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                <title>World Population Day - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>World Population Day : जनसंख्या शिखर : उपलब्धि नहीं चुनौती</title>
                                    <description><![CDATA[World Population Day: चीन को पछाड़कर भारत जनसंख्या (Population) का सिरमौर देश बन गया है। ऐसी संभावनाएं पहले से ही जाहिर की जा रही थीं कि भारत जल्द ही चीन को जनसंख्या वृद्धि के मामले में पीछे छोड़ देगा पर यह संभावना 2028 के आसपास जाहिर की जा रही थी मगर भारत ने यह काम […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/population-peak-a-challenge-not-an-achievement/article-49843"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/india-population.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">World Population Day: चीन को पछाड़कर भारत जनसंख्या (Population) का सिरमौर देश बन गया है। ऐसी संभावनाएं पहले से ही जाहिर की जा रही थीं कि भारत जल्द ही चीन को जनसंख्या वृद्धि के मामले में पीछे छोड़ देगा पर यह संभावना 2028 के आसपास जाहिर की जा रही थी मगर भारत ने यह काम 2023 में ही कर दिया है। भारत में जनसंख्या का ग्राफ जिस तेजी से बढ़ा है वह हैरतअंगेज है और सुरसा की तरह बढ़ती हुई विशाल जनसंख्या ने हर उपलब्धि को बौना साबित कर दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जनसंख्या संबंधित समस्याओं पर वैश्विक चेतना जागृत करने के लिए प्रतिवर्ष 11 जुलाई को ‘विश्व जनसंख्या दिवस’ मनाया जाता है। भारत के संदर्भ में देखें तो तेजी से बढ़ती आबादी के कारण ही हम सभी तक शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी जरूरतों को पहुंचाने में पिछड़ रहे हैं। बढ़ती आबादी की वजह से ही देश में बेरोजगारी की समस्या विकराल हो चुकी है। अशिक्षा, गरीबी, रूढ़िवादिता, धार्मिक कट्टरता और अपने संप्रदाय विशेष को हावी करने की कुटिल इच्छा जैसे कारण हैं, जो जनसंख्या वृद्धि के साथ-साथ और भी चुनौतीपूर्ण होते जा रहे हैं। यह समस्या प्रत्येक भारतीय के हिस्से में आने वाली वस्तुओं को कम कर रहा है। World Population Day</p>
<p style="text-align:justify;">1947 में आजाद हुआ 36 करोड़ लोगों का देश महज 75 साल में ही 142.86 करोड़ जनसंख्या वाला दुनिया के सबसे बड़े जनसंख्या राष्ट्र में बदल गया। इन 75 सालों में भारत की जनसंख्या तीन गुना से भी ज्यादा बढ़ी है। जनसंख्या वृद्धि दर इतनी ऊंची है कि प्रतिवर्ष न्यूजीलैंड व आॅस्ट्रेलिया जैसे देशों की कुल जनसंख्या से भी ज्यादा लोग हमारी आबादी में जुड़ रहे हैं। स्वाभाविक रूप से सुरसा के मुख सी बढ़ती हुई जनसंख्या के लिए खाने, पहनने और रहने की समस्याएं भी विकराल रूप लेती गई।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय सरकारों में जनसंख्या नियंत्रण के उपायों को लागू करने के लिए जो प्रतिबद्धता चाहिए थी वह हर सरकार से गायब रही है। इसके पीछे सबसे बड़ी राजनीतिक मजबूरी थी देश के एक खास वर्ग का वोट पैकेज में तब्दील हो जाना। जब तक देश में कांग्रेस की सरकारें रही यह वोट पैकेज उसको सत्ता दिलाता रहा और इसी सत्ता के लालच ने जनसंख्या नियंत्रण कानून को अस्तित्व में आने से रोके रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां हिंदू धर्म के उच्च वर्गों में ‘हम दो हमारे दो’ के नारे से जन जागृति आई, वहीं डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा दिया गया नारा ‘बच्चा एक ही सही दो के बाद नहीं’ के सिद्धांत पर एक बहुत बड़ा वर्ग चल रहा है। इस वर्ग ने अपनी जनसंख्या की वृद्धि पर काफी हद तक नियंत्रण कर लिया है। हालांकि हिंदू समाज के भी निचले तबकों में अभी वह जागृति देखने को नहीं मिलती जो होनी चाहिए। अब समय आ गया है कि समय के साथ केंद्र एवं राज्य सरकारों को निष्पक्ष तरीके से ‘सबका साथ सबका विकास’ नारे को धरातल पर उतारते हुए, पूरी प्रतिबद्धता के साथ पूरे देश में जनसंख्या नियंत्रण कानून लागू कर ही देना चाहिए। World Population Day</p>
