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                <title>truth - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>असत्य पर सत्य की विजय का पर्व</title>
                                    <description><![CDATA[हमारी भारतीय संस्कृति अनेकों त्योहारों, मेलों, उत्सवों व पर्वों से गुंथी हुई है। यहां मनाये जाने वाले प्रत्येक अनुष्ठान के पीछे प्रेम, एकता, भाईचारा व समरसता का संदेश छिपा है। इन्हीं पर्वों में से एक पर्व विजयादशमी यानी दशहरा है। अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को संपूर्ण भारतवर्ष में अपार हर्षोल्लास एवं धूमधाम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-feast-of-truth-on-the-unreal/article-6332"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/the-feast-of-truth-on-the-unreal-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हमारी भारतीय संस्कृति अनेकों त्योहारों, मेलों, उत्सवों व पर्वों से गुंथी हुई है। यहां मनाये जाने वाले प्रत्येक अनुष्ठान के पीछे प्रेम, एकता, भाईचारा व समरसता का संदेश छिपा है। इन्हीं पर्वों में से एक पर्व विजयादशमी यानी दशहरा है। अश्विन मास की शुक्ल पक्ष की दशमी को संपूर्ण भारतवर्ष में अपार हर्षोल्लास एवं धूमधाम से मनाया जाने वाला यह पर्व असत्य पर सत्य, अन्याय पर न्याय, तमोगुण पर दैवीगुण, दुष्टता पर सुष्टता, दुराचार पर सदाचार, भोग पर योग, असुरत्व पर देवत्व की विजयगाथा को अंकित करने के साथ ही शक्ति उपासना व समन्वय को रेखांकित करने का भी दिन है। वैसे तो इस पर्व को मनाने के पीछे कई धार्मिक, सांस्कृतिक व सामाजिक कारण जुड़े हुए हैं। लेकिन, इनमें दो कारण एक तो इस दिन भगवान श्रीराम के द्वारा दैत्यराज रावण का वध करना और दूसरा शक्ति की आराध्य देवी मां दुर्गा द्वारा आतंकी महिषासुर का मर्दन करना जनमानस में अत्यधिक प्रचलित है। इस दिन हिन्दू समाज में अस्त्र-शस्त्र का पूजन करने की भी परंपरा है। इसके पीछे भी तथ्य है- भारतीय संस्कृति सदा ही वीरता, शौर्य व शक्ति की पूजक व समर्थक रही है। शक्ति के बिना विजय की कामना करना असंभव है। इसलिए हिन्दुओं के प्रत्येक देवी-देवता अपने हाथों में शस्त्र धारण किये दिखाई देते हैं ताकि समय व परिस्थिति आने पर इन अस्त्र-शस्त्र का उपयोग कर आसुरी शक्ति पर विजय प्राप्त कर समाज में धर्म की होने वाली हानि को रोका जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दिन याद किये जाने वाले दो मुख्य पात्रों में एक लोकनायक भगवान श्रीराम हैं, तो दूसरे है असुरों के राजा लंकेश यानी रावण। जहां एक ओर भगवान श्रीराम साक्षात् मर्यादा पुरुषोत्तम की प्रतिमूर्ति, सत्य-संयम-शांति, प्रेम व त्याग के अनुपम उदाहरण व मानव से महामानव बनने के लिए साधना व साहस के द्योतक हैं, तो दूसरी ओर रावण दंभ-ईर्ष्या, आत्मकेंद्रित, आत्ममुग्धता, भौतिक उद्दंडता, अभद्रता व अत्याचार का प्रतीक है। भगवान श्रीराम के इन तमाम दैवीगुणों के कारण उन्हें समाज में विशिष्ट स्थान ही नहीं मिला बल्कि संपूर्ण सांसारिक जगत को उनके आगे नतमस्तक होकर उनका गुणगान करने के लिए बाध्य भी होना पड़ा। वहीं असुर प्रवृत्ति के पोषक व पक्षधर रावण को भगवान राम के हाथों मरकर मृत्युलोक को प्राप्त होना पड़ा। दरअसल, श्रीराम द्वारा ये केवल रावण का मर्दन मात्र नहीं था बल्कि काम, क्रोध, लोभ, मोह, मद, मत्सर, अहंकार, आलस्य, हिंसा व चोरी जैसे इन दस शैतानों का संहार था, जिसने रावण की बुद्धि को भ्रष्ट कर दिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">आज हमारे समाज में राम और रावण दोनों विद्यमान है। ये सही है कि बदलते दौर में रावण का रूप जरूर बदल चुका है।<br />
