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                <title>Glacier - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>ग्लेशियरों के पिघलने से बढ़ता संकट</title>
                                    <description><![CDATA[देसम में दिनोदिन आ रहा बदलाव एक भीषण समस्या बन चुका है। ग्लोबल वार्मिंग ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। नए शोध इस बात के प्रमाण हैं कि भले ही ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रोक दिया जाए, इसके बावजूद दुनिया में तकरीबन दो लाख पंद्रह हजार ग्लेशियरों में से आधे से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/growing-crisis-due-to-melting-of-glaciers/article-44223"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-03/glacier.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देसम में दिनोदिन आ रहा बदलाव एक भीषण समस्या बन चुका है। ग्लोबल वार्मिंग ने इसमें अहम भूमिका निभाई है। नए शोध इस बात के प्रमाण हैं कि भले ही ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान पर रोक दिया जाए, इसके बावजूद दुनिया में तकरीबन दो लाख पंद्रह हजार ग्लेशियरों में से आधे से ज्यादा और उनके द्रव्यमान का एक-चौथाई हिस्सा इस सदी के अंत तक पिघल जाएगा। बीती सदी में समुद्र के जल स्तर में जो बढ़ोतरी हुई है, उसका एक-तिहाई हिस्सा ग्लेशियरों के पिघलने से आया है। दरअसल ग्लोबल वार्मिंग के चलते दुनियाभर के ग्लेशियर पिघल-पिघलकर टुकड़ों में बंटते चले गए। इसका कारण पर्वतीय इलाकों में तापमान में बढ़ोतरी की दर दोगुना होना है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Happy Holi 2023 : कैमिकलयुक्त रंगों से करें परहेज, तिलक लगाकर खेलें फूलों की होली" href="http://10.0.0.122:1245/avoid-chemical-colors-apply-tilak-and-play-holi-of-flowers/">Happy Holi 2023 : कैमिकलयुक्त रंगों से करें परहेज, तिलक लगाकर खेलें फूलों की होली</a></p>
<p style="text-align:justify;">चिंता यह कि ग्लेशियर पिघलने से बनी झीलों से आने वाली बाढ़ से भारत समेत समूची दुनिया के तकरीबन डेढ़ करोड़ लोगों के जीवन पर खतरा मंडराने लगा है। ब्रिटेन की न्यू कैसल यूनिवर्सिटी के शोध से इसका खुलासा हुआ है। नेचर कम्युनिकेशंस नामक जर्नल में प्रकाशित रिपोर्ट बताती है कि दुनिया के डेढ़ करोड़ लोगों में सबसे ज्यादा खतरा भारत के लोगों को है, जहां तीस लाख से ज्यादा लोगों का जीवन ग्लेशियर से आने वाली बाढ़ के कारण खतरे में है। इसके बाद पाकिस्तान का नम्बर है, जहां करीब 7000 से ज्यादा ग्लेशियर हिमालय, हिन्दूकुश और कराकोरम पर्वत शृंखलाओं में मौजूद हैं जहां की बीस लाख से भी ज्यादा आबादी पर यह खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं की टीम के प्रमुख केरोलिन टेलर की मानें तो उनकी टीम के शोधकर्ताओं ने पूरी दुनिया में 1089 ग्लेशियर झीलों की घाटी की पहचान की है। इन ग्लेशियरों की घाटियों के 50 किलोमीटर के दायरे में रहने वाले लोगों की तादाद शोधकतार्ओं ने 1.5 करोड़ आंकी है। यह आबादी भारत, पाकिस्तान, चीन और पेरू की है।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट के मुताबिक उपग्रह द्वारा साल 2020 में किए गए अध्ययन में बताया गया है कि बीते 30 सालों में ग्लोबल वार्मिंग में 50 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है जिसके कारण दुनिया के ग्लेशियरों से बनी झीलें टुकड़ों में बंट गयीं। दरअसल, तापमान में बढ़ोतरी और जलवायु में बदलाव को रोकने की दिशा में जो भी अभी तक प्रयास किए गये हैं, उनका कोई कारगर परिणाम सामने नहीं आ सका है। याद रहे जीवाश्म ईंधन जलाने से मानव इतिहास में जितना उत्सर्जन हुआ है, उसका आधा बीते केवल 30 सालों में ही हुआ है। यदि 2015 में जारी वैश्विक तापमान बढ़ोतरी के 10 सालों के औसत पर नजर डालें तो पता चलता है कि औद्योगिक क्रांति से पूर्व की तुलना में तापमान में 0.87 