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                <title>Villager - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>गरीबों को ऋण नहीं बचत चाहिए</title>
                                    <description><![CDATA[विकास विशेषज्ञ रॉबर्ट वोगल ने एक बार कहा था ‘‘ग्रामीण वित्त के आधे भूले भुलाए लोग।’’ और अब संपूर्ण विश्व में इस बात को स्वीकार किया जा रहा है कि व्यक्तिगत वित्त के सबसे बुनियादी साधन छोटे बैंक हैं। नाजुक समय पर सही वित्तीय साधनों का उपलब्ध होना इस बात का निर्धारण करता है कि क्या […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/do-not-loan-to-poor-need-savings/article-3373"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/poor.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">विकास विशेषज्ञ रॉबर्ट वोगल ने एक बार कहा था ‘‘ग्रामीण वित्त के आधे भूले भुलाए लोग।’’ और अब संपूर्ण विश्व में इस बात को स्वीकार किया जा रहा है कि व्यक्तिगत वित्त के सबसे बुनियादी साधन छोटे बैंक हैं। नाजुक समय पर सही वित्तीय साधनों का उपलब्ध होना इस बात का निर्धारण करता है कि क्या गरीब परिवार इस अवसर का उपयोग गरीबी से निकलने के लिए या ऋण के जाल से बचने में कर सकता है या नहीं। गरीब लोगों को सामान्य बैंकिंग उपायों की आवश्यकता नहीं है। उन्हें ऐसे उपाय चाहिए जो उनकी जटिल वित्तीय स्थिति से उन्हें उभारे। क्योंकि उन्हें निरंतर वित्त और आय की आवश्यकता होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">उनकी आय में अंतर को देखते हुए गरीब अक्सर बीमारी या परिवार में मृत्यु या किसी अन्य कारण से उनके परिवार की वित्तीय स्थिति बिगड़ जाती है और कई बार वे अपने घर, मकान और आय के साधनों को भी बेच देते हैं और इन कारणों से उनका परिवार संकट में फंस जाता है। जिसके चलते गरीब दयनीय स्थिति में जीने के लिए बाध्य होते हैं। माइक्रो क्रेडिट के लाभों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है, किंतु कर्ज तो कर्ज ही है। इससे जोखिम बढ़ता है और कई बार कर्जदार पर दबाव भी बढ़ता है। बचत से व्यक्ति ऐसे जोखिम को आसानी से सह लेता है और उस पर वित्तीय भार भी कम पड़ता है तथा विशेष रूप से महिलाओं के लिए बचत महत्वपूर्ण है। सामान्यतया गरीब परिवार चाहे छोटी ही राशि सही किंतु बचत अवश्य करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">वे अनेक तरह के अनौपचारिक साधन अपनाते हैं। जैसे घर में पैसा छिपाना, रिश्तेदारों को कर्ज देना, पड़ोसियों के साथ बचत समूह बनाना, जमा संग्राहक की सेवाएं लेना, पशु धन या अन्य वस्तुओं की खरीद करना आदि। किंतु ये उपाय विश्वसनीय या सुरक्षित नहीं हैं। गरीब लोगों को बचत करने में सबसे बड़ी समस्या बचत खाते उपलब्ध न होना है जहां पर वे अपनी राशि जमा कर सकें। यह पैसा घर में किसी डब्बे में रखा जाता है और वह तब आसानी से खर्च हो जाता है जब कभी पड़ोसी संकट में हो या कोई उनसे सहायता मांगे। माइक्रो फाइनेंसर से अपनी आवश्यकता के लिए ऋण लेने और अपनी आय में से उसका साप्ताहिक भुगतान करना पड़ता है। जिसके चलते घर की महिलाओं के पास बचाने के लिए पैसा नहीं बच पाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो संस्थान बचत छोड़कर ऋण देने को बढावा देते हैं वे वास्तव में गरीब ग्राहकों को बंधुआ बना देते हैं। बच्चे की प्राथमिक शिक्षा के लिए ऋण लेना तब आवश्यक हो जाता है जब व्यक्ति बचत करने की स्थिति में न हो। स्वास्थ्य समस्या या परिवार में भोजन की कमी, विवाह, अंतिम संस्कार या सामाजिक समारोहों के लिए उन्हें बार-बार ऋण लेना पड़ता है। घर के आवश्यक सामान के लिए उन्हें ऊंची ब्याज दर पर ऋण लेना पड़ता है जिससे वे ऋण जाल में फंस जाते हैं। वित्तीय संस्थानों को समझना होगा कि उन्हें गरीब लोगों के लिए सुरक्षित और लचीले बचत साधन उपलब्ध कराने होंगे।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Oct 2017 04:52:55 +0530</pubDate>
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                <title>बाढ़: प्राकृतिक आपदा में आदमी</title>
