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                <title>Mahatma Gandhi - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Narendra Modi: लोकसभा चुनाव के बीच महात्मा गांधी को लेकर पीएम मोदी का चौंकाने वाला दावा!</title>
                                    <description><![CDATA[Prime Minister Modi: नई दिल्ली (एजेंसी)। पहले महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को कोई नहीं जानता था और ‘गांधी’ फिल्म रिलीज क्या हुई, पूरी दुनिया ही उनके बारे में जानने लग गई। एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बात कही। पीएम मोदी ने कहा, ‘‘पिछले 75 वर्षों में, क्या महात्मा गांधी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pm-modis-big-claim-about-mahatma-gandhi-amidst-the-lok-sabha-elections/article-58105"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/pm-modi4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Prime Minister Modi: नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> पहले महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) को कोई नहीं जानता था और ‘गांधी’ फिल्म रिलीज क्या हुई, पूरी दुनिया ही उनके बारे में जानने लग गई। एक मीडिया चैनल को दिए इंटरव्यू में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह बात कही। पीएम मोदी ने कहा, ‘‘पिछले 75 वर्षों में, क्या महात्मा गांधी को दुनिया भर में पहचान दिलाने की हमारी जिम्मेदारी नहीं थी? मुझे माफ करें, लेकिन महात्मा गांधी को कोई नहीं जानता था। ‘गांधी’ फिल्म बनने के बाद दुनिया में उनके बारे में जिज्ञासा बढ़ी।’’ Narendra Modi</p>
<p style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री ने कहा, ‘‘इस देश की भूमिका थी – अगर दुनिया मार्टिन लूथर किंग और नेल्सन मंडेला को जानती है तो गांधीजी उनसे कम नहीं थे। गांधी और भारत को गांधी के जरिए महत्व दिया जाना चाहिए था।’’ 1982 में रिलीज हुई ‘गांधी’ फिल्म राष्ट्रपिता की यात्रा पर आधारित जीवनी थी। यह फिल्म गांधी के 79 वर्षों में से 56 वर्षों को दर्शाती है। यह फिल्म ‘वकील (गांधी) के जीवन को दर्शाती है, जो अहिंसक विरोध के अपने दर्शन के माध्यम से ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय विद्रोह के प्रसिद्ध नेता बन गए’’।</p>
<p><a title="Gold Price Today : सोने की कीमत में उछाल, चांदी भी उछली!" href="http://10.0.0.122:1245/gold-price-jumps-silver-also-jumps/">Gold Price Today : सोने की कीमत में उछाल, चांदी भी उछली!</a></p>
<p style="text-align:justify;">‘गांधी’ ने 1983 में 55वें अकादमी पुरस्कार में आठ ऑस्कर जीते। फिल्म निर्देशक रिचर्ड एटनबरो ने सर्वश्रेष्ठ फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशन के लिए बाफ्टा पुरस्कार भी जीते। ऐतिहासिक महाकाव्य 16 नामांकन के साथ बाफ्टा की सबसे अधिक नामांकित फिल्म बनी हुई है, जिसमें से इसने पांच जीते। और तो और उन्हें 1983 में बाफ्टा फेलोशिप भी मिली।</p>
<h3 style="text-align:justify;">क्या 1982 से पहले गांधी को कोई जानता था? Narendra Modi</h3>
<p style="text-align:justify;">1953 में, गांधी अमेरिकी फीचर डॉक्यूमेंट्री ‘महात्मा गांधी: 20वीं सदी के पैगंबर’ का विषय थे। IMDB की रिपोर्ट के अनुसार 1937 में ए.के. चेट्टियार ने डॉक्यूमेंट्री पर काम शुरू किया था। 1963 में ब्रिटिश-अमेरिकी थ्रिलर-ड्रामा फिल्म ‘नाइन ऑवर्स टू रामा’ रिलीज हुई थी। इसका निर्देशन मार्क रॉबसन ने किया था। कहानी महात्मा गांधी की हत्या की नाथूराम गोडसे की योजना के ‘काल्पनिक आख्यान’ पर आधारित है।</p>
<p style="text-align:justify;">1968 में गांधी के जीवन पर ‘महात्मा: लाइफ ऑफ गांधी, 1869-1948’ नामक एक डॉक्यूमेंट्री बनाई गई थी, जिसका निर्देशन विट्ठलभाई झावेरी ने किया था। दुनिया भर में गांधी की कुछ प्रसिद्ध और पुरानी मूर्तियाँ 1. आध्यात्मिक रिट्रीट के संस्थापक परमहंस योगानंद द्वारा 1950 में लेक श्राइन, कैलिफोर्निया, यूएसए के अंदर एक गांधी विश्व शांति स्मारक बनाया गया था। कथित तौर पर यह ‘महात्मा गांधी के सम्मान में बनाया गया दुनिया का पहला स्मारक’ था। इसमें एक हजार साल पुराना चीनी ताबूत शामिल था, जिसमें गांधी की राख का एक हिस्सा पीतल-चांदी के ताबूत में रखा गया है।</p>
<h3>यूरोप में 1969 में गांधीजी की 100वीं जयंती के अवसर पर स्थापित की गई थी</h3>
<p style="text-align:justify;">2. यूरोप में महात्मा गांधी की सबसे पुरानी मूर्तियों में से एक ब्रुसेल्स हाउस में मोलेनबीक कम्यून के पार्क मैरी जोसी में स्थित है। बेल्जियम में भारतीय दूतावास की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के अनुसार, प्रसिद्ध बेल्जियम कलाकार रेने क्लिकेट द्वारा गढ़ी गई यह मूर्ति 1969 में गांधीजी की 100वीं जयंती के अवसर पर स्थापित की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">3. 17 मई, 1968 को लंदन के टैविस्टॉक स्क्वायर में तत्कालीन प्रधानमंत्री हेरोल्ड विल्सन द्वारा ‘यूसीएल के पूर्व छात्र’ महात्मा गांधी की एक मूर्ति का अनावरण किया गया था। यूसीएलए की वेबसाइट के अनुसार, ब्रिटिश मूर्तिकार फ्रेडा ब्रिलियंट द्वारा बनाई गई यह मूर्ति 1967 में ब्रिटेन में भारतीय उच्चायुक्त द्वारा लंदन को उपहार में दी गई थी और विल्सन द्वारा इसका अनावरण किया गया था। Narendra Modi</p>
<p style="text-align:justify;">4. गांधी की एक मूर्ति अफ्रीका के युगांडा के जिंगा में नील नदी के स्रोत के पास उनकी मृत्यु और विरासत को चिह्नित करने के लिए बनाई गई थी। रिपोर्ट के अनुसार, 1948 में महात्मा गांधी की अस्थियों का कुछ हिस्सा दुनिया की कई बड़ी नदियों में बिखेर दिया गया था, जिसमें युगांडा की नील नदी भी शामिल है। स्मारक उसी जगह के पास है। प्रतिमा 1997 में स्थापित की गई थी।</p>
