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                <title>Monsoon Session - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Monsoon Session: आरोप-प्रत्यारोप से तर-बतर रहा मानसून सत्र</title>
                                    <description><![CDATA[20 जुलाई से 11 अगस्त तक चलने वाला यह मानसून सत्र मणिपुर और अविश्वास प्रस्ताव के लिए ही जाना जाएगा इसमें सकारात्मक दृष्टि से कोई बड़ी पहल शायद ही संभव हुई हो। लोकतंत्र में यह रहा है कि देश की सबसे बड़ी पंचायत से जनहित को सुनिश्चित करने वाले कानून और कार्यक्रम की उपादेयता सुनिश्चित […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/monsoon-session-drenched-in-allegations-and-counter-allegations/article-51156"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/monsoon-session.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">20 जुलाई से 11 अगस्त तक चलने वाला यह मानसून सत्र मणिपुर और अविश्वास प्रस्ताव के लिए ही जाना जाएगा इसमें सकारात्मक दृष्टि से कोई बड़ी पहल शायद ही संभव हुई हो। लोकतंत्र में यह रहा है कि देश की सबसे बड़ी पंचायत से जनहित को सुनिश्चित करने वाले कानून और कार्यक्रम की उपादेयता सुनिश्चित होती है पर संसद अगर शोर-शराबे की ही शिकार होती रहेगी तो ऐसा सोचना बेमानी होगा। पूरे मानसून सत्र में हुए शोर-शराबे से तो यही लगता है कि गैर मर्यादित भाषा और तनी हुई भंवों के बीच पक्ष और विपक्ष दोनों पानी-पानी तो हुए मगर देश की प्यास बुझाना मुश्किल बना रहा। Monsoon Session</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि मणिपुर हिंसा का मुद्दा लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव तक पहुंचने के बाद सरकार और विरोधी पक्ष के बीच संसद के बाहर और भीतर घमासान जारी रहा। विदित हो कि बीते मई की शुरूआत से ही मणिपुर वर्ग संघर्ष में कहीं अधिक हिंसा से लिप्त रहा जिसे लेकर विपक्ष मुखर था। यह रार तब और पेचीदा हुआ जब विपक्षी गठबंधन ने अविश्वास प्रस्ताव को बहस से पहले संसद में बिना चर्चा किए विधेयक सत्र के शुरू में ही पारित करा लिया। जाहिर है विपक्ष ने ऐतराज करते हुए सरकार पर संसदीय नियमों और परम्पराओं को तोड़ने का आरोप लगाया। 303 सीट वाली अकेले बीजेपी और गठबंधन सहित 350 का आंकड़ा रखने वाली बीजेपी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा क्यों हुई यह नए सिरे से चिंतन का विषय है। Monsoon Session</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि अविश्वास प्रस्ताव विपक्ष का एक औजार है और कई मौकों पर इसका उपयोग होता रहा है। वजह जो भी हो फिलहाल विरोधियों को इस अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता था। देखा जाए तो मणिपुर से मानसून सत्र सराबोर था। विपक्षी नेता राहुल गांधी की लगभग साढ़े चार महीने बाद एक बार सदन में एंट्री हुई। गौरतलब है देश की शीर्ष अदालत ने उनकी सजा पर रोक लगाते हुए राहुल गांधी को सदन तक पहुंचाया। सत्ता को अपनी छवि बचाने का पूरा ध्यान था। मानसून सत्र तमाम आरोप-प्रत्यारोप की बाढ़ लिए हुए था। इसमें जनता को क्या फायदा है यह विचारणीय जरूर है कि सत्र आते हैं और बिना खास प्रदर्शन के अगले की बाट जोहने को मजबूर कर देते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अविश्वास का प्रस्ताव एक संसदीय प्रस्ताव है जिसे पारम्परिक रूप से विपक्ष द्वारा संसद में एक सरकार को हराने या कमजोर करने की उम्मीद से रखा जाता है। आमतौर पर जब संसद अविश्वास प्रस्ताव में वोट करती है या सरकार विश्वास मत में विफल रहती है तो उसे त्यागपत्र देना पड़ता है या संसद को भंग करने और आम चुनाव की बात शामिल रहती है। फिलहाल इसके आसार दूर-दूर तक नहीं थे क्योंकि 543 सदस्यों वाली लोकसभा में अकेले भाजपा 300 के पार हैं और गठबंधन के साथ यह आंकड़ा कहीं अधिक बढ़त लिए हुए है ऐसे में अविश्वास को लेकर बहस बड़ी हो सकती थी पर सरकार को हिलाया नहीं जा सकता था और हुआ भी यही।</p>
<p style="text-align:justify;">अविश्वास तथा निंदा जैसे प्रस्ताव विपक्षियों के औजार हैं पर इसे कब प्रयोग करना है इसे भी समझना बेहद जरूरी है। इसके पहले साल 2018 के बजट सत्र में भी मोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव की मांग तेज हुई थी। देखा जाए तो यह दूसरा मौका है जब विरोधी अविश्वास प्रस्ताव को लेकर सजग दिखाई दिए मगर दोनों स्थितियों से उनका दूर-दूर तक नाता नहीं था। पड़ताल बताती है लोकतंत्र के संसदीय इतिहास में सबसे पहले जवाहरलाल नेहरू सरकार के खिलाफ यह प्रस्ताव अगस्त 1963 में जेबी कृपलानी ने रखा था लेकिन इसके पक्ष में केवल 52 वोट पड़े थे जबकि प्रस्ताव के विरोध में 347 वोट थे।