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                <title>सीएम अमरिंदर ने शिअद को केंद्र से गठबंधन तोड़ने की चुनौती दी</title>
                                    <description><![CDATA[कैप्टन अमरिंदर ने जारी बयान में कहा कि शिअद को अपनी गंभीरता साबित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होना होगा क्योंकि कानून को संसद के दोनों सदनों में पारित कराने में शिअद शामिल रहा है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/cm-amarinder-challenges-siyad-to-break-alliance-with-center/article-12646"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/cm-amarinder-captain.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">सीएए कानून को पास कराने में शामिल थी शिअद (CM Amarinder Captain)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)</strong>। पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने शिरोमणि अकाली दल (शिअद) के इस दावे को हास्यास्पद करार दिया कि नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) पर मतभेदों के कारण वह दिल्ली विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रही और चुनौती दी कि पार्टी केंद्र से संबंध तोड़े। कैप्टन अमरिंदर ने जारी बयान में कहा कि शिअद को अपनी गंभीरता साबित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन से अलग होना होगा क्योंकि कानून को संसद के दोनों सदनों में पारित कराने में शिअद शामिल रहा है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">शिअद को सीएए मुस्लिम विरोाी लगता है ते राज्यसभा और लोकसभा में पार्टी ने समर्थन क्यों किया?</h3>
<p style="text-align:justify;">कैप्टन ने अकाली नेताओं से सवाल किया,‘क्यों नहीं केंद्र में मंत्री पद छोड़ कर आप देशवासियों को दिखा देते कि आप सचमुच विभाजनकारी और विनाशकारी सीएए के खिलाफ हैं? मुख्यमंत्री ने कहा कि यदि शिअद को सीएए मुस्लिम विरोाी लगता है</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">ते राज्यसभा और लोकसभा में पार्टी ने समर्थन क्यों किया?</li>
<li style="text-align:justify;">दिल्ली से पहले शिअद हरियाणा विधानसभा चुनाव में भी भाजपा से अलग चुनाव लड़ा था।</li>
<li style="text-align:justify;">इसलिए सीएए पर मतभेदों को कारण बताना स्वीकार्य नहीं है ।</li>
<li style="text-align:justify;">क्योंकि सच्चाई यही है कि शिअद ने महसूस कर लिया है कि दिल्ली में उनका कोई जनाधार नहीं है ।</li>
<li style="text-align:justify;">पार्टी एक सीट भी नहीं जीत सकती।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">या फिर भाजपा उन्हें मांगी गई संख्या की सीटें देने को तैयार नहीं है जिससे उन्होंने यह निर्णय किया। शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल और हरसिमरत कौर बादल पर सीएए को लेकर विरोधाभासी बयान देने का आरोप लगाते हुए कैप्टन अमरिंदर ने कहा कि अकालियों का राष्ट्रीय महत्व के बड़े मुद्दे पर सैद्धांतिक रुख नहीं है।</p>
<p> </p>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2020 16:10:42 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस ने स्वीकारी जेटली की चुनौती, कहा-राफेल पर बहस को तैयार</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। राफेल सौदे को लेकर बार-बार संसद की कार्यवाही में व्यवधान डाल रही कांग्रेस पार्टी अब इस मुद्दे पर बहस के लिए के लिए तैयार हो गयी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को लोक सभा में इस सौदे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति बनाने की मांग और नारेबाजी कर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/congress-challenges-jaitley-challenge-says-rafael/article-7154"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-01/77.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> राफेल सौदे को लेकर बार-बार संसद की कार्यवाही में व्यवधान डाल रही कांग्रेस पार्टी अब इस मुद्दे पर बहस के लिए के लिए तैयार हो गयी है। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सोमवार को लोक सभा में इस सौदे की जांच के लिए संयुक्त संसदीय समिति बनाने की मांग और नारेबाजी कर रहे कांग्रेसी नेताओं को इस मुद्दे पर बहस की चुनौती दी। जेटली ने कहा कि सरकार तुरंत ही इस मुद्दे पर बहस करने और जवाब देने को तैयार है। इसके जवाब में कांग्रेस नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे पर बहस के लिए तैयार है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">वित्त मंत्री ने कहा, राफेल मुद्दे पर बहस से भाग रही है कांग्रेस पार्टी</h2>
