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                <title>घोषणा-पत्रों में जन-सहभाग महत्वपूर्ण</title>
                                    <description><![CDATA[मेरी राय यह है कि विधानसभा का चुनाव है; अत: विधायी कार्य संबंधी ‘दिल्ली नीति घोषणापत्र’ बने। यह पूरी दिल्ली के स्तर पर बने। 70 विधानसभाओं की विकास संबंधी इलाकाई जरूरतें और परिस्थितियां विविध हैं। जाहिर है कि प्रत्येक विधानसभा का विकास संबंधी रोड मैप भी अलग-अलग ही होना चाहिए। अत: उम्मीदवारों को चाहिए कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/public-participation-is-necessary-in-the-manifesto/article-12634"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/public-participation.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">मेरी राय यह है कि विधानसभा का चुनाव है; अत: विधायी कार्य संबंधी ‘दिल्ली नीति घोषणापत्र’ बने। यह पूरी दिल्ली के स्तर पर बने। 70 विधानसभाओं की विकास संबंधी इलाकाई जरूरतें और परिस्थितियां विविध हैं। जाहिर है कि प्रत्येक विधानसभा का विकास संबंधी रोड मैप भी अलग-अलग ही होना चाहिए। अत: उम्मीदवारों को चाहिए कि वे मोहल्ला निवासी समितियों का आह्वान करें। अपने प्रचार का पहला सप्ताह विधानसभा स्तरीय घोषणापत्र बनवाने और उसके प्रति अपना संकल्प बताने में लगायें।</h2>
<p style="text-align:justify;">
<strong>लेखक: अरुण तिवारी</strong></p>
<h4 style="text-align:justify;">लोकतांत्रिक पिरामिड को सही कोण पर खड़ा करने के पांच सूत्र हैं: लोक-उम्मीदवार, लोक-घोषणापत्र, लोक-अंकेक्षण, लोक-निगरानी और लोक-अनुशासन। लोक-घोषणापत्र का सही मतलब है, लोगों की नीतिगत तथा कार्य संबंधी जरूरत व सपने की पूर्ति के लिए स्वयं लोगों द्वारा तैयार किया गया दस्तावेज। प्रत्येक ग्रामसभा व नगरीय वार्ड सभाओं को चाहिए कि वे मौजूद संसाधन, सरकारी-गैरसरकारी सहयोग, आवंटित राशि तथा जनजरूरत के मुताबिक अपने इलाके के लिए अगले पांच साल के सपने का नियोजन करें। इसे लोकसभावार, विधानसभावार, मोहल्लावार व मुद्देवार तैयार करने का विकल्प खुला रखना चाहिए। इसमें हर वर्ष सुधारने का विकल्प भी खोलकर रखना अच्छा होगा। इस लोक एजेंडे या लोक नियोजन दस्तावेज को लोक-घोषणापत्र का नाम दिया जा सकता है। इस लोक-घोषणापत्र को किसी बैनर या फलेक्स पर छपवाकर अथवा सार्वजनिक मीटिंग स्थलों की दीवार पर लिखकर चुनाव प्रचार के लिए आने वाले चुनावी उम्मीदवारों के समक्ष पेश किया जा सकता है। उनसे उसकी पूर्ति के लिए संकल्पपत्र/शपथपत्र लिया जा सकता है। इससे उम्मीदवार के चयन में सुविधा होगी और पालन करने के लिए उम्मीदवार के सामने अगले पांच साल एक दिशा-निर्देश भी होगा।<br />
जल घोषणापत्र, हरित घोषणापत्र, उत्तराखण्ड जन घोषणापत्र – नागरिक संगठन स्तर पर ऐसे प्रयास होते रहे हैं। किंतु आदर्श स्थिति हासिल करने के लिए अभी बहुत कुछ किया जाना बाकी है। फिलहाल, चर्चा करें कि दिल्ली के इस चुनाव में पार्टी घोषणापत्र बनाने में एक बार फिर से जनता की राय मांगी जा रही है। हमें इस रायशुमारी को एक सुअवसर मानना चाहिए; पार्टी घोषणापत्र से लोक घोषणापत्र की ओर बढ़ने की एक छोटी सी खिड़की मान स्वागत करना चाहिए। इसमें खुद पहल कर पार्टियों और अपने विधानसभा क्षेत्र के उम्मीदवार तक अपनी राय पहुंचानी चाहिए।<br />
