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                <title>Settle - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>आओ एक नई दुनिया बसाएं</title>
                                    <description><![CDATA[आज का मनुष्य भूलभूलैया में फंसा हुआ है। यदि देखा जाये तो संसार का विस्तार यानी सुविधावादी और भौतिकवादी जीवनशैली एक प्रकार की भूलभूलैया ही है। भोग के रास्ते चारों ओर खुले हुए हैं। धन, सत्ता, यश और भोग – इन सबका जाल बिछा है और यह जान इतना मजबूत है कि एक बार आदमी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/lets-settle-down-a-new-world/article-4686"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/dilli.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज का मनुष्य भूलभूलैया में फंसा हुआ है। यदि देखा जाये तो संसार का विस्तार यानी सुविधावादी और भौतिकवादी जीवनशैली एक प्रकार की भूलभूलैया ही है। भोग के रास्ते चारों ओर खुले हुए हैं। धन, सत्ता, यश और भोग – इन सबका जाल बिछा है और यह जान इतना मजबूत है कि एक बार आदमी उसमें फंसा कि निकल नहीं पाता।</p>
<p style="text-align:justify;">जिस प्रकार दलदल में फंसा मनुष्य उसमें से निकलने के लिये जितना प्रयत्न करता है, उतना ही और फंसता जाता है, यही स्थिति वर्तमान युग में मनुष्य के साथ है। भोग-विलास, सांसारिक माया-जाल आदि की रचना मनुष्य स्वयं करता है और स्वयं ही उसमें फंसता जाता है। उसकी अपनी बनाई हथकड़ी-बेड़ी उसी के हाथ-पैरों में पड़ जाता है। जब विवेक नष्ट हो जाता है तो ऐसा ही होता है। रॉबर्ट ब्राउनिंग-‘‘जो स्थिति आपके दिमाग की है, वही आपकी खोज की है-आप जिस चीज की इच्छा करेंगे, वह पा लेंगे।’’</p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के ग्यारह लोगों की मौत ने सबको दहला दिया है, जहां सार्थक जीवन जीने की और सोच की मौलिक दिशाएं उद्घाटित नहीं होतीं वहां इंसान में जड़ता और नैराश्य छा जाता है। वह दुनियां की अच्छी-बुरी धारणाओं के आधार पर अपने जीवन की दिशाएं तय करता है, अपने दिल की आवाज- भीतर की ध्वनि और स्वतंत्र सोच का इस्तेमाल नहीं करता। ऐसे व्यक्ति असन्तुष्ट कामनाओं एवं दमित आकांक्षाओं के कारण मानसिक रोग से ग्रस्त हो जाते हैं। उनका आत्मविश्वास एवं मनोबल कमजोर पड़ जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां मुझे गणि राजेन्द्र विजय के एक प्रवचन का स्मरण हो आया है, जिसमें उन्होंने कहा था कि हम लोग जो बाहर खोजते हैं, वह हमारे अंतर में विद्यमान है, लेकिन हम उसे देख नहीं पाते। उन्होंने बड़े पते की बात कही है। दुनियादारी का नशा शराब या मादक द्रव्यों के नशे की भांति होता है। वह नशा तब छूट सकता है, जबकि हम पर उससे भी कोई तेज नशा चढ़े। वह तेज नशा ‘अध्यात्म’ का है। अध्यात्म ही वह आधार है जो मनुष्य को स्वयं से स्वयं का साक्षात्कार करवाता है। मनुष्य के भीतर जो अमृत-घट विद्यमान है,उस पर पडे़ आवरण को हटाता है,क्योंकि वही तो वास्तविक आनन्द का स्रोत है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस आनन्द के स्रोत से रू-ब-रू होने के लिये जरूरी है व्यवहार और संबंधों का परिष्कार। व्यवहार और संबंधों के प्रति एक सकारात्मक दृष्टिकोण का निर्माण अपेक्षित है। जैन दर्शन का बहुत प्रसिद्ध शब्द है सम्यक दर्शन, सम्यक दृष्टिकोण। जब सम्यक दृष्टिकोण होता है तो सब कुछ ठीक लगता है, जिसके फलस्वरूप जीवन दु:ख से मुक्त होकर सुख से ओतप्रोत होता है। जहां दृष्टिकोण भ्रामक हो गया, अच्छी चीज भी बुरी लगने लग जाती है। उस समय वह अच्छाई को देख नहीं सकता। सम्यक दृष्टि वाला व्यक्ति बुराई में भी अच्छाई देखता है, दु:ख में भी सुख का अनुभव करता है। इसलिए हमें सम्यक दृष्टिकोण पर ध्यान देना है।