<p style="text-align:justify;">लोक सभा में भोजनावकाश के बाद जैसे ही सदन की कार्यवाही अनुदान की पूरक मांगों पर चर्चा के लिए शुरु हुई तभी कांग्रेस नेता खड़गे ने खड़े होकर राफेल सौदे की जांच के लिए जेपीसी गठित करने की मांग दोहरा दी। इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि खड़गे को इस मुद्दे पर तत्काल ही चर्चा शुरु कर देनी चाहिए। सरकार जवाब देने को तैयार है। जेटली ने कहा कि खड़गे चर्चा से भाग रहे हैं। उन्होंने कहा कि राफेल मुद्दे पर चर्चा होनी चाहिए। यह चर्चा होने पर वह साबित कर देंगे कि कांग्रेस पार्टी झूठ फैला रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे पूर्व शून्यकाल में भी कांग्रेस ने राफेल सौदे की जांच के लिए जेपीसी गठित करने की मांग करते हुए सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। कांग्रेस सदस्य तख्तियां हाथ में लिये सभापति के आसान के निकट खड़े होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे। इसके जवाब में भाजपा के सदस्य भी सत्ताधारी खेमे में बैठे गांधी-परिवार के खिलाफ नारे लगा रहे थे। शून्य काल शुरु होते ही खड़गे ने राफेल मामला उठाया और इसमें घोटाले का आरोप लगाते हुए सवाल किया कि सरकार आखिरकार विमानों की कीमत का खुलासा करने से क्यों बच रही है। खड़गे ने कहा कि राफेल में सबसे बड़ा घोटाला हुआ है। वे तीन हफ्ते से इसे उठाने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">खड़गे के इस आरोप के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कांग्रेस को यह समझना चाहिए कि सरासर झूठ को बार-बार बोलने पर सच नहीं बन सकता। सरकार इस मामले पर बहस के लिए तैयार है तो कांग्रेस पार्टी बहस से क्यों भाग रही है। इस सवाल का जवाब कांग्रेस के नेताओं को देना चाहिए।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jan 2019 10:00:27 +0530</pubDate>
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                <title>चीनी जल वर्चस्व एवं जल हथियार की चुनौती एवं समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय सीमा में चीन द्वारा लगातार घुसपैठ की खबरों के बीच तिब्बत के रास्ते भारत में बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी रोक दिया गया है। इसके पीछे चीन का हाथ होने की बात सामने आई है। पानी रूकने की वजह से अरूणाचल प्रदेश के तूतिंग, यिंगकियोंग और पासीघाट इलाके में सूखे की स्थिति उत्पन्न […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/challenges-and-solutions-of-chinese-water-supremacy-and-water-weapons/article-6501"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-10/artical.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">भारतीय सीमा में चीन द्वारा लगातार घुसपैठ की खबरों के बीच तिब्बत के रास्ते भारत में बहने वाली ब्रह्मपुत्र नदी का पानी रोक दिया गया है। इसके पीछे चीन का हाथ होने की बात सामने आई है। पानी रूकने की वजह से अरूणाचल प्रदेश के तूतिंग, यिंगकियोंग और पासीघाट इलाके में सूखे की स्थिति उत्पन्न हो गई है। साथ ही अरूणाचल के जंगल और जलीय पर्यावरण के लिए गंभीर खतरा पैदा हो गया है। गौरतलब है कि चीन ने तिब्बत में बहने वाली यारलुंग सांगपो नदी का पानी रोक दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ये नदी जब अरुणाचलप्रदेश में प्रवेश करती है, तो इसे सियांग के नाम से पुकारा जाता है। आगे चलकर असम में ये ब्रह्यपुत्र के नाम से पहचानी जाती है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार इस नदी के मिलिन सेक्शन में भारी मात्रा में भूस्खलन हुआ है, जिसकी वजह से ब्रह्यपुत्र की मुख्यधारा प्रभावित हुई है। लेकिन कूटनीतिक विशेषज्ञ इसे प्राकृतिक घटना नहीं मानते,अपितु यह चीन की जल कूटनीति का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि चीन ने कृत्रिम भूस्खलन कर ब्रह्यपुत्र नदी के बीच में एक झील का निर्माण कर दिया है, जिसमें पानी के स्तर में 40 मीटर की वृद्धि हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह झील भी अब भारत के लिए खतरा बनी हुई है। जब इस ब्लॉकेज को साफ किया जाएगा तो नदी के जलस्तर में अप्रत्याशित वृद्धि से तबाही भी आ सकती है। जून 2000 में कुछ ऐसा ही हुआ था,जब ब्रह्यपुत्र नदी में चीन की तरफ से अचानक पानी छोड़ने की वजह से अरुणाचल प्रदेश में काफी नुकसान हुआ था।<br />
वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में पानी एक महत्वपूर्ण संसाधन हो गया है, और यह संघर्ष का कारण बन सकता है। चीन ने जलसंसाधनों को भी आक्रामक विस्तारवाद का न केवल हिस्सा बना दिया है, अपितु जल संसाधनों को भी हथियार के रुप में प्रयोग करने की तैयारी की है। इस तरह अब ‘जल संसाधन ‘का ‘जल हथियार’ के रुप में प्रयोग करने की चीनी मंशा की संभावनाएँ व्यक्त की जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समय चीन तिब्बत में विशाल जल संसाधन पर कब्जा किये हुए है और भारत में बहने वाली बहने वाली नदियों का स्रोत भी वही जल संसाधन है। भारत के उत्तर पूर्व में बहने वाली ब्रह्मपुत्र जलशक्ति का एक बड़ा स्रोत है और पनबिजली पैदा करने के लिए तथा अपने शुष्क उत्तरी क्षेत्र की तरफ बहाव मोड़ने के लिए चीन की इस पर नजर है। इस हालात ने भारत में चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि भारत एक निम्न नदी तटीय देश है। इसके अलावा,पर्यावरण क्षरण तथा पानी की घटती मात्रा भारतीय नीति निमार्ताओं के समक्ष चुनौती है। बता दें कि साल की शुरूआत में भी सियांग और ब्रह्यपुत्र नदी में चीन की तरफ से भारी गंदगी और बाँधों के मलबों को फैला दिया गया था।</p>
<p style="text-align:justify;">बाद में चीन ने इसका कारण भी यारलुंग सांगपो में आए भूकंप के मलबे को बताया था। भारतीय देहरादून वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों का मानना है कि चीन के पास पानी की इतनी शक्ति है कि अगर भारत ने उसपर नजर नहीं रखी तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है। देहरादून वाडिया संस्थान के वैज्ञानिक संतोष राय के अनुसार अगर चीन घाघरा,गंडक और ब्रह्यपुत्र जैसी नदियों का पानी रोककर अचानक छोड़ता है भारत के लिए हालत बेहद खतरनाक हो जाएंगे। इस संदर्भ में हाल ही में भारत और चीन के बीच यारलुंग सांगपो नदी के पानी का डेटा साझा करने का करार हुआ था। लेकिन चीन इस समझौते का सही ढंग से पालन करता हुआ नहीं दिख रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन जल का प्रयोग संसाधन के रुप में तो कर ही रहा है, वहीं पानी का प्रयोग जल हथियार के रुप में भी कर सकता है। वैज्ञानिकों ने कई बार ब्रह्मपुत्र के जल बहाव में कई वर्ष पुराने पानी को पाया है, जो बांध का जमा हुआ पानी होता है। इससे चीन के खतरनाक इरादों को समझा जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार चीन पानी रोककर छोड़ता है तो असम बंगाल बांगलादेश और मेघालय को डुबा सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">पानी पर जोर देने वाले देश चीन के पास प्रति व्यक्ति पानी की हिस्सेदारी केवल 2093 क्यूबिक मीटर है तथा 2013 में चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने घोषणा कर दी कि विगत 60 सालों में 23,000 नदियाँ देश से लुप्त हो चुकी हैं। चूँकि ज्यादातर जल संसाधनों पर चीन का कब्जा है और भारत निम्न नदी तटीय देश है। भारत और चीन दोनों की बढ़ती जनसंख्या के लिए संसाधनों एवं बुनियादी वस्तुओं की बढ़ती माँग से संभावना व्यक्त की जाती है कि पानी की माँग भी बढ़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन का किसी भी जल समझौते में प्रवेश करने से लगातार इंकार ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध को लेकर अहम टकराहट को बल दिया है। दुनिया के कुछ शुष्क क्षेत्रों के साथ एक आर्थिक शक्तिगृह के रुप में चीन भी एक प्यासा देश है। 1.3 अरब जनसंख्या के साथ चीन दुनिया का सबसे आबादी वाला देश है। चीन में अप्रत्याशित रुप में प्रदूषित नदियों की संख्या में वृद्धि हो रही है, ऐसे में चीन के लिए पानी बेहद महत्वपूर्ण संसाधन है। तिब्बत का क्षेत्रफल लगभग 470,000 वर्ग किमी है और इस पर चीन ने 1950 में ही कब्जा जमा लिया था।</p>
<p style="text-align:justify;">तिब्बत का यह पठार सही मायने में पानी का विशाल भंडार है और उपमहाद्वीप में ज्यादातर नदियों का उद्गमस्थल भी है। विशेषज्ञों के अनुसार चीन के पास जितना पानी है, उससे 40,000 गुना पानी तिब्बत के पास है। ज्यादातर नदियों का उद्गम तिब्बत से होने के कारण इस पर चीन का एकाधिकार है, ये नदियाँ निम्न तटीय देशों से होकर बहती हैं और आने वाले वर्षों में भारत ,बांग्लादेश तथा म्यांमार जैसे देशों की कठिनाइयाँ बढ़ सकती हैं। चीन ने दुर्भाग्यवश अपने इन पड़ोसियों की चिंताओं की अवहेलना की है। भारत तिब्बत से निकलने वाली नदियों पर बहुत हद तक निर्भर है, जिनका कुल बहाव प्रतिवर्ष 627 क्यूबिक किलोमीटर है और जो भारत के कुल नदी जल संसाधन का 34 प्रतिशत है।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>राहुल लाल</strong></p>
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                <pubDate>Mon, 29 Oct 2018 08:44:42 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>स्वतंत्रता बाद की उपलब्धियां और चुनौतियां</title>