<p style="text-align:justify;">5. कनाडा में ओंटारियो के प्रीमियर डेविड पीटरसन ने 15 मई, 1988 को वॉयस ऑफ वेदाज मैदान में महात्मा गांधी की प्रतिमा का अनावरण किया था। इस परियोजना को टोरंटो ऑर्गनाइजेशन फॉर द प्रमोशन ऑफ द इंडियन कल्चर इंक. (TOPIC) द्वारा प्रायोजित किया गया था, जो 1982 में गठित एक समूह है। यह जानकारी विष्णु मंदिर द्वारा साझा की गई थी, ‘कनाडा में 1982 में स्थापित रिचमंड हिल में पहला वास्तुशिल्प रूप से संरचित हिंदू मंदिर’। मोदी ने कहा-‘कोई नहीं जानता था महात्मा गांधी को…’: Narendra Modi</p>
<p><a title="Indian Railways: यह रेलगाड़ी पटरी से उतरी, 20 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित, हैल्पलाइन नंबर जारी" href="http://10.0.0.122:1245/this-train-derailed-more-than-20-trains-affected/">Indian Railways: यह रेलगाड़ी पटरी से उतरी, 20 से ज्यादा ट्रेनें प्रभावित, हैल्पलाइन नंबर जारी</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Wed, 29 May 2024 17:39:06 +0530</pubDate>
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                <title>कनाडा में तोड़ी गई महात्मा गांधी की प्रतिमा</title>
                                    <description><![CDATA[ओटावा (एजेंसी)। कनाडा के रिचमंड हिल में स्थित एक हिंदू मंदिर में महात्मा गांधी की प्रतिमा तोड़े जाने से व्यथित वहां के भारतीय दूतावास ने गुरुवार को मामले पर तत्काल जांच की मांग की है। सीबीसी ने यॉर्क रीजनल पुलिस के हवाले से बताया कि पांच मीटर ऊंची इस प्रतिमा को योंग स्ट्रीट और गार्डन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/mahatma-gandhi-statue-vandalized-in-canada/article-35473"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-07/mahatma-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>ओटावा (एजेंसी)।</strong> कनाडा के रिचमंड हिल में स्थित एक हिंदू मंदिर में महात्मा गांधी की प्रतिमा तोड़े जाने से व्यथित वहां के भारतीय दूतावास ने गुरुवार को मामले पर तत्काल जांच की मांग की है। सीबीसी ने यॉर्क रीजनल पुलिस के हवाले से बताया कि पांच मीटर ऊंची इस प्रतिमा को योंग स्ट्रीट और गार्डन एवेन्यू इलाके के एक विष्णु मंदिर में बुधवार को तोड़ दिया गया। पुलिस ने कहा है कि वे जांच कर रहे हैं कि इस घटना को किस घृणित पूर्वाग्रह के आधार पर अंजाम दिया गया।</p>
<p style="text-align:justify;">यॉर्क रीजनल पुलिस की प्रवक्ता कॉन्स्टेबल एमी बौद्रेउ ने कहा कि प्रतिमा पर ‘रेपिस्ट’ और ‘खालिस्तान’ जैसे आपत्तिजनक शब्द भी लिखे गये। उन्होंने कहा, ‘यॉर्क रीजनल पुलिस किसी भी रूप में घृणा पूर्वाग्रह से प्रेरित घटना को बर्दाश्त नहीं करेगी। जो लोग जाति, राष्ट्रीयता, भाषा, रंग, धर्म, उम्र, लिंग के आधार पर दूसरों को पीड़ित करते हैं, उन पर कानून द्वारा अनुमत अधिकतम सीमा तक मुकदमा चलाया जाएगा।’ उन्होंने कहा, ‘हम मानते हैं कि घृणा अपराधों का समुदायों पर प्रभाव व्यापक स्तर पर होता है और हम घृणा अपराधों की सभी घटनाओं की सख्ती से जांच करते हैं।’</p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>क्या है मामला</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">मंदिर के अध्यक्ष डॉ बुधेंद्र दुबे ने कहा कि इस घटना ने भारतीय समुदाय को झकझोर कर रख दिया है क्योंकि यह प्रतिमा यहां पिछले 30 सालों से मौजूद है जिसके साथ कभी छेड़खानी नहीं की गई। घटना के बाद टोरंटो में भारत के महावाणिज्य दूतावास और ओटावा में भारतीय उच्चायोग ने इस बर्बरता की निंदा की और कनाडा के संबंधित अधिकारियों संग इसे लेकर संपर्क किया।</p>
<p style="text-align:justify;">कनाडा में भारत ने ट्वीट किया, ‘भारतीय समुदाय को भयभीत करने की कोशिश करने के मकसद से किए गए इस घृणा अपराध से हम बहुत दुखी हैं। इससे यहां के भारतीय समुदाय में चिंता और असुरक्षा की भावना बढ़ गई है। हमने जांच के लिए कनाडा की सरकार से संपर्क किया है और सुनिश्चित किया है कि अपराधियों को शीघ्र न्याय के कटघरे में लाया जाए।’</p>
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                <pubDate>Thu, 14 Jul 2022 10:54:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>महात्मा गांधी की 74वीं पुण्यतिथि पर कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 74 वीं पुण्यतिथि पर कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। अन्य देशों में भी लोग अहिंसा के पुजारी बापू को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के विचार सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/tribute-to-a-grateful-nation-on-the-74th-death-anniversary-of-mahatma-gandhi/article-30363"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-01/mahatma-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 74 वीं पुण्यतिथि पर कृतज्ञ राष्ट्र उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित कर रहा है। अन्य देशों में भी लोग अहिंसा के पुजारी बापू को श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि महात्मा गांधी के विचार सदैव राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “महात्मा गांधी जी ने हर भारतीय के हृदय में स्वदेशी, स्वभाषा और स्वराज की अलख जगाई। उनके विचार और आदर्श सदैव हर भारतवासी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे। आज पूज्य बापू की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन कर श्रद्धांजलि देता हूं।”</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr" xml:lang="hi">महात्मा गांधी जी ने हर भारतीय के हृदय में स्वदेशी, स्वभाषा और स्वराज की अलख जगाई। उनके विचार और आदर्श सदैव हर भारतवासी को राष्ट्रसेवा के लिए प्रेरित करते रहेंगे।</p>
