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                <title>हरियाणा: तेज रफ्तार ट्रक ने कुचला बाईक, बच्ची समेत तीन की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[फतेहाबाद (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा में फतेहाबाद जिले के गांव हिजरावां खुर्द में मंगलवार सुबह एक तेज रफ्तार ट्रक ने एक बाईक को कुचल दिया जिसमें एक पांच वर्षीय बच्ची, एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार पंजाब के करंडी के निवासी महेंद्र (30) अपनी बहन निर्मला (35) और भांजी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/haryana-the-speeding-truck-has-killed-three-people-including-a-baby-bike-baby/article-9559"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-06/haryana-the-speeding-truck-has-killed-three-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>फतेहाबाद (सच कहूँ न्यूज)।</strong><br />
हरियाणा में फतेहाबाद जिले के गांव हिजरावां खुर्द में मंगलवार सुबह एक तेज रफ्तार ट्रक ने एक बाईक को कुचल दिया जिसमें एक पांच वर्षीय बच्ची, एक महिला समेत तीन लोगों की मौत हो गई। पुलिस के अनुसार पंजाब के करंडी के निवासी महेंद्र (30) अपनी बहन निर्मला (35) और भांजी पारूल को फतेहाबाद छोड़ने आ रहा था। गांव हिजरावां खुर्द के पास पीछे से आ रहे ट्रक ने उन्हें कुचल दिया। तीनों की मौके पर मौत हो गई। हादसे के बाद ड्राइवर और उसका साथी ट्रक में फरार होने लगे हालांकि लोगों ने पीछा करके करीब ट्रक चालक को पकड़ लिया पर उसका सहायक भागने में कामयाब रहा। पुलिस ने ट्रक चालक के खिलाफ मामला दर्ज किया है व जांच जारी है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jun 2019 21:24:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जॉनसन एंड जॉनसन बेबी शैंपू की बिक्री पर यूपी में रोक</title>
                                    <description><![CDATA[लखनऊ (एजेंसी)। मशहूर कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी शैंपू  (Johnson &amp; Johnson baby shampoo) Ban में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले रासायनिक तत्व फॉर्मेल्डिहाइड पाए जाने पर प्रदेश में इसकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण (एफएसडीए) की टीम ने बुधवार को कंपनी के लखनऊ स्थित सेंट्रल स्टोर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/johnson-and-johnson-baby-shampoo-sale-ban/article-8978"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-05/sampu.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>लखनऊ (एजेंसी)।</strong> मशहूर कंपनी जॉनसन एंड जॉनसन के बेबी शैंपू  (<strong>Johnson &amp; Johnson baby shampoo)</strong> Ban में सेहत को नुकसान पहुंचाने वाले रासायनिक तत्व फॉर्मेल्डिहाइड पाए जाने पर प्रदेश में इसकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि नियंत्रण (एफएसडीए) की टीम ने बुधवार को कंपनी के लखनऊ स्थित सेंट्रल स्टोर में छापा मारकर कंपनी के उत्पादों के सात और नमूने लिए हैं। बृहस्पतिवार से पूरे प्रदेश में कंपनी के उत्पादों की जांच की जाएगी।</p>
<p>एफएसडीए के औषधि नियंत्रक एके जैन ने बताया कि जयपुर में बैच नंबर बीबी-58204 के बेबी शैंपू के नमूने में फॉर्मेल्डिहाइड पाया गया था। जयपुर को यह शैंपू कंपनी के लखनऊ स्थित स्टोर से ही सप्लाई किया गया था। इस विशेष बैच के उत्पाद बाजार से कंपनी को वापस लेना है। लखनऊ स्टोर में पड़ताल के दौरान पता चला कि बीबी-58204 बैच के 100 मिलीलीटर के शैंपू के 16,704 पैक बलरामपुर, कानपुर, आजमगढ़, वाराणसी, बाराबंकी, फैजाबाद, प्रयागराज सहित पूरे यूपी में सप्लाई किए गए हैं। इनकी बिक्री पर रोक लगा दी गई है। टीम ने सेंट्रल स्टोर से शैंपू, बेबी ऑयल, मसाज ऑयल, मॉश्चराइजर, फेस क्रीम समेत सात नमूने लिए हैं। ये नमूने बड़े एवं छोटे पैक दोनों के लिए गए हैं। इन्हें जांच के लिए लैब भेजा जाएगा। वहां से रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।</p>
