जो राजकीय डयूटी के दौरान अपने पास हथियार रखने को अधिकृत है, पर लागू नही होगा। सभा/रैली के दौरान कोई भी व्यक्ति धर्म, जाति सम्प्रदाय, भाषा आदि के आधार वैमनस्य फैलाने, तनाव बढाने या उकसाने का कार्य नही करेगा। जिला मजिस्ट्रेट ने बताया कि सभा/रैली के दौरान कोई भी व्यक्ति किसी व्यक्ति के निजी जीवन या निजता पर कोई लांछन लगाने सम्बन्धी कोई गतिविधियां या कार्य नही करेगा तथा किसी उम्मीदवार एवं राजनैतिक व्यक्ति के घर के आगे किसी प्रकार का प्रदर्शन नही करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कोई भी व्यक्ति किसी वैधानिक स्वीकृत किसी कार्यक्रम या मीटिंग में विध्न, बाधा या किसी प्रकार का अवरोध पैदा नही करेगा। हानि कारित नहीं करेगा। कोई भी व्यक्ति सभा/रैली के दौरान साम्प्रदायिक सद्भावना को ठेस पहुंचाने वाले नारे नही लगायेगा, न ही भाषण उद्बोधन देगा, न ही ऐसे पम्पलेट, पोस्टर चुनाव सामग्री छपवायेगा, छापेगा या वितरण करेगा या वितरित करवायेगा न ही ऐसे ऑडियो, विडियो कैसेट के माध्यम से किसी प्रकार का प्रचार-प्रसार करेगा अथवा करवायेगा। उन्होने बताया कि उम्मीदवार/ राजनैतिक व्यक्ति हेतु सम्बन्धित उपखण्ड मजिस्ट्रेट की लिखित पूर्व अनुमति के बिना जुलूस,सभा/रैली एवं सार्वजनिक मीटिंग का आयोजन नहीं कर सकेगा, परन्तु यह प्रतिबन्ध विवाह समारोह, शवयात्रा पर लागू नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही इस प्रकार की प्रत्येक सभा/जुलूस एवं सार्वजनिक मीटिंग की अनुमति आदर्श आचार संहिता एवं राज्य निर्वाचन आयोग के निर्देशों की पालना के अन्तर्गत होगी, जिसका स्पष्ट उल्लेख अनुमति देने वाले अधिकारी द्वारा किया जायेगा एवं सक्षम मजिस्ट्रेट व पुलिस अधिकारी उसकी पालना सुनिश्चित करवायेगें। ऐसे प्रत्येक आयोजन की विडियोग्राफी भी उपखण्ड/तहसील स्तरीय आदर्श आचार संहिता टीम द्वारा करवानी भी प्राधिकृत अधिकारी (उपखण्ड मजिस्ट्रेट) द्वारा सुनिश्चित की जायेगी। यह आदेश 26 नवम्बर 2021 को रात्रि 12 बजे से लागू होगा जो 24 दिसम्बर2021 को रात्रि 12 बजें तक सम्पूर्ण श्रीगंगानगर जिले की ग्रामीण सीमा में प्रभावशील रहेगा। इस आदेश की अवहेलना करने वाले व्यक्ति अथवा व्यक्तियों पर भारतीय दण्ड प्रक्रिया संहिता की धारा 188 के अन्तर्गत अभियोग चलाया जा सकेगा।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Nov 2021 20:56:10 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असंतोष की सर्दी: नागरिक बनाम धारा 144</title>
                                    <description><![CDATA[एक जीवंत लोकतंत्र नागरिकों के विरोध प्रदर्शन अथवा सभी की राय और सहमति-असहमति का सम्मान करता है। इस बडी राजनीतिक चुनौती के समक्ष सरकार को सभी पक्षों के साथ वार्ता शुरू करनी चाहिए और लोकतंत्र में लोगों के विश्वास को बहाल करने के लिए तालमेल स्थापित करना चाहिए।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/winter-of-discontent-citizens-vs-section-144/article-11973"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/citizenship-amendment-prote-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong><em>-कुछ लोगों का मानना है कि नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर संघ की उस बडी योजना का अंग है जिनका उपयोग वह भारत के संविधान को बदलने का प्रयास कर रहा है। साथ ही वह लोगों को यह भी समझाने का प्रयास कर रहा है कि उत्पीडित अल्पसंख्यकों के संरक्षण का विरोध कौन करेगा। एक शिक्षाविद् के अनुसार भाजपा ने ऐतिहासिक दृष्टि से धार्मिक धु्रवीकरण का उपयोग एक चुनावी रणनीति के रूप में किया है और अब वह यही नीति अपनाकर कानून बना रही है और इस संबंध में नागरिकता संशोधन कानून सांकेतिक है क्योंकि इससे भारतीय नागरिक प्रभावित नहीं होते हैं।