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                <title>Memorable - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>ट्रंप की भारत यात्रा को यादगार बनाने की तैयारी</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के निमंत्रण पर ट्रंप एवं उनकी पत्नी दो दिन की भारत यात्रा पर 24 फरवरी को सबसे पहले अहमदाबाद पहुंचेंगे और 25 तारीख को उनके सरकारी कार्यक्रम नयी दिल्ली में होंगे।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/preparations-to-make-trumps-visit-to-india-memorable/article-13023"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/welcome-trump.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">24 फरवरी को सबसे पहले अहमदाबाद पहुंचेंगे (Welcome Trump)</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">
<h3>प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अहमदाबाद में ट्रंप का स्वागत करेंगे</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की भारत की यात्रा में चुनावी राजनीति, व्यापार एवं रक्षा सहयोग के तीनों आयामों का मिश्रण और उत्सव की चाशनी होगी जो न केवल मेहमानों बल्कि देशवासियों के लिए भी बेहद यादगार होगी। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के निमंत्रण पर ट्रंप एवं उनकी पत्नी दो दिन की भारत यात्रा पर 24 फरवरी को सबसे पहले अहमदाबाद पहुंचेंगे और 25 तारीख को उनके सरकारी कार्यक्रम नयी दिल्ली में होंगे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अहमदाबाद में ट्रंप का स्वागत करेंगे और दोनों नेता सरदार वल्लभ भाई पटेल अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से लेकर साबरमती आश्रम तक 10 किलोमीटर के रोड शो में शामिल होंगे। (Welcome Trump) इसके लिए हवाई अड्डे से साबरमती आश्रम तक मार्ग को सजाया जा रहा है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सड़क के दोनों ओर लाखों लोग विश्व के सबसे पुराने लोकतंत्र के नेता का स्वागत करेंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">बाद में दोनों नेता नवनिर्मित सरदार पटेल स्टेडियम में एक विशाल जनसभा ‘केम छो ट्रंप’ को संबोधित करेंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">यह स्टेडियम विश्व का सबसे बड़ा स्टेडियम है जिसमें एक लाख दस हजार लोगों के बैठने की क्षमता है।</li>
<li style="text-align:justify;">हवाई अड्डे, रोड शो एवं स्टेडियम में देश की विविधता पूर्ण संस्कृति की झांकियां भी अमेरिकी राष्ट्रपति को रिझाएंगी।</li>
<li style="text-align:justify;">अहमदाबाद में अमेरिकी राष्ट्रपति का पूरा कार्यक्रम उत्सवमय रहेगा।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">अहमदाबाद में रोड शो एवं जनसभा ‘केम छो ट्रंप’ होगी (Welcome Trump)</h3>
<p style="text-align:justify;">अमेरिका में इस साल के अंत में होने वाले राष्ट्रपति चुनाव के लिहाज से अहमदाबाद में रोड शो एवं जनसभा ‘केम छो ट्रंप’ बहुत महत्वपूर्ण होगी। अमेरिका में बड़ी संख्या में प्रवासी भारतीय रहते हैं और उनमें गुजरातियों की संख्या काफी अधिक है। गत वर्ष सितंबर में ह्यूस्टन में प्रधानमंत्री मोदी के हाउडी मोदी कार्यक्रम में भाग लेकर श्री ट्रंप को इस ताकत का अहसास हो गया था। अहमदाबाद के ‘केम छो ट्रंप’ से वह अमेरिका में रहने वाले प्रवासी भारतीय समुदाय पर असर डालेंगे। मंच पर श्री मोदी की मौजूदगी का संदेश सीधा प्रवासियों तक पहुंच जाएगा। इस कार्यक्रम में रिपब्लिकन पार्टी के बड़े नेताओं के भी शिरकत करने की संभावना है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">25 हजार करोड़ रुपए के रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर होने की संभावना</h3>
