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                <title>Environment Protection - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <description>Environment Protection RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>पिता के निधन पर पुत्र ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों व समाजसेवियों ने सराही बेटे की अनोखी मुहिम | Sirsa News नथोर में 78 वर्षीय पिता जंगीर सिंह के संस्कार के तुरंत बाद बेटे आत्माराम ने रोपित किया बस स्टैंड पर फलदार पौधा | Sirsa News खारियां (सच कहूँ/सुनील कुमार)। जिले में राजस्थान की सीमा से सटे गांव नथोर के एक पुत्र ने अपने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/son-gave-the-message-of-environmental-protection-on-fathers-death/article-50908"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-08/sirsa-news-2.gif" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">ग्रामीणों व समाजसेवियों ने सराही बेटे की अनोखी मुहिम | Sirsa News</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li>नथोर में 78 वर्षीय पिता जंगीर सिंह के संस्कार के तुरंत बाद बेटे आत्माराम ने रोपित किया बस स्टैंड पर फलदार पौधा | Sirsa News</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>खारियां (सच कहूँ/सुनील कुमार)।</strong> जिले में राजस्थान की सीमा से सटे गांव नथोर के एक पुत्र ने अपने पिता के मरणोपरांत उन्हें अनोखे तरीके से श्रद्धांजलि दी। श्रद्धांजलि देने का ये तरीका अपने आप में अनोखा था। पिता के मरणोपरांत उनकी अंतिम विदाई के तुरंत बाद बेटे ने गांव के बस स्टैंड पर अपने पिता की याद में जामुन का फलदार पौधा रोपित किया। इतना ही नहीं भविष्य में गांव में सार्वजनिक स्थलों पर पौधारोपण अभियान चलाने और उनकी नियमित देखभाल करने की संकल्प कराया। हम बात कर रहे है कि नथोर निवासी आत्मा राम सरां की। जिन्होंने अपने 78 वर्षीय पिता जंगीर सिंह के निधन होने पर संस्कार की रस्म के तुरंत बाद घर लौटते समय बस स्टेण्ड पर पिता की याद में जामुन का फलदार पौधा रोपित किया। Sirsa News</p>
<p style="text-align:justify;">उनके इस काम की हर जगह तारीफ हो रही है। लोगों ने कहा कि पितृपक्ष में लोग दान, तर्पण आदि करते हैं, लेकिन आत्मा राम ने अपने पिता की याद में पौधारोपण की अनुकरणीय परंपरा शुरू करके मिसाल कायम की है। अन्य लोगों को भी इससे सीख लेनी चाहिए। पौधा रोपण के अवसर पर आत्मा राम ने बताया कि उनके पिता हमेशा ही पर्यावरण हितेषी रहे थे। उन्होंने अपने जीवन में गलियों, गांव की खाली जगहों, घर व खेतों में अनेकों पेड़ लगाए, जो आज सभी को फल, फूल, ठण्डी छाया व ताजा आक्सीजन नि:स्वार्थ प्रदान करते हैं। प्रकृति के प्रति पिता की सेवाओं व समर्पण से प्रेरणा पाकर मैंने रविवार से ही अपने पिता की हर पुण्यतिथि पर पौधा रोपण करने की शुरूआत की है। इस अवसर पर शोकाकुल परिवार से बेटा आत्मा राम व कृष्ण लाल, पौत्र रवि व अमित सहित परिजन, रिश्तेदार व ग्रामीण मौजूर रहे।</p>
<p style="text-align:justify;">जंगीर सिंह एक पर्यावरण प्रेमी व समाजसेवी व्यक्तिव का धनी था। जिसने अपने जीवन में पर्यावरण संरक्षण से संबंधित अनेक कार्य किए। मैं नमन करता हुए ऐसे व्यक्तिव को जिसने अपने परिवार को प्रकृति सौंदर्यकरण में पौधा रोपण व संरक्षण की सीख दी। जिसका परिणाम आज समाज के सामने है।<br />
<strong>                                                                                   – सुभाष झोरड़, पूर्व सरपंच प्रतिनिधि नथोर।</strong></p>
<p style="text-align:justify;">आत्माराम द्वारा पिता के संस्कार उपरांत पौधा रोपण की इस नई पहल ने समाज को नया मोड़ दिया है। गांव के युवाओं के लिए आत्माराम एक प्रेरणास्रोत बन गया है। आज प्रत्येक इन्सान पौधा रोपण व संरक्षण में आगे आना चाहिए ताकि भविष्य में प्राकृतिक संतुलन व सौदर्यकरण का भरपूर आंनद उठा सके। Sirsa News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Gold Silver Rate: सोना खरीदने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी" href="http://10.0.0.122:1245/gold-silver-rate/">Gold Silver Rate: सोना खरीदने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी</a></p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>सच कहूँ विशेष स्टोरी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Aug 2023 15:54:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Environment