</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">यह संतोष का सर्दी का मौसम है। देश के सभी भागों में विभिन्न शहरों में आक्रोश और असंतोष व्याप्त है। विभिन्न शहरों में छात्र नागरिक समाज के कार्यकर्ता और राजनेता नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं जिसके चलते दिल्ली का जामिया मिलिया विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय और लखनऊ का नदवा विश्वविद्यालय और कई जिले युद्धक्षेत्र जैसे बन गए हैं और यह सरकार के प्रति उनके आक्रोश को प्रदर्शित करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस कानून को लागू करने के संबंध में हिंसा की किसी को संभावना नहीं थी और इसके विरुद्ध हिंसा के चलते गृह मंत्री अमित शाह ने स्पष्ट किया है कि यह कानून ऐसे किसी नागरिक की नागरिकता नहीं ले रहा है जो भारत में 1987 से पहले पैदा हुआ है या जिसके माता पिता 1987 से पहले भारत के नागरिक थे। इसमें किसी को भी नागरिकता संशोधन कानून को लेकर चिंता नहीं करनी चाहिए। सरकार ने बंगलौर, अहमदाबाद, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र के कई शहरों आदि में धारा 144 लागू की है और प्रदर्शनकारियों के विरुद्ध पुलिस कडी कार्यवाही कर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">किंतु नागरिकता संशोधन कानून का तात्पर्य क्या है? क्या प्रत्येक नागरिक को अधिकरण के समक्ष पेश होना पडेगा और जो लोग इसमें विफल हो जाएंगे उन्हें विदेशी समझा जाएगा? नागरिकता साबित करने के लिए क्या दस्तावेज चाहिए? यह सच है कि इस कानून से उन हिन्दू, जैन, सिख, इसाईयों और पारसी शरणार्थियों को राहत मिली है जो भारत में विभिन्न शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं और अब उन्हें नागरिकता मिल जाएगी। किंतु इससे श्रीलंकाई हिन्दुओं और अफगानी मुस्लिम प्रवासियों की स्थिति में बदलाव नहीं आएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कुछ लोगों का मानना है कि नागरिकता संशोधन कानून सभी धर्मों को समान मानने की संवैधानिक कसौटी पर खरा नहीं उतरता है। प्रश्न यह भी उठता है कि सरकार इन शरणार्थियों को कहां बसाएगी क्योंकि भारत में पहले ही जनसंख्या विस्फोट है और इन लोगों को नागरिकता देने से संसाधनों पर दबाव पडेगा तथा बेरोजगारी बढेÞगी। प्रश्न यह भी उठता है कि क्या धार्मिक आधार पर धु्रवीकरण सत्तारूढ़ भाजपा की योजना का अंग है या नहीं। कुछ लोग जानना चाहते हैं कि क्या यह प्रदर्शन केवल मुसलमान कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">किंतु पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून के विरुद्ध प्रदर्शन में लोगों को सरकार के प्रति अपने आक्रोश को व्यक्त करने का अवसर मिला है। पूर्वोत्तर क्षेत्र विशेषकर असम ने नागरिकता संशोधन कानून का सबसे पहले विरोध किया और उसे बंगाली हिन्दुओं समेत सभी अप्रवासियों से समस्या है। असम देश का पहला ऐसा राज्य है जहां पर राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर बनाया गया और उसमें 19 लाख लोग शामिल नहीं किए गए जिनमें अधिकतर हिन्दू हैं किंतु यह विरोध प्रदर्शन केवल नागरिकता संशोधन कानून को लेकर है।</p>
<p style="text-align:justify;">पूर्वोत्तर क्षेत्र के अलावा शेष देश के लोग सोचते हैं कि नागरिकता संशोधन कानून विपक्षी पार्टियों द्वारा उठायी गयी एक सांप्रदायिक समस्या है। उनका मानना है कि नागरिकता संशोधन कानून और संपूर्ण देश में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर बनाने की संभावना भारत के संविधान के मूल चरित्र धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध है। कांग्रेस सरकार पर आरोप लगा रही है कि वह जनता की आवाज दबा रही है जबकि मित्र से शत्रु बने शिव सेना के ठाकरे ने युवा बम की चेतावनी दी है और जामिया की घटना की जलियांवाला बाग की घटना से तुलना की।</p>
