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                <title>&amp;#8230;ताकि ठंड से कोई न मरे</title>
                                    <description><![CDATA[देश में राजनीतिक समीकरणों के बदलते हुए मौसम भी बदल रहा है। देश की जनता हर बात के लिए हर वक्त तैयार रहती है लेकिन हमें इस बात के लिए भी तैयार रहना होगा कि इस बार सर्दी से कोई न मरे।इसके लिए हमें न किसी सरकार से उम्मीद करनी है और न ही किसी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/government-will-save-the-poor-from-winter/article-7026"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/winter.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश में राजनीतिक समीकरणों के बदलते हुए मौसम भी बदल रहा है। देश की जनता हर बात के लिए हर वक्त तैयार रहती है लेकिन हमें इस बात के लिए भी तैयार रहना होगा कि इस बार सर्दी से कोई न मरे।इसके लिए हमें न किसी सरकार से उम्मीद करनी है और न ही किसी नेता की सहायता लेनी है। केंद्र व राज्य सरकारें इस तरह की योजनाओं के लिए हर बार अथक प्रयास करते हुए गरीबों के लिए तमाम सुविधाओं की व्यवस्था करती है लेकिन इसके बाद भी कड़ाके की सर्दी से देशभर में सालाना बहुत सी जानें खो जाने का सिलसिला जारी है। जैसा कि देश मे सर्दी पूरी चरम सीमा पर आ गई है। खबरिया चैनलों व पेपरों की हेडलाइन बदलने लगी है। हर रोज सुबह अखबार में व शाम को चैनलों पर यह दिखाई व सुनाई देने ही वाला है। कडाके की ठंड से इतने लोगो की मौत शासन लापरवाह व प्रशासन मौन। लेकिन इस बार हम ऐसी खबरों को देखना नहीं चाहते।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके निपटने के दो रास्ते हैं। पहला तो इसकी निंदा की जाए व राज्य सरकारों को टाइट करते हुए इस ओर उनका ध्यान आर्कषित करवाया जाए। यह काम हर किसी के बसकी बात नही व यह करना थोड़ा मुश्किल भी होगा। दूसरा, आप को स्वयं को ही नेता, सरकार या गरीबों का मसीहा समझते हुए इस काम को अंजाम दें जो बेहद सरल रहेगा। अपने पुराने कपड़े किसी को बेंचें व फेके नहीं। वह कपड़े राह चलते या किसी एनजीओ को दें दें। जिन लोगों के पास कार है वो पुराने कपड़े अपनी कार में रखें व जहां भी रास्ते में या कहीं भी अन्य स्थान पर ठंड से ठिठुरता दिखे तो उसको दें। इसका अलावा जो लोग बाकी साधन से चलते हंै वो अपने सुविधा अनुसार कपड़ो का वितरण कर सकते हैं। कई जगह देखा जाता है कि लोग कपडों के बदले चाय पीने वाले कप,बर्तन या अन्य छोटी मोटी चीज ले लेते हैं</p>
<p style="text-align:justify;">वह ऐसा न करें व अपने मन से छोटा सा लालच निकालते हुए किसी गरीब को कपड़े देने का प्रयास करें। जिन वस्तुओं को वो लेते हैं उनकी कीमत कपड़ों की कीमत की अपेक्षा कुछ भी नहीं होती। गली मौहल्ले में घूमने वाले इस तरह के लोग घरों से कपड़ा इक्कठा करके आगे बेच देते हैं। मुझे लगता ऐसा करने से बेहतर गरीब या जरुरत मंदो को कपड़े दिए जाएं तो ज्यादा अच्छा होगा। क्योंकि आपके एक कपड़े से एक व्यक्ति की जान बच सकती है। देश के किसी भी राज्य में या आपके आस पास ही आसानी से वह लोग मिल जाते हैं जिन्हें हम इस तरह के कपड़े दे सकते है। मैनें कुछ इस तरह के लोगों को देखा है जो रात में अपने साथ कपड़े लेकर घूमते हंै जहां भी उन्हें जरुरतमंद लोग मिलते हैं वह उन्हें कपड़े या कम्बल देकर चले जाते है। इसके विपरीत इस प्रकरण की अहम बात यह है आज के युग में हर किसी के पास समय की बेहद कमी है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकतर लोगों ने अपने समय का वर्गीकरण इस तरह कर रखा है कि उनके पास जिंदगी में किसी अन्य चीजों के लिए समय ही नहीं है या यूं कहें कि इस व्यस्तता भरे जीवन में लोगों के पास अपने लिए तक भी थोड़ा समय नहीं बचा। खासतौर पर महानगरों में तो सूकून, चैन या आराम नाम की चीजें ही लोगो के जीवन से गायब हो गई लेकिन व्हाट्स एप,फेसबुक या अन्य सोशल मीडिया पर किसी की ठंड लगने से मौत होने की खबर पढ़कर या शेयर करके दुख जताने से बेहतर होगा कि आपके छोटे से प्रयास व थोड़ा सा समय निकालने से यदि किसी की जान बच जाए तो निश्चित तौर पर स्वयं को अच्छा लगेगा।