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                <title>70 फीसदी दलहनी फसल नष्ट, बीमा कंपनी ने किया सर्वे</title>
                                    <description><![CDATA[हमीरपुर (एजेंसी)। उत्तर प्रदेश में दालों का कटोरा माने गये बुन्देलखंड क्षेत्र में इस वर्ष खरीफ की फसल में उड़द, मूंग एवं तिल की 70 फीसदी फसल बीते दिनों हुयी बारिश में नष्ट हो गयी है। इससे हमीरपुर जिले में दलहन की कम से कम 50 हजार हेक्टेयर में फसल नष्ट होने से करीब 08 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/70-percent-crop-destroyed-insurance-company-surveyed/article-38941"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/vegetable-crop-destroyed.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>हमीरपुर (एजेंसी)।</strong> उत्तर प्रदेश में दालों का कटोरा माने गये बुन्देलखंड क्षेत्र में इस वर्ष खरीफ की फसल में उड़द, मूंग एवं तिल की 70 फीसदी फसल बीते दिनों हुयी बारिश में नष्ट हो गयी है। इससे हमीरपुर जिले में दलहन की कम से कम 50 हजार हेक्टेयर में फसल नष्ट होने से करीब 08 हजार किसान प्रभावित हुये हैं। फसल बीमा कंपनी ने फसल के नुकसान का सर्वे कार्य पूरा कर लिया है। बीमा कंपनी ने फिलहाल 19 करोड़ रुपये की फसल नष्ट होने का दावा किया है। उपकृषि निदेशक (डीडी) हरीशंकर भार्गव ने गुरुवार को बताया कि कुछ साल पहले तक बुन्देलखंड पूरे उत्तर प्रदेश के लिये दाल की आपूर्ति करता था, इसीलिये बुन्देलखंड को आज भी दाल का कटोरा कहा जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल भी तीन लाख हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में किसानों ने दो लाख हेक्टेयर भूमि में खरीफ की फसल की बुआई की थी। इसमें सबसे ज्यादा भूभाग में दलहन उड़द, मूगं और तिल की फसल बोई गयी थी। पहले समय से बरसात न होने के कारण खरीफ की फसल बहुत विलंब से बोई गयी थी। जो फसल बोई गयी उसमें इतनी ज्यादा बरसात हुई कि वह नष्ट होने की कगार पर आ गयी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>किसानों से फसल नुकसान के अभी दावे मांगे</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होने बताया कि इस साल फसली ऋण लेने वाले 52,300 किसान, फसल बीमा की श्रेणी में आते हैं। इस प्रकार कुल मिलाकर जिले में खरीफ फसल में 62,769 किसान बीमित है। यूनीवर्सल सोम्फो इंश्योरेंस कंपनी को बीमा का कृषक अंश 02 करोड़ 91 लाख 97 हजार रुपये पहुंच गया है। इसी प्रकार कंपनी को बीमा के रूप में केन्द्र सरकार से 09 करोड़ 50 लाख 13 हजार रुपये और इनती ही राशि राज्य सरकार से प्राप्त होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">बीमा कंपनी के जिला समन्यवक (डीसी) सौरभ तिवारी ने बताया कि उड़द की फसल में एक हेक्टेयर में 26,539 रुपये, मूंग की फसल में 28,905 रुपये, तिल की फसल में एक हेक्टेयर में 14,332 रुपये की क्षतिपूर्ति दी जायेगी। उन्होंने बताया कि फिलहाल 32 हजार किसानों को 19 करोड़ रुपये की बीमा राशि वितरित की जायेगी। किसानों से फसल नुकसान के अभी दावे मांगे गये है। किसान बलराम दाती, रामशरण और रामकिशोर ने बताया कि यह पहला मौका है जब खरीफ में इतने व्यापक पैमाने पर किसानों को क्षति उठानी पड़ी है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">भारतीय किसान यूनियन के जिलाध्यक्ष निरंजन सिंह राजपूत ने बताया कि बुंदेलखंड में खरीफ की फसल बहुत ही कम मात्रा में बोयी जाती है। इस साल अतिवृष्टि से ज्यादातर फसल नष्ट हो गयी है। जिससे किसानों की कृषि लागत भी बरसात में बह गयी है। किसान बेहद परेशान है। वहीं आपदा प्रबंधन विशेषज्ञ प्रियेंश रंजन मालवीय का कहना है कि बरसात की फसल नष्ट होने के लिये शासन से आयी धन?ाशि वितरित की जा रही है। इसके लिये 02 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बजट मागा गया है। बीमा की धनराशि कंपनी अलग से देगी।</p>
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                <pubDate>Thu, 13 Oct 2022 12:28:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>किसान बोले: इस बार रबी की बिजाई होगी बेहद अच्छी</title>
                                    <description><![CDATA[ओढां(सच कहूँ/राजू)। अगर समय पर सिंचाई पानी मिल जाए तो किसानों के लिए इससे बड़ी राहत की बात और क्या हो सकती है। इस समय रबी की बिजाई का समय है। ऐसे में किसानों को सिंचाई पानी की बेहद आवश्यकता है। खरीफ की फसल पर मौसम की मार से बेजार हुए किसानों को अब रबी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/sowing-of-rabi-crop/article-38735"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/rabi-crop.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ओढां(सच कहूँ/राजू)।</strong> अगर समय पर सिंचाई पानी मिल जाए तो किसानों के लिए इससे बड़ी राहत की बात और क्या हो सकती है। इस समय रबी की बिजाई का समय है। ऐसे में किसानों को सिंचाई पानी की बेहद आवश्यकता है। खरीफ की फसल पर मौसम की मार से बेजार हुए किसानों को अब रबी की फसल से काफी उम्मीदें हैं। क्षेत्र से होकर गुजरने वाली रत्ताखेड़ा खरीफ चैनल में बेमौसमी बरसात की वजह से आया पानी किसानों के लिए वरदान साबित हो रहा है। इस समय टेल पर पूरा पानी देखा जा रहा है। खरीफ चैनल से ट्रेक्टरों से पानी उठाकर किसान सरसों की बिजाई के लिए भूमि तैयार करने में मशगूल हैं। किसानों ने चैनल के पानी के लिए कई-कई किलोमीटर दूर तक भूमिगत पाइपें बिछाकर सिंचाई का प्रबंध कर रखा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बार मौसम व रोगों की मार के चलते खरीफ की फसल बर्बाद हो गई। जिसके चलते किसानों की स्थिति काफी खराब है। इसलिए रबी की फसल से काफी उम्मीदें हैं। इस समय खरीफ चैनल में पानी आया हुआ है। ये पानी हमारे लिए वरदान से कम नहीं है। खरीफ चैनल में आए पानी से अगर भूमि की सिंचाई हो जाएगी तो बिजाई बेहद अच्छी होगी।<br />
<strong>– आत्माराम, किसान (राजपुरा)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">किसान को समय पर पानी व बीज-खाद मिल जाए तो इससे बड़ी राहत और क्या होगी। खरीफ चैनल में इस समय टेल पर पूरा पानी है। ये पानी किसानों के लिए सोने पर सुहागा साबित होगा। ट्यूबवेलों का पानी किसानों के लिए मजबूरी है। खरीफ चैनल में आया पानी जमीन के लिए ताकतवर व उपजाऊ शक्ति बढ़ाने वाला है। क्षेत्र में ट्यूबवेलों का पानी करीब 90 फुट गहरा है। चैनल में अगर पानी एक माह और चल जाए तो खरीफ की फसल का घाटा पूरा हो जाएगा।<br />
