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                <title>Garbage - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>नगर निगम गुरुग्राम ने शुरू की घर-घर कचरा उठाने की सेवा</title>
                                    <description><![CDATA[कचरा उठाने के लिए 200 गाड़ियां लगाई, कुछ दिन 200 गाड़ियों और आएंगी चार एजेंसियों को जोनवार सौंपा कार्य गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय मेहरा)। Gurugram News: नगर निगम गुरुग्राम ने शहर को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनाने की दिशा में एक और अहम पहल करते हुए बुधवार से घर-घर से कचरा उठाने की सेवा को फिर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/municipal-corporation-gurugram-deployed-two-hundred-vehicles-to-collect-garbage/article-73200"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2025-07/gurugram-news-4.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">कचरा उठाने के लिए 200 गाड़ियां लगाई, कुछ दिन 200 गाड़ियों और आएंगी</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>चार एजेंसियों को जोनवार सौंपा कार्य</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>गुरुग्राम (सच कहूँ/संजय मेहरा)।</strong> Gurugram News: नगर निगम गुरुग्राम ने शहर को स्वच्छ, सुंदर और स्वस्थ बनाने की दिशा में एक और अहम पहल करते हुए बुधवार से घर-घर से कचरा उठाने की सेवा को फिर से शुरू कर दिया है। बुधवार को 200 गाड़ियों ने शुरू कर दिया। निगम का दावा है कि अगले 5 दिन में 200 और गाड़ियां सेवा में आ जाएंगी। बता दें कि जून माह में इस कार्य को संभाल रही एजेंसी का अनुबंध समाप्त हो जाने के कारण यह सेवा कई क्षेत्रों में बाधित हो गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे शहर के नागरिकों, विशेषकर गृहिणियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। स्थिति को देखते हुए नगर निगम ने विभिन्न स्थानों पर गार्बेज ट्रॉलियां खड़ी कर कचरा संग्रहण की अस्थायी व्यवस्था की थी, जिन्हें नियमित रूप से खाली किया जा रहा था। बुधवार को जब डोर-टू-डोर कचरा संग्रहण वाहन फिर से कॉलोनियों और मोहल्लों में पहुंचे तो नागरिकों, विशेष रूप से महिलाओं ने राहत की सांस ली। Gurugram News</p>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम गुरुग्राम के आयुक्त प्रदीप दहिया ने कहा कि नगर निगम का लक्ष्य स्वच्छ और हरित गुरुग्राम सुनिश्चित करना है। हम सफाई व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए न केवल सड़कों और सार्वजनिक स्थलों की नियमित सफाई सुनिश्चित कर रहे हैं, बल्कि गार्बेज वल्नरेबल प्वाइंट्स से भी समयबद्ध कचरा उठान की व्यवस्था कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">नगर निगम ने नागरिकों से अपील की है कि वे निर्धारित समय पर कचरा वाहन के आने पर अपना कचरा सौंपे और कचरा खुले में न फेंके। साथ ही गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने की आदत डालें, ताकि कचरे के निपटान की प्रक्रिया अधिक प्रभावी हो सके। यह कदम न केवल सफाई व्यवस्था को बेहतर बनाएगा, बल्कि स्वच्छ भारत मिशन की दिशा में भी एक अहम योगदान साबित होगा। नागरिकों और प्रशासन के साझा प्रयासों से गुरुग्राम को एक आदर्श स्वच्छ शहर बनाने की दिशा में सहयोग मिलेगा। Gurugram News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="अवैध असलहा सहित चार शातिर चोर गिरफ्तार" href="http://10.0.0.122:1245/four-vicious-thieves-arrested-with-illegal-weapons/">अवैध असलहा सहित चार शातिर चोर गिरफ्तार</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 09 Jul 2025 19:19:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Garbage Collection: शहर के बाजारों में अब रात को होगा डोर टू डोर कचरा कलेक्शन</title>