<h2>कितना नुकसानदेह है फार्मेल्डिहाइड</h2>
<p>एफएसडीए के सहायक आयुक्त रमाशंकर के मुताबिक फार्मेल्डिहाइड कार्बन यौगिक है। इससे त्वचा, स्वांस संबंधी बीमारियों के साथ ही कैंसर भी होने का खतरा रहता है। इसका प्रयोग खाद्य सामग्री और शरीर पर प्रयोग होने वाले उत्पादों में प्रतिबंधित किया गया है। शैंपू या तेल में इसके मिले होने से पसीना नहीं निकल पाता है। यह रोम छिद्रों को बंद करने के साथ ही त्वचा एवं आंतरिक कोशिकाएं को भी प्रभावित करता है।</p>
<h2>जिलाधिकारियों को लिखा जा रहा पत्र</h2>
<p>एफएसडीए के औषधि नियंत्रक एके जैन ने बताया कि, 29 अप्रैल को ही प्रदेश में जॉनसन एंड जॉनसन के उत्पाद की बिक्री पर रोक के आदेश जारी किए गए थे। 7 मई को बिक्री पर प्रतिबंध लगाने और विशेष बैच के उत्पादों को वापस लेने के लिए कंपनी से कहा गया था। सभी जिलों के डीएम को भी इस बारे में पत्र लिखा जा रहा है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 May 2019 08:46:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>20 फीसदी महिलाओं की शिशु जन्म के 24 घंटे में हो जाती है गोद सूनी</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार 55 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार जन्म के 24 घंटे के भीतर 20 प्रतिशत शिशुओं की होती है मौत हरियाणा की 55 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया की शिकार बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के बाद भी हरियाणा की स्थिति शर्मनाक सच कहूँ/संजय मेहरा गुरुग्राम। छोटा राज्य होने के चलते हरियाणा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार 55 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार</h2>
<ul>
<li><strong>जन्म के 24 घंटे के भीतर 20 प्रतिशत शिशुओं की होती है मौत </strong></li>
<li><strong>हरियाणा की 55 प्रतिशत महिलाएं एनीमिया की शिकार</strong></li>
<li><strong>बेहतर चिकित्सा सुविधाओं के बाद भी हरियाणा की स्थिति शर्मनाक</strong></li>
</ul>
<p><strong>सच कहूँ/संजय मेहरा</strong><br />
<strong>गुरुग्राम।</strong> छोटा राज्य होने के चलते हरियाणा में विकास का ढोल तो खूब पीटा जाता है, लेकिन यहां जन्म-मृत्यु दर के आंकड़ों पर जब नजर डाली जाए तो पता चलता है कि हम इस विकास की आंधी में अपनी महिलाओं को मातृत्व सुख देने की बजाय बहुत बड़ा दुख दे रहे हैं। यानी यहां पर मां बनने वाली 20 प्रतिशत महिलाओं की गोद बच्चे के जन्म के मात्र 24 घंटे के भीतर ही सूनी हो जाती है। पोषण की कमी से उनके कलेज के टुकड़़े उनसे छिन जाते हैं।</p>
<p>हरियाणा में नवजात शिशुओं की मृत्यु के एक-तिहाई से भी अधिक मामलों में मां की पोषण की कमी जिम्मेदार है। हरियाणा न्यू बोर्न एक्शन प्लान (एचएनएपी) के अनुसार गर्भवती मां को होने वाली पोषण की कमी राज्य में नवजात बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण है। इसमें वे मामले भी शामिल हैं, जिनमें जन्म से पहले ही बच्चे की मौत हो जाती है। राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के आंकड़ों के अनुसार करीब 55 फीसदी महिलाएं एनीमिया की शिकार हैं।</p>
<h2>60 प्रतिशत बच्चों की मौत जन्म के पहले दिन ही हो जाती है</h2>
<p>करीब 20 प्रतिशत मृत्यु के मामले जन्म के बाद 24 घंटों के भीतर घटित होते हैं। तब जच्चा-बच्चा घर पर होते हैं। उन सभी बच्चों में से जिनकी मौत जीवन के पहले महीने में ही हो जाती है, करीब 80 प्रतिशत जीवन के पहले सप्ताह में ही मर जाते हैं। रिपोर्ट के अनुसार पहले महीने होने वाली मौतों में से करीब 60 प्रतिशत बच्चों की मौत जन्म के पहले दिन ही हो जाती है। ऐसी स्थिति प्राइवेट और सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों के मामले में भी दिखाई देती है। करीब 20 प्रतिशत नवजातों की मृत्यु जन्म के पहले 24 घंटों के भीतर उनके घर पर होती है।</p>
<h2>तय समय से पहले जच्चा-बच्चा को दे देते हैं छुट्टी</h2>
