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                <title>शाहीन बाग गोली कांड में गिरी DCP पर गाज, पद से हटाया</title>
                                    <description><![CDATA[शाहीन बाग में लगातार दो गोली कांड हो जाने के बाद चुनाव आयोग ने डीसीपी दक्षिण पूर्वी जिला चिन्मय बिस्वाल को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उसी जिले में तैनात एडिशनल डीसीपी कुमार ज्ञानेश को डीसीपी का चार्ज दिया गया है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-election-commission-has-removed-dcp-district-chinmay-biswal-from-the-post-with-immediate-effect/article-12902"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/election-commission-removed-dcp-chinmay-biswal-post-immediate-effect.jpg" alt=""></a><br /><h2>चिन्मय बिस्वाल 2008 बैच के आइपीएस अफसर हैं | Fusillade</h2>
<p><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong>  शाहीन बाग में लगातार दो गोली कांड (<strong>Fusillade)</strong> हो जाने के बाद चुनाव आयोग ने डीसीपी दक्षिण पूर्वी जिला चिन्मय बिस्वाल को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है। उसी जिले में तैनात एडिशनल डीसीपी कुमार ज्ञानेश को डीसीपी का चार्ज दिया गया है। चिन्मय बिस्वाल को गृह मंत्रालय में रिपोर्ट करने को कहा गया है। बता दें कि चिन्मय बिस्वाल 2008 बैच के आइपीएस अफसर हैं। चुनाव आयोग ने दिल्ली पुलिस कमिश्नर और केंद्रीय गृह मंत्रालय से कहा कि नियमित डीसीपी के लिए वे तीन नामों को भेज सकते हैं। जिस पर विचार के बाद आयोग फैसला लेगा कि किए रेगुलर डीसीपी बनाया जाएगा।</p>
<h2>पुलिस कमिश्नर ने किया शाहीन बाग का दौरा| Fusillade</h2>
<p>वहीं दिल्ली पुलिस कमिश्नर अमूल्य पटनायक ने भी रविवार को शाहीन बाग का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि फायरिंग की दोनों अलग-अलग घटनाएं हैं। हमने शाहीन बाग के साथ-साथ अन्य विरोध स्थलों पर भी विस्तृत व्यवस्था की है। अमूल्य पटनायक ने कहा कि प्रदर्शनकारियों से अपील की गई है कि वह लोगों की परेशानियों को देखते हुए प्रदर्शन को कहीं और जगह पर स्थानांतरित कर लें।</p>
<h2>गोली कांड के बाद कानून व्यवस्था पर उठने लगे थे सवाल</h2>
<ul>
<li><strong>बता दें कि (सीएए) के विरोध में निकाले गए मार्च के दौरान एक नाबालिग ने गोली चला दी थी।</strong></li>
<li><strong> इससे एक छात्र घायल हो गया था। </strong></li>
<li><strong>वहीं शनिवार को एक युवक ने प्रदर्शनकारियों के बीच फायरिंग कर दिया। </strong></li>
<li><strong>इन दोनों मामलों के बाद कानून-व्यवस्था पर सवाल उठने लगे थे। </strong></li>
<li><strong>इस मामले में राजनीति भी गरम है।</strong></li>
<li><strong>बताया जा रहा है कि गोली चलाने वाले नाबालिग ने ममेरे भाई की शादी में चलाने के बहाने तमंचा खरीदा था। </strong></li>
<li><strong>तमंचा खरीदने के लिए उसने अपने जेवर गांव के ही रहने वाले एक दोस्त की मदद ली थी।</strong></li>
<li><strong> दोस्त को उसने बताया था कि उसे शादी में हर्ष फायरिंग करनी है। </strong></li>
<li><strong>इस पर दोस्त ने उसे वारदात से एक दिन पहलेएक शख्स से 10 हजार रुपये में तमंचा खरीदवा दिया था।</strong></li>
</ul>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2020 11:37:32 +0530</pubDate>
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                <title>मानवीय संबंधों की मिठास का अहसास कराती चिट्ठियां</title>
