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                <title>Health Services - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाए जाने की दिशा मेंं हों गंभीर प्रयास : राज्यमंत्री अनूप धानक</title>
                                    <description><![CDATA[जिले में महामारी का स्वरुप चिंताजनक – राज्यमन्त्री अनूप धानक उकलाना, कुलदीप स्वतंत्र । हरियाणा के पुरातत्व-संग्रहालय एवं श्रम-रोजगार राज्यमंत्री अनूप धानक ने कहा कि कोरोना महामारी के प्रसार के मद्देनजर लोगों को उपचार उपलब्ध करवाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग सभी संभावनाओं पर कार्य करें। उन्होंने कहा कि जिले में महामारी का स्वरूप चिंताजनक […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/serious-efforts-should-be-made-to-increase-health-services-minister-of-state-anoop-dhanak/article-23440"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/serious-efforts-should-be-made-to-increase-health-services-minister-of-state-anoop-dhanak.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>जिले में महामारी का स्वरुप चिंताजनक – राज्यमन्त्री अनूप धानक</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">
<strong>उकलाना, कुलदीप स्वतंत्र </strong>। हरियाणा के पुरातत्व-संग्रहालय एवं श्रम-रोजगार राज्यमंत्री अनूप धानक ने कहा कि कोरोना महामारी के प्रसार के मद्देनजर लोगों को उपचार उपलब्ध करवाने की दिशा में स्वास्थ्य विभाग सभी संभावनाओं पर कार्य करें। उन्होंने कहा कि जिले में महामारी का स्वरूप चिंताजनक है, ऐसे में हमें मिलजुल कर सभी विकल्पों पर गंभीरता से प्रयास करने होगें। हरियाणा सरकार की ओर से भी इस दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यमंत्री ने कहा कि इस महामारी से बचाव का सबसे बड़ा हथियार वैक्सीनेशन है। इसलिए नागरिक जल्द से जल्द अपना वैक्सीनेशन करवाएं। इसको लेकर जनता को जागरूक होने की जरूरत है, अगर जनता कोरोना को लेकर जागरूक हो जाएगी तो हम निश्चित तौर पर कोरोना को हराएंगे। उन्होंने कहा कि उकलाना सीएचसी में स्वास्थ्य विभाग की ओर से अब 18 से 44 वर्ष की आयु वर्ग के लिए भी कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीनेशन हेतु सेंटर बनाया गया है। पहले यहां केवल 45 वर्ष से ज्यादा उम्र के लोगों को कोरोना से बचाव के लिए वैक्सीन लगाया जा रहा था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">तय अवधि में 500 बैड के अस्थाई अस्पताल के कार्य पूर्ण हों</h4>
<p style="text-align:justify;">राज्यमंत्री अनूप धानक ने जिंदल मार्डन स्कूल में बनाए जा रहे 500 बैड के अस्थाई अस्पताल के स्थापना कार्यों का भी निरीक्षण किया और अभी तक हुई प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को तेज गति से कार्य करते हुए तय समयावधि में सभी जरूरी व्यवस्था पूरी करने के निर्देश दिए। राज्यमंत्री ने कहा कि अस्पताल की स्थापना हरियाणा सरकार का महत्वकांक्षी निर्णय है। इसलिए इस कार्य में कोई ढिलाई ना हो।</p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 May 2021 19:06:46 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>चिकित्सकों के टोटे से जूझ रहा स्वास्थ्य विभाग</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के अन्य जिलों में भी चिकित्सकों की कमी है, लेकिन चरखी दादरी का हाल और भी बुरा है। नियमानुसार जिले को 94 चिकित्सकों की जरूरत है, लेकिन इस समय महज 32 ही नियुक्त हैं।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/health-services-affected-from-civil-hospital-to-chc-and-phc/article-12781"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/dadri-civil-hospital.