<strong>– सहदेव जाखड़, किसान (बनवाला)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">रत्ताखेड़ा खरीफ चैनल किसानों में खुशहाली लेकर आई है। इस बार चैनल में 4 बार पानी आया है। इस समय 4 से 6 फुट पानी चल रहा है। समय पर चैनल की सफाई होने से टेल पर पानी फुल है। ये पानी अकेले हमारे गांव के लिए ही नहीं बल्कि दर्जनों गांवों के किसानों के लिए लाभदायक सिद्ध होगा। किसान की फसल अच्छी हो जाए तो कि सान को और क्या चाहिए।<br />
<strong>– गुरदीप सिंह बराड़, किसान (राजपुरा)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">खरीफ चैनल में पानी आने से किसानों में खुशी है। इस समय सिंचाई पानी की बेहद आवश्यकता है। सरसों की बिजाई का समय चल रहा है। गेहूं में अभी करीब 2 सप्ताह का समय शेष है। अगर ये पानी एक माह और चल जाए तो इस बार किसानों के वारे न्यारे हो जाएंगे। अगर किसान की फसल अच्छी होगी तो देश की आर्थिक व्यवस्था में भी सुधार होगा।<br />
<strong>-सुभाष बडजाती, किसान (नुहियांवाली)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">खरीफ चैनल में ऐन मौके पर पानी छोड़ा गया है। ये पानी किसानों के लिए वरदान साबित होगा। सरसों के लिए भूमि तैयार कर रहे हैं। नरमें की खड़ी फसल मेंं भी सिंचाई कर रहे हैं क्योंकि पानी ठीक समय पर आया है। इससे पानी से न केवल भूमि की उर्वरक शक्ति बढ़ेगी बल्कि भूमि में नमी भी काफी दिनों तक बरकरार रहेगी। खरीफ की फसल कमजोर रही, लेकिन रबी की फसल काफी अच्छी होने की उम्मीद है।<br />
<strong>– महेंद्र लुटासरा, किसान (पन्नीवाला मोटा)।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">रत्ताखेड़ा खरीफ चैनल में आए पानी ने किसान की जान में जान डाल दी। इस समय पानी की बेहद जरूरत थी। बेमौसमी बरसात की वजह से खरीफ चैनल में पानी आने से किसानों को बड़ी राहत मिली है। सरसों की बिजाई बेहतर ढंग से हो जाएगी। इससे न केवल जलस्तर ऊंचा होगा अपितु फसल भी बेहद अच्छी होगी। चैनल में पानी आने के बाद बौरवेल की आवश्यकता ही नहीं।<br />
<strong>– जग्गा सिंह धालीवाल, किसान (घुंकावाली)।</strong></p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 07 Oct 2022 12:41:58 +0530</pubDate>
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                <title>ग्वार की पछेती फसल को झुलसा रोग से बचाए किसान: डॉ.सैनी</title>
                                    <description><![CDATA[भिवानी(सच कहूँ न्यूज)। भिवानी जिला के अनेक खेतों में ग्वार फसल में झुलसा रोग का प्रकोप देखा गया है, जिसकी रोकथाम बहुत जरूरी है। पछेती फसल में यह रोग काफी हानि पहुंचा सकता है। अत: समय रहते प्रति एकड़ 150-200 लीटर पानी में 30 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन तथा 500 ग्राम कॉपर आॅक्सीक्लोराईड मिलाकर ग्वार फसल पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/farmers-should-save-late-cluster-bean-crop-from-scorching-disease/article-37494"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/cluster-bean-crop.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>भिवानी(सच कहूँ न्यूज)।</strong> भिवानी जिला के अनेक खेतों में ग्वार फसल में झुलसा रोग का प्रकोप देखा गया है, जिसकी रोकथाम बहुत जरूरी है। पछेती फसल में यह रोग काफी हानि पहुंचा सकता है। अत: समय रहते प्रति एकड़ 150-200 लीटर पानी में 30 ग्राम स्ट्रैप्टोसाईक्लिन तथा 500 ग्राम कॉपर आॅक्सीक्लोराईड मिलाकर ग्वार फसल पर स्प्रे करना लाभप्रद होगा। उक्त विचार एचएयू हिसार के कीट विज्ञान विभाग से सेवानिवृत्त वरिष्ठ कीट वैज्ञानिक डॉ. आरके सैनी ने व्यक्त किए।</p>
<p style="text-align:justify;">वे जिला के गांव केहरपुरा में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग भिवानी तथा हिंदुस्तान गम एंड कैमिकल्स भिवानी द्वारा आयोजित ग्वार फसल स्वास्थ्य शिविर में किसानों को संबोधित कर रहे थे। डॉ. सैनी ने ग्वार व अन्य फसलों को हानि पहुंचाने वाले कीटों एवं बीमारियों की विस्तारपूर्वक जानकारी द। कृषि विकास अधिकारी डॉ. देवेंद्र सिंह ने किसानों से आग्रह किया कि वे सरकारी योजनाओं से लाभ उठाने के लिए कृषि पोर्टल पर पर जानकारी अपडेट करते रहे। शिविर में ग्वार के झुलसा रोग की रोकथाम हेतु स्ट्रैप्टोसाईक्लिन दवा के पाऊच तथा फेस मास्क भी बांटे गए।</p>
<hr />
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/two-elephants-entered-in-the-hospital/">यह भी पढ़ें – अस्पताल में घुसे दो हाथी, लोग बोले-इलाज कराने आए हैं</a></p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/india-ranks-first-in-terms-of-road-traffic-accident/">यह भी पढ़ें -30 प्रतिशत लोग भारत में हेलमेट न पहनने से गवा देते हैं ‘जिन्दगी’</a></p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Sep 2022 08:22:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>बीमा योजना का प्रचार-प्रसार करेंगे रथ</title>
                                    <description><![CDATA[जिला कलक्टर ने कलक्ट्रेट परिसर से हरी झंडी दिखाकर किया रवाना हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रचार-प्रसार को लेकर जिला कलक्टर नथमल डिडेल ने गुरुवार को कलक्ट्रेट परिसर से प्रचार रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान कुल छह रथों को रवाना किया गया। इस दौरान जिला कलक्टर के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/rath-will-promote-insurance-scheme/article-35510"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/fasal.jpg" alt=""></a><br /><h3>जिला कलक्टर ने कलक्ट्रेट परिसर से हरी झंडी दिखाकर किया रवाना</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>हनुमानगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के प्रचार-प्रसार को लेकर जिला कलक्टर नथमल डिडेल ने गुरुवार को कलक्ट्रेट परिसर से प्रचार रथों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इस दौरान कुल छह रथों को रवाना किया गया। इस दौरान जिला कलक्टर के अलावा कृषि विभाग के उपनिदेशक दानाराम गोदारा सहित कृषि विभाग व एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड के अधिकारी मौजूद रहे। यह प्रचार रथ गांव-गांव जाकर किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के बारे में जानकारी देंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">खरीफ फसलों में बीमा करवाने की अन्तिम तिथि 31 जुलाई 2022 है। फसल बीमा ऋणी और गैर ऋणी किसानों के लिए स्वैच्छिक है। किसान फसलों से जुड़े जोखिम से बचने के लिए खरीफ फसलों का 2 प्रतिशत, रबी फसलों का 1.5 प्रतिशत एवं व्यवसायिक फसलों का 5 प्रतिशत प्रीमियम राशि जमा करवाकर बीमा करा सकते हैं। प्रचार रथों को रवाना करने के मौके पर जिला कलक्टर डिडेल ने सभी किसानों को फसल बीमा योजना का अधिकाधिक लाभ उठाने का आग्रह करते हुए कहा कि फसल बीमा प्रचार-प्रसार रथ जिले की सभी ग्राम पंचायतों में जाकर योजना का प्रचार करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना की जानकारी प्रदान की जाएगी। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना किसानों के लिए बेहद ही लाभकारी योजना है। इससे अधिक से अधिक किसान जुड़ें। फसल बीमा करवाने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। लिहाजा किसान अपना प्रीमियम जमा करवाएं। जिला कलक्टर ने कहा कि यह योजना किसानों के लिए बेहद लाभदायक है। लिहाजा किसान इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाएं। जो फसल बोई है उसका प्रीमियम जमा करवाएं।</p>
<h3>अंतिम तिथि 29 जुलाई</h3>
<p style="text-align:justify;">कृषि विभाग के उपनिदेशक दानाराम गोदारा ने बताया कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना बड़ी महत्वपूर्ण योजना है। किसानों को किसी भी तरह से नुकसान होने पर उन्हें इस योजना के तहत मुआवजा देने का प्रावधान है। जिले में करीब दो लाख किसान हैं। उन्हें किस तरह से सूचना मिले, वे कैसे लाभान्वित हों, कब आवेदन करना है, कब तक फसलें परिवर्तित कर सकते हैं आदि की सूचना विभाग की ओर से दी जा रही है। लेकिन सरकार के निर्देशानुसार प्रचार रथों के जरिए इस योजना का प्रचार-प्रसार किया जा रहा है ताकि किसानों को अधिक से अधिक लाभ मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;">गुरुवार को रवाना किए गए रथ सभी ग्राम पंचायतों में होते हुए इस कार्य को पूर्ण करेंगे। उन्होंने बताया कि खरीफ 2022 में ऋणी एवं गैर ऋणी किसानों के लिए बीमा करवाने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। खरीफ 2022 में ऋणी किसानों की ओर से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से बाहर रहने के लिए बैंक को सूचना देने की अंतिम तिथि 24 जुलाई है। खरीफ 2022 में ऋणी किसानों की ओर से बीमित फसल में परिवर्तन की सूचना संबंधित वित्तीय संस्थान को देने की अंतिम तिथि 29 जुलाई है। 31 जुलाई के बाद फसल का बीमा करवाना संभव नहीं होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि 15 अगस्त तक प्रीमियम काटकर बैंक प्रीमियम की राशि भिजवाएंगे। उन्होंने बताया कि जिले में खरीफ 2022 सीजन के लिए प्रधानमंत्री फसल बीमा योजनान्तर्गत 9 फसलें मूंग, मोठ, बाजरा, ग्वार, तिल, धान, कपास, मूंगफली और किन्नू अधिसूचित की गई है। किसान की ओर से देय प्रीमियम राशि मूंग 192.95 रुपए प्रति बीघा, बाजरा 85.75 रुपए, मोठ 101.18 रुपए, ग्वार 108.38 रुपए, कपास 412.45 रुपए, धान 355.97 रुपए, तिल 108.77 रुपए, मूंगफली 525.13 रुपए, किन्नू 1012.5 रुपए प्रति बीघा निर्धारित की गई है।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Jul 2022 20:42:52 +0530</pubDate>
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                <title>फसल चक्र परिवर्तन संभव यदि बाजारीकरण सही हो</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब के कुछ किसान संगठनों ने गेहूँ-धान के पारंपिक फसलचक्र से बाहर निकलने के लिए जागरूकता की मुहिम शुरू की है। उक्त संगठनों के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि किसान भलीभांति यह जानते हैं धान की बिजाई से भू-जल स्तर गिरता जा रहा है और यदि उन्होंने आज बदलाव नहीं किया तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/crop-rotation-change-possible-if-marketing-is-done-right/article-34624"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/peddy-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पंजाब के कुछ किसान संगठनों ने गेहूँ-धान के पारंपिक फसलचक्र से बाहर निकलने के लिए जागरूकता की मुहिम शुरू की है। उक्त संगठनों के निर्णय से यह स्पष्ट हो गया है कि किसान भलीभांति यह जानते हैं धान की बिजाई से भू-जल स्तर गिरता जा रहा है और यदि उन्होंने आज बदलाव नहीं किया तो पंजाब एक दिन मरूस्थल बन जाएगा। यहां तक कि पीने योग्य पानी के भी लाले पड़ जाएंगे। किसान संगठन की यह एक अच्छी पहल है कि जिन्होंने कम से कम पारंपरिक फसलचक्र से बाहर निकलने का मन बनाया लेकिन उक्त संगठन दूसरे पहलुओं को भी उठा रहा है कि परिवर्तित फसलों की बिजाई का उचित मूल्य मिले ताकि वे धान से पीछा छुड़ा सकें।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि सरकार व किसान मिलकर काम करें तो कृषि में नई क्रांति संभव है। लेकिन जब किसान को नई फसल का उचित रेट नहीं मिलेगा या फसल कई-कई दिन तक मंडियों में पड़ी रहेगी तब किसानों का नई फसलों की बिजाई करने से मोहभंग हो जाता है। मक्की इसका स्पष्ट उदाहरण है, जिसका निर्धारित रेट नहीं मिलने पर किसान मक्की की खेती करने से पीछे हट गए। लेकिन यहां किसानों के लिए भी आवश्यक है कि विश्व स्तर पर जलवायु परिवर्तनों की पहचान करने व फसलों की बिजाई की तरफ ध्यान दें जिनकी मांग ज्यादा है। किन्नू की बागवानी, आलू व प्याज सहित कई फसलें हैं जिनकी बिजाई किसान अपनी समझ के अनुसार व बिना सरकार की सलाह के करते हैं। विगत वर्षों में किन्नू उत्पादकों ने अच्छा मुनाफा भी कमाया है। इसी तरह आलू-प्याज की खेती भी अच्छी रही और किसानों ने अपनी आय में वृद्धि की।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई अतिश्योक्ति नहीं कि कई किसान, कृषि विभाग की उम्मीदों से भी आगे निकल चुके हैं। एक अन्य बात जो महत्वपूर्ण है कि किसानों को केवल उत्पादक बनने के साथ-साथ विक्रेता भी बनना होगा। विक्रेता बनकर किसान अपनी उपज को सीधा ग्राहक को बेचकर मंडी के भाव से दोगुना-तीनगुना अधिक दामों पर बेच सकता है। हरी सब्जियां, जो मंडी में 5-15 रुपये किलो तक बिक रही हैं, वहीं ग्राहक को 35 से 50 रुपये में बेची जा रही हैं। यदि किसान इससे भी आधे रेट पर बेचे तो मंडी से कीमत कई गुणा ज्यादा मिलेगी। किसान को शारीरिक के साथ-साथ मानसिक परिश्रम भी बढ़ाने की आवश्यकता है। सूझबूझ, तकनीकी जानकारी प्राप्त कर व आर्थिक क्षेत्र की समझ रखने वाला किसान कृषि क्षेत्र में सफल हो सकता है। यदि सरकारें भी किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए जुट जाएं तब दोनों का सहयोग रंग ला सकता है।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jun 2022 09:59:43 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>बारिश से पंजाब में आलू की फसल को भारी नुक्सान</title>