                                    <description><![CDATA[दोनों जोनों के व्यावसायिक क्षेत्रों में लोगों को कचरे से मिलेगी मुक्ति नगर निगम ने डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का किया काम शुरू यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपतराय)। Yamunanagar News: नगर निगम ने जगाधरी व यमुनानगर के व्यावसायिक क्षेत्रों में रात को कचरा कलेक्शन करने का कार्य शुरू कर दिया है। अब सुबह के समय दुकानों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/now-door-to-door-garbage-collection-will-be-done-at-night-in-the-city-markets/article-65261"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-12/yamunanagar-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">दोनों जोनों के व्यावसायिक क्षेत्रों में लोगों को कचरे से मिलेगी मुक्ति</h3>
<ul>
<li>नगर निगम ने डोर टू डोर कचरा कलेक्शन का किया काम शुरू</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>यमुनानगर (सच कहूँ/लाजपतराय)।</strong> Yamunanagar News: नगर निगम ने जगाधरी व यमुनानगर के व्यावसायिक क्षेत्रों में रात को कचरा कलेक्शन करने का कार्य शुरू कर दिया है। अब सुबह के समय दुकानों के बाहर कचरा नहीं मिलेगा। कुछ दिन पहले ही नगर निगम आयुक्त आयुष सिन्हा ने सफाई अधिकारियों को रात में व्यावसायिक क्षेत्रों से कचरा कलेक्शन करने के निर्देश दिए थे। जिसके बाद निगम के दोनों जोन में सफाई अधिकारियों ने रात के समय यह कार्य करवाना शुरू कर दिया। निगमायुक्त आयुष सिन्हा ने बताया कि शहर में मॉडल टाउन, रादौर रोड, खेड़ा मोहल्ला,</p>
<p style="text-align:justify;">मीरा बाई मार्केट, रेलवे रोड, जगाधरी बाजार, बर्तन बाजार, झंडा चौक, स्कूल रोड, सिविल लाइन समेत काफी एरिया व्यावसायिक क्षेत्र है। दिनभर कचरा एकत्रित होता था। दिन में कचरा एकत्रित करने में परेशानी होती थी। क्योंकि बाजारों में भीड़ होती थी। ऐसे में सफाई करने के बाद भी फिर से गंदगी फैल जाती थी। कुछ दिन पहले दोनों शहरों के व्यावसायिक क्षेत्रों में रात के समय डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने और सफाई कराने का निर्णय लिया गया था। अब दोनों जोन के व्यावसायिक क्षेत्रों में रात के समय कचरा एकत्रित करने व सफाई का कार्य किया जा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तीन टिप्परों से किया जा रहा कचरा कलेक्शन | Yamunanagar News</h3>
<p style="text-align:justify;">जोन एक में सीएसआई हरजीत सिंह के नेतृत्व में व्यावसायिक क्षेत्रों से डोर टू डोर कचरा कलेक्शन किया जा रहा है। जोन एक में जगाधरी बाजार, बर्तन बाजार, खेड़ा बाजार, झंडा चौक, स्कूल रोड, सिविल लाइन, रेलवे रोड, मॉडल टाउन, प्यारा चौक समेत विभिन्न बाजारों से रात के समय कचरा कलेक्शन किया जा रहा है। जोन एक में तीन टिप्पर रात को व्यावसायिक क्षेत्रों से कचरा कलेक्शन करने में लगे है। निगमायुक्त आयुष सिन्हा ने सफाई अधिकारियों को निर्देश दिए वे नियमित हर व्यावसायिक क्षेत्र से कचरा कलेक्शन करना सुनिश्चित करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रात को करवाया जाएगा कूड़ा कलेक्शन का काम</h3>