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">चिंताजनक। सिविल अस्पताल से लेकर सीएचसी व पीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h2>फार्मासिस्ट व डेंटज सर्जन से चलाया जा रहा कार्य</h2>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>चरखी दादरी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> स्वास्थ्य सेवाओं के मामले में चरखी दादरी जिला बनने के बावजूद अभी बहुत पीछे है। प्रदेश के 22वें जिले में सरकार अब तक चिकित्सकों का टोटा दूर नहीं कर पाई है। हालांकि प्रदेश के अन्य जिलों में भी चिकित्सकों की कमी है, लेकिन चरखी दादरी का हाल और भी बुरा है। नियमानुसार जिले को 94 चिकित्सकों की जरूरत है, लेकिन इस समय महज 32 ही नियुक्त हैं। सबसे बुरा हाल जिला सिविल अस्पताल का है। जहां 42 चिकित्सकों की पोस्ट हैं, लेकिन महज 4 चिकित्सक ही हैं। सर्जन से लेकर कई स्पेशलिस्ट नहीं होने से मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में महंगा उपचार लेना पड़ रहा है। विभागीय अधिकारियों ने चिकित्सकों की तैनाती की डिमांड कई दफा भेजी है, लेकिन अब तक सरकार ने जिले में चिकित्सकों की तैनाती नहीं की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">ज्यादातर मरीज किए जा रहे रेफर</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जिले में छह एसएमओ व 53 डेंटल सर्जन के पद तक खाली पड़े हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">सीएचसी और पीएचसी में चिकित्सकों की कमी के चलते फार्मासिस्ट या डेंटज सर्जन से ही काम चलाया जा रहा है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">ज्यादातर मरीजों को सीएचसी या पीएचसी से पहले सिविल अस्पताल और फिर वहां से पीजीआई रोहतक या भिवानी जीएच रेफर कर दिया जाता है। जिला के 100 बैड के सिविल अस्पताल में चिकित्सकों का टोटा होने का खामियाजा मरीजों को उठाना पड़ रहा है। सिविल अस्पताल में 42 डाक्टरों की पोस्ट हैं, लेकिन यहां अब सिर्फ 7 चिकित्सक ही हैं। जिनमें से तीन चिकित्सक अनुपस्थित चल रहे हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">तीन चिकित्सकों का हुआ तबादला</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकार द्वारा तीन चिकित्सकों के तबादले दूसरे जिलों में करने के बाद तो यहां स्वास्थ्य व्यवस्था चरमर्रा गई है। जिला स्वास्थ्य विभाग के अधीन तीन सीएचसी और 14 पीएचसी हैं। इन सभी पर भी चिकित्सकों की कमी है। कादमा, गोपी, रानीला, मानकावास व माई खुर्द पीएचसी पर तो स्थाई चिकित्सक ही नहीं है। वहीं अधिकांश सीएचसी व पीएचसी में चिकित्सकों की कमी के चलते डेंटल सर्जन या फार्मासिस्ट से काम चलाया जा रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बैड बढ़ाए, डॉक्टर नहीं</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">चरखी दादरी सिविल अस्पताल को 50 की बजाय 100 बेड का किया जा चुका है ।</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन इसके मुताबिक चिकित्सकों की संख्या नहीं बढ़ाई गई है।</li>
<li style="text-align:justify;">नियमानुसार सिविल अस्पताल में 42 चिकित्सकों और तीन एसएमओ की तैनाती होनी चाहिए।</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन इस समय चार चिकित्सक और एक एसएमओ की नियुक्त है।</li>
<li style="text-align:justify;">35 चिकित्सकों के और दो पद एसएमओ के खाली पड़े हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके अलावा ईएनटी, आई, स्कीन, आॅर्थो, सर्जन व बालरोग के डाक्टर की तैनाती नहीं हुई है।</li>
</ul>
<p><em><strong>सिविल सर्जन डॉ. विरेंद्र यादव ने बताया कि चिकित्सकों की डिमांड सरकार तक भेज चुके हैं, लेकिन अभी नियुक्तियां नहीं हुई हैं। जिले में जितने चिकित्सक हैं, उनकी सेवाएं मरीजों को नियमित मिल रही हैं। जल्द ही चिकित्सकों की तैनाती हो जाएगी और फिर पीएचसी और सीएचसी भी चिकित्सकों की कमी को हम दूर कर देंगे।</strong></em></p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं विधायक</h3>
<p style="text-align:justify;">दादरी के विधायक सोमबीर सांगवान ने कहा कि यहां के सामान्य सरकारी अस्पताल के अलावा जिलेभर में पर्याप्त संख्या में चिकित्सकों की नियुक्तियों को लेकर वे शीघ्र ही प्रदेश के मुख्यमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री से मिलेंगे। अस्पताल में पर्याप्त चिकित्सा सुविधाएं मुहैया करवाने का हर संभव प्रयास किया जाएगा।</p>