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि मोदी सरकार के विरूद्ध पिछले नौ सालों में दूसरी बार अविश्वास प्रस्ताव लाए जाने की बात हो रही है जबकि इन्दिरा गांधी सरकार के खिलाफ सर्वाधिक 15 बार तथा लाल बहादुर शास्त्री और नरसिम्हाराव राव सरकार को तीन-तीन बार ऐसे प्रस्तावों का सामना करना पड़ा है। नेहरू शासनकाल से अब तक 25 बार अवश्विास प्रस्ताव सदन में लाए जा चुके हैं जिसमें 24 बार ये असफल रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">1978 में ऐसे ही एक प्रस्ताव से सरकार गिरी थी। वैसे मोरारजी देसाई सरकार के खिलाफ दो अविश्वास प्रस्ताव रखे गए थे पहले में तो उन्हें कोई परेशानी नहीं हुई परन्तु दूसरे प्रस्ताव के समय उनकी सरकार के घटक दलों में आपसी मतभेद थे। हालांकि उन्हें अपनी हार का अंदाजा था और मत विभाजन से पहले इस्तीफा दे दिया था। देखा जाय तो विपक्ष में रहते हुए अटल बिहारी वाजपेयी भी एक बार इन्दिरा गांधी के खिलाफ और दूसरी बार नरसिंह राव के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव रख चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए नोटिस तभी स्वीकार किया जाता है जब उसके समर्थन में 50 सदस्य हों। मुख्य विपक्षी कांग्रेस के पास कुल 52 का आंकड़ा तो है। हालांकि जिस प्रकार विरोधी इन दिनों इण्डिया के बैनर तले एकजुटता दिखाई गई उससे मनोबल तो बढ़ सकता है मगर बहुमत से भरी सरकार को रौंदा नहीं जा सकता था। मुद्दा यह है कि अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले के पास जब चंद आंकड़े जुटाना भी मुश्किल था तो बड़ी कूबत वाली सरकार की कुर्सी कैसे हिला पाते। खीज के चलते कांग्रेस समेत वामपंथ या अन्य सरकार के विरोधी हो सकते हैं पर इनकी स्थिति भी बहुत दयनीय है। वैसे भाजपा तथा उनके सहयोगियों में सब कुछ अच्छा ही चल रहा है पूरी तरह कहना कठिन है पर सरकार बचाने में उनका मत सरकार के साथ न हो यह भी नहीं हो सकता था।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल अविश्वास प्रस्ताव एक विरोधी संकल्पना है जिसका उपयोग किया जाना कोई हैरत वाली बात नहीं। संदर्भित बात यह है कि सदन का कीमती वक्त रोज हंगामे की भेंट चढ़ता रहा भारी-भरकम पूर्ण बहुमत वाली सरकार का बीते नौ सालों में कोई भी ऐसा सत्र नहीं रहा जिसमें विरोधियों ने सरकार को न घेरा हो। सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक भी यहां काम नहीं आ रही है। एक-दूसरे की लानत-मलानत और छींटाकशी में वक्त बीतता गया। जबकि 2024 मुहाने पर है जहां 18वीं लोकसभा का एक बार फिर गठन होना है। देश के राजनेता जो राजनीति करें वही जनता को देखना होता है चाहे अच्छा करें या अच्छा न करे।</p>
<p style="text-align:justify;">फिलहाल विपक्ष सत्ता की परछाई होती है। विरोधियों की आपत्ति भी जनहित में काम आती है और सरकार की नीतियां भी हित सुनिश्चित ही करती हैं। ऐसे में भाषा की मर्यादा, जन भावनाओं का सम्मान के साथ ही संसद के भीतर शोर करने की बजाय शान्ति और खुशहाली से जुड़े नियोजन पर काम किया जाए तो सरकार और विपक्ष दोनों के लिए अच्छा रहेगा। आगे यह ध्यान देना कहीं अधिक जरूरी है कि सत्ता और विपक्ष दोनों संयम का भी पालन करें और सरकार के मंत्री विरोधियों के मामले में दुश्मन की तरह पेश न आएं। यह लोकतंत्र है यहां जनता की ताकत से नेताओं को कूबत मिलती है। सदन कोई जंग का मैदान नहीं है। Monsoon Session</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. सुशील कुमार सिंह, वरिष्ठ स्तम्भकार एवं प्रशासनिक चिंतक (यह लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="India Wins Asian Champions Trophy Hockey: भारतीय टीम ने रचा इतिहास, मलेशिया को हरा चौथी बार जीती एशियन हॉकी चैम्पियंस ट्रॉफी" href="http://10.0.0.122:1245/india-wins-asian-champions-trophy-hockey/">India Wins Asian Champions Trophy Hockey: भारतीय टीम ने रचा इतिहास, मलेशिया को हरा चौथी बार जीती एशि…</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 13 Aug 2023 15:21:45 +0530</pubDate>
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                <title>Delhi Services Bill: दिल्ली सेवा विधेयक पारित होने पर केजरीवाल का बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Arvind Kejriwal On Delhi Services Bill: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सेवा विधेयक राज्यसभा में पारित होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए काला दिन रहा। केजरीवाल ने कहा कि आज […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/arvind-kejriwal-on-delhi-services-bill/article-50947"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/arvind-kejriwal.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Arvind Kejriwal On Delhi Services Bill: दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली सेवा विधेयक राज्यसभा में पारित होने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह पर तीखा हमला करते हुए कहा कि आज का दिन भारतीय लोकतंत्र के लिए काला दिन रहा। केजरीवाल ने कहा कि आज का दिन भारत के इतिहास में एक तरह से भारतीय जनतंत्र के लिए काला दिन साबित हुआ। आज संसद के अंदर दिल्ली के लोगों को गुलाम बनाने वाला विधेयक पास कर दिया गया। यह विधेयक दिल्ली के लोगों को बेबस, असहाय, लाचार और गुलाम बनाता है। भारत की आजादी से पहले 1935 में अंग्रेजों ने एक कानून बनाया था। Delhi Services Bill</p>
<p style="text-align:justify;">उस कानून का नाम गवर्नमेंट आॅफ इंडिया एक्ट था। उस कानून में अंग्रेजों ने यह लिखा था कि भारत में चुनाव तो होंगे लेकिन जो सरकार चुनी जाएगी उसको कोई काम करने की शक्ति नहीं होगी। जब हमारा देश आजाद हुआ तो हमने संविधान बनाया और संविधान में हमने लिखा कि चुनाव होंगे, लोग अपनी सरकार चुनेंगे और जो सरकार चुनेंगे, उस सरकार को लोगों के लिए काम करने की सारी शक्तियां होंगी। आज आजादी के 75 साल के बाद श्री मोदी ने दिल्ली के लोगों की आजादी छीन ली।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि जब इन लोगों ने देखा कि दिल्ली में आम आदमी पार्टी (आप) को हराना बहुत मुश्किल है। ये लोग पिछले चार चुनाव हार चुके हैं। दिल्ली में 2013, 2015 और 2020 में विधानसभा चुनाव हारने के बाद निगम का चुनाव भी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आप से हार गई। पिछले 25 साल से दिल्ली के अंदर भाजपा की सरकार नहीं बनी है। 25 साल से इनको दिल्ली के लोगों ने वनवास दिया हुआ है। जब इनको लगा कि आप को हराना मुश्किल है तो इन्होंने चोर दरवाजे से दिल्ली की सत्ता को हथियाने की कोशिश की है।</p>