                                    <description><![CDATA[देश के ज्यादातर क्षेत्र में मानसून ने जोरदार दस्तक दे दी है, लेकिन कई इलाके बाढ़ में डूबने की त्रासदी झेल रहे हैं। इस कारण ऊंचे इलाकों में तो हरियाली दिख रही है, किंतु निचले क्षेत्रों में फसले चौपट हो गई हैं। असम के करीमगंज जिले में सुप्राकांधी गांव ने जल समाधि ले ली है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/flood-man-in-natural-disaster/article-2890"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/flood.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश के ज्यादातर क्षेत्र में मानसून ने जोरदार दस्तक दे दी है, लेकिन कई इलाके बाढ़ में डूबने की त्रासदी झेल रहे हैं। इस कारण ऊंचे इलाकों में तो हरियाली दिख रही है, किंतु निचले क्षेत्रों में फसले चौपट हो गई हैं। असम के करीमगंज जिले में सुप्राकांधी गांव ने जल समाधि ले ली है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में 7 गैंडे समेत 90 वन्य प्राणी और 80 लोग अब तक मारे जा चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ का संकट झेल रहे असम का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दौरा करना पड़ा है। राजस्थान और गुजरात का भी बुरा हाल है। जयपुर एवं उदयपुर समेत 23 जिले बाढ़ग्रस्त घोषित किए गए हैं। 64 लोग अमर्यादित लहरों ने लील लिए हैं। लोगों को बचाने के लिए सेना को बुलाना पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जालोर जिले की पथमेड़ा गोशाला में पानी भर जाने से 536 गायों की मौत हो गई। करीब 14 हजार कमजोर वृद्ध व बीमार नर गोवंश बाढ़ की चपेट में है। यहां केंद्रीय मंत्री स्मृती इरानी और मुख्यमंंत्री वसुंधरा राजे ने नौका से बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का जायजा लिया। प्रधानमंत्री के गृह प्रदेश गुजरात में और भी बुरा हाल है। यहां अब तक 218 लोग मारे जा चुके हैं। बनासकांठा जिला भी बाढ़ की चपेट में है। यहां एक परिवार के मकान में पानी भर जाने से 17 लोग काल के गाल में समा गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ की कमोबेश यही तस्वीर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में है। बद्रीनाथ में भू-स्खलन जारी है। नदी-नाले उफान पर हैं। कई बड़े बांधों के भर जाने के बाद दरवाजे खोल देने से त्रासदी और भयावह हो गई है। घरों, सड़कों, बाजारों, खेतों और रेल पटरियों के डूब जाने से अरबों रुपए की संपत्ति नष्ट हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ की त्रासदी अब देश में नियमित हो गई है। जो जल जीवन के लिए जीवनदायी वरदान है, वही अभिशाप साबित हो रहा है। इन आपदाओं के बाद केंद्र और राज्य सरकारें आपदा प्रबंधन पर अरबों रुपए खर्च करती हैं। करोड़ों रुपए बतौर मुआवजा देती हैं, बाबजूद आदमी है कि आपदा का संकट झेलते रहने को मजबूर बना हुआ है। बारिश का 90 प्रतिशत पानी तबाही मचाता हुआ अपना खेल खेलता हुआ समुद्र में समा जाता है। यह संपत्ति की बरबादी तो करता ही है, खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी बहाकर समुद्र में ले जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आफत की बारिश के चलते डूबने आने वाले अहमदाबाद, जयपुर, उदयपुर, बनासकांठा इत्यादि शहरों ने संकेत दिया है कि तकनीकी रूप से स्मार्ट सिटी बनाने से पहले शहरों में वर्षा जल की निकासी का समुचित ढांचा खड़ा करने की जरूरत है, लेकिन हमारे नीति नियंता हैं कि कुदरत के कठोर संकेतों से आंखें चुराने का काम कर रहे हैं। जबकि उत्तराखण्ड में देवभूमि और कश्मीर में हम तबाही देख चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस स्थिति से गुरूग्राम, चैन्नई, बैंग्लुरू और भोपाल भी गुजर चुके हैं। बावजूद इसके प्रलंयकारी बाढ़ की आशंकाओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। बाढ़ की यह स्थिति शहरों में ही नहीं है, असम व बिहार जैसे वे राज्य भी झेल रहे हैं, जहां बाढ़ दशकों से आफत का पानी लाकर हजारों ग्रामों को डूबो देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आफत की यह बारिश इस बात की चेतावनी है कि हमारे नीति-नियंता, देश और समाज के जागरूक प्रतिनिधि के रूप में दूरदृष्टि से काम नहीं ले रहे हैं। