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                <title>CPCB ने 6 राज्यों के 14 थर्मल प्लांट बंद करने की दी चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में 2017 में दायर की गई थी याचिका
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/cpcb-warns-of-closing-14-thermal-plants-in-6-states/article-12935"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/thermal-plants.jpg" alt=""></a><br /><h2>हरियाणा के 5, पंजाब 3, उत्तर प्रदेश 2, आंध्र प्रदेश 2, तेलंगाना 2 और तमिलनाडु का 1 प्लांट शामिल है।</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) ने छह राज्यों के 14 कोयला-आधारित थर्मल पावर प्लांट्स<strong> (Thermal Plants)</strong> को बंद करने की चेतावनी दी है। बोर्ड ने इन प्लांट्स को 31 दिसंबर 2019 तक सल्फर डाइऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करने का समय दिया था, जिसमें यह नाकाम रहे। बोर्ड ने अब इन प्लांट्स को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा है कि क्यों न इन्हें बंद कर दिया जाए और उत्सर्जन को कम करने में विफल रहने पर इन पर जुर्माना ठोका जाए। इनमें हरियाणा के 5, पंजाब 3, उत्तर प्रदेश 2, आंध्र प्रदेश 2, तेलंगाना 2 और तमिलनाडु का 1 प्लांट शामिल है। ऐसे में यदि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड प्लांट्स को बंद करने में सख्ती से पेश आता है तो दिल्ली और एनसीआर में भारी बिजली संकट खड़ा हो सकता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">उत्सर्जन को कम करने का लक्ष्य दिसंबर 2022</h2>
<p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने देश के 166,000 मेगावाट बिजली का उत्पादन करने वाले 440 थर्मल प्लांट्स से पार्टिकुलेट मैटर, सल्फर डाइऑक्साइड और नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन को सीमित करने के लिए दिसंबर 2022 का समय निर्धारण किया है। जबकि दिल्ली के 300 किलोमीटर के दायरे में 11 प्लांट्स को 31 दिसंबर, 2019 तक उत्सर्जन को कम करने के लिए निर्देशो का पालन करना था क्योंकि दिल्ली शहर के साथ गंगा के मैदान भी खराब वायु गुणवत्ता के शिकार हो रहे हैं। इस पर थर्मल प्लांट्स के प्रबंधन ने फ्लू-गैस डिसल्फराइजेशन तकनीक अपनाने को दावा किया था। हालांकि कुछ प्लांट्स के प्रबंधन का कहना था कि अभी उन्हें इस तकनीक को अपनाने के लिए टैंडर करवाने हैं। इनमें से केवल एक ही थर्मल प्लांट वास्तव में उत्सर्जन को सीमित करने के लिए प्रौद्योगिकी को लागू कर पाया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">देना होगा माह के अंत तक जवाब</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल में 2017 में एक याचिका दायर की गई थी। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>जो विचार अभी विचाराधीन है। </strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>इसके अलावा इन प्लांट्स को दिए गए विस्तार समय को लेकर उच्चतम न्यायालय में एक मामला चल रहा है।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong> CPCB ने इन 14 प्लांट्स को इस महीने के अंत तक का समय दिया है ।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>और पूछा है कि उन्होंने मानदंडों का अनुपालन क्यों नहीं किया है ।</strong></li>
<li style="text-align:justify;"><strong>और कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए ?</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि सीपीसीबी के पास पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कठोर जुर्माना लगाने या पावर प्लांट्स को बंद करने की शक्ति है। सेंटर फॉर साइंस एंड एनवायरनमेंट (सीएसई) के अनुमानों के मुताबिक प्लांट्स से निकलने वाले पार्टिकुलेट मैटर को 35 फीसदी तक घटाया जा सकता है। इसमें नाइट्रस ऑक्साइड उत्सर्जन में लगभग 70 फीसदी और सल्फर डाइऑक्साइड उत्सर्जन में 2026-27 तक 85 फीसदी कमी लाई जा सकती है।</p>