                                    <description><![CDATA[चिट्ठी आई है वतन से चिट्ठी आई है…..और लिखे जो खत तुझे, वो तेरी याद में हजारों रंग के नाारे बन गए…… जैसे गीत हमें कागा पर लिखी उन चिट्ठियों की याद दिलाते हैं, जिनमें सूचनाएँ ही नहीं भावनाओं का इजहार है और गहरी मानवीय संवेदनाएँ हैं। खाकी वर्दी पहने डाकिया जब साईकिल की घंटी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/hindi-article-human-relations/article-3377"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/post.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">चिट्ठी आई है वतन से चिट्ठी आई है…..और लिखे जो खत तुझे, वो तेरी याद में हजारों रंग के नाारे बन गए…… जैसे गीत हमें कागा पर लिखी उन चिट्ठियों की याद दिलाते हैं, जिनमें सूचनाएँ ही नहीं भावनाओं का इजहार है और गहरी मानवीय संवेदनाएँ हैं। खाकी वर्दी पहने डाकिया जब साईकिल की घंटी बजाते हुए घर में चिट्ठी डाल कर जाता है तो दिलो-दिमाग में लहरें उठने लगती हैं। आई हुई चिट्ठी को पढ़ने के लिए पूरे परिवार के बड़े-छोटे इकट्ठे हो जाते हैं और चिट्टी को पढ़ने का उत्साह सबके दिलो-दिमाग पर तारी हो जाता है। चिट्ठी का जवाब भी चिट्ठी और चिट्ठियों का अनंत सिलसिला। मोबाईल और इंटरनेट के इस युग में भले ही बहुतों के लिए चिट्ठी-पत्रों और डाक विभाग के लाल बक्से का कोई महत्व ना हो।</p>
<p style="text-align:justify;">मोबाईल पर मैसेज भेजने और इंटरनेट पर चैटिंग करने वाली युवा पीढ़ी को भले ही चिट्ठियां बीते जमाने की बात लगती हों, लेकिन सच्ची बात तो यह है कि डाक हमारी विरासत और जीवन का अभिन्न हिस्सा है। चिट्ठियों के हवाले से हमें अनेक यादगार फिल्में, उपन्यास, कहानियां और साहित्यक रचनाएं प्राप्त हुई हैं। प्रसिद्ध शख्सियतों के पत्रों में हमारा इतिहास छिपा हुआ है और इस इतिहास को संजोकर रखने की भी जरूरत है और पत्र लेखन संस्कृति को भी पुन: विकसित करने की जरूरत है। विज्ञान और तकनीकी विकास के कारण संचार माध्यमों में हुए क्रांतिकारी परिवर्तनों के बावजूद डाक विभाग द्वारा एक स्थान से दूसरे स्थान पर पहुंचाई जाने वाली चिट्ठियों का महत्व सदा रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">सभ्यता के आरम्भ से ही मानव किसी न किसी रूप में पत्र लिखता रहा है। दुनिया का सबसे पुराना ज्ञात पत्र 2009 ईसा पूर्व का बेबीलोन के खण्डहरों से मिला था, जोकि वास्तव में एक महत्वपूर्ण पत्र था। भावनाओं से ओत-प्रोत इस चिट्ठी के साथ पत्रों की दुनिया ने अपने एक ऐतिहासिक सफर के लिए कदम बढ़ाए होंगे। जब संचार के अन्य साधन न थे, तो पत्र ही संवाद का एकमात्र माध्यम था। पत्रों का काम मात्र सूचना देना ही नहीं बल्कि इनमें एक अजीब रहस्य या गोपनीयता, संग्रहणीयता, लेखन कला एवं अतीत को जानने का भाव भी छुपा होता है। पत्रों की सबसे बड़ी विशेषता इनकी आत्मीयता है। खास लोगों के पत्रों को संजोकर रखने, छुप-छुप कर पढ़ने और पुरानी चिट्ठियों के माध्यम से अतीत में विचरण करने का आनंद शब्दों में बयाँ नहीं किया जा सकता। यह भी सही है कि संचार क्रांति ने पूरी दुनिया को बहुत नजदीक लाकर चिट्ठियों की संस्कृति को समाप्त करने का प्रयास किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">पर इसका एक पहलू यह भी है कि इसने दिलों की दूरियां इतनी बढ़ा दी हैं कि बिल्कुल पास में रहने वाले अपने इष्ट मित्रों और रिश्तेदारों की भी लोग खोज-खबर नहीं रखते। दुनिया भर में बहुत-सी प्रसिद्ध शख्सियतों ने पत्रों को औजार बनाया।मार्क्स-एंजिल्स में ऐतिहासिक मित्रता का सूत्रपात पत्रों से ही हुआ। अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन ने उस स्कूल के प्राचार्य को पत्र लिखा, जिसमें उनका पुत्र अध्ययनरत था। इस पत्र में उन्होंने प्राचार्य से अनुरोध किया था कि उनके पुत्र को वे सारी शिक्षायें दी जाएं जोकि एक बेहतर नागरिक बनने हेतु जरूरी हैं। इसमें किसी भी रूप में उनका पद आडेÞ नहीं आना चाहिये।</p>
