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                <title>vehicles - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>पुराने वाहनों की बिक्री-खरीद आसान बनाने के लिए अधिसूचना</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पुराने वाहनों की बिक्री और पंजीकरण को सरल तथा पारदर्शी बनाने के लिए एक अधिसूचना जारी की है। मंत्रालय ने कहा है कि देश में पूर्व स्वामित्व वाली कार का बाजार धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है और हाल के वर्षों में ऑनलाइन मार्केट के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/notification-to-facilitate-sale-and-purchase-of-used-vehicles/article-37811"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-09/vehicles.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पुराने वाहनों की बिक्री और पंजीकरण को सरल तथा पारदर्शी बनाने के लिए एक अधिसूचना जारी की है। मंत्रालय ने कहा है कि देश में पूर्व स्वामित्व वाली कार का बाजार धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है और हाल के वर्षों में ऑनलाइन मार्केट के कारण पुराने वाहनों की खरीद और बिक्री के बाजार को और बढ़ावा मिला है। पुराने वाहनों की बिक्री और खरीद के बाजार की बढती लोकप्रियता को देखते हुए इसके कारोबार को सरल बनाने के संबंध में मंत्रालय ने 12 सितंबर को एक अधिसूचना जारी की है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या है मामला</h3>
<p style="text-align:justify;">मसौदा अधिसूचना में कहा गया है कि मौजूदा इकोसिस्टम में इस बाजार को नये मालिक को वाहन के हस्तांतरण के दौरान आने वाली बाधाएं, तीसरे पक्ष को क्षतिपूर्ति संबंधी देनदारियों से जुड़े विवाद, चूककर्ता के निर्धारण में कठिनाई जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। मंत्रालय ने पूर्व स्वामित्व वाले वाहनों की बिक्री में आने वाली समस्याओं के समाधान के लिए व्यापक नियामक इकोसिस्टम बनाने के वास्ते मोटर वाहन नियम 1989 में संशोधन का प्रस्ताव किया है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>यह भी पढ़ें:</strong>–</span> <a href="http://10.0.0.122:1245/bjp-releases-second-sting-video-on-delhi-liquor-scam/"><strong>दिल्ली शराब घोटाले पर भाजपा ने दूसरा स्टिंग वीडियो किया जारी</strong></a></p>
<h3 style="text-align:justify;">आवेदन करने का अधिकार दिया गया</h3>
<p style="text-align:justify;">मंत्रालय के अनुसार प्रस्तावित नियमों में जो प्रमुख प्रावधान किये गये हैं उनमें डीलरों के लिए प्राधिकार प्रमाण-पत्र की व्यवस्था की गई है तथा पंजीकृत मालिक और डीलर के बीच वाहन सौंपने की सूचना प्रक्रिया के विवरण को विस्तृत बनाया गया है। नये प्रावधान में डीलरों को अपने कब्जे में रखे मोटर वाहनों के पंजीकरण प्रमाण पत्र के नवीनीकरण, फिटनेस प्रमाण पत्र के नवीनीकरण, पंजीकरण प्रमाण पत्र की अनुलिपि, अनापत्ति प्रमाण पत्र, स्वामित्व के हस्तांतरण के लिए आवेदन करने का अधिकार दिया गया है। इसके साथ ही नियमों से पंजीकृत वाहनों के बिचौलियों तथा डीलरों की पहचान करने और उन्हें सशक्त बनाने में मदद मिलने के साथ-साथ ऐसे वाहनों की बिक्री या खरीद के दौरान किसी किस्म की धोखाधड़ी से बचने के लिए पर्याप्त सुरक्षा हासिल होने की उम्मीद है। सभी हितधारकों से तीस दिनों की अवधि के भीतर टिप्पणियां और सुझाव आमंत्रित किए गए हैं।</p>
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                                                            <category>कारोबार</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Sep 2022 17:12:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोहरा बना काल, 20 वाहन टकराए, दो की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[हादसे में दर्जन भर लोग घायल रेवाड़ी (सच कहूँ न्यूज)। उत्तर भारत में दिन-ब-दिन बढ़ती सर्दी अब कहर भरपा रही है। एक ओर लुढ़कता पारा मुश्किलें बढ़ा रहा है। वहीं घना कोहरा (Fog) सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में आए दिन वाहन हादसे का शिकार हो रहे हैं। शनिवार […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/20-vehicles-collided-due-to-fog-two-killed/article-12042"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/20-vehicles-collided-due-to-fog-two-killed.jpg" alt=""></a><br /><h2>हादसे में दर्जन भर लोग घायल</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>रेवाड़ी (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उत्तर भारत में दिन-ब-दिन बढ़ती सर्दी अब कहर भरपा रही है। एक ओर लुढ़कता पारा मुश्किलें बढ़ा रहा है। वहीं घना कोहरा (Fog) सड़क दुर्घटनाओं का कारण बन रहा है। हरियाणा, पंजाब और राजस्थान में आए दिन वाहन हादसे का शिकार हो रहे हैं। शनिवार अलसुबह कोहरे के कारण दिल्ली-जयपुर हाईवे पर स्थित बावल के साबन चौक पर एक-एक करके 20 वाहन टकरा गए। इस हादसे में दो लोगों की मौत हो गई और दर्जन भर लोग घायल हो गए।</p>
<h3 style="text-align:justify;">बावल के साबन चौक पर हुआ हादसा  | Fog</h3>
<p style="text-align:justify;">हरियाणा के रेवाड़ी जिले के बावल में साबन चौक पर घने कोहरे के चलते प्राइवेट बस, ट्रक, कार और पिकअप गाड़ी टकरा गई। इसके बाद दृश्यता कम होने के चलते एक-एक करके 20 से ज्यादा वाहन आपस में टकरा गए। हादसे में एक पिकअप बीचों-बीच पलट गई। उसमें लदी फ्रूट की पेटियां सड़क पर बिखर गई। वाहनों के भिड़ने की खबर मिलते ही बावल, कोसली पुलिस ने मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। पुलिसकर्मियों ने सड़क किनारे टॉर्च आदि रोशन करके अलर्ट किया। घायलों को वाहनों से बाहर निकाला गया और बावल के सामुदिक केन्द्र पहुंचाया गया। यहां दो लोगों को डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया।</p>