हम अधिकतर काम या घटना सरकार पर छोड़ सकते हैं लेकिन कुछ तो स्वयं करें तो भी देश की कुछ दशा बदल सकती है। कुछ अद्भुत विडम्बना हमारे देश में ही देखने को मिलेगी जिसमें से आर्थिक असामनता मुख्य है। किसी भी देश की सरकार कोई भी दंश झेल सकती है लेकिन भूख या ठंड से मरना किसी भी देश के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पहले लोग अच्छे व सतकर्मों की बात करा करते थे। कहते थे कि कभी तुमसे किसी का दिल न दुखे और जितना हो अपनी तरफ से लोगों का भला करो लेकिन आज की दुनिया में इन बातों का दूर-दूर तक कोई मायना दिखाई नहीं देता है। बदलते परिवेश में लोगों की जीवनशैली बदली जिससे विचार बदले और अब विचार बदलने से लोगों की भावनाएं बदल रही है।<br />
बहरहाल,गरीबों को ठंड से बचाने के लिए सरकार के साथ हर क्षेत्र की संबंधित एनजीओ व जनता को भी अग्रसर होते हुए कुछ करना चाहिए। आंकड़ों व खबरों पर गुस्सा निकालने की बजाय सब साथ काम करें। हम पुन कमाने के तौर तरीके करते व समझते हैं। देश के बड़े व नामचीन तीर्थ स्थलों पर जाते हैं लेकिन यदि हमें किसी की जिंदगी बचाकर या यूं कहें कि किसी को नई जिंदगी देकर उससे ज्यादा पुण्य यहीं कमा लें तो गलत नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>योगेश सोनी</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Dec 2018 08:26:28 +0530</pubDate>
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                <title>अरावली पहाड़ियां से ही पर्यावरण बचा रहेगा</title>
                                    <description><![CDATA[शीर्ष अदालत ने हाल ही में दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से उत्पन्न स्थिति से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए, जिस तरह से राजस्थान सरकार को 48 घंटे के अंदर राज्य के 115.34 हेक्टेयर क्षेत्र में गैरकानूनी खनन बंद करने का सख्त आदेश दिया है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-environment-will-save-the-aravali-hills/article-6502"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/aravali-hills.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने हाल ही में दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण से उत्पन्न स्थिति से संबंधित एक मामले की सुनवाई करते हुए, जिस तरह से राजस्थान सरकार को 48 घंटे के अंदर राज्य के 115.34 हेक्टेयर क्षेत्र में गैरकानूनी खनन बंद करने का सख्त आदेश दिया है, उसका स्वागत किया जाना चाहिए। अदालत के इस आदेश से न सिर्फ राजस्थान के पर्यावरण की रक्षा होगी, बल्कि दिल्ली के पर्यावरण में भी सुधार आएगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर कम होगा। लोगों को प्रदूषण और उससे होने वाले नुकसान से निजात मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस मदन बी. लोकुर और जस्टिस दीपक गुप्ता की पीठ का इस बारे में कहना था कि यद्यपि राजस्थान को अरावली में खनन गतिविधियों से करीब पांच हजार करोड़ रुपये की रॉयल्टी मिलती है, लेकिन वह दिल्ली में रहने वाले लाखों लोगों की जिंदगी को खतरे में नहीं डाल सकती। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में प्रदूषण का स्तर बढ़ने की एक बड़ी वजह अरावली पहाड़ियों का गायब होना भी हो सकता है। अदालत ने यह आदेश सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति की उस रिपोर्ट के आधार पर दिया है, जिसमें कहा गया है कि पिछले पचास सालों में अरावली पर्वत श्रंखला की 128 पहाड़ियों में से 31 पहाड़ियां गायब हो गई हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">
