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                <title>Rivers: नदियों की जान निकाल रहे रेत माफिया</title>
                                    <description><![CDATA[Sand Mafia: नदियों से निकाली जा रही रेत सोने से कम नहीं है। रेत की मांग बढ़ती जा रही है तथा जो इसकी लूट कर रहे हैं वे रातों रात करोड़पति बनते जा रहे हैं। निर्माण कार्यों में इसकी जरूरत होती है। Sand Mafia उत्तर और मध्य भारत की अधिकांश नदियों का उथला होते जाना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/sand-mafia-is-taking-the-life-out-of-rivers/article-61198"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/sand-mafia.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Sand Mafia: नदियों से निकाली जा रही रेत सोने से कम नहीं है। रेत की मांग बढ़ती जा रही है तथा जो इसकी लूट कर रहे हैं वे रातों रात करोड़पति बनते जा रहे हैं। निर्माण कार्यों में इसकी जरूरत होती है। Sand Mafia</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर और मध्य भारत की अधिकांश नदियों का उथला होते जाना और थोड़ी सी बरसात में उफन जाना, तटों के कटाव के कारण बाढ़ आना और नदियों में जीव-जंतु कम होने के कारण पानी में आॅक्सीजन की मात्र कम होने से पानी में बदबू आना, ऐसे ही कई कारण हैं जो मनमाने रेत उत्खनन से जल निधियों के अस्तित्व पर संकट की तरह मंडरा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज हालात यह है कि कई नदियों में ना तो जल प्रवाह बच रहा है और ना ही रेत। देश भर से नदियों और समुद्र तटों से रेत की लूट की खबरें मिल रही हैं। यह समस्या इतनी गंभीर है कि पर्यावरणविदों ने सरकार से रेत का विकल्प ढूंढ़ने के लिए अनुसंधान करने की बात कही है। देश में संगठित रेत माफिया बिल्डरों और निर्माण कंपनियों के लिए अवैध रेत खनन में संलिप्त है। अवैध रेत खनन से बिल्डर खूब लाभ कमा रहे हैं। Sand Mafia</p>
<p style="text-align:justify;">सत्ता और पैसे के लालच में कई राजनेताओं ने माफियाओं के साथ मिलकर पर्यावरण संरक्षण को नजरअंदाज किया है। देश के प्रत्येक राज्य में यह स्थिति है। महाराष्टÑ में अवैध रेत खनन को मकोका के अन्तर्गत अपराध माना गया है। इसके बावजूद राज्य के तटवर्ती क्षेत्रों में अवैध रेत खनन जारी है। किंतु आज तक किसी भी रेत माफिया को नहीं पकड़ा गया है। Sand Mafia</p>
<p style="text-align:justify;">विशेषज्ञों के अनुसार निर्बाध रेत खनन से नदियों और धाराओं की तलहटी तथा तटों को नुकसान पहुंचा है। इसके कारण नदियों के तट कट रहे हैं तथा टूट रहे हैं। नदियों के पास की भूमि और ढ़ांचों को नुकसान पहुंच रहा है। नदियों के प्रवाह मार्ग में भूस्खलन हो रहा है तथा प्रवाह मार्ग में निचली और अधिक गाद भर रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">डेÑजर जैसे भारी उपकरणों से खनन के कारण नदी की तलहटी की परतों में कंपन होता है तथा उसके आसपास की वनस्पति साफ की जाती है और वह तलहटी में जमा होती है। इसका पारिस्थितिकी पर प्रभाव पड़ता है जिसके कारण नदियों में जीवन पर प्रभाव पड़ता है। नदी में जीवों का भोजन नष्ट होता है और नदी जैव विविधता प्रभावित होती है। तेल की लीकेज को रोकने में विफलता, नदियों में प्रदूषणकारी तत्वों को फैंकने से जलजीवन नष्ट हो रहे हैं तथा जल विषैला हो रहा है। Sand Mafia</p>