<p>आज पूज्य बापू की पुण्यतिथि पर उन्हें नमन कर श्रद्धांजलि देता हूँ।</p>
<p>— Amit Shah (@AmitShah) <a href="https://twitter.com/AmitShah/status/1487619377793216515?ref_src=twsrc%5Etfw">January 30, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा, “राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी का महान व्यक्तित्व, उनके विचार और आदर्श आज भी हम सबको एक बेहतर भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। पूज्य बापू जी के स्मृति दिवस पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन।” उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने महात्मा गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें याद किया है। उन्होंने कहा, “भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के महानायक, सत्य व अहिंसा के पुजारी, राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी को उनकी पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजलि। आपके द्वारा स्थापित उच्च मानवीय मूल्यों व आदर्शों का अनुसरण करते हुए हम सभी ‘रामराज्य’ की संकल्पना को साकार करने हेतु प्रतिबद्ध हैं।”</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr" xml:lang="hi">राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी जी का महान व्यक्तित्व, उनके विचार और आदर्श आज भी हम सबको एक बेहतर भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करते हैं। </p>
<p>पूज्य बापू जी के स्मृति दिवस पर उनके चरणों में कोटि-कोटि नमन। <a href="https://t.co/nskB7nWXrk">pic.twitter.com/nskB7nWXrk</a></p>
<p>— Arvind Kejriwal (@ArvindKejriwal) <a href="https://twitter.com/ArvindKejriwal/status/1487630970371321857?ref_src=twsrc%5Etfw">January 30, 2022</a></p></blockquote>
<p></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Jan 2022 10:55:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>व्यंग्य: वक्त की हेराफेरी</title>
                                    <description><![CDATA[दक्षिण अफ्रीका की अंग्रेज सरकार की इससे खासी बदनामी हुई। उसने भारतीय सरकार और ब्रिटिश सरकार के दबाव के तहत एक समझौते को स्वीकार किया।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/sarcasm-times-rigging/article-22359"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-03/sarcasm-times-rigging.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">6 नवंबर 1913 को महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद और दमनकारियों नीतियों के खिलाफ विरोध जारी रखते हुए, ‘द ग्रेट मार्च’ का नेतृत्व किया। इस दौरान 2,000 भारतीय खदान कर्मियों ने न्यूकासल से नेटाल तक की पदयात्रा की। महात्मा गांधी को उनके समर्थकों के साथ गिरफ्तार किया गया था। 1906 में ट्रांसवैल सरकार ने दक्षिण अफ्रीका की भारतीय जनता के पंजीकरण के लिए विशेष रूप से अपमानजनक अध्यादेश जारी किया। भारतीयों ने सितंबर 1906 में जोहानिसबर्ग में महात्मा गांधी के नेतृत्व में एक जनसभा का आयोजन किया और इस अध्यादेश के उल्लंघन और सजा के तौर पर दंड भुगतने की शपथ ली।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">इस प्रकार सत्याग्रह का जन्म हुआ, जो पलटवार के बजाए अहिंसक ढंग से उसका मुकाबला करने की नई शैली थी। दक्षिण अफ्रीका में सात साल से अधिक समय तक संघर्ष चला। इसमें उतार-चढ़ाव आते रहे, लेकिन गांधी के नेतृत्व में भारतीय अल्पसंख्यकों के छोटे से समुदाय ने अपने शक्तिशाली विरोधियों के खिलाफ संघर्ष जारी रखा। सैकड़ों भारतीयों ने अपनी अन्तरात्मा और स्वाभिमान को चोट पहुंचाने वाले कानून के सामने झुकने के बजाए अपने रोजगार और स्वतंत्रता को बलि चढ़ाना ज्यादा पसंद किया। 1913 में आंदोलन के आखिरी चरण में महिलाओं समेत सैकड़ों भारतीयों ने जेल की सजा भुगती और खदानों में काम बंद करके हड़ताल कर रहे हजारों भारतीय मजदूरों ने कोड़ों की मार, जेल की सजा और यहां तक की गोली मारने के आदेश का भी साहस के साथ सामना किया।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">भारतीयों के लिए यह घोर यातना थी। लेकिन दक्षिण अफ्रीका की अंग्रेज सरकार की इससे खासी बदनामी हुई। उसने भारतीय सरकार और ब्रिटिश सरकार के दबाव के तहत एक समझौते को स्वीकार किया। इस पर एक ओर से गांधी और दूसरी ओर से दक्षिण अफ्रीकी सरकार के प्रतिनिधि जनरल जॉन क्रिश्चियन स्मेट्स ने बातचीत की थी। आखिरकार समझौता हुआ और भारतीय राहत विधेयक पास हुआ।</h6>
<p> </p>
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                                                            <category>प्रेरणास्रोत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Mar 2021 15:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री ने राजघाट जाकर दी बापू को श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 73वीं पुण्यतिथि के मौके पर शनिवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बापू की समाधि स्थल राजघाट पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए राजघाट पहुंचे। इससे […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/president-vice-president-and-prime-minister-paid-tribute-to-mahatma-gandhi-by-visiting-rajghat/article-21363"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-01/modi-3.