इन घोषणापत्रों को जमीन पर उतारने के लिए नीतिगत आवश्यकता होगी कि दिल्ली नियोजन क्रियान्वयन एवम निगरानी समिति का गठन हो। इसके तहत केन्द्र, राज्य, स्थानीय नगर व गांव अर्थात चार स्तरीय उपसमितियां हों। चार स्तरीय समितियों में आपसी तालमेल व पारदर्शिता की सर्वश्रेष्ठ व्यवस्था बने। चुनाव बाद के पांच साल के दौरान विकास संबंधी घोषणापत्र को पूरा करने में लोग सहयोगी भी बनें और विधायक द्वारा असहयोग करने पर बाध्य करने वाले भी; इसके लिए जन-निगरानी प्रणाली विकसित की जाए। लोक-प्रतिनिधियों के बजट से क्रियान्वित होने वाले कार्यों का लोक अंकेक्षण यानी ‘पब्लिक-आॅडिट’ अनिवार्य हो। आॅडिट सिर्फ वित्तीय नहीं, कैग के नए विविध सूचकांकों के आधार पर हो। ऐसे प्रावधानों को विधिसम्मत बनाने के लिए पार्टियां, इन्हे विधान का हिस्सा बनाने की घोषणा करें। लाभ यह होगा कि पांच साल पूरे होने पर लोक-अंकेक्षण समूह की रिपोर्ट खुद-ब-खुद इस बात का आइना होगी कि निवर्तमान प्रत्याशी उसमें अपना चेहरा देख सकें; जान सकें कि वह अगली बार चुनाव लड़ने लायक है या नहीं। इस आधार पर पर्टियां अपना उम्मीदवार तय कर सकेंगी और लोग भी कि उस प्रतिनिधि को अगली बार चुना जाये या दरकिनार कर दिया जाये। पांच सालों का लेखा-जोखा, अगले पंचवर्षीय कार्यों का नियोजन व तद्नुसार लोक-घोषणापत्र निर्माण में भी बराबर का मददगार सिद्ध होगा।<br />
इसी दिशा में एक अन्य महत्वपूर्ण नीतिगत तथ्य यह है कि भारत के सभी राज्यों में गांवों में संवैधानिक स्तर पर गठित ग्राम सभा, ग्राम पंचायत और न्याय पंचायत है; विधानसभा के साथ केन्द्र शसित क्षेत्र वाली दिल्ली की तर्ज में नवगठित राज्य जम्मू-कश्मीर में भी। दिल्ली के गांवों के पास क्या है ? नये राजस्व रिकॉर्ड के मुताबिक, दिल्ली में 357 गांव हैं। क्या स्वराज का सपना दिखाने वालों को दिल्ली में ग्राम स्वराज का सर्वश्रेष्ठ ढांचा बनाने की पहल नहीं करनी चाहिए? उन्हें चाहिए कि दिल्ली पंचायतीराज अधिनियम बनाने को पार्टी घोषणापत्र में शामिल कर इस सपने की नींव रखें।<br />
शुद्ध हवा, स्वच्छ पानी-पर्याप्त पानी, स्थानीय कचरा प्रबंधन और सर्व सुलभ पार्किंग-दिल्ली की चार बड़ी चुनौतियां हैं। दिल्ली के चारदीवारी वाले हर संस्थान, हर कार्यालयी-व्यावसायिक परिसर, हर हाउसिंग सोसाइटी परिसर को उसके परिसर के भीतर ही इन चारों की स्वावलम्बी व्यवस्था के लिए बाध्य व प्रोत्साहित…दोनों करने की नीतिगत घोषणा करनी चाहिए। ऐसे परिसरों का सीवेज निष्पादन भी परिसर के भीतर संभव है और यमुना प्रदूषण मुक्ति के लिए जरूरी भी। स्वावलम्बी जल प्रबंधन और धूल-धुआं प्रबंधन करना ही चाहिए। वाटर रिजर्व, ग्रीन रिजर्व व वेस्ट रिजर्व एरिया नीति इसमें मदद कर सकती है। जैम फ्री ट्रैफिक और भाड़े की मनमानी से मुक्त ऑटो चालक भी दिल्ली की आवश्यकता है। फैक्टरी-दफ्तरों-बाजारों के समय में अनुकूल बदलाव तथा ऐसी नियुक्ति नीति, जिसमें लोगों को अपने आवास से कम से कम दूरी तक सफर करना पड़े़; पर्यावरण बेहतरी के लिए जरूरी है।<br />
जरूरत है कि नंबर दौड़ में लगाने की बजाय, स्कूली शिक्षा को प्रत्येक विद्यार्थी में पहले से मौजूद प्रतिभा के विकास पर केन्द्रित किया जाए। उनमें उनके आसपास के परिसरों के प्रति सकारात्मक सरोकार व संवेदना विकसित की जाए। आठवीं कक्षा के बाद प्रतिभानुसार अवसर देने के लिए मात्र खेल नहीं, नृत्य-संगीत-शिल्प विषयक श्रेष्ठ विशेषज्ञ स्कूलों की स्थापना की जाए। उच्च शिक्षा और फिर कोचिंग के लम्बे दुष्चक्र में फंस चुकी नई पीढ़ी को बचाने के लिए एनडीए, रेलवे अप्रेन्टिस की तर्ज पर पहल जरूरी है। कम से कम दिल्ली सरकार की हर छोटी-बड़ी नौकरी के लिए तो 10वीं-12वीं की न्यूनतम शैक्षिक योग्यता