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<p><span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">CPCB, Warns, Closing, 14 Thermal, Plants, six, States</span></span></p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 06 Feb 2020 12:02:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आदेश पर अमल न करने को लेकर राज्यों पर जुमार्ना</title>
                                    <description><![CDATA[याचिकाकर्ता की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने दलील दी थी कि विधि आयोग ने 1986 में अपनी 114वीं रिपोर्ट में समाज के वंचित समुदायों को न्याय दिलाने के लिए ग्राम न्यायालयों की स्थापना की सिफारिश की थी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/fines-on-states-for-not-following-orders/article-12801"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/fine-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">ग्राम न्यायालय स्थापना मामला: (<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Fine)</span></span></h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> उच्चतम न्यायालय ने गांवों के गरीब परिवारों को न्याय सुनिश्चित करने के लिए ग्राम अदालतों की स्थापना संबंधी आदेश पर अमल न करने को लेकर कई राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को बुधवार को फटकार लगायी और (<span class="tlid-translation translation" lang="en" xml:lang="en"><span title="">Fine) </span></span>जुमार्ना भी लगाया। न्यायमूर्ति एन वी रमन की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने गैर सरकारी संगठन नेशनल फेडरेशन आॅफ सोसाइटीज फॉर फास्ट जस्टिस की याचिका पर सुनवाई करते हुए असम, चंडीगढ़, गुजरात, हरियाणा, ओडिशा, पंजाब, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल पर एक-एक लाख रुपये का जुमार्ना लगाया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">न्यायालय ने राज्यों को एक महीने में ग्राम न्यायालय के गठन संबंधी अधिसूचना जारी करने का आदेश दिया है।</h3>
<p style="text-align:justify;">संसद ने 2008 में कानून पारित किया था, जिसमें जमीनी स्तर पर ग्राम न्यायालय बनाने का प्रावधान था, ताकि लोगों को जल्द न्याय मिल सके। याचिकाकर्ता की ओर से पेश प्रशांत भूषण ने दलील दी थी कि विधि आयोग ने 1986 में अपनी 114वीं रिपोर्ट में समाज के वंचित समुदायों को न्याय दिलाने के लिए ग्राम न्यायालयों की स्थापना की सिफारिश की थी।  याचिका में कहा गया है कि 2008 में संबंधित कानून बनाए जाने के बावजूद 11 राज्यों ने 2009-10 से 2017-18 तक केवल 320 ग्राम न्यायालय अधिसूचित किए।  इनमें 204 में ही काम चल रहा है।</p>
<p> </p>
<p><a href="http://10.0.0.122:1245/">Hindi</a><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/"> News </a>से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें <a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a> और <a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a> पर फॉलो करें।</strong></p>
<p> </p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jan 2020 18:15:59 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>लोकतंत्र के यज्ञ में एक आहुति मेरी भी</title>
                                    <description><![CDATA[पांच राज्यों की विधानसभा चुनावों का अंतिम चरण पिछले करीब दो माह से चल रहे पांच राज्यों की विधानसभा चुनावों का अंतिम चरण आ गया है ( assembly elections of five states) । अंतिम चरण में राजस्थान व तेलंगाना में 7 दिसंबर को मतदान होने जा रहा है। इससे पहले छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और मिजोरम में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/assembly-elections-of-five-states/article-6817"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-12/assembly-elections.jpg" alt=""></a><br /><h2>पांच राज्यों की विधानसभा चुनावों का अंतिम चरण</h2>