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> <span style="color:#0000ff;">राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 73वीं पुण्यतिथि के मौके पर शनिवार को राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बापू की समाधि स्थल राजघाट पहुंचे और उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह भी महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए राजघाट पहुंचे। इससे पहले कोविंद ने ट्वीट कर कहा, ‘कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी पुण्यतिथि के मौके पर मेरी विनम्र श्रद्धांजलि। हमें शांति, अहिंसा, सादगी, साधनों की पवित्रता और विनम्रता के उनके आर्दशों का पालन करना चाहिए। आइए हम उसके सत्य और प्रेम के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।</span></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="hi" dir="ltr" xml:lang="hi">आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के अमर-बलिदान के दिन कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से उनकी पुण्य स्मृति को मैं नमन करता हूं। शांति, अहिंसा, सादगी, साधनों की पवित्रता और विनम्रता के उनके आदर्शों का हमें पालन करना चाहिए। आइए हम उनके द्वारा दिखाए गए सत्य और प्रेम के मार्ग पर चलने का संकल्प लें।</p>
<p>— President of India (@rashtrapatibhvn) <a href="https://twitter.com/rashtrapatibhvn/status/1355359270833803267?ref_src=twsrc%5Etfw">January 30, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;"><span style="color:#ff0000;">वहीं मोदी ने ट्वीट कर कहा, ‘महान बापू को उनकी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि। उनके आदर्श लाखों लोगों को प्रेरित करते रहते हैं। शहीद दिवस पर हम उन सभी महान महिलाओं और पुरुषों के बलिदानों को याद करते हैं जिन्होंने भारत की स्वतंत्रता और हर भारतीय की भलाई के लिए खुद को समर्पित कर दिया।</span></p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en">Tributes to the great Bapu on his Punya Tithi. His ideals continue to motivate millions. </p>
<p>On Martyrs’ Day we recall the heroic sacrifices of all those great women and men who devoted themselves towards India’s freedom and the well-being of every Indian.</p>
<p>— Narendra Modi (@narendramodi) <a href="https://twitter.com/narendramodi/status/1355358525115912203?ref_src=twsrc%5Etfw">January 30, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/president-vice-president-and-prime-minister-paid-tribute-to-mahatma-gandhi-by-visiting-rajghat/article-21363</link>
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                <pubDate>Sat, 30 Jan 2021 12:47:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अगस्त प्रस्ताव के खिलाफ गांधी जी का निजी सत्याग्रह</title>
                                    <description><![CDATA[व्यक्तिगत सत्याग्रह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा सन 1940 में प्रारम्भ किया गया था। लिनलिथगो प्रस्ताव/अगस्त प्रस्ताव से गांधीजी संतुष्ट नहीं होने के कारण कांग्रेस ने अगस्त प्रस्ताव को पूर्णत: अस्वीकार कर दिया तथा गांधी जी के नेतृत्व में व्यक्तिगत सत्याग्रह का निर्णय लिया। इस सत्याग्रह कि खासियत यह थी कि इसमें महात्मा गांधी द्वारा चुने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/inspiration/gandhi-individual-satyagraha-against-the-august-proposal/article-19278"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/mahatma-gandhi2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">व्यक्तिगत सत्याग्रह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी द्वारा सन 1940 में प्रारम्भ किया गया था। लिनलिथगो प्रस्ताव/अगस्त प्रस्ताव से गांधीजी संतुष्ट नहीं होने के कारण कांग्रेस ने अगस्त प्रस्ताव को पूर्णत: अस्वीकार कर दिया तथा गांधी जी के नेतृत्व में व्यक्तिगत सत्याग्रह का निर्णय लिया। इस सत्याग्रह कि खासियत यह थी कि इसमें महात्मा गांधी द्वारा चुने गए सत्याग्रही पूर्व निर्धारित स्थान पर भाषण देकर अपनी गिरफ्तारी देते थे। अपने भाषण से पूर्व सत्याग्रही अपने सत्याग्रह की सूचना जिला मजिस्ट्रेट को भी देता था। तत्कालीन वायसराय लार्ड लिनलिथगो के द्वारा 3 सितम्बर 1939 को भारत के द्वितीय विश्व युद्ध में सम्मिलित होने की धोषणा की गई।</p>
<p style="text-align:justify;">इस घोषणा से पूर्व लिनलिथगो ने किसी भी राजनैतिक दल से परामर्श नहीं किया। इससे कांग्रेस असंतुष्ट् हो गई। महात्मा गाँधी ने ब्रिटिश सरकार की युद्धनीति का विरोध करने के लिए 1940 में अहिंसात्मक व्यक्तिगत सत्याग्रह आरम्भ किया। 1940 के बम्बई अधिवेशन में व्यक्तिगत सत्याग्रह को स्वीकृति दी गई। गांधी जी के द्वारा 11 अक्टूबर, 1940 को विनोबा भावे को प्रथम व्यक्तिगत सत्याग्रही के तौर पर चुना गया। व्यक्तिगत सत्याग्रह की शुरूआत आज ही के दिन 17 अक्टूबर 1940 में महाराष्ट्र के पवनार आश्रम से हुई।</p>
<p style="text-align:justify;">ब्रिटिश सरकार द्वारा 21 अक्टूबर को विनोबा को गिरफ्तार किया गया। जवाहरलाल नेहरू दूसरे तथा ब्रम्ह दत्त तृतीय सत्याग्रही चुने गए। 17 दिसंबर 1940 को महात्मा गांधी जी के द्वारा व्यक्तिगत सत्याग्रह को स्थगित कर दिया गया। 1941 में इसे पुन: प्रारम्भ किया गया। व्यक्तिगत सत्याग्रह के द्वितीय चरण की शुरुवात 5 जनवरी 1941 को शुरू हुई। इस आंदोलन में लगभग 25000 सत्याग्रही जेल गए। गांवों में सरकार के विरोध में भाषण दिए गए और 27 अप्रैल 1942 को गांधी जी ने दिल्ली की ओर प्रस्थान (चलो दिल्ली) करने का आह्वान किया, इसे चलो दिल्ली आंदोलन के नाम से जाना जाता है।</p>
<p> </p>