Protection: पर्यावरण संरक्षण में सबकी भागीदारी जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[Environment Protection: विश्व भर में पर्यावरण (Environment) असंतुलन के कारण कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कहीं ज्यादा गर्मी, तो कहीं ज्यादा सर्दी, बारिश, बाढ़, भूस्खलन, ग्लेशियरों का पिघलना इत्यादि। बढ़ रही मानवीय लापरवाही का परिणाम यह है कि अब देश के कई राज्य बाढ़ के हालातों से जूझ रहे हैं। बारिश में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/everyones-participation-is-necessary-in-environmental-protection/article-50474"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/environment-protection-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Environment Protection: विश्व भर में पर्यावरण (Environment) असंतुलन के कारण कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न हो रही हैं। कहीं ज्यादा गर्मी, तो कहीं ज्यादा सर्दी, बारिश, बाढ़, भूस्खलन, ग्लेशियरों का पिघलना इत्यादि। बढ़ रही मानवीय लापरवाही का परिणाम यह है कि अब देश के कई राज्य बाढ़ के हालातों से जूझ रहे हैं। बारिश में दरकते पहाड़ों के बीच प्राकृतिक आपदा के आने के लिए भी मानव जिम्मेदार है। नदियों नालों का रास्ता रोक कर अवैध निर्माण किए जा रहे हैं और प्रकृति के अत्याधिक दोहन पर आंख मूंदे हुए है। Environment Protection</p>
<p style="text-align:justify;">पर्यटन के नाम पर आज पहाड़ी राज्यों का जिस कदर शोषण किया जा रहा है और नदी नालों और झरनों को अवरुद्ध किया जा रहा है वह भी पर्यावरण के लिहाज से चिंता का विषय बना हुआ है। मनुष्यों का पर्यावरण के प्रति लापरवाह होने का ही परिणाम है कि निषेध के बावजूद भी ये पहाड़ी पर्यटन स्थल प्लास्टिक के कचरे से अटे पडेÞ हैं। दूसरी ओर गर्मी को लेकर भी चिंताजनक आंकड़ें सामने आए हैं जिसमें बताया गया है कि भारत में गत वर्ष अत्यधिक गर्मी के कारण विभिन्न क्षेत्रों में 159 अरब डॉलर की आय का नुकसान हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">असहनीय तापमान से बाहर काम करने वालों की मानसिक विश्लेषणात्मक व शारीरिक क्षमता पर सीधा प्रभाव तो पड़ा ही, अंदर भवनों में कार्य करने वालों की उत्पादकता भी घटी। अत्यधिक तापमान और गर्मी जल्दी प्रारंभ हो जाने के कारण मवेशियों का दूध उत्पादन घटा है। पर्यावरण से खिलवाड़ का ही नतीजा है कि 2016 से 2021 के मध्य जलवायु की चरम घटनाओं से भारत में 360 लाख हेक्टेयर भूमि में फसल का नुकसान हुआ। वर्ष 2023 में असामान्य तापमान से कटाई के समय बारिश होने पर गेहूं-उत्पादन तो प्रभावित हुआ। इसके साथ-साथ मार्च-अप्रैल में कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बेमौसम बरसात से प्याज की भी 70 फीसदी फसल खराब हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">अब बाढ़ आने पर सब्जियों व फलों की कीमतों में आग सी लग गई है। पहाड़ों पर ग्लेशियर सिकुड़ते जा रहे हैं, तो दूसरी तरफ अत्याधिक बारिश का अधिकांश जल संचित नहीं हो पा रहा। जिसका परिणाम यह होगा कि कि सिंचाई की जब जरूरत होगी, हमें शायद पर्याप्त जल नहीं मिलेगा। केवल पर्यावरण दिवस पर ही पौधारोपण व हरियाली की चर्चा नहीं होनी चाहिए। ऐसे में आवश्यकता है कि पर्यावरण के हित में सभी लोगों को अपना योगदान देना होगा। सरकार को बारिश के पानी संचय करने के उपाय तलाशने होंगे। पर्यावरण संरक्षण के लिए समाज के सभी लोगों को ईमानदारी दिखानी होगी।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Diabetes Symptoms: …नींद में पेशाब आना है एक बड़ी परेशानी, ये है हाई Blood Sugar की निशानी" href="http://10.0.0.122:1245/urination-in-sleep-is-a-big-problem-this-is-a-sign-of-high-blood-sugar/">Diabetes Symptoms: …नींद में पेशाब आना है एक बड़ी परेशानी, ये है हाई Blood Sugar की निशानी</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Jul 2023 10:03:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शिखर शिक्षा सदन के छात्रों ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश</title>