                                    <description><![CDATA[आजादी के सात दशक बाद भी यह सवाल जेरेबहस है कि आजादी की जंग के दौरान जो सपने बुने-गढ़े गए थे क्या वे पूरे हुए हैं? क्या समाज के अंतिम पांत का अंतिम व्यक्ति आजादी के लक्ष्य को हासिल कर लिया है? दो राय नहीं कि आजादी के बाद इन सात दशकों में देश ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/later-achievements-and-challenges-of-independence/article-5394"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/day.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">आजादी के सात दशक बाद भी यह सवाल जेरेबहस है कि आजादी की जंग के दौरान जो सपने बुने-गढ़े गए थे क्या वे पूरे हुए हैं? क्या समाज के अंतिम पांत का अंतिम व्यक्ति आजादी के लक्ष्य को हासिल कर लिया है? दो राय नहीं कि आजादी के बाद इन सात दशकों में देश ने उल्लेखनीय प्रगति की है और वैश्विक जगत में भारत का परचम लहराया है। पर गौर करने वाली बात यह है कि देश आज भी गंभीर सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों से उबर नहीं पाया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में आवश्यक हो जाता है कि इन सात दशकों की उपलब्ध्यिों और चुनौतियों का मूल्यांकन हो। अगर उपलब्धियों की बात करें तो नि:संदेह देश प्रगति की राह पर अग्रसर है। देश की अधिकांश आबादी जो कृषि कार्य से जुड़ी है उनकी जीवन शैली में बदलाव हुआ है और किसानों की हालत सुधरी है। फसलों की उत्पादकता बढ़ी है और राष्ट्रीय आय का लगभग 28 प्रतिशत भाग कृषि आय से प्राप्त हो रहा है। कृषि कार्य हेतु भूमि उपयोग बढ़कर 43.05 प्रतिशत हो गया है। सरकारी कामकाज में पारदर्शिता और बिचैलियों की भूमिका समाप्त होने से किसानों को उनके उत्पादों की अच्छी आय मिलने लगी है और उत्तम कृषि उत्पादन ने अर्थव्यवस्था और उद्योग-धंधों का विस्तार किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जहां लघु एवं कुटीर उद्योगों ने हर हाथ को काम दिया है वहीं बड़े पैमाने के उद्योगों ने रोजगार सृजन के साथ तीव्र औद्योगीकरण की नींव को मजबूत की है। औद्योगीकरण और वैश्वीकरण ने भारतीय शिक्षा, विज्ञान व संचार के क्षेत्र में क्रांति ला दी है। आज देश में कई विश्वस्तरीय विश्वविद्यालय और तकनीकी संस्थान हैं जिनकी बदौलत भारतीय छात्र देश-दुनिया में रोज नए-नए इनोवेशन कर रहे हैं। विज्ञान के क्षेत्र में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो ने कीर्तिमान रच दिया है। अब इसरो के जरिए स्वदेशी उपग्रहों के साथ कई विदेशी उपग्रह एक साथ भेजे जा रहे हैं। इन सात दशकों में देश में सामाजिक सुरक्षा व सेवाओं का भी विस्तार हुआ है।</p>
<p style="text-align:justify;">सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए आज देश में पोषण सुरक्षा की देखभाल राष्ट्रीय तैयार मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम, समन्वित बाल विकास योजना, किशोरी शक्ति योजना, किशोर लड़कियों के लिए पोषण कार्यक्रम और प्रधानमंत्री ग्रामोदय योजना चलायी जा रही है। राष्ट्रीय तैयार मध्यान्ह भोजन कार्यक्रम लगभग पूरे भारत में चल रहा है। समन्वित बाल विकास योजना का विस्तार भी चरणबद्ध ढंग से हो रहा है। 11 से 18 वर्ष तक की उम्र की लड़कियों के पोषण एवं स्वास्थ्य संबंधी विकास के लिए सरकार ने किशोरी शक्ति विकास योजना को हर जगह लागू किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">एक अरसे से श्रम आंदोलन के तहत सामाजिक सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए राष्ट्रीय रोजगार गारंटी कार्यक्रम लागू करने की मांग की जाती रही जिसे सरकार ने 2005 के मध्य में लागू कर दिया। इस अधिनियम के तहत कोई भी वयस्क व्यक्ति जो न्यूनतम मजदूरी पर आकस्मिक श्रम करने के लिए इच्छुक है वह 15 दिनों के अंदर स्थानीय जनकार्य में रोजगार पाने के लिए पात्र होगा। इसके अंतर्गत लोगों को वर्ष में उसके निवास से एक किमी के भीतर 100 दिनों का काम दिए जाने का प्रावधान लागू किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">राज्यों के अंतरगत लक्षित जन वितरण प्रणाली के तहत पहचान किए गए गरीबी रेखा से नीचे के परिवारों में से, अत्यंत ही गरीब एक करोड़ परिवारों की पहचान करने का कार्य अंत्योदय योजना के तहत किया गया है। इन परिवारों को 2 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं और 3 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से चावल मुहैया कराया जाता है। सामाजिक सुरक्षा के तहत रोजगार सृजन और गरीबी उन्मूलन रणनीति के तहत सरकार द्वारा स्वरोजगार योजना और दिहाड़ी रोजगार योजना चलाया जा रहा है। खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग को संशोधित कर लघु