<ul style="text-align:justify;">
<li><strong>घायलों को आसपास के अस्पतालों में भर्ती करवाया </strong></li>
<li><strong>हादसे की वजह से हाईवे पर जाम लग गया। </strong></li>
<li><strong>बड़ी संख्या में वाहन जाम में फंस गए। </strong></li>
<li><strong>पुलिस ने आनन-फानन में क्षतिग्रस्त वाहनों को सड़क से हटवाया</strong></li>
</ul>
<h3>राजमार्ग पर ये बरतें सावधानियां</h3>
<ul>
<li><strong>राजमार्ग पर वाहन चलाते समय बहुत ही सावधानी बरतनी चाहिए।</strong></li>
<li><strong>डिवाइडर के नजदीक ही वाहन चलाएं।</strong></li>
<li><strong>आगे चल रहे वाहन से एक निश्चित दूरी बनाए रखें।</strong></li>
<li><strong>वाहन की गति कम ही रखें।</strong></li>
<li><strong>समय-समय पर हॉर्न का इस्तेमाल करें</strong></li>
<li><strong>राजमार्ग पर मवेशियों का भी विशेष ध्यान रखें।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Dec 2019 01:00:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महंगी गाड़ियों से भी आगे निकल गई हिसार की ये भैंस buffalo of Hisar</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान को भी दे दी मात | Buffalo of Hisar हिसार (संदीप सिंहमार)। किसी भी क्षेत्र में रिकॉर्ड बनाना एक श्रेष्ठ उपलब्धि है। लेकिन जब ये रिकॉर्ड कोई भैंस बनाए तो ये चौंकना लाजमी है। हम बात कर रहे हैं हिसार के लितानी गाँव वासी सुखबीर सिंह ढांडा की भैंस सरस्वती की। सरस्वती ने लुधियाना […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/this-buffalo-of-hisar-has-gone-ahead-from-expensive-vehicles/article-11792"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/buffalo-of-hisar-1.jpg" alt=""></a><br /><h1>पाकिस्तान को भी दे दी मात | Buffalo of Hisar</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>हिसार (संदीप सिंहमार)।</strong> किसी भी क्षेत्र में रिकॉर्ड बनाना एक श्रेष्ठ उपलब्धि है। लेकिन जब ये रिकॉर्ड कोई भैंस बनाए तो ये चौंकना लाजमी है। हम बात कर रहे हैं हिसार के लितानी गाँव वासी सुखबीर सिंह ढांडा की भैंस सरस्वती की।</p>
<p style="text-align:justify;">सरस्वती ने लुधियाना के जगरांवा में आयोजित हुई इंटरनैशनल डेयरी एंड एग्रो एक्सपो में रोजाना औसतन 32.66 किलो दूध दिया। उसने पाकिस्तान के फैसलाबाद की नीली रावी भैंस का 32.50 किग्रा. का विश्व रिकॉर्ड तोड़ दिया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">भैंसों, गायों और बछड़ों की प्रतियोगिताओं के लिए मशहूर एग्रो एक्सपो  Buffalo of Hisar</h3>
<p>इंटरनैशनल डेयरी एंड एग्रो एक्सपो के अध्यक्ष दलजीत सिंह सरदारपुरा का कहना है, ‘हमारा ये आयोजन दुनियाभर में भैंसों, गायों और बछड़ों की प्रतियोगिताओं के लिए मशहूर है। उनका कहना है, ‘हम खुश हैं कि हमारे एक्सपो में दूध उत्पादन का वर्ल्ड रिकॉर्ड बना है।’</p>
<h3>पूरे देश के लिए गर्व की बात</h3>
<p>वहीं भैंस के मालिक सुखबीर ढांडा ने कहा, ‘यह न केवल मेरे, बल्कि पूरे देश के लिए गर्व की बात है कि सरस्वती ने एक दिन में सबसे ज्यादा दूध देने का विश्व रिकॉर्ड बनाया है। इसका श्रेय मेरी माँ कैलो देवी को जाता है। जो इसकी अच्छे से देखभाल करती हैं।</p>
<h2>ऑडी और मर्सिडीज से भी महंगी Buffalo of Hisar</h2>
<p>सुखबीर बताते हैं, ‘सरस्वती ने पिछले साल भी 29.31 किलो दूध देते हुए यहां पहला पुरस्कार जीता था। हिसार के सेंट्रल इंस्टिट्यूट आफ बफैलो रिसर्च के कार्यक्रम में 28.7 किलो दूध का उत्पादन कर भी ये अव्वल रही। वहीं हरियाणा पशुधन विकास बोर्ड के मेले में भी सरस्वती ने 28.8 किलो दूध के साथ प्रतियोगिता में परचम लहराया था।</p>
<h3>51 लाख रुपये कीमत का मिल चुका है आफर</h3>
<ul>
<li><strong>ढांडा कहते हैं कि साहनेवाल के एक व्यक्ति ने सरस्वती के लिए 51 लाख रुपये तक का आफर दिया है। </strong></li>
<li><strong>जो कि महंगी गाड़ियों मर्सिडीज और ऑडी से भी ज्यादा है। </strong></li>
<li><strong>लेकिन मैंने उसे बताया कि यह बेचने के लिए नहीं है।</strong></li>
<li><strong> मैं इसे खुद से दूर नहीं कर सकता।</strong></li>
<li><strong>सरस्वती ने 32.66 किमी. दूध</strong> के<strong> साथ पाकिस्तान की नीली रावी को पछाड़ा</strong></li>
<li><strong>पहले भी कई प्रतियोगिताओं मारी बाजी</strong></li>
<li><strong>51 लाख रुपये कीमत का मिल चुका है आफर</strong></li>
<li><strong>4.5 लाख में बेचा कटड़ा, गंगा-जमुना भी हैं शान</strong></li>
<li><strong>पशुपालन पर फोकस करने का किया आह्वान</strong></li>
</ul>
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<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 15 Dec 2019 21:22:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मेट्रो स्टेशन के नीचे हुआ गहरा गड्ढा, दो वाहन गिरे</title>