तथा चयन पश्चात पद की जरूरत के अनुसार एक से तीन साल का शिक्षण-प्रशिक्षण का प्रावधान किया जा सकता है। पढ़ाई, दवाई, सुरक्षा, यातायात, सुरक्षा, संचार, जलापूर्ति जैसे बुनियादी सेवा क्षेत्रों में ठेकेदारी व निजीकरण को हतोत्साहित करके दिल्ली सुरक्षित रोजगार का रास्ता प्रशस्त कर सकती है। दूसरे राज्यों से दिल्ली आ रही आबादी को उनके प्रदेश में रोकने के लिए दिल्ली सरकार को चाहिए कि वह उन राज्यों के शिक्षा और रोजगार के ढांचे को स्वावलम्बी बनाने में सहयोग करे। इसके लिए वह दिल्ली में मौजूद ज्ञान, कौशल व मानव संसाधन का उपयोग करे। इससे भी अंतत: रोजगार, दिल्लीवासियों का ही बढ़ेगा। स्वास्थ्य बीमा की आड़ में उपजी लूट की जगह, 50 वर्ष से अधिक उम्र के हर दिल्लीवासी के इलाज का जिम्मा। अधिकतम संभव लागत पर सुनिश्चित मुनाफा दर के आधार पर वस्तुओं की अधिकतम फुटकर बिक्री दर का निर्धारण। मूल आवश्यकता पार्टी, उम्मीदवार व नागरिक…तीनों द्वारा अपनी-अपनी जवाबदारी ईमानदारी से निभाने का मन बनाने की है। यदि हम यह कर पायें, तो तय मानिए कि तंत्र पर लोक की हकदारी एक दिन खुद-ब-खुद आ जायेगी। धीरे-धीरे हम सही मायने में लोकतंत्र भी हो जायेंगे।</h4>
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                <pubDate>Mon, 20 Jan 2020 20:48:49 +0530</pubDate>
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                <title>सीएसआर में औद्योगिक प्रतिष्ठानों की भागीदारी</title>
                                    <description><![CDATA[क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सबसे बड़े प्रदेश राजस्थान में देश में उपलब्ध जल स्रोत का एक प्रतिशत ही जल होने और दो तिहाई हिस्सा रेगिस्तानी होने से प्रदेशवासियों को शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराना सरकार के सामने बड़ी चुनौती रही है। पहले से ही पानी की कम उपलब्धता के बावजूद पानी के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/participation-of-industrial-establishments-in-csr/article-4397"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/crs.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">क्षेत्रफल की दृष्टि से देश के सबसे बड़े प्रदेश राजस्थान में देश में उपलब्ध जल स्रोत का एक प्रतिशत ही जल होने और दो तिहाई हिस्सा रेगिस्तानी होने से प्रदेशवासियों को शुद्ध पीने का पानी उपलब्ध कराना सरकार के सामने बड़ी चुनौती रही है। पहले से ही पानी की कम उपलब्धता के बावजूद पानी के अत्यधिक दोहन से भूमिगत जल स्तर में निरंतर गिरावट के कारण प्रदेश का अधिकांश हिस्सा डार्क जोन में आया हुआ है। हांलाकि मुख्यमंत्री जल स्वावलंबन अभियान के तीन चरणों में जिस तरह से जल संरक्षण के योजनावद्ध प्रयास किए गए हैं उनके सकारात्मक प्रयास सामने आने लगे हैं। इन्द्रा गांधी नहर के साथ ही नर्मदा और यमुना का जल राजस्थान में लाने के ठोस प्रयासों का परिणाम है कि प्रदेश में पानी की उपलब्धता बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">सबसे अच्छी बात है कि जल संरक्षण और प्रदेशवासियों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने की मुहिम में प्रदेश के औद्योगिक प्रतिष्ठान आगे आए हैं और सोशल कारपोरेट रेस्पांब्लिटी निभाते हुए अपने कार्यक्षेत्र व आसपास के इलाकों में पीने योग्य पेयजल उपलब्ध कराने में सरकार के साथ कंधा से कंधा मिलाकर भागीदार बन रहे हैं। इस पुनीत कार्य को अमली जामा पहनाने में