<p style="text-align:justify;">नदियों में से अत्यधिक रेत के खनन से नदी प्रवाह क्षेत्र में भूजल स्तर भी गिर रहा है। केरल, आंध्र और अन्य राज्यों में ऐसा देखने को मिला है तथा यमुना, हिंडन और गंगा में भी ऐसा हो सकता है जिसके कारण कृषि को नुकसान हो रहा है और इन क्षेत्रों में लोगों की आजीविका पर संकट आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आज जरूरत इस बात की है कि पूरे देश में जिला स्तर पर व्यापक अध्ययन किया जाए कि प्रत्येक छोटी-बड़ी नदी में सालाना रेत आगम की क्षमता कितनी है और इसमें से कितनी को बगैर किसी नुकसान के उत्खनित किया जा सकता है। फिर उसी अनुसार निर्माण कार्य की नीति बनाई जाए। उसी के अनुरूप राज्य सरकारें उस जिले में रेत के ठेके दें। इंजीनियरों को रेत के विकल्प खोजने पर भी काम करना चाहिए। आज यह भी जरूरी है कि मशीनों से रेत निकालने, नदी के किस हिस्से में रेत खनन पर पूरी तरह पांबदी हो, परिवहन में किस तरह के मार्ग का इस्तेमाल हो, ऐसे मुद्दों पर व्यापक अध्ययन होना चाहिए। साथ ही नदी तट के बाशिंदों को रेत-उत्खनन के कुप्रभावों के प्रति संवेदनशील बनाने का प्रयास भी होना चाहिए। Sand Mafia<br />
<strong> अभिषेक कुमार</strong> (यह लेखक के अपने विचार हैं)</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="‘बिल लाओ इनाम पाओ’ योजना: 2601 विजेताओं ने जीते इनाम" href="http://10.0.0.122:1245/bring-bill-and-get-reward-scheme-2601-winners-won-prizes/">‘बिल लाओ इनाम पाओ’ योजना: 2601 विजेताओं ने जीते इनाम</a></p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Aug 2024 10:28:36 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Punjab Weather Update: मौसम विभाग का अलर्ट, फिर होगी झमाझम बारिश, किसानों की बढ़ी चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[Punjab Weather Update: पंजाब के सभी जिलों में आज बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अलर्ट के बाद अमृतसर, गुरदासपुर और पठानकोट में गरज के साथ बारिश हो रही है। पंजाब में बारिश सामान्य रहने की उम्मीद है लेकिन हिमाचल में बारिश के बाद नदियों में पानी एक बार फिर बढ़ने के आसार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/punjab-weather-update-meteorological-departments-alert-there-will-be-heavy-rain-again-increased-concern-of-farmers/article-50475"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/punjab-weather-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Punjab Weather Update: पंजाब के सभी जिलों में आज बारिश होने की संभावना है। मौसम विभाग के अलर्ट के बाद अमृतसर, गुरदासपुर और पठानकोट में गरज के साथ बारिश हो रही है। पंजाब में बारिश सामान्य रहने की उम्मीद है लेकिन हिमाचल में बारिश के बाद नदियों में पानी एक बार फिर बढ़ने के आसार हैं। बता दें कि मौसम विभाग ने बुधवार को पूरे पंजाब में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया था। साथ ही लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी गई। विभाग ने मौसम को लेकर राज्य में येलो अलर्ट जारी किया था। मौसम विभाग का कहना है कि पंजाब के तीनों इलाकों दोआबा, माझा और मालवा में बारिश होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">Punjab Weather Update: भारत मौसम विभाग के चंडीगढ़ मौसम केंद्र व हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के कृषि मौसम विज्ञान विभाग ने 27 जुलाई तक पूरे हरियाणा प्रदेश में भारी बारिश की संभावना जताई है। इस बार पश्चिम व दक्षिण पश्चिम हरियाणा की भी प्यास बुझेगी। इनमें जींद, भिवानी, चरखी- दादरी, हिसार व फतेहाबाद जिले भी शामिल है। हालांकि घग्गर नदी का बांध टूटने के कारण सरसा व फतेहाबाद जिला पहले से ही जलमग्न चल रहे हैं। लेकिन मानसून की बरसात इन जिलों में भी औसत रूप से कम हुई है। 