<p style="text-align:justify;">शिखर बैठक में दोनों देशों के बीच करीब 25 हजार करोड़ रुपए के रक्षा सौदों पर हस्ताक्षर होने की संभावना है। केन्द्रीय मंत्रिमंडल की रक्षा संबंधी समिति ने हाल ही में नौसेना के लिए 24 रोमियो मल्टीमिशन हेलीकॉप्टर, वायुसेना के लिए छह अपाचे युद्धक हेलीकॉप्टर और छह पी 8 आई समुद्री टोही विमान खरीदने के सौदों को मंजूरी दी है। इनकी आपूर्ति 2023-24 तक होने की संभावना है। इसके अलावा ट्रंप मेक इन इंडिया कार्यक्रम के तहत एफ-18, एफ-15ईएक्स अथवा एफ-16 का उन्नत संस्करण एफ-21 संयुक्त रूप से बनाने का प्रस्ताव भी कर सकते हैं। दोनों देशों ने रक्षा प्रौद्योगिकी एवं व्यापार पहल (डीटीटीआई) के तहत सात परियोजनाओं को चिह्नित किया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">द्विपक्षीय व्यापार करार को लेकर भी बातचीत आगे बढ़ेगी</h3>
<p style="text-align:justify;">चीन अमेरिका व्यापार युद्ध के बीच इस करार को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ट्रंप ने गत दिनों में भारत यात्रा के बारे में बातचीत में कहा कि अगर इसमें अमेरिका के हित पूरे होते हैं तो इस पर वह हस्ताक्षर करेंगे। भारतीय कूटनीतिक सूत्रों का भी कहना है कि अगर भारत के हितों के अनुरूप होता है तो भारत इस पर दस्तखत करेगा। सूत्रों के अनुसार कृषि एवं आॅटोमोबाइल्स उत्पादों को एक दूसरे के बाजार में पहुंच के मुद्दे पर गतिरोध कायम है। ऐसा भी माना जा रहा है कि प्रवासी भारतीयों खासकर पेशेवर युवाओं के लिए एच1बी वीजा को लेकर भारत की चिंताओं को लेकर भी श्री ट्रंप कोई आश्वासन दे सकते हैं। बैठक में ऊर्जा सुरक्षा, अफगानिस्तान, आतंकवाद सहित क्षेत्रीय मुद्दों पर भी चर्चा होगी।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">शाम को राष्ट्रपति कोविंद राष्ट्रपति भवन में ट्रंप के सम्मान में भोज का आयोजन करेंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">उसके बाद रात में ट्रंप वापस लौट जाएंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">करीब 40 घंटे की इस यात्रा में चुनावी राजनीति का रंग और रणनीतिक सहयोग दोनों का मिश्रण होगा।</li>
<li style="text-align:justify;">उत्सव का रूप इस यात्रा को ट्रंप दंपत्ति के लिए यादगार बनाएगा।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2020 17:26:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>यादगार राष्ट्रपति हैं प्रणब मुखर्जी</title>
                                    <description><![CDATA[आगामी 25 जुलाई को देश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पद की शपथ लेंगे। इससे पहले 24 जुलाई को देश के वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का राष्ट्रपति भवन में अंतिम दिन होगा। लेकिन, बतौर राष्ट्रपति उनका कार्यकाल याद किए जाने लायक है। उनकी सक्रियता, देश के समसामयिक मुद्दों पर सरकारों के लिए मार्गदर्शक टिप्पणियाँ और […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/pranab-mukherjee-is-memorable-president/article-2553"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/pranab.