                                    <description><![CDATA[जालंधर (सच कहूँ न्यूज) पंजाब में पिछले एक महीने से अनिश्चित बारिश और प्रतिकूल मौसम के कारण आलू की फसल और आलू बीज फसल को भारी नुकसान हुआ है। राज्य में आलू का उत्पादन इस बार कम होने की आशंका है। राज्य में आलू की फसल मुख्य रूप से जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला, लुधियाना, अमृतसर, बठिंडा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/heavy-damage-to-potato-crop-in-punjab-due-to-rain/article-30533"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/potato-crop.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>जालंधर (सच कहूँ न्यूज)</strong> पंजाब में पिछले एक महीने से अनिश्चित बारिश और प्रतिकूल मौसम के कारण आलू की फसल और आलू बीज फसल को भारी नुकसान हुआ है। राज्य में आलू का उत्पादन इस बार कम होने की आशंका है। राज्य में आलू की फसल मुख्य रूप से जालंधर, होशियारपुर, कपूरथला, लुधियाना, अमृतसर, बठिंडा और फतेहगढ़ साहिब जिलों में लगभग 1.10 लाख हेक्टेयर में उगाई गई थी, लेकिन अनिश्चित बारिशों के कारण इनमें से 70 हजार हेक्टेयर में आलू की फसल प्रभावित हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इनमें से 393 हेक्टेयर में लगी फसल पूरी तरह से तबाह हो गई है। आलू बीज के लिए प्रसिद्ध पंजाब का दोआबा क्षेत्र भी बारिश के कारण खासा प्रभावित हुआ है। प्रतिकूल मौसम के चलते फसल पर ‘लेट ब्लाइट’ (एक संभावित विनाशकारी बीमारी जो पत्तियों, तनों और आलू के कंदों को संक्रमित करती है) की समस्या पैदा होने की आशंका बनी हुई है। यह बीमारी आलू के भंडारण या शेल्फ जीवन को कम करता है। आलू की गुणवत्ता अच्छी नहीं होने के कारण कोल्ड स्टोरेज में इसके भंडारण में भी नुकसान होने का अनुमान है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">राज्य में लगभग 1.10 लाख हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल</h4>
<p style="text-align:justify;">पंजाब बागवानी विभाग के उपनिदेशक डॉ सुखदीप सिंह हुंदल ने शुक्रवार को बताया कि राज्य में लगभग 1.10 लाख हेक्टेयर भूमि पर आलू की फसल लगाई गई थी लेकिन बारिश के कारण लगभग 70 हजार हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि राज्य में लगभग 30 लाख टन आलू उत्पादन की संभावना थी लेकिन बारिश की वजह से आधी से अधिक फसल को नुकसान पहुंचा है।</p>
<p style="text-align:justify;">बारिश शुरू होने से पहले 40 हजार हेक्टेयर रकबे में आलू की कच्ची फसल ली जा चुकी थी जिसके कारण इसे नुकसान नहीं पहुंचा। उन्होने बताया कि होशियारपुर जिले में सात लाख टन कच्ची फसल लगाई जा चुकी थी, जिसके कारण इसे नुकसान नहीं पहुंचा।</p>
<p style="text-align:justify;">डॉ. हुंदल ने बताया कि तीन दिन पहले हुई बारिश तक हुए नुकसान की मिली सूचना अनुसार राज्य में 31323 हेक्टेयर रकबे में आलू की फसल को नुकसान हुआ है जिनमें से 13839 हेक्टेयर में 25 फीसदी, 7111 हेक्टेयर में 25 से 26 फीसदी और 9980 हेक्टेयर में 51 से 75 फीसदी नुकसान हुआ है जबकि 393 हेक्टेयर में फसल पूरी तरह तबाह हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि जालंधर जिले में कुल 25 हजार 500 हेक्टेयर जमीन में आलू की बीजाई की गई थी जिसमें से 13784 हेक्टेयर फसल प्रभावित हुई है। उन्होंने बताया कि जिले में 8180 हेक्टेयर फसल को 25 फीसदी, 3774 हेक्टेयर में 26 से 50 फीसदी और 1830 हेक्टेयर में 51 से 75 फीसदी तक नुकसान हुआ है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">आलू की फसल बीमारी रहित</h4>
<p style="text-align:justify;">पंजाब के दोआबा क्षेत्र में तैयार होने वाले आलू के बीज की गुणवत्ता के कारण यहां के आलू बीज की पूरे देश सहित श्रीलंका आदि में भारी मांग है। दोआबा में तैयार होने वाले बीज से आलू की फसल बीमारी रहित होती है और इसका उत्पादन अन्य के मुकाबले कई गुणा अधिक मिलता है। दोआबा क्षेत्र से आलू के बीज का निर्यात ओड़िसा कर्नाटक, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, गुजरात और महाराष्ट्र तथा श्रीलंका आदि को किया जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब आलू उत्पादन का सबसे बड़ा राज्य है। राज्य में सबसे ज्यादा आलू जालंधर में 23810 हेक्टेयर में बीजा गया है जबकि सबसे कम आलू पठानकोट में दो हेक्टेयर में बीजा गया था। जबकि अन्य जिलों में आलू अधीन होशियारपुर में 17750 हेक्टेयर, लुधियाना में 13526, कपूरथला में 10025, अमृतसर 9479, मोगा 5240, बठिंडा 5434, फतेहगढ़ साहिब 4430, पटियाला 4815, एसबीएस नगर 2650, तरनतारन 1989, बरनाला 1740, एसएएस नगर 1558, रोपड़ 834, गुरदासपुर 820, संगरूर 781, फिरोजपुर 1315, फरीदकोट 370, मुक्तसर 195, मानसा 218 , फाजिलका 105 और पठानकोट में दो हेक्टेयर में आलू की फसल होती है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Feb 2022 17:39:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>कैसे करें सरसों की फसल की देखभाल</title>
                                    <description><![CDATA[इन बातों का रखें ख्याल | Mustard crop सरसों (Mustard crop) की सिर्फ फसल बोने से ही किसान निश्चिंत नहीं हो जाता। फसल की बुआई के बाद भी उसे अनेक मुश्किलों से दो-चार होना पड़ता है। जैसे फसल में खरपतवार की समस्या, कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करना […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/how-to-take-care-of-mustard-crop/article-29742"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/mustard-crop.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"><strong>इन बातों का रखें ख्याल | <span lang="en" xml:lang="en">Mustard crop</span></strong></h2>
<p style="text-align:justify;">सरसों (<span lang="en" xml:lang="en">Mustard crop</span>) की सिर्फ फसल बोने से ही किसान निश्चिंत नहीं हो जाता। फसल की बुआई के बाद भी उसे अनेक मुश्किलों से दो-चार होना पड़ता है। जैसे फसल में खरपतवार की समस्या, कीटों और बीमारियों से बचाने के लिए समय-समय पर कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता है। तब जाकर कहीं उसकी फसल पक कर तैयार होती है। तब जाकर किसान को अपने बोए का फल मिलता है। आईए हम जानते हैं कि किसान भाई सरसों की फसल की रेख-देख किस प्रकार करके अच्छी फसल ले सकता है। खेत में पौधों का उचित संरक्षण और खरपतवार निकालने के लिए 15-20 दिन बाद पौधे का विरलीकरण आवश्यक रूप से करना चाहिए। विरलीकरण द्वारा पौधे से पौधे की दूरी 10 से 15 सेमी. कर देनी चाहिए। जिससे पौधे की उचित खरपतवार हो सकें।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>जल प्रबंधन में इन बातों का रखें ख्याल</strong></h3>