<p style="text-align:justify;">जोन दो में सीएसआई सुनील दत्त के नेतृत्व में व्यावसायिक क्षेत्रों से कचरा एकत्रित करने का कार्य किया जा रहा है। सीएसआई सुनील दत्त ने बताया कि जोन दो में पांच टिप्पर व्यावसायिक क्षेत्रों में रात के समय कचरा एकत्रित करने में लगे है। जो रोजाना रात के समय मीरा बाई मार्केट, रेलवे रोड, खेड़ा मोहल्ला, रादौर रोड, मीट मार्केट, सब्जी मंडी, आईटीआई, वर्कशॉप रोड, कैप बाजार समेत विभिन्न बाजारों से कचरा कलेक्शन किया जा रहा है। जल्द ही रात को सफाई का कार्य भी शुरू कराया जाएगा। ताकि हमारा शहर साफ व सुंदर रहे। Yamunanagar News</p>
<p style="text-align:justify;"> <strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="India vs Australia 3rd Test: भारत की शर्मनाक हार का पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पोंटिंग ने किया जबरदस्त खुलासा!" href="http://10.0.0.122:1245/former-australian-captain-ponting-reveals-the-reason-behind-indias-defeat/">India vs Australia 3rd Test: भारत की शर्मनाक हार का पूर्व ऑस्ट्रेलियाई कप्तान पोंटिंग ने किया जबरदस्त खुलासा!</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Dec 2024 15:01:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>कचरा डंप बना अस्पताल के लिए ‘सिरदर्दी’</title>
                                    <description><![CDATA[उच्चाधिकारियों के निर्देशों के बावजूद नहीं बनाया गया स्थाई कूडा डंप अबोहर। (सच कहूँ/सुधीर अरोड़ा) सरकारी अस्पताल में कूडा डंप का उचित प्रबंध न होने से खुले में फेंका जा रहा कूड़ा बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है। कूड़ा डंप कर्मियों के रिहायशी क्वाटरों के बिलकुल सामने एक खाली जर्जर क्वाटर में बनाया हुआ है […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/garbage-being-thrown-in-the-open-in-the-government-hospital-of-abohar/article-41538"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-12/abohar-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">उच्चाधिकारियों के निर्देशों के बावजूद नहीं बनाया गया स्थाई कूडा डंप</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>अबोहर। (सच कहूँ/सुधीर अरोड़ा)</strong> सरकारी अस्पताल में कूडा डंप का उचित प्रबंध न होने से खुले में फेंका जा रहा कूड़ा बीमारियों को निमंत्रण दे रहा है। कूड़ा डंप कर्मियों के रिहायशी क्वाटरों के बिलकुल सामने एक खाली जर्जर क्वाटर में बनाया हुआ है जहां यह कूड़ा जिसमें मेडिकल वैसटेज भी दिखाई देती है बाहर तक बिखरा हुआ है। आसपास के क्वाटरों में रहने वाले कर्मियों के परिजनों ने बताया कि इस कूड़े में कुत्ते व बेसहारा पशु मुंह मारते रहते है व यह कूड़ा बिखेर देते है। हैरानी जनक बात यह है कि जिस ठेकेदार को कूड़ा उठाने का ठेका दिया गया है वह यह कूड़ा रोजाना उठाने की बजाय तब तक नहीं उठाता जब तक कूड़े की तीन ट्राली एकत्रित नहीं हो जाती।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="पंचायतों को साथ लेकर नशों के खिलाफ चलेगा अभियान : एसपी" href="http://10.0.0.122:1245/campaign-will-run-against-drugs-by-taking-panchayats-together-sp/">पंचायतों को साथ लेकर नशों के खिलाफ चलेगा अभियान : एसपी</a></p>