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मसलों के परिप्रेक्ष्य में चिंतित नहीं हैं। 2008 में जलवायु परिवर्तन के अंतरसकारी समूह ने रिपोर्ट दी थी कि धरती पर बढ़ रहे तापमान के चलते भारत ही नहीं, दुनिया भर में वर्षाचक्र में बदलाव होने वाले हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका सबसे ज्यादा असर महानगरों पर पड़ेगा। इस लिहाज से शहरों में जल-प्रबंधन व निकासी के असरकारी उपायों की जरूरत है। इस रिपोर्ट के मिलने के तत्काल बाद केंद्र की तत्कालीन संप्रग सरकार ने राज्य स्तर पर पर्यावरण सरंक्षण परियोजनाएं तैयार करने की हिदायत दी थी। लेकिन देश के किसी भी राज्य ने इस अहम् सलाह पर गौर नहीं किया। इसी का नतीजा है कि हम निरंतर जल त्रासदियां भुगतने को विवश हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही नहीं शहरीकरण पर अंकुश लगाने की बजाय, ऐसे उपायों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे उत्तरोतर शहरों की आबादी बढ़ती रहे। यदि यह सिलसिला इन त्रासदियों को भुगतने के बावजूद जारी रहता है, तो ध्यान रहे 2031 तक भारत की शहरी आबादी 20 करोड़ से बढ़कर 60 करोड़ हो जाएगी। जो देश की कुल आबादी की 40 प्रतिशत होगी। ऐसे में शहरों की क्या नारकीय स्थिति बनेगी, इसकी कल्पना भी असंभव है?</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे, धरती के गर्म और ठंडी होते रहने का क्रम उसकी प्रकृति का हिस्सा है। इसका प्रभाव पूरे जैवमंडल पर पड़ता है, जिससे जैविक विविधता का आस्तित्व बना रहता है। लेकिन कुछ वर्षों से पृथ्वी के तापमान में वृद्घि की रफ्तार बहुत तेज हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे वायुमंडल का संतुलन बिगड़ रहा है। यह स्थिति प्रकृति में अतिरिक्त मानवीय दखल से पैदा हो रही है। इसलिए इस पर नियंत्रण संभव है। सयुंक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन समिति के वैज्ञानिकों ने तो यहां तक कहा था कि ‘तापमान में वृद्घि न केवल मौसम का मिजाज बदल रही है, बल्कि कीटनाशक दवाओं से निष्प्रभावी रहने वाले विषाणुओं-जीवाणुओं, गंभीर बीमारियों, सामाजिक संघर्षों और व्यक्तियों में मानसिक तनाव बढ़ाने का काम भी कर रही है। साफ है, जो लोग एक सप्ताह से ज्यादा दिनों तक बाढ़ का संकट झेलने को अभिशप्त हैं, वह जरूर संभावित तनाव की त्रासदी को भोग रहे होगें?</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, पर्यावरण के असंतुलन के कारण गर्मी, बारिश और ठंड का संतुलन भी बिगड़ता है। इसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य और कृषि की पैदावार व फसल की पौष्टिकता पर पड़ता है। यदि मौसम में आ रहे बदलाव से पांच साल के भीतर घटी प्राकृतिक आपदाओं और संक्रामक रोगों की पड़ताल की जाए तो वे हैरानी में डालने वाले हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तापमान में उतार-चढ़ाव से ‘हिट स्ट्रेस हाइपरथर्मिया‘ जैसी समस्याएं दिल व सांस संबंधी रोगों से मृत्युदर में इजाफा हो सकता है। पश्चिमी यूरोप में 2003 में दर्ज रिकॉर्ड उच्च तापमान से 70 हजार से अधिक मौतों का संबंध था। बढ़ते तापमान के कारण प्रदूषण में वृद्घि दमा का कारण है। दुनिया में करीब 30 करोड़ लोग इसी वजह से दमा के शिकार हैं। पूरे भारत में 5 करोड़ और अकेली दिल्ली में 9 लाख लोग दमा के मरीज हैं। अब बाढ़ प्रभावित समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दमा के मरीजों की और संख्या बढ़ना तय है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ के दूषित जल से डायरिया व आंख के संक्रमण का खतरा बढ़ता है। भारत में डायरिया से हर साल करीब 18 लाख लोगों की मौत हो रही है। बाढ़ के समय रुके दूषित जल से डेंगू और मलेरिया के मच्छर पनपकर कहर ढाते हैं। तय है,बाढ़ थमने के बाद, बाढ़ प्रभावित शहरों को बहुआयामी संकटों का सामना