<p style="text-align:justify;">पिछले करीब दो माह से चल रहे पांच राज्यों की विधानसभा चुनावों का अंतिम चरण आ गया है<strong> ( assembly elections of five states)</strong> । अंतिम चरण में राजस्थान व तेलंगाना में 7 दिसंबर को मतदान होने जा रहा है। इससे पहले छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और मिजोरम में मतदान हो चुका है। सभी पांचों राज्यों मं मतगणना 11 दिसंबर को एक साथ होगी। राजस्थान विधानसभा के लिए 200 विधायकों को चुनने का मतदान पर्व आ गया है। हांलाकि एक प्रत्याषी के निधन के कारण अब 199 सीटों के लिए ही 7 दिसंबर को मतदान होगा। चुनाव आयोग ने चुनाव की आवश्यक सभी तैयारियां करते हुए निष्पक्ष व निर्भिक होकर मतदान का अवसर उपलब्ध कराया है। इस बीच एक बड़ा बदलाव नए मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा द्वारा दो दिसंबर को कार्यभार संभालना और निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव की प्रतिवद्धता जाहिर की है।</p>
<h2>आज प्रदेश में करीब 4 करोड़ 72 लाख मतदाता हैं।</h2>
<p style="text-align:justify;">युवावर्ग देश का नया भाग्य विधाता बन रहा है। आज प्रदेश में करीब 4 करोड़ 72 लाख मतदाता हैं। इनमें भी युवाओं की संख्या ढ़ाई करोड़ के आसपास है। देश के अन्य हिस्सों से प्राप्त मतदान प्रतिशत के आंकड़ों से साफ होता जा रहा है कि अब इन युवा मतदाताओं का योगदान अधिक है। यह भी सही है कि बदलाव की इस बयार का श्रेय भी युवाओं को ही जा रहा है। युवा मतदाताओं के कारण ही मतदान प्रतिशत में बढ़ोतरी हो रही है। युवा और महिलाएं मतदान के लिए आगे आ रही है। दूसरी और तथाकथित वुद्धिजीवी वर्ग मतदान के इस पर्व पर शब्दों की जुगाली तक ही सीमित होता जा रहा है।</p>
<h2>जो वोट नहीं देते उन्हें सरकार से कुछ सवाल पूछने या सरकार को दोष देने का हक भी नहीं है।</h2>
<p style="text-align:justify;">आखिर ऐसा क्यों होता जा रहा है? क्या वौद्धिक वर्ग सोशियल मीडिया पर कमेंट चस्पा करने, दूसरों की कमियां गिनाने, और जब स्वयं को मतदान करना है तो दूर बैठे खेल देखने में ही विश्वास क्यों रखता है? क्या इस वुद्धिजीवी वर्ग का मतदान करने का दायित्व नहीं है। यह इस कारण से कहा जा रहा है कि एलिट क्लास के मतदान केन्द्रों पर ही मतदान का प्रतिशत कम देखने को मिलता रहा है। यहां देश के सर्वोच्चय न्यायालय की यह टिप्पणी अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है कि जो वोट नहीं देते उन्हें सरकार से कुछ सवाल पूछने या सरकार को दोष देने का हक भी नहीं है। यह वास्तव में लोकतंत्र का मजाक उड़ाने वालों के गाल पर बड़ा तमाचा है। जब सरकार चुनने का अवसर आता है तो तथाकथित बुद्धिजीवी टीका टिप्पणियों मे तो आगे रहते हैं पर मतदान केन्द्र तक जाकर मताधिकार के उपयोग से दूर रहते हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">मतदान का प्रतिशत कम से कम 90 प्रतिशत तो होना ही चाहिए</h2>
<p style="text-align:justify;">दुनिया को सबसे बड़े लोकतंत्र का दावा करते हैं तो फिर मतदान का प्रतिशत कम से कम 90 प्रतिशत तो होना ही चाहिए। 90 प्रतिशत भी क्यों सभी मतदाताओं को अपने मताधिकार का प्रयोग करने आगे आना चाहिए। यह कोई बौद्धिक खेल का मैदान नहीं है कि हम केवल शब्दों की जुगाली में तो आगे रहे पर मतदान के लिए मतदान केन्द्र तक नहीं पंहुचे। दरअसल जो अपने आपको तथाकथित बुद्धिजीवी कहते हैं, बहसों में लंबे-लंबे वक्तव्य देते हैं, एलिट वर्ग के कहलाने में गर्वित महसूस करते हुए उन्हीं का मतदान के प्रति सबसे कम रुझान होता है। मतदान के आंकड़े इसी ओर इशारा करते हैं। पॉश कॉलोनियों का मतदान का स्तर सबसे कम होता है। जबकि सेमिनारों, गोष्ठियों और चर्चा में यही वर्ग आगे आकर वोट नहीं का अधिकार, चुनाव प्रक्रिया में सुधार, चुनाव प्रक्रिया में कमियों और ना जाने क्या क्या गिनाने में आगे रहता है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जनीतिक दलों के चुनाव प्रचार का दौर लगभग अंतिम चरण में पहुंच गया है।</h2>