राजस्थान का उद्योग एवं सीएसआर विभाग समन्वयक की भूमिका निभाते हुए उत्प्रेरक का कार्य कर रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">उद्योग व राजकीय उपक्रम मंत्री श्री राजपाल सिंह शेखावत समय-समय पर औद्योगिक प्रतिष्ठानों से सीधा संवाद कायम करते हुए सीएसआर गतिविधियों को विस्तारित कराने का प्रयास करते रहे हैं। राज्य सरकार के सीएसआर विभाग द्वारा दो सीएसआर समिटों का आयोजन कर औद्योगिक घरानों की सीएसआर में हिस्सेदारी बढ़ाने के सकारात्मक प्रयास किए हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव राजीव स्वरुप और आयुक्त उद्योग व सीएसआर कृष्ण कुणाल द्वारा सीएसआर गतिविधियों को और अधिक विस्तारित करने के निर्देश दिए गए हैं इससे राज्य में सीएसआर गतिविधियों को और अधिक बढ़ावा मिल सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएसआर समिट के दौरान सीएसआर में उल्लेखनीय कार्य करने वाली कंपनियों को राज्य स्तर पर सम्मानित करने के साथ ही परस्पर समन्वय और सहयोग का वातावरण तैयार किया गया है। राज्य में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने व जल संरक्षण कार्यों में केयर्न इण्डिया, अंबुजा सीमेंट, बॉस्क, जेके टायर, राजस्थान स्पिनिंग व विविंग मिल्स, हिन्दुस्तान जिंक, इण्डिया सीमेंट, इनटेक फार्मा, न्यूक्लियर पावर, इण्डियन आॅयल सहित कई औद्योगिक संस्थाआें द्वारा अपने सामाजिक दायित्व को निभाते हुए उल्लेखनीय योगदान दिया जा रहा है। केयर्न इण्डिया द्वारा तो बाड़मेर जिले में करीब 100 करोड़ की लागत की 2022 तक संचालित होने वाली परियोजना का संचालन किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन अमृृत परियोजना: जल स्तर का अत्यधिक नीचे होना और उपलब्ध पानी में 3000 तक टीडीएस होने के कारण स्वास्थ्य के लिए हानिकारक पानी की स्थिति में बाड़मेर जिले के नागरिकों को पीने के लिए शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के लिए केयर्न इण्डिया आगे आई है। राज्य सरकार के सहयोग व समन्वय के साथ केयर्न इण्डिया जनवरी, 15 से मार्च 22 तक की 100 करोड़ की लागत की परियोजना पर काम करते हुए जीवन अमृृत योजना का संचालन कर रही है। जीवन अमृत योजना का मुख्य उद्देश्य जिले के वाशिंदों को उनके निवास के एक किमी के दायरें में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराना है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाड़मेर जिला बड़ा होने और दूर-दूर ढ़ाणियों में आबादी बसे होने से जल की उपलब्धता अधिक चुनौती पूर्ण होने के बावजूद बाड़मेर के 800 गांव ढ़ाणियों में रहने वाले लोगों तक शुद्ध पानी उपलब्ध कराने के प्रयास किए जा रहे हैं। 330 आरओ प्लांट लगाकर पेयजल उपलब्ध कराने का लक्ष्य है। इसके साथ ही जल रथ के माध्यम से भी पेयजल उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। इनका संचालन भी स्थानीय ग्रामीणों की सहभागिता से किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जीवन अमृत प्रोजेक्ट के माध्यम से शुद्ध पेयजल की उपलब्धता के साथ ही जलजनित बीमारियों की रोकथाम संभव हो पाई है। बाड़मेर जिले के नागरिकों के लिए जीवन अमृृत परियोजना वरदान सिद्ध हो रही है। हिन्दुस्तान जिंक द्वारा उदयपुर में सीपीटी लगाने के साथ ही उदयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, चितोडगढ़ आदि जिलों में वाटर रिचार्ज स्ट्रक्चरों के निर्माण के साथ ही एनिकटों का निर्माण कराकर पेयजल की उपलब्धता सुनिष्चित करने का कार्य किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरओ प्लांट: जयपुर के आसपास सांगानेर व बस्सी तहसील के फ््लोराइड प्रभावित गांवों में बॉस्क कंपनी द्वारा आरओ प्लांटस लगाने की पहल की गई है। बॉस्क द्वारा पहला आरओ प्लांट गोनेर में लगाया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">सीएसआर के तहत बॉस्क द्वारा गोनेर के बाद श्रीराम की नांगल, सिरोली, भूरथल, मोहनपुरा, वाटिका, विधानी, अषवाला, मुहाना और सांभरिया मं आरओ प्लांट के माध्यम से पेयजल उपलब्ध कराने की पहल की जा रही है। करीब डेढ़ करोड़ की परियोजना में 50 प्रतिशत से अधिक काम हो चुका है। इंटेक फार्मा द्वारा पाली के बर पुलिस चैकी और कस्तूर बा रेजिडेंषियल स्कूल में आरओ सिस्टम उपलब्ध कराया है। इण्डियन आॅयल कॉरपोरेशन द्वारा सीएसआर के तहत जयपुर के सेठ आनंदी लाल मूक बधिर विद्यालय में बोरबेल लगाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">न्यूक्लियर पॉवर कॉरपोरेशन आॅफ इण्डिया द्वारा चितोडगढ़ के जुझाला, लसाना, रतनपुरा, मंडेसरा, खलगांव, चेनपुरा, बहेलिया, कोलपुरा, नाली, फूटपाल, डांगडमउ खुर्द, गणेशपुरा और दूध तलाई आदि गांवों में शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए वाटर टेंक, वोरवैल, पंपिंग व्यवस्थाएं सुनिष्चित की गई है। इसी तरह से बांसवाड़ा के तलवारा ब्लाक के नोखला में फ्लोरिस के दुष्प्रवाह से रोकने के लिए पेयजल और अवेयरनेस कार्यक्रम चलाया गया है। बांसवाड़ा के ही घाटोल, थाना, हुरडा सेजा आदि गांवों में राजस्थान स्पिनिंग एवं विविंग मिल्स द्वारा अन्य कार्यों के साथ ही पेयजल की उपलब्धता सुनिष्चित की गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">अंबूजा सीमेंट राजस्थान में एसीएफ द्वारा सषक्त जल प्रबंधन अभियान में पाली के राबड़ियावास, नागौर के मारवाड़ मूंडवा और झुंझुंनू के चिडावा इलाके के 150 गांवों में अभियान चलाया जा रहा है। एसीएफ द्वारा चलाए जा रहे अभियान से लाखों किसानों को पीने और सिंचाई के लिए पानी उपलब्धता बढ़ी है।</p>
<p style="text-align:justify;">जेके टायर एण्ड इण्डस्ट्रीज सेवा मंदिर के तहत पंचायत सचिव, सरपंच, अध्यापकों और ग्रामीणों से समन्वय बनाते हुए वाटर टेंक, हैण्डपंपों की रिपेयरिंग, जल वितरण के लिए पाइप लाइन व्यवस्था आदि में सहयोग किया जा रहा है। देश के अन्य हिस्सों में भी जल संरक्षण व शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने में औद्योगिक प्रतिष्ठानों को आगे आने की पहल करनी होगी ताकि सबको शुद्ध पेयजल मिल सके।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong></p>
<p> </p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 23 Jun 2018 08:09:05 +0530</pubDate>
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                <title>क्राईम में भी महिलाओं की बराबर भागेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[ड्रग्स, कत्ल व अन्य अपराधिक मामलों में 90 महिलाएं हैं जिला संगरूर जेल में नजरबंद संगरूर (गुरप्रीत सिंह)। पढ़ाई व खेलों के अतिरिक्त प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएं, पुरुषों के बराबर पहुंच चुकी हैं। अब यदि अपराधिक गतिविधियों की बात करें तो इसमें भी महिलाओं की चाल धीमी नहीं है। संगरूर जेल में अपराधिक मामलों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/equal-participation-of-women-in-crime/article-2459"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/sudhar-grah.