                                    <description><![CDATA[मीरापुर। (कोमल प्रजापति)। शिखर शिक्षा सदन सीनियर सेकेंडरी स्कूल मीरापुर के छात्र छात्राओं द्वारा कस्बेवासियों को प्रर्यावरण (Environment) के लिये जागरूक किया गया। विद्यालय के छात्रों एवं छात्राओं द्वारा हाथों से बनाए गए कागज के थैलों को कस्बे के विभिन्न प्रतिष्ठानों पर वितरित किया गया। शिखर शिक्षा सदन सीनियर सेकेंडरी स्कूल मीरापुर के प्रधानाचार्य पुनीत […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/students-of-shikhar-shiksha-sadan-gave-the-message-of-environmental-protection/article-50212"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/mirapur-news-5.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>मीरापुर। (कोमल प्रजापति)।</strong> शिखर शिक्षा सदन सीनियर सेकेंडरी स्कूल मीरापुर के छात्र छात्राओं द्वारा कस्बेवासियों को प्रर्यावरण (Environment) के लिये जागरूक किया गया। विद्यालय के छात्रों एवं छात्राओं द्वारा हाथों से बनाए गए कागज के थैलों को कस्बे के विभिन्न प्रतिष्ठानों पर वितरित किया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">शिखर शिक्षा सदन सीनियर सेकेंडरी स्कूल मीरापुर के प्रधानाचार्य पुनीत राजपूत ने बताया कि प्लास्टिक आज के युग की एक मुख्य समस्या है। इस समस्या को देखते हुए कस्बे के लोगो को स्कूल के छात्र छात्राओं ने जागरूक किया। उन्होने बताया कि कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में पर्यावरण संरक्षण की जागरूकता फैलाना है। छात्र छात्राओं ने लोगों को बताया कि प्लास्टिक व पॉलिथीन के उपयोग से पर्यावरण को बहुत हानि पहुंचती है इसलिए इन सबके स्थान पर हमें जूट या कागज से बने थैलों का उपयोग करना चाहिए। पर्यावरण को बचाना हम सभी की जिम्मेदारी है। Mirapur News</p>
<p style="text-align:justify;">स्कूल के छात्र छात्राऐं कस्बे के बाजार में पहंुचे और दुकानदारो को प्लास्टिक व पालिथिन का प्रयोग करने से रोकने के लिए जागरूक किया। सभी दुकानदार बच्चों की इस जागरूकता से बहुत प्रभावित हुए और उन्होंने भविष्य में केवल कागज या कपड़े से बनी हुई थैलियों का प्रयोग करने का संकल्प लिया। बच्चों ने सभी को पर्यावरण संरक्षण के विषय में महत्वपूर्ण जानकारियां दी। बच्चों के इस प्रयास से सभी दुकानदार जागरूक हुए और बच्चों के इस जागरूकता अभियान को बहुत सराहा। सभी ने बच्चों को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर विद्यालय के शिक्षक फिरोज खान, शिवम धीमान, नवाब अहमद एवं शुभम रस्तोगी बच्चों के साथ उपस्थित रहे। Mirapur News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="चलती स्कूल वैन में हुई स्पार्किंग" href="http://10.0.0.122:1245/sparking-in-moving-school-van/">चलती स्कूल वैन में हुई स्पार्किंग</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Jul 2023 20:37:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जिले में वृक्षारोपण सघन अभियान 15 जुलाई से </title>
                                    <description><![CDATA[मनरेगा अर्न्तगत जिले में 41 हजार पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारितः सीईओ श्रीगंगानगर। पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection) के साथ-साथ ग्रामीण इलाके को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से 15 जुलाई 2023 से जिले में सघन वृक्षारोपण अभियान चलाया जायेगा। अभियान के तहत 41 हजार पौधों का रोपण करने का लक्ष्य है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/plantation-intensive-campaign-in-the-district-from-july-fifteen/article-49859"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-07/environment-protection.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">मनरेगा अर्न्तगत जिले में 41 हजार पौधारोपण का लक्ष्य निर्धारितः सीईओ</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर।</strong> पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection) के साथ-साथ ग्रामीण इलाके को हरा-भरा बनाने के उद्देश्य से 15 जुलाई 2023 से जिले में सघन वृक्षारोपण अभियान चलाया जायेगा। अभियान के तहत 41 हजार पौधों का रोपण करने का लक्ष्य है। जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी मुहम्मद जुनैद ने बताया कि जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में राजकीय भवनों, सडकों के किनारे एवं प्रत्येक ग्राम पचायत के अमृत सरोवर तट, किनारों पर अभियान के तहत विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाये जाएंगे। इसके लिये जिले की नौ पंचायत समितियों में 48 नर्सरी स्थापना हेतु 1.28 करोड रूपये की स्वीकृतियां निकाली जा चुकी हैं। अधिकाशत नर्सरियों में पौधे तैयार हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि श्रीगंगानगर में 12 एफ, कोठा, 8 क्यू दौलतपुरा, 7 जी छोटी, 3 एल मटीलीराठान, मिर्जेवाला, सूरतगढ में सोमासर, उदयपुर गोदारान, रधुनाथपुरा, निरवाना, 1 एलएसएम, श्रीविजयनगर में 25 जीबी, 8 एसटीबी, 1 एमएसडी, 4 बीएलडी, घडसाना में 12 एमएलडी, 24 एएस-सी, 10 केडी, 10 आरजेडी, 2 एमएल-ए, अनूपगढ में 4 एमएसआर, 8 केबी, 25 एपीडी, 1 एलएसएम, 30 एपीडी, पदमपुर में 35 बीबी, 20 डीडी, 23 बीबी, सांवतसर, 83 एलएनपी, श्रीकरणपुर में 50 एफ, धनूर, 48 जीजी, मलकाना खुर्द, 3 ओ, रायसिहनगर में 11 टीके, बुर्जवाला, मालसर, 5 टीके, उडसर, सादुलशहर में बहरामपुरा, खेरूवाला, करडवाला, गदरखेडा, मन्नीवाला, चक केरा, भागसर में नर्सरी स्थापित हैं। Environment Protection</p>
<p style="text-align:justify;">जुनैद ने बताया कि जिले में नर्सरी की कार्यकारी एजेन्सी ग्राम पंचायत है। नर्सरी विकास के तहत इलाके के 36 हजार मनरेगा श्रमिक को सीधे तौर पर रोजगार का लाभ पहुंचेगा। नर्सरी विकास जरिये जहां ग्राम पचायतों की अनुपयोगी बंजर भूमि को हरा भरा किये जाने का प्रयास किया गया है, वहीं अनुपयोगी भूमि की कायाकल्प भी होगी। इसके साथ-साथ मनरेगा पजींकृत श्रमिकों को अपने गांव के नजदीक रोजगार भी मुहैया होगा।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Almond Tea Benefits: आश्चर्यजनक लेकिन सच, बादाम की चाय के लाभ हैं मस्त" href="http://10.0.0.122:1245/almond-tea-benefits/">Almond Tea Benefits: आश्चर्यजनक लेकिन सच, बादाम की चाय के लाभ हैं मस्त</a></p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/plantation-intensive-campaign-in-the-district-from-july-fifteen/article-49859</link>
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                <pubDate>Tue, 11 Jul 2023 17:41:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>75 साल पुराना पेड़ है तो करें आवेदन, मिलेगी पैंशन: डीसी</title>
                                    <description><![CDATA[पानीपत (सच कहूँ/सन्नी कथूरिया)। पर्यावरण संरक्षण के लिए हरियाणा सरकार ने 75 साल पुराने पेड़ों की देख-रेख करने वालों के लिए पैंशन योजना (Pension Yojana) की शुरुआत की है। इस योजना का नाम हरियाणा प्राण वायु देवता पैंशन है। जिला में यदि किसी व्यक्ति के घर या स्वयं की जमीन पर 75 साल या इससे […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/haryana-government-has-started-a-pension-scheme-for-caretakers-of-seventy-five-year-old-trees/article-49388"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-06/haryan-news.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पानीपत (सच कहूँ/सन्नी कथूरिया)।</strong> पर्यावरण संरक्षण के लिए हरियाणा सरकार ने 75 साल पुराने पेड़ों की देख-रेख करने वालों के लिए पैंशन योजना (Pension Yojana) की शुरुआत की है। इस योजना का नाम हरियाणा प्राण वायु देवता पैंशन है। जिला में यदि किसी व्यक्ति के घर या स्वयं की जमीन पर 75 साल या इससे पुराना पेड़ है तो वे अपने जिले के वन विभाग कार्यालय में जाकर आवेदन कर सकते हैं। Haryan News</p>
<p style="text-align:justify;">डीसी वीरेन्द्र कुमार दहिया ने बताया कि इस योजना के तहत 75 वर्ष की आयु पूर्ण कर चुके पेड़ों को 2500 रुपए वार्षिक पैंशन दी जाएगी। इसके बाद एक समिति द्वारा उस आवेदन का आंकलन किया जाएगा। सत्यापन उपरांत सभी शर्तें पूरी पाई जाती हैं तो लाभार्थी व्यक्ति को पेड़ों से मिलने वाली पैंशन दी जाएगी। उन्होंने बताया कि हरियाणा प्राण वायु देवता पैंशन योजना सरकार की ओर से पुराने पेड़ों की रक्षा और संरक्षण के लिए लागू की गई है। Haryan News</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि पुराने पेड़ों की पहचान के लिए वन विभाग ने सर्वे कराया था। पुराने पेड़ों के रख-रखाव के लिए प्रति पेड़ पैंशन के रूप में 2500 रुपए दिए जाएंगे। यह राशि इन पेड़ों को और आगे बढऩे और लोगों को ताजा ऑक्सीजन प्रदान करने के उद्देश्य को पूरा करने के लिए दी जाएगी। पेड़ के लिए मिलने वाली पैंशन की राशि पेड़ के मालिक के बैंक खाते में भेज दी जाएगी। Haryan News</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="नशीली गोलियों सहित दो ट्रक चोर गिरफ्तार" href="http://10.0.0.122:1245/two-truck-thieves-arrested-with-drugs/">नशीली गोलियों सहित दो ट्रक चोर गिरफ्तार</a></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jun 2023 20:00:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यावरण संरक्षण : दीपावली पर गोबर के दीयों से जगमग होंगे हजारों घर</title>
