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                <title>Worrisome - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>लोकतंत्र सूचकांक में भारत का स्तर गिरना चिंताजनक: कांग्रेस</title>
                                    <description><![CDATA[एक सर्वेक्षण में भारतीय लोकतंत्र का सूचकांक गिरा है और यह पहला मौका है जब भारत इस सूचकांक में दस अंक नीचे उतरा है। सिंघवी ने कहा कि लोकतंत्र सूचकांक में भारत इस बार 41 नम्बर से घट कर 51 पर पहुंच गया है
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/indias-level-in-democracy-index-worrisome-congress/article-12696"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/congress-3.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">लोकतंत्र को मापने वाला सूचकांक 2006 में शुुरु हुआ था, भारत पहली बार निचले स्तर पर आया (Congress)</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>भारत इस बार 41 नम्बर से घट कर 51 पर पहुंच गया</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> कांग्रेस ने कहा है कि भारतीय लोकतंत्र का पूरी दुनिया में सम्मान है लेकिन इसे मापने के मापदंडों की कसौटी पर भारत कमजोर साबित हुआ है जिसके कारण ताजा सूचकांक में हमारा लोकतंत्र पहली बार दस अंक गिरा है और यह चिंताजनक स्थिति है। (Congress) कांग्रेस प्रवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने वीरवार को पार्टी मुख्यालय में संवाददाता सम्मेलन में कहा कि जब लोकतांत्रिक सूचकांक में भारत का स्तर गिरता है तो हमारे महान लोकतांत्रिक देश के लोगों के लिए यह स्वाभाविकरूप से चिंता का विषय बन जाता है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">एक सर्वेक्षण में भारतीय लोकतंत्र का सूचकांक गिरा है</li>
<li style="text-align:justify;">यह पहला मौका है जब भारत इस सूचकांक में दस अंक नीचे उतरा है।</li>
<li style="text-align:justify;">सिंघवी ने कहा कि लोकतंत्र सूचकांक में भारत इस बार 41 नम्बर से घट कर 51 पर पहुंच गया है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">भारत जैसे लोकतंत्र में यह गिरावट क्यों आयी</h3>
<p style="text-align:justify;">लोकतंत्र को मापने वाला यह सूचकांक 2006 में शुुरु हुआ था लेकिन भारत पहली बार इतने ज्यादा अंकों के साथ इतने निचले स्तर तक गिरा है। उनका कहना था कि यह सूचकांक भले ही लोकतंत्र के कुछ ही मापदंडों के आधार पर तैयार हुआ है लेकिन यह विचारणीय है कि भारत जैसे लोकतंत्र में यह गिरावट क्यों आयी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">लोकतंत्र को कम करने वाले चार मापदंडों पर भी यदि विचार करें तो</li>
<li style="text-align:justify;">भारत का स्तर सचमुच में गिरता हुआ महसूस होता है।</li>
<li style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि इसमें पहली कसौटी के तौर पर भय को लिया जा सकता है</li>
<li style="text-align:justify;">और शायद इस कसौटी पर देश के ज्यादातर लोगों का उत्तर हां ही होगा।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;"> देश में यह संस्कृति पहले कभी देखने को नहीं मिली (Congress)</h3>
<p style="text-align:justify;">देश में सच में भय का माहौल बढ़ा है जो लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं है। दूसरा असहिष्णुता है और इस मापदंड पर भी जितने उदाहरण देखने को मिल रहे हैं और उन पर भी हम खुद को कमजोर पाते हैं।प्रवक्ता ने इस क्रम में तीसरी कसौटी के रूप में द्वेष और प्रतिशोध को उदाहरण के तौर पर पेश किया और कहा कि द्वेष और प्रतिशोध का जो माहौल वर्तमान में यत्र तत्र देखने को मिल रहा है देश में यह संस्कृति पहले कभी देखने को नहीं मिली है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">चौथे मापदंड के रूप में सामाजिक तथा धार्मिक एकता को लिया जा सकता है</li>
<li style="text-align:justify;">और इस पर हमारा लोकतंत्र कमजोर ही महसूस होता है।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">भारत का लोकतंत्र दुनिया में सबसे बड़ा</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि ब्रिटेन तथा अन्य कुछ मुल्कों के साम्राज्यवाद से करीब छह सात दशक पहले जो 30-40 देश आजाद हुए हैं उन सब में भारतीय लोकतंत्र अनोखा और विशिष्ठ है। हमारा लोकतंत्र दुनिया में सबसे बड़ा है और भारत जैसा लोकतंत्र आसपास के मुल्कों में कहीं भी नहीं है। लोकतंत्र के मापदंडों पर भारत की रैंकिंग कम होना देश के सभी लोगों को स्वाभाविक रूप से परेशान करने वाला है।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2020 15:59:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत में वृद्धजनों की दुर्दशा चिंतनीय</title>