<p>सरसों की अच्छी फसल के लिए पहली सिंचाई खेत की नमी, फसल की जाति और मृदा प्रकार को देखते हुए 30 से 40 दिन के बीच फूल बनने की अवस्था पर ही करनी चाहिए। दूसरी सिंचाई फलियां बनते समय (60-70 दिन) करना लाभदायक होता है। जहां पानी की कमी हो या खारा पानी हो, वहां सिर्फ एक ही सिंचाई करना अच्छा रहता है। बंजर क्षेत्रों में सरसों की अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए मानसून के दौरान खेत की अच्छी तरह दो-तीन बार जुताई करें एवं गोबर की खाद का प्रयोग करें। जिससे मृदा की जल धरण क्षमता में वृद्धि होती है। वाष्पीकरण द्वारा नमी का हृास रोकने के लिए अन्त: क्रियाएं करें एवं मृदा सतह पर जलवार का प्रयोग करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>खरपतवार नियंत्रण</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">खरपतवार फसल के साथ जल, पोषक तत्वों, स्थान एवं प्रकाश के लिए प्रतिस्पर्ध करते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">खरपतवारों को खेत से निकालने और नमी संरक्षण के लिए बुआई के 25 से 30 दिन बाद निराई-गुड़ाई करनी चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">खरपतवारों के कारण सरसों की उपज में 60 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">खरपतवार नियंत्रण के लिए खुरपी एवं हैण्ड हो का प्रयोग किया जाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">रसायनिक खरपतवार नियंत्रण के लिए फ्रलुक्लोरेलिन (45 ईसी) की एक लीटर सक्रिय तत्व/हेक्टेयर (2.2 लीटर दवा) की दर से 800 लीटर पानी में मिलाकर बुआई के पूर्व छिड़काव कर भूमि में भली-भांति मिला देना चाहिए अथवा पेन्डीमिथेलीन (30 ईसी) की 1 लीटर सक्रिय तत्व (3.3 लीटर दवा को 800 लीटर पानी में मिलाकर बुआई के तुरन्त बाद (बुआई के 1-2 दिन के अन्दर) छिड़काव करना चाहिए।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कीट एवं रोग प्रबंधन</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सरसों की उपज को बढ़ाने तथा उसे टिकाऊ बनाने के मार्ग में नाशक जीवों और रोगों का प्रकोप एक प्रमुख समस्या है।</li>
<li style="text-align:justify;">इस फसल को कीटों एवं रोगों से काफी नुकसान पहुंचता है, जिससे इसकी उपज में काफी कमी हो जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">यदि समय रहते इन रोगों एवं कीटों का नियंत्रण कर लिया जाये तो सरसों के उत्पादन में बढ़ोत्तरी की जा सकती है।</li>
<li style="text-align:justify;">चेंपा या माहू, आरामक्खी, चितकबरा कीट, लीफ माइनर, बिहार हेयरी केटरपिलर आदि सरसों के मुख्य नाशी कीट हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">काला धब्बा, सफेद रतुआ, मृदुरोमिल आसिता, चूर्णल आसिता एवं तना गलन आदि सरसों के मुख्य रोग हैं।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सरसों के प्रमुख कीट</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">चेंपा या माहू:-</li>
<li style="text-align:justify;">सरसों में माहू पंखहीन या पंखयुक्त हल्के स्लेटी या हरे रंग के 1.5-3.0 मिमी. लम्बे चुभने एवम चूसने मुखांग वाले छोटे कीट होते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इस कीट के शिशु एवं प्रौढ़ पौधों के कोमल तनों, पत्तियों, फूलों एवम् नई फलियों से रस चूसकर उसे कमजोर एवम छतिग्रस्त तो करते ही हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">साथ-साथ रस चूसते समय पत्तियों पर मधुस्राव भी करते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इस मधुस्राव पर काले कवक का प्रकोप हो जाता है तथा प्रकाश संश्लेषण की क्रिया बाधित हो जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">इस कीट का प्रकोप दिसम्बर-जनवरी से लेकर मार्च तक बना रहता है।</li>
<li style="text-align:justify;">जब फसल में कम से कम 10 प्रतिशत पौधों की संख्या चेंपा से ग्रसित हो व 26-28 चेंपा/पौधा हो तब डाइमिथोएट (रोगोर) 30 ई सी या मोनोक्रोटोफास (न्यूवाक्रोन) 36 घुलनशील द्रव्य की 1 लीटर मात्रा को 600-800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए। यदि दुबारा से कीट का प्रकोप हो तो 15 दिन के अंतराल से पुन: छिड़काव करना चाहिए।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>इसके प्रबन्धन के लिये</strong></h3>
<ol>
<li style="text-align:justify;"> माहू के प्राकृतिक शत्रुओं का संरक्षण करना चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;"> प्रारम्भ में प्रकोपित शाखाओं को तोड़कर भूमि में गाड़ देना चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;"> माहू से फसल को बचाने के लिए कीट नाशी डाईमेथोएट 30 ई.सी.1 लीटर या मिथाइल ओ डेमेटान 25 ई.सी.1 लीटर या फेंटोथिओन 50 ई .सी.1 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर 700-800 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव सायंकाल करना चाहिए।</li>
</ol>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>आरा मक्खी</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इस कीट की रोकथाम हेतु मेलाथियान 50 ई.सी. मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए। आवश्यकता पड़ने पर दुबारा छिड़काव करना चाहिए।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>पेन्टेड बग या चितकबरा कीट</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इस कीट की रोकथाम हेतु 20-25 किलो ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 1.5 प्रतिशत क्यूनालफास चूर्ण का छिड़काव करें।</li>
<li style="text-align:justify;">उग्र प्रकोप के समय मेलाथियान 50 ई.सी. की 500 मि.ली. मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।</li>
</ul>