<p style="text-align:justify;">वेबसाइट पर सारी जानकारी उपलब्ध कराने के बावजूद वोटर लिस्ट में नाम नहीं होने या अन्य इसी तरह के आरोप लगाना बेमानी हो जाता है। निर्वाचन विभाग के जागरुकता प्रयासों की जितनी सराहना की जाए उसे कम ही कहा जाएगा। राजनीतिक दलों के चुनाव प्रचार का दौर लगभग अंतिम चरण में पहुंच गया है। प्रत्याशियों की तस्वीर सामने आ चुकी है। प्रमुख दलों के घोषणा पत्र सामने आ चुके हैं। अपने सही व्यक्ति को चुनने का समय आपके सामने आ गया है। चुनाव आयोग द्वारा आसानी से मतदान की सभी व्यवस्थाएं चाकचोबंद कर दी गई हैं। आओ संकल्प करे, घर से बाहर निकलें केवल दस मिनट का समय निकालें, 7 दिसंबर को बीच मतदान केन्द्र पर जाकर अपने दायित्व का निर्वहन करें, मतदान करें, दूसरों को मतदान के लिए प्रेरित करें। लोकतंत्र के महापर्व में अपना मतदान कर आहुति प्रदान करें। यह हमारा दायित्व है, कर्तव्य है और देश के नागरिक होने का फर्ज है कि हम मतदान अवश्य करे।</p>
<p style="text-align:right;"><strong>डॉ. राजेन्द्र प्रसाद शर्मा</strong></p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Dec 2018 20:10:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सत्यपाल मलिक जम्मू-कश्मीर और लालजी टंडन बने बिहार के राज्यपाल</title>
                                    <description><![CDATA[राष्ट्रपति ने बड़ा फेरबदल करते हुए बदले  सात राज्यों के राज्यपाल नई दिल्ली(एजेंसी)।राष्ट्रपति ने बड़ा फेरबदल करते हुए कई राज्यों के राज्यपाल बदल दिए हैं। इनमें जम्मू कश्मीर और बिहार के अलावा हरियाणा, उत्तराखंड, सिक्किम, मेघालय और त्रिपुरा शामिल हैं। बिहार के मौजूदा राज्यपाल सत्यपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया है। सत्यपाल मलिक […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/the-president-instead-of-the-governor-of-seven-states/article-5492"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-08/governar.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">राष्ट्रपति ने बड़ा फेरबदल करते हुए बदले  सात राज्यों के राज्यपाल</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong>राष्ट्रपति ने बड़ा फेरबदल करते हुए कई राज्यों के राज्यपाल बदल दिए हैं। इनमें जम्मू कश्मीर और बिहार के अलावा हरियाणा, उत्तराखंड, सिक्किम, मेघालय और त्रिपुरा शामिल हैं। बिहार के मौजूदा राज्यपाल सत्यपाल मलिक को जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया है। सत्यपाल मलिक की जगह अब उत्तरप्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन बिहार के राज्यपाल होंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">चार राज्यपालों के राज्य बदलने के साथ ही तीन नए राज्यपाल को नियुक्त किया गया है। नए नियुक्त राज्यपालों में उत्तरप्रदेश भाजपा के वरिष्ठ नेता लालजी टंडन, सत्यदेव नारायण राव और बेबी रानी मौर्य शामिल हैं। बेबी रानी मौर्य को उत्तराखंड का राज्यपाल बनाया गया। उत्तर प्रदेश की रहने वाली मौर्य भी भाजपा नेता हैं और महिला आयोग से जुड़ी हुई हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">सत्यदेव नारायण आर्य को हरियाणा का नया राज्यपाल बनाया</h2>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड में केके पाल का कार्यकाल समाप्त हो गया था। सत्यदेव नारायण आर्य को हरियाणा का नया राज्यपाल बनाया गया है। हरियाणा के मौजूदा राज्यपाल कप्तान सिंह सोलंकी को त्रिपुरा का राज्यपाल बनाया गया है और वहां के मौजूदा राज्यपाल तथागत राय को मेघालय भेज दिया गया है। जबकि मेघालय के मौजूदा राज्यपाल गंगा प्रसाद को सिक्किम का राज्यपाल बनाया गया है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जम्मू को साढ़े तीन दशक बाद राजनीतिक राज्यपाल</h2>