<p style="text-align:justify;">जनसंख्या नियंत्रण कानून के अंतर्गत इस प्रकार के प्रावधानों का होना आवश्यक हो कि एक सीमित संख्या तक ही परिवार बढ़ने पर लोगों को सब्सिडी, लोन या राशन आदि की सुविधा मिले। निर्धारित संख्या से ऊपर संतान उत्पत्ति पर प्रतिबंधात्मक प्रावधानों का होना जरूरी है। ऐसी नीति के क्रियान्वयन में धार्मिक एवं सामाजिक प्रतिरोध भी खड़ा किया सकता है अत: जनसंख्या नियंत्रण कानून को चरण दर चरण लागू करने की नीति अपनाई जा सकती है। जिस प्रकार से कई दूसरे देशों में संतान उत्पत्ति के नियम हैं उसी प्रकार से देश की परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए हमारी सरकारों को भी ऐसे प्रावधान अस्तित्व में लाने ही चाहिए। World Population Day</p>
<p style="text-align:justify;">जनसंख्या नियंत्रण प्रावधानों को लागू एवं क्रियान्वित करते समय सबसे अधिक जरूरी है अभिप्रेरक तरीके से जन जागरण अभियान चलाए जाएं। खास तौर पर कम शिक्षित या अशिक्षित एवं धार्मिक विचारों से अधिक प्रभावित होने वाले लोगों के लिए ऐसे ही धार्मिक संस्थानों की सहायता ली जा सकती है जो उन्हें बताएं कि संतान ईश्वर की देन तो है ही अपितु यह एक शारीरिक प्रजनन क्षमता का परिणाम भी है। Population</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों को समझाया जाए कि जितने अधिक बच्चे होंगे उसी अनुपात में उन्हें उतना ही कम खाना-पीना, पहनना एवं रहने का स्थान उपलब्ध हो पाएगा जिसके परिणाम स्वरूप वे हमेशा नीचे के पायदान पर ही रहेंगे और उनका जीवन स्तर भी निम्न श्रेणी का ही रहेगा। उन्हें यह भी समझाया जाए कि अधिक संख्या में बच्चे पैदा करना कोई सबाब का काम नहीं अपितु पाप का सबब है क्योंकि ऐसे जीव उत्पन्न करना जिनका हम सही तरीके से शिक्षण एवं पालन पोषण भी न कर पाए एक पाप ही है। विभिन्न पाठ्यक्रमों में भी जन वृद्धि के दुष्परिणाम एवं उन्हें रोकने की व्यवहारिक उपायों की जानकारी दी जानी जरूरी है। यह कार्य केवल सरकारी स्कूलों वह कॉलेजों में ही नहीं अपितु धार्मिक स्कूलों व महाविद्यालय में भी लागू किया जाए। World Population Day</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही साथ कम बच्चे पैदा करने वाले लोगों के लिए मुफ्त शिक्षा एवं अन्य सुविधाएं बढ़ाई जानी चाहिए इससे भी एक सकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। यदि सरकारों में प्रतिबद्धता हो तो बिजली, पानी जैसी आवश्यक आपूर्ति वाली वस्तुओं की दरें भी एकल परिवारों के सदस्यों की संख्या के आधार पर तय करने में भी कोई बुराई नहीं है। जनसंख्या नियंत्रण की ढुलमुल नीति और प्रतिबंधात्मक व नकारात्मक प्रेरणा देते उपायों से हम चीन को पछाड़कर जनसंख्या में सर्वोच्च स्थान पर तो आ गए पर चीन जैसी सख्त जनसंख्या नियंत्रण नीतियां हम कभी भी नहीं अपना सके। हमें जनसंख्या पर नियंत्रण करना ही होगा कैसे भी और किसी भी तकनीक से। अब उसके लिए चाहे जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाना पड़े या लोगों में जन जागरण करके एक चेतना लानी पड़े अथवा कुछ और करना पड़े। Population</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे भारत अभी भी युवाओं का देश है एवं यदि दूरगामी नीति के साथ चला जाए तो इस बढ़ती हुई जनसंख्या का उपयोग देश के विकास के लिए किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि कम से कम 2054 तक भारत बूढ़ो का देश नहीं होने जा रहा है। आज समय की मांग है कि देश की शिक्षा को दक्षता एवं प्रवीणता की शिक्षा बनाया जाए। स्कूलों में किताबी ज्ञान से अधिक तकनीकी एवं उत्पादकता का व्यवहारिक ज्ञान दिया जाए। बच्चों का स्कूल में बिताए जाने वाला कम से कम 50% समय उत्पादक कार्यों में लगाया जाना चाहिए। ज्यादा नहीं तो नवीं कक्षा के बाद इस प्रकार की शिक्षा