<p style="text-align:justify;">मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री दिल्ली में ऐसा इसलिए कर रहे हैं, क्योंकि पिछले 7-8 साल में बिना किसी शक्ति के भी हम लोगों ने बहुत शानदार काम किए हैं। दिल्ली में हमने इतने शानदार स्कूल-अस्पताल बनाए, 24 घंटे बिजली कर दी, बिजली फ्री कर दी, घर-घर पानी पहुंचा रहे हैं, सड़कें बनाई। 30 साल से गुजरात में इनकी सरकार हैं। इन्होंने गुजरात का बेड़ा गर्क कर दिया है। हरियाणा में इनकी सरकार बनी तो उसका भी बेड़ा गर्क कर दिया। मणिपुर में भी भाजपा की सरकार है। इन लोगों ने मणिपुर को जला दिया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 08 Aug 2023 10:54:28 +0530</pubDate>
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                <title>2000 Rupee Note: क्या बढ़ाई जाएगी 2000 रुपये के नोट बदलने की डेडलाइन? वित्त मंत्रालय ने कही ये बात&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[2000 Rupee Note Exchange: आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) ने 2 हजार के नोट को बैंक में जमा करने व बदलने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया था। इस पर अब वित्त मंत्रालय ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 2000 रुपये के नोट बदलने या जमा करने की समय सीमा 30 सितम्बर 2023 […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/will-the-deadline-to-exchange-2000-rupee-notes-be-extended-finance-ministry-said-this/article-50405"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/2000-rupee-note.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">2000 Rupee Note Exchange: आरबीआई (भारतीय रिजर्व बैंक) ने 2 हजार के नोट को बैंक में जमा करने व बदलने के लिए 30 सितंबर तक का समय दिया था। इस पर अब वित्त मंत्रालय ने जानकारी दी है। उन्होंने बताया कि 2000 रुपये के नोट बदलने या जमा करने की समय सीमा 30 सितम्बर 2023 से आगे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है। लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने एक सवाल का जवाब देते हुए कहा कि दो हजार के नोट बदलने की समय सीमा 30 सितंबर से आगे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं है।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/if-you-want-money-stuck-in-sahara-then-bring-these-important-documents/">Sahara India Refund Documents: सहारा में फंसे पैसे चाहिएं तो ये जरूरी डाक्यूमेंट्स लाइये!</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">सरकार कोई योजना बना रही है |2000 Rupee Note</h3>
<p style="text-align:justify;">लोकसभा में एक और सवाल किया गया कि क्या सरकार काले धन को समाप्त करने के लिए बड़े मूल्य के नोटों को बंद करने की योजना बना रही है। तो सरकार के मंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि नहीं। आरबीआई ने 19 मई को अचानक से 2000 रुपये के नोटों को प्रचलन से वापस लेने की घोषणा की थी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">2 हजार के नोट कितने प्रतिशत आए</h3>
<p style="text-align:justify;">आरबीआई के तहत, प्रचलन में मौजूद दो हजार रुपये के नोटों में से 76% या तो बैंकोें में जमा कर दिए गए हैं या बदल दिए गए हैं। दो हजार के नोट जो प्रचलन में हैं वो 19 मई को घोषणा के दिन 3.56 लाख करोड़ रुपये से घटकर 30 जून को 84 हजार करोड़ रुपये हो गए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">दो हजार का नोट कब आया था</h3>
<p style="text-align:justify;">आपको बता दें कि दो हजार रुपये का नोट 10 नवंबर 2016 को लाया गया था। उस समय केन्द्र सरकार की ओर से नोटबंदी की घोषणा के बाद उस समय प्रचलन में रहने वाले पांच सौ रुपये व एक हजार रुपये के नोटों को बंद कर दिया था इसके बाद 500 रुपये का भी नया नोट लाया गया था।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 25 Jul 2023 13:07:29 +0530</pubDate>
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                <title>Monsoon Session: लोकसभा के मौजूदा सत्र में चौथे दिन भी नहीं चला प्रश्न काल</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Monsoon Session: लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने मणिपुर मुद्दे को लेकर आज भी हंगामा किया जिसके कारण मानसून सत्र में लगातार चौथे दिन प्रश्नकाल बाधित रहा और अध्यक्ष ओम बिरला को हंगामें के कारण सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। बिरला ने जैसे ही प्रश्नकाल आरंभ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/in-the-current-session-of-the-lok-sabha-the-question-hour-did-not-run-even-on-the-fourth-day/article-50402"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/monsoon-session.