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                <title>‘मी-टू’: कौन सच्चा कौन झूठा</title>
                                    <description><![CDATA[भले ही बहुत से आरोप झूठे साबित होंगे, कुछ बलैकमेल करने या मनचाहा काम न हो पाने के चलते भी महिला उत्पीड़न के दोष होंगे लेकिन हाल ही ‘मी-टू’ नाम के इस शब्द ने देश मे इतनी खलबली मचा रखी है जिससे हर जगह भूचाल सा आया हुआ है। बॉलीवुड़ एक्ट्रैस तनुश्री दत्ता ने जब […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/me-to-who-is-a-true-liar/article-6257"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/me-too-copy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भले ही बहुत से आरोप झूठे साबित होंगे, कुछ बलैकमेल करने या मनचाहा काम न हो पाने के चलते भी महिला उत्पीड़न के दोष होंगे लेकिन हाल ही ‘मी-टू’ नाम के इस शब्द ने देश मे इतनी खलबली मचा रखी है जिससे हर जगह भूचाल सा आया हुआ है। बॉलीवुड़ एक्ट्रैस तनुश्री दत्ता ने जब से नाना पाटेकर पर यौन शोषण का आरोप लगाया है तब से इस मामले ने इतना तूल पकड़ लिया कि देश की हर वर्ग की महिला इसमें रुचि ले रही है जिसे लेकर ‘मी-टू’ नाम से कैंपेन तक चल पड़ा। केन्द्रीय मंत्री से लेकर सैंकड़ों फिल्मी सितारों व अन्य क्षेत्र के बड़े-बड़े लोगों पर यह आरोप लग रहा है। हाल ही में साजिद खान पर भी यह आरोप लगा जिसके बाद एक्टर अक्षय कुमार ने उनकी फिल्म तक छोड़ दी। इसके अलावा ‘मी-टू’ को लेकर तमाम फेहरिस्त है। लेकिन इस प्रकरण को लेकर कुछ लोगों के मन यह भी बात आ रही है कि जो घटना एक लंबे समय पहले बीत चुकी क्या उसकी हकीकत की तह मे जाना इतना आसान होगा कि उस मामले में कुछ निकल पाएगा। इसके अलावा इतने पुराने मुद्दे पर तफशीश करना भी बेहद मुश्किल होगा व कानून के जानकारों की मानें तो हाल ही में हुई घटना को लेकर कोई भी मुजरिम या आरोपी गुनाह नहीं कबूलता तो फिर भी पुराने मामले की प्रक्रिया है। साथ ही इसमे निष्कर्ष के लिए लाइ डीटेक्टर या नार्को टेस्ट करना पड़ेगा जो इतना आसान नहीं होगा। बहरहाल हमें यह बात बेहद गंभीरता से समझनी चाहिए जो लोग बदनामी के दंश को झेल रहे हैं उनसे पूछिए दरअसल ‘मी-टू’के जरिए जो महिलाएं खुद पर होने वाले अत्याचारों की दास्तान को बयां कर रहीं हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घटना से उनके मन मे बदनामी का डर तो होगा लेकिन इस बदनामी से ज्यादा दर्द उन्हें उस अपमान ने दिया है जो उन्होनें पांच या दस साल पहले या फिर कुछ समय पहले झेला था लेकिन डर की वजह से उस पर कुछ भी बोलने से परहेज कर रहीं थीं क्योंकि दरअसल डर समाज का था, खुद के अपमान का था और इन खुलासों के बाद लोगों का कि उनके प्रति नजर और नजरिए में क्या बदलाव होगा । आखिर इस डर से कभी तो बाहर आना ही था क्योंकि अपने मन और दिल को कब तक भारी करके जी सकता है कोई भी इंसान ? दोषी कोई भी हो लेकिन इन आरोपों ने साबित कर दिया है कि महिलाएं आज भी सुरक्षित नहीं हैं भले ही वो अनपढ़ हो या पढ़ी लिखी हों चाहे फिर सेलिब्रिटी । भारत में महिलाओं पर होने वाले अत्याचारों की हकीकत से सिर्फ देश ही नहीं बल्कि दुनिया भी वाकिफ है।</p>
