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                <title>खोखले वादों पर उम्मीदवारी रद्द करने की याचिका सुप्रीम कोर्ट में खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) पांच विधानसभाओं के चुनाव प्रचार में कुछ राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के कथित खोखले वादों के खिलाफ दायर याचिका गुरुवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुरजीत सिंह यादव की याचिका सख्त टिप्पणियों और अदालत का समय बर्बाद करने की कीमत […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/petition-to-cancel-candidature-on-hollow-promises-dismissed-in-supreme-court/article-31249"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-03/supreme-court-of-india.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> उच्चतम न्यायालय (Supreme Court) पांच विधानसभाओं के चुनाव प्रचार में कुछ राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों के कथित खोखले वादों के खिलाफ दायर याचिका गुरुवार को खारिज कर दी। मुख्य न्यायाधीश एन. वी. रमना की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सुरजीत सिंह यादव की याचिका सख्त टिप्पणियों और अदालत का समय बर्बाद करने की कीमत चुकाने की चेतावनी के साथ खारिज की।</p>
<p style="text-align:justify;">खंडपीठ ने कहा कि याचिका का उद्देश्य कुछ खास दलों को कोई छुपे इरादे की वजह से निशाना बनाने तथा खुद प्रचार पाने का माध्यम लगता है। मुख्य न्यायाधीश ने सुनवाई करते हुए याचिकाकर्ता के वकील बरुण कुमार सिन्हा से कहा, ‘ यह किसी खास उद्देश्य एक प्रेरित याचिका लगता है। हमें एक छिपा हुआ कोई मकसद दिखाई देता है। आखिर आप विशेष दलों को ही क्यों निशाना बना रहे हैं । पीठ ने याचिकाकर्ता से पूछा, ‘आपने अपनी याचिका में कुछ खास पार्टी का ही जिक्र क्यों किया ? आमतौर पर ऐसा कोई और नहीं करता है।</p>
<h4 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h4>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष न्यायालय (Supreme Court) ने याचिकाकर्ता द्वारा एक एनजीओ के उपाध्यक्ष होने के दावे के संबंध में भी जानकारी मांगी है। उच्च्तम न्यायालय ने बुधवार को अधिवक्ता सिन्हा की गुहार पर इस याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी थी। ‘विशेष उल्लेख’ के दौरान वकीलसिन्हा द्वारा इस मामले को अति आवश्यक बताया गया था। याचिका में पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों के दौरान कथित तौर पर मतदाताओं को मुफ्त उपहार देने के लिए विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवारों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने तथा उन्हें अयोग्य ठहराए जाने का निर्देश देने की मांग की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिका (Supreme Court) में दावा किया गया है कि किसी राजनीतिक दल, उसके नेता और चुनाव में खड़े उम्मीदवारों द्वारा इस तरह के प्रस्ताव या वादे को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1951 की धारा 123 (1) (बी) के प्रावधानों के तहत भ्रष्ट आचरण और रिश्वतखोरी में लिप्त घोषित किया जा सकता है। याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति देने से पहले पीठ ने कहा था, ‘चुनावी रिश्वत हर जगह चल रही है। यह किसी विशेष राज्य का मामला नहीं है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Mar 2022 17:41:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Nirbhaya case : विनय शर्मा की याचिका पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट सुनाएगा फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की विशेष खंडपीठ ने विनय शर्मा के वकील ए पी सिंह और केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/nirbhaya-case-supreme-court-verdict-on-vinay-sharmas-petition-on-friday/article-13019"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/nirbhaya-case-1.jpg" alt=""></a><br /><h2>विनय ने राष्ट्रपति के फैसले की समीक्षा का न्यायालय से अनुरोध किया है</h2>
<ul>