                                    <description><![CDATA[अलवर कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी का सराहनीय प्रयास मौसम अगर सही है तो दीये 2 दिन में हो जाते हैं तैयार महिलाओं को सशक्त बनाने को बढ़ाया कदम अलवर (एजेंसी)। दिवाली पर जहां मिट्टी के दीयों की जबरदस्त मांग रहती है, लेकिन इस बार अलवर में हजारों घर गोबर के दीयों से जगमग होंगे, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/environment-protection-thousands-of-houses-will-be-illuminated-with-cow-dung-lamps-on-diwali/article-38693"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-10/environment-protection.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:justify;">अलवर कलक्टर डॉ. जितेन्द्र कुमार सोनी का सराहनीय प्रयास</h3>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>मौसम अगर सही है तो दीये 2 दिन में हो जाते हैं तैयार</strong></li>
<li><strong>महिलाओं को सशक्त बनाने को बढ़ाया कदम</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>अलवर (एजेंसी)।</strong> दिवाली पर जहां मिट्टी के दीयों की जबरदस्त मांग रहती है, लेकिन इस बार अलवर में हजारों घर गोबर के दीयों से जगमग होंगे, जो पर्यावरण के लिए भी लाभकारी होगा। गोबर से बने दीयों को बनाने के लिए सबसे ज्यादा प्रोत्साहन दिया है अलवर जिला कलक्टर डॉ. जितेंद्र कुमार सोनी ने। डॉ. सोनी ने बाकायदा एक आदेश जारी कर मिट्टी एवं गोबर के दीए बनाने वाले तथा बेचने वाले कुंभकारों और छोटे दुकानदारों को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया। राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद राजीविका के तहत महिला स्वयं सहायता समूह से जुड़ी महिलाएं इस बार पहली दफा अलवर में गोबर के दीए बना रही हैं। 15 अक्टूबर तक करीब एक लाख दीये बनाने का लक्ष्य तय किया गया है। इन महिलाओं द्वारा विगत 15 दिन से गोबर के दीयों को बनाया जा रहा है। इन महिलाओं का पहला प्रयास है। अगर यह सफल होता है तो अगली दिवाली पर यह महिलाएं निश्चित रूप से मिट्टी के दीयों के साथ-साथ गोबर के दीयों का भी एक बड़ा बाजार खड़ा कर देंगी।</p>
<p><strong><span style="color:#ff0000;">यह भी पढ़ें:–</span></strong> <a href="http://10.0.0.122:1245/dera-devotee-in-australia-set-an-example-of-honesty-by-returning-mobile-phone-to-the-owner/">विदेशों में भी भारत का नाम ऊंचा कर रहे डेरा श्रद्धालु</a></p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में जिला कलक्टर द्वारा पूरा प्रोत्साहित किया जा रहा है। अभी हाल ही में अलवर में लगे मेले में निरीक्षण के दौरान राजस्थान की मुख्य सचिव उषा शर्मा ने भी गोबर के दीयों को देखकर उन्हें प्रोत्साहित किया और आश्चर्य भी जताया की अलवर की महिलाएं अपने जीविकोपार्जन के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं।</p>
<h3><strong>ऐसे बनते हैं दीये</strong></h3>
<p>राजीविका के जिला प्रोजेक्ट मैनेजर राहुल ने बताया कि गोबर के साथ चिकनी मिट्टी एवं कुछ मिक्सर जैसे इमली के बीज का चूर्ण एवं अन्य सामान मिलाकर इस पेस्ट को गूंथा जाता है। फिर मशीन में लगी डाई से दीए तैयार होते हैं। मौसम अगर सही है तो दीए 2 दिन में तैयार हो जाते हैं। इसके लिए मशीन अजमेर से मंगवाई गई जिसकी लागत करीब 18000 रूपए आई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>कर वसूली से किया इंकार</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">अतिरिक्त जिला कलक्टर (शहर) ओ.पी. सहारण ने निर्देश दिए कि मिट्टी एवं गोमल के बने दीपकों का विक्रय किए जाने के लिए बाजारों में आने वाले कुंभकारों एवं राजीविका समूहों एवं जिले के ग्रामीणों आदि को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसका पूर्ण रूप से ध्यान रखा जाए। नगरपरिषद, नगरपालिका, ग्राम पंचायत क्षेत्रों में इन्हें किसी भी प्रकार की कर वसूली नहीं की जाए। साथ ही मिट्टी व गोमय के बने दीपकों के उपयोग को पर्यावरणीय दृष्टि से भी प्रोत्साहित करते हुए आदेश की पालना सुनिश्चित की जाए।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/environment-protection-thousands-of-houses-will-be-illuminated-with-cow-dung-lamps-on-diwali/article-38693</link>
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                <pubDate>Thu, 06 Oct 2022 15:29:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गोबर की लकड़ी बचाएगी सैकड़ों वृक्ष</title>