15 जुलाई से अब तक रुक रुक कर हो रही मानसून बारिश के बावजूद भी हरियाणा में उमस भरी गर्मी बनी हुई है। पिछले 24 घंटों के दौरान गुड़गांव जिला जहां सबसे गर्म रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">यहाँ का अधिकतम तापमान 35.8 डिग्री सेल्सियस बना रहा। वहीं करनाल जिले में सबसे अधिक बारिश दर्ज की गई। करनाल में 40 एमएम बारिश हुई। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम विभाग अध्यक्ष डॉ मदन खीचड़ ने बताया कि मानसून टर्फ़ सामान्य स्थिति के दक्षिण की बनी हुई है। यह उत्तर की तरफ न बढ़ने के कारण राज्य में मानसून की सक्रियता पूरी तरह बन नहीं पा रही है। Punjab Weather Update</p>
<p style="text-align:justify;">जिससे राज्य के कुछ एक स्थानों पर छिटपुट बारिश हो रही है। परंतु यह मानसून ट्रफ अगले दो दिनों में सामान्य स्थिति पर आ जाने की संभावना है जिससे हरियाणा राज्य में मानसून की सक्रियता थोड़ी बढ़ने की संभावना है। एक साईक्लोनिक सकुर्लेशन राजस्थान के ऊपर बना हुआ है, जिससे अरबसागर की तरफ से नमी वाली हवाएं राज्य की तरफ बढ़ने की संभावना बन रही है। इस दौरान 25 जुलाई तक बीच-बीच में हल्की से मध्यम बारिश की संभावना है। इस दौरान कुछ एक क्षेत्रों में तेज बारिश की संभावना बन रही है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Diabetes Symptoms: …नींद में पेशाब आना है एक बड़ी परेशानी, ये है हाई Blood Sugar की निशानी" href="http://10.0.0.122:1245/urination-in-sleep-is-a-big-problem-this-is-a-sign-of-high-blood-sugar/">Diabetes Symptoms: …नींद में पेशाब आना है एक बड़ी परेशानी, ये है हाई Blood Sugar की निशानी</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Jul 2023 10:12:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नदियों पर गहराता संकट</title>
                                    <description><![CDATA[प्राचीन समय में भारत अपनी कई महान नदियों के कारण विश्व विख्यात था। प्राचीनकाल में नदियों (Deep crisis on rivers) के किनारे ही हमारी मानव सभ्यताओं का जन्म व विकास हुआ था। नदियां केवल धरती के प्राण ही नहीं हैं बल्कि मानव संस्कृतियों की जननी भी हैं। हमारे पूर्वजों के मन में नदियों के प्रति […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/deep-crisis-on-rivers/article-6862"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/rivar.jpg" alt=""></a><br /><h2>प्राचीन समय में भारत अपनी कई महान नदियों के कारण विश्व विख्यात था।</h2>
<p style="text-align:justify;">प्राचीनकाल में नदियों <strong>(Deep crisis on rivers)</strong> के किनारे ही हमारी मानव सभ्यताओं का जन्म व विकास हुआ था। नदियां केवल धरती के प्राण ही नहीं हैं बल्कि मानव संस्कृतियों की जननी भी हैं। हमारे पूर्वजों के मन में नदियों के प्रति अपार श्रद्धा व सम्मान का भाव विद्यमान था। वे नदियों को देवी-देवता मानकर उनकी पूजा किया करते थे। नदियों की महानता से प्रसन्न होकर ऐतिहासिक काल में कई महर्षियों ने नदी पुराण व ग्रंथों की रचना भी की हैं। उस समय नदियों के बिना जीवन की कल्पना संभव नहीं मानी जाती थी। क्योंकि प्राचीनकाल में नदियों का केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व ही नहीं था बल्कि ये सामाजिक और आर्थिक महत्व को भी समेटे हुए थी। इन्हीं महत्वों को उजागार करने के लिए कई मेलों व त्योहारों का आयोजन भी नदियों को केंद्र में रखकर किया जाता था। प्राचीन समय में भारत अपनी कई महान नदियों के कारण विश्व विख्यात था।</p>
<h2>देश की 62 फीसदी नदियां भयंकर रूप से प्रदूषित हो चुकी हैं।</h2>