आज यह रावण हमारे बीच जातिवाद, महंगाई, अलगाववाद, बेरोजगारी व भ्रष्टाचार के रूप में मौजूद है। सच तो यह है कि हम हर साल रावण, कुंभकर्ण व मेघनाद के पुतलों का दहन कर व आतिशबाजी के शोर में मशगूल होकर पर्व के वास्तविक संदेश को गौण कर देते हैं। आज के संदर्भ में रावण के कागज के पुतले को फूंकने की आवश्यकता नहीं है बल्कि हमारे मन में बैठे उस रावण को मारने की जरूरत है, जो दूसरों की प्रसन्नता देखकर ईर्ष्या की अग्नि से दहक उठता है, हमारी उस दृष्टि में रचे-बसे रावण का संहार जरूरी है, जो रोज ना जाने कितनी स्त्रियों व बेटियों की अस्मत के साथ खेलता है, हमारी सोच में बैठे उस व्यभिचारी रावण को धराशायी की अत्यन्त आवश्यकता है जो जिस्म की तृष्णा में मर्यादा की लक्ष्मण रेखा को लांघने पर उद्यत होता है। हमें केवल नवरात्रि के नौ दिनों तक बेटियों को देवी मानकर उनकी पूजा करने का ढोंग नहीं करना होगा बल्कि समाज व देश में उस विचारधारा को प्रोत्साहन प्रदान करना होगा जो बेटियों के प्रति पनप रहे भेदभाव व असमानता का अंत कर उनको हर दिन गौरव व गरिमा अहसास कराएं। साथ ही, हमें इस दिन पर राष्ट्र सेवा का प्रण लेने की आवश्यकता है। रावण की तरह जब कभी राष्ट्र की अस्मिता पर संकट के मेघ घिरने लगेंगे तो हम राम की भांति ध्येय साधना के पथ पर अटल रहकर सात्विकता, आत्मीयता, निर्भीकता, अदम्य साहस व शौर्य का परिचय देकर देश की एकता, अखंडता, नैतिकता तथा चारित्रिक सौम्यता की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध रहेंगे।<strong><em> देवेन्द्रराज सुथार</em></strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Oct 2018 12:34:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> सामने आया सर्जिकल स्ट्राइक का सच, वीडियो आया सामने</title>
                                    <description><![CDATA[भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 29 सितंबर 2016 को की थी सर्जिकल स्ट्राइक The truth of Surgical Strike , The video Came Front नई दिल्ली।(एजेंसी)। पाकिस्तान के खिलाफ हुई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद इस मुद्दे को लेकर जमकर सियासत हुई थी। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल दागते हुए सेना पर भी सवालिया निशान लगा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-truth-of-surgical-strike-the-video-came-in-front-10-0-0-122-1245/article-4545"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/pak-4.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li>
<h2>भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 29 सितंबर 2016 को की थी सर्जिकल स्ट्राइक</h2>
</li>
<li>
<h2>The truth of Surgical Strike , The video Came Front</h2>
</li>
</ul>