<p style="text-align:justify;">पत्रों का संवेदनाओं से गहरा रिश्ता है और यही कारण है कि पत्रों से जुड़े डाक विभाग ने तमाम प्रसिद्ध विभूतियों को मंच प्रदान किया है। विश्व डाक दिवस के अवसर पर इसके सफर पर दृष्टिपात करना उचित रहेगा। एक जुलाई, 1876 को भारत इस संगठन का सदस्य बन गया था इसकी सदस्यता लेने वाला भारत पहला एशियाई देश था। वैसे भारत में डाक सेवाओं का इतिहास बहुत पुराना है। भारत में एक विभाग के रूप में इसकी स्थापना 1अक्तूबर, 1854 को लार्ड डलहौजी के काल में हुई। 9अक्तूबर को विश्व डाक दिवस के बाद 10अक्तूबर को भारतीय डाक दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। संचार के साधनों में क्रांतिकारी परिवर्तनों के कारण भारतीय डाक के समक्ष अनेक प्रकार की चुनौतियां हैं। लेकिन यह एक सुखद संकेत है कि डाक-सेवाएं नवीनतम तकनीक का अपने पक्ष में भरपूर इस्तेमाल कर रही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-अरुण कुमार कैहरबा</strong></em></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Oct 2017 05:33:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भिवानी : सेना में खुली भर्ती 4 से 12 अक्टूबर तक</title>
                                    <description><![CDATA[चरखी दादरी। सेना में विभिन्न पदों की खुली भर्ती भिवानी पुलिस लाईन में चार से 12 अक्तूबर तक की जाएगी। इस भर्ती में भिवानी के अलावा महेन्द्रगढ़, चरखी दादरी तथा रेवाड़ी के युवा भाग ले सकेंगे। सेना भर्ती कार्यालय चरखी दादरी के भर्ती निदेशक कर्नल अजीत सिंह ने बताया कि भर्ती में सैनिक जनरल डयूटी, […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/bhiwani-open-recruitment-in-the-army/article-2944"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/army-post.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>चरखी दादरी।</strong> सेना में विभिन्न पदों की खुली भर्ती भिवानी पुलिस लाईन में चार से 12 अक्तूबर तक की जाएगी। इस भर्ती में भिवानी के अलावा महेन्द्रगढ़, चरखी दादरी तथा रेवाड़ी के युवा भाग ले सकेंगे। सेना भर्ती कार्यालय चरखी दादरी के भर्ती निदेशक कर्नल अजीत सिंह ने बताया कि भर्ती में सैनिक जनरल डयूटी, लिपिक/स्टोर कीपर, तकनीकी और दसवीं कक्षा में उतीर्ण सैनिक ट्रैंडमैन के पदों की भर्ती की जाएगी।</p>
<h2 style="text-align:justify;">वेबसाइट पर भर्ती की पूर्ण जानकारी</h2>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने बताया कि भर्ती के इच्छुक उम्मीदवार वेबसाइट  www.joinindianarmy.nic.in में पंजीकरण करवाएं। आॅनलाइन रजिस्ट्रेशन खोले जा चुके हैं। इच्छुक उम्मीदवारों को इस वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है। बिना रजिस्ट्रेशन के उम्मीदवारों को भर्ती प्रक्रिया में शामिल होने का अवसर नहीं दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि इस वेबसाइट पर भर्ती की सभी शर्तें दी गई हैं, जिनको पूरा करना जरूरी है।</p>
<p style="text-align:justify;">
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]]></content:encoded>
                