<p style="text-align:justify;">भारत की धरती पर कई नदियां खेला करती थी और उनके जल से हजारों खेतों में फसलें खिला करती थीं। प्राचीन भारत को सोने की चिड़िया का गौरव भी इन्हीं नदियों की बदौलत हासिल था। लेकिन बदलते दौर में नदियों के मूल्यों और अस्मिता के साथ छेड़छाड़ हुई। उनके निर्मल व पवित्र जल में जहर घोला गया और उन्हें मृतप्राय सा बनाकर छोड़ दिया गया। यही कारण है कि आज देश में तकरीबन 223 नदियों का पानी इतना प्रदूषित हो चुका है कि उनके पानी में नहाने या पीने पर बीमारी का खतरा हो सकता है। देश की 62 फीसदी नदियां भयंकर रूप से प्रदूषित हो चुकी हैं। इनमें गंगा और यमुना समेत इनकी सहायक नदियां भी शामिल हैं। निश्चित ही शहरीकरण और औद्योगीकरण ने नदियों के प्राण हरने का कार्य किया है। कृषि अपशिष्ट, रासायनिक उर्वरक और कीटनाशक ने नदियों के जल को सर्वाधिक क्षति पहुंचायी है।</p>
<h2>परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं</h2>
<p style="text-align:justify;">औद्योगिक अपशिष्ट, भारी धातु, प्लास्टिक की थैलियां व ठोस अपशिष्ट के साथ ही पूजा का सामान, फूल, मालाओं जैसी वस्तुओं के कारण नदियों की अविरल धारा में रुकावट आयी है। वहीं नदियों के किनारे धार्मिक अनुष्ठान करने, पशुओं के नहाने, मानव द्वारा मल-मूत्र त्यागने के कारण नदियां का जल प्रदूषित हुआ है। आज देश में नदियों को स्वच्छ बनाने के लिए तो कई योजनाएं और परियोजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किये जा रहे हैं पर नदियों को प्रदूषित करने वाले कारकों पर किसी तरह की रोक लगाने को लेकर प्रयास होते नहीं दिख रहे हैं। इसी वजह से जहां एक ओर नदियां साफ हो रही हैं तो दूसरी ओर डाला जा रहा कचरा उन्हें फिर से गंदा भी कर रहा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> नदियों में औषधीय गुण फिर आएं इसके लिए किनारों पर औषधीय पेड़ रोपित किये जाएं</h2>
<p style="text-align:justify;">जनाओं के बूते देश की नदियों का जल स्वच्छ हो जाएगा? हमारे लिए नदी प्रबंधन का सिद्धांत यह होना चाहिए कि नदी को कोई खराब ही नहीं करें। यदि ऐसा होगा तो नदी को स्वच्छ करने के नाम पर करोड़ों का धन व्यय करने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। नदियों में जैव विविधता लौटाने के लिए नदियों के पानी में जैव आॅक्सीजन की मांग घटानी होगी ताकि नदियों को साफ करने वाले जलीय जीव जिंदा रह सकें। नदियों में औषधीय गुण फिर आएं इसके लिए किनारों पर औषधीय पेड़ रोपित किये जाएं। इसके अतिरिक्त खेती और घरों में डिटर्जेंट आदि में इस्तेमाल हो रहे खतरनाक रसायन और कीटनाशक से नदियों को बचाना होगा। अस्तित्व के लिए जूझ रही नदियों को जीवित नदी का दर्जा देने से अधिक जरूरी है उन्हें जीवित रखना। यह काम केवल खानापूर्ति से नहीं होगा बल्कि इसके लिए मजबूत इच्छाशक्ति व ईमानदारी से प्रयास करने की जरूरत है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/deep-crisis-on-rivers/article-6862</link>
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                <pubDate>Sat, 08 Dec 2018 08:35:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>उत्तराखंड में भूस्खलन, नदियों का जलस्तर बढ़ा, हाईवे बाधित</title>