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> Monsoon Session: लोकसभा में विपक्षी सदस्यों ने मणिपुर मुद्दे को लेकर आज भी हंगामा किया जिसके कारण मानसून सत्र में लगातार चौथे दिन प्रश्नकाल बाधित रहा और अध्यक्ष ओम बिरला को हंगामें के कारण सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक स्थगित करनी पड़ी। बिरला ने जैसे ही प्रश्नकाल आरंभ किया विपक्ष के सदस्य हंगामा करते हुए आसन के सामने आ गये और नारेबाजी करने लगे। अध्यक्ष ने प्रश्नकाल चलाने का प्रयास किया लेकिन विपक्षी सदस्य हंगामा करते रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">हंगामा बढ़ता देख लोकसभा अध्यक्ष ने सदस्यों से कहा, ‘प्रश्नकाल जैसा महत्वपूर्ण काल आप नहीं चलाने दे रहे हैं। दुनिया के सबसे लोकतंत्र में नारेबाजी कर रहे हैं। हंगामा किसी समस्या का समाधान नहीं होता। आप अपनी सीट पर बैठिए। मैं हर मुद्दे पर आपको बोलने का पर्याप्त समय दूंगा। Monsoon Session</p>
<p style="text-align:justify;">मेरा आप से आग्रह है कि संसद की गरिमा को बनाए रखें। प्लेकार्ड सदन ने लेकर आना संसदीय परंपरा के अनुकूल नहीं है। मैंने पहले भी आपसे आग्रह किया है। आप सभी वरिष्ठ सदस्य हैं, संसद की गरिमा को बनाए रखें। आप सदा नहीं चलाना चाहते हैं, प्रश्नकाल नहीं चलाना चाहते हैं, गंभीर मुद्दों पर चर्चा नहीं करना चाहते हैं। बिरला की बात का सदस्यों पर कोई असर नहीं हुआ तो उन्होंने सदन की कार्यवाही अपराह्न दो बजे तक स्थगित कर दी। Monsoon Session</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jul 2023 12:02:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>Monsoon Session: संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार ने बुलाई सर्वदलीय बैठक</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। monsoon session: संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें कई मुद्दों पर विचार-विमर्श के साथ इसे सुचारू रूप से चलाने को लेकर चर्चा होगी। उल्लेखनीय है कि संसद का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू होगा और 11 अगस्त तक चलेगा। तेईस दिनों तक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/the-government-called-an-all-party-meeting-before-the-monsoon-session-of-parliament/article-50180"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/monsoon-session-of-parliament.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> monsoon session: संसद के मानसून सत्र से पहले सरकार ने बुधवार को सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें कई मुद्दों पर विचार-विमर्श के साथ इसे सुचारू रूप से चलाने को लेकर चर्चा होगी। उल्लेखनीय है कि संसद का मानसून सत्र गुरुवार से शुरू होगा और 11 अगस्त तक चलेगा। तेईस दिनों तक चलने वाले इस सत्र में कुल 17 बैठकें होंगी। सर्वदलीय बैठक के दौरान सरकार संसद के दोनों सदनों के कामकाज को सुचारू रूप से सम्पन्न सुनिश्चित करने के लिए सभी दलों का समर्थन मांगेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सभी दलों से मानसून सत्र के दौरान विधायी कार्यों और अन्य विषयों पर सार्थक चर्चा में योगदान देने का आग्रह किया था। प्राप्त रिपोर्टों के मुताबिक 20 जुलाई (गुरुवार) से शुरू होने वाले मानसून सत्र में लगभग 32 विधेयक पेश किए जाने की उम्मीद है। इन विधेयकों में वन विधेयक और डेटा संरक्षण विधेयक भी शामिल हैं। गौरतलब है कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) ने मंगलवार को 39 दलों के साथ राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में बैठक की। दूसरी ओर 26 दलों वाला विपक्ष ने बेंगलुरु में दो दिवसीय बैठक की।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2023 12:09:38 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Monsoon Session: मानसून सत्र को लेकर आई बड़ी खबर, कुछ बड़ा होने वाला है?</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ने मानसून सत्र के लिए 20 जुलाई से राज्यसभा की बैठक बुलाई नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Monsoon Session: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने संसद के मानसून सत्र के लिए 20 जुलाई से राज्य सभा की बैठक बुलाई है। राज्यसभा सचिवालय ने रविवार को जारी वक्तव्य में कहा कि राष्ट्रपति ने आगामी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/monsoon-session/article-49511"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/monsoon-session1.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ने मानसून सत्र के लिए 20 जुलाई से राज्यसभा की बैठक बुलाई</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>Monsoon Session: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू (President Draupadi Murmu) ने संसद के मानसून सत्र के लिए 20 जुलाई से राज्य सभा की बैठक बुलाई है। राज्यसभा सचिवालय ने रविवार को जारी वक्तव्य में कहा कि राष्ट्रपति ने आगामी मानसून सत्र के लिए राज्यसभा की बैठक 20 जुलाई से आहूत की है। वक्तव्य में कहा है गया है कि निर्धारित विधायी कामकाज को देखते हुए मानसून सत्र 11 अगस्त को संपन्न होगा। सत्र के दौरान कुल 17 बैठकें होंगी। उल्लेखनीय है कि संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शनिवार को कहा था कि मानसून सत्र 20 जुलाई को शुरू होकर 11 अगस्त तक चलेगा।</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/uniform-civil-code/">Uniform Civil Code: यूसीसी लागू हुआ तो मुस्लिम, सिख व अन्य धर्म पर कितना असर पड़ेगा, सरल भाषा में जाने</a></p>