करना होगा। बहरहाल जलवायु में आ रहे बदलाव के चलते यह तो तय है कि प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस लिहाज से जरूरी है कि शहरों के पानी का ऐसा प्रबंध किया जाए कि उसका जल भराव नदियों और बांधों में हो, जिससे आफत की बरसात के पानी का उपयोग जल की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों में किया जा सके। साथ ही शहरों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए कृषि आधारित देशज ग्रामीण विकास पर ध्यान दिया जाए। क्योंकि ये आपदाएं स्पष्ट संकेत दे रही है कि अनियंत्रित शहरीकरण और कामचलाऊ तौर-तरीकों से समस्याएं घटने की बजाय बढ़ेंगी ही?</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-प्रमोद भार्गव</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2017 22:44:48 +0530</pubDate>
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                <title>बरसात से फसलों को नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[पीड़ित किसानों ने प्रदेश सरकार को ठहराया जिम्मेदार कहा, सरकार को करने चाहिए पानी निकासी के उचित प्रबंध सनौर(वरिन्दर बल्लू)। पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बरसात ने सनौर इलाके में फसलों का बड़े स्तर पर नुकसान किया है। इन दिनों में सनौर इलाके में मिर्च,घीया और कद्दू की सब्जी का सीजन पूरे जोरों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/rain-damage-to-crops/article-2866"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/crop.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">पीड़ित किसानों ने प्रदेश सरकार को ठहराया जिम्मेदार</h1>
<h2 style="text-align:justify;">कहा, सरकार को करने चाहिए पानी निकासी के उचित प्रबंध</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>सनौर(वरिन्दर बल्लू)।</strong> पिछले दो दिनों से लगातार हो रही बरसात ने सनौर इलाके में फसलों का बड़े स्तर पर नुकसान किया है। इन दिनों में सनौर इलाके में मिर्च,घीया और कद्दू की सब्जी का सीजन पूरे जोरों पर है परंतु लगातार हुई बरसात ने जहां सब्जी की फसल को नुकसान पहुंचाया है वहीं हरे चारे की फसल भी पूरी तरह से पानी में डूब गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सनौर इलाके में सबसे अधिक नुकसान सनौर से नूरखेड़ियां और चौरा रोड के साथ लगती जमीनों में हुआ है। इस मौके हुई बातचीत दौरान किसान रुपिन्दर सिंह जोशन और सोनी सिंह ने बताया कि किसानों को पहले तो सब्जी का सही रेट ही नहीं मिलता अब यदि रेट कुछ ठीक हुए थे तो कुदरत की मार पड़ गई। उन्होंने बताया कि हमने पांच एकड़ के करीब तोरई की फसल की पैदावार की हुई थी जो कि अब पूरी तरह से पानी में डूब कर बर्बाद हो चुकी है।</p>
<p style="text-align:justify;">फसल के हुए इस नुकसान संबंधी प्रदेश सरकार को जिम्मेदार मानते हुए किसानों ने कहा लगभग हर साल ही बरसात इस इलाके में फसलों का नुकसान करती है परंतु सरकार इस बारे में कोई ठोस कदम नहीं उठाती।</p>
<h1 style="text-align:justify;">किसानों ने की 20 हजार प्रति एकड़ मुआवजे की मांग</h1>
<p style="text-align:justify;">फसलों के हुए नुकसान के बारे में किसानों की ओर से पंजाब सरकार से प्रति एकड़ बीस हजार रुपए मुआवजा की मांग की गई है ताकि पहले ही मंदी की मार बर्दाश्त कर रहे किसानों को बारिश के कारण हुए नुकसान की भरपाई की जा सके।</p>
<h1 style="text-align:justify;">निकासी का रास्ता कम</h1>
<p style="text-align:justify;">किसानों ने कहा कि पिछले समय दौरान इस इलाके में बनी नई सड़कों को ऊंचा उठा कर बनाया गया था और संबंधित विभाग की ओर से बरसाती पानी के लिए रास्तों का निर्माण किया गया था जो कि एरिया के मुकाबले बहुत कम हैं, पानी कम निकलने से फसलों का नुकसान होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/rain-damage-to-crops/article-2866</link>
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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2017 00:20:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>एक घंटे की बरसात से जलथल हुआ अबोहर</title>