<li> उसकी दया याचिका राष्ट्रपति ने जल्दबाजी में खारिज की है: विनय</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने देश को दहला देने वाले निर्भया सामूहिक दुराचार एवं हत्या मामले के गुनाहगार विनय शर्मा की राष्ट्रपति द्वारा खरिज दया याचिका को चुनौती देने वाली याचिका पर अपना फैसला गुरुवार को सुरक्षित रख लिया। न्यायमूर्ति आर भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना की विशेष खंडपीठ ने विनय शर्मा के वकील ए पी सिंह और केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता की दलीलें सुनने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">न्ययालय ने इस पर फैसला सुनाने के लिए शुक्रवार दोपहर बाद दो बजे का समय निर्धारित किया। इससे पहले सिंह ने दलील दी कि विनय शर्मा की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके मुवक्किल को संबंधित दस्तावेज उपलब्ध नहीं कराया था। साथ ही यह भी कहा कि उपराज्यपाल और दिल्ली सरकार के गृह मंत्री ने दया याचिका खारिज करने की सिफारिश पत्र पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">मेहता ने उनकी इन दलीलों को खारिज करते हुए कहा कि सारी प्रक्रियाओं का पालन किया गया है।</li>
<li style="text-align:justify;">कल इस मामले में शीर्ष अदालत अपना फैसला सुनाएगा।</li>
<li style="text-align:justify;">विनय ने राष्ट्रपति के फैसले की समीक्षा का न्यायालय से अनुरोध किया है।</li>
<li style="text-align:justify;">विनय ने अपनी याचिका में कहा है कि उसकी दया याचिका राष्ट्रपति ने जल्दबाजी में खारिज की है।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/nirbhaya-case-supreme-court-verdict-on-vinay-sharmas-petition-on-friday/article-13019</link>
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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2020 16:24:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Nirbhaya Case : राष्ट्रपति ने खारिज की विनय शर्मा की दया याचिका</title>
                                    <description><![CDATA[निर्भया मामले  में चारों दोषियों में से एक विनय कुमार शर्मा की दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज कर दी है। इसके बाद वह फांसी के और करीब पहुंच गया है। विनय की सुधारात्मक याचिका (curative petition) पहले ही खारिज हो चुकी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nirbhaya-case-president-rejects-vinay-sharma-mercy-petition/article-12863"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/nirbhaya-case-copy.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">विनय ने बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास दया याचिका भेजी थी</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong>  निर्भया मामले में चारों दोषियों में से एक विनय कुमार शर्मा की दया याचिका राष्ट्रपति ने खारिज कर दी है। इसके बाद वह फांसी के और करीब पहुंच गया है। विनय की सुधारात्मक याचिका पहले ही खारिज हो चुकी है। इस मामले मुकेश की दया याचिका राष्ट्रपति महोदय 17 जनवरी को ही खारिज कर चुके हैं। हालांकि, दोषियों को फांसी कब होगी, इसकी अभी तक कोई तिथि तय नहीं हो पाई है। दोषी विनय ने बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के पास दया याचिका भेजी थी। इसकी जानकारी खुद विनय के वकील एपी सिंह ने दी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि 16 दिसंबर, 2012 निर्भया के साथ हुई सामूहिक दुष्कर्म की घटना में चारों दोषियों (विनय कुमार शर्मा, पवन कुमार गुप्ता, मुकेश सिंह और अक्षय सिंह ठाकुर) को निचली अदालत के बाद दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट भी फांसी की सजा सुना चुका है। गौरतलब है कि दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म कांड के दोषी पवन गुप्ता की पुनर्विचार याचिका सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दी है। पवन ने अपराध के समय नाबालिग होने का दावा खारिज करने के आदेश के खिलाफ यह पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>पवन ने अपराध के समय दिसंबर 2012 में नाबालिग होने का दावा किया था। </strong></li>
<li><strong>हालांकि निचली अदालत से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक उसका यह दावा खारिज किया जा चुका है।</strong></li>
<li><strong> लेकिन उसने अब सुप्रीम कोर्ट से दावा खारिज होने के आदेश के खिलाफ यह पुनर्विचार याचिका दाखिल की थी। </strong></li>
<li><strong>पवन ने शुक्रवार को ही याचिका दाखिल की थी।</strong></li>
<li><strong> सुप्रीम कोर्ट ने आनन फानन में शुक्रवार को ही मामले पर विचार करने के बाद याचिका खारिज कर दी।</strong></li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म कांड के चार दोषियों में एक पवन गुप्ता भी है</h2>