<h3 style="text-align:justify;">संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 11 अगस्त तक | Monsoon Session:</h3>
<p style="text-align:justify;">संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 11 अगस्त तक चलेगा। लोकसभा सचिवालय ने आज यहां बताया कि 17 वीं लोकसभा का 12 वां सत्र 20 जुलाई को शुरू होगा और सरकारी कार्य के अनुसार 11 अगस्त को सत्र संपन्न होने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि नये संसद भवन के लोकार्पण के बाद उसमें होने वाला यह पहला सत्र होगा। इस सत्र में 16 कार्य दिवस होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">सत्र में समान नागरिक संहिता सहित कई अहम विधेयक पेश किये जाने की संभावना है। संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी ने सभी दलों से सत्र के दौरान सार्थक चर्चा में योगदान देने का भी आग्रह किया। जोशी ने ट्वीट किया, ‘संसद का मानसून सत्र 2023 आगामी 20 जुलाई से शुरू होगा और 11 अगस्त तक चलेगा। सभी दलों से आग्रह है कि सत्र के दौरान विधायी कामकाज और अन्य विषयों पर सार्थक चर्चा करने में योगदान दें। गौरतलब है कि पिछले बजट सत्र में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को लोकसभा सदस्य के रूप में अयोग्य ठहराए जाने सहित विभिन्न मुद्दों पर सरकार के खिलाफ विपक्ष के हंगामे के बाद दोनों सदनों में गतिरोध देखा गया था।</p>
<h3 style="text-align:justify;">यूनिफॉर्म सिविल कोड पर आया बड़ा अपडेट Monsoon Session</h3>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी की ओर से मध्यप्रदेश की धरती से यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किए जाने से ही बहस जारी है। विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है। वहीं इस बीच मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केन्द्र सरकार मॉनसून सत्र (Monsoon Session) में यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रस्ताव पेश कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मॉनसून सत्र जुलाई में बुलाया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC Bill) का बिल सरकार की ओर से संसदीय स्थायी समिति को भेजा जा सकता है। स्थायी समिति इस बिल पर तमाम हितधारकों से उनके विचार मांगेगी। लेकिन इस बार यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रस्ताव मॉनसून सत्र में पेश होने पर संसद में सियासी घमासान देखने को मिल सकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sun, 02 Jul 2023 13:13:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>Uniform Civil Code Bill: यूनिफॉर्म सिविल कोड पर आया बड़ा अपडेट</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। Uniform Civil Code Bill:  पीएम मोदी की ओर से मध्यप्रदेश की धरती से यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किए जाने से ही बहस जारी है। विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है। वहीं इस बीच मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केन्द्र सरकार मॉनसून सत्र (Monsoon Session) में यूनिफॉर्म सिविल कोड […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/uniform-civil-code-bill/article-49442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/uniform-civil-code-bill.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। </strong>Uniform Civil Code Bill:  पीएम मोदी की ओर से मध्यप्रदेश की धरती से यूनिफॉर्म सिविल कोड का जिक्र किए जाने से ही बहस जारी है। विपक्ष इस बिल का विरोध कर रहा है। वहीं इस बीच मीडिया रिपोर्ट के अनुसार केन्द्र सरकार मॉनसून सत्र (Monsoon Session) में यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रस्ताव पेश कर सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">मॉनसून सत्र जुलाई में बुलाया जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC Bill) का बिल सरकार की ओर से संसदीय स्थायी समिति को भेजा जा सकता है। स्थायी समिति इस बिल पर तमाम हितधारकों से उनके विचार मांगेगी। लेकिन इस बार यूनिफॉर्म सिविल कोड का प्रस्ताव मॉनसून सत्र में पेश होने पर संसद में सियासी घमासान देखने को मिल सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">समान नागरिक कानून अधिकार, जानें, कितना है असरदार? Uniform Civil Code Bill</h3>
<p style="text-align:justify;">‘‘दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चलेगा’’ भोपाल में कार्यकतार्ओं को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव से ठीक पहले समान नागरिक संहिता पर बयान देकर एजेंडा सेट करने की कोशिश की है। पीएम मोदी ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता पर मुसलमानों को उकसाया जा रहा है। साथ ही बिहार की राजधानी पटना में विपक्षी दलों की बैठक को उन्होंने ‘फोटो खिंचवाने का अवसर’ करार दिया। पीएम मोदी ने कहा कि बीजेपी सरकार ‘तुष्टिकरण’ की बजाए ‘संतुष्टिकरण’ की राह पर चलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी ने कहा, ‘एक घर में परिवार के एक सदस्य के लिए एक कानून हो, दूसरे के लिए दूसरा, तो क्या वह परिवार चल पाएगा। फिर ऐसी दोहरी व्यवस्था से देश कैसे चल पाएगा? हमें याद रखना है कि भारत के संविधान में भी नागरिकों के समान अधिकार की बात कही गई है’। पीएम मोदी ने पसमांदा मुसलमानों का मुद्दा उठाते हुए कहा कि सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े मुसलमानों के साथ भी बराबर व्यवहार नहीं किया जाता है। जबकि सरकार ने बिना किसी भेदभाव के वंचितों के लिए काम किया है। पीएम मोदी ने कहा कि तीन तलाक का समर्थन करने वाले लोग सिर्फ वोट बैंक के भूखे हैं जो मुस्लिम बेटियों के साथ अन्याय कर रहे हैं। Uniform Civil Code Bill</p>