<p> </p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>बिहार हेयरी केटरपिलर</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">इसकी रोकथाम हेतु मेलाथियान 50 ई.सी. की 1.0 लीटर मात्रा को 500 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>सरसों के प्रमुख रोग</strong></h3>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>1. सफेद रतुवा या श्वेत किट्ट</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">फसल के रोग के लक्षण दिखाई देने पर मैन्कोजेब (डाइथेन एम-45) या रिडोमिल एम.जेड. 72 डब्लू.पी. फफूंदनाशी के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव 15-15 दिन के अन्तर पर करने के सफेद रतुआ से बचाया जा सकता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>2. काला धब्बा या पर्ण चित्ती</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">इस रोग की रोकथाम हेतु आईप्रोडियॉन (रोवरॉल), मेन्कोजेब (डाइथेन एम-45) फफूंदनाशी के 0.2 प्रतिशत घोल का छिड़काव रोग के लक्षण दिखाई देने पर 15-15 दिन के से अधिकतम तीन छिड़काव करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>3. चूर्णिल आसिता</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">चूर्णिल आसिता रोग की रोकथाम हेतु घुलनशील सल्फर (0.2 प्रतिशत) या डिनोकाप (0.1 प्रतिशत) की वांछित मात्रा का घोल बनाकर रोग के लक्षण दिखाई देने पर छिड़काव करें। आवश्यकता होने पर 15 दिन बाद पुन: छिड़काव करें।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>4. मृदुरोमिल आसिता</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सफेद रतुआ रोग के प्रबंधन द्वारा इस रोग का भी नियंत्रण हो जाता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>5. तना लगन</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">कार्बेन्डाजिम (0.1 प्रतिशत) फफूंदीनाशक का छिड़काव दो बार फूल आने के समय 20 दिन के अन्तराल (बुआई के 50वें व 70वें दिन पर) पर करने से रोग का बचाव किया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>फसल कटाई</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सरसों की फसल फरवरी-मार्च तक पक जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">फसल की उचित पैदावार के लिए जब 75 प्रतिशत फलियां पीली हो जायें, तब ही फसल की कटाई करें।</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि अधिकतर किस्मों में इस अवस्था के बाद बीज भार तथा तेल प्रतिशत में कमी हो जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">सरसों की फसल में दानों का बिखराव रोकने के लिए फसल की कटाई सुबह के समय करनी चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि रात की ओस से सुबह के समय फलियां नम रहती है तथा बीज का बिखराव कम होता है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>फसल मड़ाई (गहाई)</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जब बीजों में औसतन 12-20 प्रतिशत आर्द्रता प्रतिशत हो जाए</li>
<li style="text-align:justify;">तब फसल की गहाई करनी चाहिए। फसल की मड़ाई थै्रसर से ही करनी चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि इससे बीज तथा भूसा अलग-अलग निकल जाते है,</li>
<li style="text-align:justify;">साथ ही साथ एक दिन में काफी मात्रा में सरसों की मड़ाई हो जाती है।</li>
<li style="text-align:justify;">बीज निकलने के बाद उनको साफ करके बोरों में भर लेने एवं 8-9 प्रतिशत नमी की अवस्था में सूखे स्थान पर भण्डारण करें।</li>
</ul>
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                                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/agriculture/how-to-take-care-of-mustard-crop/article-29742</link>
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                <pubDate>Fri, 07 Jan 2022 12:50:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जलवायु परिवर्तन के मद्देनजर प्रधानमंत्री ने विशेष गुणों वाली 35 फसल प्रजातियों को जारी किया</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान रायपुर का उद्घाटन नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जलवायु अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए जन जागरूकता के प्रयासों के तहत मंगलवार को विशेष गुणों वाली 35 फसल की किस्में राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री कृषि विश्वविद्यालयों को ग्रीन कैंपस अवार्ड वितरित करेंगे। साथ ही उन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pm-modi-will-dedicate-35-crop-varieties-with-special-qualities-to-the-nation/article-27264"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/pm-narendra-modi2.jpg" alt=""></a><br /><h3 class="storyheadline">प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय जैविक स्ट्रेस प्रबंधन संस्थान रायपुर का उद्घाटन</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जलवायु अनुकूल प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए जन जागरूकता के प्रयासों के तहत मंगलवार को विशेष गुणों वाली 35 फसल की किस्में राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर प्रधानमंत्री कृषि विश्वविद्यालयों को ग्रीन कैंपस अवार्ड वितरित करेंगे। साथ ही उन किसानों के साथ बातचीत करेंगे जो कृषि में नवीन तरीकों का उपयोग करते हैं। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने जलवायु परिवर्तन और कुपोषण की दोहरी चुनौतियों का समाधान करने के लिए विशेष गुणों वाली फसल किस्मों को विकसित किया गया है। कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री रायपुर के राष्ट्रीय जैविक प्रबंधन संस्थान , रायपुर के नवनिर्मित कैँपस का भी लोकार्पण करेंगे।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Sep 2021 09:44:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहत: इस वर्ष रिकॉर्ड 30 करोड़ टन से अधिक फसल उत्पादन का अनुमान</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। देश में वर्ष 2020-21 में मुख्य फसलों के रिकॉर्ड 30.54 करोड टन से अधिक उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया गया है। कृषि मंत्रालय के जारी किए गए तीसरे अग्रिम अनुमान में 30 करोड़ 54 लाख टन से अधिक खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/agriculture/estimates-of-record-crop-production-of-more-than-300-million-tonnes-this-year/article-23904"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/crop-donate.