<p style="text-align:justify;">जस्टिस आर. भानुमति, अशोक भूषण और एएस बोपन्ना की पीठ ने याचिका खारिज करते हुए अपने आदेश में कहा कि उन्होंने पुनर्विचार याचिका और उसके साथ दाखिल दस्तावेज ध्यान से देखे और यह पाया कि जिस आदेश पर पुनर्विचार की मांग की गई है उसमें ऐसी कोई खामी नहीं है जिस पर पुनर्विचार की जरूरत हो। दिल्ली सामूहिक दुष्कर्म कांड के चार दोषियों में एक पवन गुप्ता भी है। जिसे दुष्कर्म और हत्या के जुर्म में फांसी की सजा सुनाई गई है। सुप्रीम कोर्ट तक से पवन की फांसी पर मुहर लग चुकी है। यहां तक कि सुप्रीम कोर्ट फांसी की सजा को चुनौती देने वाली उसकी पुनर्विचार याचिका पहले ही खारिज कर चुका है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/nirbhaya-case-president-rejects-vinay-sharma-mercy-petition/article-12863</link>
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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2020 12:15:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अनुराधा पौडवाल की याचिका पर केरल की महिला को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[गायिका और उनके पति पर किया जैविक माता-पिता का दावा | Anuradha Paudwal नई दिल्ली (एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल (Anuradha Paudwal) की एक स्थानांतरण याचिका पर वीरवार को सुनवाई की। कोर्ट ने अनुराधा पौडवाल की जैविक बेटी होने का दावा करने वाली महिला को नोटिस जारी किया है। पौडवाल ने केरल […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/notice-to-kerala-woman-on-anuradha-paudwals-petition/article-12816"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/anuradha-paudwal.jpg" alt=""></a><br /><h2>गायिका और उनके पति पर किया जैविक माता-पिता का दावा | <span lang="en" xml:lang="en">Anuradha Paudwal</span></h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल (<span lang="en" xml:lang="en">Anuradha Paudwal</span>) की एक स्थानांतरण याचिका पर वीरवार को सुनवाई की। कोर्ट ने अनुराधा पौडवाल की जैविक बेटी होने का दावा करने वाली महिला को नोटिस जारी किया है। पौडवाल ने केरल के तिरुवनंतपुरम की परिवार अदालत में याचिका लगाई थी। इसमें उन्होंने उक्त महिला द्वारा दायर याचिका को मुंबई स्थानांतरित का अनुरोध किया था। मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबडे, न्यायमूर्ति बी.आर. गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की खंडपीठ ने अनुराधा पौडवाल की याचिका पर सुनवाई की।</p>
<p style="text-align:justify;">कोर्ट ने केरल की महिला को नोटिस जारी किया। साथ ही परिवार अदालत में दायर याचिका की सुनवाई पर फिलहाल रोक लगा दी। केरल की 45 वर्षीय महिला ने दावा किया है कि श्रीमती पौडवाल और उनके स्वर्गीय पति ही उनके जैविक माता-पिता हैं। उक्त महिला ने पौडवाल परिवार से 50 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा और सम्पत्ति में एक चौथाई हिस्सा देने की मांग की है। तिरुवनंतपुरम की परिवार अदालत ने महिला की याचिका स्वीकार करते हुए पौडवाल को समन किया था। जिसके बाद गायिका को शीर्ष अदालत का रुख करना पड़ा है।</p>
<ul>
<li><strong>महिला ने प्रसिद्ध गायिका अनुराधा पौडवाल और उनके पति पर किया जैविक माता-पिता होने का दावा</strong></li>
<li><strong>तिरुवनंतपुरम की परिवार अदालत में दायर की याचिका</strong></li>
<li><strong>मुआवजे के तौर पर मांगे 50 करोड़ रुपये और संपत्ति में चौथाई हिस्सा</strong></li>
<li><strong>अनुराधा पौडवाल ने सुप्रीम कोर्ट में डाली याचिका</strong></li>
<li><strong>सुप्रीम कोर्ट ने दावा करने वाली महिला को जारी किया नोटिस</strong></li>
<li><strong>परिवार अदालत में दायर याचिका की सुनवाई पर लगाई रोक</strong></li>
</ul>
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</span></pre>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jan 2020 13:06:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>निर्भया के गुनाहगार मुकेश की आखिरी उम्मीद भी खत्म, याचिका खारिज</title>
                                    <description><![CDATA[कोर्ट बोली-याचिका में कोई आधार नहीं दिखता नई दिल्ली (एजेंसी)। निर्भया के हत्यारे मुकेश की फांसी से बचने की आखिरी कोशिश बुधवार को नाकाम हो गई। उच्चतम न्यायालय ने दया याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ उसकी अपील निरस्त कर दी। न्यायमूर्ति आर. भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना की विशेष खंडपीठ […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/nirbhaya-case-culprit-mukeshs-last-hope-also-broken-petition-dismissed/article-12789"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/nirbhaya-case-2.jpg" alt=""></a><br /><h2>कोर्ट बोली-याचिका में कोई आधार नहीं दिखता</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> निर्भया के हत्यारे मुकेश की फांसी से बचने की आखिरी कोशिश बुधवार को नाकाम हो गई। उच्चतम न्यायालय ने दया याचिका खारिज किए