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                <title>pneumonia - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>कोविड-19 महामारी के दौर में निमोनिया से रहें बचकर</title>
                                    <description><![CDATA[(Pneumonia) नई दिल्ली। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के साथ-साथ अब ठंड और प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन सब कारणों से निमोनिया से ग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। सर्दी के मौसम में वैसे भी बच्चों से लेकर वृद्ध तक किसी को भी निमोनिया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/survive-from-pneumonia-during-the-covid-19-pandemic-period/article-19833"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/survive-from-pneumonia-during-the-covid-19-pandemic-period.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>(Pneumonia)</strong></h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली</strong>। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस (कोविड-19) के साथ-साथ अब ठंड और प्रदूषण से जुड़ी बीमारियों का प्रकोप बढ़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि इन सब कारणों से निमोनिया से ग्रस्त होने का खतरा बढ़ गया है। सर्दी के मौसम में वैसे भी बच्चों से लेकर वृद्ध तक किसी को भी निमोनिया हो जाता है लेकिन कोविड-19 महामारी के प्रकोप के कारण निमोनिया का खतरा अधिक बढ़ गया है। लोगों को निमोनिया के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से 12 नवम्बर को विश्व निमोनिया दिवस मनाया जाता है। सबसे पहले इस दिन को मनाने की शुरूआत संयुक्त राष्ट्र द्वारा 12 नवंबर 2009 को हुई जिसका उद्देश्य विश्वभर में लोगों के बीच निमोनिया के प्रति जागरूकता फैलाना था।</p>
<p style="text-align:justify;">निमोनिया आज के समय में एक आम बीमारी बन गई है। हालांकि पूरी दुनिया में आज भी बच्चों के मौत का सबसे प्रमुख कारण यही बीमारी है। स्ट्रेप्टोकॉकस निमोनिया नामक बैक्टीरिया इस बीमारी का प्रमुख कारण है। यह बैक्टीरिया फेफड़ों को संक्रमित कर श्वसन प्रणाली को प्रभावित कर देता है। कोरोना वायरस की तरह निमोनिया के रोगाणु वैसे समय आप पर हमला करते हैं जब आपका प्रतिरोधक क्षमता (इम्यून सिस्टम) कमजोर होता है। निमोनिया एक जानलेवा बीमारी है इसलिए जब भी आपको इसके लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर से परामर्श लें। सर्दी जुखाम के लक्षणों से मिलते-जुलते इसके लक्षणों को कई बार पहचान करना मुश्किल हो जाता है। कोविड-19 महामारी के समय में स्थिति और भी गंभीर हो गई है।</p>
<h4><strong>निमोनिया के लक्षण</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मैक्स हॉस्पिटल के पल्मोनोलॉजिस्ट डॉ. अंकित भाटिया के अनुसार..</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">अचानक तेज बुखार के साथ छाती में दर्द</li>
<li style="text-align:justify;">पसीना और अधिक पेशाब आना, सिरदर्द ।</li>
<li style="text-align:justify;">प्यास अधिक लगना।</li>
<li style="text-align:justify;">चेहरा, मुंह तथा नेत्र लाल होना।</li>
<li style="text-align:justify;">सूखी खांसी आना, सांस लेने की गति बढ़ जाना, बलगम के साथ खून आना।</li>
<li style="text-align:justify;">पीठ के बल लेटने में कष्ट बढ़ना।</li>
<li style="text-align:justify;">फेफड़ों में सूजन आना, नाड़ी की गति बढ़ना।</li>
<li><span style="text-align:justify;">भूख कम लगने से कमजोरी आदि ।</span></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">ठंड और बदलते मौसम के कारण निमोनिया होने का खतर बढ़ जाता है। निमोनिया से बचाव और उपचार हमारे खान-पान से भी जुड़ा हुआ है। अगर इस बीमारी में खानपान को लेकर सतर्क रहा जाए तो इसको काफी हद तक रोका जा सकता है।</p>
<h4>65 साल से अधिक के बुजुर्गों व कम उम्र के बच्चों में निमोनिया का खतरा ज्यादा</h4>
<p style="text-align:justify;">नई दिल्ली के फोर्टिस एस्कार्ट्स हार्ट रिसर्च इंस्टिट्यूट के न्यूरोसर्जरी के निदेशक डॉ. राहुल गुप्ता के अनुसार 65 साल के अधिक के बुजुर्गों, मधुमेह, कैंसर या फेफड़े को प्रभावित करने वाली पुरानी बीमारी, किडनी, लिवर के रोगियों, धूमपान करने वालों तथा 12 महीने से कम उम्र के बच्चों में निमोनिया का ज्यादा खतरा होता है।  निमोनिया से होने वाली मौतों में रोगियों की उम्र खतरे का एक बड़ा कारक माना जाता है। उम्रदराज लोगों में निमोनिया से गंभीर खतरा होता है। क्योंकि बढ़ती उम्र के साथ लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता प्राकृतिक तौर पर कमजोर होती जाती है। हालांकि अब निमोनिया के लिए हमारे पास अच्छे इलाज हैं।</p>