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<p><span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title=""> </span></span></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jan 2020 20:19:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अब घुटना बदलवाना हुआ सस्ता, सरकार ने की 65 प्रतिशत की कटौती</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। सरकार ने लोगों को किफायती दर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए घुटना बदलवाने के दौरान लगाए जाने वाले उपकरणों की अधिकतम कीमत बुधवार से नियंत्रित कर दी है जिससे इस आपरेशन पर खर्च की जाने वाली कुल राशि में भारी कमी आएगी तथा इसका […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/knee-replacement-will-cheap-government-cuts-65-percent/article-3159"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/health.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सरकार ने लोगों को किफायती दर पर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए घुटना बदलवाने के दौरान लगाए जाने वाले उपकरणों की अधिकतम कीमत बुधवार से नियंत्रित कर दी है जिससे इस आपरेशन पर खर्च की जाने वाली कुल राशि में भारी कमी आएगी तथा इसका उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। रसायन एवं उर्वरक मंत्री अनंत कुमार ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नेशनल फार्मा प्राइसिंग आथरिटी (एनपीपीए) ने घुटना बदलवाने के दौरान मरीजों से की जाने वाली लूट को रोकने के लिए इसके विभिन्न आपरेशन में लगाए जाने वाले उपकरणों का मूल्य नियंत्रित कर दिया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> वस्तु एवं सेवा कर अलग से होगा</h2>
<p style="text-align:justify;">देश में घुटना बदलवाने के लिए 80 प्रतिशत लोग कोबाल्ट क्रोमियम आपरेशन कराते हैं। सरकार के फैसले से इसमें खर्च होने वाली राशि में 65 प्रतिशत की कमी आएगी। अभी तक इस आपरेशन पर लोगों को एक लाख 58 हजार रुपये से ढाई लाख रुपये तक खर्च करने पड़ते हैं, लेकिन अब इस उपकरण का अधिकतम खुदरा मूल्य 54720 रुपये तय किया गया है। इस कीमत पर वस्तु एवं सेवा कर अलग से होगा। घुटना बदलवाने के लिए पांच प्रकार के आपरेशन कराये जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">टाइटेनियम एंड आक्सीडाइज्ड जीरकोनियम आपरेशन में ढाई लाख से साढे चार लाख रुपये तक का खर्च आता है, लेकिन अब इस आपरेशन में लगाए जाने वाले उपकरण का अधिकतम मूल्य 76600 रुपये तय किया गया है। हाई फ्लैक्सीबिलिटी इम्प्लांट आपरेशन में एक लाख 81 हजार रुपये लिए जाते थे लेकिन अब इसमें लगने वाले उपकरण का अधिकतम मूल्य 56490 रुपये कर दिया गया है।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Aug 2017 09:21:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जिम्मेवार रवैया अपनाए सरकार</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश में गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन की सप्लाई बंद होने से 50 से अधिक बच्चों की मौत का मामला दिल को झकझोर देने वाला है। चाहे सरकार आॅक्सीजन की सप्लाई न होने को नकार रही है लेकिन घटना को सिरे से नकार देना मामले पर मिट्टी डालने जैसा है। यह सच है कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/government-adopt-attitude-responsible-for-health-services/article-3092"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/gorkhpur1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश में गोरखपुर मेडिकल कालेज में आक्सीजन की सप्लाई बंद होने से 50 से अधिक बच्चों की मौत का मामला दिल को झकझोर देने वाला है। चाहे सरकार आॅक्सीजन की सप्लाई न होने को नकार रही है लेकिन घटना को सिरे से नकार देना मामले पर मिट्टी डालने जैसा है। यह सच है कि बच्चों की मौतें हुई हैं। सरकार को इस संबंधी निष्पक्ष जांच करवानी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि मामला कुछ और है तो भी उसका स्पष्टीकरण तुरंत देना