                                    <description><![CDATA[पशुओं का गोबर भी एक गंभीर समस्या रहती है।
 इससे मक्खी-मच्छर पनपते हैं।
 गंदगी फैलती है। इनका निपटान करना अति आवश्यक है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/dung-wood-will-save-hundreds-of-trees/article-10961"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/environment-protection.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">सराहनीय। पर्यावरण संरक्षण को लेकर शिक्षक के नेतृत्व में दो छात्राओं ने किया सर्वे</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>बीमारियों से निजात दिलाने में मिलेगी मदद</h3>
<h3></h3>
</li>
<li style="text-align:justify;">
<h3>55 घरों के आंकड़ों से सामने आए चौंकाने वाले तथ्य</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सच कहूँ न्यूज)।</strong> वृक्षों के बिना जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती।(Environment protection)  इनकी लकड़ी का प्रयोग खाना बनाने से लेकर फर्नीचर और दाह संस्कार तक में होता है। परंतु पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से प्रकृति में असंतुलन पैदा हो रहा है, जिसके भयावह नतीजे आए दिन दम घोटते प्रदूषण के रूप में हमारे सामने आ रहे हैं। वहीं पशुओं का गोबर भी एक गंभीर समस्या रहती है। इससे मक्खी-मच्छर पनपते हैं। गंदगी फैलती है। इनका निपटान करना अति आवश्यक है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">इन्हीं समस्याओं को ध्यान में रखते हुए एक शोध किया गया।</li>
<li style="text-align:justify;">शोध के लिए दो विद्यार्थियों की एक टीम तैयार की गई,</li>
<li style="text-align:justify;">जिसमें ममता रानी टीम लीडर तथा रजनी रानी टीम सदस्य के रूप में चुनी गई।</li>
<li style="text-align:justify;">टीम ने विद्यालय के अध्यापक सूर्य प्रकाश शर्मा के नेतृत्व में तीन गाँवों फिरोजाबाद,</li>
<li style="text-align:justify;">ढाणी संत सिंह और धमोरा थेड़ी के 55 घरों का सर्वे करके रिपोर्ट तैयार की।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">शमशान घाट में प्रतिदिन दाह संस्कारों पर लगभग 1080 किग्रा. लकड़ी खर्च होती है</h3>
<p style="text-align:justify;">शोध के विषय को लेकर राजकीय माध्यमिक विद्यालय फिरोजाबाद की टीम ने विज्ञान अध्यापक सूर्य शर्मा के साथ मिलकर विद्यालय में एक दिन का मिड डे मील तैयार करवाया, जिसमें 4 किलोग्राम गोबर की लकड़ी खर्च हुई। जबकि एक दिन के मिड डे मील में सामान्य वृक्ष की लगभग 6 किग्रा. लकड़ी खर्च होती है। यानि लगभग दो किग्रा. लकड़ी की बचत हुई। 55 घरों के सर्वे में सामने आया कि ये परिवार एक दिन में खाना पकाने पर 284 किग्रा. लकड़ी, पानी गर्म करने में 276 किग्रा. लकड़ी खर्च करते हैं। शिवपुरी स्थित शमशान घाट में प्रतिदिन दाह संस्कारों पर लगभग 1080 किग्रा. लकड़ी खर्च होती है। सर्वे में निष्कर्ष निकला कि यदि इन सभी कार्यों में गोबर की लकड़ी का इस्तेमाल किया जाए तो प्रति वर्ष 790 वृक्षों को कटने से बचाया जा सकता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कैसे बनाई गोबर की लकड़ी :</h3>
<p style="text-align:justify;">विद्यार्थियों ने गोबर, लकड़ी के बुरादे और पेड़ों के सूखे पत्ते और घास मिलाकर गोबर की लकड़ियां तैयार की। इसके लिए 9 इंच पाइप के दो टुकड़े इस्तेमाल किए गए।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/dung-wood-will-save-hundreds-of-trees/article-10961</link>
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                <pubDate>Thu, 31 Oct 2019 16:35:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यावरण संरक्षण को परम्पराओं से जोड़ना है सार्थक पहल</title>
                                    <description><![CDATA[दूल्हों के मामा ने ‘भात’ में नींबू के 300 पौधे दिए/ Environment protection बीकानेर की छत्तरगढ़ तहसील में जिला मुख्यालय से लगभग 125 किलोमीटर दूर (Environment protection) स्थित रामनगर गांव में गत सप्ताह दो युगल दाम्पत्य सूत्र में बंधे। यह अवसर आम वैवाहिक समारोहों से अलग था।इस मौके, परम्पराओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया। रातीजोगे […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/environment-protection/article-4723"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/environment-protection.jpg" alt=""></a><br /><h1>दूल्हों के मामा ने ‘भात’ में नींबू के 300 पौधे दिए/ Environment protection</h1>