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                <pubDate>Sat, 17 Oct 2020 10:04:01 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>गूगल युग के चकाचौंध में भी प्रासंगिक हैं गांधी विचार</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व के महानतम वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने महात्मा गांधी के लिए कभी सच ही कहा था कि भविष्य की पीढ़ियों को इस बात पर विश्वास करना मुश्किल होगा कि हाड़-माँस से निर्मित ऐसा कोई व्यक्ति भी कभी धरती पर आया था। महात्मा गांधी के कहे विचारों की श्रृंखलाओं को जब हम इतिहास की पुस्तकों में […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/gandhis-views-are-also-relevant-in-the-glare-of-google-era/article-18876"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/gandhis-views-are-also-relevant-in-the-glare-of-google-era.gif" alt=""></a><br /><h6 style="text-align:justify;">विश्व के महानतम वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन ने महात्मा गांधी के लिए कभी सच ही कहा था कि भविष्य की पीढ़ियों को इस बात पर विश्वास करना मुश्किल होगा कि हाड़-माँस से निर्मित ऐसा कोई व्यक्ति भी कभी धरती पर आया था। महात्मा गांधी के कहे विचारों की श्रृंखलाओं को जब हम इतिहास की पुस्तकों में खंगालते हैं तो पता चलता है कि उनके विचारों का सही मोल। ये सच है कि जन्म से कोई इंसान महान नहीं होता, उनके विचार उसे महान बनाते हैं। अपने विचारों से कैसे कोई इंसान महान बन सकता है, उसके सबसे बड़े उदाहरण राष्ट्रपिता महात्मा गांधी हैं। उनके उन्मुख विचार सामाजिक संरचना के लिए हमेशा सर्वोपरी रहे। उनके मुंह से निकले बोल हमें आगे बढ़ने को प्रेरित करते हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">ये बात अपने आप में सच है कि विचार और काम की पवित्रता और सरलता ही महान लोगों को आम लोगों से अलहदा रखती हैं। महान इंसान भी औरों की भांति काम करते हैं, पर दोनों में फर्क होता है। महान लोगों के काम करने का मकसद समाज में बदलाव लाना होता है। महात्मा गांधी ने अपने असाधारण व्यक्ति से लाखों-करोड़ों हिंदुस्तान वासियों के जीवन में जो अमुलचूक बदलाव करके गए हैं वह कर्ज हम चुका नहीं पाएंगे। अंग्रेजों की गुलामी से जब हिंदुस्तान आजाद हुआ और उसके बाद उन्होंने नए भारत की संरचना की उसी को हम आगे बढ़ा रहे हैं। उनके दिखाए रास्ते हमारे लिए आज भी प्रासंगिक हैं। देश ही नहीं, बल्कि विदेशी लोग भी उनके विचारों को पवित्र पुस्तकों जैसे मानते हैं। उनके दिखाए अहिंसा रास्ते सभी के लिए एक जैसे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">पीढ़ियाँ बदलती रहेंगी और बदल भी रही हैं, लेकिन देश के लोग युगों-युगों तक गांधी की कुर्बानियां नहीं भूल पाएंगे। उन्होंने जाते वक्त देश के लोगों से बस यही कहा था कि एकता-अखंडता के लिए कभी बंटना नहीं? शायद उनकी इस अंतिम इच्छा को हम लोगों ने पीछे छोड़ दिया है। उन्होंने जो कहा उसके विपरीत हम चल पड़े हैं। आज हम जात-समुदाय में टुकड़ों की तरह बंट चुके हैं। इस समस्या के लिए जिम्मेदार पूर्णता सियासी लोग हैं। लेकिन, मानने को राजी नहीं, जब इस मसले पर कोई बहस छिड़ती तो वे अपना पल्ला झाड़ लेते हैं और सारा दोष जनमानष पर मढ़ देते हैं। नेताओं के लिए वोट मुकद्दर जैसा हो गया है। उसे पाने के लिए हर मानवीय रियायतों को तोड़ने पर आमादा रहते हैं। ऐसे दृश्यों को देखकर कभी कभार ऐसा प्रतीत होता है कि हम अपने स्वार्थ को पूरा करने के लिए गांधी के विचार और उनके बताए रास्तों को छोड़ते जा रहे हैं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">अंतर्राष्ट्रीय फोरम पर भारत का वजूद आज भी गांधी से तय होता है। लेकिन आधुनिक युग ने उनको कमतर आंकना शुरू कर दिया है। हो सकता है इसके पीछे सुनियोजित कोई गहरी साजिश भी हो। लेकिन अगर ऐसा होता है तो उसके खामियाजा के लिए हमें तैयार हो जाना चाहिए। बापू ने यह भी कहा था कि आप जो करते हैं वह नगण्य होगा, लेकिन आपके लिए वह करना बहुत अहम है, कि हम जो करते हैं और हम जो कर सकते हैं, इसके बीच का अंतर दुनिया की ज्यादातर समस्याओं के समाधान के लिए पर्याप्त होगा। किसी देश की महानता और उसकी नैतिक उन्नति का अंदाजा हम वहां के जानवरों के साथ होने वाले व्यवहार से लगा सकते हैं, कोई कायर प्यार नहीं कर सकता है, यह तो बहादुर की निशानी है।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">बापू ने कहा कि स्वास्थ्य ही असली संपत्ति है, उसके सामने सोना-चाँदी सब मिट्टी जैसे। अंदर की आत्मसंतुष्टि इंसान को बड़ा बनाती है। गौरतलब है, महात्मा गांधी के जिन विचारों को आधुनिक युग की पीढ़ी को अनुसरण करना चाहिए, लेकिन वे नकार रहे हैं। उनके लिए किसी महान पुरूष के विचार उतने मायने नहीं रखते, जितना गूगल ज्ञान उन्हें आंनदित करता है। गूगल ज्ञान उनके लिए माई-बाप हो गया है। बदलते युग में युवाओं ने खुद फोन, गूगल, कंप्यूटर आदि आधुनिक यंत्रों तक सीमित कर लिया है। उनके लिए उनकी दुनिया अब स्मार्ट फोन में ही सिमट गई है। इन जंजीरों से हमें समय रहते मुक्त होना होगा। इसलिए भी बापू के विचार हमारे लिए मददगार साबित हो सकते हैं। क्योंकि गांधी ने इस बात की कभी आशंका भी जताई थी, तकनीकें हम पर उतनी भी हावी न हो, जिससे हम अपनी सभ्यता को ही भूल जाएं।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">दरअसल, गाँधी जो कहते थे, जो सोचते थे, वह आने वाले वक्त में घटित जरूर होता था। अंग्रेजों से लड़ने का उन्होंने जो रोड मैप तैयार किया था उसमें वह पूर्ण रूप से सफल हुए थे। आजादी के लिए हमें क्या-क्या खोना पड़ेगा, उन्होंने पहले ही बता दिया था। जिस नुक्सान की उन्होंने आशंका जताई थी, उतना नुक्सान हम लोगों ने झेला भी। उनके विजन में शुद्धता थी, पवित्रता थी, देश को बचाने के लिए कुछ भी कर गुजरने की दीवानगी थी। सोच एकदम निस्वार्थ से लबरेज थी, किसी पद-प्रतिष्ठा की कोई चाह नहीं थी। बस एक ही चाहत थी, मुल्क को आजाद करके हमें सौंपना। वैसा वह करके भी गए।</h6>