                                    <description><![CDATA[नीचे गिरे सूखे पत्तों पर जरा अदब से पैर रखिए, कभी कड़ी धूप में इन्हीं से छाव मांगी थी तुमनें। किसी लेखक की यह पंक्तियां कृतज्ञता के भावों को श्रेष्ठ रूप में अभिव्यक्त करने के साथ वर्तमान पीढ़ी के अपने कर्तव्यों से विमुख होने पर सटीक ईशारा करती है। हाल ही में हेल्पेज इंडिया ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/the-plight-of-elderly-in-india-is-worrisome/article-4196"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/earldy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">नीचे गिरे सूखे पत्तों पर जरा अदब से पैर रखिए, कभी कड़ी धूप में इन्हीं से छाव मांगी थी तुमनें। किसी लेखक की यह पंक्तियां कृतज्ञता के भावों को श्रेष्ठ रूप में अभिव्यक्त करने के साथ वर्तमान पीढ़ी के अपने कर्तव्यों से विमुख होने पर सटीक ईशारा करती है। हाल ही में हेल्पेज इंडिया ने बुजुर्गो के प्रति व्यवहार पर देश के चुनिंदा शहरों में सर्वेक्षण किया।</p>
<p style="text-align:justify;">नतीजे कोई खास अच्छे सामने निकल कर नहीं आये। सर्वेक्षण के परिणाम में मंगलुरु पहले पायदान पर रहा, जहाँ 47 फीसद वृद्धजनों के साथ बुरा बर्ताव होता है। इस क्रम में दूसरे स्थान अहमदाबाद को मिला है जहाँ 46 फीसद वृद्धजन अपनों के द्वारा ही सताये हुए है। मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल 39 फीसद के साथ तीसरे तथा अहमदाबाद को 35 फीसद के साथ इस सूची में चौथा स्थान मिला है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे आश्चर्य जनक आँकड़े तो यह है कि समाज की मान्यता के अनुसार जहा परिवारों में बहुएं अपने सास-ससुर से खराब बर्ताव के लिए प्रथम दृष्टया संदेह के घेरे में आती है लेकिन यहां ऐसा नहीं है। हेल्पेज इण्डिया के अनुसार बुजुर्गो को सताने में 52 फीसदी बेटों का योगदान है तो बहुओं का प्रतिशत 34 फीसद है। बेटों की चाह में इतने आगे निकल आये हम कि आज यह आँकड़े स्थति को बयां कर रहे है! सताये हुए 82 प्रतिशत बुजुर्ग शिकायत ही नहीं करते और 34 प्रतिशत तो ऐसे है जिनको यह भी ज्ञात नहीं की इस समस्या से कैसे निपटा जाए!</p>
<p style="text-align:justify;">गांवो को देहात और वहां के लोगो को असभ्य करार दिया जाता है लेकिन वहां के वृद्धजन सुखी है उनके कम पढ़े लिखे बच्चे उनके कहने में है। आबो हवा तो शहरों की खराब हुई है,आधुनिक होने के चलते इतने विकसित हो गए हम कि जन्म देने वाले ही बोझ लगने लगे। सबसे खराब स्थति शिक्षित संतानों की है। विजयपत सिंघानिया देश का जाना माना नाम है लेकिन बेटे ने उन्हें पाई पाई का मोहताज बना कर रख दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">मुंबई के एक रिहायशी इलाके में फ्लैट में माँ को मरे साल हो जाते हैं और बेटा अमेरिका से जब लौटता है तो घर में माँ का शव ही पूरी तरह नष्ट हो चुका होता है। ऐसी घटनायें अचम्भित करने के साथ उस शिक्षा पर प्रश्न खड़ा करती है जिसके दम पर हम खुद को सभ्य कहते है! जो संताने अपने दूध का कर्ज न उतार सके वे कैसे सभ्य हो सकती हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">जो जितना ज्यादा शिक्षित होता है वह उतनी क्षमता और ऊर्जा का उपयोग बुरे कामो में करता है। देश में एक वाक्या ऐसा ही हुआ, बहु अपने ससुर को खाने में स्लो पॉइजन दे रही थी बेटे ने शक होने पर जाँच की तब यह बात सामने निकल कर आई। प्रताड़ना के तरीके भी आधुनिक हो गए है। आज की मासूम पीढ़ी जो अपनी नजरों के सामने अपने माता-पिता को यह सब करते हुए देखेगी वह वैसा ही सब भविष्य में उनके साथ दोहराएगी। बच्चे परिवेश में ही सीखते है,आस-पास की घटनाओं का प्रभाव उनके मस्तिष्क पर तेजी से पड़ता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यूनाइटेड नेशन पॉपुलेशन फण्ड के अनुसार 90 फीसद बुजुर्गो को सम्मानजनक जिंदगी जीने के लिए काम करना पड़ता है तो वही साढ़े पांच करोड़ बुजुर्ग ऐसे हैं जो रोज रात को भूखे पेट सोने को मजबूर है। अपना खून पसीना एक कर औलाद को पढ़ा लिखा वे लायक बनाते है लेकिन उनके बुढ़ापे में उनके लायक बच्चे ही नालायक बनकर उन्हें भूखा रहने पर विवश कर देते। देश के हर आठ में से एक बुजुर्ग को यह लगता है कि उसके रहने या नहीं रहने से किसी को कोई फर्क नहीं पड़ता।</p>