एवं ग्रामीण उद्योगों के जरिए ज्यादा से ज्यादा रोजगार सृजन करने के लिए सुनिश्चित किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">असंगठित क्षेत्र को सामाजिक सुरक्षा से लैस करने के लिए राश्ट्रीय उद्यम आयोग की स्थापना एक पारदर्शी निकाय के रुप में की गयी है। लेकिन एक सच्चाई यह भी है कि आज भी देश जातिवाद, भाषावाद, क्षेत्रवाद, नक्सलवाद, अलगाववाद, आतंकवाद, भ्रष्टाचार, गरीबी, भूखमरी, बेरोजगारी और लैंगिक असमानता से मुक्त नहीं हो पाया है। देश की एक बड़ी आबादी आज भी जीवन की मूलभूत सुविधाओं मसलन रोटी, कपड़ा, मकान, शिक्षा व स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित है। सरकार के ही आंकड़े बताते हैं कि देश में 27 करोड़ लोग गरीब हैं। 68 करोड़ लोग ऐसे हैं जो बुनियादी सुविधाओं से महरुम हैं। आर्थिक विषमता की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय फैमिली हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में कहा गया है कि अफ्रीका की तुलना में भारत में दोगुने बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। कुपोषण के शिकार पांच साल से कम उम्र के चार करोड़ बच्चों का शारीरिक विकास नहीं हो पाया है। शिशु मृत्यु दर की हालात और भयावह है। 2015 में देश में पैदा होने वाले प्रति हजार बच्चों पर 37 बच्चों की मृत्यु हुई। बच्चे किस्म-किस्म की गंभीर बीमारियों की चपेट में हैं। मेटरनल मॉर्टेलिटिी रेशियो (एमएमआर) और इंटरनेशनल प्रेग्नेंसी एडवाइजरी सर्विसेज की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में असुरक्षित गर्भपात से हर दो घंटे में एक स्त्री मर रही है। गांवों में डॉक्टरों की भारी कमी है। 90 फीसद गर्भवती महिलाएं स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए झोलाछाप डॉक्टरों पर निर्भर हैं। दूसरी ओर कड़े कानून के बाद भी महिलाओं पर अत्याचार थमने का नाम नहीं ले रहा।</p>
<p style="text-align:justify;">लैंगिंक असमानता जस की तस बनी हुई है। संयुक्त राष्ट्र की ह्यद वर्ल्डस वीमेन 2015 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में पांच साल से कम उम्र की लड़कियों की मौत इसी उम्र के लड़कों की तुलना में ज्यादा होती है। लेकिन अगर श्रम बल में महिलाओं की संख्या को पुरुषों की संख्या के समान की जाए तो भारत की जीडीपी 27 फीसद तक बढ़ सकती है। सख्त कानूनों के बावजूद भी इस समय देश में सवा करोड़ से अधिक बाल श्रमिक मौजूद हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग स्वयं स्वीकार चुका है कि उसके पास बालश्रम के हजारों मामले दर्ज हैं। रोजगार के मामले में भी स्थिति संतोषजनक नहीं कही जा सकती। श्रम मंत्रालय की श्रम ब्यूरो द्वारा जारी सर्वेक्षण के मुताबिक भारत में बेरोजगारी की दर में लगातार वृद्धि हो रही है। 2016 में बेरोजगारों की संख्या 1.77 करोड़ थी।</p>
<p style="text-align:justify;">इस साल यह संख्या 1.78 करोड़ और 2018 में 1.8 करोड़ हो सकती है। यह राहतकारी है कि भारत सरकार ने बेरोजगारों को रोजगार प्रदान करने के लिए स्किल इंडिया के जरिए सन 2022 तक 40 करोड़ लोगों को प्रशिक्षित करने का लक्ष्य रखा है। शिक्षा की बात करें तो शिक्षा का अधिकार कानून तथा सर्व शिक्षा अभियान जैसी योजनाओं के बावजूद भी लाखों बच्चे स्कूली शिक्षा की परिधि से बाहर हैं। कुल सरकारी खर्च का 20 फीसद हिस्सा शिक्षा पर खर्च होना चाहिए। लेकिन इस मद में 4 फीसद तक भी ही खर्च नहीं हो पा रहा। न्यायिक मोर्चे पर भी अपेक्षित सफलता हासिल नहीं हो रही है। शीध्र व सस्ता न्याय की चुनौती जस की तस बनी हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">सरकारी आंकड़ों के मुताबिक 31 दिसंबर 2015 तक सर्वोच्च न्यायालय एवं उच्च न्यायालयों सहित देश की सभी अदालतों में 2.64 करोड़ मुकदमें लंबित थे। मुकदमों के निस्तारण में दशकों का वक्त लग रहा है। पर्यावरण के मोर्चे पर भी हालात संतोषजनक नहीं हैं। दुनिया के सर्वाधिक प्रदूषित शहरों की सूची में देश की राजधानी दिल्ली शीर्ष पर है। देश में सालाना 12 लाख से अधिक लोगों की मौत प्रदूषण से होती है। 2015 में वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारत की हिस्सेदारी 6.3 फीसद रही।</p>
<p style="text-align:justify;">देश में सड़क हादसे से हर वर्ष लाखों लोग काल के मुंह में जा रहे हैं। एक अध्ययन के मुताबिक देश में सड़क नियम का पालन न होने से पिछले एक दशक में 13 लाख से अधिक लोग सड़क हादसों में मारे गए हैं। दुर्भाग्यपूर्ण यह कि लोकतंत्र का मंदिर संसद भी अपने उत्तरदायित्वों के प्रति गंभीर नहीं है। संसद में कामकाज का समय घटता जा रहा है और गैरजरुरी मसलों पर समय जाया किया जा रहा है। देश के राजनेताओं और जनमानस दोनों को समझना होगा कि देश महान व समृद्ध तभी बनेगा जब आजादी के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।</p>