<p style="text-align:justify;">गौरतलब है कि लगभग साढ़े तीन दशक बाद जम्मू-कश्मीर को राजनीतिज्ञ राज्यपाल मिला है। 1984 में जगमोहन के राज्यपाल बनने के बाद जम्मू-कश्मीर में कभी किसी राजनीतिज्ञ को राज्यपाल नियुक्त नहीं किया गया। आतंकवाद से ग्रसित और कानून-व्यवस्था की समस्या से जूझ रहे राज्य में सेवानिवृत नौकरशाहों और सैन्य अधिकारियों को राज्यपाल नियुक्त किया जाता रहा है। 31 अगस्त को 10 साल का कार्यकाल पूरा करने जा रहे एनएन वोहरा खुद पूर्व नौकरशाह हैं। साढ़े तीन दशक बाद राजनीतिज्ञ को राज्यपाल नियुक्त कर केंद्र सरकार ने राज्य में राजनीतिक प्रक्रिया को तेज करने का संकेत दिया है। लालकिले से स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री ने जल्द ही जम्मू-कश्मीर में पंचायतों और स्थानीय निकायों का चुनाव करने का ऐलान किया था। इससे निचले स्तर पर आम जनता को राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल होने का मौका मिलेगा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">यह मेरे लिए अटल जी का आशीर्वाद : टंडन</h2>
<p style="text-align:justify;">बिहार के मनोनीत राज्यपाल लालजी टंडन ने अपने मनोनयन की घोषणा के बाद मंगलवार की शाम कहा कि ये पद उनके लिए अटल जी का आशीर्वाद स्वरूप है। वे अगर आज जिंदा होते तो जरूर मेरे आवास पर आकर मेरे कंधे पर हाथ रख कर बधाई देते। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुझे जो जिम्मेदारी दी है, उसको हरसंभव तरीके से निभाउंगा। बिहार में सुशासन के लिए चल रहे अभियान में नीतीश कुमार सरकार को पूरा सहयोग करूंगा। घोषणा के बाद टंडन के त्रिलोकनाथ रोड स्थित सरकारी आवास पर लोगों का जुटना शुरू हो गया। शाम करीब 8:00 बजे तक अनेक लोग जमा हो गए।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Aug 2018 09:11:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>चेतावनी, आज कई राज्यों में मुसीबत बनकर बरसेंगे बदरा</title>
                                    <description><![CDATA[उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, हिमाचल प्रदेश में अलर्ट जारी Warning, today in many states trouble will become bad नई दिल्ली(एजेंसी)। समय से पूर्व आए मानसून की वजह से देश में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं जमकर बरसात हो रही है। इस बीच मौसम विभाग की तरफ से जुलाई के पहले सप्ताह में देश के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/warning-today-in-many-states-trouble-will-become-bad-2/article-4593"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/trouble-will-become-bad.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, हिमाचल प्रदेश में अलर्ट जारी</h2>
<h3 style="text-align:justify;">Warning, today in many states trouble will become bad</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> समय से पूर्व आए मानसून की वजह से देश में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं जमकर बरसात हो रही है। इस बीच मौसम विभाग की तरफ से जुलाई के पहले सप्ताह में देश के कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है <strong>(Warning, today in many states trouble will become bad)</strong>। मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, पश्चिम बंगाल, बिहार, हिमाचल प्रदेश, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, सिक्किम, नगालैंड, मणिपुर, त्रिपुरा व मिजोरम में रविवार को भारी बारिश होने को लेकर अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग की ओर से जारी किए गए अलर्ट के बाद प्रशासन ने राहत एवं बचाव कार्य को लेकर संबंधित अधिकारियों को सतर्क रहने एवं किसी भी स्थिति से निपटने के निर्देश दिए हैं।</p>