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारा व्यवहार अच्छा हो, व्यवहार मधुर हो, व्यवहार कटु न हो, व्यवहार सुखद हो, दु:खद न हो आदि-आदि प्रश्नों पर विचार करें तो उसकी पृष्ठभूमि में सबसे पहले सम्यक दृष्टिकोण और मिथ्या दृष्टिकोण पर विचार करना चाहिए। सम्यक दृष्टिकोण यानी सकारात्मक सोच है तो सब अच्छा होता है और मिथ्या दृष्टिकोण यानी नकारात्मक सोच है तो फिर सब अच्छा नहीं होता। डिजरायली ने एक बार कहा था-‘‘जीवन बहुत छोटा है और हमें संतोषी नहीं होना चाहिए।’’ हमें आनन्द के स्रोत की खोज करते रहना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">आनन्द के व्यवहार की चर्चा करते समय ईर्ष्या, कलह, निंदा, चुगली, अपवाद आदि-आदि जो समस्याएं हैं, जो धार्मिक दृष्टि से ही नहीं बल्कि मानवीय दृष्टि से भी पाप हैं मानसिक रोग पैदा करने वाली हैं और संबंधों को बिगाड़ने वाली हैं इनके बारे में कुछ सोचना है। इन पर सही चिंतन तब होगा जब सबसे पहले हमारा दृष्टिकोण सम्यक होगा। दृष्टिकोण सम्यक होगा और इन स्थितियों का विश्लेषण करेंगे तो ईर्ष्या में नहीं आएंगे। अन्यथा ईर्ष्या स्वाभाविक है।</p>
<p style="text-align:justify;">जब यह धारणा है कि सबको समान काम देना चाहिए, सबके साथ समान व्यवहार होना चाहिए, तब ईर्ष्या होना स्वाभाविक है। मेरे साथ ऐसा व्यवहार नहीं किया, उसके साथ व्यवहार किया। मन में अप्रियता पैदा हो गई, एक विद्वेष पैदा हो गया। किंतु जब यह स्पष्टता है कि समानता एक अलग बात है, व्यवहार बिल्कुल अलग बात है तब यह समस्या नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">संकुचित दृष्टिकोण अपने अहं की प्रबलता के कारण बनता है। इतना अहं प्रबल है कि अपना ही स्थान है, उस जगह दूसरे का कोई स्थान नहीं है। दृष्टिकोण सीमित हो जाता है, संकड़ा हो जाता है। उदार दृष्टि वाले व्यक्ति में सौहार्द भावना होती है। व्यवहार का बड़ा सूत्र है सौहार्द भावना। अगर हम व्यवहार कौशल की खोज करें, उनके सूत्र खोजें और सौहार्द भावना के मर्म को समझ लें तो हमारा व्यवहार काफी अच्छा हो सकता है। सौहार्द भावना बहुत पर्याप्त हैं व्यवहार परिष्कार के लिए।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि ऐसा नहीं होता, क्योंकि हर आदमी अपनी सोच को सही मानता है। कहीं कोई अपने आग्रह को ढीला नहीं छोड़ता। औरों की बात को आदर नहीं देता। यही वजह है कि औरों के सुझाव, सीख, आज्ञा, प्रेरणा, उपदेश सभी अच्छे होते हुए भी हमारे लिये उनका कोई मूल्य नहीं। न तो अपने अस्तित्व की सीमा को छोटा का सकते हैं और न औरों के अहसानमन्द होकर जी सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही बड़प्पन की मनोवृत्ति अहं को झुकाती नहीं। जबकि सौहार्द भावना हमें झुकना सिखाती है। इसी से नये आइडिया जा सकते हैं। जैसाकि पो ब्रोसनन ने एक बार कहा था-‘‘किसी को भी कोई आइडिया आ सकता है। और बेहतरीन आइडियाज आपके आस-पास ही होते हैं।’’</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-ललित गर्ग</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Jul 2018 03:14:49 +0530</pubDate>