केन्द्रीय अधिकार प्राप्त समिति के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय से अनुरोध किया था कि अरावली क्षेत्र में गैरकानूनी खनन की गतिविधियां रोकने के लिए कठोर से कठोर कदम उठाने चाहिए, क्योंकि राज्य सरकार इन गतिविधियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है। सुनवाई के दौरान जब अदालत ने राजस्थान सरकार से इस बारे में जवाब तलब करते हुए उससे पूछा कि अरावली क्षेत्र में अवैध खनन रोकने के लिए उसने क्या कदम उठाये हैं ? तो सरकार की दलील थी कि उसके यहां के सभी विभाग गैरकानूनी खनन रोकने के लिए अपना-अपना काम कर रहे हैं। सरकार ने इस संबंध में कारण बताओ नोटिस जारी करने के अलावा कई प्राथमिकी भी दर्ज की हैं। लेकिन अदालत, सरकार की इन दलीलों से संतुष्ट नहीं हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने नाराज होते हुए कहा कि वह राज्य सरकार की स्टेटस रिपोर्ट से बिल्कुल भी इत्तेफाक नहीं रखती, क्योंकि अधिकांश ब्यौरे में सारा दोष भारतीय वन सर्वेक्षण यानी एफएसआइ पर मढ़ दिया गया है। सरकार, अरावली पहाड़ियों को गैरकानूनी खनन से बचाने में पूरी तरह से नाकाम रही है। उसने इस मामले को बेहद हलके में लिया है। जिसके चलते समस्या बढ़ती जा रही है। राजस्थान, हरियाणा, गुजरात और दिल्ली में फैली प्राचीन अरावली पर्वत श्रंखला सैंकड़ों सालों से गंगा के मैदान के ऊपरी हिस्से की आबोहवा तय करती आई हैं, जिसमें वर्षा, तापमान, भू-जल रिचार्ज से लेकर भू-संरक्षण तक शामिल है। यह पहाड़ियां दिल्ली, हरियाणा और पश्चिमी उŸारप्रदेश को धूल, आंधी, तूफान और बाढ़ से बचाती रही हैं। लेकिन हाल का एक अध्ययन बतलाता है कि अरावली में जारी खनन से थार रेगिस्थान की रेत दिल्ली की ओर लगातार खिसकती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान से लेकर हरियाणा तक एक विशाल इलाके में अवैध खनन से जमीन की उर्वरता खत्म हो रही है। इससे हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में सूखा और राजस्थान के रेतीले इलाके में बाढ़ के हालात बनने लगे हैं। प्रदूषण से मानसून का पैटर्न बदला है। मानसून के इस असंतुलन से इन इलाके के रहवासियों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है। कहने को अरावली पर्वत श्रंखला के पूरे क्षेत्र में खनन पर पाबंदी है। सर्वोच्च न्यायालय ने साल 2002 में इस क्षेत्र के पर्यावरण को बचाने के लिए खनन पर पाबंदी लगा दी थी। बावजूद इसके खनन नहीं रुका है। सरकार की ऐन ठीक आंखों के सामने गैरकानूनी तरीके से खनन होता रहता है और वह तमाशा देखती रहती है। राजस्थान सरकार ने खुद अदालत में यह बात मानी है कि उसकी लाख कोशिशों के बाद भी राज्य में अवैध खनन जारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">तमाम अदालती आदेशों के बाद भी अवैध खनन के खिलाफ न तो राजस्थान सरकार और न प्रशासन ने कोई प्रभावी कार्यवाही की है और न ही केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय इस पर लगाम लगा पाया है। सरकार की लापरवाही और उदासीनता का ही नतीजा है कि राज्य में गैरकानूनी खनन की गतिविधियां दिन-पे-दिन बढ़ती ही जा रही हैं। खनन माफिया बेखौफ होकर अरावली की पहाड़ियों को खोखला कर रहे हैं। लेखा परीक्षक और नियंत्रक की एक रिपोर्ट कहती है कि राजस्थान के अंदर अरावली पर्वत श्रंखला क्षेत्र में नियमों को ताक में रखकर खनन के खूब पट्टे जारी किए गए, उनका नवीनीकरण किया गया या उन्हें आगे बढ़ाया गया। राज्य सरकार के अलावा केन्द्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने भी इसके लिए अपनी मंजूरियां दीं। जिसका नतीजा यह निकला कि अरावली पर्वत श्रंखला की पहाड़ियां एक के बाद एक गायब होती जा रही हैं। कुछ लोगों के स्वार्थ के चलते लाखों लोगों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। यदि सरकार अब भी इसे बचाने के लिए नहीं जागी, तो इस क्षेत्र का पूरा पर्यावरण खतरे में पड़ जाएगा। जिसका खामियाजा एक दिन सभी को भुगतना पड़ेगा। अरावली पर्वत श्रंखला बची रहेगी, तो इस क्षेत्र का पर्यावरण भी बचा रहेगा।</p>