                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 06 Aug 2017 09:35:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पद की प्रतिष्ठा बने प्रणब मुखर्जी</title>
                                    <description><![CDATA[माननीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अपनी विलक्षण प्रतिभा, निष्पक्षता एवं संवैधानिक कर्त्तव्यों को बखूबी निभाने के लिए याद रखे जाएंगे। कार्याकाल पूरा होने पर प्रणब ने सरकार एवं विपक्ष के विषय में जिस तरह से अपने विचार रखे हैं, वह राजनीतिक, संसदीय व लोकतांत्रिक प्रणाली में उन द्वारा बिताए लम्बे समय एवं गहन अनुभव का प्रमाण […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;">माननीय राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी अपनी विलक्षण प्रतिभा, निष्पक्षता एवं संवैधानिक कर्त्तव्यों को बखूबी निभाने के लिए याद रखे जाएंगे। कार्याकाल पूरा होने पर प्रणब ने सरकार एवं विपक्ष के विषय में जिस तरह से अपने विचार रखे हैं, वह राजनीतिक, संसदीय व लोकतांत्रिक प्रणाली में उन द्वारा बिताए लम्बे समय एवं गहन अनुभव का प्रमाण हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रणब मुखर्जी ने अपनी कांग्रेस पृष्ठभूमि के बावजूद भाजपा नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के साथ यहां किसी तरह के तनाव बनने की कभी स्थिति पैदा नहीं होने दी, वहीं सरकार को उसके अच्छे-बुरे शासन प्रबंध के प्रति भी प्रशंसा व नसीहतें दी हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रणब मुखर्जी एक बेहतरीन स्टेटसमैन के तौर पर जाने जाएंगे, चूंकि उन्होंने कभी अहसास ही नहीं होने दिया कि भारत का राष्ट्रपति महज एक रबड़ की मोहर है। जाते-जाते भी प्रणब जी सरकार को सचेत कर गए हैं कि आर्थिक अध्यादेश एक लोकतांत्रिक देश में सही नहीं है, वहीं विपक्ष को भी चेताया कि जोश की बजाय संयम अच्छा है।</p>
<p style="text-align:justify;">प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल में नोटबंदी व जीएसटी जैसे क्रांतिकारी निर्णय हुए जिससे देश की आर्थिक गतिविधियों में काफी उथल-पुथल मची। परंतु सरकार की दृढ़ इच्छाशक्ति से उपरोक्त दोनों निर्णय पूरी तरह से लागू हो चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आतंकवाद जो कभी भारत व इजरायल जैसे देशों की समस्या थी व अब उसका रूप वैश्विक हो चुका है पर भी प्रणब मुखर्जी का रूख कठोर रहा, उन्होंने भारत की न्यायपालिका द्वारा फांसी से दण्डितों की 34 दया अपीलों में से 30 को खारिज किया।</p>
<p style="text-align:justify;">दया अपीलों में कुछ तो खूंखार आतंकियों की भी थी। अजमल कसाब, अफजल गुरू, याकूब मेनन जैसे आतंकी प्रणब मुखर्जी के कार्यकाल में ही फांसी पर लटकाए गए। नि:संदेह प्रणब मुखर्जी के विचार एवं शासन कला भावी राजनीतिज्ञों के लिए एक उच्च कोटि की मार्गदर्शक साबित होंगी।</p>
<p style="text-align:justify;">भावी राष्ट्रपतियों के लिए भी प्रणब मुखर्जी ने एक अलिखित आचरण संहिता को छोड़ा है। भारतीय लोकतंत्र में अनेका-नेक राजनीतिक मतभिन्नताएं हैं, परंतु प्रणब मुखर्जी ने फिर भी इस देश की संसदीय व्यवस्था में बेमिसाल शासन प्रबंध दिया। निश्चित ही प्रणब मुखर्जी ने देश के सर्वोच्चय पद की गरिमा को बढ़ाया है, जोकि नए राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद के लिए भी प्रेरणादायी रहेगी।</p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jul 2017 00:32:39 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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