<p><strong>नई दिल्ली।(एजेंसी)। </strong>पाकिस्तान के खिलाफ हुई सर्जिकल स्ट्राइक के बाद इस मुद्दे को लेकर जमकर सियासत हुई थी। विपक्ष ने केंद्र सरकार पर तीखे सवाल दागते हुए सेना पर भी सवालिया निशान लगा दिए थे। लेकिन अब इन्ही सवालों के जवाब में एक वीडियो सामने आया है जो भारतीय सेना के शौर्य पर सवाल खड़ा करने वालों के लिए मुंहतोड़ जवाब है (The truth of Surgical Strike , The video Came Front)। वीडियो सामने आने के बाद अब यह साफ हो गया है कि उड़ी में सेना के कैंप पर हुए आतंकी हमले के बाद भारतीय फौज ने आतंकियों के ठिकानों को तबाह करने के साथ पाकिस्तान को कड़ा संदेश दिया था। भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ 29 सितंबर 2016 को बड़ा एक्शन लेते हुए सर्जिकल स्ट्राइक की थी।</p>
<h2>चार टारगेट बनाए गए थे <strong>। </strong>The truth of Surgical Strike , The video Came Front</h2>
<p>सर्जिकल स्ट्राइक के 636 दिनों के बाद अब एक वीडियो भी सामने आया है। जिसमें साफ देखा जा सकता है कि भारत ने पाकिस्तान के उसी के घर में घुसकर सबक सिखाया था। सर्जिकल स्ट्राइक को दो टीमों ने अंजाम दिया था, इस ऑपरेशन में पाकिस्तान स्थित कई लॉन्चिंग पैड को ध्वस्त कर दिया गया था। भारत की तरफ से चार टारगेट बनाए गए थे, इस पूरे स्ट्राइक का वीडियो UAV &amp; HEAD MOUNTED CAMS से कैद की गई थी।</p>
<h2>दिखाई दे रहे हैं पाक टेरर कैंप <strong>। </strong>The truth of Surgical Strike , The video Came Front</h2>
<p>टारगेट 3 में पाक टेरर कैंप दिखाई दे रहे हैं। UAV में ये सभी घटनाक्रम कैद हुई है। तीसरे टारगेट में साफतौर पर चार आतंकी दिखाई दे रहे हैं, जो अपने बंकरों के बाहर खड़े हैं। सभी आतंकी PoK से कुछ ही किलोमिटर दूर लॉन्चिंग पैड में थे। कैमरे में साफतौर पर एक धमाका होता हुआ दिखाई दे रहा है, जिसके बाद घुएं का गुबार उठता नजर आ रहा है।</p>
<h2>धमाके के बाद तबाही का मंजर <strong>। </strong>The truth of Surgical Strike , The video Came Fron</h2>
<p>धमाके के बाद तबाही का मंजर नजर आ रहा है। 18 सितंबर को पाकिस्तान की तरफ से हुए आतंकी हमले में भारत के 19 जवान शहीद हो गए थे, जिसके बाद भारत ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए सर्जिकल स्ट्राइक को अंजाम दिया था। भारत के द्वारा की गई सर्जिकल स्टाइक में पाकिस्तान के 38 आतंकवादी मारे गए थे।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 Jun 2018 21:05:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सच के साथ खड़े लोग नहीं हैं गुंडे</title>
                                    <description><![CDATA[हाय मेरी वैन जल गई, मेरी वैन, हाय-हाय चीखकर 25 अगस्त व 26 अगस्त को अपने आपको मीडिया की शक्ल में पेश कर रहे कुछ लोगों ने दो-तीन दिन तक पूरे देश व समाज को मूर्ख बनाने की हजारों-हजार कोशिशें की हैं। इतना ही नहीं इस कांव-कांव में एक-एक कर और भी बहुत से लोग […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/people-standing-with-truth-are-not-goons/article-3316"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-09/dera-followers.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">हाय मेरी वैन जल गई, मेरी वैन, हाय-हाय चीखकर 25 अगस्त व 26 अगस्त को अपने आपको मीडिया की शक्ल में पेश कर रहे कुछ लोगों ने दो-तीन दिन तक पूरे देश व समाज को मूर्ख बनाने की हजारों-हजार कोशिशें की हैं। इतना ही नहीं इस कांव-कांव में एक-एक कर और भी बहुत से लोग भी शामिल हो गए, जिनमें कोई कह रहा था हाय मेरी बाजू टूट गई, मेरा कैमरा टूट गया, मेरी स्कूटी वगैरह-वगैरह। जो सब पैसा कमाने व झूठ फैलाने के लिए ज्यादा किया गया। लेकिन असलियत कुछ और है।</p>