                                    <description><![CDATA[स्कूलों में 12 वीं तक की छुट्टी कल ही घोषित हरादून (एजेंसी)। उत्तराखंड में पिछले तीन दिन से हो रही लगातार बारिश लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। देहरादून, हरिद्वार, रुड़की की सड़कें तालाब में जलमग्न होती जा रही हैं। वहीं, चारधाम यात्रा मार्ग भूस्खलन से बार-बार अवरुद्ध हो रहे हैं। गंगा के साथ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/landslide-in-uttarakhand-water-level-increases-in-rivers/article-5032"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/barish.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">स्कूलों में 12 वीं तक की छुट्टी कल ही घोषित</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हरादून (एजेंसी)। </strong>उत्तराखंड में पिछले तीन दिन से हो रही लगातार बारिश लोगों के लिए मुसीबत बनती जा रही है। देहरादून, हरिद्वार, रुड़की की सड़कें तालाब में जलमग्न होती जा रही हैं। वहीं, चारधाम यात्रा मार्ग भूस्खलन से बार-बार अवरुद्ध हो रहे हैं। गंगा के साथ ही अन्य नदियों के जलस्तर में भी बढ़ोत्तरी दर्ज की गई है। वहीं, देहरादून, उत्तरकाशी, हरिद्वार सहित अधिकांश जनपदों में स्कूलों में 12 वीं तक की छुट्टी कल ही घोषित कर दी गई थी।</p>
<h1 style="text-align:justify;">गोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग धरासू, बडेथी, ओंगी, थिरांग मार्ग अवरुद्ध</h1>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड के अधिकांश जिलों में लगातार बारिश के चारधाम यात्रा मार्ग की सड़कें भी भूस्खलन से दरक रही हैं। बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री हाईवे भूस्खलन की वजह से बाधित है। लगातार हो रही बारिश से शहरों में कई स्थानों पर जलभराव की समस्या से लोगों को जूझना पड़ रहा है। बद्रीनाथ हाइवे सुबह से लामबगड़ में बंद है। हेमकुंड यात्रा जारी है। वहीं, केदारनाथ हाईवे डोलिया देवी फाटा, तिलवाडा के समीप, रामपुर और चंडिकाधार में भूस्खलन से बंद है। उत्तरकाशी में गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग धरासू, बडेथी, ओंगी, थिरांग के पास मलबा आने से अवरुद्ध है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नौगांव में पहाड़ी से पत्थर गिरने से पांच बाइक क्षतिग्रस्त</h2>
<p style="text-align:justify;">यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग डाबरकोट के पास 21 जुलाई की शाम से अवरुद्ध है। डाबरकोट में लगातार हल्के पत्थर गिरने के कारण मार्ग सुचारु करने का कार्य शुरू नहीं हो पाया है। उत्तरकाशी के नौगांव में पहाड़ी से पत्थर गिरने से पांच बाइक क्षतिग्रस्त हो गई। विकासनगर-बड़कोट राष्ट्रीय राजमार्ग खरसुन क्यारी के पास मलबा आने से अवरुद्ध हैं। वहीं, राज्य मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक बिक्रम सिंह के अनुसार दून सहित उत्तराखंड के कुछ इलाकों में बारिश का दौर जारी रहेगा। रुड़की में लगातार बारिश के चलते जनजीवन प्रभावित हो गया है। कई कालोनियों में जबरदस्त जलभराव हुआ। इसकी वजह से लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है। वहीं शहर के प्रमुख मार्गो पर भी जलभराव होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">गंगा व अन्य नदियों का जलस्तर बढ़ा</h2>
<p style="text-align:justify;">लगातार बारिश से गंगा का जलस्तर बढ़ गया है। हरिद्वार में रात दस बजे गंगा का जलस्तर 291.90 पर था, जो शनिवार सुबह छह बजे बढ़कर 292.25 मीटर तक जा पहुंचा। हालांकि चेतावनी लेवल 293 और खतरे का निशान 294 मीटर है। जिला आपदा प्रबंधन अधिकारी मीरा कैंतुरा का कहना है जलस्तर पर नजर है। तहसील आपदा केंद्र और बाढ़ चौकियों के कर्मचारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है। वहीं, उत्तरकाशी जनपद में भागीरथी नदी का जल स्तर 1121.50 मीटर पर पहुंच गया। खतरे का निशान 1123.00 मीटर पर है। यमुना नदी का जलस्तर 1058.490 मीटर दर्ज किया गया। खतरे का निशान 1060.00 मीटर है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Jul 2018 03:52:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सरकार लापरवाह, सूख रहे नदियां-नाले : भूपेन्द्र</title>