<p style="text-align:justify;">पीएम मोदी के इस बयान के बाद एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर आरोप लगाया कि वह ‘हिन्दू नागरिक संहिता’ लाना चाहते हैं। ओवैसी ने कहा, ‘भारत के प्रधानमंत्री समान नागरिक संहिता की चर्चा कर रहे हैं। क्या आप समान नागरिक संहिता के नाम पर बहुलवाद, विविधता को छीन लेंगे?’ वे सभी इस्लामी प्रथाओं को अवैध करार दे देंगे और प्रधानमंत्री, कानून के तहत सिर्फ हिंदू प्रथाओं की रक्षा करेंगे।’</p>
<p style="text-align:justify;">ओवैसी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी के 300 सांसद हैं और वह चुनौती देते हैं कि क्या ‘हिंदू अविभाजित परिवार’ को खत्म कर 0दिया जाएगा और क्या वह ऐसा कर पाएंगे? ओवैसी ने संविधान के नीति निर्देशक तत्वों का हवाला देते हुए कहा कि भारत की संपत्ति देश के लोगों के बीच वितरित की जाए और देश की 50 प्रतिशत संपत्ति आठ से 10 लोगों के पास है। उन्होंने कहा कि नीति निर्देशक सिद्धांत में शराब पर रोक की भी बात है तो शराब पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाता? गौरतलब है कि चुनाव से पहले पीएम मोदी के समान नागरिक संहिता पर बयान के बाद से नई बहस शुरू हो गई है। समान नागरिक संहिता के मुद्दे पर सबसे ज्यादा बहस शादी-विवाह के कानूनों पर होती है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">समान नागरिक कानून | Uniform Civil Code Bill</h4>
<p style="text-align:justify;">समान नागरिक कानून-नाम से ही पता चल रहा है कि इसका मतलब है कि सबके लिए एक नियम। लेकिन भारत जैसे विविधता वाले देश में इसको लागू करना क्या इतना आसान है, जहां सभी को अपने-अपने धर्मों के हिसाब से रहने की आजादी है। समान नागरिक कानून के मुताबिक पूरे देश के लिये एक समान कानून के साथ ही सभी धार्मिक समुदायों के लिये विवाह, तलाक, विरासत, गोद लेने के नियम एक होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">संविधान के अनुच्छेद 44 में भारत में रहने वाले सभी नागरिकों के लिए एक समान कानून का प्रावधान लागू करने की बात कही गई है। अनुच्छेद-44 संविधान के नीति निर्देशक तत्वों में शामिल है। इस अनुच्छेद का उद्देश्य संविधान की प्रस्तावना में ‘धर्मनिरपेक्ष लोकतांत्रिक गणराज्य’ के सिद्धांत का पालन करना है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/uniform-civil-code-bill/article-49442</link>
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                <pubDate>Fri, 30 Jun 2023 11:33:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद का मानसून सत्र आगामी 18 जुलाई से बुलाने की मंजूरी दे दी है। लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मानसून सत्र 18 जुलाई को शुरू होगा और 12 अगस्त तक चलेगा। लोकसभा सचिवालय ने आज एक अधिसूचना जारी कर कहा है […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/monsoon-session-of-parliament-from-july-18/article-35084"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/parliament.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने संसद का मानसून सत्र आगामी 18 जुलाई से बुलाने की मंजूरी दे दी है। लोकसभा और राज्यसभा सचिवालय द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार मानसून सत्र 18 जुलाई को शुरू होगा और 12 अगस्त तक चलेगा। लोकसभा सचिवालय ने आज एक अधिसूचना जारी कर कहा है कि राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 85 के उपबंध एक में निहित अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए मॉनसून सत्र आहूत करने की मंजूरी दे दी है। राज्यसभा सचिवालय की ओर से दी गई जानकारी में भी कहा गया है कि सदन का 257वां सत्र आगामी 18 जुलाई से शुरू होगा और 12 अगस्त तक चलेगा। यह एक संयोग ही है कि राष्ट्रपति चुनाव के लिए मतदान भी 18 जुलाई को ही होगा।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Fri, 01 Jul 2022 10:43:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>हरियाणा विधानसभा का मानसून सत्र 20 से</title>