<p style="text-align:justify;">बीकानेर की छत्तरगढ़ तहसील में जिला मुख्यालय से लगभग 125 किलोमीटर दूर <strong>(Environment protection)</strong> स्थित रामनगर गांव में गत सप्ताह दो युगल दाम्पत्य सूत्र में बंधे। यह अवसर आम वैवाहिक समारोहों से अलग था।इस मौके, परम्पराओं को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ा गया। रातीजोगे में मंगल गीत गाने वाली महिलाओं को गुड़ के साथ अनार व नींबू के दो-दो पौधे बांटे गए। ननिहाल पक्ष की परम्परा का निर्वहन करते हुए दूल्हों के मामा ने ‘भात’ में नींबू के 300 पौधे दिए। वर पक्ष की पहल पर बारात में पटाखे नहीं फोड़े गए, बल्कि इसके स्थान पर प्रीतिभोज में आने वाले प्रत्येक अतिथि को जामुन के पौधे देकर विदाई दी गई।</p>
<p style="text-align:justify;">वर पक्ष की ओर से वधू के सम्मान में उसके गांव के सरकारी स्कूल में 101 पौधे लगाए गए। फेरों में सात वचन के साथ आठवां ‘हरित वचन’ लिया गया। इसमें वर-वधू ने हर साल कम से कम एक पौधा लगाने और एक दम्पति को इसके लिए प्रेरित करने का संकल्प लिया। वधू ने परम्परागत ‘कांकड़ पूजा’ के साथ मंदिर में रूद्राक्ष और विल्वपत्र का पौधा लगाने के बाद गृह प्रवेश किया। कुल मिलाकर तीन दिवसीय समारोह में 21 सौ फलदार पौधे लगाए अथवा वितरित किए गए। विजयपाल और रोहिताश नाम के दो युवाओं के विवाह समारोह में इस पहल के सूत्रधार बने बीकानेर के राजकीय महाविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर श्याम सुंदर ज्याणी।</p>
<h2>हर एक परम्परा को पर्यावरण संरक्षण और पौधोरोपण से जोड़ा गया/ Environment protection</h2>
<p style="text-align:justify;">जब दूल्हा विजयपाल, श्याम सुंदर ज्याणी को विवाह के लिए आमंत्रित करने गया तो ज्याणी ने युवाओं को परिवर्तन का संवाहक बताते हुए विवाह समारोह में यह पहल करने की अपील की। दूल्हे ने दुल्हन को इससे अवगत करवाया और दोनों की रजामंदी के बाद इस नवाचार का खाका तैयार हो गया। बस फिर क्या था, हर एक परम्परा को पर्यावरण संरक्षण और पौधोरोपण से जोड़ा गया। इसने नि:संदेह सैकड़ों लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्याणी ने गत वर्ष भी नोहर के फेफाना में भी एक दम्पति को ऐसे प्रयासों के लिए प्रेरित किया था, लेकिन इस बार और भी कई नवाचार हुए। बारात में पटाखे जलाने के स्थान पर पौधे बांटना एक अभिनव पहल थी। पटाखों से पैसों की बबार्दी होती है, वहीं यह ध्वनि और वायु प्रदूषण के कारक बनते हैं।</p>
<h3>समाज को एक संदेश दिया/ Environment protection</h3>
<p style="text-align:justify;">बकौल ज्याणी नि:संदेह पटाखे तो कुछ मिनटों का शौक है, जबकि यह पौधे और इनसे उगने वाले बीज और बीजों से बनने वाले पौधे सैकड़ों वर्षों तक न सिर्फ पर्यावरण की सुरक्षा करेंगे बल्कि इस कड़ी को अनवरत जोड़े रखने से आय के साधन भी बढ़ सकेंगे। इस समारोह में एक ओर नवाचार हुआ ‘हरित फेरा’ और ‘हरित महावचन’। ज्याणी चाहते हैं कि युवा इस पहल का नेतृत्व करें।</p>
<p style="text-align:justify;">वक्त की मांग के अनुरूप सदियों से चली आ रही परम्परा में सकारात्मक बदलाव करते हुए यदि देश की बहुसंख्यक आबादी के प्रतिनिधि युवा इस बदलाव का नेतृत्व करेंगे, तो बदलाव आना भी लाजमी है।यहां ज्याणी तो बधाई के पात्र हैं कि लेकिन उनसे बड़ा साधुवाद विजयपाल और उसके परिजनों को दिया जाना चाहिए। एक ओर जहां विजयपाल ने अपने जीवन के सबसे महत्त्वपूर्ण संस्कार को हमेशा के लिए यादगार बना लिया, वहीं परम्पराओं में पॉजीटिव बदलाव की पहल करते हुए इनके परिजनों ने भी समाज को एक संदेश दिया और प्रकृति के संरक्षण में अपने प्रयास किए। इस पहल में वर-वधू, उनके माता-पिता, मामा और आने वाले अतिथियों की कड़ियां जुड़ती रहीं और एक सार्थक प्रयास हुआ। नि:संदेह यह प्रयास दूसरों को भी प्रेरित करेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">तो इस ‘संडे’ का ‘फंडा’ यह है कि पर्यावरण की सुरक्षा करने के लिए इसे परम्पराओं से जोड़ना एक सकारात्मक पहल है। समय-समय पर ऐसे प्रयास होना चाहिए, जो प्राकृतिक संतुलन बनाए रखने में सहायक हो सकें। इन प्रयासों की निरंतरता व्यक्ति, परिवार, समाज और देश के लिए लाभदायक सिद्ध होती है, इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं है।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/environment-protection/article-4723</link>