<h2 style="text-align:justify;">छह जुलाई तक मानसून की सक्रियता हिमालय के तराई क्षेत्र में रहेगी</h2>
<p style="text-align:justify;">मौसम विभाग द्वारा व्यक्त पूर्वानुमान के मुताबिक एक से छह जुलाई तक मानसून की सक्रियता हिमालय के तराई क्षेत्र में रहेगी <strong>(Warning, today in many states trouble will become bad)</strong>। इसके परिणामस्वरूप पश्चिमी हिमालयन क्षेत्र में जम्मू कश्मीर और हिमाचल प्रदेश तथा उत्तर प्रदेश के उत्तरी इलाकों में अधितर स्थानों जबकि पंजाब, हरियाणा और बिहार के कुछ इलाकों में रविवार से मंगलवार तक मूसलाधार बारिश हो सकती है। इस बीच दिल्ली और आसपास के इलाकों में छिटबुट बारिश होने की संभावना है।</p>
<h2 style="text-align:justify;">उत्तराखंड में जनजीवन प्रभावित</h2>
<p style="text-align:justify;">उत्तराखंड में जनजीवन पर मौसम के तेवर भारी पड़ने लगे हैं। मौसम विभाग ने तीन जुलाई तक राज्य में भारी बारिश का अलर्ट जारी कर दिया है। हालात को देखते हुए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने सभी जिलाधिकारियों को सतर्क रहने के आदेश दिए हैं। आपदा प्रबंधन से जुड़े महकमों को तैयार रहने के लिए कहा गया है।</p>
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                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Jul 2018 08:50:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>9 राज्यों में झुलसाने वाली गर्मी, पारा 45 के पार</title>
                                    <description><![CDATA[झालावाड़ और बारां में भी तापमान 48 डिग्री नई दिल्ली (एजेंसी)। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही है। पूरे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से लू की चपेट में हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/gruesome-summer-in-9-states-mercury-crosses-45/article-3812"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/summer.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:justify;">झालावाड़ और बारां में भी तापमान 48 डिग्री</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र समेत उत्तर भारत के ज्यादातर हिस्सों में झुलसाने वाली गर्मी पड़ रही है। पूरे उत्तर प्रदेश, दिल्ली, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्से लू की चपेट में हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, हरियाणा, पंजाब आैर जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों में अगले दो-तीन दिन तक लू का कहर जारी रहेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर भारत में अगले पांच दिन तापमान में कोई गिरावट आने का अनुमान नहीं है। मौसम विभाग ने लू का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग के अनुसार रविवार को मध्य प्रदेश का खजुराहो देश में सबसे गर्म रहा जहां पारा 47.2 डिग्री तक चढ़ गया। हालांकि, राजस्थान के बूंदी में तहसील कार्यालय के अनुसार रविवार को सबसे ज्यादा तापमान 48 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ। झालावाड़ और बारां में भी तापमान 48 डिग्री बताया गया।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/gruesome-summer-in-9-states-mercury-crosses-45/article-3812</link>