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि दर्ज की गई थी जो 2020 में यानी केवल पांच साल में ही बढ़कर 1.09 डिग्री सेल्सियस हो गई। केवल पांच साल में इसमें 25 फीसदी की बढ़ोतरी हालात की गंभीरता की ओर इशारा करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कानेंगी मेलन यूनिवर्सिटी और फेयरबैंक्स यूनिवर्सिटी के शोध के अनुसार यदि जलवायु परिवर्तन की दर इसी तरह बरकरार रही तो इस सदी के आखिर तक दुनिया के दो-तिहाई ग्लेशियरों का अस्तित्व ही खत्म हो जाएगा। यदि दुनिया आने वाले दिनों में वैश्विक तापमान को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक रखने में कामयाब रहती है उस हालत में भी आधे ग्लेशियर गायब हो जायेंगे। लेकिन हमारे पास क्षमता है कि हम ग्लेशियर के पिघलने की दर को सीमित कर उसके अंतर को कम कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि छोटे ग्लेशियरों के लिए तो काफी देर हो चुकी है और वह विलुप्ति की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। समुद्र के जलस्तर में यदि 4.5 इंच की बढ़ोतरी होती है तो समूची दुनिया में तकरीबन एक करोड़ से अधिक लोग उच्च ज्वार रेखा से नीचे होंगे। तात्पर्य यह कि समुद्र तटीय क्षेत्रों में रहने वाले लोग इससे सर्वाधिक प्रभावित होंगे। दरअसल, जलवायु परिवर्तन के अलावा बढ़ती मानवीय गतिविधियां और जरूरत से ज्यादा दोहन भी ग्लेशियरों के पिघलने का एक बहुत बड़ा कारण है। ग्लेशियरों पर मंडराते संकट को नकारा नहीं जा सकता। यदि यह पिघल गए तो ऐसी स्थिति में सारे संसाधन खत्म हो जाएंगे और ऐसी आपदाओं में बेतहाशा बढ़ोतरी होगी।<br />
<strong>धुर्जति मुखर्जी वरिष्ठ लेखक और स्वतंत्र टिप्पणीकार (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Mar 2023 14:48:54 +0530</pubDate>
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                <title>उत्तराखंड में चीन सीमा पर ग्लेशियर टूटा, आठ की मौत, छह गंभीर</title>
                                    <description><![CDATA[देहरादून (एजेंसी)। उत्तराखंड में चमोली जनपद से लगे चीन सीमा पर ग्लेशियर टूटने के कारण सुमना स्थित बीआरओ कैम्प के पास हुए भारी हिमपात में भारतीय सेना ने 384 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है जबकि 8 शव बरामद हुए हैं तथा 6 अन्य की हालत गम्भीर है। भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशक जनसम्पर्क ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/glacier-breaks-on-china-border-in-uttarakhand-alert-issued/article-23154"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-04/glacier-breaks.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>देहरादून (एजेंसी)।</strong> उत्तराखंड में चमोली जनपद से लगे चीन सीमा पर ग्लेशियर टूटने के कारण सुमना स्थित बीआरओ कैम्प के पास हुए भारी हिमपात में भारतीय सेना ने 384 लोगों को सुरक्षित निकाल लिया है जबकि 8 शव बरामद हुए हैं तथा 6 अन्य की हालत गम्भीर है। भारतीय सेना के अतिरिक्त महानिदेशक जनसम्पर्क ने टिवटर के माध्यम से बताया कि अभी तक कुल 384 व्यक्ति सुरक्षित निकाले जा चुके हैं। राहत कार्य प्रगति पर है। इस बीच मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत हेलीकॉप्टर से प्रभावित क्षेत्र का निरीक्षण कर स्थिति का आकलन कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड के चमोली जिले से लगे भारत-चीन (तिब्बत) सीमा क्षेत्र पर नीती घाटी स्थित सुमना में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के कैंप के समीप ग्लेशियर टूटकर गिर गया। राज्य सरकार ने अलर्ट जारी किया है। मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ट्वीट करके इसकी पुष्टि की है। बीआरओ के कमांडर कर्नल मनीष कपिल ने भी इस हादसे की पुष्टि की है। सूत्रों के अनुसार, बुधवार से लगातार हो रही बर्फबारी और बारिश के बीच एक ग्लेशियर टूटा और उसका मलबा मलारी-सुमना सड़क पर आ गिरा। सिंह ने देर रात ट्वीट करके कहा कि नीती घाटी के सुमना में ग्लेशियर टूटने की सूचना मिली है। इस संबंध में मैंने एलर्ट जारी कर दिया है। मैं जिला प्रशासन और बीआरओ से लगातार संपर्क में हूँ।