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                <title>Retirement - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>How to Become Rich: अमीर बनकर रिटायर होना चाहते हैं तो ना करें ये गलतियाँ!</title>
                                    <description><![CDATA[How to Become Rich: नई दिल्ली। कहते हैं कि ‘‘आज तुम पैसे को बचाओगे तो कल यही पैसा तुम्हें बचाएगा’’। इसलिए यदि आप अपना आर्थिक भविष्य सुरक्षित रखना चाहते हैं तो इसके निर्माण हेतु जीवन की शुरूआत में वित्तीय गलतियाँ करने से बचना चाहिए। यह अति जरूरी है। छोटी-छोटी कमियों से बचकर, युवा अमीर बनने के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/if-you-want-to-retire-rich-then-dont-make-these-mistakes/article-56577"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-04/rich-ritire.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>How to Become Rich: नई दिल्ली।</strong> कहते हैं कि ‘‘आज तुम पैसे को बचाओगे तो कल यही पैसा तुम्हें बचाएगा’’। इसलिए यदि आप अपना आर्थिक भविष्य सुरक्षित रखना चाहते हैं तो इसके निर्माण हेतु जीवन की शुरूआत में वित्तीय गलतियाँ करने से बचना चाहिए। यह अति जरूरी है। छोटी-छोटी कमियों से बचकर, युवा अमीर बनने के लिए एक ठोस आधार स्थापित कर सकते हैं। इसका मतलब है कि खर्चों को रोकने के लिए एक बजट बनाना, हो सके तो एक डायरी लगाना और उसमें सब लिखना, अपने साधनों के भीतर रहना और आपातकालीन निधि और सेवानिवृत्ति योजना सहित बचत को प्राथमिकता देना। इसके अतिरिक्त, उच्च-ब्याज ऋण जमा करने से बचना, बुद्धिमानी से निवेश करना और पर्याप्त बीमा कवरेज सुनिश्चित करना अति आवश्यक है। सही ज्ञान और आदतों के साथ, युवा व्यक्ति खुद को अमीर और सुरक्षित बना सकते हैं। Financial Mistakes</p>
<h3 style="text-align:justify;">सबसे बड़ी वित्तीय गलती से बचें</h3>
<p style="text-align:justify;">सबसे पहले 20 साल की उम्र में सबसे बड़ी वित्तीय गलती से बचने के लिए, एक आपातकालीन निधि बनाना सुनिश्चित करें। अप्रत्याशित खर्च तब उत्पन्न हो सकते हैं, जब आप उनकी कम से कम उम्मीद करते हैं और वित्तीय बैकअप के बिना, आप उच्च-ब्याज ऋण का सहारा ले सकते हैं या अपनी बचत को खत्म कर सकते हैं। खुद को सुरक्षित रखने के लिए आसानी से सुलभ खाते में 3 से 6 महीने की आय रखने का लक्ष्य रखें।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सेवानिवृत्ति योजना की अनदेखी | Financial Mistakes</h3>
<p style="text-align:justify;">सेवानिवृत्ति के लिए बचत शुरू करने के लिए बहुत लंबा इंतजार करना आपकी भविष्य की वित्तीय सुरक्षा पर महत्वपूर्ण प्रभाव डाल सकता है। चक्रवृद्धि रिटर्न का लाभ उठाने के लिए जितनी जल्दी हो सके सेवानिवृत्ति खातों में योगदान करना शुरू करें। यदि आप कम उम्र में बचत करना शुरू कर देते हैं, जब ब्याज आपके पक्ष में होता है तो चक्रवृद्धि ब्याज का जादू आपकी मदद करता है। कभी-कभी, आपके सेवानिवृत्ति खाते में कुछ मामूली वृद्धि जैसी छोटी चीज भी लंबी अवधि में संयोजित होने पर महत्वपूर्ण हो सकती है। यह मत भूलिए कि अपने प्रारंभिक योगदान के लिए आप जितनी भी राशि खर्च कर सकते हैं, उससे शुरूआत करें और फिर इसे अपनी समय-संचित आय के रूप में आप जो भी खर्च कर सकें, तक बढ़ाना आसान है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बजट नहीं | Financial Mistakes</h3>