<h6 style="text-align:justify;">महात्मा गांधी ने आजादी का स्वाद ज्यादा नहीं चखा, हमने चखा। उन्होंने जो कुछ भी किया हमारे लिए किया। महात्मा गांधी कुछ प्रेरक बातों का संग्रह हमारे लिए छोड़कर गए हैं। अगर हम उनका अनुकरण कर लें, तो कई संभावित खतरों से बच सकते हैं। उन्होंने कहा था कि व्यक्ति अपने विचारों के सिवाए कुछ नहीं है, वह जो सोचता है, वह बन जाता है, कमजोर कभी क्षमाशील नहीं हो सकता है, क्षमाशीलता ताकतवर की निशानी होती है। ताकत शारीरिक शक्ति से नहीं आती है, यह अदम्य इच्छाशक्ति से आती है। धैर्य का छोटा हिस्सा भी एक टन उपदेश से बेहतर है, गौरव लक्ष्य पाने के लिए कोशिश करने में हैं, न कि लक्ष्य तक पहुंचने में।</h6>
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                <pubDate>Thu, 01 Oct 2020 20:57:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रेरणास्रोत : गाँधी जी की सेवा</title>
                                    <description><![CDATA[सेवा एक ऐसा कार्य माना गया है, जिसके लिए समय अथवा पात्रता नहीं देखी जाती। गुरुकुल कांगड़ी की पुरानी बात है। एक विद्यार्थी रोग से बहुत पीड़ित था। गुरुकुल की पुरानी परंपरा के अनुसार उस रोगी विद्यार्थी को ड्यूटी पर लगाया गया था। आधी रात का समय था। सब रोगी और परिचारक सो रहे थे। […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/gandhijis-service/article-12967"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/gandhis-service-1.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:justify;">सेवा एक ऐसा कार्य माना गया है, जिसके लिए समय अथवा पात्रता नहीं देखी जाती। गुरुकुल कांगड़ी की पुरानी बात है। एक विद्यार्थी रोग से बहुत पीड़ित था। गुरुकुल की पुरानी परंपरा के अनुसार उस रोगी विद्यार्थी को ड्यूटी पर लगाया गया था। आधी रात का समय था। सब रोगी और परिचारक सो रहे थे। अचानक वह विद्यार्थी रोग की अत्याधिक वेदना से तड़प उठा। वह उठा और उसे तेज उल्टी आई। उसी समय गुरुकुल भूमि का भ्रमण करते हुए महात्मा गाँधी जी वहाँ आ गए। उन्होंने अपने हाथों से उस रोगी विद्यार्थी की उल्टी को संभाला। उसे बाहर शौचालय में पहुँचाकर हाथ साफ कर, लोटे में पानी लेकर रोगी को चिलमची में कुल्ला कराया। उसी समय रोगी के साथ ड्यूटी पर आए विद्यार्थी की नींद खुल गई। वह महात्माजी को देखकर शर्मिंदा हो गया। बोला, ‘थकावट से नींद की झपकी आ गई। आपने व्यर्थ का कष्ट किया। मुझे आवाज दे देते।’ इस पर महात्माजी बोले, ‘इसमें कष्ट कैसा? रोगी की आर्त पुकार या उसकी मदद के लिए व्यक्ति को स्वयं ही जिम्मेदारी निभानी होती है। इस कार्य के लिए दूसरे को पुकारना कुछ मतलब नहीं रखता।’</h4>
<h3 style="text-align:justify;">सत्य की विजय</h3>
<h4 style="text-align:justify;">राजा भोज के दरबार में एक धनपाल नामक जैन पंडित थे। कहा जाता है कि वर्षों के अथक परिश्रम के बाद उन्होंने बाण रचित कादम्बरी का प्राकृत भाषा में अनुवाद किया था। जब वह पूरा हो गया तो राजा ने धनपाल से कहा-‘इस ग्रंथ के साथ मेरा नाम जोड़ दो, तो यथेच्छ स्वर्णमुद्राएँ दूंगा।’ धनपाल राजा के कर्मचारी थे, इसलिए वे दुविधा में पड़ गए। काफी सोच-विचार के पश्चात उन्होेंने नम्र दृढ़तापूर्वक राजा की बात मानने से इंकार कर दिया। अपना ही आश्रित पंडित ऐसी गुस्ताखी करे यह राजा को नागवार लगा और उन्होंने आगबबूला होकर सारा अनुवाद जला दिया। यह घटना देखकर धनपाल को गहरा क्षोभ हुआ। इससे उसका खाना-पीना तक छूट गया। उनको उदास देखकर उनकी पुत्री ने पूछा- ‘पिता जी, मैं काफी दिनों से देख रही हूँ कि आप किसी बात को लेकर शोकमग्न हैं? इस स्थिति का कारण क्या है मुझे तो बताइए।’ धनपाल ने सारा किस्सा सुना दिया। इस पर पुत्री बोली, अरे, इसमें क्या है? आपकी पांडुलिपि अल्पविराम सहित मुखाग्र है मुझे। आप लिखिए, मैं बोलती जाती हूँ। कादम्बरी प्राकृत भाषा में तैयार हो गई। पुत्री की इस अद्भूत शक्ति से धनपाल इतने मुग्ध हुए कि उसी के नाम पर उस पुस्तक का नाम ‘तिलक मञजरी’ रख दिया।</h4>
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<p> </p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 09 Feb 2020 21:22:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महात्मा गांधी के बारे में हेगड़े के बयान की थरूर ने की निंदा</title>
                                    <description><![CDATA[थरूर ने यह भी कहा कि मोदी सरकार के मंत्री लोगों को गोली मारने की बात करते हैं और इस तरह युवकों को हिंसा के लिए भड़काते है लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/tharoor-condemns-hegdes-statement-about-mahatma-gandhi/article-12911"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/shashi-tharoor.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">प्रधानमंत्री इस मुद्दे पर देश के सामने अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए (Shashi Tharoor)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री और भाजपा नेता अनंत कुमार हेगड़े के राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के बारे में दिए गए विवादास्पद बयान की कड़ी निंदा की है और कहा है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को इस मुद्दे पर देश के सामने अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए। थरूर ने संसद परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान एक प्रश्न के जवाब में यह टिप्पणी की। उनका ध्यान जब कर्नाटक के भाजपा नेता श्री हेगड़े के उस बयान की तरफ दिलाया गया जिसमें उन्होंने कहा है कि महात्मा गांधी की आजादी की लड़ाई ‘एक ड्रामा था’ पर थरूर ने कहा कि भाजपा और संघ परिवार शुरू से ही महात्मा गांधी पर हमले करता रहा है और यह उसका इतिहास रहा है और इसमें कुछ भी नई बात नहीं है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी एक तरफ महात्मा गांधी के आदर्शों की बात करते है।</li>