<h4>मस्तिष्क और हृदय को भी नुकसान</h4>
<p style="text-align:justify;">डॉ. राहुल गुप्ता बताते हैं कि निमोनिया के जीवाणु मस्तिष्क और हृदय को भी नुकसान पहुंचा सकते हैं। ताजे अध्ययनों से पता चला है कि स्ट्रेप्टोकोकस निमानिया बैक्टीरिया रक्त प्रवाह में घुस सकते हैं और उसके बाद ये मस्तिष्क एवं हृदय में पहुंच जाते हैं जिसके कारण मस्तिष्क एवं हृदय की कार्य क्षमता प्रभावित हो सकती है। इसके अलावा यह मस्तिष्क एवं रीढ़ की हड्डी (स्पाइनल कॉर्ड) की चारों तरफ की परत में सूजन (मेनिनजाइटिस) पैदा कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. भाटिया कहते हैं कि निमोनिया को लोग आमतौर पर साधारण स्वास्थ्य समस्या मानते हैं, लेकिन यह समस्या इतनी भी साधारण नहीं है। अगर इसका समय रहते सही तरह से इलाज ना किया जाए तो व्यक्ति की जान पर भी बन आती है। निमोनिया होने पर हमारे फेफड़े संक्रमित हो जाते हैं और इससे श्वसन प्रणाली प्रभावित होते हैं। इस संक्रमण में एक या दोनों फेफड़ों के वायु के थैलों में द्रव या मवाद भर जाता है और सूजन आ जाती है, जिससे बलगम या मवाद वाली खांसी, बुखार, ठंड लगने और सांस लेने में तकलीफ होने जैसी समस्या हो सकती है।</p>
<h4>निमोनिया से बचाव</h4>
<p style="text-align:justify;">इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के इंटरनल मेडिसिन के विशेषज्ञ डॉ. राकेश कुमार बताते हैं कि निमोनिया होने पर आरंभिक चरण में एंटीबायोटिक दवाइयां दी जाती है। निमोनिया से बचाव सबसे महत्वपूर्ण है और इसलिए बच्चों तथा 65 वर्ष से अधिक आयु के व्यक्तियों को निमोनिया का टीका लगाना चाहिए। इसके अलावा प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत रखें। पर्याप्त नींद लें, नियमित व्यायाम करें और स्वस्थ आहार लें। मजबूत प्रतिरक्षा प्रणाली किसी भी तरह के संक्रमण को आपके शरीर को प्रभावित होने से रोकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. गुप्ता का सुझाव है कि कोरोना वायरस के प्रकोप के मद्देनजर हर व्यक्ति को कोरोना वायरस के संक्रमण से बचने के लिए मास्क पहनना जरूरी है क्योंकि मास्क केवल कोविड-19 की महामारी से ही नहीं तपेदिक, निमोनिया और कई तरह के रोगों से बचाता है। घर से बाहर निकलने पर मास्क से मुंह एवं नाक को अच्छी तरह से ढंककर वायरस एवं बैक्टीरिया से जुड़ी बीमारियों जैसे कोरोना, टीबी एवं निमोनिया ही नहीं बल्कि एलर्जी, अस्थमा और वायु प्रदूषण जनित तमाम बीमारियों से भी सुरक्षित रहा जा सकता है ।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Nov 2020 17:51:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निमोनिया से विश्व भर में हर साल 20 लाख से अधिक बच्चों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[इसके रोगाणु सबसे पहले फेफड़ों के वायु छिद्रों पर हमला करते हैं फिर जब इनकी संख्या काफी बढ़ जाती है तो ए नाक और गले से गुजरने वाली हवा को प्रभावित करने लगते हैं जिससे सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होने लगती है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/more-than-2-million-children-die-every-year-from-pneumonia-worldwide/article-12458"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/who.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">डब्ल्यूएचओ के अनुसार- निमोनिया की रोकथाम की पहल से 13 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकती है <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">(WHO)</span></span></h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>कोलकाता (सच कहूँ न्यूज)</strong>। दुनिया भर में निमोनिया से सर्वाधिक बच्चों की मौत होती है और हर साल इसकी चपेट में आने से 20 लाख से अधिक नौनिहाल काल के गाल में समा जाते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) <span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">(WHO)</span></span> के अनुसार विश्व भर में हर वर्ष करीब 20 लाख से ज्यादा बच्चों की मौत निमोनिया के कारण होती है। निमोनिया से मरने वाले हर पांच में से एक बच्चे की उम्र पांच वर्ष से कम होती है। रिपोर्ट के अनुसार यदि करीब 60 करोड़ डॉलर की लागत से निमोनिया से ग्रस्त बच्चों को सार्वभौमिक रूप से एंटीबायोटिक दवाएं दी जाएं तो हर साल लगभग छह लाख बच्चों की जान बचाई जा सकती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">संक्रमण ज्यादा बढ़ जाने पर लगातार खांसी आने लगती है</h3>