                                    <description><![CDATA[हादसे में आठ लोगों को मामूली चोट लगी नई दिल्ली(एजेंसी)। उत्तरी पूर्वी दिल्ली के मौजपुर मेट्रो स्टेशन के नीचे सोमवार रात को अचानक दिल्ली जल बोर्ड की पाइप लाइन फटने से सड़क धंस गई। हादसे के वक्त सड़क से गुजर रही एक कार व एक ऑटो सड़क पर बने गहरे गड्ढ़े में जा गिरे। सड़क […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><h2>हादसे में आठ लोगों को मामूली चोट लगी</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)</strong>। उत्तरी पूर्वी दिल्ली के मौजपुर मेट्रो स्टेशन के नीचे सोमवार रात को अचानक दिल्ली जल बोर्ड की पाइप लाइन फटने से सड़क धंस गई। हादसे के वक्त सड़क से गुजर रही एक कार व एक ऑटो सड़क पर बने गहरे गड्ढ़े में जा गिरे। सड़क धंसते ही अफरा-तफरी मच गई। राहगीरों ने बड़ी मुश्किल के बाद ऑटो और कार में बैठी आठ लोगों को गड्ढे से बाहर निकाला। इस हादसे में आठ लोगों को मामूली चोट लगी है। लेकिन जिला पुलिस उपायुक्त अतुल कुमार ठाकुर ने किसी के घायल होने की बात से इंकार किया है। यह हादसा गोकलपुरी से सीलमपुर जाने वाली रोड पर बाबरपुर और मौजपुर लाल बत्ती के बीच में हुआ है। हादसे को देखते हुए पुलिस ने इस मार्ग को बंद कर रूट डायवर्ट कर दिया।</p>
<h2>गड्ढे के कारण सड़क पर भीषण जाम</h2>
<p style="text-align:justify;">गड्ढे के कारण सड़क पर भीषण जाम भी लगा रहा। यह गड्ढा मेट्रो के लिए भी खतर की घंटी हो सकता है। पानी की यह पाइन लाइन यहां से दक्षिणी दिल्ली की ओर जा रही है, इस लाइन के फटने से दक्षिणी दिल्ली के बहुत से इलाकों में पानी की किल्लत हो सकती है। स्थानीय लोगों के अनुसार मौजपुर मेट्रो स्टेशन के नीचे रात करीब 7:45 बजे दिल्ली जल बोर्ड की पाइप लाइन प्रेशर के साथ फटी। जमीन से कई फुट तक पानी की बौछार ऊपर की और उठने लगी। लेकिन लोगों ने सड़क पर वाहनों की आवाजाही जारी रखी, रात करीब 8:15 बजे विक्टर पब्लिक स्कूल के सामने मेट्रो स्टेशन के नीचे अचानक सड़क का एक बड़ा हिस्सा जमीन में धंस गया।</p>
<h2>थाना पुलिस के अलावा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुुंच गए</h2>
<p style="text-align:justify;">वहां से गुजर रही एक डस्टर गाड़ी और सवारी वाला ऑटो गड्ढे में जा गिरा। हादसे के वक्त ऑटो में चालक समेत करीब पांच संवारियां और कार में दो लोग मौजूद थे। लोगों ने बड़ी मुश्किल से उन सभी को गड्ढे से बाहर निकाला गया। सूचना मिलते ही थाना पुलिस के अलावा पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भी मौके पर पहुुंच गए। क्रेन के जरिए गड्ढे में गिरी गाड़ियों को बाहर निकाला गया। हादसे के बाद स्थानीय विधायक व दिल्ली सरकार के मंत्री गोपाल राय भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने दिल्ली बोर्ड के अधिकारियों को पूरी रात काम जारी रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि हो सकता है मेट्रो की खोदाई के कारण पाइप लाइन को नुकसान पहुंचा हो, जिसके चलते यह हादसे हुआ।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Jan 2019 08:31:23 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली सरकार ने रद्द किए 40 लाख वाहनों के रजिस्ट्रेशन</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा 7  अप्रैल, 2015 को पुराने डीजल वाहनों  पर पाबंदी के दिए थे निर्देश नई दिल्ली (सच कहूँ) Edited By Vijay Sharma । दिल्ली सरकार ने  उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी में पंजीकृत 1.10 करोड़ वाहनों में से 40 लाख 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल और 10 […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/registration-of-forty-lakh-vehicles-canceled-by-delhi-government/article-6531"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/vical.jpg" alt=""></a><br /><h2>राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा 7  अप्रैल, 2015 को पुराने डीजल वाहनों  पर पाबंदी के दिए थे निर्देश</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ) Edited By Vijay Sharma ।</strong> दिल्ली सरकार ने  उच्चतम न्यायालय को सूचित किया कि परिवहन विभाग ने राष्ट्रीय राजधानी में पंजीकृत 1.10 करोड़ वाहनों में से 40 लाख 15 साल से अधिक पुराने पेट्रोल और 10 साल से ज्यादा पुराने डीजल वाहनों का पंजीकरण खत्म कर दिया है। दिल्ली सरकार ने यह जानकारी न्यायालय से साझा की, हालांकि शीर्ष अदालत ने इस बात पर नाराजगी जाहिर की थी कि दिल्ली में इतने अधिक पुराने वाहनों के परिचालन पर पाबंदी लगाने के राष्ट्रीय हरित अधिकरण और शीर्ष अदालत के 2015 के आदेशों पर अभी तक अमल नहीं किया गया है।</p>
<h2>दिल्ली सरकार ने क्या कहा?</h2>
<p>दिल्ली सरकार का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता वसीम कादरी ने पीठ से कहा कि इस तरह के वाहनों को दिल्ली की सड़कों पर चलने की इजाजत नहीं दी जायेगी। केन्द्र और केन्द्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल एएनएस नाडकर्णी ने पीठ को बताया कि न्यायालय के 29 अक्टूबर के आदेश के अनुरूप प्रदूषण के बारे में शिकायत दर्ज कराने के लिये ट्विटर और फेसबुक पर नागरिकों की सुविधा के लिये अकाउंट खोल दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि बुधवार तक इन अकाउंट पर 18 शिकायतें मिली हैं। उन्होंने कहा कि बोर्ड ने अपनी वेबसाइट का लिंक भी दिया है, जहां दिल्ली-एनसीआर में 15 साल पुराने पेट्रोल और 10 साल पुराने डीजल वाहनों की सूची देखी जा सकती है।</p>
<ul>
<li>दिल्ली सरकार की ओर से पेश वकील से शीर्ष अदालत ने कहा कि राष्ट्रीय हरित अधिकरण द्वारा सात अप्रैल, 2015 को अपने आदेश में दिल्ली-एनसीआर में 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों और 10 साल पुराने डीजल वाहनों के प्रचालन पर पाबंदी लगाने के निर्देश दिए थे।</li>
<li>यही नहीं, ऐसे वाहनों के प्रचालन पर पाबंदी लगाने के अधिकरण के निर्देशों के खिलाफ दायर याचिका शीर्ष अदालत ने मई, 2015 में खारिज कर दी थी।</li>