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आगामी 25 जुलाई को देश के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद पद की शपथ लेंगे। इससे पहले 24 जुलाई को देश के वर्तमान राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का राष्ट्रपति भवन में अंतिम दिन होगा। लेकिन, बतौर राष्ट्रपति उनका कार्यकाल याद किए जाने लायक है। उनकी सक्रियता, देश के समसामयिक मुद्दों पर सरकारों के लिए मार्गदर्शक टिप्पणियाँ और कई मसलों पर उनके अप्रत्याशित निर्णय, यह सब लोगों के जेहन में हमेशा बरकरार रहेंगे। भारत में राष्ट्रपतियों का कार्यकाल प्राय: इत-उत के व्याख्यानों, गणतंत्र दिवस समारोह समेत कुछेक सांकेतिक चीजों तक ही केन्द्रित रहता है, लेकिन प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल इन चीजों के अलावा भी काफी कुछ से भरा और यादगार रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">25 जुलाई, 2012 को प्रणब मुखर्जी ने भारत के 13वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली। प्रणब दा का राष्ट्रपति पद का उम्मीदवार बनना एकदम अचानक हुआ था। संभव है कि कांग्रेस आलाकमान के दिमाग में इस सम्बन्ध में कोई पूर्वयोजना रही हो, मगर जनसामान्य के लिए यह बेहद चौंकाने वाला निर्णय था। कारण कि तब प्रणब मुखर्जी वित्त मंत्री के रूप में राजनीतिक रूप से बेहद सक्रिय थे और कांग्रेस के अंदरखाने में ऐसी चर्चा हिलोरें मारने लगी थी कि उन्हें 2014 के आगामी लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार बनाया जाए।</p>
<p style="text-align:justify;">यह मांग तार्किक भी थी, क्योंकि तब प्रणब मुखर्जी न केवल कांग्रेस के तत्कालीन नेताओं में लगभग सबसे वरिष्ठ और स्वच्छ छवि के नेता थे, बल्कि हर संकट में पार्टी के संकटमोचक भी होते थे। मगर यहाँ तो कहानी ही दूसरी हो गयी और प्रधानमंत्री पद की संभावित उम्मीदवारी के बीच प्रणब मुखर्जी का नाम राष्ट्रपति पद के लिए कांग्रेस द्वारा प्रस्तावित कर दिया गया। उनके जवाब में पी ए संगमा उतरे, जिन्हें बड़े अंतर से हराते हुए प्रणब मुखर्जी ने शानदार विजय प्राप्त की।</p>
<p style="text-align:justify;">सैद्धांतिक पक्ष जो भी हो, मगर व्यावहारिक रूप से सत्य यही है कि कोई भी दल अपने व्यक्ति को राष्ट्रपति बनवाता है, तो मुख्य उद्देश्य यही होता है कि राष्ट्रपति उसके प्रति तनिक अधिक उदार रहेंगे। राष्ट्रपति के विशेषाधिकारों का उसे अपेक्षाकृत अधिक लाभ मिल सकेगा। इंदिरा सरकार के आपातकाल के निर्णय को आँख मूंदकर स्वीकारने वाले फखरुद्दीन अली अहमद हों या अपने पूरे कार्यकाल के दौरान तत्कालीन कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के प्रति अत्यंत उदार और समर्पित रहने वाली प्रतिभा पाटिल हों, ऐसे राष्ट्रपति भी देश ने देखे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मगर, प्रणब मुखर्जी इस तरह के राष्ट्रपतियों में अपवाद रहे। दागी अध्यादेश का मामला यहाँ उल्लेखनीय होगा। सन 2013 में दागी सांसदों-विधायकों को पदच्युत करने वाले सर्वोच्च न्यायालय के निर्णय को पलटने के लिए कांग्रेस सरकार अध्यादेश लाई थी, जो मंजूरी के लिए राष्ट्रपति के पास गया। मगर, प्रणब मुखर्जी को इसपर कई शंकाएं थीं, सो उन्होंने विपक्षी दल के नेताओं से भेंट के बाद इसे रोके रखा। आखिरकार राहुल गांधी के ‘बकवास विधेयक’ वाले पूरे सार्वजनिक ड्रामे के बाद तब यह अध्यादेश वापस हो गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">उस वक्त वरिष्ठ भाजपा नेता लाल कृष्ण आडवाणी ने इस दागी अध्यादेश की वापसी के लिए प्रणब मुखर्जी को सारा श्रेय दिया था। 2014 में जब केंद्र में भाजपा की सरकार आई, तो उसके प्रति भी प्रणब मुखर्जी ने कांग्रेस सरकार के समान भाव ही रखा। कह सकते हैं कि राष्ट्रपति बनने के साथ ही उन्होंने अपनी राजनीतिक प्रतिबद्धता को छोड़ पदानुरूप संवैधानिक प्रतिबद्धता को पूरी तरह से आत्मसात कर लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस देश में राष्ट्रपति दया-याचिकाओं को लेकर भी काफी याद किए जाते हैं। यह देखा जाता है कि किस राष्ट्रपति ने कितनी दया याचिकाएं खारिज कीं और कितनी स्वीकार कीं। प्रणब मुखर्जी अपराधियों की दया याचिकाओं के प्रति सख्त रहे हैं। उन्होंने दोषियों पर काफी कम दया दिखाई है। पूरे कार्यकाल में उनके पास कुल 38 दया याचिकाएं आर्इं, जिनमें ज्यादातर में उन्होंने अदालत की सजा को बरकरार रखा।</p>