<p>यहां पारस अस्पताल में एचओडी-पीडियाट्रिक्स एंड नियोनेटोलॉजी डॉ. मनीष मनन कहते हैं कि हरियाणा में संस्थानिक डिलिवरी दर करीब 90 प्रतिशत है। मगर नवजात मृत्यु दर (आईएमआर) के मामले में अन्य राज्यों की तुलना में राज्य की स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी है। इस कारण से अस्पतालों से जच्चा-बच्चा को आॅब्जर्वेशन की तय समय सीमा से पहले ही छुट्टी दे दी जाती है। जबकि उनकी सेहत पर नजर रखने के लिए उन्हें अस्पताल में रखना जरूरी होता है। क्योंकि इस दौरान नवजात में किसी भी तरह की बीमारी आदि का पता चल जाता है। सभी संस्थानिक डिलिवरी के मामलों में 48 घंटे का आॅब्जर्वेशन पीरियड अनिवार्य किया जाना चाहिए।</p>
<h2>एमजीडीजी हासिल करना हो रहा है कठिन</h2>
<p>शिशुओं की इस तरह से मौतों के कारण संयुक्त राष्ट्र द्वारा तय मिलेनियम डेवेलपमेंट गोल (एमडीजी) को हासिल करना कठिन हो रहा है। भारत के राज्य स्तरीय बीमारियों के बोझ सम्बंधी रिपोर्ट के अनुसार 14 साल उम्र तक होने वाली मौतों में से 37.3 प्रतिशत मामलों में पोषण की कमी जिम्मेदार होती है। यदि हम राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण (एनएफएचएस-4) के आंकड़े देखें तो आज भी यह समस्या राज्य की आधी से ज्यादा महिलाओं में प्रभावी है। जागरूकता के मामले में हमें तुरंत ऐसे कदम उठाने की जरूरत है, जिनके जरिए उन सामाजिक दिक्कतों को दूर किया जा सके।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/baby-birthrate/article-7711</link>
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                <pubDate>Sat, 16 Feb 2019 17:10:13 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ये कै सी मां? मासूम को किया कुत्तों के हवाले</title>
                                    <description><![CDATA[धर्मनगरी में मर गई इंसानियत, गांव बारना में थैले में शिशु को डाल झाडियों में फेंका, कुत्तों ने नौंच-नौंच कर खा गए आधा शरीर दिल दहला देने वाली घटना से क्षेत्र में सनसनी, जांच में जुटी पुलिस सच कहूँ-देवीलाल बारना/कुरुक्षेत्र। इंसानियत किस हद तक मर सकती है, इस बात का अंदाजा उस मां से लगाया […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/put-the-baby-in-the-bag-in-the-village-barana-and-thrown-into-the-bushes/article-4200"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/baby.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">धर्मनगरी में मर गई इंसानियत, गांव बारना में थैले में शिशु को डाल झाडियों में फेंका, कुत्तों ने नौंच-नौंच कर खा गए आधा शरीर</h1>
<ul>
<li><strong>दिल दहला देने वाली घटना से क्षेत्र में सनसनी, जांच में जुटी पुलिस </strong></li>
</ul>
<p><strong>सच कहूँ-देवीलाल बारना/कुरुक्षेत्र। </strong></p>
<p style="text-align:justify;">इंसानियत किस हद तक मर सकती है, इस बात का अंदाजा उस मां से लगाया जा सकता है, जिसने बच्चे को 9 माह तक पेट में पाला और जन्म देते ही अपने से अलग कर कुत्तों के हवाले कर दिया। पता नहीं इस दौरान उस मां का ममता से भरा दिल धड़का होगा या नहीं, या फिर किस मजबूरी में उसने यह कदम उठाया, लेकिन जिसने भी यह कृत्य किया है वह माफी के नहीं सजा का हकदार है।</p>
<p style="text-align:justify;">जी हां, शुक्रवार को कुरुक्षेत्र जिले के गांव बारना में दिल दहला देने वाला मामला प्रकाश में आया है। मामले का पता चलते ही पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। हर कोई उस इन्सान को गाली दे रहा था, जिसने इस कृत्य को अंजाम दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के अनुसार शुक्रवार सुबह लगभग 8 बजे गांव सें बाहर बनी एक कॉलोनी के प्लॉट में जब ग्राम पंच रामफल व उसका बेटा बुग्गी झोटा से गोबर उतारने गया तो एक नवजात शिशु को पड़ा देख वह चौंक गया। कुत्ते शिशु को नौंच-नौंच कर खा रहे थे। उसने नजदीकी मकान में रह रहे गांव के पंच महेंद्र को इस बारे बताया। रामफल व महेंद्र ने सरपंच को सूचित किया व सरपंच ने पुलिस थाने में इसकी सूचना दी। इस दौरान सैंकडों ग्रामीण मौके पर पहुंच गए व लोगों ने शिशु को कुत्तों के कब्जे से छुड़वाया।</p>