<li>पीठ ने कहा, ‘‘साढ़े तीन साल बीत गये परंतु ऐसा लगता है कि अधिकरण के आदेश और इस न्यायालय द्वारा उनकी पुष्टि के बाद भी उनपर अभी अमल नहीं हो रहा है। दिल्ली सरकार के वकील से कहा गया है कि वह अपने मुवक्किल को तत्परता से कार्रवाई करने की सलाह दें।’’</li>
</ul>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Nov 2018 08:37:04 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य</title>
                                    <description><![CDATA[ऐसा न होने पर जुर्माना देने के साथ  जाना पड़ सकता है जेल नई दिल्ली (सच कहूँ) Edited By Vijay Sharma। दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य होगा। ऐसा न होने पर जुर्माना देने के साथ ही जेल जाना पड़ सकता है। दिल्ली परिवहन विभाग ने अक्टूबर से ऐसी गाड़ियों के खिलाफ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/it-is-mandatory-to-have-high-security-number-plates-in-registered-vehicles/article-6001"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/car.jpg" alt=""></a><br /><h2>ऐसा न होने पर जुर्माना देने के साथ  जाना पड़ सकता है जेल</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ) Edited By Vijay Sharma। </strong>दिल्ली में रजिस्टर्ड वाहनों में हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाना अनिवार्य होगा। ऐसा न होने पर जुर्माना देने के साथ ही जेल जाना पड़ सकता है। दिल्ली परिवहन विभाग ने अक्टूबर से ऐसी गाड़ियों के खिलाफ अभियान चलाने का निर्णय लिया है, जिनमें हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं लगी होगी। यह अभियान 14 अक्टूबर से चलेगा। वाहन मालिकों को राहत देने के लिए अक्टूबर से हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की प्रक्रिया शुरू होगी जो 13 अक्टूबर तक चलेगी</p>
<h2>13 अक्टूबर तक का  दिया समय</h2>
<p style="text-align:justify;">बता दें कि राजधानी दिल्ली में एक करोड़ से अधिक वाहन हैं। नए वाहनों में पहले से हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगी हुई हैं, जबकि पुरानी कारों और दोपहिया वाहनों को नंबर प्लेट बदलने के लिए 13 अक्टूबर तक का समय दिया जाएगा। नंबर प्लेट बदलने के लिए दिल्ली में 13 केंद्र खोले जाएंगे। जरूरत पड़ने पर इनकी संख्या बढ़ाई जा सकती है या अन्य विकल्प की व्यवस्था की जाएगी।</p>
<h2>विभाग की वेबसाइट पर  कर सकते हैं ऑनलाइन आवेदन</h2>
<p style="text-align:justify;">केंद्रों पर भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दिल्ली परिवहन विभाग ने विशेष सॉफ्टवेयर बनाया है, जिसकी मदद से लोग नंबर प्लेट बदलने के लिए विभाग की वेबसाइट पर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। आवेदन के आधार पर संबंधित व्यक्ति को टोकन दिया जाएगा, जिसमें समय और तारीख के बारे में जानकारी होगी। फीस सहित अन्य सभी प्रक्रिया ऑनलाइन होगी। दोपहिया के लिए 67 रुपये और चारपहिया वाहनों के लिए 13 रुपये चुकाने पड़ सकते हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट में सभी नंबर उभरे हुए होंगे।</li>
<li style="text-align:justify;">इंडिया लिखा हुआ बारकोड वाला क्रोमियम होलोग्राम होगा।</li>
<li style="text-align:justify;">बार कोड से गाड़ी की पूरी जानकारी ऑनलाइन मिलेगी।</li>
<li style="text-align:justify;">लेजर से लिखा दस अंकों का यूनिक सीरियल नंबर होगा।</li>
<li style="text-align:justify;">आरटीओ या ट्रैफिक पुलिस द्वार बार कोड स्कैन करते ही वाहन की पूरी जानकारी मिल जाएगी।</li>
<li style="text-align:justify;">हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने की इस व्यवस्था का एलान केंद्र ने 001 में किया था।</li>
<li style="text-align:justify;">इसमें राज्यों को निविदाएं आमंत्रित करने का अधिकार दिया गया था।</li>
<li style="text-align:justify;">शीला दीक्षित सरकार के दौरान प्रक्रिया शुरू हुई थी, लेकिन टेंडर को लेकर विवाद हो गया था।</li>
</ul>
<h2>दिल्ली के साथ एनसीआर में लगभग 40 लाख गाड़ियां से ज्यादा पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं</h2>
<p>परिवहन विभाग के एक अधिकारी की मानें तो दिल्ली के साथ एनसीआर में लगभग 40 लाख गाड़ियां से ज्यादा पर हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट नहीं हैं। इनमें फोर व्हीलर और टू-व्हीलर दोनों वाहन शामिल हैं। अधिकारी के मुताबिक नए नंबर प्लेट देने के लिए दिल्ली में 13 अधिकृत सेंटर हैं। गौरतलब है कि 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को हाई सिक्योरिटी नंबर प्लेट लगाने का आदेश दिया था। दिल्ली में अप्रैल 2012 में हाई सिक्यॉरिटी नंबर प्लेट लगाने शुरू कर दिए गए थे।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Sep 2018 09:30:08 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>वाहनों के बढ़ते काफिले ने बिगाड़ी यातायात व्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[बठिंडा में हर वर्ष हो रही वाहनों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि बठिंडा(अशोक वर्मा)। बठिंडा में हर वर्ष वाहनों की संख्या में हो रहे बेतहाशा वृद्धि के कारण मुख्य सड़कों पर पैदल चलना मुश्किल होने लगा है महानगर की कई सड़कें तो ऐसीं हैं जहां पलक झपकते ही जाम लग जाता है, जिला हैडक्वाटर व […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/punjab/increase-in-number-of-vehicles-in-bathinda-every-year/article-4877"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/traffice-news.