<p style="text-align:justify;">बजट बनाने में असफल होने से अत्यधिक खर्च हो सकता है और वित्त प्रबंधन में कठिनाई हो सकती है। बजट स्थापित करने से खर्च को प्राथमिकता देने में मदद मिलती है और यह सुनिश्चित होता है कि आप भविष्य के लक्ष्यों के लिए पर्याप्त बचत कर सकें। जब आप 20 वर्ष के होते हैं तो ‘अपनी क्षमता से कम जीवन जीने’ के हिस्से के रूप में ‘बचत’ करने का एक फायदा यह है कि यह दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता और धन संचय के लिए एक अच्छी नींव के रूप में काम कर सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्मार्ट खर्च</h3>
<p style="text-align:justify;">ओएलएक्स इंडिया के मुख्य व्यवसाय अधिकारी (आॅटो) सिद्धार्थ अग्रवाल आपके वित्तीय भविष्य को सुरक्षित करने के लिए स्मार्ट खर्च के महत्व पर जोर देते हुए कहते हैं कि इसे प्राप्त करने का एक प्रभावी तरीका पूर्व-स्वामित्व वाली वस्तुओं को खरीदना और बेचना है। विश्वसनीय आॅनलाइन प्लेटफॉर्म अब लिस्टिंग प्रदान करते हैं और एंड-टू-एंड लेनदेन की सुविधा प्रदान करते हैं, जिससे आपके मासिक बजट से महत्वपूर्ण मूल्य अनलॉक हो जाता है। रियायती कीमतों पर उच्च गुणवत्ता वाली पूर्व-स्वामित्व वाली वस्तुओं को खरीदना, चाहे वह इलेक्ट्रॉनिक्स, फर्नीचर, कपड़े या वाहन हों, आपको अपना बजट बढ़ाने और बचत, निवेश या अनुभव जैसे अन्य वित्तीय लक्ष्यों के लिए धन आवंटित करने की अनुमति देता है। इसके अलावा, पूर्व-स्वामित्व वाली खरीदारी उत्पादों को दूसरा जीवन देकर, अपशिष्ट को कम करके और पर्यावरणीय प्रभाव को कम करके स्थिरता को बढ़ावा देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन सामान्य वित्तीय गलतियों से बचकर और जीवन की शुरूआत में अच्छी वित्तीय आदतों का अभ्यास करके, आप अमीर होकर रिटायर हो सकते हैं और भविष्य के लिए एक मजबूत नींव तैयार कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>अस्वीकरण:</strong> लेख में दी गई जानकारी आपकी सामान्य जानकारी के लिए प्रदान की गई है, यह जानकारी और विचार व्यक्ति विशेष के हैं, सच कहूँ इसकी पुष्टि नहीं करता है। ज्यादा जानकारी के लिए आप किसी एक्सपर्ट की सलाह ले सकते हैं। Financial Mistakes</p>
<p><a title="Income Tax Slabs FY 2024-25: जानें, कितना भरना पड़ेगा अब टैक्स!" href="http://10.0.0.122:1245/know-how-much-tax-you-will-have-to-pay-now/">Income Tax Slabs FY 2024-25: जानें, कितना भरना पड़ेगा अब टैक्स!</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Apr 2024 18:10:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Pension News: पति पत्नी के मरने के बाद भी मिलेगी पेंशन? जानिये सुप्रीम कोर्ट का फैसला, कौन होगा हकदार?</title>
                                    <description><![CDATA[गोद लिया बच्चा नहीं होगा फैमिली पेंशन का हकदार नई दिल्ली। Employees Pension Rules : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पति की मौत के बाद सरकारी कर्मचारी की विधवा अगर बच्चा गोद लेती है तो वह फैमिली पेंशन का हकदार नहीं होगा। पूरी जानकारी जानने के लिए […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/will-you-get-pension-even-after-the-death-of-husband-and-wife/article-48939"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/pension-news.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">गोद लिया बच्चा नहीं होगा फैमिली पेंशन का हकदार</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> Employees Pension Rules : सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि पति की मौत के बाद सरकारी कर्मचारी की विधवा अगर बच्चा गोद लेती है तो वह फैमिली पेंशन का हकदार नहीं होगा। पूरी जानकारी जानने के लिए पढ़ना जारी रखें … Pension News</p>
