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                <title>बयानबाजी की बजाय भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हो</title>
                                    <description><![CDATA[बैंकों में भ्रष्टाचार के सनसनीखेज खुलासों से जहां आम जनता परेशान है और सख्त कार्रवाई चाहती है वहीं राजनेता एक दूसरे पर आरोप मढ़ने में लगे हुए हैं। सरकार की कार्रवाई में इतनी गंभीरता दिखानी चाहिए कि यह महसूस हो कि दोषी जल्द ही कानून की गिरफ्त में होगा और उससे सारा पैसा वसूल होगा, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/action-against-corruption-rather-than-rhetoric/article-3562"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-02/bank-scam-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">बैंकों में भ्रष्टाचार के सनसनीखेज खुलासों से जहां आम जनता परेशान है और सख्त कार्रवाई चाहती है वहीं राजनेता एक दूसरे पर आरोप मढ़ने में लगे हुए हैं। सरकार की कार्रवाई में इतनी गंभीरता दिखानी चाहिए कि यह महसूस हो कि दोषी जल्द ही कानून की गिरफ्त में होगा और उससे सारा पैसा वसूल होगा, लेकिन हालात यह हैं कि धोखाधड़ी का आधा पैसा भी वसूल होता नहीं दिख रहा। नीरव मोदी की 100-200 करोड़ की जायदाद जब्त हो चुकी है। यह रकम घोटाले की रकम का दसवां हिस्सा भी नहीं है। कांग्रेस ने नीरव मोदी, विजय माल्या और विक्रम कोठारी के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरना शुरू कर दिया है, दूसरी ओर सरकार को कांग्रेसी नेता और पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिन्दर सिंह के दामाद का नाम एक बैंक घोटाले में होने पर बोलने का मौका मिल गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">भाजपा प्रधान ने अमरिन्दर सिंह पर निशाना साधना शुरू कर दिया है। दरअसल भ्रष्टाचारी की कोई पार्टी नहीं होती वह कानून की नजर में आरोपी है। अमरिन्दर सिंह ने अपने दामाद के बचाव में स्पष्टीकरण दे दिया है। बेहतर होता यदि अमरिन्दर सिंह सारी बात कानून पर छोड़ देते दूसरी ओर अमित शाह द्वारा अमरिन्दर सिंह की अलोचना करना भी राजनीति से बढ़कर कुछ नहीं, क्योंकि गुरपाल सिंह का नाम जिस घोटाले में बोला है उसका पंजाब से कोई तालुक नहीं। अमरिन्दर सिंह को केवल उन्हीं हालातों में निशाना बनाया जा सकता था यदि बैकिंग संस्था का कंट्रोल पंजाब सरकार के पास होता। अमरिन्दर को बुरा भला कहने से बात नहीं बनने वाली।</p>
<p style="text-align:justify;">घोटाले की वजह तकनीकी कार्यों में हेरा-फेरी है जिसकी गंभीरता से जांच होनी चाहिए। ऐसी बयानबाजी मामलों की गंभीरता को कम करती है। बैंकों का सारा कार्यभार केंद्रीय वित्त मंत्रालय और भारतीय रिजर्व बैंक के अर्न्तगत आता है। बैकिंग प्रबंधों में खामियों को रोकने की जिम्मेदारी केंद्र की है। राजनैतिक हितों की खातिर बयानबाजी से कोई समाधान नहीं हो सकता। भ्रष्टाचार किसी एक पार्टी तक सीमित नहीं रहा। सभी पार्टियां भ्रष्टाचार को एक समस्या की बजाए संकट के तौर पर लें और इसे राजनैतिक हितों की खातिर एक हथियार के तौर पर प्रयोग नहीं करें। अजीब बात है कि भ्रष्टाचार और काले धन को रोकने के लिए कानून सख्त हो रहे हैं लेकिन घोटाले बढ़ते जा रहे हैं। सरकार और विपक्ष दोनों को राजनैतिक हितों से परे हटकर देश के हित में भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान छेड़ने की आवश्यकता है।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Feb 2018 00:17:43 +0530</pubDate>
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                <title>राजनीति की बजाए संयम की आवश्यकता</title>
