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                <title>Injustice - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>37 साल की सजा के बाद साबित हुआ निर्दोष, पुलिस और झूठे सबूत गढ़ने वालों पर ठोका केस</title>
                                    <description><![CDATA[वॉशिंगटन (एजेंसी)। दुष्कर्म और हत्या के मामले में अमेरिका की एक जेल में 37 साल की सजा काट लेने के बाद डीएनए सबूतों के आधार पर निर्दोष साबित हुए व्यक्ति ने पुलिस अधिकारियों और एक फोरेंसिक दंत चिकित्सक के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। टैम्पा बे टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 56 वर्षीय […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/proved-innocent-after-37-years-of-imprisonment/article-27531"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-10/supreme-court2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>वॉशिंगटन (एजेंसी)।</strong> दुष्कर्म और हत्या के मामले में अमेरिका की एक जेल में 37 साल की सजा काट लेने के बाद डीएनए सबूतों के आधार पर निर्दोष साबित हुए व्यक्ति ने पुलिस अधिकारियों और एक फोरेंसिक दंत चिकित्सक के खिलाफ अदालत में मुकदमा दायर किया है। टैम्पा बे टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक 56 वर्षीय रॉबर्ट ड्यूबोइस को 1983 में बारबरा ग्राम्स से दुराचार और उसकी हत्या के मामले में मौत की सजा दी गई थी, लेकिन बाद में उनकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले साल नए परीक्षण और डीएनए सबूतों में साबित हुआ कि उन्होंने बारबरा की हत्या नहीं की थी, जिसके बाद उन्हें अगस्त-2020 में जेल से रिहा कर दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक बारबरा की हत्या के मामले में ड्यूबोइस को फंसाने और झूठे सबूत गढ़ने के मामले में तीन पूर्व जासूसों, एक पूर्व पुलिस हवलदार और एक फोरेंसिक दंत चिकित्सक के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 10 Oct 2021 12:48:07 +0530</pubDate>
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                <title>अन्याय के खिलाफ लड़ रहे है हम: राहुल</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में अतिक्रमण हटाने गए पुलस दल के सदस्यों द्वारा दलित परिवार के लोगों के साथ की गयी बर्बरता के वायरल हुए वीडियो पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इसी सोच तथा अन्याय के खिलाफ वह लड़ रहे है। गांधी ने एक वक्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/we-are-fighting-against-injustice-rahul/article-16785"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-07/rahul-gandhi3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने मध्य प्रदेश में अतिक्रमण हटाने गए पुलस दल के सदस्यों द्वारा दलित परिवार के लोगों के साथ की गयी बर्बरता के वायरल हुए वीडियो पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि इसी सोच तथा अन्याय के खिलाफ वह लड़ रहे है। गांधी ने एक वक्य में राज्य की मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली भारतीय जनता पार्टी सरकार पर तीखा हमला करते हुए ट्वीट किया “हमारी लड़ाई इसी सोच और अन्याय के ख़िलाफ़ है।” इसके साथ ही उन्होंने पुलिस बर्बता का वीडियो भी पोस्ट किया है। बताया जा रहा है कि यह मध्य प्रदेश के गुना में दलित किसान परिवार के साथ पुलिस अत्याचार का वायरल हुआ वीडियो है। वीडियो में पुलिस दल दलित परिवार की महिला और बच्चों पर डंडे बरसा रहे है और लात घूसों से उनकी पिटाई कर रहे हैं।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Jul 2020 12:59:56 +0530</pubDate>
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                <title>विलंबित न्याय: अन्याय समान</title>