                                    <description><![CDATA[238 तारांकित और 120 अतारांकित प्रश्नों के मिले नोटिस चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। हरियाणा विधान सभा का मानसून सत्र 20 अगस्त से शुरू होने वाला है। सत्र के लिए प्रश्नकाल में प्रश्नों का चयन करने के लिए पहले तीन दिनों के लिए ड्रा निकाले गए। इस दौरान तारांकित प्रश्नों के लिए 60 विधायकों के नामों […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/monsoon-session-of-haryana-legislative-assembly-from-20-august/article-26043"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/haryana-assembly.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">238 तारांकित और 120 अतारांकित प्रश्नों के मिले नोटिस</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा विधान सभा का मानसून सत्र 20 अगस्त से शुरू होने वाला है। सत्र के लिए प्रश्नकाल में प्रश्नों का चयन करने के लिए पहले तीन दिनों के लिए ड्रा निकाले गए। इस दौरान तारांकित प्रश्नों के लिए 60 विधायकों के नामों की पर्चियां निकाली गर्इं। इस दौरान विधान सभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता, उपाध्यक्ष रणबीर सिंह गंगवा, कांग्रेस विधायक वरुण चौधरी, विधान सभा सचिव राजेंद्र नांदल सहित विधान सभा के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">मानसून सत्र के लिए विधानसभा सचिवालय को 47 विधायकों की ओर से 238 तारांकित और 120 अतारांकित प्रश्नों के नोटिस प्राप्त हुए हैं। गौरतलब है कि विधान सभा की परंपरा के अनुसार सत्र के दौरान दिन का पहला घंटा प्रश्नकाल के लिए रहता है। इस दौरान विधायक सदन में अपने प्रश्नों को रखते हैं और सरकार की ओर से संबंधित मंत्री उसका जवाब देते हैं। नई व्यवस्था में सत्तापक्ष और विपक्ष के विधायकों की उपस्थिति में ड्रा निकाला जाता है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 Aug 2021 10:29:00 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>हंगामे के चलते दो दिन पहले ही लोकसभा की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। पेगासस जासूसी मामले, किसानों के मुद्दे और महंगाई को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका और लोकसभा की कार्यवाही निर्धारित तिथि से दो दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही आज पूर्वाह्न 11:00 बजे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/lok-sabha-adjourned-indefinitely-two-days-ago-due-to-uproar/article-25948"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/monsoon-session-of-parliament1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> पेगासस जासूसी मामले, किसानों के मुद्दे और महंगाई को लेकर विपक्ष और सरकार के बीच संसद के मानसून सत्र में जारी गतिरोध पूरी तरह समाप्त नहीं हो सका और लोकसभा की कार्यवाही निर्धारित तिथि से दो दिन पहले ही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही आज पूर्वाह्न 11:00 बजे जैसे ही शुरू हुई अध्यक्ष ओम बिरला ने पिछले दिनों सदन के चार पूर्व सदस्यों के निधन की जानकारी सदस्यों को दी। सदन ने उनके सम्मान में दो मिनट का मौन रखा। उसके बाद बिरला ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित किए जाने की औपचारिक घोषणा की।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान उन्होंने विपक्ष के गतिरोध के कारण सदन का कामकाज प्रभावित होने को लेकर गहरा दु:ख व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस सत्र में गतिरोध के कारण केवल 17 बैठकें हुर्इं और केवल 21 घंटे 24 मिनट का कामकाज ही हो सका, जो कुल निर्धारित अवधि का महज 22 फीसदी है। अध्यक्ष ने कहा कि सदस्यों के हंगामे के कारण 74 घंटे 46 मिनट कामकाज बाधित हुआ। उन्होंने इस सत्र में पारित ओबीसी की सूची से संबंधित संविधान संशोधन विधेयक सहित विभिन्न विधेयकों का भी जिक्र किया। तत्पश्चात अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इस दौरान सदन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और ज्यादातर केंद्रीय मंत्री भी मौजूद थे। विपक्ष की दीर्घा में कांग्रेस की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी उपस्थित थीं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Aug 2021 12:07:40 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मॉनसून सत्र: राज्यसभा से तृणमूल के छह सदस्य निष्कासित</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। राज्यसभा में बुधवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने पेगासस जासूसी मामले, किसानों की समस्याओं और महंगाई को लेकर भारी शोरगुल और हंगामा किया जिसके कारण तृणमूल कांग्रेस के छह सदस्यों को दिनभर के लिए सदन की कार्यवाही से निष्कासित कर दिया गया। सभापति एम. वेंकेया नायडू ने नियम 255 के तहत तृणमूल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/monsoon-session-deadlock-continues-in-parliament-government-will-introduce-5-bills-today/article-25737"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/monsoon-session-of-parliament.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> राज्यसभा में बुधवार को विपक्षी दलों के सदस्यों ने पेगासस जासूसी मामले, किसानों की समस्याओं और महंगाई को लेकर भारी शोरगुल और हंगामा किया जिसके कारण तृणमूल कांग्रेस के छह सदस्यों को दिनभर के लिए सदन की कार्यवाही से निष्कासित कर दिया गया। सभापति एम. वेंकेया नायडू ने नियम 255 के तहत तृणमूल कांग्रेस की डोला सेन, मोहम्मद नदीमुद्दीन, अबीर रंजन बिस्वास, शांता छेत्री, अर्पिता घोष और मौसम नूर पर यह कार्रवाई की है। ये सदस्य सदन के बीच में कार्यवाही के दौरान तख्तियां दिखा रहे थे और सभापति के आदेश की अवहेलना कर रहे थे।</p>