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                <pubDate>Mon, 28 May 2018 08:10:16 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>5 राज्यों में तूफान का खतरा, हरियाणा समेत उत्तर भारत में चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[पानीपत (Varta)। देश के कई हिस्से में आंधी-तूफान के बीच कई तटीय राज्यों को चक्रवाती तूफान सागर को लेकर चेतावनी जारी की गई है। अदन की खाड़ी में यह चक्रवात उठा है। वहीं हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में गुरुवार को भी धूल भरी आंधी आई और बारिश की संभावना है। हरियाणा में शुक्रवार […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/5-states-danger-to-storm/article-3693"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-05/storm.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>पानीपत (Varta)। </strong>देश के कई हिस्से में आंधी-तूफान के बीच कई तटीय राज्यों को चक्रवाती तूफान सागर को लेकर चेतावनी जारी की गई है। अदन की खाड़ी में यह चक्रवात उठा है। वहीं हरियाणा समेत उत्तर भारत के कई हिस्सों में गुरुवार को भी धूल भरी आंधी आई और बारिश की संभावना है। हरियाणा में शुक्रवार सुबह से ही बारिश का मौसम बना हुई है। मौसम विभाग ने तमिलनाडु, केरल, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र और लक्षद्वीप में चक्रवाती तूफान ‘सागर’ की चेतावनी दी है। मछुआरों को समुद्र से लौटने की सलाह दी गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">मौसम विभाग के मुताबिक अदन की खाड़ी में समुद्री चक्रवात ‘सागर’ उठा है। अगले 12 घंटों में यह भारत की ओर बढ़ेगा। इससे शुक्रवार, शनिवार और रविवार को पश्चिम, दक्षिण और दक्षिण-पश्चिम हिस्सों में तेज आंधी-तूफान के साथ बारिश हो सकती है। मौसम विभाग ने कहा है कि इस पश्चिमी चक्रवात के कारण अगले तीन दिनों के दौरान देश के कई हिस्सों में आंधी-तूफान और बारिश होगी। हालांकि इससे गुजरात का तटीय हिस्सा ज्यादा प्रभावित नहीं होगा। चक्रवात को देखते हुए एेहतियातन राज्य के सभी बंदरगाहों पर नंबर दो सिग्नल की चेतावनी जारी की गई है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 18 May 2018 03:07:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लोकायुक्त नियुक्ति मामला : राज्यों के मुख्य सचिवों से मांगा जवाब</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की नियुक्तियों से जुड़े एक मामले में केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी और 12 राज्यों के मुख्य सचिवों से दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ ने भारतीय जनता पार्टी के नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>उच्चतम न्यायालय ने लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की नियुक्तियों से जुड़े एक मामले में केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी और 12 राज्यों के मुख्य सचिवों से दो सप्ताह के भीतर जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति आर भानुमति की पीठ ने भारतीय जनता पार्टी के नेता अश्विनी उपाध्याय की याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु सहित 12 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेश पुड्डुचेरी के मुख्य सचिवों से दो सप्ताह के भीतर यह जवाब देने को कहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">कि उनके यहां अभी तक लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की नियुक्तियां क्यों नहीं हुई? सुनवाई शुरू होते ही न्यायालय ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश वकील गोपाल शंकरनारायणन से पूछा कि किस राज्य ने लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की नियुक्ति की है और किसने नहीं, हालांकि उनके पास इसका कोई जवाब नहीं था। तब न्यायमूर्ति गोगोई ने खुद एक सूची निकाली और उसमें दर्ज उन राज्यों के नाम पढ़ने शुरू कर दिये, जिन्होंने लोकायुक्त या उपलोकायुक्त की नियुक्ति नहीं की है। इस सूची में दिल्ली, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर और तमिलनाडु के अलावा अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, पुड्डुचेरी, तेलंगाना, उत्तराखंड और त्रिपुरा शामिल हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पीठ ने इन राज्यों के मुख्य सचिवों को दो सप्ताह के भीतर हलफनामा दायर करने का निर्देश दिया। न्यायालय ने इन राज्यों से पूछा है कि आखिर इन राज्यों ने अभी तक लोकायुक्त या उपलोकायुक्तों की नियुक्ति क्यों नहीं की है? याचिकाकर्ता का कहना है कि लोकपाल एवं लोकायुक्त कानून, 2013 को एक जनवरी 2014 को राष्ट्रपति की मंजूरी मिल गयी और यह 16 जनवरी 2014 से अमल में आ गया, इसके बावजूद इतने वर्षों से न तो केंद्र सरकार ने लोकपाल नियुक्त किया है, न ही विभिन्न राज्यों में लोकायुक्त या उपलोकायुक्त नियुक्त किये गये हैं।