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">बठिंडा में हर वर्ष हो रही वाहनों की संख्या में बेतहाशा वृद्धि</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>बठिंडा(अशोक वर्मा)।</strong> बठिंडा में हर वर्ष वाहनों की संख्या में हो रहे बेतहाशा वृद्धि के कारण मुख्य सड़कों पर पैदल चलना मुश्किल होने लगा है महानगर की कई सड़कें तो ऐसीं हैं जहां पलक झपकते ही जाम लग जाता है, जिला हैडक्वाटर व राजनैतिक सरगर्मियों का गढ़ होने के कारण रोजमर्रा की ही जिले भर में से लोगों का आना-जाना लगा रहता है। ट्रांसपोर्ट विभाग के आंकड़ों पर नजर मारें तो बठिंडा जिले में 15 लाख के करीब गाड़ियां हैं यह संख्या दुपहिया वाहनों से ले कर कारों आदि का है। बड़ी गाड़ियां इस से अलग हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">कई घर तो ऐसे भी हैं, जिन्होंने घरों में तीन से चार वाहन भी रखे हुए हैं। प्राप्त जानकारी मुताबिक वर्ष 2007 में बठिंडा जिले में 5लाख 60 हजार गाड़ियां थी जो कि पांच वर्ष बाद बढ़कर सवा 11 लाख भाव दुगुना हो गई। इस हिसाब से जिले की सड़कों पर हर वर्ष 1 लाख नए वाहन उतर रहे हैं। जिला ट्रांसपोर्ट कार्यालय के सूत्रों ने बताया कि शहर की आबादी के लिहाज से वाहनों की औसत संख्या तो चण्डीगढ़ के नजदीक तक पहुंचने लगी है। यातायात विशेषज्ञों का कहना है कि गाड़ियां बढ़ी परन्तु प्रबंध नहीं बढ़ाए, जिसका खामियाजा आम आदमी को हादसों व भीड़ में फंसने के रूप में भुगतना पड़ रहा है।</p>
<h1 style="text-align:center;">बठिंडा जिले में 15 लाख के करीब गाड़ियां</h1>
<p style="text-align:justify;">दिन-प्र्रतिदिन गाड़ियों में हो रहे वृद्धि के कारण यातायात व्यवस्था बिगड़ती जा रही है। हालात यह हैं कि माल रोड,धोबी बाजार,कीकर बाजार,बैंक बाजार और अमरीक सिंह रोड आदि क्षेत्रों में तो सड़क के एक तरफ से दूसरी तरफ गुजरना कठिन हो रहा है हालांकि इस दिशा में चिंताप्रस्त हुए पुलिस प्रशासन ने ट्रैफिक पुलिस की संख्या बढ़ाई है। फिर भी ट्रैफिक को सुचारू में चलाना टेढ़ी खीर बना हुआ है ट्रैकिफ पुलिस के कर्मचारियों का कहना है कि शहर की सड़कों पर गाड़ियों में हो रहे हैरानीजनक वृद्धि के बावजूद सड़कों की चौड़ाई पहले की तरह ही है उन्होंने बताया कि यातायात कंट्रोल करने के लिए लाईटें भी लगीं हुई हैं परंतु कुछ प्वार्इंटों पर पुलिस की तैनाती न होने ने भी समस्या में विस्तार किया है</p>
<p style="text-align:justify;">बठिंडा में तेल डीपू होने के कारण रोजमर्रा की सैंकड़ों गाड़ियां शहर में से गुजरतीं हैं, जिससे भी अक्सर ही यातायात प्रभावित होता रहता है देखने में आया है कि शहर में से गुजरते राष्ट्रीय सड़क मार्ग, माल रोड और मुलतानियां रोड पर तो जाम जैसी स्थिति बनी रहती है। मामले का सुखदाई पहलू यही है कि माल रोड पर सरकारी एलिमेंट्री स्कूल (लड़कियों) वाली जगह पर आरजी पार्किंग बनी हुई है, जहां काफी लोग अपनी, कारें, मोटरसाईकल व ऐक्टिवा आदि खड़ी कर देते हैं, जिससे नजदीक के बाजारों में वाहनों की भीड़ बहुत ही कम होती है।</p>
<h1 style="text-align:center;">रिंग रोड फेज वन कारण भी बढ़ी समस्या</h1>
<p style="text-align:justify;">नगर सुधार ट्रस्ट ने साल 2000 में शहर में से यातायात के बोझ को कम करने के लिए रिंग रोड फेज वन प्रोजैक्ट बनाया था। वर्ष 2001 में केंद्र से स्वीकृति मिलने पर नींव पत्थर रखा गया उसके बाद में रिंग रोड के लिए जमीन एक्वायर की गई। रिंग रोड 3.69 किलोमीटर लम्बी है और यह दिल्ली फाटक तक बननी है रिंग रोड का बड़ा हिस्सा बन चुका है और करीब एक किलोमीटर टुकड़े का मुसीबत है। ट्रस्ट द्वारा रिंग रोड सहित अन्य कार्याें के लिए एक्वायर की संपत्ति के मालिक अदालत में चले गए जहां यह मामला विचाराधीन है।</p>
<h1 style="text-align:center;">टैफिक कर्मचारियों में विस्तार करने की योजना: एसएसपी</h1>
<p style="text-align:justify;">सीनियर पुलिस कप्तान बठिंडा डॉ. नानक सिंह ने कहा कि यातायात को सुचारू रूप में चालू रखने के लिए स्टाफ बढ़ाया जा रहा है इससे ही आम लोगों को नियमों की पालना प्रति उत्साहित करने के लिए चेतना मुहिम शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस के बावजूद यदि कोई व्यक्ति कानून भंग करता है तो उसके खिलाफ सख़्त कार्रवाई की जाएगी</p>
<h1 style="text-align:center;">प्रशासन निभाए अपनी जिम्मेदारी : बहल</h1>
<p style="text-align:justify;">ज्वाईंट एक्शन समिति के कनवीनर एमएम बहल ने कहा कि यदि पुलिस अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से निभाए तो सड़कों पर लगते जाम कम किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि आम लोगों को भी यातायात के नियमों की पालना करनी होगी। बहल ने मांग की कि प्रशासन लंबे समय की रणनीति तैयार कर उसे सख्ती के साथ लागू करे तो भी मसले का हल निकल सकता है।</p>
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                <link>https://www.sachkahoon.com/state/punjab/increase-in-number-of-vehicles-in-bathinda-every-year/article-4877</link>
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                <pubDate>Wed, 18 Jul 2018 04:34:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में 15 जून के बाद प्रदूषण व फिटनेस प्रमाणपत्र के बगैर नहीं होगा वाहनों का बीमा</title>