<p style="text-align:justify;">इस कूड़ा डंप को देखकर लगता है कि यहां के स्वास्थ्य अधिकारी लोगों को तो अपने आसपास सफाई रखने का पाठ पढ़ाते है लेकिन उन्होंने खुद यह पाठ नहीं पढ़ा जिस कारण यह कूड़ा डंप न केवल बीमारियों को न्यौता दे रहा है बल्कि अस्पताल की कार्यप्रणाली की भी पोल खोल रहा है। केंद्र सरकार की सितंबर महीने में आई निरीक्षण टीम ने 6 महीने पहले इसका उचित प्रबंध करने की हिदायत दी थी लेकिन 6 महीने का समय बीत जाने के बाद भी कूड़ा डंप नहीं बनाया जा सका। केंद्र की निरीक्षण टीम द्वारा कूडा डंप का उचित प्रबंध न होने के कारण अस्पताल को जीरो नंबर दिए जिस कारण यह हाल केंद्र की टीम की जांच में खरा नहीं उतर पाया। गौरतलब है कि सफाई ठेकेदार ने इस कूडा डंप को सुचारु रखने के लिए किसी प्रकार का कोई प्रयास नहीं किया गया। ऐसी लापरवाहियों के चलते पहले भी सफाई ठेकेदार चर्चा में रह चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">कायाकल्प प्रोजेक्ट के अतिरिक्त इंचार्ज डॉ. साहब राम ने बताया कि कूड़े डंप का निर्माण विभाग के निर्माण विभाग के एसडीओ द्वारा किया जाना है जिनको पहले भी लिखा जा चुका है व अब भी यह मामला उनके ध्यान में आने के बाद रिमांइडर निकाला जाएगा बाकी अस्पताल में निर्माण का कार्य चल रहा है व उसकी साथ ही कूडा डंप का निर्माण भी करवा लिया जाएगा।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/garbage-being-thrown-in-the-open-in-the-government-hospital-of-abohar/article-41538</link>
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                <pubDate>Tue, 27 Dec 2022 20:03:49 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्लास्टिक कचरे से मुक्ति कब तक</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में प्लास्टिक कचरा बढ़ने से जिस प्रकार से प्राकृतिक हवाओं में प्रदूषण बढ़ रहा है, वह मानव जीवन के लिए तो अहितकर है ही, साथ ही हमारे स्वच्छ पर्यावरण के लिए भी विपरीत स्थितियां पैदा कर रहा है। हालांकि इसके लिए समय-समय पर सरकारी सहयोग लेकर गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा जागरण अभियान भी चलाए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/how-long-do-you-get-rid-of-plastic-waste/article-3376"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/plastic.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वर्तमान में प्लास्टिक कचरा बढ़ने से जिस प्रकार से प्राकृतिक हवाओं में प्रदूषण बढ़ रहा है, वह मानव जीवन के लिए तो अहितकर है ही, साथ ही हमारे स्वच्छ पर्यावरण के लिए भी विपरीत स्थितियां पैदा कर रहा है। हालांकि इसके लिए समय-समय पर सरकारी सहयोग लेकर गैर सरकारी संस्थाओं द्वारा जागरण अभियान भी चलाए जा रहे हैं, परंतु परिणाम उस गति से मिलता दिखाई नहीं देता। ऐसे में प्रश्न यह आता है कि गैर सरकारी संस्थाओं के यह अभियान अपेक्षित परणिाम क्यों नहीं दे पा रहे हैं। इसके पीछे की कहानी कहीं केवल कागज तो नहीं हैं। भारत में कागजों में काम होने की बीमारी लगातार बढ़ रही है। कागजों के आंकड़ों को वास्तविक धरातल पर उतारा जाता है, तो कहीं भी काम दिखाई नहीं देता। प्लास्टिक मुक्ति का अभियान गैर सरकारी संस्थाओं ने बलि चढ़ा दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में यह भी चिंतन का विषय है कि हमारी सामाजिक चेतना के कम होने के कारण हम चैतन्यता के नाम पर शून्य की तरफ ही बढ़ते जा रहे हैं। अगर प्लास्टिक प्रदूषण बढ़ने की यही गति बरकरार रही तो एक दिन हमें शुद्ध हवा से वंचित होना पड़ सकता है। हम जानते हैं कि वर्तमान में वायु प्रदूषण के चलते हमारे शरीर में कई प्रकार के विषैले कीटाणु प्रवेश कर रहे हैं, जो हमारे स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव डाल रहे हैं और नई-नई बीमारियां जन्म ले रही हैं। भारत में कई बीमारियां केवल गंदगी के कारण हो रही हैं, चाहे वह प्लास्टिक कचरे से उत्पन्न गंदगी हो या फिर इसके कारण जाम नालियों के गंदे पानी से प्रदूषण से पैदा होने वाले वातावरण से पैदा होने वाली गंदगी हो।</p>