<p style="text-align:justify;">मामला महाराष्ट्र के नागपुर के श्रीधर चिमुरकर का साल 1993 में सरकारी नौकरी (government employees) से रिटायर होने का है। 1994 में उनकी मौत हो गई थी। उनकी मौत के बाद 1996 में उनकी पत्नी माया मोतघरे ने राम श्रीधर चिमुरकर को बेटे के रूप में अपनाया था। तब कोर्ट ने यह भी कहा कि सरकारी कर्मचारी के जीवनकाल के दौरान कानूनी रूप से गोद लिए गए बच्चे फैमिली पेंशन के हकदार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आपकी जरूरत की खबर में आज हम जानेंगे कि फैमिली पेंशन पाने के क्या-क्या नियम हैं? वह बच्चों को कब तक मिलती है, इसमें मृतक के माता-पिता का क्या हक होता है और अनुकम्पा की नौकरी लेने पर पेंशन कैसे और कितनी मिलती है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">एक्सपर्ट्स की राय :- | Pension News</h3>
<p style="text-align:justify;">सवाल: फैमिली पेंशन पाने के क्या नियम हैं?<br />
जवाब: नौकरी से रिटायरमेंट के बाद सेंट्रल गवर्नमेंट कई कर्मचारियों को पेंशन देती है। कर्मचारी की मौत के बाद उसके परिवार के उन लोगों को फैमिली पेंशन दी जाती है जो उस पर आश्रित हों। फैमिली पेंशन किस आधार पर दी जाती है, इसके बारे में डिपार्टमेंट आॅफ पेंशन एंड पेंशनर्स वैल्फेयर फैमिली पेंशन से जुड़े कुछ नियम बताता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">फैमिली पेंशन से जुड़े नियम :- Pension News</h3>
<p style="text-align:justify;">सरकारी सेवक का फैमिली पेंशन पर कोई कंट्रोल नहीं होगा। कर्मचारी यह तय नहीं कर सकता कि उसके बाद पेंशन किसे दी जाएगी। सरकारी सेवक किसी को नॉमिनेट नहीं कर सकता। उसकी मौत के बाद परिवार के सदस्यों को ही फैमिली पेंशन दी जाएगी। कम से कम 1 साल तक लगातार नौकरी करने के बाद ही किसी सरकारी कर्मचारी को फैमिली पेंशन दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल: बच्चों को कितने समय तक फैमिली पेंशन मिलती है?<br />
जवाब: सरकारी कर्मचारी की मौत होने पर बच्चों को फैमिली पेंशन मिलने के कुछ नियम होते हैं जो निम्नलिखित हैं:-</p>
<p style="text-align:justify;">बच्चों के मामले में फैमिली पेंशन सबसे पहले बड़े बच्चे को मिलती है। यदि परिवार में जुड़वां बच्चे हैं तो दोनों को बराबर- बराबर फैमिली पेंशन मिलेगी।<br />
अविवाहित बेटे को फैमिली पेंशन उसके 25 साल पूरे करने तक या शादी करने तक या नौकरी करने तक मिलती है।<br />
अगर पति-पत्नी दोनों सरकारी नौकरी करते थे और दोनों की मौत हो जाती है तो जीवित बच्चों को माता और पिता दोनों की यानी दो फैमिली पेंशन मिलेंगी।<br />
अगर सरकारी कर्मचारी की मौत के बाद पति या पत्नी कोई बच्चा गोद ले तो उसे परिवार का सदस्य नहीं माना जाएगा। वह फैमिली पेंशन का हकदार नहीं होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;">दिव्यांग बच्चों के लिए फैमिली पेंशन के नियम | Pension News</h4>
<p style="text-align:justify;">अगर सरकारी कर्मचारी की संतान दिव्यांग है (शारीरिक व मानसिक रूप से) और 25 साल की उम्र होने के बाद भी कमाई का कोई साधन नहीं हैं, तो उसे जिंदगीभर फैमिली पेंशन दी जाएगी।<br />
आजीवन फैमिली पेंशन दिव्यांग बच्चों को तभी दी जाएगी, जब उससे छोटा कोई भाई-बहन न हो।<br />
अगर बच्चा माइनर है तो गार्जियन के जरिए फैमिली पेंशन दी जाएगी।<br />