जाने के खिलाफ उसकी अपील निरस्त कर दी। न्यायमूर्ति आर. भानुमति, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति ए. एस. बोपन्ना की विशेष खंडपीठ ने मुकेश की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने कहा कि उसमें कोई आधार नहीं दिखता। कोर्ट ने गुनहगार मुकेश की दया याचिका खारिज करने को चुनौती संबंधी अपील पर फैसला मंगलवार को सुरक्षित रख लिया था। खंडपीठ के सामने मुकेश की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अंजना प्रकाश ने दलीलें रखी थी। जबकि दिल्ली सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने दलीलें पेश की थी। न्यायालय ने कहा कि दिल्ली सरकार ने दया याचिका के साथ राष्ट्रपति को पर्याप्त दस्तावेज उपलब्ध कराए थे।</p>
<h3>क्या है पूरा मामला – Nirbhaya Case in Hindi – Full Details</h3>
<ul>
<li>16 दिसंबर, 2012: दिल्ली के मुनीरका में 6 लोगों ने चलती बस में पैरामेडिकल की छात्रा से दरिदंगी की।</li>
<li>वारदात के बाद बाद युवती और उसके दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक दिया था।</li>
<li>18 दिसंबर, 2012: दिल्ली पुलिस ने चारों दोषियों राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता को गिरफ्तार किया गया।</li>
<li>21 दिसंबर, 2012: पुलिस ने एक नाबालिग को दिल्ली से और छठे दोषी अक्षय ठाकुर को बिहार से गिरफ्तार किया।</li>
<li>29 दिसंबर, 2012: पीड़िता का दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज चल रहा था।</li>
<li>हालत में सुधार नहीं होने पर पीड़िता को सिंगापुर भेजा गया, जहां उसकी मौत हो गई।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jan 2020 11:34:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दोषी पवन, मुकेश की क्यूरेटिव पिटीशन खारिज, फांसी का रास्ता साफ</title>
                                    <description><![CDATA[Aaj Ki Khabar Hindi Mai: दो अन्य दोषियों- पवन गुप्ता और अक्षय कुमार ने अभी तक क्यूरेटिव याचिकाएं नहीं दायर की है। न्यायमूर्ति एन वी रमन के चैम्बर में इन दोनों की याचिकाओं की सुनवाई होनी थी, जहां चंद मिनटों के भीतर ही याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/nirbhaya-scandal-convict-pawan-mukeshs-curative-petition-dismissed-way-clear-for-hanging/article-12477"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/nirbhaya-scandal.jpg" alt=""></a><br /><h2>पीठ ने कहा, ‘हमने क्यूरेटिव याचिकाओं एवं संबंधित दस्तावेजों को पढ़ा</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)</strong>। उच्चतम न्यायालय ने निर्भया सामूहिक दुराचार और हत्या मामले के दोषी विनय शर्मा और मुकेश कुमार की संशोधन (क्यूरेटिव) याचिकाएं मंगलवार को खारिज कर दी। दो अन्य दोषियों- पवन गुप्ता और अक्षय कुमार ने अभी तक क्यूरेटिव याचिकाएं नहीं दायर की है। न्यायमूर्ति एन वी रमन के चैम्बर में इन दोनों की याचिकाओं की सुनवाई होनी थी, जहां चंद मिनटों के भीतर ही याचिकाएं खारिज कर दी गईं। न्यायमूर्ति रमन की अध्यक्षता वाली इस पांच सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा, न्यायमूर्ति रोहिंगटन फली नरीमन, न्यायमूर्ति आर भानुमति और न्यायमूर्ति अशोक भूषण शामिल थे।</p>
<h3 style="text-align:left;">ब्लैक वारंट (डेथ वारंट) पर रोक संबंधी अनुरोध यह कहते हुए ठुकरा दिया कि याचिका में कोई मजबूत आधार नजर नहीं आता।</h3>
<p style="text-align:justify;">शीर्ष अदालत ने अपने संक्षिप्त आदेश में कहा, ‘क्यूरेटिव याचिकाओं की सुनवाई खुली अदालत में किए जाने की अर्जी खारिज की जाती है। न्यायालय ने पटियाला हाउस कोर्ट की ओर से गत सात जनवरी को जारी ब्लैक वारंट (डेथ वारंट) पर रोक संबंधी अनुरोध यह कहते हुए ठुकरा दिया कि याचिका में कोई मजबूत आधार नजर नहीं आता।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">पीठ ने कहा, ‘हमने क्यूरेटिव याचिकाओं एवं संबंधित दस्तावेजों को पढ़ा है।</li>
<li style="text-align:justify;">हमारा मानना है कि इन याचिकाओं में रुपा अशोक हुर्रा बनाम अशोक हुर्रा एवं अन्य</li>
<li>मामले में इसी अदालत के फैसले में निर्धारित मानदंडों के तहत निर्धारित सवाल नहीं उठाए गए हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इसलिए हम याचिकाएं खारिज करते हैं।</li>
<li>कोर्ट ने चारों दोषियों को 22 जनवरी को सुबह सात बजे तिहाड़ जेल में फांसी देने का आदेश दिया था।</li>
<li>फैसले के बाद सभी दोषियों ने उच्चतम न्यायालय के समक्ष क्यूरेटिव याचिका दायर करने की बात कही थी।</li>
<li> ‘डेथ वारंट जारी करने और तामील करने की अवधि के बीच दोषी सुधारात्मक याचिका दायर करना चाहते हैं तो कर सकते हैं।</li>