<p style="text-align:justify;">नायडू ने सुबह कार्यवाही शुरू होने पर कहा कि जो सदस्य सदन के बीचों बीच खड़े है वे अपने स्थान पर चले जाए नहीं तो वह नियम 255 के तहत सदस्यों का नाम लेंगे और वे सदन की दिनभर की कार्यवाही से वंचित हो जाएगे। इसके बाद उन्होंने सदस्यों को सदन से बाहर जाने का आदेश दिया। इसके बाद भी सदस्यों का शोर- शराबा जारी रहने पर सभापति ने कहा कि जो सदस्य सदन के बीचो बीच खड़े है, सभा सचिवालय उनकी सूची सभापीठ को देगा। इसके बाद भी हंगामा जारी रहने पर सदन की कार्यवाही दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले सुबह आवश्यक दस्तावेज पटल पर रखे जाने के बाद सभापति ने कहा कि नियम 267 के तहत समाजवादी पार्टी के राम गोपाल यादव तथा कई अन्य सदस्यों ने किसानों के आंदोलन को लेकर नोटिस दिया है। उन्होंने कहा कि किसानों का आंदोलन महत्वपूर्ण मुद्दा है और इस पर अन्य प्रावधानों के तहत चर्चा की अनुमति दी जा सकती है। कई सदस्यों ने महंगाई और आर्थिक स्थिति पर चर्चा कराने को लेकर नोटिस दिया है। सरकार भी महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा करना चाहती है। इसी दौरान कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस के सदस्य सदन के बीच में आ गए और शोर-शराबा करने लगे। तृणमूल कांग्रेस के सदस्य अपने हाथों में प्ले कार्ड लिए हुए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Aug 2021 11:25:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मॉनसून सत्र: विपक्ष के हंगामे के कारण आज भी नहीं चली संसद</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ डेस्क)।  पेगासस जासूसी, महंगाई, कृषि कानून समेत अन्य मुद्दों को लेकर लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों के सदस्यों का हंगामा जारी रहा, जिसके कारण प्रश्नकाल पूरा नहीं हो सका और सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/monsoon-session-parliament-did-not-run-even-today-due-to-uproar-by-the-opposition/article-25711"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/monsoon-session1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ डेस्क)।</strong>  पेगासस जासूसी, महंगाई, कृषि कानून समेत अन्य मुद्दों को लेकर लोकसभा में मंगलवार को विपक्षी दलों के सदस्यों का हंगामा जारी रहा, जिसके कारण प्रश्नकाल पूरा नहीं हो सका और सदन की कार्यवाही 20 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, और शिरोमणि अकाली दल सहित विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामे के बीच ही प्रश्नकाल शुरू किया, साथ ही हंगामा कर रहे सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने स्थान पर जाएं और प्रश्नकाल में किसान की समस्याओं से संबंधित अपने सवाल सरकार से पूछें। लेकिन वे नहीं माने और जोर जोर से नारेबाजी करने लगे। अध्यक्ष ने हंगामे के बीच ही करीब 40 मिनट तक प्रश्नकाल चलाया लेकिन हंगामा थमता न देख उन्होंने 20 मिनट पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।</p>
<h1 class="storyheadline">लोकसभा में शून्यकाल 11वें दिन भी रहा बाधित</h1>
<p style="text-align:justify;"><span class="storydetails"> लोकसभा के मानसून सत्र के 11वें दिन भी आज कोई कामकाज नहीं हुआ और विपक्षी सदस्यों का पेगासस, किसानों के मुद्दे और महंगाई को लेकर हंगामा जारी रहा जिसके कारण शून्य काल भी नहीं चला और सदन की काईवाई दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी गयी। एक बार के स्थगन के बाद 12 बजे जैसे ही सदन की कार्यवाही दोबारा शुरू हुई विपक्षी सदस्य नारे लगाते हुए सदन के बीचोंबीच आ गये और हंगामा करने लगे। पीठासीन अधिकारी भर्तृहरि मेहताब ने हंगामे के बीच ही सदन के पटल पर सभी आवश्यक कागज रखवाए। उन्होंने सदस्यों से हंगामा नहीं कर अपनी सीटों पर जाने और शून्यकाल में हिस्सा लेने का आग्रह किया लेकिन किसी सदस्य ने उनकी बात नहीं सुनी, हंगामा जारी रखा। शोरशराबा बढ़ता देख श्री मेहताब ने सदन की कार्यवाही दो बजे तक स्थगित कर दी। इससे पहले प्रश्नकाल के दौरान भी विपक्षी सदस्यों का हंगामा जारी रहा और सदन की कार्यवाही जैसे ही शुरू हुई कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, और शिरोमणि अकाली दल सहित विभिन्न विपक्षी दलों के सदस्य हाथों में तख्तियां लेकर अध्यक्ष के आसन के पास पहुंच गए और सरकार विरोधी नारे लगाने लगे। अध्यक्ष ओम बिरला ने हंगामे के बीच ही प्रश्नकाल शुरू किया , साथ ही हंगामा कर रहे सदस्यों से आग्रह किया कि वे अपने स्थान पर जाएं और प्रश्नकाल में किसान की समस्याओं से संबंधित अपने सवाल सरकार से पूछें। लेकिन वे नहीं माने और जोर जोर से नारेबाजी करने लगे। अध्यक्ष ने हंगामे के बीच ही करीब 40 मिनट तक प्रश्नकाल चलाया लेकिन हंगामा थमता न देख उन्होंने 20 मिनट पहले सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी।</span></p>
<h4 style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री बोले- सदन नहीं चलने देना लोकतंत्र का अपमान</h4>
<p style="text-align:justify;">संसदीय दल की बैठक में प्रधानमंत्री ने कहा कि विपक्ष सदन नहीं चलने दे रहा है, ये संसद और संविधान का अपमान है, लोकतंत्र का अपमान है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">असम-मिजोरम सीमा विवाद पहुंचा संसद</h4>
<p style="text-align:justify;">दो राज्यों असम और मिजोरम के बीच इस वक्त सीमा विवाद चल रहा है। ये मामला आज संसद तक पहुंच गया है। कांग्रेस सांसद रिपुन बोरा ने राज्यसभा ने इस मसले पर चर्चा के नोटिस दिया है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 Aug 2021 11:51:54 +0530</pubDate>
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