<h1 style="text-align:center;">नवजात शिशु लड़का था या लड़की पता नहीं</h1>
<p style="text-align:justify;">सूचना मिलते ही फोरैंसिक टीम के सदस्य कृष्ण व ज्योतिसर पुलिस चौंकी इंचार्ज विनोद कुमार टीम सहित पहुंचे। पुलिस ने मृत शिशु को कब्जे में लिया व फोरैंसिक टीम सदस्य कृष्ण ने मौके से नमूने एकत्रित किए। पुलिस ने मौके से खून से लथपथ खाली थैले को भी कब्जे में लिया है। अंदाजा लगाया जा रहा है कि शिशु का रात को ही जन्म हुआ व जन्म होते ही उसे झाडियों में फैंक दिया। कुत्ते शिशु का पेट से नीचे का सारा हिस्सा व एक बाजू खा चुके थे। मुंह भी पूरी तरह से क्षति ग्रस्त था। अभी तक यह पता नहीं चल पाया है कि नवजात शिशु लड़का था या लड़की।</p>
<h1 style="text-align:center;">ग्रामीणों ने जताया शक</h1>
<p style="text-align:justify;">कुछ ग्रामीणों ने पुलिस के सामने एक ग्रामीण दंपत्ति पर शक जाहिर किया है। वहीं पुलिस पहले शिशु का डीएनए टैस्ट करवाएगी। इसके बाद आगे की कार्रवाई करेगी। पुलिस शनिवार सुबह मृत शिशु को रोहतक पीजीआई में पोस्टमार्टम के लिए लेकर जाएगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 16 Jun 2018 09:02:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एड्स पीड़िताएं भी दे सकेंगी शिशु को जन्म</title>
                                    <description><![CDATA[एआरटी नामक दवा से होगा संभव बीच में छोड़ने पर दवाई नहीं करेगी असर करनाल (सच कहूँ न्यूज)। स्वास्थय विभाग द्वारा जारी की गई ए.आर.टी. नामक दवाई के इस्तेमाल से एक तरफ जहां एड्स से ग्रस्त महिलाएं भी शिशू को जन्म दे सकेंगी। वहीं इसी दवा के इस्तेमाल से महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/aids-sufferers-can-also-give-birth/article-2235"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/hiv.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">एआरटी नामक दवा से होगा संभव</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>बीच में छोड़ने पर दवाई नहीं करेगी असर</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>करनाल (सच कहूँ न्यूज)।</strong> स्वास्थय विभाग द्वारा जारी की गई ए.आर.टी. नामक दवाई के इस्तेमाल से एक तरफ जहां एड्स से ग्रस्त महिलाएं भी शिशू को जन्म दे सकेंगी। वहीं इसी दवा के इस्तेमाल से महिलाओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ेगी। स्वास्थय विभाग द्वारा यह दवाई पूरे भारत में सप्लाई हो रही है।<br />
सीएमओ डा. योगेश शर्मा ने बताया कि एआरटी तीन दवाईयों का मिश्रण है। यह दवाई केवल उन्हें दी जाती है जिनकी सी.डी संख्या 350 से कम होती है। यह दवाई दिन में 2 बार लेनी होती है। यदि बीच में छोड़ दी जाए तो असर खत्म हो जाता है। ऐसे में मरीज को नए सिरे से दवाई शुरू करनी पड़ती है। सही उपचार और समय पर दवाई लेने से इस पर कंट्रोल किया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">दवाई के लगातार सेवन से बच्चा तो <a href="http://10.0.0.122:1245/tips-for-better-health/">स्वस्थ</a> पैदा होगा ही साथ में महिला में यह बीमारी कंट्रोल हो जाएगी आगे नहीं बढ़ेगी। इस दिशा में विभाग ने प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतलों में उपलब्ध करवा रहा है। विभाग द्वारा यह दवाईयां प्रदेश के सभी अस्पतालों में भेजी जा रही हैं। सी.एम.ओ योगेश शर्मा ने बताया कि अगर एड्सग्रस्त या एच.आई.वी. पॉजीटिव ए.आर.टी. दवाई नियमित लेगा तो यह बीमारी काबू पाने के साथ रोगों से लड़ने की क्षमता बढाऐगी। सी.डी.-4 की जांच करवा सकते हैं। यही नहीं डयूटी दे रहे काऊंसलर से होने वो बच्चे में एच.आई.वी. संक्रमण की भी जांच कर सकते हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2017 08:25:26 +0530</pubDate>
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