<li>निर्भया के साथ 16 दिसम्बर 2012 को सामूहिक दुराचार किया गया था।</li>
<li>उसे बुरी तरह से जख्मी करने के बाद सड़क पर फेंक दिया गया था।</li>
<li>बाद में उपचार के दौरान उसकी मौत हो गयी थी।</li>
<li>इस मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था, जिनमें एक नाबालिग आरोपी भी था।</li>
</ul>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/nirbhaya-scandal-convict-pawan-mukeshs-curative-petition-dismissed-way-clear-for-hanging/article-12477</link>
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                <pubDate>Tue, 14 Jan 2020 16:24:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजीव गांधी खेल स्टेडियम में नहीं है कुश्ती कोच की व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[इंडोर हाल में एक वर्ष से विकास कार्य भी बंद पड़ा हुआ है। आज तक बिजली की फि फिटिंग तक नहीं की गई है। अनिल पहलवान का तो यहांं तक कहना है कि इंडोर हाल के निर्माण कार्य में भी लाखों रूपए का घोटाला हुआ है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/there-is-no-system-of-wrestling-coach-at-rajiv-gandhi-sports-stadium/article-12086"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/petition.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">खिलाड़ी अपने स्तर पर कर रहे हैं अभ्यास (Rajiv Gandhi Sports Stadium)</h2>
<ul>
<li>
<h3> खिलाडियों ने प्रशासन से लगाई कुश्ती कोच की गुहार</h3>
</li>
<li>
<h3>खिलाडियों का कहना गांव में हैं हिंद केसरी व हरियाणा केसरी जैसे होनहार खिलाड़ी इसके बाद भी खेल विभाग नहीं दे रहा ध्यान</h3>
</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>पिल्लूखेड़ा (सच कहूं न्यूज चांद कुंडू)।</strong> गांगोली गांव के राजीव गांधी (Rajiv Gandhi Sports Stadium) खेल स्टेडियम में बने इंडोर हॉल में कुश्ती का कोच ना होने से खिलाड़ियों को कुश्ती के प्रशिक्षण प्राप्त करने में अनेकों परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। गांगोली गांव के कुश्ती संघ के जिला अध्यक्ष महेंद्र मलिक, अनिल पहलवान, रविंद्र देशवाल व गांव के सरपंच बलबीर देशवाल ने बताया कि गांव के खेल स्टेडियम में सैकड़ों कुश्ती के खिलाड़ी सुबह-शाम इंडोर हॉल में कुश्ती का अभ्यास करने के लिए आते हैं। गांगोली गांव का पहलवान अनूप लगातार कई वर्षों से हिंद केसरी व हरियाणा केसरी रहा है। इसके वाबजूद भी गांव के खेल स्टेडियम में कुश्ती का कोच ना होना सरकार की खेल नीति पर सवाल उठाना लाजमी बनता है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;"> जिला कुश्ती संघ के जिलाध्यक्ष महेंद्र मलिक व अनिल पहलवान ने बताया है।</li>
<li style="text-align:justify;"> इंडोर स्टेडियम में खिलाड़ियों के लिए बाथरूम तक की व्यवस्था नहीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">खिलाड़ियों के लिए कपड़े आदि बदलने के लिए चैंजिंग रूम तक नहीं बनाए गए हैं।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">इंडोर हाल में एक वर्ष से विकास कार्य भी बंद पड़ा हुआ है।</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;">आज तक बिजली की फि फिटिंग तक नहीं की गई है।</li>
<li style="text-align:justify;">अनिल पहलवान का तो यहांं तक कहना है ।</li>
<li style="text-align:justify;">इंडोर हाल के निर्माण कार्य में भी लाखों रूपए का घोटाला हुआ है।</li>
<li style="text-align:justify;">जिसकी जांच सरकार ने निष्पक्ष रूप से करवानी चाहिए।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong><em> -हलका विधायक सुभाष गांगोली व जिला कुश्ती संघ के जिलाअध्यक्ष महेंद्र सिंह मलिक ने सरकार से इंडोर हाल में कुश्ती के लिए कोच की मांग की है ताकि खिलाड़ी कुश्ती का प्रशिक्षण प्राप्त कर सके।</em></strong></p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या कहते हैं जिला खेल अधिकारी:</h3>
<p style="text-align:justify;">गांगोली गावं के राजीव गांधी खेल स्टेडियम में बने इंडोर हाल में कुश्ती कोच की मांग पर जिला खेल अधिकारी जे.सी बैनर्जी ने कहा कि खिलाडियों की हर समस्या का समाधान होगा। डिमांड के अनुसार कुश्ती कोच की नियुक्ति कर दी जाऐगी।</p>
<p> </p>
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/there-is-no-system-of-wrestling-coach-at-rajiv-gandhi-sports-stadium/article-12086</link>
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                <pubDate>Sun, 29 Dec 2019 17:54:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खट्टे के खिलाफ हरियाणा हाईकोर्ट में याचिका दायर</title>