                                    <description><![CDATA[चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। हरियाणा के पूर्व मुख्यमन्त्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसकी लापरवाही व उदासीनता के कारण हरियाणा में भयंकर पेयजल संकट दस्तक दे रहा है। अधिकांश जलघर, तालाब व जोहड़ सूख गये हैं या सूखने के कगार पर हैं। नहरों से पानी सप्लाई पहले […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/government-careless-drying-rivers-bhupendra/article-4054"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/bhuka.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। </strong>हरियाणा के पूर्व मुख्यमन्त्री भूपेन्द्र सिंह हुड्डा ने प्रदेश की भाजपा सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा है कि उसकी लापरवाही व उदासीनता के कारण हरियाणा में भयंकर पेयजल संकट दस्तक दे रहा है। अधिकांश जलघर, तालाब व जोहड़ सूख गये हैं या सूखने के कगार पर हैं। नहरों से पानी सप्लाई पहले से आधी या उससे भी कम रह गई है। यहां जारी एक ब्यान में हुड्डा ने कहा कि प्रदेश सरकार सोई रही या जानबूझ कर आँखें बन्द रखी या कोई बाहरी दबाव था, यह तो वही बता सकती है, पर इस तथ्य से इन्कार नहीं किया जा सकता कि मार्च 2018 से मई 2018 के बीच हरियाणा को उसके हिस्से का पूरा पानी नहीं मिला। न्यायसंगत बात यह है कि किसी डैम से राज्यों को पानी का बँटवारा उनके तय हिस्सेदारी के हिसाब से होना चाहिये।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भाखड़ा बांध का पानी 31 फुट घटा</h3>
<p style="text-align:justify;">हुड्डा ने कहा कि 20 सितम्बर 2017 को भाखड़ा बाँध में पानी अपने उच्चतम स्तर 1680 फुट से थोड़ा नीचे 1673 फुट था, जो औसत से बेहतर था। पर आज भाखड़ा में पानी का स्तर 31 फुट घटकर 1642 फुट है, जो खतरनाक स्थिति बयां करता है। याद रखें कि बाँध अपने निर्माण के बाद शायद ही 1650 फुट से नीचे के स्तर पर आया हो। बीबीएमबी की 29 मई 2018 की बैठक में बहाना बनाया गया कि 2017-18 में कम बर्फबारी से जलाशय में कम पानी आया। यह आँखों में धूल झौंकने वाली बात है। सवाल यह भी उठता है कि इस विषय में मौसम विभाग की भविष्यवाणी की अनदेखी किसने की और क्यूं की?</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 09 Jun 2018 11:12:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिहार: 9 नदियां उफान पर, अब तक 153 की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[पटना: नेपाल में बारिश की रफ्तार के फिर जोर पकड़ने के चलते नॉर्थ बिहार की नदियां एक बार फिर उफान पर हैं। नौ बड़ी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। ललबकिया शुक्रवार को खतरे के निशान से नीचे उतरी तो शाम होते-होते पुनपुन खतरे के निशान को पार कर गई। पुनपुन के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/bihar-nine-rivers-on-boom/article-3224"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/flood-11.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पटना:</strong> नेपाल में बारिश की रफ्तार के फिर जोर पकड़ने के चलते नॉर्थ बिहार की नदियां एक बार फिर उफान पर हैं। नौ बड़ी नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं। ललबकिया शुक्रवार को खतरे के निशान से नीचे उतरी तो शाम होते-होते पुनपुन खतरे के निशान को पार कर गई। पुनपुन के अलावा बागमती, कमला बलान, अधवारा, खिरोई, महानंदा, घाघरा, बूढ़ी गंडक और कोसी नदी लगातार लाल निशान से ऊपर बह रही है। डिजास्टर मैनेजमेंट डिपार्टमेंट के मुताबिक बाढ़ में अब तक 153 लोग जान गंवा चुके हैं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">कटिहार में बरंडी नदी का बांध कटा, कई गांवों में बाढ़ का पानी</h1>