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">ड्रग्स, कत्ल व <strong>अन्य अपराधिक मामलों में 90 महिलाएं हैं जिला संगरूर जेल में नजरबंद</strong></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>संगरूर (गुरप्रीत सिंह)।</strong> पढ़ाई व खेलों के अतिरिक्त प्रत्येक क्षेत्र में महिलाएं, पुरुषों के बराबर पहुंच चुकी हैं। अब यदि अपराधिक गतिविधियों की बात करें तो इसमें भी महिलाओं की चाल धीमी नहीं है। संगरूर जेल में अपराधिक मामलों में लिप्त 90 के करीब महिलाएं नजरबंद हैं, जिन्हें विभिन्न अपराधिक गतिविधियों के कारण जेल में नजरबंद किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिला संगरूर जेल से मिले अंकड़ों के मुताबिक इस समय संगरूर जेल में 90 के करीब महिलाएं हैं, जिनमें ज्यादातर संख्या सजाजाफता महिलाओं की है, जबकि कुछ हवालाती भी हैं, जिनके मामले अभी अदालत में विचार अधीन हैं। यह भी पता चला है कि सजा पाने वाली महिला कैदियों पर अधिक्तम मामले ड्रग्स से जुड़े हैं। यह महिलाएं ड्रग्स के गैर कानूनी धंधे के कारण सजा काट रही हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">क्षमता से अधिक लोग हैं जेल में बंद</h2>
<p style="text-align:justify;">जिला जेल संगरूर में कैदियों व हवालातियों को रखने की क्षमता 650 है, जबकि इस समय कैदियों व हवालातियों की संख्या 930 है, जो बढ़ती-घटती रहती है। जेल प्रबंधकों मुताबिक फिलहाल कोई दिक्कत नहीं है, क्योंकि संख्या कभी बढ़ जाती है तो कभी कम हो जाती है। जेल में पांच गैंगस्टर भी विभिन्न बैरकों में बंद हैं, जिनकी सुरक्षा के लिए विशेष जेल कर्मचारी रखे गए हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अदाकारा अलका व उसका मां भी काट रही हैं सजा</h3>
<p style="text-align:justify;">इन महिलाओं में अलका कौशल अदाकारा व उसकी मां भी शामिल हैं। अलका ने प्रसिद्ध फिल्म ‘बजरंगी भाईजान’ में मश्हूर अदाकारा करीना कपूर की मां का किरदार निभाया था। दोनों मां बेटी पर गांव लांगड़ियां के एक किसान के साथ लाखों रुपये की धोखाधड़ी करने का केस है, जिसमें दोनों को दो-दो वर्ष की कैद हुई है। यह दोनों सैलीबे्रटी भी आम कैदियों की तरह जेल की रोटियां खा रही हैं और रहन-सहन भी अन्य महिला कैदियों की तरह ही है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">नन्हें बालक भी अपनी माताओं के साथ सजा काटने को मजबूर</h2>
<p style="text-align:justify;">वर्णनीय है कि जो महिलाएं जेल में सजा काट रही हैं, उनके साथ दूध पीते छोटे बच्चे भी हैं, जो अपनी मां के साथ मजबूरीवश बेकसूर ही सजा काट रहे हैं। जेल प्रबंधकों द्वारा बेशक इन बच्चों की पढ़ाई और खान-पान का ख्याल रखा जाता है, किन्तु यह बाहरली आजाद फिजा में सांस नहीं ले सकते। यह छोटे बालक भी अपनी माताओं के साथ अपने बचपन का कीमती समय जेल में बिता रहे हैं। ऐसे छोटे बच्चों की संख्या सात है।</p>
<p style="text-align:justify;">महिलाओं की सुरक्षा के लिए विशेष प्रबंध किए गए हैं। कुछ महिलाओं के साथ छोटे बच्चे हैं, जिनकी पढ़ाई-लिखाई व स्वास्थ्य का विशेष ख्याल यहां रखा जाता है। इन बच्चों का पालन पोषण का माध्यम बाहर न होने के कारण, इनका जेल में ही पूरा ध्यान रखा जाता है।<br />
<em><strong>-हरदीप सिंह भट्टी जेल सुपरिटेडेंट</strong></em></p>
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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2017 00:47:30 +0530</pubDate>
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