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                <pubDate>Sun, 08 Jul 2018 04:51:21 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पर्यावरण संरक्षण का जरिया बनी मानव अस्थियां</title>
                                    <description><![CDATA[हरित क्रांति व सौंदर्यकरण का अनोखा नजारा | Human Bones Sirsa, Sandeep kamboj | Human Bones एक तरफ जहां मानव अस्थियां नदियों, नहरों में जल प्रदूषण की वजह बनी हैं, वहीं दूसरी ओर एक जगह ऐसी भी है जहां मानव अस्थियों से पर्यावरण संरक्षण की अद्भुत ऐतिहासिक इबारत लिखी जा रही है। जल प्रदूषण पर […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/human-bones-environment-protection/article-2552"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/human-bones.jpg" alt=""></a><br /><h1><strong>हरित क्रांति व सौंदर्यकरण का अनोखा नजारा | Human Bones</strong></h1>
<p style="text-align:center;"><strong>Sirsa, Sandeep kamboj | Human Bones</strong></p>
<p>एक तरफ जहां मानव अस्थियां नदियों, नहरों में जल प्रदूषण की वजह बनी हैं, वहीं दूसरी ओर एक जगह ऐसी भी है जहां मानव अस्थियों से पर्यावरण संरक्षण की अद्भुत ऐतिहासिक इबारत लिखी जा रही है।</p>
<h3><strong>जल प्रदूषण पर रोकथाम में डेरा सच्चा सौदा लिख रहा अद्भुत ऐतिहासिक इबारत</strong></h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><span style="text-align:justify;">यहां अस्थियों पर हजारों पौधे लहलहा रहे हैं, जो कि हरित क्रांति व सौंदर्यकरण का अनोखा नजारा है।<br />
</span></li>
<li style="text-align:justify;"><span style="text-align:justify;"> यकीन नहीं आ रहा हो तो चले आइए हरियाणा के सरसा स्थित सर्वधर्मसंगम डेरा सच्चा सौदा।<br />
</span></li>
<li style="text-align:justify;"><span style="text-align:justify;"> यहां आपको पर्यावरण सुरक्षा का ऐसा अनूठा दृश्य मिलेगा जिसे देखकर आप हैरान रह जांएगे।</span></li>
</ul>
<h1 style="text-align:justify;">दिखाई दे रहा सौन्दर्यीकरण का अद्भुत नजारा | Human Bones</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">लहलहाते पौधों के बीच हरियाली की छटा सौन्दर्यीकरण की अलग ही आभा बिखेर रही है।</li>
<li style="text-align:justify;">डॉ. एमएसजी ने इन अस्थियों से पर्यावरण सुरक्षा का बीड़ा उठाया है।</li>
<li style="text-align:justify;"> ‘अस्थियों से पर्यावरण सुरक्षा’ मुहिम के तहत मरणोपरांत दाह संस्कार के बाद अस्थियों पर पौधारोपण का सिलसिला जारी।</li>
<li style="text-align:justify;">शाह सतनाम जी धाम स्थित करीब तीस एकड़ से भी अधिक भू-भाग पर विभिन्न तरह के हजारों पौधे लगाए जा चुके हैं।</li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">मरणोपरांत भी मानवता सेवा का गजब संदेश | Human Bones</h2>
<ul style="text-align:justify;">
<li style="text-align:justify;">ये अस्थियां मानवता के उन सच्चे प्रहरियों की हैं</li>
<li style="text-align:justify;">जिनका जीते-जी हर क्रम, हर लम्हा मानवता को समर्पित रहता है।</li>
<li style="text-align:justify;">पौधों के रूप में वातावरण को अपनी सुगंध से महका रहे ये वो इंसानियत के मसीहा हैं</li>
<li style="text-align:justify;">जिन्होंने जीते-जी अपने खून से बीमार जरूरतमंदों की तकदीर लिखी।</li>
<li style="text-align:justify;">किसी ने आंखें तो किसी ने जरूरत पड़ने पर अपना गुर्दा तक दान कर दिया।</li>
</ul>
<h1>बर्बाद नहीं होंगी Human Bones</h1>
<p>इन पौधों को दी जा रही तरजीह किन्नू, मौसमी, संतरा, आम, अमरूद, अनार समेत विभिन्न फल व छायादार पौधे अस्थियों को पौधे के गड्ढे में डाल कर, उस पर फलदार या छायादार या अन्य उपयोगी पेड़-पौधे लगा दें जो ज्यादा बेहतर है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह से अस्थियां भी बर्बाद नहीं होंगी और मरने के बाद भी इंसान स्वच्छ वातावरण बनाने में सहायक होगा और इन अस्थियों<br />
पर अंकुरित होने वाले बीज का भी भला होगा।</p>
<p><em><strong>पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां</strong></em></p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/human-bones-environment-protection/article-2552</link>
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                <pubDate>Sun, 23 Jul 2017 03:26:34 +0530</pubDate>
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