<p style="text-align:justify;">तमिलनाडू में द्रमुक के स्टालिन ने विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की तो केरल में इसके विरोध में माकपा के मुख्यमंत्री विजयन और विधान सभा में विपक्ष के नेता चेनीथला के बीच इस मुद्दे पर एकता देखने को मिली। तृणमूल की ममता सड़कों पर उतर कर इस मुद््दे पर संयुक्त राष्ट्र जनमत संग्रह की मांग कर रही है जिसे बाद में उन्होंने वापस ले लिया था और उन्होंने स्पष्ट किया कि वह पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून या राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर कानून लागू करने वाली नहीं है। उनका विरोध राजनीति प्रेरित है किंतु 2021 में राज्य में विधान सभा चुनाव होने हैं और राज्य के कुछ जिलों में मुस्लिम जनसंख्या 30 से 35 प्रतिशत है। इसी तरह कांग्रेस शासित मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ तथा आप शासित दिल्ली ने भी इस कानून को लागू न करने की बात कही है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा के सहयोगियों में जद (यू) ने भी बिहार के संदर्भ में यही बात कही और गारंटी दी कि जब तक वे हैं राज्य में अल्पसंख्यकों के साथ अन्याय नहीं होगा। विडंबना देखिए। संसद में नागरिकता संशोधन कानून के पक्ष में मतदान करने वाले बीजद के पटनायक ने भी इस कानून को ओडिशा में लागू करने से इंकार किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भगवा संघ भी नागरिकता संशोधन कानून के बारे में विशेषकर मुस्लिम जनता को अवगत कराने के लिए कार्यशालाएं और व्याख्यान देने की योजना बना रहा है। अंतर्राष्ट्रीय दृष्टि से मोदी की छवि पर प्रभाव पडा है। नागरिकता संशोधन कानून का प्रभाव यह रहा है कि जापान के प्रधानमंत्री आबे ने अपनी भारत यात्रा रद्द कर दी। अमरीका, ब्रिटेन, फ्रांस आदि पश्चिमी देशों ने भी इसकी आलोचना की। बंगलादेश की शेख हसीना सरकार ने भी विदेश मंत्री का भारत दौरा स्थगित किया। भारत सरकार अफगानिस्तान और बंगलादेश में मित्र सरकारों को यह समझाने का प्रयास कर रही है कि वहां की वर्तमान सरकारों ने धार्मिक उत्पीडन नहीं किया है। हावर्ड और एमआईटी जैसे विश्वविद्यालयों ने पुलिस कार्यवाही की आलोचना की है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक समाजशास्त्री के अनुसार नागरिकता संशोधन कानून के अंतर्गत उत्पीडित अल्पसंख्यकों की वापसी का अधिकार एक मूलवंशीय लोकतंत्र है जो भाजपा की हिन्दू राष्ट्र की अवधारणा से मेल खाता है। कुछ आलोचकों का मानना है कि यह मोदी-शाह के गुजरात मॉडल की पुनरावृति है जिसके अंतर्गत बांटो, धु्रवीकरण करो और लाभ उठाओ जिसके अनुसार नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय जनगणना रजिस्टर के विरुद्ध प्रदर्शन का दीर्घकालीन प्रभाव यह होगा कि गुजरात की तरह पूरे देश में मुसलमान दोयम दर्जे के नागरिक बन जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">किंतु संघ परिवार इसका यह कहकर प्रत्युत्तर देता है टुकडे टुकडे गैंग, शहरी नक्सलवादी और छद््म धर्मनिरपेक्षतावादी जितना अधिक विरोध करेंगे हिन्दुत्व के नायक के रूप में हमारी छवि उतनी ही मजबूत होगी। यह एक नए इतिहास का निर्माण होगा जहां पर मुस्लिम वोट बैंक राजनीति को राजनीतिक आत्महत्या समझा जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">कुल मिलाकर यह आवश्यक है कि केन्द्र, राज्य और सभी राजनीतिक दल नागरिकता संशोधन कानून-राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के बारे में गतिरोध दूर करने का प्रयास करें और शांति बनाए रखे। एक जीवंत लोकतंत्र नागरिकों के विरोध प्रदर्शन अथवा सभी की राय और सहमति-असहमति का सम्मान करता है। इस बडी राजनीतिक चुनौती के समक्ष सरकार को सभी पक्षों के साथ वार्ता शुरू करनी चाहिए और लोकतंत्र में लोगों के विश्वास को बहाल करने के लिए तालमेल स्थापित करना चाहिए। देश में राष्ट्रवाद, वर्चस्ववाद के एक नए चरण में प्रवेश कर रहा है और इसका अमल भी किया जाने लगा है। वर्तमान में व्याप्त असंतोष बताता है कि भारत का लोकतंत्र अभी भी जीवंत है और आगे बढ़ रहा है।<br />