                                    <description><![CDATA[सोमवार को दो बजे से लेकर 3 बजे तक बरसे बदरा गर्मी से मिली राहत ल्ल किसानों के चेहरे खिले अबोहर (नरेश/ सुधीर)। सोमवार दोपहर करीब एक घंटे तक हुई भारी बारिश से जहां पिछले कुछ दिनों से पड़ रही भयंकर गर्मी से लोगों ने राहत की सांस ली और किसानों के चेहरे भी खिल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/heavy-rain-abohar/article-2766"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/heavy-rain-21.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">सोमवार को दो बजे से लेकर 3 बजे तक बरसे बदरा</h1>
<h1 style="text-align:justify;">गर्मी से मिली राहत ल्ल किसानों के चेहरे खिले</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर (नरेश/ सुधीर)।</strong> सोमवार दोपहर करीब एक घंटे तक हुई भारी बारिश से जहां पिछले कुछ दिनों से पड़ रही भयंकर गर्मी से लोगों ने राहत की सांस ली और किसानों के चेहरे भी खिल गए वहीं शहर के अधिकतर क्षेत्रों में जलभराव होने से वाहन चालकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। वहीं कुछ दुकानों में पानी घुसने से दुकानदारों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी और उनके माथे पर चिंता की लकीरें देखी गई कि कहीं और अधिक बरसात आ गई तो उनकी दुकानों का क्या होेगा।</p>
<h1 style="text-align:justify;">इन क्षेत्रों में भरा पानी</h1>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार सोमवार दोपहर करीब सवा 2 बजे शुरू हुई मूसलाधार बारिश सवा तीन बजे तक जारी रही, जिससे शहर के सभी मुख्य मार्गों सरकुलर रोड़, गौशाला रोड़, साहित्य सदन रोड़, कंधवाला रोड़ तथा शहर के अधिकतर क्षेत्रों में पानी भर गया, जिससे वाहन चालकों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी। पूरी तरह से लबालब हुई सड़कों पर अनेक दुपहिया वाहन बंद होने से उनको धक्का लगाने को मजबूर होना पड़ा। कई निचले क्षेत्रों में बरसाती पानी घरों में घुसने से सामान को नुकसान भी पहुंचा है। यदि रात्रि तक और बरसात आ गई तो क्षेत्रवासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">सीवरेज बोर्ड के संपर्क में</h1>
<p style="text-align:justify;">नगर परिषद के ईओ विजय जिंदल से बात करने पर उन्होंंने कहा कि शहरवासियों की समस्या को ध्यान में रखते हुए सीवरेज बोर्ड से लगातार तालमेल बनाए हुए हैं। पानी निकासी को यकीनी बनाने को लेकर वे रात्रि तक उनके संपर्क में रहेंगे और कोशिश करेंगे कि जल्द से जल्द पानी की निकासी हो जाए।</p>
<h1 style="text-align:justify;">मोटर चलवाकर करवाएंगे पानी निकासी</h1>
<p style="text-align:justify;">एसडीएम पूनम सिंह से बात करने पर उन्होंने कहा कि वे शहर में पानी निकासी की स्थिति से अवगत हंै और डिस्पोजल पर जैनरेटर के माध्यम से मोटर चलवाकर पानी निकासी करवाई जा रही है। यदि लाईट न आई तो वे किसी न किसी माध्यम से शीघ्र पानी की निकासी करवाएंगी और फंड के कारण पानी निकासी के काम में बाधा नहीं आने दी जाएगी।उन्होंने कहा कि पानी निकासी को लेकर किसी अधिकारी व कर्मचारी की लापरवाही बदार्शत नहीं की जाएगी।</p>
<h1 style="text-align:justify;">जनरेटर का बंदोबस्त नहीं, दूसरी मोटर को चलाना संभव नहीं</h1>
<p style="text-align:justify;">वाटर एवं सीवरेज विभाग के एसडीओ हरशरणजीत सिंह से बात की गई तो उन्होंने बताया कि डिस्पोजल पर लगी तीन मोटरों में से दो मोटरें बिजली पर चलती है लेकिन लाईन न होने के कारण जैनरेटर चलाकर एक मोटर से पानी की निकासी करवाई जा रही है। उन्होंने कहा कि सीवरेज बोर्ड के पास फंड न होने के कारण दूसरी मोटर को जैनरेटर पर चलाना संभव नहीं है। यदि प्रशासन उन्हें दूसरे जैनरेटर का बंदोबस्त करके देगा तो शीघ्र शहर से पानी की निकासी हो जाएगी।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 31 Jul 2017 23:32:53 +0530</pubDate>