चाहिए। मीडिया में इस बात की चर्चा है कि आक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने 63 लाख रुपए बकाया खड़ा होने के कारण डीएम को सप्लाई बंद करने की चेतावनी दी थी। स्वास्थ्य विभाग में लापरवाही के लिए अधिकारी व विभाग जिम्मेदार है। इस संबंधी खुलासा होने पर दोषी व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल सरकारी व्यवस्था में लापरवाही शब्द ऐसा जुड़ गया है जो हटने का नाम ही नहीं ले रहा। केंद्र व राज्य सरकारें स्वास्थ्य सेवाओं के लिए हजारों करोड़ों का बजट आरक्षित रखती हैं। सरकारों के पास इतनी क्षमता भी मौजूद है कि वह कर्ज माफी जैसे कदम उठाने के प्रयास कर रही हैं। स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र में पैसे की कमी के कारण मासूमों की मौत होना प्रबंधों पर सवाल उठाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि सरकारें मुफ्त इलाज सहित अन्य सुविधाएं उपलब्ध करवा सकती है, तब आक्सीजन के सिलैंडर मंगवाने में केवल औपाचारिकता ही पूरी करनी होती है। यह कहना कोई गलत नहीं होगा कि यहां गड़बड़ी केवल संदेश पहुंचाने में ढील का परिणाम है। जिस व्यक्ति के पास निजी अस्पताल जाने के लिए पैसे होते हैं वह सरकारी अस्पताल नहीं जाता। सबके दिल में बड़ा डर लापरवाही का होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसी कारण सरकारी अस्पताल गरीबों के अस्पताल बनते जा रहे हैं। उधर मुख्यमंत्री या स्वास्थ्य मंत्री अस्पतालों के दौरे करने तक सीमित रह गए हैं। सत्तापक्ष के नेता व्यवस्था में सुधार तो लाना चाहते हैं, लेकिन अधिकारी अपनी पुरानी आदत छोड़ने या बदलने के लिए तैयार नहीं। मंत्री के दौरे का असर कुछ दिनों तक ही दिखता है। बाद में फिर पहले वाले हालात बन जाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल सरकारी व्यवस्था में काम करने की रिवायत पैदा करने की जरूरत है। कुछ अधिकारी जिम्मेदारी से काम करते हैं जिनका हौसला बढ़ाने की जरूरत है। लापरवाही करने वालों के खिलाफ समय पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। व्यवस्था में सुधार ही समस्या का समाधान है। स्वास्थ्य सेवाएं सबसे अहम क्षेत्र है जिसमें कार्य के प्रति संवेदनशील एवं गंभीर बने रहने की सदैव आवश्यकता रहती है। अस्पतालों के प्रशासनिक अधिकारी लोगों के स्वास्थ्य को संवेदनशीलता से लें, ताकि दोबारा ऐसी घटनाएं घटित न हों।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">
</p><p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</p>
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                <pubDate>Sat, 12 Aug 2017 22:04:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>अब स्वास्थ्य सेवाओं पर भी विशेष छूट का दौर</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पतालों द्वारा लोगों को आकर्षित करने के लिए डाला जाता है विशेष रियायतों का चोगा भटिंडा (अशोक वर्मा)। भटिंडा क्षेत्र में निजी मेडिकल सेवाएं कार्पोरेट सेक्टर का रूप धारण कर गई हैं। इसकी मिसाल काफी अस्पतालों द्वारा अपनी सेवाओं में अन्य व्यापारिक संस्थानों की तरह विशेष रियायतें देने व पेशकश करने से मिलती है। शहर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/special-concessions-spell-for-health-services/article-2348"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/hospita-in-punjab.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">अस्पतालों द्वारा लोगों को आकर्षित करने के लिए डाला जाता है विशेष रियायतों का चोगा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>भटिंडा (अशोक वर्मा)।</strong> भटिंडा क्षेत्र में निजी मेडिकल सेवाएं कार्पोरेट सेक्टर का रूप धारण कर गई हैं। इसकी मिसाल काफी अस्पतालों द्वारा अपनी सेवाओं में अन्य व्यापारिक संस्थानों की तरह विशेष रियायतें देने व पेशकश करने से मिलती है। शहर के अखबार रोजाना ही ऐसे पोस्टरों व हैंडबिलों से भरे होते हैं, जिनमें मरीजों को रियायतें अथवा विशेष छूट का चोगा डाला होता है।</p>