<p style="text-align:justify;">मिसाल के तौर पर थॉमसन रायटर्स फाउंडेशन के हालिया सर्वे को अगर आधार बनाते हैं तो भारत महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश है। इसी सर्वे में 2011 में भारत को महिला सुरक्षा के मामले में चौथे स्थान पर रखा गया। अफगानिस्तान, डैमोक्रेटिक रिपब्लिक आॅफ कॉन्गो, पाकिस्तान, भारत और सोमालिया, महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित देश बताए गए थे, लेकिन हालिया सर्वे हैरान करने वाला और चौंकाने वाला रहा है। अब इस मामले में भारत पहले नंबर पर आ गय़ा है। महिलाओं की सुरक्षा का मामला गंभीर है, इसे लेकर सरकार को संजीदा होने की जरूरत है। कुछ आंकड़े यह हकीकत भी बयां करते हैं कि भारत में महिलाएं घर में पार्टनर की हिंसा का भी सबसे ज्यादा शिकार होती हैं। बहुत से मामले तो घर की चारदीवारी से बाहर नहीं निकल पाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसकी कहीं वजह मानी जाती है जैसे कि कहीं सामाजिक वर्जनाएं हैं तो कहीं अपनों का डर या फिर यह भी कह सकते हैं कि कहीं पर संशय और दुविधा की स्थिति लेकिन इस नकारातमकता का रुप चाहे जो भी हो सभी दुर्भाग्यपूर्ण हैं। महिला आयोग का कहना है कि यह आंकड़े भारत जैसे देश मे पैसे व सत्ता के दम पर न जाने कितने मामले दब जाते हंै। महिला आयोग के मुताबिक मौजूदा सरकार में कुछ गैर सरकारी संगठनों पर कार्रवाई की गई है । यह बात बेहद हैरान करती है कि अफगानिस्तान,सीरिया और पाकिस्तान को क्राइम लिस्ट में बेहतर स्थिति में रखा गया है जबकि इन देशों में महिलाओं की स्थिति और उनपर होने वाले अत्याचारों के बारे में बातें किसी से छुपी नहीं हैं। इन रिपोर्ट्स पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने चुप्पी साध रखी है।</p>
<p style="text-align:justify;">मीटू पर तमाम लोगों की राय लगातार आ रही है। बॉलीवुड़ की एक्ट्रैस सुष्मिता सैन का कहना है कि जब तक इस मामले पर गंभीरता से जांच करते हुए कुछ आरोपियों पर कार्यवाही नहीं होती तो इस कैंपेन का कोई फायदा नहीं होने वाला। इधर महिलाओं के विपक्ष मे भी कुछ लोगों का मानना है कि इस मामले मे महिलाएं त्वरित ही आवाज क्यों नहीं उठाती ? गलती एकतरफा कभी नहीं समझी जाती क्योंकि यह आरोप विपरीत भी समझा जा सकता है क्योंकि यदि अब किसी लड़की का कहीं कोई न काम न बना या यू कहें कि उसकी नौकरी न लगी तो वह मीटू प्रकरण अपनाकर ब्लैकमेल कर सकती है व कानून का दुरुपयोग होना शुरू हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके पुलिस को स्पेशल स्टॉफ,क्राइम सेल या अन्य विभागों की तरह एक अलग टीम गठित कर देनी चाहिए क्योंकि जिस तरह मीटू फैल चुका इसके मामलों को सुलझाने में ही पुलिस का एक अच्छा खासा समय निकल जाएगा व इसके अलावा दूसरी व अहम बात यह है कि मीटू के अधिकतर मामले हाईप्रोफाइल हैं जिसमे पुलिस को अधिक गंभीरता दिखानी पड़ेगी। अब तो यह सारा खेल पुलिस की काबिलियत व दम पर टिका है क्योंकि यह उतना भी आसान नहीं होगा जितना लोग समझ रहे हैं। जैसा कि हमने पहले भी जिक्र किया कि हाल ही में देश की पुलिस पर पहले से ही काम का बहुत प्रैशर है। अभी भी करोडों मुद्दे पेंडिग चल रह हैं लेकिन अब पेंडिग घटना को ताजा करके सॉल्व करना पुलिस के लिए भी बेहद चुनौतीपूर्ण होगा। <em><strong>योगेश कुमार सोनी</strong></em></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 14 Oct 2018 17:02:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>&amp;#8230;कभी अस्त नहीं हो सकता ‘सच’ का सूरज</title>
                                    <description><![CDATA[12 महीने, 365 दिन या एक बरस। मुमकिन है, आप सबके लिए इन तीनों ही संज्ञाओं का एक ही रटा-रटाया (The sun of ‘truth)  अर्थ हो यानि महज ‘कलेंडर’ में बदलाव। लेकिन, हर गुजरते पल के साथ एक अनकही-अनसुनी-अंजानी सी ‘पीर’ सहने वाले किसी भी शख्स से चंद पल बतियाएंगे तो बखूबी मालूम चल जाएगा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/can-never-set-not-true-in-the-sun/article-5551"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/can-never-set-not-true-in-the-sun.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:justify;"><strong>12 महीने, 365 दिन या एक बरस। </strong></h1>