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> देश में वर्ष 2020-21 में मुख्य फसलों के रिकॉर्ड 30.54 करोड टन से अधिक उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया गया है। कृषि मंत्रालय के जारी किए गए तीसरे अग्रिम अनुमान में 30 करोड़ 54 लाख टन से अधिक खाद्यान्न उत्पादन का अनुमान है। कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा है कि यह सकारात्मक स्थिति हमारे किसान भाई-बहनों की अथक मेहनत, कृषि वैज्ञानिकों के योगदान, सरकार की नीतियों एवं राज्य सरकारों से सहयोग एवं बेहतर तालमेल का फल है। विभिन्न फसलों के उत्पादन का मूल्यांकन राज्?यों से प्राप्त प्रत्युत्तरों पर आधारित है और अन्य स्रोतों से उपलब्ध सूचनाओं से इसे सत्यापित किया गया है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">औसत उत्पादन की तुलना में 36.40 लाख टन अधिक</h4>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2020-21 के दौरान चावल का कुल उत्पादन रिकॉर्ड 12 करोड़ 14 लाख टन अनुमानित है। इसी वर्ष के दौरान गेहूँ का कुल उत्पादन रिकॉर्ड 10 करोड़ 87 लाख टन अनुमानित है। पोषक/मोटे अनाजों का उत्पादन 4.97 करोड़ टन अनुमानित है। इस दौरान कुल दलहन उत्पादन 2.56 करोड टन अनुमानित है जो विगत पांच वर्षों के 2.19 करोड़ टन औसत उत्पादन की तुलना में 36.40 लाख टन अधिक है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">कपास उत्पादन की तुलना में 45.9 लाख गांठें अधिक</h4>
<p style="text-align:justify;">वर्ष 2020-21 के दौरान देश में कुल तिलहन उत्पादन 3.63 करोड़ टन अनुमानित है जो वर्ष 2019-20 के दौरान 3.32 करोड़ टन उत्पादन की तुलना में 33.5 लाख टन अधिक है। इसी अवधि के दौरान देश में गन्ने का उत्पादन 39.28 करोड़ टन अनुमानित है। वर्ष 2020-21 के दौरान गन्ने का उत्पादन औसत गन्ना उत्पादन 36.21 करोड टन की तुलना में 3.07 करोड़ टन अधिक है। कपास का उत्पादन 364.9 लाख गांठें (प्रति 170 किग्रा की गांठे) अनुमानित हैं जो औसत कपास उत्पादन की तुलना में 45.9 लाख गांठें अधिक है। पटसन एवं मेस्ता का उत्पादन 96.2 लाख गांठें (प्रति 180 किग्रा की गांठे) अनुमानित हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 26 May 2021 11:00:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लाॅकडाउन के कारण सीमित संख्या में किसानों से रबी फसलों की खरीद</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण लाॅकडाउन की स्थिति के मद्देनजर राज्यों में सीमित संख्या में बुलाकर किसानों से रबी फसलों की खरीद शुरू की गयी है। हरियाणा के 163 केंद्रों पर चना और सरसों की खरीद शुरू की गई है और शारीरिक दूरी बनाये रखने को लेकर किसानों को सीमित संख्या में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण लाॅकडाउन की स्थिति के मद्देनजर राज्यों में सीमित संख्या में बुलाकर किसानों से रबी फसलों की खरीद शुरू की गयी है। हरियाणा के 163 केंद्रों पर चना और सरसों की खरीद शुरू की गई है और शारीरिक दूरी बनाये रखने को लेकर किसानों को सीमित संख्या में बुलाया जा रहा है । हरियाणा में पहले दो दिनों में लगभग 10,111 किसानों से 27,276 टन से अधिक सरसों की खरीद की गई है। कृषि मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार मध्य प्रदेश में चना, मसूर और सरसों की खरीद के लिए तैयारी कर ली गई है और किसानों को अपनी उपज खरीद केंद्रों पर पहुंचाने के लिए सूचित किया गया है।</p>
<h3>प्रत्येक खरीद केंद्र में अधिकतम 10 किसानों को प्रति दिन बुलाया</h3>
<p style="text-align:justify;">राजस्थान के कोटा डिवीजन में लाॅकडाउन की घोषणा के बाद दलहन और तिलहन की खरीद बंद कर दी गई। इस माह की 15 तारीख से कोटा डिवीजन के 54 केंद्रों ने कार्य करना शुरू कर दिया है और आने वाले दिनों में कई और खरीद केंद्रों को चालू किया जाएगा। राजस्थान के शेष हिस्सों में मई के पहले सप्ताह से खरीद किया जाना है। प्रत्येक खरीद केंद्र में अधिकतम 10 किसानों को प्रति दिन बुलाया जाता है और उसी के अनुसार किसानों को सूचना भेजी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">रबी सीजन 2020-21 में मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) के तहत कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, राजस्थान, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दलहन और तिलहन की खरीद की जा रही है। नेफेड और भारतीय खाद्य निगम ने करीब 785 करोड़ रुपये मूल्य की 1,33,987 टन दलहनों और 29,264 टन तिलहनों की खरीद की है । इससे कुल 1,14,338 किसान लाभान्वित हुए हैं। दालों के बफर स्टॉक के लिए नेफेड की ओर से मूल्य स्थायीकरण कोष (पीएसएफ) योजना के तहत किसानों से एमएसपी पर अरहर की खरीद की जा रही है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>कृषि</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/purchase-of-rabi-crop-from-limited-number-of-farmers-due-to-lockdown/article-14546</link>
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                <pubDate>Sun, 19 Apr 2020 17:50:13 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कैसे कटेगी फसल, हरियाणा में नहीं आ पा रही कम्बाइन?</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश से प्रवासी मजदूर कर चुके हैं पायलन, बढ़ी चिंताएं चंडीगढ़(अश्वनी चावला/सच कहूँ)। हरियाणा में भले ही गेंहू की खरीद का सीजन 15 दिन देरी से करने के बाद मंडियों में फसल 15 अप्रैल के बाद ही आएगी। परंतु खेतों में पककर लगभग पूरी तरह तैयार हुई गेहूं की फसल की कटाई कैसे होगी, इस […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/crisis-on-farmers-how-will-the-crop-be-cut-the-combine-is-not-coming-in-haryana/article-14037"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/wheat-purchase.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">प्रदेश से प्रवासी मजदूर कर चुके हैं पायलन, बढ़ी चिंताएं</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़(अश्वनी चावला/सच कहूँ)।</strong> हरियाणा में भले ही गेंहू की खरीद का सीजन 15 दिन देरी से करने के बाद मंडियों में फसल 15 अप्रैल के बाद ही आएगी। परंतु खेतों में पककर लगभग पूरी तरह तैयार हुई गेहूं की फसल की कटाई कैसे होगी, इस बात की चिंता हरियाणा के किसानों को खाए जा रही है। क्योंकि ज्यादातर हरियाणा में गेहूं की कटाई पहले मजदूरों के द्वारा की जाती थी, लेकिन लॉकडाउन के चलते मजदूर हरियाणा से बड़ी संख्या में पलायन करके अपनों घरों को लौटे चुके हैं। जिसके चलते अब किसानों की फसलों की कटाई का सारा दारोमदार कंबाइन हार्वेस्टर पर ही टिका हुआ है। लेकिन यहां पर भी हरियाणा व पंजाब राज्य की सीमा सील होने के चलते किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<h3>अभी तक सरकार की तरफ से कोई अधिकृत आदेश जारी नहीं</h3>