<p style="text-align:justify;">जानकारी मुताबिक भटिंडा के एक निजी अस्पताल ने शहर में पांच हजार रुपये में होने वाले टैस्ट 1499 रुपये में करने की पेशकश की है। इसी अस्पताल ने पूरे शरीर से संबंधित टैस्ट का 13 हजार रुपये वाला पैकेज 4699 व बाजार में 7900 रुपये में होने वाला काम 2499 रुपये में करने की घोषणा की है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">भटिंडा में निजी स्वास्थ्य सेवाएं हुई कार्पोरेट सेक्टर में तबदील</h2>
<p style="text-align:justify;">इसी तरह एक अन्य अस्पताल ने सुबह 9 बजे से 12 बजे तक जनरल ओपीडी की कीमत 50 रुपये की है तो अन्य भी कई अदारों ने मरीजों को आकर्षित करने के लिए कई तरह की पेशकश की हुई हैं। इस देखा-देखी के चलते मरीजों की संख्या कम होने की मजबूरी में शहर के बड़े अस्पताल को भी कई मामलों में विशेष छूट की घोषणाएं करनी पड़ी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पता चला है कि दो तीन अस्पताल तो ऐसे हैं, जिन्होंने इस काम के लिए कार्पोरेट मैनेजरों की नियुक्ती कर रखी है। यह मैनेजर मरीजों अथवा उनके साथ आए रिश्तेदारों को स्वास्थ्य सेवाओं के प्लान समझाते हैं और बिक्री करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे स्पष्ट है कि डॉक्टरी भी अब सेवा वाला काम नहीं रहा है। माना जा रहा है कि इसके मुख्य कारण बदलते समय कारण तबदील हुई सामाजिक तरजीह, मेडिकल शिक्षा का महंगा होना, ईलाज के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरणों व इमारतों का खर्च करोड़ों तक पहुंच जाना है। इसके साथ ही सरकारों द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं जैसे मूलभूत क्षेत्र के लिए ग्रांट देने से हाथ पीछे खींचना इसके लिए जिम्मेवार है।</p>
<p style="text-align:justify;">देखने में आया है कि इस क्षेत्र में दो दर्जन के करीब बड़े अस्पताल हैं, जिनके द्वारा अपने- अपने क्षेत्र में प्रसिद्ध होने व मरीजों को अत्याधुनिक सेवाएं देने का दावा किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">भटिंडा में अपना अस्पताल चला रहे डॉक्टर का प्रतिक्रम था कि कोई समय ऐसा भी था कि भटिंडा जिले में कुछ ही बड़े अस्पताल थे। गत डेढ दशक दौरान अस्पतालों की संख्या में काफी ईजाफा हुआ है। विशेष तौर पर किसी न किसी रोग के विशेषज्ञ डॉक्टरों के अस्पताल ज्यादा अस्तित्व में आए हैं। इसके चलते स्वास्थ्य के क्षेत्र में मुकाबले का दौर शुरू हो गया है। मजबूरी कहें अथवा अपना काम ठप होने का डर, हर कोई व्यापारिक रास्ते पर चल पड़ा है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">विरोधी नीतियां जिम्मेवार: डॉ.मंगला</h2>
<p style="text-align:justify;">इंडियन मेडिकल एसोसिएशन भटिंडा के अध्यक्ष डॉ. कुलदीप मंगला ने कहा कि पंजाब में 70 फीसदी स्वास्थ्य सेवाएं छोटे स्तर पर निजी व सरकारी अस्पतालों में मुहैया करवा रहे हैं। स्वास्थ्य ढांचे को बिगाड़ने के लिए विरोधी देशों के ईशारे पर लागू की नीतियों जिम्मेवार हैं,</p>
<p style="text-align:justify;">जिनके तहत स्वास्थ्य क्षेत्र में कार्पोरेट घरानों को प्रोत्साहन किया जा रहा है। डॉ. मंगला ने कहा कि असल में इन कार्पोरेट अस्पतालों का एक ही उद्देश्य पैसा कमाना रह गया है, जिस कारण इस तरह के ढंग अपनाए जा रहे हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">चिंताजनक रूझान: माहीपाल</h2>
<p style="text-align:justify;">कामरेड माहीपाल ने कहा कि इसके लिए सरकार की नीतियां जिम्मेवार हैं, जिसने सार्वजनिक क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को ठप कर दिया है। इसका परिणाम कार्पोरेट अस्पताल अपनी जरूरत व मर्जी मुताबिक इस सेवा को सौदे की तरह बेचने लगे हैं। पैसे की दौड़ में ‘प्रोफैशनलिजम’ ही इतनी बढ़ गई है कि अब मरीजों को ग्राहक समझा जाने लगा है, जो कि सामाजिक पक्ष से चिंताजनक रूझान है।</p>
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                                                            <category>पंजाब</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 16 Jul 2017 20:38:48 +0530</pubDate>
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