<p style="text-align:justify;">मुमकिन है, आप सबके लिए इन तीनों ही संज्ञाओं का एक ही रटा-रटाया<strong> (The sun of ‘truth)</strong>  अर्थ हो यानि महज ‘कलेंडर’ में बदलाव। लेकिन, हर गुजरते पल के साथ एक अनकही-अनसुनी-अंजानी सी ‘पीर’ सहने वाले किसी भी शख्स से चंद पल बतियाएंगे तो बखूबी मालूम चल जाएगा कि, वक्त की ‘धार’ और ‘मार’, दोनों ही कितनी भयावह होती हैं? भारतवर्ष ही नहीं, वरन् समूचे विश्व में आध्यात्मिक ऊर्जा और भक्ति का अलौकिक प्रकाश बिखेरने वाली विशाल सेवाशील संस्था ‘डेरा सच्चा सौदा’ से जुड़े हर अनुयायी ने ऐसी परिस्थितियों को झेला है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह बात और है कि, अपने पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की अनन्य प्रेरणा और मार्गदर्शन की बदौलत ऐसे किसी भी व्यक्ति के मन में कभी किसी के प्रति द्वेष या निंदा का भाव उत्पन्न नहीं हुआ। हर संकट, हर मुश्किल, हर चुनौती से विचलित हुए बिना वे आज भी पूर्ण मनोयोग से मानवता मात्र की सेवा में जुटे हैं और नित प्रतिदिन ईश्वर से बस यही प्रार्थना करते हैं कि, परमपिता परमेश्वर सर्वजगत का कल्याण करें और राह से भटकने वालों को सदा के लिए सत्यता के प्रकाश से आलोकित कर दें।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरी दुनिया में डेरा सच्चा सौदा की ख्याति और लोकप्रियता की मिसाल यूं ही नहीं दी जाती। यह अपनी ही अनुकरणीय कार्य शैली से जन-जन की सेवा का आदर्श उदाहरण पेश करने वाली ऐसा आदर्श संस्था है, जिसके सेवादारों की संख्या स्वयं किसी विश्व कीर्तिमान से कम नहीं। आप महज क्षण भर के लिए सेवा के किसी भी प्रारूप की परिकल्पना भर करिए, डेरे के अनगिनत अनुयायियों की ओर से पूर्ण नि:स्वार्थ भाव से की गई सेवा के अनेक उदाहरण देखते ही देखते आपकी आँखों के आगे नुमायां हो जाएंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">यकीनन, मानव कल्याण के प्रति सत्त समर्पित इस संस्था के मार्गदर्शक परम पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां से हासिल सकारात्मक दृष्टिकोण और आदर्श शिक्षाओं का ही काबिल-ए-तारीफ प्रतिफल है कि, तमाम चुनौतियों के बावजूद आज भी अनुयायियों का यह विशाल समूह पूरी लगन एवं निष्ठाभाव से अपने दायित्व निर्वहन में जुटा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वह भी तब, जब गत वर्ष कमोबेश इन्हीं दिनों में, समाज विरोधियों की पूज्य गुरु जी के खिलाफ रची गई साजिश का घिनौना रूप सामने आया था, ताकि उनके अनगिनत सेवादारों का मनोबल पूरी तरह समाप्त हो जाए और वे ‘व्रजआघात’ सरीखे इस असहनीय कष्ट को सहने योग्य तक न रह सकें।<br />
बाकायदा, गहन ‘रिसर्च’ और सुनियोजित ‘पटकथा’ का सहारा लेते हुए ऐसे तमाम शर्मनाक तथा मनमाने अनर्गल आरोप पूज्य गुरुजी पर लगाए गए, जिनकी रंगत पूरी तरह ‘स्याह’ होने के बावजूद यह कांच की मानिंद बखूबी साफ हो गया कि, इस देश में अब ‘सच’ का साथ देने वालों का कोई खैरख्वाह नहीं। इतना ही नहीं, लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहलाने वाले मीडिया के एक बड़े वर्ग की भूमिका भी इस पूरे प्रकरण से सवालों में घिर गई, जब महज ‘सुर्खियां’ बटोरने या ‘टीआरपी’ में खुद को सबसे आगे बनाए रखने की होड़ में हर किस्म की नैतिकता से लेकर