<p style="text-align:justify;">पंजाब से लगभग 17-18 हजार के करीब कंबाइन गेहूं की फसल कटाई करने के लिए इन दिनों में हरियाणा व राजस्थान के लिए निकलती हैं। क्योंकि पंजाब से पहले हरियाणा और राजस्थान में ही गेहूं की फसल की कटाई शुरू होती है। इस साल भी पंजाब राज्य में बड़ी संख्या में कंबाइन पूरी तरह तैयार होते हुए हरियाणा राज्य में प्रवेश करना चाहती है, परंतु पंजाब में कर्फ्यू लगा होने के कारण कंबाइन आॅपरेटर को जहां एक तरफ कर्फ्यू का पास नहीं मिल पा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं अगर कोई कर्फ्यू का पास लेकर पंजाब की सीमा पार करते हुए हरियाणा में दाखिल होने की कोशिश कर रहा है तो उसे हरियाणा में दाखिल नहीं होने दिया जा रहा है, क्योंकि अभी तक सरकार की तरफ से कोई अधिकृत आदेश जारी नहीं किए गए हैं, जिन आदेशों के अनुसार दोनों राज्यों की सीमा पर तैनात पुलिस बल कंबाइन आॅपरेटर को हरियाणा में आने की इजाजत दे। जिसके चलते हो रही देरी के कारण ही हरियाणा का किसान काफी भयभीत नजर आ रहा है, क्योंकि इन दिनों मौसम के बिगड़ते मिजाज के चलते कब मेहनत पर पानी फिर जाए, कहा नहीं जा सकता।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे होगा कम्बाइन आॅपरेटर का टेस्ट</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा राज्य की सीमा पर लगा पुलिस बल यह बात कह रहा है कि अगर प्रदेश सरकार की तरफ से कंबाइन सहित उसके आॅपरेटर को राज्य में आने की इजाजत दे दी जाती है तो यह कैसे सुनिश्चित किया जा सकता है कि कंबाइन आॅपरेटर किसी भी तरह की बीमारी के साथ-साथ कोरोना वायरस से पीड़ित नहीं है। इन कम्बाइन आॅपरेटरों का टेस्ट करने के लिए सीमा बल के पास किसी भी तरह का कोई साजो समान नहीं है और न ही इस तरह का आदेश है कि उन्हें किस हस्पताल में भेजकर उनका टेस्ट कराने के पश्चात ही उन्हें छूट दी जाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कृषि मंत्री जे.पी. दलाल ने दिया था भरोसा</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल की तरफ से पिछले दिनों ही भरोसे दिया गया था कि फसल की कटाई का मौसम आने वाला है और उसके लिए पंजाब में अन्य राज्यों से आने वाली कंबाइन के साथ-साथ अन्य कृषि मशीनरी को प्रदेश में आने के लिए किसी भी तरह से नहीं रोका जाएगा। कृषि मंत्री के इस भरोसे के बावजूद भी हरियाणा में अभी तक इस तरह के कोई आदेश जारी नहीं हुए हैं, जिसके तहत हरियाणा राज्य में कंबाइन के साथ उसके आॅपरेटर को आने की इजाजत दी जाए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">आदेश आज ही करवा देते हैं जारी : सत्यप्रकाश</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा गृह विभाग के सेक्रेटरी व कोरोना के चलते नोडल अधिकारी टी.एल. सत्यप्रकाश ने कहा कि यह आदेश जारी होने से रह गये होंगे। इस बारे में आज ही वो कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य की सीमा पर किसी को दिक्कत न आए और प्रवेश करने की इजाजत देने के लिए अभी आदेश जारी कर रहे हैं। इस बारे में आगे किसी को दिक्कत नहीं आएगी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>पंजाब</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Apr 2020 11:37:58 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान में अब खेत से खरीदी फसल तो दर्ज होगा मुकदमा</title>
                                    <description><![CDATA[टीम खेतों से अनाज की सीधी खरीद करने वालों पर कार्रवाई करेगी।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/a-lawsuit-will-be-filed-on-the-crop-purchased-from-the-farm/article-10929"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/crop.jpg" alt=""></a><br /><h2>समिति ने  मोबाइल टीम का गठन किया | Crop purchased</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>राजस्थान (एजेंसी)।</strong> हाड़तोड़ मेहनत से तैयार किसान की उपज को लेकर मनमर्जी के भाव देने वाले व्यापारियों पर मंडी समिति की ओर से कार्रवाई की जाएगी । कार्रवाई के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने व जुर्माना लगाया जाएगा। इसके लिए मंडी समिति ने मोबाइल टीम का गठन कर दिया है। ये टीम खेतों से अनाज की सीधी खरीद करने वालों पर कार्रवाई करेगी। सीधी खरीद से हो रहे राजस्व घाटे को देखते हुए समिति ने एक मोबाइल टीम का गठन किया है। यह टीम ऑफिस कार्य के साथ ही रोटेशन से क्षेत्रवार गश्त करेगी। गश्त के दौरान अनाज से भरे वाहन पर कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए मंडी सचिव ने टीम बना ली है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">यह आती है परेशानी |Crop purchased</h2>
<p style="text-align:justify;">गांवों में खुली अघोषित अनाज मंडियों के संचालक वाहन चलाने, उपज तौलने के लिए किसान को नौकरी पर रखते हैं। यही नहीं माल परिवहन के दौरान बिल्टी भी परेशानी की होती है। मंडी समिति की टीम जांच करती है तो वाहन में भरे माल को किसान का साबित करने के लिए जमाबंदी मांगी जाती है। काफी देर तक जमाबंदी नहीं पहुंचती है। वाहन को जब्त करने का अधिकार नहीं होने के कारण मंडी की टीम खाली हाथ लौटना पड़ता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सरकारी रियायत से पनपे बिचौलिए</h2>
<p style="text-align:justify;">सरकार ने किसान की उपज को कहीं भी बेचने की स्वतंत्रता दी है। इसी स्वतंत्रता का फायदा उठाकर बिचौलिए पनप गए। हाल यह है कि अब इन बिचौलियों की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी है कि इन्हें हटा पाना मुश्किल है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">दर्ज होगा मुकदमा</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>सीधे फसल खरीदने वाले व्यापारियों पर कार्रवाई के लिए टीम का गठन किया है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> ये टीम खेतों से सीधे अनाज खरीदने वाले व्यापारी व कार्मिक पर आपराधिक मुकदमा दर्ज करवाएगी। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जिले में ऐसे अवैध कारोबार करने वालों को चिन्हित किया जा रहा है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>अनाज की बोरियों से भरे वाहन व कांटे बाट लेकर गांवों में घूमने वाले वाहनों पर कार्रवाई की जाएगी</strong>।</li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Oct 2019 17:01:02 +0530</pubDate>
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