<p style="text-align:right;">जाहिद खान</p>
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                <pubDate>Mon, 29 Oct 2018 08:54:15 +0530</pubDate>
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                <title>दफ्तर बचाओ संघर्ष कमेटी का धरना आठवें दिन भी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[काले बिल्ले लगाकर सरकार व विभाग के उच्चाधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की फरीदकोट (सच कहूँ न्यूज)। जल सप्लाई व सेनीटेशन सर्किल की सर्किल कार्यालय बचाओ संघर्ष कमेटी द्वारा सोमवार को लगातार आठवें दिन भी धरना दिया गया। मुलाजिम नेता रुपिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा फरीदकोट सर्किल कार्यालय जोकि 1972 में बनाया गया […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/office-of-the-save-the-conflict-committee-continues-the-eighth-day/article-6292"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/office-of-the-save-the-conflict-committee-continues-the-eighth-day-copy.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;">काले बिल्ले लगाकर सरकार व विभाग के उच्चाधिकारियों के खिलाफ नारेबाजी की</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>फरीदकोट (सच कहूँ न्यूज)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">जल सप्लाई व सेनीटेशन सर्किल की सर्किल कार्यालय बचाओ संघर्ष कमेटी द्वारा सोमवार को लगातार आठवें दिन भी धरना दिया गया। मुलाजिम नेता रुपिंदर सिंह ने कहा कि पंजाब सरकार द्वारा फरीदकोट सर्किल कार्यालय जोकि 1972 में बनाया गया था, को श्री मुक्तसर साहिब में तबदील किए जाने की नीति को लगातार तेज किया जा रहा है। इसके विरोध में सर्किल कार्यालय बचाओ संघर्ष कमेटी द्वारा संघर्ष को तेज करने के लिए विभिन्न समाजसेवी संस्थाओं को सहयोग देने की अपील की गई। इस धरने में स्थानीय मंडल कार्यालय, सर्किल कार्यालय व मोगा के मंडल कार्यालय के समूह कर्मचारियों द्वारा काले बिल्ले लगा कर पंजाब सरकार व विभाग के उच्चाधिकारियों के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। धरने में शामिल विभिन्न जत्थेबंदियों के नेताओं ने पंजाब सरकार की मुलाजिम विरोधी नीतियों व सर्किल कार्यालय को श्री मुक्तसर साहिब में तबदील किए जाने की सख्त में निंदा की और मांग की कि फरीदकोट सर्किल को किसी अन्य जिले में तबदील न किया जाए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि सर्किल कार्यालय को यहां से तब्दील किया गया तो संघर्ष को तेज किया जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पर सर्किल फरीदकोट के बलराम बरगाड़ी, प्रांतीय प्रधान पंजाब ड्राफ्टमैन एसोसिएशन मनजीत सिंह शताब, आउट सोर्सिंग यूनियन के राकेश कुमार व मुकेश मुकेश कुमार, डिप्लोमा इंजनीरिंग एसोसिएशन के गुरमीत सिंह, पंजाब स्टेट कर्मचारी दल के किरन प्रकाश मेहता व हरचरन सिंह संधू, जल सप्लाई व सेनीटेशन इंप्लाइज यूनियन के तेजवंत ढिलवां व जीवन चंद तिवाड़ी, दी क्लास फोर यूनियन के मनजीत सिंह बराड़, महासचिव सीपीएफ यूनियन लखविंदर सिंह व नरेश कुमार, फील्ड व वर्कशॉप यूनियन के मीत प्रधान सतीश कुमार उप्पल व बलजीत सिंह बराड़, सांझी मुलाजिम व पेंशनर्ज कमेटी के कन्वीनर अमरीक सिंह संधू, प्रांतीय प्रधान डीसी कार्यालय इंप्लाइज यूनियन गुरनाम सिंह विर्क, पंजाब स्टेट सर्वसिस फेडरेशन के सिमरजीत सिंह बराड़, पेंशनर्ज एसोसिएशन के अशोक कौशल, प्रधान मेडिकल कालेज सतपाल पौल, चेयरमैन जिला फेडरेशन ओम प्रकाश व सचिव जिला फेडरेशन पूर्ण नाथ आदि भी उपस्थित थे।</p>