                                    <description><![CDATA[किसी भी आजाद देश जो विकास पथ पर अग्रसर है, उसके लिए यह बहुत ही जरूरी हो जाता है कि आम आदमी को सुलभ और त्वरित न्याय दिलाने के लिए राज्य न सिर्फ इसका समुचित प्रबंध करे बल्कि इसके लिए दीर्घकारी योजनाएं भी बनाए। अफसोस कि आज भी एक आम आदमी को अमूमन तौर पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/delayed-justice-similar-to-injustice/article-2498"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/court-hammar.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">किसी भी आजाद देश जो विकास पथ पर अग्रसर है, उसके लिए यह बहुत ही जरूरी हो जाता है कि आम आदमी को सुलभ और त्वरित न्याय दिलाने के लिए राज्य न सिर्फ इसका समुचित प्रबंध करे बल्कि इसके लिए दीर्घकारी योजनाएं भी बनाए।</p>
<p style="text-align:justify;">अफसोस कि आज भी एक आम आदमी को अमूमन तौर पर अपने मुकदमे के निपटारे के लिए निर्धारित समय सीमा का कम से कम ढाई से तीन गुना विलंब तो होता ही है। खुद कानूनविद इसके बहुत सारे कारण मानते और गिनवाते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कानूनविद और विधि विशेषज्ञ अपने अध्ययन के आधार पर भारतीय न्यायपालिका की कच्छप गति के लिए कुछ विशेष कारणों को ही जिम्मेदार मानते हैं। इनमें सबसे पहला कारण खुद सरकार ही है। यहां यह बताना समीचीन होगा कि देश में आज लंबित लगभग साढ़े तीन करोड़ से ज्यादा मुकदमों के लिए खुद सरकार ही सबसे ज्यादा जिम्मेदार है क्योंकि इन लंबित मुकदमों में से एक तिहाई मुकदमों में सरकार खुद एक पक्ष है।</p>
<p style="text-align:justify;">विधि विशेषज्ञ मानते हैं कि सरकार को अविलंब ही इस दिशा में काम करना चाहिए और न सिर्फ फालतू व जबरन दर्ज किए कराए मुकदमों को वापस लिए जाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए बल्कि एक ऐसी व्यवस्था भी करनी चाहिए, एक स्क्रूटनाइजेशन जैसी व्यवस्था जो अपने स्तर पर जांच करके सरकार को वादी प्रतिवादी बनने से बचने में मदद करे और अनावश्यक अपील करके उसे लंबा करते चले जाने में भी।</p>
<p style="text-align:justify;">विधिवेत्ता मानते हैं कि भारतीय न्याय व्यवस्था में किसी भी निरपराध को सजा से बचाने के लिए बहुस्तरीय न्याय व्यवस्था का प्रावधान किया गया। लेकिन यह न सिर्फ मुकदमों के निस्तारण को बेहद धीमा बल्कि इसे बहुत खर्चीला भी बना देता है। एक आकलन के अनुसार यदि किसी मुकदमे को अपने सारे स्तरों से गुजरना पडेÞ तो भी मौजूदा स्थितियों में कम से कम पांच से आठ वर्षों का समय लगना तो निश्चित है।</p>
<p style="text-align:justify;">बढ़ती जनसंख्या और उससे भी ज्यादा समाज में बढ़ते अपराध , लोगों की अपने विधिक अधिकारों के प्रति सजगता में आई तेजी , देश में अदालतों और न्यायाधीशों की घोर कमी , अधीनस्थ न्यायालयों में ढांचागत सुविधाओं का घोर अभाव , न्यायाधीशों व न्यायकर्मियों को मूलभूत सुविधाओं की अनुपलब्धता के कारण उनकी कार्यकुशलता तथा मनोभावों पर पड़ता नकारात्मक प्रभाव, न्यायपालिका में तेजी से बढ़ता भ्रष्टाचार आदि कुछ ऐसे ही मुख्य कारण हैं जिन्होंने अदालती कार्यवाहियों को दिन महीनों की तारीखों में उलझा कर रख दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि, न्यायप्रक्रिया को गति प्रदान करने के उद्देश्य से सरकार ने कार्यक्रमों की शुरूआत की है लेकिन विधि विशेषज्ञ इनसे बेहतर कुछ उपाय अपनाने की ओर इशारा करते हैं। कानूनविद मानते हैं कि सरकार को सबसे पहले देश में ज्यादा से ज्यादा अदालतों के गठन के साथ ही न्यायाधीशों की नियुक्ति और रिक्त स्थानों को भरने की तुरंत व्यवस्था करनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">आज मुकदमों के निस्तारण के लिए भारतीय न्यायपालिका द्वारा अपनाए जा रहे सभी वैकल्पिक उपायों जैसे मध्यस्थता की प्रक्रिया, लोक अदालतों का गठन, विधिक सेवा का विस्तार, ग्राम अदालतों का गठन, लोगों में कानून एवं व्यवस्था के प्रति डर की भावना जाग्रत करना, प्रशासन द्वारा अपराध की रोकथाम हेतु गंभीर प्रयास, अदालती कार्यवाहियों में स्थगन लेने व देने की प्रवृत्ति में बदलाव, अधिवक्ताओं द्वारा हड़ताल, बहिष्कार जैसी प्रवृत्तियों को न अपनाए जाने के प्रति किए जाने वाले उपाय आदि से अदालत में सिसक और घिसट रहे मुकदमों में जरूर रफ्तार लाई जा सकेगी, लेकिन ऐसा कब तक हो पाएगा, यह बहुत बड़ा प्रश्न है।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-अजय कुमार झा</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Fri, 21 Jul 2017 04:07:06 +0530</pubDate>
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