                                    <description><![CDATA[सीबीआई के पूर्व अधिकारी एम नारायण के क्रॉस एग्जामिनेशन की मांग की | Dera Sacha Sauda चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। पत्रकार छत्रपति और रंजीत सिंह हत्याकांड के तीन आरोपियों (Dera Sacha Sauda) ने अब हाईकोर्ट में रविजन पेटिशन दायर कर खट्टा के पहले ब्यान रिकॉर्ड करने वाले आईओ एम नारायनन की क्रॉस-एग्जामिनेशन की मांग की है जस्टिस […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h1 style="text-align:center;">सीबीआई के पूर्व अधिकारी एम नारायण के क्रॉस एग्जामिनेशन की मांग की | Dera Sacha Sauda</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> पत्रकार छत्रपति और रंजीत सिंह हत्याकांड के तीन आरोपियों <strong>(Dera Sacha Sauda) </strong>ने अब हाईकोर्ट में रविजन पेटिशन दायर कर खट्टा के पहले ब्यान रिकॉर्ड करने वाले आईओ एम नारायनन की क्रॉस-एग्जामिनेशन की मांग की है जस्टिस दया चौधरी ने याचिका पर सुनवाई करते हुए सीबीआई को 18 जुलाई के लिए नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">आरोपी इन्दरसेन, कुलदीप सिंह और निर्मल सिंह ने सीनियर एडवोकेट जेएस बेदी के जरिये दायर याचिका में बताया है कि इस हत्याकांड के मामले में खट्टा ने 21 जून 2007 को इस मामले की जांच कर रहे सीबीआई के जांच अधिकारी एम नारायनन के सामने अपने बयान दर्ज करवाए थे उसके बाद फरवरी और मार्च 2012 में सीबीआई कोर्ट में भी उसने प्रॉसिक्यूशन के खिलाफ ही बयान दिए थे।</p>
<h2 style="text-align:center;">हाईकोर्ट ने नोटिस जारी कर सीबीआई से मांगा जवाब | Dera Sacha Sauda</h2>
<p style="text-align:justify;">अगस्त 2014 जांच अधिकारी को प्रॉसिक्यूशन के गवाह के तौर एग्जामिन किया गया था  लेकिन गत वर्ष 25 अगस्त के बाद छत्रपति और रंजीत हत्या मामले में दोबारा अपने बयान दर्ज किये जाने की मांग की थी। बाद में हाईकोर्ट के आदेशों पर उसे नए सिरे से बयान दर्ज करवाए जाने की इजाजत दी गई और उसने 25 मई को नए सिरे से अपने बयान दर्ज करवा दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">याचिकाकतार्ओं का कहना है कि नए सिरे से बयान दर्ज करवाए जाने के दौरान खट्टा ने कई नई बाते बताई हैं और याचिकाकतार्ओं के खिलाफ नए बयान दिए हैं  याचिकाकतार्ओं ने मांग की है कि जिस जांच अधिकारी ने पहले खट्टा के बयान दर्ज करवाए थे उन्हें उस जांच अधिकारी के क्रॉस-एग्जामिनेशन की इजाजत दी जाए जोकि इस मामले में न्याय प्रक्रिया के लिए बेहद ही जरुरी है सीबीआई कोर्ट ने उनकी इस मांग को खारिज कर दिया था लिहाजा अब इस मांग को लेकर तीनों आरोपियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की है हाई कोर्ट ने याचिका पर सीबीआई को नोटिस जारी कर जवाब मांग लिया है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/petition-filed-against-khatta-singh-in-hc/article-4866</link>
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                <pubDate>Mon, 16 Jul 2018 15:06:42 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खट्टे को देना होगा हर सवाल का जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने स्वीकार की याचिका चंडीगढ़ (अशवनी चावला)। बार-बार अपने बयानों से पलटने वाले खट्टा को अब उनके हर सवाल का जवाब देना होगा, जो सवालों से वह बचता आ रहा था। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने उस याचिका को स्वीकार कर लिया गया है, जिसके अंतर्गत खट्टा से क्रॉस ऐग्जामीनेशन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/now-khatta-have-to-reply-for-everything/article-3786"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/high-court1.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने स्वीकार की याचिका</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अशवनी चावला)। </strong>बार-बार अपने बयानों से पलटने वाले खट्टा को अब उनके हर सवाल का जवाब देना होगा, जो सवालों से वह बचता आ रहा था। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट ने उस याचिका को स्वीकार कर लिया गया है, जिसके अंतर्गत खट्टा से क्रॉस ऐग्जामीनेशन दौरान हर उस सवाल को पूछने की मांग की गई थी, जिसे निचली अदालत ने पूछने से इन्कार कर दिया था। पंजाब एंड हरियाणा हाई कोर्ट की तरफ से स्पष्ट कर दिया गया है कि याचिका में जिक्र किये गए सवालों को पूछने की स्वीकृति बचाव पक्ष को दी जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">बचाव पक्ष की तरफ से खट्टा से वर्ष 2015 में दिए गए एक बयान संबंधी सवाल पूछा जाना है। डेरा सच्चा सौदा की तरफ से हाईकोर्ट में पेश हुए वकीलों ने बताया कि खट्टा की तरफ से वर्ष 2015 में एक बयान दिया गया था, जिसे ले कर वह निचली अदालत में क्रॉस ऐग्जामीनेशन दौरान सवाल पूछना चाहते थे परंतु निचली अदालत द्वारा इस संबंधी स्वीकृति नहीं दी गई थी। जिस कारण ही उनको हाई कोर्ट में आना पड़ा था। उन्होंने बताया कि उनकी याचिका को माननीय हाई कोर्ट ने स्वीकार कर लिया गया है। उन्होंने बताया कि अब आगामी पेशी दौरान खट्टा को इन सवालों का भी जवाब देने होंगे।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 25 May 2018 10:36:48 +0530</pubDate>