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला प्रशासन को मामले की पूरी जानकारी प्राप्त करने के निर्देश दे दिए हैं। एनटीपीसी और अन्य परियोजनाओं में रात के समय काम रोकने के आदेश दे दिए हैं ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। सूत्रों ने बताया कि बीआरओ कमांडर कर्नल कपिल ने कहा कि मजदूरों को कोई नुकसान हुआ कि नहीं इसके बारे जानकारी जुटाई जा रही है। बताया गया है कि यहां बीआरओ के मजदूर सड़क निर्माण कार्य में जुटे हुए थे। अत्यधिक बर्फबारी होने से सीमा क्षेत्र में वायरलेस भी काम नहीं कर रहे हैं। पिछले तीन दिनों से नीती घाटी में अत्यधिक बर्फबारी हो रही है। मलारी से आगे जोशीमठ-मलारी हाईवे भी बर्फ से ढक गया है, जिससे सेना और आईटीबीपी के वाहनों की आवाजाही भी बाधित हो गई है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 24 Apr 2021 12:10:52 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>चमोली जल प्रलय में हिमाचल के 8 युवक लापता, नहीं मिल रहा सुराग</title>
                                    <description><![CDATA[शिमला (एजेंसी)। उत्तराखंड के चमोली जिले में गत दिनों ग्लेशियर टूटने के बाद जल प्रलय में हिमाचल प्रदेश के आठ और युवकों के लापता होने का सूचना प्राप्त हुई है। इससे पूर्व तीन युवकों के लापता होने की बात सामने आई थी। लापता युवकों में रामपुर की किन्नू पंचायत के पांच, शिंगला के दो और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/8-youth-of-himachal-missing-in-chamoli-deluge-no-clue-found/article-21636"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-02/camoli-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>शिमला (एजेंसी)।</strong> उत्तराखंड के चमोली जिले में गत दिनों ग्लेशियर टूटने के बाद जल प्रलय में हिमाचल प्रदेश के आठ और युवकों के लापता होने का सूचना प्राप्त हुई है। इससे पूर्व तीन युवकों के लापता होने की बात सामने आई थी। लापता युवकों में रामपुर की किन्नू पंचायत के पांच, शिंगला के दो और कांगड़ा जिले के पालमपुर का एक युवक शामिल है। अभी तक इनका कोई सुराग नहीं लगा है। इनके परिजन चमोली रवाना हो गए है। युवकों की पहचान किन्नू के रुनपू गांव के कैलाश चंद, आशीष, बागवट के दीवान चंद, देवेंद्र और अमित जबकि शिंगला के पवन कुमार और राकेश कुमार, पालमपुर के राकेश कपूर हैं।</p>
<h3 style="text-align:center;"><strong>जल प्रलय के समय किन्नू पंचायत के युवक परियोजना में मरम्मत कार्य करने के लिए गए हुए थे</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">विद्युत परियोजना की निमार्णाधीन सुरंग में फंसे सिरमौर जिले के माजरा गांव के जीत सिंह ठाकुर का भी अभी कोई सुराग नहीं लगा है। शिंगला पंचायत के पवन और राकेश परियोजना में काम करते हैं। बताया जाता है कि जल प्रलय के समय किन्नू पंचायत के युवक परियोजना में मरम्मत कार्य करने के लिए गए हुए थे। अभी तक इनका कोई सुराग नहीं लग पाया है। इनके परिजन किसी सुखद समाचार की उम्मीद हुये हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रुनपु गांव के शिक्षक देवराज ने बताया कि कैलाश चंद कई वर्षों से इस परियोजना में कार्यरत थे। उन्होंने बेरोजगार युवाओं को अपने साथ परियोजना में काम दिलाया और सभी साथ ही रहते थे। उन्होंने बताया कि लापता युवक आशीष करीब दो माह पूर्व ही काम पर गया था। रविवार को सुबह उसने परिजनों से बातचीत की थी। लेकिन जलप्रलय आने के बाद किसी से भी सम्पर्क नहीं हो पाया है। राज्य के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर के अनुसार उन्होंने युवकों के परिजनों के ठहरने और खाने पीने की व्यवस्था के लिये उत्तराखंड सरकार से बात की है। प्रदेश सरकार इन लोगों के प्रति चिंतित है।</p>