<p style="text-align:justify;">जो कि झूठे व मक्कार लोगों ने समाज को नहीं बतायी नहीं दिखायी, जबकि अगर वह तटस्थ रहते तो बता सकते थे। 25 अगस्त को पंचकूला में एक फैसला हो रहा था। जहां एक तरफ झूठ से गढ़ी गई कहानियां थी, वहीं दूसरी ओर लाखों-करोड़ों लोगों व उनका इस समाज में किया गया वर्षों-वर्ष का काम था, जो कि जीता जागता सच था। जो इंतजार में था कि झूठ व सच की लड़ाई में न्याय की देवी आज इंसाफ कर रही है, जरूर सच जीतेगा। अफसोस न्याय की देवी से भूल हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">झूठ व सच की लड़ाई में न्याय की तलवार ने सच का वध कर दिया। फिर जो नून-तेल बिकवा कर भी पैसा कमाने की जुगत में लगे रहते हैं उन्होंने शोर मचा दिया कि देखो, उनका हेलमेट फोड़ दिया, उनकी वैन जल गई, गुंडे-गुंडे-गुंडे ताकि उनके चैनल की थोड़ी टीआरपी बढ़े, और अच्छी खासी दिहाड़ी उनके चैनल को बन जाए, जिसके लिए कि प्रतिदिन वह अपने घर से निकलते हैं। जो हुआ वह पूरी दुनिया देखा कि कैसे सच के पक्ष में खड़े लोगों को बिना उनकी उम्र देखे सुरक्षा बल कहे जाने वालों ने गोलियां मार दी।</p>
<p style="text-align:justify;">गोली का शिकार होने वालों में कुछ लोग 60 पार के बुजुर्ग थे व कुछ 16 साल से कम उम्र वाले नाबालिग थे। शोर मचाने वालों को पता होना चाहिए कि सच की राह पर लोगों की जाने जाती हैं और वह उफ् भी नहीं करते। दुनिया को बता देना चाहता हूं कि मीडिया में घुसे कुछ चाट-पकोड़ी के भूखो, चमचो, लंपटो, पैसे के लिए बिक जाने वालो, सच को कुचलने का जितना चाहे प्रयास कर लो, लेकिन वह दबने व मिटने वाला नहीं। क्योंकि सच कचरे के ढेर से बच्चियों को उठाकर उनके मुंह में दूध की बूंदें डालता है, जहां लोग रिश्ते-नाते नकार कर हवस पूरी करते हैं वहां से बच्चियों को निकाल कर उन्हें बेटी का रिश्ता देता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सच तो इतना विनम्र व आत्मीय है कि वह आप लोगों की टट्टी से बंद हुई नालिया-नाले भी खोलता है। जिसे साफ करने के लिए आपके चुने हुए विधायक व मंत्री चिरौरी करते हैं कि हम हग-मूत बैठे अब हमारे शहर गंदगी में बिलबिला रहे हैं, हो सको तो साफ कर दो। फिर भी सच के साथ खड़े इन लोगों को टूटी वैन वालों ने घंटों तक गुंडे दिखाया। जबकि सच के लिए मरने वाले बुजुर्गों ने पता नहीं कितनी विधवाओं के घरों को र्इंट-गारे से अपना पसीना सींचकर बनाया है। वहीं हजारों लोगों को पानी व भोजन देने वाले बच्चे जो एक-एक कर 25 अगस्त को पंचकूला की मोर्चरी में पहुंचाए गए वह भी गुंडे नहीं थे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/people-standing-with-truth-are-not-goons/article-3316</link>
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                <pubDate>Fri, 01 Sep 2017 01:00:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोसूल पर जीत सच्चाई की जीत</title>