<p style="text-align:justify;">डब्ल्यूएचओ के अनुसार इसके अलावा यदि वैश्विक स्तर पर निमोनिया की रोकथाम और इस बीमारी के उपचार की पहल की जाती है तो करीब 13 लाख बच्चों की जान बचाई जा सकती है। निमोनिया एक इन्फ्लैमटोरी बीमारी है। इसके रोगाणु सबसे पहले फेफड़ों के वायु छिद्रों पर हमला करते हैं फिर जब इनकी संख्या काफी बढ़ जाती है तो ए नाक और गले से गुजरने वाली हवा को प्रभावित करने लगते हैं ।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जिससे सांस लेने में बहुत ज्यादा तकलीफ होने लगती है।</li>
<li style="text-align:justify;">संक्रमण ज्यादा बढ़ जाने पर लगातार खांसी आने लगती है</li>
<li style="text-align:justify;">ज्यादा खांसने के कारण सीने में दर्द होने लगता है।</li>
<li style="text-align:justify;">श्वास लेने से दिक्कत, खांसी, बुखार, ठंड लगना, सिरदर्द, भूख न लगना आदि इस बीमारी के कुछ आम लक्षण हैं।</li>
</ul>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jan 2020 16:29:23 +0530</pubDate>
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                <title>निमोनिया से बचाएगी पीसीवी-13 वैक्सीन</title>
                                    <description><![CDATA[ स्वास्थ्य विभाग द्वारा जल्द की जाएगी शुरुआत गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)। नौनिहालों को जानलेवा बीमारी निमोनिया से बचाने के लिए अब महंगी दवा को मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि इस दवा के अभाव में किसी की जान न जाए। साथ में इस दवा के आने के बाद निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट-खसोट से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/pcv13-vaccine-will-save-from-pneumonia/article-2263"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/vaccine.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> स्वास्थ्य विभाग द्वारा जल्द की जाएगी शुरुआत</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)।</strong> नौनिहालों को जानलेवा बीमारी निमोनिया से बचाने के लिए अब महंगी दवा को मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि इस दवा के अभाव में किसी की जान न जाए। साथ में इस दवा के आने के बाद निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट-खसोट से भी लोग बच जाएंगे। खुद प्रशासनिक अधिकारी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि निजी अस्पताल इस दवा की एक डोज तीन से साढ़े तीन हजार रुपए में लगाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए तीन डोज लगवानी जरूरी होती है। पीसीवी-13 नामक वैक्सीन को लेकर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग तत्परता से कार्य कर रहा है। यह दवा बच्चों को निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने में रामबाण का काम करेगी। पीसीवी-13 वैक्सीन के आने के बाद बच्चों को निमोकोकल बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाया जा सकता है, जोकि निमोनिया होने का मुख्य कारण होता है। यह वैक्सीन शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">निमोनिया भी हो सकती है मौत</h3>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक न्यूमोकोकल बैक्टीरिया कई बीमारियों में प्रमुख होता है। निमोनिया एक मरीज से दूसरे मरीज में फैल सकता है। निमोकोकल बैक्टीरिया से निमोनिया के अलावा दिमागी बुखार भी हो सकता है। यह बुखार आमतौर पर गर्दन में अकड़न और मानसिक भ्रम के साथ होता है जिससे दीर्घकालीन समस्याएं जैसे सुनाई न देना अथवा मृत्यु तक हो जाना आदि हो सकती है। इस बुखार के लक्षणों में बच्चे को बिना स्त्राव के कान दर्द शामिल हैं जिससे बार-बार होने वाले मामलों में श्रवण शक्ति समाप्त हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2017 01:36:44 +0530</pubDate>
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