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                <pubDate>Wed, 10 Feb 2021 09:00:18 +0530</pubDate>
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                <title>अंटार्कटिका में दिल्ली से 4 गुना बड़ा हिमखंड हुआ अलग</title>
                                    <description><![CDATA[वैश्विक समुद्री स्तर में होगी 10 सेमी. की बढ़ोतरी वैज्ञानिक बोले-कार्बन उत्सर्जन बना कारण नई दिल्ली (एजेंसी)। अंटार्कटिका में मौजूद आईसबर्ग (हिमचट्टान) लार्सेन सी का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूट कर अलग हो गया है। 5800 वर्ग किलोमीटर के इस टुकड़े के आकार का अंदाजा हम इससे लगा सकते हैं कि ये राजधानी दिल्ली के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/breaks-large-part-of-glacier-in-antarctica/article-2271"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/glacier.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">वैश्विक समुद्री स्तर में होगी 10 सेमी. की बढ़ोतरी</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>वैज्ञानिक बोले-कार्बन उत्सर्जन बना कारण</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> अंटार्कटिका में मौजूद आईसबर्ग (हिमचट्टान) लार्सेन सी का एक बहुत बड़ा हिस्सा टूट कर अलग हो गया है। 5800 वर्ग किलोमीटर के इस टुकड़े के आकार का अंदाजा हम इससे लगा सकते हैं कि ये राजधानी दिल्ली के आकार से 4 गुना तो गोवा से डेढ़ गुना बड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">लार्सेन सी अंटार्कटिका में मौजूद हिमचट्टानों में चौथी सबसे बड़ी हिमचट्टान है। इससे अलग हुए हिमखंड का वजन खरबों टन और इसे संभवत: हिमचट्टान से अलग हुआ अब तक का सबसे बड़ा खंड बताया जा रहा है। ब्रिटिश अंटार्कटिक सर्वे के अनुसार यह हिमखंड 10 से 12 जुलाई के बीच टूटकर अलग हुआ है। इसका नाम ए68 रखे जाने की संभावना है। इसका आकार बाली के इंडोनेशियाई द्वीप के बराबर हो सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हिमखंड टूटने का असर</h3>
<p style="text-align:justify;">इस घटना का दुनिया के पर्यावरण पर असर पड़ सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार इस हिमखंड के अलग होने से वैश्चिवक समुद्री स्तर में 10 सेमी. की बढ़ोतरी हो जाएगी। साथ ही इस महाद्वीप के पास से होकर जाने वाले जहाजों को भी दिक्कत आ सकती है।<br />
वैज्ञानिकों के अनुसार समुद्र स्तर पर इस हिमखंड के अलग होने से तुरंत प्रभाव तो नहीं आएगा लेकिन इससे लार्सेन सी हिमचट्टान का फैलाव 12 प्रतिशत तक कम हो जाएगा। बता दें कि लार्सेन ‘ए’ और ‘बी’ हिमचट्टानें पहले ही ढह चुकी हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">टूटने का कारण</h3>
<p style="text-align:justify;">वैज्ञानिक इस हिमखंड के अलग होने का कारण कार्बन उत्सर्जन को बता रहे हैं। उनका कहना है कि कार्बन उत्सर्जन से वैश्विक तापमान बढ़ रहा है जिससे ग्लेशियर जल्दी पिघल रहे हैं। भारत पर इसके असर की बात करें तो अरब सागर पर इसका प्रभाव जल्द नहीं दिखेगा। लंबे समय बाद इसका असर हो सकता है। वहीं, समुद्री स्तर बढ़ने से अंडमान और निकोबार के कई टापू और बंगाल की खाड़ी में सुंदरवन के हिस्से डूब सकते हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कहां जा रहा हिमखंड</h3>
<p style="text-align:justify;">शोधकर्ताओं के अनुसार यह हिमखंड कम समय में तेजी से नहीं बढ़ेगा। लेकिन इस पर निगरानी रखने की जरूरत है। इसके बारे में अभी कुछ निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता। इसके टुकड़े भी हो सकते हैं और यह एक ही टुकड़े में भी रह सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p> </p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Jul 2017 05:34:39 +0530</pubDate>
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