<p> </p>
<p><strong>अरविंद जयतिलक</strong></p>
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<p> </p>
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                <pubDate>Thu, 16 Aug 2018 11:56:55 +0530</pubDate>
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                <title>चुनौतियों से समझौता नहीं, बल्कि सामना करें</title>
                                    <description><![CDATA[क्या आपको दशरथ मांझी याद है? वही दशरथ मांझी जिसने 22 वर्षों तक कठोर परिश्रम करते हुए छैनी-हथौड़े से 360 फुट लम्बे, 30 फुट चौड़े और 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काटकर सड़क बना दी। जिसके प्रयासों से अतरी और वजीरगंज की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर रह गई। हालांकि, यह घटना लगभग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/do-not-deal-with-challenges-but-face-it/article-4442"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/article.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">क्या आपको दशरथ मांझी याद है? वही दशरथ मांझी जिसने 22 वर्षों तक कठोर परिश्रम करते हुए छैनी-हथौड़े से 360 फुट लम्बे, 30 फुट चौड़े और 25 फुट ऊंचे पहाड़ को काटकर सड़क बना दी। जिसके प्रयासों से अतरी और वजीरगंज की दूरी 55 किलोमीटर से घटकर 15 किलोमीटर रह गई। हालांकि, यह घटना लगभग 36 वर्ष पुरानी है, लेकिन हाल ही में ओड़िशा के एक व्यक्ति ने ऐसा ही वाकया दोहराया। बैतरणी गांव के एक ओर गोइनसिका नाम का पहाड़ है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके दूसरी ओर नहर बहती है, लेकिन पहाड़ बीच में होने के कारण दइतरी और उसके आस-पास के खेतों में पानी पहुंचा पाना बहुत मुश्किल था। पानी के अभाव में दइतरी को मेहनत का आशातीत लाभ नहीं मिल पा रहा था।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मुसीबत से छुटकारा पाने के लिए दइतरी ने पहाड़ के बीच से रास्ता निकालने की ठानी। उसके पास साधन-संसाधन नहीं थे, लेकिन फिर भी उसने हार नहीं मानी। अपने भाईयों की मदद से उसने पहाड़ को चीरते हुए रास्ता निकालने का प्रण किया और जुट गया इस कार्य में। चार वर्षों तक अथक मेहनत करते हुए आखिर उसने सफलता हासिल कर ही ली।</p>
<p style="text-align:justify;">अपने खेतों तक कल-कल करता पानी पहुंचा, तो मानो ग्रामीणों के चेहरे खिल उठे। पहले विरोध करने वाले लोग भी अब दइतरी के साथ खड़े दिखे और खड़े हों भी क्यों नहीं, अब सौ एकड़ क्षेत्र में खेती करने वालों को धान की पैदावार के लिए तरसना नहीं पड़ेगा। आज दइतरी खुश है, क्योंकि उसका सपना साकार हुआ।</p>
<p style="text-align:justify;">अब लोग उसे ‘कैनाल मेन’ के नाम से पुकारने लगे हैं। ठीक उसी तरह जिस तरह दशरथ मांझाी को आज भी लोग ‘माउंटेन मेन’ के नाम से जानते हैं। हालांकि दशरथ का माउंटेन मेन बनने का सफर भी बेहद चुनौतियों भरा था। वह बिहार के गहलौर गांव का रहने वाला था। वह जिस गांव में रहते थे, वहां से कस्बे के बीच एक पर्वत था।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार मांझी इसी क्षेत्र में कार्य कर रहा था। उसकी पत्नी फाल्गुनी देवी उसके लिए खाना लेकर जा रही थी। रास्ते में वह एक दर्रे में गिर गई और दवाईयों के अभाव में उसकी मौत हो गई। इस घटना ने दशरथ का जीवन बदल कर रख गया। दु:खी मांझी ने यह प्रण लिया कि जो घटना उसके साथ हो गई, वह किसी और के साथ नहीं हो।</p>
<p style="text-align:justify;">बस, इसी संकल्प के साथ छैनी और हथौड़ी लेकर वह जुट गया और 1960 में प्रारम्भ हुई उसकी यह कर्मयात्रा 1982 में पूर्ण हुई। अब वह एक रास्ता बना चुका था और जैसा कि पहले बताया गया कि अब वहां से कस्बे तक पहुंचने की दूरी 55 से घटकर 15 किलोमीटर हो चुकी थी।</p>
<p style="text-align:justify;">आज दशरथ मांझी दुनिया में नहीं रहे, लेकिन उनके द्वारा किया गया कार्य उन्हें सदैव जिंदा रखेगा। मांझी के जीवन पर फिल्म बन चुकी है। उनकी कर्मण्यता ने अनेक पुस्तकों में स्थान पाया। उन्होंने इतिहास रचा, क्योंकि उन्होंने सिर्फ सपना देखा ही नहीं बल्कि इसे साकार किया। इसके लिए पूरे 22 साल तपस्या की। दइतरी भी इसी राह पर चला।</p>
<p style="text-align:justify;">एक ओर आज भी जहां ग्रामीण क्षेत्रों में जीवन चुनौतीपूर्ण है। जहां पर्याप्त साधन नहीं हैं, इसके बावजूद दशरथ और दइतरी ने बता दिया कि इच्छाशक्ति हो और चुनौतियों का सामना करने का माद्दा हो तो यह बाधाएं मनुष्य के आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प से बड़ी नहीं होती।</p>