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                <pubDate>Tue, 16 Oct 2018 15:44:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>माही नदी में डूबी बच्ची को बचाने उतरीं मौसी व मां भी डूबीं, 2 घंटे बाद मिले तीनों के शव</title>
                                    <description><![CDATA[बांसवाड़ा। बांसवाड़ी की माही नदी वॉटर में बुधवार को एक-एक कर दो महिलाएं और एक बच्ची की डूबने से मौत हो गई। रेस्क्यू टीम ने दो घंटे की तलाश के बाद तीनों के शव पानी से बाहर निकाल लिए। पहले बच्ची की बॉडी मिली और उसके बाद एक घंटे की मशक्त के बाद दोनों महिलाओं […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/aunt-mother-save-the-girl-immersed-in-river-mahi/article-4162"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/mahi-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>बांसवाड़ा। </strong>बांसवाड़ी की माही नदी वॉटर में बुधवार को एक-एक कर दो महिलाएं और एक बच्ची की डूबने से मौत हो गई। रेस्क्यू टीम ने दो घंटे की तलाश के बाद तीनों के शव पानी से बाहर निकाल लिए। पहले बच्ची की बॉडी मिली और उसके बाद एक घंटे की मशक्त के बाद दोनों महिलाओं के शव भी निकाल लिए गए। बच्ची को बचाने के चक्कर में दोनों महिलाएं भी डूब गई, मृतक महिलाएं बच्ची की मौसी व मां हैं। बच्ची अपनी मां व मौसी के सा​थ भेड़-बकरियां चराने गई थी। इसी दौरान वे माही नदी पर बने गैमन पुल के पास नहा रही थी।</p>
<p style="text-align:justify;">तभी अचानक से बच्ची नदी कें तेज बहाव में डूब गई। बच्ची के हल्ला मचाने पर पास ही मौजूद उसकी मौसी लाडू (25) पत्नी  मालाराम देवासी नदी में कूद गई जिससे वह भी डूब गई। इसी दौरान दोनों को डूबता देख वहां मौजूद मां भी नदी में उतर गई जिससे वह भी डूब गई। उनके चिल्लाने पर वहां मौजूद ग्रामीण आए तथा पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने गोताखोरों व एनडीआरएफ की टीम को बुलाया। करीब दो घंटे बाद बच्ची की बॉडी पानी से निकाल ली गई। इसके एक घंटे बाद जती व लाडू के शव भी मिल गए।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>राज्य</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Jun 2018 14:59:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Green Jobs: ग्रीन जॉब्स, कुदरत बचाओ, करियर बनाओ</title>
                                    <description><![CDATA[पर्यावरण सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। कुदरत को बचाने की इस मुहिम के परिणामस्वरूप ग्रीन जॉब्स का एक बड़ा मार्केट खड़ा हो रहा है, जहां पे-पैकेज भी अच्छा है। आज हम पूरी तरह से Green Jobs Meaning और इससे संबंधित विश्वविद्यालयों के बारे में जानते हैं। आज हम आपको बताएंगे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/culture-and-society/green-jobs-make-a-career/article-2467"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/jobs.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पर्यावरण सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन को लेकर जागरूकता बढ़ रही है। कुदरत को बचाने की इस मुहिम के परिणामस्वरूप ग्रीन जॉब्स का एक बड़ा मार्केट खड़ा हो रहा है, जहां पे-पैकेज भी अच्छा है। आज हम पूरी तरह से <strong>Green Jobs Meaning</strong> और इससे संबंधित विश्वविद्यालयों के बारे में जानते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज हम आपको बताएंगे क्या हैं ग्रीन जॉब्स और कैसे पा सकते हैं। एक जमाना था, जब छात्रों की प्राथमिकता की सूची में