<p style="text-align:justify;">प्लास्टिक पॉलीथिन में बहुत से लोग घर का कचरा भरकर बाहर फैंक रहे हैं, जिसे हमारी गौमाता खाती है और हम जाने-अनजाने में गौहत्या का पाप कर रहे हैं। इसके साथ ही बहुत बड़ा सच यह भी है कि प्लास्टिक पॉलीथिन और खाद्य सामग्री में उपयोग आने वाले प्लास्टिक के सामान रासायनिक पदार्थों के इस्तेमाल के कारण हमें जहर भरे खाना खाने के लिए विवश कर रहे हैं। इसके कारण हमारा स्वास्थ्य विकरालता की ओर जा रहा है। इसमें प्लास्टिक कचरे का बहुत बड़ा योगदान है। हालांकि हमारे देश में स्वच्छ भारत अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन क्या हम जानते हैं कि प्लास्टिक कचरा स्वच्छ भारत अभियान की दिशा में बहुत बड़ा अवरोधक बनकर सामने आ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्लास्टिक कचरे से मुक्ति पाने के लिए भाजपा की छत्तीसगढ़ सरकार ने एक सराहनीय कदम उठाया है। पहले 2014 में छत्तीसगढ़ की सरकार ने पॉलीथिन पर प्रतिबंध लगाकर इससे मुक्ति का सूत्रपात किया था और अब प्लास्टिक से निर्मित प्रचार सामग्री और खाद्य पदार्थों के लिए उपयोग में लाई जाने वाली डिस्पोजल वस्तुओं पर भी पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया है। छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम सभी राज्यों के लिए एक पाथेय है। हम जानते हैं कि छत्तीसगढ़ क्षेत्र लम्बे समय से पिछड़ा हुआ क्षेत्र माना जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं है, छत्तीसगढ़ से यह पिछड़ेपन का ठप्पा धीरे-धीरे हटने लगा है। सरकार द्वारा चलाए जा रहे अभियानों के कारण वहां की जनता में चेतना जगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसका असर दिखाई देने लगा है। प्लास्टिक कचरे के बारे में यह सबसे बड़ा सच है कि यह वास्तव में आयातित कचरा है। हमारे देश में कागज और कपड़े के बैग ही प्रचलन में रहते थे, लेकिन विदेशियों की नकल करने के कारण हम भी प्लास्टिक का उपयोग करने की ओर प्रवृत होते चले गए। यही प्रवृति आज हमारे देश की सबसे विकराल समस्या बनकर उभर रही है। हमने एक कहावत भी सुनी है कि अपना काम बनता भाड़ में जाए जनता, यह सोच किसी प्रकार से भारतीय संस्कृति का संवाहक नहीं हो सकता। यह सोच विदेशों की नकल है। आज प्लास्टिक कचरे का उपयोग भी कुछ इसी तर्ज पर किया जा रहा है। लोग अपना काम बनाने के लिए प्लास्टिक के सामानों का प्रयोग कर रहे हैं, और बाद में यही सामान कचरा बन जाता है, जो जनता के लिए गंभीर समस्याओं को पैदा कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कचरा फैंकने वाले लोगों का इतना नहीं मालूम कि यह कचरा हमारे लिए भी समस्या बन रहा है। देश के लिए गंभीर स्थिति पैदा कर रहा है। इस स्थिति को और आगे बढ़ने से रोकने के लिए छत्तीसगढ़ की सरकार ने अभूतपूर्व कदम उठाया है, लेकिन क्या सरकार के कदम उठाने मात्र से यह सफल हो सकेगा। नहीं हो सकता। इसके लिए जनता की भागीदारी भी बहुत मायने रखती है। वास्तव में जिस देश की जनता अपने देश के प्रति तादात्म्य स्थापित करते हुए कार्य करती है, वह देश बहुत सुंदर और स्वच्छ होता है। हम भारत देश के निवासी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए हमारे आचरण और कार्य में भारतीय संस्कृति का प्रदर्शन होना चाहिए। हमारी संस्कृति यही कहती है कि सर्वे भवन्तु सुखिन: अर्थात सभी सुखी हों, लेकिन आज के दौर में हमें यह भी चिंतन करना होगा कि क्या हमारे कार्यों से जनता को सुख की अनुभूति होती है, हम देश को स्वस्थ बनाने के लिए अपनी ओर से कितना योगदान दे रहे हैं, अगर इसका उत्तर नहीं में है तो हमारे अंदर भारतीयता का अभाव