<p style="text-align:justify;">दशरथ और दइतरी के साथ यही तो हुआ। उनसे पहले किसी ने समस्या का सामना करने का साहस नहीं जुटाया। वे मुसीबतों से समझौता करते गए। इस कारण वे अपनी कोई पहचान नहीं बना पाए।</p>
<p style="text-align:justify;">अपनी छाप नहीं छोड़ पाए, लेकिन दशरथ और दइतरी इनसे जुदा थे। मानो, ऐसे लोग मुसीबतों को हराने के लिए ही बनते हैं और ऐसे ही लोगों को दुनिया हमेशा याद रखती है। तो इस ‘संडे’ का ‘फंडा’ यह है कि चुनौती से समझौता नहीं बल्कि उसका सामना करना चाहिए। कठोर परिश्रम करते हुए हम हरेक बाधा को लांघकर सफलता को चूम सकते हैं और यही सफलता हमें भीड़ से अलग अलहदा पहचान दिला पाती है।</p>
<p style="text-align:justify;">हरि शंकर आचार्य</p>
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                <pubDate>Sun, 24 Jun 2018 08:13:55 +0530</pubDate>
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                <title>चीनी &amp;#8216;जल हथियार&amp;#8217; की चुनौती एवं समाधान</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में पानी एक महत्वपूर्ण संसाधन हो गया है और यह संघर्ष का कारण बन सकता है। चीन ने जलसंसाधनों को भी आक्रामक विस्तारवाद का न केवल हिस्सा बना दिया है, अपितु जल संसाधनों को भी हथियार के रुप में प्रयोग करने की तैयारी की है। इस तरह अब ‘जल संसाधन’ का ‘जल […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/chinese-water-weapons-challenges-and-solutions/article-2595"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/water-weapon.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">वर्तमान वैश्विक परिप्रेक्ष्य में पानी एक महत्वपूर्ण संसाधन हो गया है और यह संघर्ष का कारण बन सकता है। चीन ने जलसंसाधनों को भी आक्रामक विस्तारवाद का न केवल हिस्सा बना दिया है, अपितु जल संसाधनों को भी हथियार के रुप में प्रयोग करने की तैयारी की है। इस तरह अब ‘जल संसाधन’ का ‘जल हथियार’ के रुप में प्रयोग करने की चीनी मंशा की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस समय चीन तिब्बत में विशाल जल संसाधन पर कब्जा किये हुए है और भारत में बहने वाली नदियों का स्रोत भी वही जल संसाधन हैं। भारत के उत्तर पूर्व में बहने वाली ब्रह्मपुत्र जलशक्ति का एक बड़ा स्रोत है और पनबिजली पैदा करने के लिए तथा अपने शुष्क उत्तरी क्षेत्र की तरफ बहाव मोड़ने के लिए चीन की इस पर नजर है। इस हालात ने भारत में चिंता पैदा कर दी है, क्योंकि भारत एक निम्न नदी तटीय देश है। इसके अलावा, पर्यावरण क्षरण तथा पानी की घटती मात्रा भारतीय नीति निमार्ताओं के समक्ष चुनौती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पिछले एक माह से जिस तरह भारत-चीन के बीच डोकलाम मामले को लेकर तनाव बना हुआ है, उसके बीच भारतीय देहरादून वाडिया संस्थान के वैज्ञानिकों का मानना है कि चीन के पास पानी की इतनी शक्ति है कि अगर भारत ने उस पर नजर नहीं रखी, तो बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">देहरादून वाडिया संस्थान के वैज्ञानिक संतोष राय के अनुसार अगर चीन घाघरा, गंडक और ब्रह्यपुत्र जैसी नदियों का पानी रोककर अचानक छोड़ता है, तो भारत के लिए हालत बेहद खतरनाक हो जाएंगे। सीमा पर जिस तरह से विवाद चल रहा है, उसके बाद हमारी सरकार और हमें इस मामले को लेकर चौकन्ना रहने की आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत और चीन दोनों की बढ़ती जनसंख्या के लिए संसाधनों एवं बुनियादी वस्तुओं की बढ़ती माँग से संभावना व्यक्त की जाती है कि पानी की माँग भी बढ़ेगी। चीन का किसी भी जल समझौते में प्रवेश करने से लगातार इंकार ने भारत के साथ द्विपक्षीय संबंध को लेकर अहम् टकराहट को बल दिया है। दुनिया के कुछ शुष्क क्षेत्रों के साथ एक आर्थिक शक्तिगृह के रुप में चीन भी एक प्यासा देश है।</p>
<p style="text-align:justify;">1.3 अरब जनसंख्या के साथ चीन दुनिया का सबसे आबादी वाला देश है। चीन में अप्रत्याशित रुप प्रदूषित नदियों की संख्या में वृद्धि हो रही है, ऐसे में चीन के लिए पानी बेहद महत्वपूर्ण संसाधन है। चीन विश्व का सबसे ताबड़तोड़ बाँध का निर्माता है और विश्व में सबसे ज्यादा बाँध चीन में ही हैं। चीन में कमोवेश 50 हजार से ज्यादा बड़े बाँध हैं। चीन अंतर्राष्ट्रीय नदियों पर बाँध निर्माण करने का एकपक्षीय कदम उठा रहा है,</p>