<em><strong>-पूनम आई कौशिश</strong></em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Dec 2019 20:27:39 +0530</pubDate>
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                <title>सरिस्का क्षेत्र में धारा 144 लागू करने की मांग</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/demand-for-section-144-to-be-implemented-in-saria-area/article-2133"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/sariska.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">डीएफओ बालाजी करी ने कलेक्टर को लिखा पत्र</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>अलवर।</strong> अलवर जिले के विश्व प्रसिद्ध सरिस्का बाघ अभयारण्य में मवेशी चराने को लेकर ग्रामीणों और वनकर्मियों के बीच आये दिन होने वाली मारपीट की घटनाओं को रोकने के लिए सरिस्का प्रशसान ने कोर एरिया में धारा 144 में तहत निषेधाज्ञा लागू करने का आग्रह किया है। डीएफओ बालाजी करी ने जिला कलेक्टर को पत्र लिखा है कि बाघ परियोजना सरिस्का में पिछले चार सालों में अवैध चराई की रोकथाम की कार्रवाई के दौरान ग्रामीणों उपं वन स्टाफ के बीच झगड़े, मारपीट और तोड़फोड़ की कई घटनाएं हुई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इन सभी प्रकरणों में मामले पुलिस में भी दर्ज हैं। ऐसे में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए धारा 144 लगाया जाना उचित होगा। उन्होंने कहा कि अवैध चराई के कारण बाघ बाघिन तनाव में रहते हैं। उन्हें इधर-उधर भागना पड़ता है। ऐसे में उनकी सुरक्षा करना जरूरी है। अभयारण्य में बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश एवं चराई पर प्रतिबंध है लेकिन आस-पास के लोग विस्थापित परिवारों द्वारा जबरन प्रवेश करा कर अवैध चराई की जाती है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">संघर्ष और मारपीट से फारेस्ट कर्मचारी परेशान</h2>
<p style="text-align:justify;">डीएफओ का तर्क है कि बाघ परियोजना रणथम्भौर में वर्षाकाल में अवैध चराई की रोकथाम के लिए धारा 144 लगाई जाती है। इसी तर्ज पर सरिस्का में रोटक्याला, उमरी तिराया से उमरी, सिलिबेरी , भैंसोटा, काबरी जंगल में बाघों की सुरक्षा के लिए अनधिकृत प्रवेश चराई रोकने के लिए इस कोर एरिया में जुलाई से रोक लगाई जानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">श्री बालाजी करी ने बताया कि हरसाल हम धारा 144 के लिए निवेदन करते हैं, लेकिन जिला प्रशासन उनकी मांग पर कार्रवाई नहीं नहीं करता है। उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवार चराई के बहाने झोपड़ी बनाकर रहना शुरू कर देते हैं। फिर न्यूसेंस होता है। इसलिए धारा 144 के लिए लिखा है। उन्होंने बताया कि रोज हो रहे संघर्ष और मारपीट से फारेस्ट कर्मचारी परेशान हो रहे है। ग्रामीण जबरन पशुओ को सरिस्का में चराने के लिए ले जाते है और वनकर्मियों द्वारा मना करने पर उनके साथ मारपीट कर दी जाती है।</p>
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</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Jul 2017 06:23:26 +0530</pubDate>
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