सदाचार, परोपकार, सेवाभाव, जन कल्याण और सत्यता सरीखे समस्त आदर्श मानवीय मूल्यों को सिरे से दरकिनार कर दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">न कोई ठोस प्रामाणिक तथ्य और न ही किसी प्रकार की मान-मर्यादा। ऐसे हर पहलू को पूरी तरह नजरअंदाज करते हुए मीडिया का एक बड़ा वर्ग बाकायदा किसी तयशुदा ‘टीवी श्रृंखला’ की तर्ज पर समाज में चौतरफा दुष्प्रचार का जहर घोलता रहा। मीडिया के इसी रवैये के कारण न केवल डेरे के अनुयायियों की आस्था बुरी तरह आहत हुई बल्कि, देश के आम जनमानस को गुमराह करने में भी तकरीबन तमाम टीवी चैनलों से लेकर प्रिंट मीडिया तक का एक बड़ा वर्ग कतई पीछे नहीं रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">जन कल्याण में जुटे डेरा सच्चा सौदा के समूचे सांगठनिक ढांचे को पूरी तरह छिन्न-भिन्न करने की मंशा के साथ इतनी तेजी से इस षड्यंत्र का ताना-बाना बुना गया कि, दिन-रात समाजसेवा में लीन साध-संगत को कानोंकान कोई खबर न हो सकी। बची-खुची कसर, पर्दे के पीछे से ही पूरे खेल को अंजाम तक पहुंचाने में जुटी उन ‘सफेदपोश’ ताकतों ने पूरी कर दी, जो महज अपनी ‘स्वार्थपूर्ति’ की खातिर इतने खतरनाक ढंग से एक-एक चाल चलते चले जा रहे थे। तकरीबन, समूचे उत्तर भारत की हिंदी पट्टी में आम पाठकों से लेकर बुद्धिजीवी वर्ग को पूरी तरह भ्रमित करते हुए डेरा सच्चा सौदा और पूज्य गुरु जी पर तमाम किस्म के मिथ्या आरोप लगाने का यह सिलसिला बदस्तूर महीनों तक जारी रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">निष्ठुरता और अमानवीयता की हद तो तब हो गई, जब इस पूरी काली साजिश के कारण अंततोगत्वा पूज्य गुरु जी के सुनारियां जाने के बाद भी मीडिया के तथाकथित मठाधीशों ने एक क्षण के लिए भी उफ न करते हुए झूठे आरोपों और तथ्यों का पुलिंदा अपने-अपने मंचों पर परोसने का क्रम थमने नहीं दिया।<br />
लेकिन, यह भी निस्संदेह, पूज्य गुरु जी से ही हासिल आत्मबल और प्रेरणा का ही सशक्त प्रभाव रहा कि, न जाने कितने ही प्रकार के पूर्वाग्रहों और कुंठित मनोदशाओं से ग्रस्त मीडिया के इस बड़े तबके से मिलने वाली नित नई चुनौती का सामना करने में आपके प्रिय समाचार पत्र ‘सच कहूँ’ ने कहीं कोई कमी नहीं रख छोड़ी। हर रोज पूरी ताकत के साथ, ‘सच कहूँ’ अपने शीर्षक के अनुरूप और यथा नाम तथा गुण की तर्ज पर सत्य की मशाल लगातार रोशन किए रहा। मिथ्या आरोपों का मजबूती से जवाब देते हुए ‘सच कहूँ’ ने अपने मार्गदर्शक की प्रेरणा के सहारे डेरा सच्चा सौदा से जुड़े एक-एक अनुयायी तक बखूबी संदेश पहुंचाया कि, उन्हें मीडिया के एक बड़े वर्ग में दर्शाए गए झूठ से जरा भी घबराने की कोई आवश्यकता नहीं है बल्कि, वे पूरे आत्मविश्वास के साथ इस संकट का सामना करें और पूज्य गुरु जी से मिली सीख के सहारे जन-जन की सेवा में पहले की भांति स्वयं को क्षण प्रतिक्षण तल्लीन रखें।</p>
<p style="text-align:justify;">अब तक 79 विश्व कीर्तिमान अपने नाम कर चुके डेरे का यह गौरवशाली सफर पूरी आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ सतत् चलायमान है। मुश्किलें चाहें कितनी भी हों, राह में बाधाएं कितनी भी क्यों न आएं, ‘सत्य’ का सूरज कभी अस्त नहीं होगा…! वस्तुत: अपने कर्तव्य पथ से एक पल के लिए विमुख न होने वाले ये तमाम सेवाशील प्राणी हर रोज परमपिता से यही प्रार्थना करते हैं कि, वे अनर्गल और मिथ्या आरोप लगाने वालों को क्षमा करें क्योंकि, वे नहीं जानते कि, वे क्या कह रहे हैं ? वे अज्ञानी हैं, पतित हैं, अंध हैं, अश्रद्ध हैं, अविवेकी हैं, नश्वर हैं, वे धर्म-अधर्म नहीं जानते, दर्शन नहीं जानते, परोपकार नहीं जानते, वे पुण्य