<p style="text-align:justify;">जो भारत के लिए चिंता का विषय है। चीन पहले ही ब्रह्मपुत्र की सहायक नदियों पर 10 बाँध बना चुका है तथा 3 बांध निमार्णाधीन हैं। इसी क्षेत्र में, चीन 7 और बाँध बनाने पर विचार कर रहा है, तथा 8 और बांध प्रस्तावित हैं। इसमें ‘झंग्मु’ नामक 510 मेगावाट वाली विद्युत परियोजना वाले बाँध का निर्माण भारत और चीन के बीच और टकराहट को जन्म दे सकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में भारत के लिए यह आवश्यक है कि वह चीन को इस बात के लिए राजी करे कि वह ब्रह्मपुत्र पर प्रस्तावित बांध निर्माण को आगे नहीं बढ़ाए।ब्रह्मपुत्र नदी पर बांध निर्माण के मुद्दे पर सौदेबाजी की तलाश में चीन अक्साई चीन तथा अरुणाचल के मुद्दे पर रियायत देने के लिए भारत को मजबूर कर सकता है।वस्तुत: चीन यथार्थ राजनीति पर आगे बढ़ रहा है और इस कारण वह भारत के साथ किसी भी तरह के बराबरी वाले समाधान को लेकर रुचि नहीं दिखा रहा है,</p>
<p style="text-align:justify;">क्योंकि तिब्बत में दस बड़े जल विभाजक पर चीन का कब्जा है और इस क्षेत्र में जल संसाधनों पर इसका नियंत्रण है। इसलिए,भारत को न सिर्फ मुखर होना होगा,बांग्लादेश की चिंता को लेकर भी चीन को उसी तरह ज्यादा पारदर्शी तथा तार्किक तरीके से प्रभावित करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतत: सवाल उठता है कि भारत आखिर चीन द्वारा पैदा की हुई इस हालत से कैसे निपटेगा? भारत को इस सच्चाई को स्वीकार करना होगा कि तिब्बत से निकलने वाले जल संसाधनों पर चीन का नियंत्रण है। ऐसे में भारत को तिब्बत को लेकर अपनी नीति पर फिर से विचार करना होगा, उसे नया आकार देना होगा। चीन की नीतियों के सवाल पर भारत को चीन के अन्य जल संपदा संबंधित पड़ोसी देशों को भी शामिल करना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसके साथ ही पर्यावरण की निरंतरता के संबंध में एक वैश्विक जागरुकता लानी होगी एवं भारत और बांग्लादेश दोनों देशों को पानी के वास्तविक उपयोग के लिए आवाज उठानी पड़ेगी। भारत को इस मामले में पानी जैसे आम संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर भी वैश्विक स्तर पर जागरूकता लानी होगी तथा इसके लिए अंतर्राष्ट्रीय समुदायों के बीच दबाव बनाना होगा कि तिब्बत का जल संसाधन सिर्फ चीन के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण विश्व समुदाय के लिए है।</p>
<p style="text-align:justify;">चीन बिना किसी अन्य देश के हस्तक्षेप के जल संसाधनों के एक पक्षीय इस्तेमाल के अधिकार को सुरक्षित रखता है, इसीलिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि चीन पर बहुपक्षीय वार्ता के लिए वैैैश्विक दबाव डाला जाए। बहुपक्षीय समायोजन ही चीन पर समझौते को स्वीकार करने का दबाव बना सकता है, जिससे इनमें शामिल सभी देशों को लाभ होगा तथा इससे पर्यावरण को भी नुकसान होने से बचाया जा सकेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">साथ ही चीन भारत से समझौतों के अनुसार अपने बांधों की स्थिति, उसमें जल संग्रहण की रियल टाइम सूचनाएँ भी समुचित रुप में साझा नहीं कर रहा है। इसके लिए आवश्यक है कि हम लोग अपने उपग्रहों के द्वारा चीन के बांधों एवं उसके जल संग्रहण की सूक्ष्म सूचनाएँ रखें। इससे हम चीन के किसी भी घृणित जल हथियार के प्रयोग के बारे में पूर्व बचाव की उत्कृष्ट रणनीति एवं बचाव कर सकेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राकृतिक भूस्खलन से भी कई बार जलभराव हो जाता है, लेकिन इसके लिए भी चीन कोई सूचना नहीं देता है। उदाहरण के लिए चीन ने 2012 में इसी प्रकार की एक घटना से भारत का पासी घाट डूब गया था और हजारों लोग मर गए थे। इसलिए भारत की तरफ से मजबूत पूर्व तैयारी और उपग्रहों से पूर्व सूचना तंत्र अपरिहार्य हो गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसे में बहुपक्षीय नीतियों को बनाने के लिए अंतर्राष्ट्रीय जल संसाधन के गैर-नौवहन उपयोग कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन का एक मापदंड की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है। उदाहरण के लिए अनुच्छेद -11 बताता है कि दोनों देशों के लिए अंतर्राष्ट्रीय जल संसाधनों के इस्तेमाल के संदर्भ में सूचनाओं की साझेदारी आवश्यक है, जबकि अनुच्छेद 21 और 23 प्रदूषण की रोकथाम और समुद्री पर्यावरण की सुरक्षा की व्याख्या करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस तरह यह भारत और चीन दोनों के लिए अहम है कि दोनों देश जलीय आँकड़ों को साझा करने के लिए संस्थागत तथा बहुपक्षीय स्तर पर एक अर्थपूर्ण बातचीत शुरू करें, ताकि इससे जल संसाधनों का स्थायी तथा परस्पर इस्तेमाल सुनिश्चित हो सके एवं टकराहट की आशंका न्यूनतम हो सके।</p>
<p style="text-align:justify;">‘<strong>-राहुल लाल</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Tue, 25 Jul 2017 00:19:36 +0530</pubDate>
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