                                    <description><![CDATA[ई दिल्ली (एजेंसी)। 15 जून के बाद बगैर प्रदूषण व फिटनेस प्रमाणपत्र वाहनों का बीमा करना बीमा कंपनियों को महंगा पड़ सकता है। सरकार ने बीमा कंपनियों से कहा है कि वे फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बगैर किसी भी मोटर वाहन का थर्ड पार्टी बीमा कतई न करें। यात्री वाहन के बीमे के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/after-15th-june-the-country-will-not-have-vehicles-without-pollution-and-fitness-certificate/article-3952"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/car.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>15 जून के बाद बगैर प्रदूषण व फिटनेस प्रमाणपत्र वाहनों का बीमा करना बीमा कंपनियों को महंगा पड़ सकता है। सरकार ने बीमा कंपनियों से कहा है कि वे फिटनेस सर्टिफिकेट और प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र के बगैर किसी भी मोटर वाहन का थर्ड पार्टी बीमा कतई न करें। यात्री वाहन के बीमे के लिए प्रदूषण प्रमाणपत्र तथा मालवाहक वाहन के बीमे के लिए प्रदूषण व फिटनेस प्रमाणपत्र दोनो ही आवश्यक है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस संबंध में सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की ओर से सभी इंश्योरेंस कंपनियों के प्रबंध निदेशकों को पत्र लिखा गया है। पत्र में 10 अगस्त, 2017 को एमसी मेहता बनाम भारत सरकार व अन्य के मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिए गए फैसले का हवाला देते हुए कहा गया है कि उक्त केस में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी बीमा कंपनियों को ऐसे वाहनों का नया बीमा अथवा पुरानी बीमा पालिसी का नवीकरण न करने का निर्देश दिया था</p>
<p style="text-align:justify;">जिनके वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल सर्टिफिकेट अर्थात पीयूसी) न हो। साथ ही इस बात की याद भी दिलाई गई है कि वैध रूप से पंजीकृत सभी वाहनों के बीमा के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट होना भी आवश्यक है। मंत्रालय ने बीमा कंपनियों को 15 जून तक इन निर्देशों को लागू कर मंत्रालय को अवगत कराने की ताकीद की है। मंत्रालय के इस पत्र से जहां बीमा कंपनियां परेशान हैं, वहीं परिवहन विशेषज्ञों ने इस पर खुशी के साथ हैरानी जाहिर की है। दरअसल, बीमा कंपनियां अभी इस मामले में काफी ढीला रुख अपनाती हैं। नए वाहनों के बीमा में तो सब ठीक होता है, लेकिन नवीकरण के मामलों में केवल लेट होने पर ही फिटनेस व प्रदूषण जांच पर जोर देती हैं। अब उन्हें हर बीमा के वक्त इन प्रमाणपत्रों की जरूरत पड़ेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">दूसरी ओर विशेषज्ञ इसलिए हैरान हैं कि मंत्रालय इतने दिनों तक क्यों खामोश था। इंडियन फाउंडेशन आफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड ट्रेनिंग के संयोजक एसपी सिंह ने कहा कि पीयूसी और फिटनेस सर्टिफिकेट पर जोर देना अच्छी बात है। परंतु जिस तरह राज्यों में फिटनेस सर्टिफिकेट और शहरों में पीयूसी सर्टिफिकेट बांटे जाते हैं, उसे देखते हुए बीमा की खातिर इनकी अनिवार्यता लागू करने से भी कोई फर्क पड़ेगा, इसमें संदेह है।</p>
<p style="text-align:justify;">ज्यादातर शहरों में वाहन प्रदूषण जांच का तंत्र पुरातन और कामचलाऊ है जिससे उत्सर्जन की सही माप नहीं होती। इसी प्रकार फिटनेस जांच के नाम पर भी महज खानापूरी की जाती है। कई मर्तबा तो ये प्रमाणपत्र घर बैठे मिल जाते हैं। जब तक इन प्रणालियों का आधुनिकीकरण और डिजिटलीकरण नहीं होता और इनके परिणाम सेंट्रल पोर्टल पर नहीं डाले जाते तब तक ऐसे निर्देशों का वास्तविक लाभ मिलने वाला नहीं है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Jun 2018 08:00:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शासकीय विद्यालयों की व्यथा कथा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रत्येक वह नाम बर्बाद है जिसके पूर्व शासकीय शब्द प्रयुक्त होता है यथा शासकीय चिकित्सालय, शासकीय भवन, शासकीय वाहन, शासकीय सड़क आदि-आदि इन्ही नामों की कड़ी में एक नाम है शासकीय विद्यालय। शासकीय विद्यालय अर्थात् नि:शुल्क शिक्षा केन्द्र। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के साथ ही 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/sad-story-of-government-schools/article-1510"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/school-1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">प्रत्येक वह नाम बर्बाद है जिसके पूर्व शासकीय शब्द प्रयुक्त होता है यथा शासकीय चिकित्सालय, शासकीय भवन, शासकीय वाहन, शासकीय सड़क आदि-आदि इन्ही नामों की कड़ी में एक नाम है शासकीय विद्यालय।</p>
<p style="text-align:justify;">शासकीय विद्यालय अर्थात् नि:शुल्क शिक्षा केन्द्र। शिक्षा का अधिकार अधिनियम लागू होने के साथ ही 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए सरकार ने अनिवार्य एवं नि:शुल्क शिक्षा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की है। शिक्षा वह दर्पण है जिसमें समाज प्रतिबिंबित होता है। शिक्षा अमूर्त को मूर्त करती है। शिक्षा वह अप्रत्यक्ष निवेश है जो भविष्य का सृजन करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्राथमिक और उच्च प्राथमिक शिक्षा प्रदान करने वाले शासकीय विद्यालय आज की स्थिति में बदहाल है। ये विद्यालय कब्र में पांव लटकाए बैठे हैं। इनके प्राण पखेरू कब उड़ जाएं, कुछ कहा नहंीं जा सकता। शासकीय विद्यालयों की दर्ज संख्या जिस गति से गिर रही है, उसकी परिकल्पना भी नहीं की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">लोगों को रोजगार देने वाला प्रदेश का सबसे बड़ा विभाग स्वयं बेरोजगारी के द्वार पर खड़ा है। मनुष्य को ज्ञानवान बनाने वाला यह विभाग स्वयं ज्ञान की याचना कर रहा है। लोगों को चक्षु प्रदान करने वाला यह विभाग स्वयं नेत्रहीन हो चला है। समाज को स्वयं के पैरों पर चलाने वाला विभाग स्वयं के लिए वैशाखी तलाश रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रश्न उठता है कि हमारे शासकीय विद्यालय इतनी बद्तर स्थिति को कैसे प्राप्त हो गए। सुख-सुविधाओं में वृद्धि हुई है। शिक्षा- तकनीक में अप्रत्याशित सुधार हुआ है। विद्यालयों की तस्वीर बदल गई है। शिक्षकों की कमी नहीं है। इन सबके बावजूद विद्यालयों का बेजान होना, बड़ा ही विरोधाभासी सत्य है।</p>