शारीरिक और मानसिक दिव्यांग बच्चों को उनके विवाह के बाद भी फैमिली पेंशन दी जाएगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बेटी के लिए फैमिली पेंशन के नियम | Pension News</h3>
<p style="text-align:justify;">अविवाहित या विधवा या तलाकशुदा बेटी को फैमिली पेंशन उसकी शादी या दूसरी शादी तक या उसके नौकरी करने तक दी जाएगी। इसमें उम्र की कोई सीमा नहीं है।<br />
बेटी को 25 साल के बाद पेंशन तभी मिलेगी, जब मृतक के सारे अविवाहित बच्चे 25 साल की उम्र पार कर लें या कमाना शुरू कर दें।<br />
अगर मृतक का कोई दिव्यांग बच्चा भी है तो उसे पहले फैमिली पेंशन मिलेगी। जब उसकी योग्यता फैमिली पेंशन के लिए खत्म होगी तभी अविवाहित, तलाकशुदा या विधवा बेटी को फैमिली पेंशन मिलेगी।<br />
अगर सरकारी कर्मचारी के जीवित रहते हुए उसकी बेटी के तलाक का प्रोसिजर कोर्ट में शुरू हुआ है और कर्मचारी की मौत के बाद तलाक मिलता है, तो भी वह फैमिली पेंशन पाने के लिए योग्य होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल: क्या किसी कंडीशन में फैमिली पेंशन मिलने का हक छीना भी जा सकता है?<br />
जवाब: हां, बिल्कुल। फैमिली पेंशन मिलने का हक तब छीना जा सकता है जब पेंशन पाने वाला, सरकारी कर्मचारी की हत्या का दोषी या हत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया जाता है। ऐसी स्थिति में उस सदस्य के बाद जो भी योग्य सदस्य होता है, उसे फैमिली पेंशन दी जाती है। Pension News</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल: मृतक की पत्नी अगर दूसरी शादी कर ले तो क्या उसे पेंशन मिलती रहेगी?<br />
जवाब: मृतक के पति या पत्नी को फैमिली पेंशन आजीवन दी जाती है। मृतक की पत्नी की अगर कोई संतान नहीं है और उसके पास कमाई का कोई साधन नहीं है, तो दूसरी शादी करने पर भी उसे पेंशन दी जाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल: अगर मृतक की पत्नी नौकरी कर ले तो क्या वह पेंशन की हकदार होगी?</p>
<p style="text-align:justify;">जवाब: मृतक की पत्नी अगर अनुकम्पा की नौकरी लेती है तो वह फैमिली पेंशन की हकदार नहीं होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल: गोद लिए हुए बच्चे को भी क्या पेंशन मिलेगी?</p>
<p style="text-align:justify;">जवाब: गोद लिए हुए बच्चे के पास बायोलॉजिकल चाइल्ड जितने ही राइट्स होते हैं। इसलिए गोद लिया हुआ बच्चा भी फैमिली पेंशन का हकदार होगा। हालांकि सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद गोद लिए गए बच्चे को पेंशन नहीं मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल: क्या गोद लिया हुआ बच्चा भी अनुकम्पा की नौकरी कर सकता है? Pension News</p>
<p style="text-align:justify;">जवाब: हां, बिल्कुल। अगर गोद लिया हुआ बच्चा उस नौकरी के लिए योग्य है तो वह अनुकम्पा की नौकरी कर सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल: क्या मृतक की लिव इन पार्टनर को पेंशन या अनुकम्पा की नौकरी का अधिकार है?</p>
<p style="text-align:justify;">जवाब: लिव-इन पार्टनर को शादी जैसा दर्जा दिया गया है, मगर इसे शादी नहीं माना गया है। इसलिए लिव-इन पार्टनर को पेंशन या अनुकम्पा की नौकरी नहीं मिलेगी। मगर लिव-इन रिलेशनशिप में पैदा हुए बच्चों को पेंशन और अनुकम्पा की नौकरी का अधिकार है। इसके लिए उन्हें बाकी बच्चों से एनओसी लेना होगा। Pension News</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल: माता-पिता को फैमिली पेंशन मिलने को लेकर क्या नियम हैं?</p>
