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                <title>Manufacturing - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>भारत को मैन्युफैक्चरिंग में कैसा स्थान चाहिए तय करना जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[मध्य चीन में स्थित फॉक्सकॉन की फैक्ट्री से भयावह कहानियां सामने आ रही हैं। यह कंपनी एप्पल आईफोन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है। मध्य चीन में फिर से कोरोना फैल रहा है। रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि काम करने वाले लोग फैक्ट्री से भाग रहे हैं। कोविड संक्रमण रोकने के नाम पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/important-to-decide-what-place-india-wants-in-manufacturing/article-39799"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-11/manufacturing.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">मध्य चीन में स्थित फॉक्सकॉन की फैक्ट्री से भयावह कहानियां सामने आ रही हैं। यह कंपनी एप्पल आईफोन बनाने वाली सबसे बड़ी कंपनी है। मध्य चीन में फिर से कोरोना फैल रहा है। रिपोर्टों में बताया जा रहा है कि काम करने वाले लोग फैक्ट्री से भाग रहे हैं। कोविड संक्रमण रोकने के नाम पर कड़े नियम लागू किये गये हैं और लोगों को क्वारंटाइन किया जा रहा है, लेकिन कामगारों की शिकायत है कि अकेले रखे गये लोगों को खाने-पीने की वस्तुओं की आपूर्ति कम हो रही है तथा चिकित्सा व्यवस्था भी ठीक नहीं है। इस संयंत्र परिसर में लगभग दो लाख लोग रहते हैं। उन्हें पहले से ही कई परेशानियां थीं, जो अब और बढ़ गयी हैं। भाग रहे कामगारों को वापस बुलाने की कोशिश हो रही है, पर वे बोनस प्रस्तावों को आम तौर पर ठुकरा दे रहे हैं। कथित रूप से परिसर में फिल्माये गये एक वीडियो में दिखाया गया है कि एक कमरे में अलग रह गये कामगारों की मौत हो गयी है, जबकि फॉक्सकॉन का कहना है कि वहां कोई मौत नहीं हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अनेक मुश्किलों से जूझते कामगारों की ऐसी कई खबरें आयी हैं। वे खबरें भारत के लिए अहम हैं क्योंकि फॉक्सकॉन और कुछ अन्य कंपनियां आत्मनिर्भर भारत अभियान के अंतर्गत दिये गये प्रस्तावों से आकर्षित होकर भारत में संयंत्र लगा रही हैं। वेदांता और फॉक्सकॉन का एक संयुक्त उपक्रम गुजरात के अहमदाबाद में स्थापित हो रहा है, जहां एक सेमीकंडक्टर फैब इकाई, एक डिस्प्ले फैब इकाई तथा एक सेमीकंडक्टर एसेंबली व टेस्टिंग इकाई लगायी जायेगी। वेदांता ने कहा है कि इस परियोजना में कुल डेढ़ लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश होगा तथा इससे करीब एक लाख लोगों को रोजगार मिलेगा। यह सही है कि भारत को निवेश और रोजगार बढ़ाने के लिए त्वरित कदम उठाने की जरूरत है। लेकिन यहां यह सवाल भी उठता है कि क्या भारत को भी चीन की तरह वैसी बड़ी-बड़ी फैक्ट्रियां स्थापित करनी चाहिए, जहां मामूली वेतन की निम्न स्तर की नौकरियां हों।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी फैक्ट्रियों में ज्यादातर काम असेंबली का होता है। भले ही चीन में खास तरह की बहुत मैन्युफैक्चरिंग हो रही हो, लेकिन वह देश उच्च स्तर का नवोन्मेषी देश नहीं बन सका है। उसकी छवि एक सीमित सस्ते उत्पादक देश की ही है। कारोबार से होने वाले लाभ का बड़ा हिस्सा चिप डिजाइनर और ब्रांड के पास चला जाता है तथा मूल्य शृंखला का मामूली निचला हिस्सा चीन के हिस्से में आता है। अब चीन में भी निर्माण खर्च में वृद्धि हो रही है और यह भारत के लिए दुर्भाग्यपूर्ण होगा कि वह चीन का सतही संस्करण बन जाए। एक अध्ययन में बताया गया है कि चीन के हिस्से में कम वेतन की नौकरियां आती हैं, जबकि मुनाफा अन्य देशों को चला जाता है। वह मैन्युफैक्चरिंग का वैसा मुकाम नहीं है, जहां भारत पहुंचना पसंद करेगा।</p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Nov 2022 10:09:35 +0530</pubDate>
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                <title>लॉकडाउन के बाद अक्टूबर में विनिर्माण गतिविधियों में उछाल</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली l लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिविधियों के जोर पकड़ने के साथ ही त्योहारी सीजन के मद्देनजर विनिर्माण गतिविधियों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गयी है। इस वर्ष अक्टूबर में विनिर्माण पीएमआई बढ़कर 58.9पर पहुंच गया। इससे पहले इस वर्ष सितंबर में भी विनिर्माण पीएमआई में जबरदस्त तेजी रही थी जब यह बढ़कर 56.8 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/manufacturing-activities-boom-in-october-after-lockdown/article-19662"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-11/manufacturing-activities-boom-in-october-after-lockdown.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली</strong> l लॉकडाउन के बाद आर्थिक गतिविधियों के जोर पकड़ने के साथ ही त्योहारी सीजन के मद्देनजर विनिर्माण गतिविधियों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गयी है। इस वर्ष अक्टूबर में विनिर्माण पीएमआई बढ़कर 58.9पर पहुंच गया। इससे पहले इस वर्ष सितंबर में भी विनिर्माण पीएमआई में जबरदस्त तेजी रही थी जब यह बढ़कर 56.8 पर पहुंच गया था जो मई 2010 के बाद का उच्चतम स्तर था।</p>