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                <title>एससी एसटी मामले में पुनर्विचार याचिका दायर करेगी सरकार : प्रसाद</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली (वार्ता)। अनुसूचित जाति / जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय के हाल के फैसले से पिछले एक सप्ताह से उठे विवाद के बीच विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज स्पष्ट किया कि सरकार शीर्ष अदालत के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। श्री प्रसाद ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/sc-st-case-reconsideration-petition-government-parshad/article-3671"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/ravi-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (वार्ता)। </strong>अनुसूचित जाति / जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के संदर्भ में उच्चतम न्यायालय के हाल के फैसले से पिछले एक सप्ताह से उठे विवाद के बीच विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने आज स्पष्ट किया कि सरकार शीर्ष अदालत के निर्णय के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगी। श्री प्रसाद ने केंद्रीय मंत्रिमंडल की बुधवार को हुई बैठक में लिये गये फैसलों के बारे में जानकारी देने के लिए आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह बात कही।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने पत्रकारों के सवालों के जवाब में बताया कि यह फैसला काफी दुर्भाग्यपूर्ण है और सरकार ने इसका संज्ञान लिया है। विधि एवं न्याय मंत्रालय से शीर्ष अदालत के आदेश का अध्ययन कर इसके खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर करने के लिए कहा गया है। गौरतलब है कि उच्चतम न्यायालय ने पिछले दिनों यह आदेश दिया था कि अनुसूचित जाति / जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के क्रियान्वयन के मामले में आरोपी को तुरंत सीधे गिरफ्तार करने और आपराधिक मामले दर्ज करने की बजाय पहले मामले की प्राथमिक जाँच की जाये और सक्षम अधिकारी की अनुमति से ही गिरफ्तारी हो।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले बुधवार को लोक जनशक्ति पार्टी के प्रमुख एवं खाद्य आपूर्ति मंत्री राम विलास पासवान और भारतीय रिपब्लिकन पार्टी (ए) के प्रमुख एवं सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्य मंत्री रामदास आठवले ने भी सरकार की ओर से एक संवाददाता सम्मेलन का आयोजन कर कहा था कि कानून मंत्रालय न्यायालय के फैसले का अध्ययन करा रहा है और जल्दी ही पुनर्विचार याचिका दाखिल की जाएगी। बुधवार को ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अनुसूचित जाति एवं जनजाति से जुड़े मंत्रियों और सांसदों के एक प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की थी। प्रतिनिधििमंडल में श्री पासवान और श्री आठवले के साथ ही केन्द्रीय मंत्री थावर चंद गहलोत, जुएल उरांव, अर्जुन राम मेघवाल, विजय टमटा, विजय सांपला तथा कई अन्य सांसद शामिल थे।  विपक्षी नेताओं ने भी बुधवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से मिलकर इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप करने की माँग की थी।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 29 Mar 2018 03:40:19 +0530</pubDate>
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                <title>जारवाल की याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली (वार्ता)। दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ कथित बदसलूकी मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक प्रकाश जारवाल की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर सात मार्च तक जवाब देने को कहा है। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने आज प्रकाश जारवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/jarwal-petition-delhi-police-notice/article-3567"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-03/parkash.