<p style="text-align:justify;">‘घर को आग लगी घर के चिराग से’ वाली कहावत यहां चरितार्थ होती है। सरकारी विद्यालयों पर सरकार द्वारा किया जाने वाला निवेश निष्फल प्रमाणित हो रहा है। परिणामस्वरूप सरकार शासकीय विद्यालयों को निजी हाथों में देने की कवायद कर रही है। सरकार के निरन्तर प्रयासों के बावजूद शासकीय विद्यालयों की गुणवत्ता मे अपेक्षाकृत सुधार न होना बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह हैं। इन विद्यालयों में शिक्षक-भर्ती की गुंजाइश लगभग समाप्त होने के कगार पर है क्योंकि घटती दर्ज संख्या के कारण अतिशेष शिक्षकों की संख्या में लगातार वृद्धि हो रही है। इस वृद्धि की तुलना में रिक्तियों की संख्या बहुत कम है।</p>
<p style="text-align:justify;">पालकों का विश्वास अब शासकीय विद्यालयों पर नहीं रहा। यहां कार्यरत् शिक्षकों को स्वयं पर विश्वास नही है क्योंकि ये अपने बच्चों को अशासकीय विद्यालयों में पढ़ा रहे हैं। ऐसी दशा मे आम पालक इन पर विश्वास क्यों करे? शासकीय शिक्षकों ने न केवल अपने पैरों पर कुल्हाड़ी मारी है बल्कि अपना पैर ही काटकर फेंक दिया है।</p>
<p style="text-align:justify;">जिसका घर जल रहा है, उसे ही बाल्टी लेकर स्वयं दौड़ना होगा। आग को पूरी तरह बुझाकर जले हुए घर को नया स्वरूप देना होगा। स्वरूप भी ऐसा हो जिसे देखकर दुनियां की आंखें चुंधियां जाए। शासकीय विद्यालयों के विरोध में वाचाल स्वर शांत हो जाए। उजड़ते हुए शासकीय विद्यालयों को पुनर्जीवित कर अतीत गौरव पर खड़ा करना होगा अन्यथा इस विभाग को मध्यप्रदेश राज्य परिवहन निगम की स्थिति पर पहुंचते देर नहीं लगेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">अभी वक्त उतना नहीं गुजरा है कि स्थिति को संवारा न जा सके। शासकीय शिक्षकों को अपना आत्मबल बड़ा करना होगा। अशासकीय विद्यालयों में अध्ययनरत स्वयं के बच्चों को वापस शासकीय विद्यालय में लाकर पूर्ण समर्पण से शिक्षा देकर गुणवत्ता पानी होगी। ऐसा करने पर ही शासकीय विद्यालयों के भविष्य को सवांरा जा सकता है। ‘शिक्षक राष्टÑ निर्माता है’- इसे प्रमाणित करने का समय आ गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;"><strong>-अशोक महिश्वरे</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2017 23:14:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पर्यावरण प्रदूषण: सब हमारा किया धरा है</title>
                                    <description><![CDATA[पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस निकल गया। पर्यावरण पर काफी विचार-विमर्श इस दिन किए जाते हैं। बावजूद इसके सदियों से चला आ रहा ऋतुचक्र गड़बड़ाने लगा है। गरमी का प्रकोप हर वर्ष बढ़ता जा रहा है। ग्लेशियर पिघलने लगे हैं। ओजोन की परत में छेद हो गया है। विश्व भर में पानी की भीषण […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/environmental-pollution-we-have-done-all-this/article-963"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-06/factory.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पांच जून को विश्व पर्यावरण दिवस निकल गया। पर्यावरण पर काफी विचार-विमर्श इस दिन किए जाते हैं। बावजूद इसके सदियों से चला आ रहा ऋतुचक्र गड़बड़ाने लगा है। गरमी का प्रकोप हर वर्ष बढ़ता जा रहा है। ग्लेशियर पिघलने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">ओजोन की परत में छेद हो गया है। विश्व भर में पानी की भीषण कमी के स्पष्ट संकेत मिलने लगे हैं। पर्यावरण संरक्षण आज सर्वाधिक महत्वपूर्ण एवं चर्चित मुददा बन गया है, विश्व भर में संस्थाएं इस दिशा में क्रियाशील भी हैं। सरकारी स्तर पर भी कदम उठाए जा रहे हैं। लेकिन जन-जागरण की सर्वाधिक आवश्यकता है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर भी विडम्बना यह है कि एक ओर तो पर्यावरण संरक्षण के प्रयास हो रहे हैं, दूसरी ओर पर्यावरण को दूषित करने वाले कारण बदस्तूर बने हुए हैं बल्कि उन में निरन्तर वृद्धि हो रही है। उदाहरणस्वरूप प्लास्टिक उत्पादन, केमिकल कारखाने, दुपहिया तथा चारपहिया वाहनों से होने वाले प्रदूषण को ही लें।</p>
<p style="text-align:justify;">एक ओर सल्फर रहित पैट्रोल तथा सी. एन. जी. के प्रयोग पर जोर दिया जा रहा है, दूसरी ओर वाहनों की संख्या में दिनोंदिन अंधाधुंध वृद्धि हो रही है। पर्यावरण को दूषित करने में हमारी नासमझी, कहीं हमारी परम्पराओं, कहीं हमारी आधुनिकता, हमारी वैज्ञानिक प्रगति, हमारे स्वभावगत लोभ, हमारे नेताओं को वोट की भूख, सभी का मिलाजुला योगदान है।</p>
<p style="text-align:justify;">झुग्गी-झोंपड़ियों की बसाहट, यहां-वहां, जहां-तहां गंदी बस्तियों का कुकुरमुत्तों की भांति उगते जाना वर्षों से एक आम बात हो गई है जहां सामान्य नागरिक सुविधाओं का नाम निशान तक नहीं होता। इस बढ़ते प्रदूषण की अनदेखी ही नहीं की जाती बल्कि यह कहना अधिक सही होगा कि इसे ढके-छिपे बढ़ावा दिया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">पेड़ कटते ही चले जा रहे हैं। नगरों के आसपास के सुंदर टीलों व पहाड़ियों का कत्लेआम आम बात है। लाखों वर्ष पुरानी चटटानों पर धड़ल्ले से तोड़ा जा रहा है। एवरेस्ट शिखर तक पर, पर्वतारोही दल दलों कचरा छोड़ आते हैं। जगह जगह लाउडस्पीकर बजते रहते हैं। गाड़ियों में लगे प्रेशर हार्न बजाने वालों के कानों को बहरा करते चलते हैं। साइलेंस जोन अभी भी हैं किंतु उपेक्षित।</p>