<li style="text-align:justify;">दूसरी तरफ उनकी पार्टी के नेता और संघ परिवार के लोग गांधी का अपमान करते हैं ।</li>
<li style="text-align:justify;">उन पर हमले करते रहते हैं, पर प्रधानमंत्री कुछ नहीं बोलते हैं।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में काफी अंतर</h3>
<p style="text-align:justify;">कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि प्रधानमंंत्री को इस मामले में अपना रूख स्पष्ट करना चाहिए ताकि देश को पता चल सके कि उनका रूख क्या है। उन्होने कहा कि प्रधानमंत्री की कथनी और करनी में काफी अंतर है, वह बोलते कुछ हैं और उनकी पार्टी के नेता करते कुछ हैं। थरूर ने यह भी कहा कि मोदी सरकार के मंत्री लोगों को गोली मारने की बात करते हैं और इस तरह युवकों को हिंसा के लिए भड़काते है लेकिन उन पर कोई कार्रवाई नहीं होती है। उन्होंंने यह भी कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी कांग्रेस के लिए हमेशा से ही आदर और सम्मान के व्यक्ति रहे हैं और हमारे लिए वह आज भी पूजनीय हैं जबकि भाजपा के लिए वह कभी सम्मान के पात्र नहीं रहे है और हेगड़े के बयान से यह स्पष्ट हो गया है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/tharoor-condemns-hegdes-statement-about-mahatma-gandhi/article-12911</link>
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                <pubDate>Mon, 03 Feb 2020 17:08:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पुण्यतिथि :  अहिंसा के पुजारी को पीएम मोदी सहित कई नेताओं ने दी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[महात्मा गांधी की 72वीं पुण्यतिथि  है। इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और लाल कृष्ण आडवाणी ने राजघाट जाकर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/mahatma-gandhi-death-anniversary/article-12820"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/mahatma-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><h3>बापू के असहयोग आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई जागृति प्रदान की | Mahatma Gandhi</h3>
<h4>Edited By Vijay Sharma</h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली(एजेंसी)।</strong> आज महात्मा गांधी की 72वीं पुण्यतिथि (<strong>Mahatma Gandhi )</strong> है। इस मौके पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह , कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी, पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और लाल कृष्ण आडवाणी ने राजघाट जाकर बापू को श्रद्धांजलि अर्पित की। देश को आजादी दिलाने में अपनी अहम भूमिका निभाने वाले बापू को आज सच कहूँ परिवार भी श्रद्धांजलि अर्पित करता है वहीं पाठकों को उनके जीवन से अवगत कराते हुए देश के लिए दिए गए योगदान याद दिला रहा है।</p>
<h2>नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को की थी  महात्मा गांधी की हत्या | Mahatma Gandhi</h2>
<p>नाथूराम गोडसे ने 30 जनवरी 1948 को दिल्ली के बिड़ला हाउस में प्रार्थना सभा के लिए जाते हुए महात्मा गांधी की हत्या कर दी गई थी। विडम्बना देखिए कि अहिंसा को अपना सबसे बड़ा हथियार बनाकर अंग्रेजों को देश से बाहर का रास्ता दिखाने वाले महात्मा गांधी खुद हिंसा का शिकार हुए।  अपने जीवनकाल में अपने विचारों और सिद्धांतों के कारण चर्चित रहे मोहन दास करमचंद गांधी का नाम उनकी मृत्यु के बाद दुनियाभर में कहीं ज्यादा इज्जत और सम्मान से लिया जाता है।</p>
<h2>महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था| Mahatma Gandhi</h2>
<p>दुनिया को सत्य और अहिंसा की राह पर ले जाने वाले महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को पोरबंदर में हुआ था। उनके पिता का नाम करमचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था। जिस दिन नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को गोली मारी, उस दिन शुक्रवार था। उस वक्त शाम के 5.17 बज रहे थे जब नाथूराम गोडसे ने सफेद धोती पहने गांधीजी पर तीन बार गोलियां दागी । गोडसे ने बापू के साथ खड़ी महिला को हटाया और अपनी सेमी ऑटोमेटिक पिस्टल से एक बाद के एक तीन गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। आज गांधी जी की पुण्यतिथि है और उनकी पुण्यतिथि को शहीद दिवस के रूप में मनाते हैं</p>
<h2>गांधी जी के 5 आंदोलन, जिन्होंने बदल दी देश की तस्वीर | Mahatma Gandhi</h2>
<h2>असहयोग आंदोलन</h2>
<p>1920 से महात्मा गांधी तथा भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन चलाया गया था। इस आंदोलन ने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को एक नई जागृति प्रदान की। गांधी जी का मानना था कि ब्रिटिश हाथों में एक उचित न्याय मिलना असंभव है इसलिए उन्होंने ब्रिटिश सरकार से राष्ट्र के सहयोग को वापस लेने की योजना बनाई और इस प्रकार असहयोग आंदोलन की शुरुआत की गई।</p>
<h2>नमक सत्याग्रह –</h2>
<ul>
<li><strong>महात्मा गांधी द्वारा चलाए गए अनेकों आंदोलनों में से नमक सत्याग्रह सबसे महत्वपूर्ण था। </strong></li>
<li><strong>बता दें कि महात्मा गांधी ने 12 मार्च, 1930 में साबरमती आश्रम जो कि अहमदाबाद स्थित है, दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला था। </strong></li>
<li><strong>महात्मा गांधी ने यह मार्च नमक पर ब्रिटिश राज के एकाधिकार के खिलाफ निकाला था।</strong></li>