सबसे अंत में आता था पर्यावरण विज्ञान यानी इनवायर्नमेंटल साइंस। लेकिन अब इस सूची में यह ऊपर की ओर कदम बढ़ा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जलवायु परिवर्तन और उससे होने वाले खतरों के विषय में लगातार बढ़ रही जागरूकता और पर्यावरण को बचाने के लिए विश्व के विभिन्न हिस्सों में चल रहे आंदोलनों के कारण अब छात्रों के बीच विषय के रूप में पर्यावरण विज्ञान की लोकप्रियता बढ़ने लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण विज्ञान के प्रति छात्रों की बढ़ रही रूचि का एक कारण यह भी है कि अब पर्यावरण से जुड़े फील्ड में नौकरी की संभावना भी काफी तेजी से बढ़ रही है। पर्यावरण के क्षेत्र से जुड़ी इन नौकरियों को ग्रीन जॉब्स का नाम दिया गया है। ग्रीन जॉब्स के क्षेत्र में प्रशिक्षित लोगों की मांग कितनी तेजी से बढ़ रही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्या है ग्रीन जॉब्स?</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>Green Jobs Kya Hai?</strong> बिजली की बचत और सौर तथा पवन ऊर्जा आदि अधिक-से अधिक इस्तेमाल करने वाली बिल्डिंग का निर्माण करने वाला आर्किटेक्ट, वॉटर रिसाईकले सिस्टम लगाने वाला प्लंबर, विभिन्न कंपनियों में पर्यावरण के संरक्षण से संबंधित शोध कार्य और सलाह देने वाले लोग, ऊर्जा की खपत कम करने की दिशा में काम करने वाले विशेषज्ञ, पारिस्थितिकी तंत्र व जैव विविधता को कायम करने के गुर सिखाने वाले विशेषज्ञ,</p>
<p style="text-align:justify;">प्रदूषण की मात्रा और ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन को कम करने के तरीके बताने वाले एक्सपर्ट आदि के काम ग्रीन जॉब्स की श्रेणी में आते हैं। विशेषज्ञों की मानें तो आने वाले वक्त में हर नौकरी में यह क्षमता होगी कि वह ग्रीन जॉब में तब्दील हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सेक्टर में धीरे-धीरे विस्तार हो रहा है और साथ ही साथ नौकरी की संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। यह सेक्टर प्रशिक्षित लोगों की मांग करता है और बदले में अच्छी सैलरी देता है। कई विशेषज्ञों की यह भी राय है कि जिस तरह सूचना और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में एक जमाने में भारी उछाल आया था, वैसा ही आने वाले वक्त में ग्रीन जॉब्स के क्षेत्र में होगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">इस तरह करें शुरूआत</h2>
<p style="text-align:justify;">सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देश के आधार पर यूजीसी ने ग्रेजुएशन के स्तर पर इनवायर्नमेंटल स्टडीज को अनिवार्य बना दिया है। स्कूल और टेक्निकल पाठ्यक्रमों के स्तर पर यह जिम्मेदारी क्रमश: एनसीईआरटी और एआईसीटीई को सौंपी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यावरण विज्ञान बेसिक साइंस और सोशल साइंस दोनों का मिश्रित रूप है। रिसोर्स मैनेजमेंट और रिसोर्स टेक्नोलॉजी भी पर्यावरण विज्ञान का एक महत्वपूर्ण अंग है। पर्यावरण से जुड़े विभिन्न क्षेत्रों में अपना कैरियर बनाने के लिए पढ़ाई बारहवीं के बाद शुरू की जा सकती है,</p>
<p style="text-align:justify;">पर इस स्तर पर संस्थानों की संख्या कम है। ग्रीन जॉब्स के क्षेत्र में बेहतर कैरियर बनाने के लिए पर्यावरण विज्ञान में उच्च शिक्षा प्राप्त करना आपके भविष्य के लिए अच्छा होगा। पर्यावरण से संबंधित नीतियों के निर्माण दिलचस्पी रखने वाले साधारण ग्रेजुएट के लिए भी यहां मौके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">जीव विज्ञान के साथ बारहवीं की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्र ग्रेजुएशन के स्तर पर इनवायर्नमेंटल साइंस की पढ़ाई कर सकते हैं। फिजिकल साइंस, लाइफ साइंस, इंजीनियरिंग या मेडिकल साइंस आदि विज्ञान विषयों से ग्रेजुएशन करने के बाद इनवायर्नमेंटल साइंस में पोस्ट ग्रेजुएशन करना बेहतर होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इनवायर्नमेंटल साइंस में बीटेक का कोर्स भी कई संस्थानों में उपलब्ध है। सेंटर फॉर साइंस एंड इनवायर्नमेंट, दिल्ली में पर्यावरण विज्ञान से जुड़े विषयों में इंटर्नशिप और सर्टिफिकेट कोर्स करवाया जाता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">कहां होती है पढ़ाई</h2>