<p style="text-align:justify;">पशु पक्षी तेजी से लुप्त होते जा रहे हैं। गिद्धों, चिड़ियों की अचानक घटती संख्या आजकल चर्चा का विषय बनी हुई है। नदियों और समुद्रों में बढ़ते प्रदूषण के कारण जल जन्तुओं का निरन्तर हृास हो रहा है। करोड़ों वर्षों में प्रकृति ने जो सृजन किया था, वह हम कुछ वर्षों में मिटाने पर तुल गए हैं। विज्ञान और प्रकृति में बजाय सामंजस्य के एक होड़ लगी है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्लास्टिक की थैलियों ने तो कहर ही ढा रखा है। पशु उन्हें निगलते हैं और बिन आई मौत मरते हैं। दूषित पर्यावरण का कुप्रभाव मनुष्य के शारीरिक ही नहीं, मानसिक स्वास्थ्य पर भी पड़ रहा है। नए-नए रोग अस्तित्व में आ रहे हैं। मनुष्य आत्म-संतुलन, धैर्य व सहिष्णुता खो कर हिंसक होता जा रहा है। सीवरेज-फैक्ट्रीज से नदी-नाले दूषित हो चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">रासायनिक खादों से मिट्टी दूषित हो चुकी है। हवा, पानी, मिट्टी का प्रदूषण अब समस्त प्राणी मात्र को निकलने लगा है। और भी बहुत कुछ कहा जा सकता है किंतु अधिक विस्तार न आवश्यक है न ही व्यवहारिक। अब समय कहने सुनने का नहीं, वास्तव में कुछ करने का है। हर व्यक्ति इस संदर्भ में अपनी प्राथमिकताएं खुद ही निश्चित कर ले और उन्हें कार्यरूप में परिणित करने में जुट जाए।</p>
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                <pubDate>Tue, 06 Jun 2017 23:11:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोहरे ने थामी वाहनों की रफ्तार</title>
                                    <description><![CDATA[देश में इस वर्ष ठंड सामान्य से ज्यादा पड़ेगी लेकिन उत्तर भारत में ठंड कम रहेगी प्रदेश के कई इलाके में शीतलहर सीडब्ल्यू जोन में 2016-17 की सर्दियों में ठंड सामान्य से कम पकड़ने की संभावना है। Jaipur, SachKahoon News:  राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के अधिकांश इलाके शुक्रवार सुबह से घने कोहरे के आगोश में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/fog-was-commanded-by-the-speed-of-vehicles/article-374"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/01-4.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li style="text-align:justify;">देश में इस वर्ष ठंड सामान्य से ज्यादा पड़ेगी</li>
<li style="text-align:justify;">लेकिन उत्तर भारत में ठंड कम रहेगी</li>
<li style="text-align:justify;">प्रदेश के कई इलाके में शीतलहर</li>
<li style="text-align:justify;">सीडब्ल्यू जोन में 2016-17 की सर्दियों में ठंड सामान्य से कम पकड़ने की संभावना है।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>Jaipur, SachKahoon News:</strong>  राजधानी जयपुर सहित प्रदेश के अधिकांश इलाके शुक्रवार सुबह से घने कोहरे के आगोश में होने के कारण वाहनों की रफ्तार थम गई वहीं रेल और वायु यातायात भी बाधित हुआ। मौसम विभाग के अनुसार जयपुर में तापमान में बढ़ोतरी होने के बावजूद घने कोहरे के कारण सुबह वाहन चालकों को हेड लाइट का सहारा लेना पड़ा। शीतलहर के कारण ग्रामीण इलाकों में लोग घरों में दुबके रहे। वहीं शहरी इलाकों में भी अलाव तापते देखे गये। जयपुर में न्युनतम तापमान दर्ज किया गया जो शुक्रवार रात बढ़ गया, लेकिन सुबह से दोपहर तक कोहरे के कारण धूप नहीं निकलने से शीतलहर का असर बढ़ गया। उत्तर पश्चिम रेलवे के प्रवक्ता ने बताया कि उत्तर प्रदेश और दिल्ली की ओर से आने वाली डेढ़ र्दजन से अधिक रेलगाड़ियां निर्धारित समय से काफी बिलम्ब से चल रही है।</p>
<p><em>एक तरफ जहां घने कोहरे ने वहनों की रफ्तार धीमी की वहीं दूसरी तरफ कहरे की वजह से लोगों के घर के चिराग बूझ गए। आए दिन कोहरे की वजह से सड़क हादसे हो रहे है जिनमें कई लोगों की जान भी चली गई। </em></p>
<p style="text-align:justify;">
<strong>क्या बोले अधिकारी</strong><br />
देश के स्तर पर इस वर्ष ठंड सामान्य से ज्यादा पड़ेगी, लेकिन उत्तर भारत में ठंड कम रहेगी।<br />
<em>-के. जे. रमेश महानिदेशक मौसम विभाग</em></p>
<p><strong>सामान्य से अधिक ठंड की संभावना</strong><br />
मौसम विभाग ने कहा कि इस वर्ष भारत में ठंड सामान्य से ज्यादा रहने की संभावना है, लेकिन उत्तर भारत में सर्दी कम पड़ेगी। यह लगातार दूसरा साल है जब उत्तर भारत में सामान्य से कम ठंड होगी। सर्दियों के पहले पूर्वानुमान में मौसम विभाग ने कहा कि इन सर्दियों में सीडब्ल्यू जोन में भी न्यूनतम तापमान सामान्य से ऊपर रहने की संभावना बहुत ज्यादा (83 प्रतिशत) है। सीडब्ल्यू जोन में जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, विदर्भ और मध्य महाराष्टÑ के कुछ क्षेत्र आते हैं।</p>
<p><strong>दो दर्जन ट्रेनें प्रभावित, कई फ्लाइट्स लेट</strong><br />
कोहरे के चलते उत्तर पश्चिम रेलवे की करीब दो दर्जन ट्रेनें प्रभावित हुई हैं। इधर जयपुर एयरपोर्ट पर जेट एयरवेज की फ्लाइट 9डब्लू-2249/2250 भी लेट हुई है। इस फ्लाट के लेट होने से इसी के जरिए दिल्ली जाने वाले यात्री भी खासे परेशान हैं। उधर, स्पाइसजेट की फ्लाइट एसजी-2623 भी लेट हुई है। ये फ्लाइट जयपुर से उदयपुर जाती है जिसके चलते जयपुर आने वालों के साथ उदयपुर जाने वाले यात्रियों के लिए भी परेशानी हुई है।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Dec 2016 22:29:58 +0530</pubDate>
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