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                <title>पौली में बरसाती पानी की मार, 200 एकड़ में फसलें डूबी</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों की धान, बाजरा और ज्वार की फसलें बर्बाद प्रशासन से बार-बार गुहार के बाद भी नहीं समाधान जुलाना (सच कहूँ न्यूज)।जैसे ही बरसात का मौसम आता है, पौली गाँव के किसानों के माथे पर चिंता की लक ीरें खिंच जाती हैं, क्योंकि पौली-लिजवानां कलां ड्रैन की सफाई नहीं होने से गाँव की अधिकतर भूमि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/rain-water-in-polly-waste-of-paddy-millet-and-tide-crops/article-2174"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/crops.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">ग्रामीणों की धान, बाजरा और ज्वार की फसलें बर्बाद</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>प्रशासन से बार-बार गुहार के बाद भी नहीं समाधान</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>जुलाना (सच कहूँ न्यूज)।</strong>जैसे ही बरसात का मौसम आता है, पौली गाँव के किसानों के माथे पर चिंता की लक ीरें खिंच जाती हैं, क्योंकि पौली-लिजवानां कलां ड्रैन की सफाई नहीं होने से गाँव की अधिकतर भूमि जलमग्न हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">गत दिनों हुई बरसात से पौली लिजवानां कलां ड्रैन पौली गाँव के खेतों में ओवरफ्लो हो गई है, जिससे 200 एकड़ से ज्यादा फसल पानी में डूब गई, जबकि यहां पर ग्रामीणों द्वारा धान, ज्वार और बाजरा की बिजाई की हुई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा किसानों ने ईख की खेती भी की हुई थी। जो अब बारिश के पानी से जलमग्न हो गई है। ग्रामीणों का कहना है कि गेहूँ के सीजन में भी उनकी फसल इसी तरह से बर्बाद हो जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि लिजवानां कलां, अकालगढ़ हथवाला आदि गाँवों का ढलान पौली गाँव की तरफ ज्यादा होने के कारण सारा बारिश का पानी उनके गाँव की तरफ बहता है और खेतों में लगभग 3-4 फीट पानी भर जाता है। जिससे ग्रामीणों की फसल बारिश के पानी से बर्बाद हो जाती है, ऐसे में किसानों ने प्रशासन से उनकी समस्या का समाधान किए जाने की गुहार लगाई है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">1992 से बनी हुई है समस्या</h2>
<p style="text-align:justify;">गाँव पौली के कुलबीर, दलबीर, रोहिराम, जिले मलिक, सुनील, बिजेन्द्र ने बताया कि उनकी यह समस्या कोई आज या कल की नहीं बल्कि साल 1992 से यह समस्या बनी हुई है। इस बारे में कई बार जिला प्रशासन को अवगत करवाया जा चुका है,</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन उनकी समस्या का कोई समाधान नहीं हो रहा है और हर वर्ष उनकी फसल बर्बाद हो रही है। ऐसे में किस प्रकार वे अपना व अपने परिवार का पालन पोषण करेंगे जबकि उनके पास खेती के अलावा कोई इंकम का साधन नहीं है। इसलिए प्रशासन द्वारा उनकी समस्या पर गंभीरता से संज्ञान लिया जाना चाहिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">बिजली समस्या ने बढ़ाई परेशानी</h2>
<p style="text-align:justify;">ग्रामीणों ने बारिश व ड्रैन के पानी को निकालने के लिए बिजली विभाग से चार दिन के लिए 24 घंटे बिजली छोड़ने की मांग की है। लेकिन इसके बावजूद बिजली केवल 8 घंटे ही छोड़ी जा रही है। जिससे किसानों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पौली गाँव के किसानों की 200 एकड़ से ज्यादा फसल जलमग्न है। ड्रैन का पानी निकलवाने के लिए सिंचाई विभाग, बिजली विभाग व जिला प्रशासन को मिल चुके हैं, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ है। किसानों की मांग है कि खेतों के पानी को जल्द से जल्द निकलवाने का प्रबंध करें।<br />
<em><strong>सुंदर, सरपंच पौली।</strong></em></p>
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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 02:22:52 +0530</pubDate>
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