होनी चाहिए कि बच्चे की शिक्षा का आंशिक खर्च उसके द्वारा बनाए गए उत्पादों से निकलना शुरू हो जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">12वीं एवं उसके बाद की शिक्षा के लिए प्रावधान होना चाहिए कि अपनी शिक्षा का खर्च शिक्षार्थी ही अपने उत्पादक कार्यों से पूरा करे। इसके लिए विद्यालय के भवनों को विस्तार देना होगा एवं उन्हें अपडेट करना होगा। हर महा विद्यालय एवं उच्च माध्यमिक विद्यालय में उत्पादक कक्षों का होना अनिवार्य किया जाना चाहिए जहां बच्चे दक्ष प्रशिक्षकों के निर्देशन में समय की मांग के अनुसार वस्तुओं का उत्पादन करें एवं विद्यालय में एक सेल एंड परचेज जैसा विभाग भी होना चाहिए जो कच्चे माल की आपूर्ति तथा बनाए गए माल की बिक्री की दक्षता पूर्वक व्यवस्था करे। जिस तरह निजी महाविद्यालयों एवं विश्वविद्यालयों को अनुमति दी जा रही हैं उन्हें कड़े मानकों द्वारा नियंत्रित करना बहुत जरूरी है अन्यथा ये संस्थान कागज के टुकड़ों के रूप में डिग्रियां बांटते रहेंगे और भारत का युवा बेरोजगार होकर सड़कों पर घूमता रहेगा। बेशक, जनसंख्या के शिखर पर पहुंचना उपलब्धि नहीं अपितु बहुत बड़ी चुनौती है और इससे निपटने के रास्ते हमें हर हाल में खोजने होंगे। World Population Day</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. घनश्याम बादल, वरिष्ठ लेखक एवं स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2023 15:09:21 +0530</pubDate>
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                <title>जनसंख्या के मामले में वर्ष 2023 तक चीन को भारत कर देगा पीछे: संयुक्त राष्ट्र</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में नवंबर तक भारत की जनसंख्या इस समय सबसे अधिक आबादी वाले चीन से अधिक हो जायेगी। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में नवंबर के मध्य तक विश्व की आबादी आठ अरब हो जायेगी और 2023 के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-will-overtake-china-in-terms-of-population-by-2023/article-35376"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/word-population.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2023 में नवंबर तक भारत की जनसंख्या इस समय सबसे अधिक आबादी वाले चीन से अधिक हो जायेगी। संयुक्त राष्ट्र के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2022 में नवंबर के मध्य तक विश्व की आबादी आठ अरब हो जायेगी और 2023 के दौरान आबादी के मामले में भारत चीन को पीछे छोड़कर विश्व का सबसे अधिक आबादी वाला देश बन जायेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्व में एशिया के दो प्रमुख देश चीन और भारत…प्रत्येक की आबादी 1.4 अरब से अधिक होगी। रिपोर्ट के अनुसार भारत की आबादी इस वर्ष के अंत तक 2022 में 1.412 अरब और चीन की 1.426 अरब होगी। इसमें कहा गया है कि भारत की जनसंख्या 2050 तक 1.668 अरब हो सकती है तथा चीन इस शताब्दी के मध्य तक 1.317 अरब की आबादी के साथ दुनिया का सबसे बड़ा देश होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">वर्ष 2080 तक विश्व की आबादी चरम पर होगी</h3>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र के आर्थिक एवं सामाजिक कल्याण विभाग के जनसंख्या प्रभाग द्वारा जारी इस रिपोर्ट के अनुसार विश्व की आबादी 15 नवंबर 2022 को आठ अरब का आंकड़ा छू सकती है। 1950 के बाद विश्व की आबादी में सबसे धीमी गति से वृद्धि हो रही है। 