<p style="text-align:justify;">स्कूल आॅफ इनवायर्नमेंटल साइंस, जेएनयू, नई दिल्ली -दी एनर्जी एंड रिसोर्स इंस्टीट्यूट (टेरी), नई दिल्ली -सेंटर फॉर इकोलॉजिकल साइंसेज, इंडियन इंस्टिट्यूट आॅफ साइंस, बैंगलूरू -डिपार्टमेंट आॅफ इनवायर्नमेंटल साइंसेज, श्रीनगर, गढ़वाल -डिपार्टमेंट आॅफ इनवायर्नमेंटल बायोलॉजी, यूनिवर्सिटी आॅफ दिल्ली।</p>
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                                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2017 03:35:47 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>निमोनिया से बचाएगी पीसीवी-13 वैक्सीन</title>
                                    <description><![CDATA[ स्वास्थ्य विभाग द्वारा जल्द की जाएगी शुरुआत गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)। नौनिहालों को जानलेवा बीमारी निमोनिया से बचाने के लिए अब महंगी दवा को मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि इस दवा के अभाव में किसी की जान न जाए। साथ में इस दवा के आने के बाद निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट-खसोट से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/pcv13-vaccine-will-save-from-pneumonia/article-2263"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/vaccine.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> स्वास्थ्य विभाग द्वारा जल्द की जाएगी शुरुआत</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम(सच कहूँ न्यूज)।</strong> नौनिहालों को जानलेवा बीमारी निमोनिया से बचाने के लिए अब महंगी दवा को मुफ्त में उपलब्ध कराया जाएगा, ताकि इस दवा के अभाव में किसी की जान न जाए। साथ में इस दवा के आने के बाद निजी अस्पतालों द्वारा की जा रही लूट-खसोट से भी लोग बच जाएंगे। खुद प्रशासनिक अधिकारी इस बात को स्वीकार कर रहे हैं कि निजी अस्पताल इस दवा की एक डोज तीन से साढ़े तीन हजार रुपए में लगाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए तीन डोज लगवानी जरूरी होती है। पीसीवी-13 नामक वैक्सीन को लेकर प्रदेश का स्वास्थ्य विभाग तत्परता से कार्य कर रहा है। यह दवा बच्चों को निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारियों से बचाने में रामबाण का काम करेगी। पीसीवी-13 वैक्सीन के आने के बाद बच्चों को निमोकोकल बैक्टीरिया के संक्रमण से बचाया जा सकता है, जोकि निमोनिया होने का मुख्य कारण होता है। यह वैक्सीन शिशु मृत्यु दर को कम करने की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">निमोनिया भी हो सकती है मौत</h3>
<p style="text-align:justify;">जानकारी के मुताबिक न्यूमोकोकल बैक्टीरिया कई बीमारियों में प्रमुख होता है। निमोनिया एक मरीज से दूसरे मरीज में फैल सकता है। निमोकोकल बैक्टीरिया से निमोनिया के अलावा दिमागी बुखार भी हो सकता है। यह बुखार आमतौर पर गर्दन में अकड़न और मानसिक भ्रम के साथ होता है जिससे दीर्घकालीन समस्याएं जैसे सुनाई न देना अथवा मृत्यु तक हो जाना आदि हो सकती है। इस बुखार के लक्षणों में बच्चे को बिना स्त्राव के कान दर्द शामिल हैं जिससे बार-बार होने वाले मामलों में श्रवण शक्ति समाप्त हो सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2017 01:36:44 +0530</pubDate>
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