</ul>
<h2>दलित आंदोलन-</h2>
<ul>
<li><strong>महात्मा गांधी जी ने 8 मई 1933 से छुआछूत विरोधी आंदोलन की शुरुआत की थी। </strong></li>
<li><strong>जबकि गांधी जी ने अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग की स्थापना 1932 में की थी।</strong></li>
</ul>
<h2>भारत छोड़ो आंदोलन –</h2>
<ul>
<li><strong>अगस्त 1942 में गांधी जी ने ”भारत छोड़ो आंदोलन” की शुरुआत की । </strong></li>
<li><strong>तथा भारत छोड़ कर जाने के लिए अंग्रेजों को मजबूर किया। </strong></li>
<li><strong>एक सामूहिक नागरिक अवज्ञा आंदोलन ”करो या मरो” आरंभ करने का निर्णय लिया।</strong></li>
</ul>
<h2>चंपारण सत्याग्रह –</h2>
<p>चंपारण आंदोलन भारत का पहला नागरिक अवज्ञा आंदोलन था जो बिहार के चंपारण जिले में महात्मा गांधी की अगुवाई में 1917 को शुरू हुआ था। इस आंदोलन के माध्यम से गांधी ने लोगों में जन्में विरोध को सत्याग्रह के माध्यम से लागू करने का पहला प्रयास किया जो ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ आम जनता के अहिंसक प्रतिरोध पर आधारित था।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/national/mahatma-gandhi-death-anniversary/article-12820</link>
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                <pubDate>Thu, 30 Jan 2020 14:23:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कोविंद, नायडू और मोदी ने अर्पित की महात्मा गांधी को पुष्पांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित | Mahatma Gandhi नयी दिल्ली (एजेंसी)। राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को Mahatma Gandhi की 150वीं जयंति पर राजघाट जाकर उनकी समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। कोविंद आज तड़के अपनी पत्नी के साथ महात्मा गांधी की समाधि स्थल राजघाट पहुंचे और उन्हें पुष्पांजलि […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/150th-birth-anniversary-of-mahatma-gandhi/article-10584"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/mahatma-gandhi-1.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित | Mahatma Gandhi</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (एजेंसी)। </strong>राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद, उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को <a href="http://10.0.0.122:1245/france-paid-tribute-to-mahatma-gandhi/"><strong>Mahatma Gandhi</strong></a> की 150वीं जयंति पर राजघाट जाकर उनकी समाधि पर श्रद्धांजलि अर्पित की। कोविंद आज तड़के अपनी पत्नी के साथ महात्मा गांधी की समाधि स्थल राजघाट पहुंचे और उन्हें पुष्पांजलि दी। नायडू और मोदी ने भी राष्ट्रपिता की समाधि पर पुष्प चढ़ाये। इस अवसर पर राजघाट परिसर में एक विशेष प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया, जिसमें महात्मा गांधी के प्रिय भजन गाये गये।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी ने भी राजघाट जाकर महात्मा गांधी श्रद्धांजलि दी।</li>
<li style="text-align:justify;">केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी राष्ट्रपिता को श्रद्धांजलि देने राजघाट पहुंचे।</li>
<li style="text-align:justify;">महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर श्रद्धांजलि देने के लिए तड़के से ही लोग राजघाट पहुंचने शुरू हो गये।</li>
<li style="text-align:justify;">इनमें गणमान्य व्यक्तियों सहित आम लोग भी शामिल थे।</li>
<li style="text-align:justify;">महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पर देशभर में कई प्रमुख कार्यक्रमों के आयोजन किये जा रहे है।</li>
</ul>
<p> </p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/150th-birth-anniversary-of-mahatma-gandhi/article-10584</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Oct 2019 11:14:49 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांस ने महात्मा गांधी को दी श्रद्धांजलि</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली (एजेंसी)। फ्रांस ने महात्मा गांधी की 150वीं जयंती के अवसर पर बुधवार को उन्हें श्रद्धांजलि दी। भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनैन ने टि्वटर पर लिखा, “ आज के इस ऐतिहासिक दिन गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर फ्रांस भारत के साथ मिलकर महात्मा को श्रद्धांजलि देता है।” उन्होंने कहा कि गांधी […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/france-paid-tribute-to-mahatma-gandhi/article-10583"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/mahatma-gandhi1.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली (एजेंसी)। </strong>फ्रांस ने <a href="http://10.0.0.122:1245/150th-birth-anniversary-of-mahatma-gandhi/">महात्मा गांधी की 150वीं जयंती</a> के अवसर पर बुधवार को उन्हें श्रद्धांजलि दी। भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनैन ने टि्वटर पर लिखा, “ आज के इस ऐतिहासिक दिन गांधी जी की 150वीं जयंती के अवसर पर फ्रांस भारत के साथ मिलकर महात्मा को श्रद्धांजलि देता है।” उन्होंने कहा कि गांधी जी की अहिंसा और समावेशिता की महान विरासत असमानता और जलवायु परिवर्तन जैसे वैश्विक मुद्दों से निपटने के लिए आज भी प्रासंगिक मार्गदर्शक सिद्धांत बने हुए हैं।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
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                <pubDate>Wed, 02 Oct 2019 11:07:57 +0530</pubDate>
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