                                    <description><![CDATA[इराक में अगवा 39 भारतियों की वापिसी का मामला राजनीतिक रंगत पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस ने संसद में इस मुद्दे पर विदेश मंत्री के विरुद्ध मर्यादा प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है। आम आदमी पार्टी ने भी सरकार के खिलाफ कमर कस ली है। नि:संदेह अगवा भारतीयों के परिवारों का दर्द बड़ा गहरा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/need-for-restraint-rather-than-politics/article-2574"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/politics-.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">इराक में अगवा 39 भारतियों की वापिसी का मामला राजनीतिक रंगत पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस ने संसद में इस मुद्दे पर विदेश मंत्री के विरुद्ध मर्यादा प्रस्ताव लाने की तैयारी कर ली है। आम आदमी पार्टी ने भी सरकार के खिलाफ कमर कस ली है।</p>
<p style="text-align:justify;">नि:संदेह अगवा भारतीयों के परिवारों का दर्द बड़ा गहरा है जो सारा दिन अपनी, आंखें टीवी या अखबारों पर टिकाई रखते हैं। दो सालों में इन खबरों को लेकर कई बार उतार-चढ़ाव आए हैं। इराक से वापिस पहुंचे हरजीत सिंह नामक व्यक्ति ने दावा किया है कि उसके सामने ही सभी को गोली मार दी गई थी,</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन कई बार यह दावा किया गया कि भारतीय सुरक्षित हैं और सरकार वापिसी के लिए प्रयास कर रही है। सरकार के भरोसे से परिवारों का हौसला बढ़ा था। अब मौसुल में जंग भी रुक गई है और हालात सामान्य जैसे हो रहे हैं। दरअसल सही हालात ही अब बने हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">अब भारतीयों के बारे में पुख्ता जानकारी मिल सकेगी। पहले मौसुल में जिस तरह घमसान मचा हुआ था उससे कोई जानकारी मिलना आसान नहीं था। जो भारतीय राजनीतिज्ञ इस मुद्दे पर बयानबाजी कर रहे हैं वह भारत में रह रहे हैं और यहां के हालातों के मुताबिक ही सोच समझ रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यह नेता मौसुल के हालातों को समझने व महसूस करने को तैयार नहीं। विरोधी पार्टियां इस मामले में सतही राजनीति करने की बजाय हालातों को समझें। सरकार के लिए यह अच्छा अवसर है कि मौसुल में बदले हालातों के अनुसार अपने प्रयासों में तेजी लाएं।</p>
<p style="text-align:justify;">विरोधी पार्टियों को यह जानकारी भी होनी चाहिए कि इराक मध्य पूर्व के कई देशों में खानाजंगी के हालात हैं। आधी दर्जन से अधिक देशों के लाखों लोग यूरोप व अमेरिका में शरण लेने के लिए परेशान हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">मौसुल शहर आईएस, आईएस का सबसे बड़ा गढ़ था जिसे जीतने के लिए पेंटागन को अपनी ताकत झोंकनी पड़ी। अमेरिका की भारी बमबारी में एक इमारत में अपनी जान बचाने के लिए छिपे सौ से अधिक लोग मारे गए। पता नहीं ऐसी कितनी ही इमारतें तहस-नहस हो गई।</p>
<p style="text-align:justify;">दो साल मौसुल धमाकों, गोलीबारी व धुएं का शहर बना रहा। कभी इराकी सेना तो कभी आईएस का पलड़ा भारी रहा। पूरा विश्व इराक के हालातों से चिंतित था। यह अंदाजा लगाना कठिन हो रहा था कि इस लड़ाई में अमेरिका जीतेगा या आईएस, जो अमरीकी हमलों के बावजूद ताकत पकड़ रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">आईएस में विश्व के 90 देशों से 20 हजार के लगभग नौजवान भर्ती हो चुके थे। इन हालातों में भारतीयों की तलाश करना मुश्किल था, जिसके लिए सरकार को दोष देना जायज नहीं लगता। यह कोई आंतरिक मामला नहीं कि सरकार को दोष दिया जाए।</p>
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                <pubDate>Mon, 24 Jul 2017 01:20:14 +0530</pubDate>
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