नहीं समझते और दान या सेवा की महिमा से पूरी तरह अंजान हैं। उनका केवल इतना उद्देश्य है कि, किसी भी तरह हमारी प्राचीन-अवार्चीन आध्यात्मिक संपन्नता और सेवाशीलता को समर्पित भावना तहस-नहस हो जाए। लेकिन, वे यह नहीं जानते कि, आध्यात्मिक संपन्नता ही तो हमारा वास्तविक बल है। न जाने कब से इसे तोड़ने के कुत्सित प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारी आस्थाओं, श्रद्धाओं, सेवाशीलता को अंधश्रद्धा साबित करने की साजिश रची जा रही है। इसी के तहत, हमारे मार्गदर्शकों पर मुकदमे किए गए, उन्हें जेल में डालकर यातनाएं दी जा रही हैं लेकिन, याद रखना चाहिए कि, सांच को आंच नहीं होती। युग कोई भी हो, चुनौतियों का पहाड़ कितना ही विशालकाय क्यों न हो, हमारे आदर्श हमेशा बेदाग साबित होते रहे हैं, क्योंकि चाहे शासन-प्रशासन हो या फिर न्याय व्यवस्था ही क्यों न हो, हर व्यवस्था में आध्यात्मिक तत्व अवश्य विद्यमान रहता है और इस मूल सार्वभौमिक तत्व में विश्वास रखने वाले किसी भी परिस्थिति में अध्यात्म की गहराई में झांककर सत्य खंगालने से एक क्षण के लिए पीछे नहीं हटते। वे अध्यात्म की विराट परिधि से पूरी तरह परिचित होते हैं, साथ ही डेरा सच्चा सौदा सरीखे मानव कल्याण के प्रति सत्त समर्पित आध्यात्मिक केंद्रों तथा उनके साधकों की महिमा भी जानते हैं और हमारी आध्यात्मिक संपन्नता को हर हाल में अक्षुण्ण बनाए रखने का अपना सबसे परम दायित्व भी…! पवन शर्मा</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 25 Aug 2018 12:59:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>सतगुरु की प्रीत ही सच्ची</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/love-with-god-is-only-true/article-358"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/guruji.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Sirsa:</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि जब तक इन्सान मुर्शिदे-कामिल की शरण में नहीं आता, उसे यह मालूम नहीं होता कि सच्ची प्रीत किसकी है। इन्सान बहुत से यार, दोस्त, मित्र बनाता है, रिश्ते-नाते जोड़ता है लेकिन जब कोई मुश्किल आती है, तब मालूम पड़ता है कि सारे ही रास्ता छोड़ गए। उस समय कोई हमराही बनता है तो वो है ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम।<br />
पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर आपने सतगुरु, अल्लाह को अपना बना रखा है तो वो आपके अंग-संग धुनकारें देता है और आप कभी अकेले नहीं होंगे। इसलिए सच्चा मीत, सच्चा मित्र जो दोनों जहान में साथी है, वो सतगुरु, ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, रब्ब है। अगर प्यार या वैराग्य करना है तो सतगुरु, मौला के वैराग्य में आओ। उसकी याद में तड़प कर तो देखो, वो क्या नहीं कर सकता। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान धन-दौलत, नौकरी, बेटा-बेटी, बहन-भाई के लिए आंसू बहाता है। यही आंसू कभी उस अल्लाह, राम के लिए बहाकर देखो तो एक-एक आंसू हीरे-मोती, जवाहरात बन जाएगा लेकिन हैरानी की बात यही है कि लोग मालिक के लिए नहीं बल्कि दुनियावी साजो-सामान के लिए पागल हो जाते हैं और वो पागलपन बता देता है कि आप किसमें, कितनी हद तक खोए हुए हैं। जिसे आदमी अपना पक्का साथी समझता है वो पता नहीं कब साथ छोड़ जाए। इसलिए अगर साथी ही बनाना है तो उस दोनों जहान के मालिक, अल्लाह, वाहेगुरु, राम को बनाइए।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Dec 2016 01:15:47 +0530</pubDate>
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