<p style="text-align:justify;">जवाब: माता-पिता को फैमिली पेंशन मिलने को लेकर नियम</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी कर्मचारी की मृत्यु के बाद अगर कोई जीवित विधवा या योग्य बच्चे नहीं हैं और अगर माता-पिता पूरी तरह से मृतक पर निर्भर थे, तो उन्हें फैमिली पेंशन दी जाएगी। इस स्थिति में पहले मां को और उसके बाद पिता को फैमिली पेंशन मिलेगी। माता-पिता को जो फैमिली पेंशन दी जाएगी, वह उनकी मृत्यु तक दी जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल: मृतक के माता-पिता और पत्नी अगर अलग रहते हैं तो क्या दोनों को अलग-अलग पेंशन मिलेगी?</p>
<p style="text-align:justify;">जवाब: नहीं, ऐसा नहीं होगा। एक ही पेंशन मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">सवाल: क्या अनुकम्पा की नौकरी लेने के लिए पत्नी को मृतक के माता-पिता की परमिशन की जरूरत होती है?<br />
जवाब: अगर कोई सरकारी कर्मचारी विवाहित है और उसकी मृत्यु हो जाती है, तो अनुकम्पा की नौकरी लेने के लिए पत्नी को उसके माता-पिता से एनओसी की जरूरत होगी। Pension News</p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/treatment-of-serious-heart-diseases-is-easy-with-advanced-technology/">Heart Health : एडवांस तकनीक से दिल की गंभीर बीमारियों का इलाज आसान: Dr Akhil Rastogi</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Sat, 17 Jun 2023 12:53:09 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>ईपीएफ व एनपीएस: जानिए बेहतर रिटायरमेंट प्लान</title>
                                    <description><![CDATA[आज जब निवेश के ढेर सारे विकल्प मौजूद हैं तो अधिकतर निवेशकों को यह उलझन रहती है कि किस विकल्प में निवेश किया जाए। अधिकतर कर्मियों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम और एंप्लाइज प्रोविडेंट फंड सबसे अधिक प्रचलित निवेश विकल्प हैं। इन दोनों विकल्पों में निवेश से दोहरा लाभ मिलता है, टैक्स बचत के साथ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/business/epf-and-nps-know-the-best-retirement-plan/article-31121"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/epf-interest-rate.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आज जब निवेश के ढेर सारे विकल्प मौजूद हैं तो अधिकतर निवेशकों को यह उलझन रहती है कि किस विकल्प में निवेश किया जाए। अधिकतर कर्मियों के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम और एंप्लाइज प्रोविडेंट फंड सबसे अधिक प्रचलित निवेश विकल्प हैं। इन दोनों विकल्पों में निवेश से दोहरा लाभ मिलता है, टैक्स बचत के साथ इनसे निवेशकों को अच्छा रिटर्न भी प्राप्त होता है। हालांकि, दोनों में कौन सा विकल्प बेहतर है, यह एंप्लाई की रिस्क लेने की क्षमता, सिक्योरिटी लॉक इन, लिक्विडिटी और मेच्योरिटी इत्यादि फैक्टर्स पर भी निर्भर करती है। एनपीएस और ईपीएफ में बेहतर विकल्प चुनने के लिए कुछ महत्वपूर्ण बिंदु नीचे दिए जा रहे हैं, जिनके आधार पर आप फैसला कर सकते हैं कि किसमें निवेश बेहतर होगा।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ईपीएफ में योगदान:-</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">प्रोविडेंट फंड से जुड़ा कानून कई दशकों से है और 20 से अधिक कर्मियों वाले कंपनियों को इसे 15 हजार से कम की बेसिक सैलरी मासिक वाले अपने कर्मचारियों को आॅफर करना अनिवार्य है। हालांकि इससे अधिक कि बेसिक सैलरी वाले कर्मी भी इसमें कांट्रिब्यूट कर सकते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ईपीएफ में मिनिमम कांट्रिब्यूशन पीएफ सैलरी का 12 फीसदी होता है जो बेसिक सैलरी, डीए (महंगाई भत्ता), फूड