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                <title>दूसरे देशों में बसने की योजना बनाने वाले वयस्कों में भारत दूसरे नंबर पर</title>
                                    <description><![CDATA[ 35 लाख लोग बना रहे प्रवास करने की योजना संयुक्त राष्ट्र। भारत के लिए खतरे की घंटी है। भारत उन देशों में दूसरे नंबर पर है जहां वयस्क दूसरे देशों में बसने की योजना बना रहे हैं और अमेरिका तथा ब्रिटेन उनके पसंदीदा देश हैं। इन लोगों में ज्यादातर पुरूष, युवा, अविवाहित, ग्रामीण इलाकों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/india-on-second-number-of-adults-planning-to-settle-in-other-countries/article-2288"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/india-3.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> 35 लाख लोग बना रहे प्रवास करने की योजना</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>संयुक्त राष्ट्र।</strong> भारत के लिए खतरे की घंटी है। भारत उन देशों में दूसरे नंबर पर है जहां वयस्क दूसरे देशों में बसने की योजना बना रहे हैं और अमेरिका तथा ब्रिटेन उनके पसंदीदा देश हैं। इन लोगों में ज्यादातर पुरूष, युवा, अविवाहित, ग्रामीण इलाकों में रहने वाले हैं और माध्यमिक शिक्षा कर चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">संयुक्त राष्ट्र की प्रवासन एजेंसी अंतरराष्ट्रीय प्रवास संगठन (आईओएम) ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि दुनियाभर में वयस्क आबादी के 1.3 फीसदी या छह करोड़ 60 लाख लोगों ने कहा कि वे अगले 12 महीनों में स्थाई तौर पर प्रवास करने की योजना बना रहे हैं। रिपोर्ट में 2010-2015 अवधि के लिए दुनियाभर में लोगों के प्रवास करने के इरादों का विश्लेषण किया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"> 13 लाख लोग हैं विदेश जाने की तैयारी में</h3>
<p style="text-align:justify;">दूसरे देशों में बसने की योजना बनाने वाले लोगों में अमेरिका के बाद सबसे लोकप्रिय देश हैं ब्रिटेन, सउदी अरब, फ्रांस, कनाडा, जर्मनी और दक्षिण अफ्रीका। प्रवास करने की योजना बनाने वालों में से आधे लोग सिर्फ 20 देशों में रहते हैं जिसमें पहले नबंर पर नाइजीरिया और दूसरे नंबर पर भारत है। इसके बाद कांगो, सूडान, बांग्लादेश और चीन का नंबर आता है। 48 लाख लोगों के साथ भारत में सबसे अधिक 35 लाख लोग प्रवास करने की योजना बना रहे हैं और 13 लाख लोग तैयारी कर रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">नाइजीरिया में भी 51 लाख लोग हैं तैयार</h3>
<p style="text-align:justify;">नाइजीरिया में सबसे अधिक 51 लाख लोग अपने देश से बाहर बसने की योजना बना रहे हैं। इसके बाद 41 लाख लोगों के साथ कांगो और 27-27 लाख लोगों के साथ चीन तथा बांग्लादेश का नंबर आता है। पश्चिम अफ्रीका, दक्षिण एशिया और उत्तर अफ्रीका ऐसे क्षेत्र हैं जहां सबसे अधिक लोगों के प्रवास करने की संभावना है। यह अध्ययन गैलप वर्ल्ड पोल द्वारा एकत्रित किए गए अंतरराष्ट्रीय आंकड़ों पर आधारित है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Fri, 14 Jul 2017 06:16:36 +0530</pubDate>
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