<p style="text-align:justify;">जून 2014 के केअर एंड क्राइसिस इन ओल्ड ऐज होम के सर्वे के आँकड़ों पर भी गौर करें तो 62 प्रतिशत बुजुर्ग सम्मानजनक जीवन जीने के लिए वृद्धाश्रम में रहने को मजबूर हैं। 63 प्रतिशत बुजुर्गो को घर में अकेलापन लगता है इसलिए वे आश्रम की राह चुनते है। कुल वृद्धजनों की आबादी का आधा लगभग 5 करोड़ वृद्ध गरीबी रेखा के नीचे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि हर समस्या के समाधान का ठीकरा सरकार के ऊपर फोड़ेंगे तो इससे कुछ ठीक नहीं होगा। यह समस्या सरकार द्वारा नहीं बल्कि समाज द्वारा हल हो यह आवश्यक है। सरकार ने तो वर्ष 2007 में मेंटेनेंस एंड वेलफेयर आॅफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट बना दिया था लेकिन परिणाम आज देखिये क्या रहा?</p>
<p style="text-align:justify;">सरकार की जीडीपी का मात्र 0.03 प्रतिशत हिस्सा ही सरकार बुजुर्ग पेंशन के नाम पर खर्च करती है। एक संगठन के अनुमान के मुताबिक देश में 728 ओल्ड ऐज होम है इनमें से 547 की उपलब्ध जानकारी के अनुसार 325 होम नि:शुल्क है जबकि 95 ऐसे है जहाँ रहने के पैसे देना होते है वही 116 दोनों प्रकार के है। सर्वाधिक ओल्ड ऐज होम केरल में है जिनकी संख्या 124 के करीब है।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में आज 97000 बेड ही ओल्ड ऐज होम में उपलब्ध है अनुमान कहता है कि अगले 10 सालों में 9 लाख बिस्तरों की आवश्यकता पड़ने वाली है। स्थति कितनी भयानक होगी इससे अनुमान लगाया जा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">1 मई 2016 से शंघाई में तो कानून लागू कर दिया गया है कि बच्चे यदि अपने माता पिता से नहीं मिलते तो माता पिता को बच्चों पर केस करने का अधिकार होगा तथा बच्चों के क्रेडिट स्कोर कार्ड में यह जोड़ा जाएगा जिससे उन्हें मिलने वाले लोन, वित्तीय सुविधाएं,योजनाओं के लाभ से वंचित किया जा सके।</p>
<p style="text-align:justify;">हमारे यहां के बुजुर्ग चाहे अपमान में रह लेंगे लेकिन अपने घर की बात चारदीवारी में रखने के चलते अपनी समस्या किसी से नहीं कहेंगे इसलिए हमारे यहां ऐसी व्यवस्था की कल्पना करना सही नहीं होगा। किन्तु सरकार के लिए आवश्यक है कि वर्द्धजनों को कष्ट देने की सही शिकायतों पर कड़ी कार्यवाही करते हुए सभी सरकारी योजनाओं के लाभ तथा सरकारी नौकरियो व सेवाओं से वंचित करने संबधी नियमो निर्माण करें।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-सौरभ जैन</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 16 Jun 2018 08:48:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आॅपरेशन से प्रसव के मामले चिंताजनक</title>
                                    <description><![CDATA[बढ़ती संख्या पर लोकसभा में बोले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा नई दिल्ली (एजेंसी)। सरकार ने आॅपरेशन के जरिये प्रसव के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें स्वयं गर्भवती महिलाओं की इच्छा भी शामिल है। स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने प्रश्नकाल में कहा कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/operation-cases-of-delivery-worrisome/article-2905"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/lok-sabha.jpg" alt=""></a><br /><h1>बढ़ती संख्या पर लोकसभा में बोले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी.नड्डा</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>सरकार ने आॅपरेशन के जरिये प्रसव के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि इसके लिए कई कारण जिम्मेदार हैं, जिनमें स्वयं गर्भवती महिलाओं की इच्छा भी शामिल है। स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने प्रश्नकाल में कहा कि यह सही है कि आॅपरेशन से प्रसव के मामले बढ़े हैं, विशेषकर निजी अस्पतालों में।</p>