कंसेशन का कैश वैल्यू और रिटेनिंग अलाउंस का एग्रीगेट होता है। कर्मियों की इच्छा के मुताबिक अधिकतम कांट्रिब्यूशन 15 हजार रुपये का 12 फीसदी यानी 1800 रुपये प्रति महीने तक सीमित किया सकता है। हालांकि कर्मी चाहें तो अपनी 100 फीसदी बेसिक सैलरी को ईपीएफ में वालंटरी कांट्रिब्यूशन कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>एनपीएस में योगदान:-</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">ईपीएस के विपरीत एनपीएस पिछले दशक में शुरू किया गया था और भारत सरकार द्वारा शुरू किया गया पेंशन-कम-इंवेस्टमेंट है। भारतीय नागरिक और ओवरसीज सिटीजन आॅफ इंडिया कार्डहोल्डर्स इसमें निवेश कर सकते हैं। एनपीएस एक वालंटरी कांट्रिब्यूशन स्कीम है जिसमें टायर-1 में 500 रुपये और टायर-2 खाते में में न्यूनतम एक हजार रुपये का मिनिमम कांट्रिब्यूशन किया जा सकता है। कोई भी इंडिविजुअल अपने एंप्लायर के जरिए या स्वतंत्र रूप से एनपीएस से जुड़ सकता है। इसमें पैसे को निवेशक अपनी रिस्क लेने की क्षमता के मुताबिक इक्विटी, कॉरपोरेट डेट और गवर्नमेंट बांड्स में निवेश के लिए विकल्प का चयन कर सकते हैं।</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>एनपीएस पर टैक्स देनदारी/डिडक्शन:-</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">रेगुलर टैक्स सिस्टम के तहत एंप्लॉयर के जरिए 1.5 लाख रुपये तक का एनपीएस में एंप्लाई कांट्रिब्यूशन कुल आय से डिडक्ट हो सकता है।</li>
<li style="text-align:justify;">रेगुलर टैक्स सिस्टम के तहत एंप्लाई का 50 हजार रुपये का अपना कांट्रिब्यूशन कुल आय में डिडक्ट हो सकता है।</li>
<li style="text-align:justify;">रेगुलर टैक्स सिस्टम के तहत एंप्लॉयर का बेसिक सैलरी का 10 फीसदी तक कांट्रिब्यूशन कुल आय से डिडक्ट हो सकता है।</li>
<li style="text-align:justify;">सरल टैक्स सिस्टम की बात करें तो केवल एंप्लॉयर द्वारा बेसिक सैलरी के 10 फीसदी तक कांट्रिब्यूशन ही डिडक्ट होता है।</li>
<li style="text-align:justify;">एनपीएस सब्सक्राइबर्स के 60 वर्ष की उम्र का होने पर उन्हें कॉर्पस से 60 फीसदी रकम निकालने की मंजूरी मिलती है। शेष 40 फीसदी रकम को एन्यूटी के रूप में इंडिविजुअल को पे किया जाता है। इसके अलावा योजना का हिस्सा बनने के 10 साल बाद कॉर्पस से 25 फीसदी तक रकम निकालने की मंजूरी मिलती है।</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ईपीएफ पर टैक्स देनदारी/डिडक्शन:-</strong></h4>
<ul>
<li style="text-align:justify;">ईपीएफ में रेगुलर टैक्स सिस्टम के तहत कुल आय से 1.5 लाख रुपये तक का एंप्लाई कांट्रिब्यूशन डिडक्ट हो सकता है। इसके अलावा बेसिक सैलरी के 12 फीसदी तक के एंप्लाई कांट्रिब्यूशन को अनुमति है।</li>
<li style="text-align:justify;">सिंप्लीफाइड टैक्स सिस्टम के तहत ईपीएफ में कोई डिडक्शंस नहीं मिलता है।</li>
<li style="text-align:justify;">पोस्ट सेशन आॅफ एंप्लॉयमेंट पर मिला ब्याज टैक्सेबल है।</li>
<li style="text-align:justify;">एंप्लॉयर के यहां पांच साल से कम की लगातार जॉब ने होने की स्थिति में अगर ईपीएफ से कोई राशि निकाली जाती है तो उस पर टैक्स देना होता है। हालांकि अगर बीमारी, एंप्लॉयर की कमजोर कारोबारी स्थिति या अन्य किसी ऐसी परिस्थिति में एंप्लाई ने लगातार जॉब नहीं की है, जो उसके नियंत्रण से बाहर था, तो उसे टैक्स नहीं देना होगा।</li>
<li style="text-align:justify;">(यहां यह ध्यान रखना जरूरी है कि अगर ईपीएफ, एनपीएस और सुपरएन्युएशन फंड में 7.5 लाख रुपये से अधिक का कांट्रिब्यूशन होता है तो एंप्लाई को टैक्स चुकाना होगा।)</li>