<p style="text-align:justify;">केवल चार दया याचिकाओं को फांसी से आजीवन कारावास में बदलकर जीवनदान दिया। यहां विशेष तौर पर उल्लेखनीय होगा कि उन्होंने अपने कार्यकाल में तीन खूंखार आतंकियों की दया याचिकाओं को खारिज कर उन्हें फांसी तक पहुँचाया। 26/11 हमले के दोषी अजमल कसाब की दया याचिका, जो राष्ट्रपति को 16 अक्टूबर, 2012 को भेजी गयी और बिना देरी किए 5 नवम्बर, 2012 को प्रणब मुखर्जी ने उसे खारिज कर दिया।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर 21 नवम्बर को कसाब को फांसी पर लटका दिया गया। 2013 में संसद हमले के दोषी अफजल गुरु जिसकी दया याचिका दशकों से राष्ट्रपति भावना में पड़ी धूल फांक रही थी, को बिना देरी किए प्रणब मुखर्जी ने खारिज कर उस खूंखार आतंकी को भी फांसी के फंदे तक पहुँचाया। तीसरी दया याचिका जो राष्ट्रपति ने 2015 में खारिज की, वो सन 1993 के मुंबई धमाके के दोषी याकूब मेनन की थी।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल प्रणब मुखर्जी अगर इस त्वरित गति से दया याचिकाएं खारिज कर सके तो इसके लिए कारण यह माना जा सकता है कि वे सत्ताधारी दल के राजनीतिक प्रभावों से मुक्त थे। अफजल गुरु की फांसी विशुद्ध राजनीतिक कारणों से ही तो दशकों तक रुकी रही थी, मगर प्रणब मुखर्जी ने उन कारणों की परवाह न करते हुए उस दया याचिका को खारिज कर दिया। अगर वे सत्ताधारी दल के प्रभाव में रहे होते तो शायद 2013 में जब कांग्रेस की सरकार थी, अफजल की दया याचिका खारिज नहीं करते।</p>
<p style="text-align:justify;">इन सबके अलावा प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल सरकार के कार्यों और देश की समसामयिक समस्याओं पर जब-तब की गयी, उनकी टिप्पणियों तथा वैश्विक दौरों के संदर्भ में भी यादगार है। कांग्रेस नीत संप्रग सरकार रही हो या वर्तमान की भाजपा सरकार, प्रणब मुखर्जी ने दोनों को समय दर समय समस्याओं के प्रति सचेत करने और मार्गदर्शन देने वाले वक्तव्य दिए। ऐसे में अगर आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ये कहते हैं, ह्यराष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मुझे पिता की तरह रास्ता दिखाया। मेरे जीवन का बड़ा सौभाग्य रहा कि मुझे प्रणब दादा की उंगली पकड़ कर दिल्ली की जिंदगी में स्वयं को सेट करने की सुविधा मिली।ह्य तो उनकी इस बात को बहुत अतिश्योक्तिपूर्ण नहीं माना जा चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बहरहाल, आखिर में कह सकते हैं कि प्रणब मुखर्जी बतौर राजनेता कार्यपालिका में वित्त, रक्षा और विदेश जैसे दायित्वों का जितना कुशल ढंग से निर्वहन किए, उतने ही बेहतर ढंग से उन्होंने महामहिम के रूप में भी अपने दायित्वों से न्याय किया। निश्चित तौर पर आने वाले राष्ट्रपति के लिए वे एक उच्चतर मानदंड स्थापित करके जा रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस देश में राष्ट्रपति दया-याचिकाओं को लेकर भी काफी याद किए जाते हैं। यह देखा जाता है कि किस राष्ट्रपति ने कितनी दया याचिकाएं खारिज कीं और कितनी स्वीकार कीं। प्रणब मुखर्जी अपराधियों की दया याचिकाओं के प्रति सख्त रहे हैं। उन्होंने दोषियों पर काफी कम दया दिखाई है। पूरे कार्यकाल में उनके पास कुल 38 दया याचिकाएं आर्इं, जिनमें ज्यादातर में उन्होंने अदालत की सजा को बरकरार रखा।</p>
<p style="text-align:justify;"><strong><em><br />
पीयूष द्विवेदी</em></strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 23 Jul 2017 03:54:14 +0530</pubDate>
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