2020 में यह वृद्धि दर एक प्रतिशत से कम हो गयी है। रिपोर्ट में अनुमान लगाया गय है 2030 तक धरती पर 8.5 अरब और इस शताब्दी के मध्य तक 9.7 अरब मनुष्य होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2080 तक विश्व की आबादी चरम पर होगी और उस समय 10.4 अरब लोग इस धरती पर रह रहे होंगे और आबादी का यह स्तर 20 साल तक बना रहेगा। दुनिया में पूर्वी और दक्षिण पूर्वी एशिया आबादी की दृष्टि से सबसे अधिक आबादी वाले दो क्षेत्रों में से एक है। इस क्षेत्र की आबादी 2022 में 2.3 अरब आंकी गयी है। यह दुनिया की कुल आबादी का 29 प्रतिशत है। सबसे अधिक आबादी वाला क्षेत्र मध्य और दक्षिण एशिया का है जहां इस वर्ष आबादी 2.1 अरब तक पहुंच गयी है जो कुल वैश्विक आबादी का 26 प्रतिशत है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">इस समय विश्व की कुल आबादी करीब 7.95 अरब</h3>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2050 तक दुनिया की आबादी की व़द्धि में 50 प्रतिशत से अधिक योगदान केवल केवल आठ देशों कांगो, मिस्र, इथियोपिया,भारत, नाइजीरिया, पाकिस्तान फिलीपीन्स और तंजानिया का होगा। आबादी में वृद्धि की दर के हिसाब से वैश्विक सूची में देशों का स्थान ऊपर-नीचे होता रहेगा। रिपोर्ट में कहा गया है कि इस समय विश्व की कुल आबादी करीब 7.95 अरब है जिसमें 65 प्रतिशत लोग 15 से 64 वर्ष के हैं जबकि 65 वर्ष से ऊपर की आयु वाले लोगों की संख्या 10 प्रतिशत है। चौदह वर्ष से कम उम्र के लोग 25 प्रतिशत हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार भारत समेत 10 देशों में 2010 से 2021 की अवधि में देश से बाहर जाने वाले आव्रजकों की संख्या देश के अंदर आने वालों से आव्रजकों से 10-10 लाख से अधिक थी। भारत में इस दौरान शुद्ध रूप से 35 लाख लोग आव्रजन करके देश से बाहर गये। इसी तरह पाकिस्तान से 16.5 लाख, बंगलादेश से 29 लाख, नेपाल से 16 लाख और श्रीलंका से 10 आव्रजक शुद्ध रूप से बाहर गये। सऊदी अरब, (46 लाख) वेनेजुएला, बोलिविया और म्यांमार से भी शुद्ध रूप से 10 लाख से ज्यादा लोग आव्रजन के जरिए बाहर गये।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के अनुसार जन्म के समय विश्व की औसत जीवन प्रत्याशा 2019 में बढ़कर 72.8 वर्ष पर पहुंच गयी, यह 1990 की तुलना में करीब-करीब 9 साल की वृद्धि है। मृत्यु दर घटने से 2050 तक जीवन प्रत्याशा 77.2 वर्ष तक पहुंचने का अनुमान है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि 2021 में अल्पविकसित देशों में जन्म के समय व्यक्ति की जीवनकाल की प्रत्याशा विश्व औसत से करीब सात साल कम रही।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 11 Jul 2022 17:10:27 +0530</pubDate>
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                <title>साधारण जीवन जीकर बनें पर्यावरण-प्रहरी</title>
                                    <description><![CDATA[न केवल भारत में, अपितु सम्पूर्ण धरा पर आज के भौतिकतावाद के युग में प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनकर उभर रही है। प्रदूषण में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और भू-प्रदूषण आदि अनेक प्रकार के प्रदूषण संलिप्त हैं। इन सभी प्रकार के प्रदूषण को फैलाने में मानव जाति का बड़ा हाथ है। मानव जहां […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hindi-article-on-world-population/article-2246"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/world-day-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">न केवल भारत में, अपितु सम्पूर्ण धरा पर आज के भौतिकतावाद के युग में प्रदूषण एक गंभीर समस्या बनकर उभर रही है। प्रदूषण में वायु प्रदूषण, जल प्रदूषण, ध्वनि प्रदूषण और भू-प्रदूषण आदि अनेक प्रकार के प्रदूषण संलिप्त हैं। इन सभी प्रकार के प्रदूषण को फैलाने में मानव जाति का बड़ा हाथ है।</p>