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Mar 2018 07:36:56 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राज्यों तक पहुंचे केंद्र की नीति</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने भिन्न-भिन्न राज्यों में गैर-जिम्मेवार 381 उच्च अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए किसी को समय से पहले सेवामुक्ति व किसी की तनख्वाह एवं भत्तों में कटौती की है। सरकार के इस निर्णय की पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली व दृढ़ता साफ नजर आ रही है। मोदी की ओर से बार-बार उच्चाधिकारियों […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/center-policy-reach-states/article-2617"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/center-policy.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">केंद्र सरकार ने भिन्न-भिन्न राज्यों में गैर-जिम्मेवार 381 उच्च अधिकारियों के विरूद्ध कार्रवाई करते हुए किसी को समय से पहले सेवामुक्ति व किसी की तनख्वाह एवं भत्तों में कटौती की है। सरकार के इस निर्णय की पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कार्यशैली व दृढ़ता साफ नजर आ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">मोदी की ओर से बार-बार उच्चाधिकारियों को सचेत किया जाता है कि वह काम करें, प्रधानमंत्री का कहना है कि सभी को काम करना होगा, क्योंकि काम ही इस सरकार में नौकरी का आधार है। यहां तक कि इस सरकार में भाजपा सांसदों एवं मंत्रियों को भी तेजी से कार्य करने की नसीहत है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस बात में कोई दो राय नहीं कि केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों में सरकारी कामकाज में तेजी साफ देखी जा सकती है। अफसरशाही की जवाबदेही तय हो रही है। भूतल परिवहन के भारी भरकम कार्य हों या पर्यावरण मंत्रालय में फंसी हजारों फाइलों का निपटारा सब काम पूरी चुस्ती से हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">परंतु राज्यों के प्रशासन में अभी भी अफसरशाही एवं कर्मचारियों में कामों को लेकर मनमर्जी चल रही है। राज्य प्रशासन अभी भी अपनी भ्रष्ट कार्यशैली को छोड़ने के लिए तैयार नहीं।</p>
<p style="text-align:justify;">आमजन को सरकारी कार्यालयों में मामूली कागजात पाने के लिए, छोटे-छोटे कामों के लिए चक्कर कटवाए जाते हैं, जो थोड़ी बहुत रिश्वत दे देता है या किसी राजनेता का समर्थक है उसका काम हो जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यदि सार्वजनिक एवं विकास कार्याें की बात करें तब लोगों के काम धरने-प्रदर्शनों के बाद ही किए जाते हैं। अभी बरसात का मौसम है। शहरी आबादी हर जगह जलभराव की समस्या से जूझ रही है, जबकि ये समस्याएं आती नहीं यदि प्रशासन समय रहते जलनिकासी प्रबंधों को दुरूस्त कर लेता।</p>
<p style="text-align:justify;">अत: केंद्रीय सरकार की कार्यशैली को राज्य स्तर तक भी प्रभावी बनाया जाए। राज्य सरकारें यदि प्रशासन को चाक-चौबंद कर लें तब यहां देश की आबादी को बड़ी राहत मिलेगी, वहीं विकास कार्याें में तेजी आएगी एवं भ्रष्टाचार रूकेगा। लेकिन कोई भी सुधार अनुशासित तरीके से कठोरता की मांग करता है जोकि राजनीतिज्ञों को करनी चाहिए।</p>
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                <pubDate>Wed, 26 Jul 2017 00:46:47 +0530</pubDate>
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