है। लोग कितना भी कहें कि हम भारतीय नागरिक हैं, लेकिन जब तक हमारी दिनचर्या में भारतीयता दिखाई नहीं देगी, तब तक हम भारतीय नहीं हैं। आज हम देख रहे हैं कि हम भारत के नागरिक ही जाने अनजाने में एक दूसरे के लिए समस्याओं का निर्माण करते जा रहे है। यह गति लगातार बढ़ती जा रही है। देश में वातावरणीय समस्याओं का प्रादुर्भाव हमारी अपनी देन है, जो जाने या अनजाने में हमने ही पैदा की हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हम यह भी जानते हैं कि प्लास्टिक कचरे के कारण जिन बस्तियों में पानी भर जाता है, उसका एक मात्र कारण भी तो हम ही हैं। नालियां जाम होने की वजह से ही ऐसे हालात बन रहे हैं। स्वच्छ हवा प्रदान करने वाले पेड़ पौधे भी प्रदूषित वातावरण का शिकार हो रहे हैं। ऐसी स्थिति में हमें ताजी हवा कैसे मिल सकती है। आज यह सबसे बड़ा सवाल है। इस सवाल का एक मात्र जवाब यही है कि हमें चैतन्य शक्ति का जागरण करके देश को स्वच्छ वातावरण देने के लिए प्लास्टिक कचरे से मुक्ति पाना है। अगर हम ऐसा कर सके तो यह तय है कि हमारा देश फिर से तरो ताजा हवा प्रदान करने वाला देश बन जाएगा। इसके लिए सरकार की योजना में हमें भी पूरी तरह से सहभागी बनना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-सुरेश हिन्दुस्थानी</strong></em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Oct 2017 05:28:47 +0530</pubDate>
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                <title>प्रदूषण नियंत्रण हेतु सख्ती जायज</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय हरियाली ट्रिब्यूनल ने देश की महत्वपूर्ण नदी गंगा के किनारों पर गंदगी फैलाने वालों से 50 हजार रुपए जुर्माने वसूलने की बात कही है। प्रदूषण रोकने के लिए नदियों की सफाई के लिए यह पहला व महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि इसे इतनी ही वचनबद्धता से लागू किया जाए तो अवश्य अच्छे परिणाम आ सकते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/strict-justified-on-pollution-control/article-2308"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/garbage.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय हरियाली ट्रिब्यूनल ने देश की महत्वपूर्ण नदी गंगा के किनारों पर गंदगी फैलाने वालों से 50 हजार रुपए जुर्माने वसूलने की बात कही है। प्रदूषण रोकने के लिए नदियों की सफाई के लिए यह पहला व महत्वपूर्ण प्रयास है। यदि इसे इतनी ही वचनबद्धता से लागू किया जाए तो अवश्य अच्छे परिणाम आ सकते हैं। इस फैसले के पीछे ट्रिब्यूनल की सदस्यों की यही भावना होगी कि लोग सख्ती के बिना कानूनों की पालना नहीं करते। प्रेरणा के साथ-साथ सख्ती का अपना विशेष महत्व है। दरअसल उद्योगपतियों के साथ-साथ आमजन की सोच बन गई है कि खाली स्थान या नदियां-नालियां तो कूड़ादान ही हैं। गंगा नदी के किनारे सैंकड़ों बड़े-छोटे कारखानों का दूषित पानी गंगा में बहाया जा रहा था जिस कारण पहाड़ों से आने वाला प्राकृतिक शुद्ध पानी बुरी तरह अशुद्ध हो गया।</p>
<p style="text-align:justify;">जनता की लापरवाही सरकार के लिए चिंता का कारण व चुनौती बन गई। आखिर केंद्र सरकार को इस नदी की सफाई के लिए एक अलग मंत्रालय बनाना पड़ा। इस मिशन के लिए हजारों करोड़ का बजट आरक्षित रखा गया है। यदि आम जनता व उद्योगपति देश में पानी की कमी के संकट को समझकर गंगा की सफाई प्रति बाखूबी जिम्मेदारी निभाएं तो हजारों करोड़ का बजट शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य भलाई कार्यों पर खर्च किया जा सकता है। दुखद बात यह है कि गंगा की सफाई का संकट लोगों की लापरवाही की देन है। केवल गंगा ही नहीं सतलुज, ब्यास, घग्गर सहित अन्य नदियां बुरी तरह से दूषित हो गई हैं। अब तो इन्हें नदियां कहना भी उचित नहीं। घग्गर नदी जो कभी शुद्ध पानी के लिए जानी जाती थी। आज फैक्टरियों के गंदे पानी की निकासी का एक नाला बनकर रह गयी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह शुभ संकेत हैं कि केंद्र ने गंगा की सफाई के लिए सख्ती का रास्ता अपनाया है। सफाई देश की विरासत की पहचान है जो लुप्त हो रही है। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां, जिन्होंने गंगा नदी सहित देश के 32 शहरों में सफाई महा -अभियान चलाए, आपजी के विचार भी ग्रीन ट्रिब्यूनल के निर्णयों का समर्थन करने वाले हैं। पूज्य गुरू जी के विचार हैं कि सफाई न रखने पर भी जुर्माना होना चाहिए भले ही 2-3 रुपए ही क्यों न हो। बस अब जरूरत है कि ग्रीन ट्रिब्यूनल अपने निर्णय को प्रभावी में लाए।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jul 2017 04:10:01 +0530</pubDate>
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                <title>गंगा के पास ‘नो डेवलपमेंट जोन’, कचरा फैलाया तो 50 हजार रुपये का जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने वीरवार को गंगा नदी और इसके आस-पास होने वाले प्रदूषण को लेकिर सख्ती बरतते हुए हरिद्वार से उन्नाव के बीच आने वाला गंगा नदी के पास 100 मीटर की परिधि का क्षेत्र ‘नो डेवलपमेंट जोन’ के तौर पर घोषित कर दिया है साथ ही गंदगी फैलाने वालों पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/rs-50-thousand-fined-for-spread-of-garbage-near-ganga/article-2270"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/ganga.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) ने वीरवार को गंगा नदी और इसके आस-पास होने वाले प्रदूषण को लेकिर सख्ती बरतते हुए हरिद्वार से उन्नाव के बीच आने वाला गंगा नदी के पास 100 मीटर की परिधि का क्षेत्र ‘नो डेवलपमेंट जोन’ के तौर पर घोषित कर दिया है साथ ही गंदगी फैलाने वालों पर 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाने का निर्देश दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राधिकरण ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि हरिद्वार से उन्नाव के बीच गंगा नदी के तट से 500 मीटर की दूरी तक किसी तरह का कचरा नहीं होना चाहिए और गंगा नदी के किनारे कचरा फैलाने वालों पर 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया जाए। एनजीटी के अनुसार, करीब 7,304 करोड़ रुपये इन क्षेत्रों पर खर्च किया गया है लेकिन यह भी व्यर्थ चला गया। एनजीटी ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि नियोजन व नियमन में मौलिक त्रुटियां रहीं, जिसके कारण गंगा की सफाई नहीं हो पाई।</p>
<h2 style="text-align:justify;">इंटस्ट्री के बंद करने का आदेश</h2>
<p style="text-align:justify;">इस वर्ष के शुरूआत में ट्रिब्यूनल ने निर्णय लिया था कि गंगा के सर्वाधिक प्रदूषित क्षेत्रों उत्तराखंड के हरिद्वार से उत्तर प्रदेश के कानपुर के बीच की जांच की जाएगी ताकि स्थिति की स्पष्ट तस्वीर सामने आए। सुप्रीम कोर्ट से भेजे गए 32 वर्ष पुराने नदी प्रदूषण के एक मामले पर ग्रीन ट्रिब्यूनल में 6 फरवरी से सुनवाई की जा रही है। अप्रैल में एनजीटी ने नदी किनारे स्थित 13 प्रदूषण फैलाने वाले इंटस्ट्री के बंद करने का आदेश दिया था व कई अन्यइंडस्ट्री पर जुर्माना भी लगाया था।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2017 05:19:49 +0530</pubDate>
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