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (वार्ता)। </strong>दिल्ली उच्च न्यायालय ने मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ कथित बदसलूकी मामले में गिरफ्तार आम आदमी पार्टी (आप) के विधायक प्रकाश जारवाल की जमानत याचिका पर दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी कर सात मार्च तक जवाब देने को कहा है। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता ने आज प्रकाश जारवाल की जमानत याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली पुलिस को निर्देश दिया कि वह सात मार्च तक इस घटना की स्थिति रिपोर्ट पेश करे।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पहले तीस हजारी अदालत से प्रकाश जारवाल की जमानत याचिका खारिज हो चुकी है। देवली से विधायक प्रकाश जारवाल और ओखला से विधायक अमानतुल्ला खां को मुख्य सचिव के साथ कथित बदसलूकी मामले में दिल्ली पुलिस ने विभिन्न धाराओं में प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार किया। दोनों विधायक 14 दिन की न्यायिक हिरासत में हैं। जरवाल को 20 फरवरी को गिरफ्तार किया गया था। तीस हजारी अदालत ने प्रकाश जारवाल की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था कि 56 वर्ष के नौकरशाह के “ सम्मान का खुल्लम खुल्ला उल्लंघन हुआ है।’’</p>
<p style="text-align:justify;">प्रकाश जारवाल की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता रेबेका ए जान न्यायालय में हाजिर हुई। अधिवक्ता की दलील थी कि इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है इसलिए आरोपी को हिरासत में रखने की और कोई जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि घटना के अगले दिन अपराह्न एक बजे इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गयी। यह मामला 19 फरवरी की मध्य रात्रि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के सरकारी आवास का है।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिवक्ता ने कहा कि घटना के काफी देर बाद प्राथमिकी दर्ज कराने से स्पष्ट नजर आता है कि इसे बाद में गढ़ा गया और यह झूठ से प्रेरित है। उन्होंने यह भी कहा कि दिल्ली पुलिस ने पुराने मामलों में शामिल होने की बात कहकर विधायक की गलत छवि पेश की। यह मामले राजनीति से जुड़े हुए हैं। इनको या तो निरस्त कर दिया गया है अथवा ये अभी तक साबित नहीं किये जा सके हैं। विधायक की जमानत का अनुरोध करते हुए अधिवक्ता ने कहा कि वह विधायक हैं और कोई कट्टर अपराधी नहीं हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Thu, 01 Mar 2018 02:10:06 +0530</pubDate>
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                <title>तीन तलाक के खिलाफ न्यायालय का नई याचिका पर सुनवाई से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मुसलमानों में प्रचलित ‘तीन तलाक’, ‘निकाह हलाला’ और बहु विवाह जैसी प्रथाओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक नई याचिका पर सुनवाई से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह मुद्दा पहले से ही विचाराधीन है। अदालत ने हालांकि कहा कि लंबित याचिका में आने वाला फैसला […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> सुप्रीम कोर्ट ने मुसलमानों में प्रचलित ‘तीन तलाक’, ‘निकाह हलाला’ और बहु विवाह जैसी प्रथाओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली एक नई याचिका पर सुनवाई से यह कहते हुए इनकार कर दिया कि यह मुद्दा पहले से ही विचाराधीन है। अदालत ने हालांकि कहा कि लंबित याचिका में आने वाला फैसला इस नई याचिका पर भी लागू होगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;"> लंबित याचिकाओं में आने वाला फैसला मौजूदा याचिका पर भी लागू</h2>
<p style="text-align:justify;">प्रधान न्यायाधीश जे एस खेहर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड की पीठ ने कहा कि हमारा मानना है कि इस याचिका में उठाए गए मुद्दे पहले ही इस अदालत के विचाराधीन हैं। ऐसे में समान मुद्दे एक अन्य याचिका पर सुनवाई करना आवश्यक नहीं है। गुरुदास मित्रा द्वारा दायर याचिका का निस्तारण करते हुए पीठ ने कहा कि यह कहने की आवश्यकता नहीं है कि लंबित याचिकाओं में आने वाला फैसला मौजूदा याचिका पर भी लागू होगा।</p>
<p style="text-align:justify;"><em>पांच न्यायाधीशों की संवैधानिक पीठ ने छह दिन की लगातार सुनवाई के बाद तीन तलाक की प्रथा की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।</em></p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/national/court-rejects-new-plea-hearing/article-3116</link>
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                <pubDate>Sun, 13 Aug 2017 10:00:56 +0530</pubDate>
                
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