<p style="text-align:justify;">विश्लेषकों का कहना है कि लॉकडाउन के बाद जिस तरह से विनिर्माण गतिविधियों में तेजी आ रही है उसका देखते हुये चालू वित्त वर्ष में जीडीपी विकास दर शून्य से मात्र 6 फीसदी नीचे तक रह सकती है। हालांकि इससे पहले विश्लेषकों ने इसको 10 फीसदी से अधिक नीचे रहने का अनुमान व्यक्त कर रहे थे। उनका कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अब धीरे धीरे पटरी पर लौट रही है और यह शीध्र ही तीव्र गति से बढ़ने में सक्षम होगी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Mon, 02 Nov 2020 13:30:34 +0530</pubDate>
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                <title>विनिर्माण क्षेत्र में मई में भारी गिरावट</title>
                                    <description><![CDATA[रिकॉर्ड स्तर पर हुई छँटनी : रिपोर्ट मुंबई (एजेंसी)। Mumbai News देश के विनिर्माण क्षेत्र में इस साल अप्रैल की तुलना में मई में उत्पादन और नये आॅर्डरों में गिरावट बढ़ गयी तथा कंपनियों ने ऐतिहासिक स्तर पर कर्मचारियों की छँटनी की। आईएचएस मार्किट द्वारा आज यहाँ विनिर्माण क्षेत्र के लिए खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/heavy-decline-in-manufacturing-in-may/article-15789"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-06/manufacturing.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:left;">रिकॉर्ड स्तर पर हुई छँटनी : रिपोर्ट</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>मुंबई (एजेंसी)। Mumbai News</strong> देश के विनिर्माण क्षेत्र में इस साल अप्रैल की तुलना में मई में उत्पादन और नये आॅर्डरों में गिरावट बढ़ गयी तथा कंपनियों ने ऐतिहासिक स्तर पर कर्मचारियों की छँटनी की। आईएचएस मार्किट द्वारा आज यहाँ विनिर्माण क्षेत्र के लिए खरीद प्रबंधक सूचकांक (पीएमआई) की रिपोर्ट जारी की गयी। माह-दर-माह आधार पर जारी होने वाला सूचकांक मई में 30.8 दर्ज किया गया जिसका मतलब यह है कि अप्रैल की तुलना में विनिर्माण गतिविधियों में भारी गिरावट आयी है। सूचकांक का 50 से कम रहना पिछले महीने के मुकाबले गिरावट को और 50 से ऊपर रहना वृद्धि को दशार्ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जबकि 50 का अंक स्थिरता का द्योतक है। हालाँकि अप्रैल के मुकाबले गिरावट की रफ्तार मामूली रूप से कम रही। अप्रैल में सूचकांक 27.4 दर्ज किया गया था। रिपोर्ट में कहा गया है कि कंपनियों ने मई में ऐतिहासिक स्तर पर कर्मचारियों की छँटनी की है। आईएचएस ने 15 साल पहले पीएमआई रिपोर्ट तैयार करनी शुरू की थी। कर्मचारियों की छँटनी की रफ्तार मई में इन 15 साल में सर्वाधिक रही। इससे पिछला रिकॉर्ड स्तर इसी साल अप्रैल में दर्ज किया गया था।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 01 Jun 2020 15:08:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नोटबंदी से सुस्त पड़ा विनिर्माण क्षेत्र</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई:  विनिर्माण क्षेत्र पर नवंबर में नोटबंदी का असर देखा गया तथा निक्केई द्वारा जारी पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) अक्टूबर के 54.4 से गिरकर नवंबर में 52.3 पर रह गया। निक्केई के लिए रिपोर्ट तैयार करने वाली बाजार सर्वेक्षण एजेंसी मार्किट इकोनॉमिक्स की अर्थशास्त्री पालियाना डी लीमा ने भारत के पीएमआई आँकड़ों पर प्रतिक्रिया में […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/effect-was-in-november-and-manufacturing-notbandi-issued/article-361"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/notbandi.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>मुंबई:</strong>  विनिर्माण क्षेत्र पर नवंबर में नोटबंदी का असर देखा गया तथा निक्केई द्वारा जारी पर्चेजिंग मैनेजर्स सूचकांक (पीएमआई) अक्टूबर के 54.4 से गिरकर नवंबर में 52.3 पर रह गया।<br />
निक्केई के लिए रिपोर्ट तैयार करने वाली बाजार सर्वेक्षण एजेंसी मार्किट इकोनॉमिक्स की अर्थशास्त्री पालियाना डी लीमा ने भारत के पीएमआई आँकड़ों पर प्रतिक्रिया में कहा “पीएमआई आँकड़े यह दिखाते हैं कि ऊँचे मूल्य वाले नोटों को अचानक अमान्य करार दिये जाने से विनिर्माण क्षेत्र के लिए मुश्किल पैदा हो गयी है क्योंकि नकदी की कमी से नये ऑर्डर, खरीददारी और उत्पादन प्रभावित हुआ है।<br />
हालाँकि, कुछ लोगों ने क्षेत्र के पूरी तरह लुढ़क जाने का पूर्वानुमान लगाया होगा, लेकिन वह वृद्धि बनाये रखने में कामयाब रहा। <a href="http://www.univarta.com/effect-was-in-november-and-manufacturing-notbandi-issued/business/topnews/704041.html"><em>(वार्ता) </em></a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कारोबार</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 Dec 2016 01:41:09 +0530</pubDate>
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