</ul>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>ईपीएफ पर फिक्स्ड दर पर रिटर्न:-</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">पीएफ के तहत मिलने वाला रिटर्न सरकार तय करती है। केंद्र सरकार हर साल पीएफ के ब्याज दर का एलान करती है। इसके विपरीत एनपीएस पर मिलने वाला रिटर्न आपके चुने गए विकल्पों के एनएवी पर निर्भर करती है जो कम भी हो सकती है और बढ़ भी सकती है। इस प्रकार पीएफ में निवेश लगभग सुरक्षित रहता है और निश्चित रिटर्न मिलता है जबकि एनपीएस में रिस्क अधिक है और रिटर्न भी अधिक मिलता है। इस प्रकार आम लोगों के लिए दोनों विकल्पों के अपने टैक्स एडवांटेज हैं और बेहतर रिटर्न हैं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Feb 2022 05:04:44 +0530</pubDate>
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                <title>सभी विभागों में नहीं बढ़ेगी रिटायरमेंट उम्र: कैप्टन अभिमन्यु</title>
                                    <description><![CDATA[ कैबिनेट की सब कमेटी की रिपोर्ट तैयार चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। हरियाणा सरकार द्वारा रिटायरमेंट उम्र पर फैसले को लेकर गठित कैबिनेट सब कमेटी ने साफ कर दिया है कि हर विभाग में आयु 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष नहीं की जाएगी। सब कमेटी की मंगलवार को बैठक वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के कार्यालय पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/retirement-age-will-not-increase-in-all-departments-captain-abhimanyu/article-2426"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/abhimanyu.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;"> कैबिनेट की सब कमेटी की रिपोर्ट तैयार</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)।</strong> हरियाणा सरकार द्वारा रिटायरमेंट उम्र पर फैसले को लेकर गठित कैबिनेट सब कमेटी ने साफ कर दिया है कि हर विभाग में आयु 58 वर्ष से बढ़ाकर 60 वर्ष नहीं की जाएगी। सब कमेटी की मंगलवार को बैठक वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के कार्यालय पर हुई। वित्त मंत्री ने ने बताया कि रिटायरमेंट आयु सिर्फ उन्हीं विभागों में बढ़ेगी, जिनमें तकनीकी पद ज्यादा हैं और लंबे समय से खाली पदों पर नई भर्तियां नहीं हो पा रही हैैं। कैप्टन अभिमन्यु के नेतृत्व वाली कैबिनेट सब कमेटी ने अब तकनीकी पदों पर काम कर रहे विभागाध्यक्षों पर भी लगाम डाल दी है।</p>
<p style="text-align:justify;">कमेटी ने इन पदों पर काम करने वाले विभागाध्यक्षों का कार्यकाल तीन से पांच वर्ष निर्धारित करने की सिफारिश की है। कैबिनेट सब कमेटी ने तय किया है कि बिजली, स्वास्थ्य, जन स्वास्थ्य एवं अभियांत्रिकी तथा सिंचाई विभाग समेत उन्हीं विभागों में रिटायरमेंट आयु 60 साल की जाएगी, जिनमें तकनीकी पद अधिक हैैं और रिक्तियां पूरी नहीं हो पा रही हैैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अनिल विज फिर रहे नदारद</h3>
<p style="text-align:justify;">कैबिनेट की सब कमेटी की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज हर बार की तरह इस बार भी शामिल नहीं हुए, लेकिन राज्य मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने भागीदारी की। कमेटी ने अपनी रिपोर्ट तैयार कर ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Jul 2017 08:25:48 +0530</pubDate>
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