                                    <description><![CDATA[आखिर तीन वर्ष के बाद अमेरिका व अन्य शक्तिशाली देशों के सहयोग से ईराक सेना ने आईएसआईएस के कब्जे से मोसूल को जीत लिया है। तीन वर्ष तक मोसूल ने अपने बदन पर बहुत कहर झेला है। हजारों लोगों की जानें गई। तबाही के बाद भी मोसूल की आजादी पर वहां के लोगों के चेहरे […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/victory-on-mossul-victory-of-truth/article-2209"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/mosul1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आखिर तीन वर्ष के बाद अमेरिका व अन्य शक्तिशाली देशों के सहयोग से ईराक सेना ने आईएसआईएस के कब्जे से मोसूल को जीत लिया है। तीन वर्ष तक मोसूल ने अपने बदन पर बहुत कहर झेला है। हजारों लोगों की जानें गई।</p>
<p style="text-align:justify;">तबाही के बाद भी मोसूल की आजादी पर वहां के लोगों के चेहरे खिल उठे हैं। मोसूल वासियों की खुशी इस बात का प्रमाण है कि लोग दु:खों को भुलाकर अमन-शांति से भरपूर खुशहाल जीवन जीने के लिए कितने ज्यादा व्याकुल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों की अमन-शान्ति से रहने की इच्छा ही आईएसआईएस की हार का बड़ा कारण बनी है। यह घटना चक्र पूरे विश्व के लिए एक प्रेरणा भी है कि आतंकवाद के जोरदार हमलों के बावजूद यदि आमजन, सरकार एवं सैन्य बलों में आजादी पाने की इच्छा शक्ति हो तो सच्चाई की ही जीत होती है। आईएसआईएस सिर्फ ईराक ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए गंभीर खतरा बन गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">नब्बे देशों के 20हजार से भी अधिक युवक आईएसआईएस में भर्ती हो गए थे। भारत में भी आईएसआईएस ने अपना जाल फैंला कर युवाओं को फंसाने की कोई कोशिशें की। आईएसआईएस की हार का बड़ा कारण इसके औरतों, बच्चों पर जुल्मों सितम भी बने।</p>
<p style="text-align:justify;">निर्दोष विदेशी नागरिकों के कत्ल करके उनके वीडियो जारी करना, औरतों का शारीरिक शोषण एवं उन्हें गुलाम बनाने की घिनौनी कारवाईयों को सच्चे मुस्लिमानों ने भी स्वीकार नहीं किया। आईएसआईएस ने अपने स्वार्थों एवं जुल्मो-सितम को जेहाद का रूप देना चाहा, जिसे इस्लाम धर्म के प्रतिनिधियों द्वारा बुरी तरह से नकार दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">अरब देश जो इस्लाम के सबसे बड़े संरक्षक राष्ट्र हैं, वह भी आईएसआईएस खिलाफ जंग के लिए डट गए। तीस से ज्यादा मुस्लिम राष्ट्रों ने आतंक के खिलाफ अपना संगठन खड़ा कर लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत-अमेरिका ने आतंक के खिलाफ प्रचार कर नैतिक व धार्मिक तौर पर मिलने वाली अन्जान मदद को रोका। मोसूल में जीत आतंकवाद के खिलाफ जंग का अंत नहीं है, बल्कि यह एक चरण पूरा होने जैसा ही है।</p>
<p style="text-align:justify;">आतंक अभी भी विश्व के कई हिस्सों को बर्बाद कर रहा है। आतंक का कोई एक रूप नहीं है, यह बहुत से चेहरे लगाए हुए है। आतंक पर पूरे विश्व को अपने दृष्टिकोण एक सामान करने होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन, रूस व अमेरिका जैसी बड़ी महां शक्तियों को दुनिया के अशांत हिस्सों में अपना समर्थन देने से पहले यह सुनिश्चत करना होगा कि यह राजनीतिक विरोधता के चलते किसी आतंकी या आतंकी संगठन का समर्थन नहीं करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि सीरिया, पाकिस्तान के सन्दर्भ में विश्व शक्तियों में मतभेद है। मोसूल से उन देशों को भी सीख लेनी चाहिए, जो आतंक का पोषण करते हैं। जीत सदैव सच्चाई की होती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Mon, 10 Jul 2017 23:33:00 +0530</pubDate>
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