<p style="text-align:justify;">शुक्रवार देर शाम रहटा पंचायत के हसेली के पास बरंडी नदी का थॉमस बांध टूटने से कई गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोग घरों से जान बचा कर इधर-उधर भागते दिखे। उधर, श्रीकामत स्थित नहर को भी अज्ञात लोगों ने दुबारा काट दिया। बांध टूटने और नहर काटे जाने से एक दर्जन से ज्यादा गांवों के बाढ़ की चपेट में आने की आशंका है। इससे रहठा, हसेली, श्रीकामत, पिरमोकाम, सहित कई गांव में बाढ़ का पानी फैल जाएगा। लोग भाग कर ऊंची जगहों पर जा रहे हैं। दो साल पूर्व थॉमस बांध टूटा था। तब 600 घरों में पानी घुस गया था।</p>
<h1 style="text-align:justify;">17 जिलों के 1.8 करोड़ लोग चपेट में, 153 मौतें</h1>
<p style="text-align:justify;">अररिया में 30, वेस्ट चम्पारण में 23, सीतामढ़ी में 13 लोगों की मौत हुई है। किशनगंज, ईस्ट चम्पारण और सुपौल में 11-11 लोगों की जान गई है। मधेपुरा और पूर्णिया में 9-9, मधुबनी में 8, कटिहार में 7 लोगों की मौत हुई है। इसी तरह सहरसा, गोपालगंज और दरभंगा में 4-4, खगड़िया और शिवहर में 3-3, सारण में 2 और मुजफ्फरपुर में 1 शख्स की जान गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 Aug 2017 22:46:28 +0530</pubDate>
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                <title>बिहार-उत्तराखंड में अगले तीन दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[कई नदिया खतरे के निशान से ऊपर नई दिल्ली ।  भारतीय मौसम विभाग ने बिहार और उत्तराखंड सहित  कई राज्यों में भरी बारिस का अलर्ट जारी किया है । दोनों राज्यों में  कई नदिया खतरे के निशान से ऊपर है । मौसम विभाग ने अगले 3 दिन तक उत्तराखंड में छिटपुट स्थानों पर आंधी, ओलावृष्टि तथा गरज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/heavy-rain-warning-in-bihar-uttarakhand-for-next-three-days/article-2182"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/rain-1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">कई नदिया खतरे के निशान से ऊपर</h2>
<p><strong>नई दिल्ली ।</strong>  भारतीय मौसम विभाग ने बिहार और उत्तराखंड सहित  कई राज्यों में भरी बारिस का अलर्ट जारी किया है । दोनों राज्यों में  कई नदिया खतरे के निशान से ऊपर है । मौसम विभाग ने अगले 3 दिन तक उत्तराखंड में छिटपुट स्थानों पर आंधी, ओलावृष्टि तथा गरज के साथ बारिश होने की भविष्यवाणी जारी करते हुए अगले 3 दिनों में प्रदेश में कई जिलों विशेषकर चार धाम यात्रा वाले जिलों में कई जगहों पर भारी बारिश की चेतावनी दी है।</p>
<p>अगले 3 दिनों तक कहीं-कहीं ओला वृष्टि और 70-80 किलोमीटर प्रतिघंटा की गति वाली तेज हवा चलने की संभावना भी व्यक्त की गई है। इसके अलावा, दो हजार मीटर तथा उससे अधिक ऊंचाई वाले स्थानों में ओलावृष्टि की संभावना भी मौसम विभाग ने जताई है।</p>
<p>प्रदेश भर में राशन, ईंधन और अन्य आवश्यक व्यवस्थायें सुनिश्चित रखने के निर्देश देते हुए सभी जिलाधिकारियों को आमजन की सुरक्षा और सुविधा का पूरा ध्यान रखने को कहा है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 04:18:36 +0530</pubDate>
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