<p style="text-align:justify;">मानव जहां आज के भागदौड़ के समय में मशीन बनकर रह गया है। उसके जीवन का लक्ष्य केवल और केवल पैसा और भौतिकतावाद तक सीमित रह गया है, वहीं दूसरी ओर उसके द्वारा किये गए कार्य पर्यावरण को कहीं न कही क्षति पहुंचा रहे हैं। यही मानव अपने लाभ के लिए वन काटकर अपने आवास बना रहा है, लकड़ियों का व्यापार कर रहा है और नए-नए उद्योग स्थापित करके कहीं न कहीं पर्यावरण को दूषित कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">सड़कों पर दौड़ने वाली गाड़ियों की संख्या ने व उनसे निकलने वाले विषैले धुंए ने लोगों का जीना दूभर कर दिया है। बढ़ रहे प्रदूषण के लिए प्रत्येक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति पर दोषारोपण कर रहा है। अपने द्वारा किये गए कृत्य उसे नजर नहीं आ रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोग और संस्थाएं पर्यावरण संरक्षण के लिए निरंतर पौधे रोपित कर रहे हैं और उनकी देखभाल भी करते हैं, लेकिन खेद के साथ यह कहना गलत नहीं होगा कि कुछ लोग और संस्थाएं पौधे रोपित करके केवल फोटो खिंचवाकर उन पौधों को भूल जाते हैं। परिणामस्वरूप वे पौधे देखभाल की कमी के कारण मर जाते हैं। इस सबसे छुटकारा पाने के लिए लिए हमें जागरूक होना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">फोटो खिंचवाकर समाचार पत्रों में देने का भाव और अधिक लोगों को जागरूक करने का होना चाहिए। फिर भी ऐसे लोग समाज को कुछ न कुछ तो दे ही रहे हैं। इसके विपरीत उन लोगों का क्या करें, जो लोग फल-फूल चुके पौधों को जड़ से उखाड़ देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी तरफ मानवता भलाई कार्यों के लिए विश्व प्रसिद्ध सामाजिक संस्था डेरा सच्चा सौदा का पौधारोपण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान है। प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त के दिन यहां के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां के पावन अवतार दिवस के उपलक्ष्य में यहां के अनुयायी विश्व भर में पौधारोपण करते हैं। इसके अलावा भी समय-समय पर श्रद्धालुगण पौधारोपण ही नहीं करते, बल्कि उनकी सार-संभाल भी करते हैं। पौधारोपण के क्षेत्र में डेरा सच्चा सौदा का नाम गिनीज बुक आॅफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में भी दर्ज किया जा चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके अलावा पिछले दिनों हरियाणा ग्रन्थ अकादमी पंचकूला, प्रेरणा संस्था एवं प्रेरणा समिति हरियाणा द्वारा कुरुक्षेत्र के मल्टी आर्ट कल्चर के सभागार में पर्यावरण संरक्षण पर एक संगोष्ठी आयोजित की गई, जिसमें हरियाणा प्रदेश के कई शहरों से पर्यावरणविद पधारे। उसमें हरियाणा ग्रन्थ अकादमी के निदेशक डॉ. विजय दत्त शर्मा ने कहा कि यदि हम पर्यावरण मित्र बनना चाहते हैं, तो सबसे पहले अपने जीवन को जितना अधिक हो सके, साधारण तरीके से यापन करना शुरू कर दें।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके पीछे के तथ्यों से अवगत कराते हुए उन्होंने आगे कहा कि जो भी प्रसाधन हम अपने शरीर की साज-सज्जा के लिए प्रयुक्त करते हैं, वे कहीं न कहीं पर्यावरण को दूषित करते हैं। जो एयर कंडीशन बिजली से चलता है और उस बिजली के बनने में भी प्रदूषण होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस उद्योग से हमारे लिए कपड़ा बनता है, उससे भी प्रदूषण होता है। इतना ही नहीं, हम अपने शरीर को सुन्दर बनाने के लिए जो भी सामग्री प्रयोग में लाते हैं, उनके बनने में भी प्रदूषण बढ़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि हम अपने बाल काले करने के लिए जो मेहंदी या कलर लगाते हैं, उसके तैयार होने से भी प्रदूषण बढ़ रहा है। लेकिन हम ये नहीं कहते कि आप वस्तुओं का प्रयोग न करें, बल्कि जितना हो सके जीवन को साधारण ढंग से जिएं।</p>
<p style="text-align:justify;">जितना आपका जीवन सादा होगा, उतने अधिक आप पर्यावरण मित्र होंगे। भाव यह है कि सादा जीवन जी कर, गाड़ियों के स्थान पर साइकिल का प्रयोग करके, अधिक पौधे रोपित कर उनकी संभाल करके हम पर्यावरण के प्रहरी बन सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-डॉ. अशोक कुमार वर्मा इन्सां</strong></p>
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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2017 23:53:59 +0530</pubDate>
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