<p style="text-align:justify;">केन्द्र सरकार स्वास्थ्य योजना (सीजीएचएस) के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में होने वाले कुल प्रसव में से 55.75 प्रतिशत आॅपरेशन से हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी सरकारी संस्थानों को यह निर्देश दिया गया है कि जहां तक संभव हो वे सामान्य प्रसव कराने की कोशिश करें। इन संस्थानों से आॅपरेशन से होने वाले प्रसव के आंकडें भी मांगे गए हैं। सदन में पेश आंकड़ों के अनुसार, सीजीएचएस के पैनल में शामिल निजी अस्पतालों में कुल 31,296 प्रसव में 17,450 आॅपरेशन से और 14,185 सामान्य हुए हैं। नड्डा ने कहा कि आपरेशन के जरिये प्रसव के मामले बढ़ने के कई कारण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसमें एक तो गर्भवती महिलाओं की स्वयं की प्राथमिकता भी है। इसके अलावा गर्भावस्था के दौरान स्वास्थ्य जोखिम बढ़ना तथा आरामपंसद जीवनशैली भी इसका कारण है। कई मामलों में लोग किसी खास दिन अपने बच्चे का जन्मदिन चाहते हैं। इसके अलावा अब लोग एक या दो ही बच्चे चाहते हैं और इसलिए हर प्रसव उनके लिए महत्वपूर्ण होता है और वे इसे सुरक्षित बनाना चाहते हैं। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि आपरेशन के जरिये प्रसव कराना या नहीं कराना पूरी तरह माताओं पर निर्भर करता है और वे डॉक्टर की सलाह पर यह निर्णय करती हैं।</p>
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                <pubDate>Sat, 05 Aug 2017 00:27:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जुलाना के स्वास्थ्य केंद्र में सरकारी योजना को लगा पलीता</title>
                                    <description><![CDATA[चिंताजनक: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नहीं है महिला चिकित्सक जुलाना (कर्मवीर)। जहां एक तरफ प्रदेश की भाजपा सरकार प्रदेश के लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा करती है और प्रधानमंत्री योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाते है। वहीं इस तरह की योजना को स्वास्थ्य चिकित्सक की कमी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/community-health-center-does-not-have-female-doctor/article-2353"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/health-centre.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">चिंताजनक: सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में नहीं है महिला चिकित्सक</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>जुलाना (कर्मवीर)।</strong> जहां एक तरफ प्रदेश की भाजपा सरकार प्रदेश के लोगों के लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं देने का दावा करती है और प्रधानमंत्री योजनाओं को अमलीजामा पहनाने के लिए ऐड़ी चोटी का जोर लगाते है। वहीं इस तरह की योजना को स्वास्थ्य चिकित्सक की कमी के कारण पलीता लगाया जा रहा है। ऐसा ही कुछ जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देखने को मिल रहा है जहां पर महिला चिकित्सक नहीं होने के कारण गर्भवती महिलाओं को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जुलाना का सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र 36 गांव के लिए एक है, जिसमें पिछलीे सरकार ने अपगे्रड कर 30 बैड का अस्पताल बनाया था। पूरे ब्लाक के ग्रामीण यहां पर अपना इलाज करवाने के लिए आते है।</p>
<h2>स्टाफ नर्स और ए<strong>एनएम के सहारे चल रही प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना </strong></h2>
<p>वहीं हर माह की 9 तारिख को जुलाना के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना को लेकर गर्भवती महिलाओं के सभी टेस्ट किए जाते है। लेकिन खास बात यह है कि महिला चिकित्सक की बजाए यहां पर स्टाफ नर्स और एलवीएच, एएनएम के सहारे इस योजना को चलाया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">महिलाओं का कहना है कि महिला चिकित्सक नहीं होने के कारण उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है और एएनएम और जीएनएम या स्टाफ नर्स ही गर्भवती महिलाओं के टेस्ट करती है अगर कोई भी हादसा होता है तो इसका जिम्मेवार कौन होगा। इसलिए गर्भवती महिलाएं यहां की सुविधाओं को देखते हुए जींद या रोहतक जाना ही उचित समझती है।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>पूरे जींद जिले में ही महिला चिकित्सक की कमी है, इस कारण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिला चिकित्सक की नियुक्ति नहीं हुई है। लेकिन प्रधानमंत्री मातृत्च सुरक्षा योजना के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र की स्टाफ नर्स, एलवीएच या एएनएम ही गर्भवती महिला की जांच करते हैं। अगर कोई गंभीर केस दिखाई देता है तो उसे जींद सामान्य अस्पताल में रेफर कर दिया जाता है। </em><br />
<em><strong>नरेश वर्मा, प्रभारी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जुलाना।</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Sun, 16 Jul 2017 21:05:57 +0530</pubDate>
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