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                <title>Crimes - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>Assembly Election 2023: चुनावों में बढ़ रहे अपराध, किया जा रहा है नजरअंदाज</title>
                                    <description><![CDATA[Assembly Election 2023: पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है। राजनीतिक दलों ने हर स्तर पर प्रयास करने शुरु कर दिए हैं, वायदों में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। तार्किक वादों के साथ-साथ रेवड़ी बांटने का भी चलन जारी है। इस प्रवृत्ति में समाज में बढ़ते अपराधों को पूरी तरह […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/crimes-are-increasing-during-elections-they-are-being-ignored/article-54306"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2023-10/assembly-elections.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">Assembly Election 2023: पांच राज्यों में विधानसभा चुनावों की घोषणा हो चुकी है। राजनीतिक दलों ने हर स्तर पर प्रयास करने शुरु कर दिए हैं, वायदों में कोई कसर नहीं छोड़ी जा रही है। तार्किक वादों के साथ-साथ रेवड़ी बांटने का भी चलन जारी है। इस प्रवृत्ति में समाज में बढ़ते अपराधों को पूरी तरह से नजरअंदाज कर दिया गया है। समाज में प्रत्येक व्यक्ति खुद को असुरक्षित महसूस कर रहा है। लगभग हर राज्य में हत्या, लूट, डकैती की घटनाएं घटित हो रही हैं। ऐसी घटनाओं की राजनीतिक स्तर पर कोई चर्चा ही नहीं हो रही। Assembly Election 2023</p>
<p style="text-align:justify;">पार्टियां एक-दूसरे पर घोटाले के आरोप लगाने तक ही सीमित रह गई हैं। विपक्षी दल सरकारों को घेरने के लिए भ्रष्टाचार का मुद्दा जरूर उठाते हैं, लेकिन ये आरोप भी व्यक्ति विशेष पर आरोप बनकर रह जाते हैं। जिस तरह से अपराधियों द्वारा आम जनता को प्रताड़ित किया जा रहा है, उसकी कहीं भी कोई चर्चा नहीं हो रही। आढ़ती से पैसे लेकर जाने वाले किसान को भरोसा नहीं है कि वह सुरक्षित घर पहुंच पाएगा। व्यापारियों की हत्याएं हो रही हैं, गायकों को धमकियां मिल रही हैं। दिनदहाड़े लुटेरे बाजारों में आते हैं और हमला करके लूटपाट कर लेते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">शहरों में कई-कई पुलिस स्टेशन और पुलिस चौकियां हैं, पुलिस स्टेशनों में कैमरे लगे होने के बावजूद लुटेरे भागने में सफल हो रहे हैं। हां, यह सच है कि यदि किसी मंत्री या विधायक की भैंस भी आधी रात को भी चोरी हो जाती है तो फिर पुलिस सूरज निकलने से पहले ही रातों-रात में सब कुछ बरामद कर लेती है। बड़े शहरों में पुलिस दूसरे या तीसरे दिन 25 करोड़ के हीरे ढूंढने में सफल हो जाती है, भले ही चोर हजारों किमी दूर किसी राज्य के जंगल में ही क्यों न छिपा हो। दूसरी तरफ आम जनता को लूटने वाला उसी शहर में रहता हुआ भी नहीं पकड़ा जाता।</p>
<p style="text-align:justify;">निस्संदेह, वर्तमान समय में कानून व्यवस्था एक बड़ा मुद्दा है। पुलिस व्यवस्था को चुस्त-दुरुस्त करने के साथ-साथ अपराधों के सामाजिक पहलुओं पर भी विचार कर अपराधियों को समाज की मुख्य धारा में वापिस लाने के प्रयास किये जाने चाहिए। नशा, बेरोजगारी, फिल्मों और धारावाहिकों में अपराध के तरीकों का चित्रण इत्यादि ऐसे कई कारण हैं जो अपराधों को बढ़ावा दे रहे हैं। इन कारणों पर चर्चा की जरूरत है। राजनीतिक दलों को कानून व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए भी आगे आना चाहिए। सुरक्षा के बिना विकास अधूरा है। Assembly Election 2023</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="Immunity Booster Remedies: इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आजमाएं ये घरेलू उपाय, दूर रहेंगी मौसमी बीमारी" href="http://10.0.0.122:1245/try-these-home-remedies-to-increase-immunity-seasonal-diseases-will-stay-away/">Immunity Booster Remedies: इम्यूनिटी बढ़ाने के लिए आजमाएं ये घरेलू उपाय, दूर रहेंगी मौसमी बीमारी</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 09:27:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>इंग्लैंड में कोरोना के कारण अपराधों में भारी कमी</title>
                                    <description><![CDATA[लंदन। वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण लोगों के घरों से नहीं निकलने के चलते इंग्लैंड और वेल्स में अपराध चालीस प्रतिशत तक कम हो गए हैं। ब्रिटिश राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (ओएनएस) ने बुधवार को यह सूचना दी। ओएनएस ने बताया कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष अप्रैल और जून के दौरान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/international/great-reduction-in-crimes-due-to-corona-in-england/article-19565"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-10/death-toll-from-corona-across-the-world-crosses-9900001.gif" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>लंदन।</strong> वैश्विक महामारी कोरोना वायरस के प्रकोप के कारण लोगों के घरों से नहीं निकलने के चलते इंग्लैंड और वेल्स में अपराध चालीस प्रतिशत तक कम हो गए हैं। ब्रिटिश राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (ओएनएस) ने बुधवार को यह सूचना दी। ओएनएस ने बताया कि पिछले वर्ष के मुकाबले इस वर्ष अप्रैल और जून के दौरान डकैती-लूट-पाट की घटनाओं में 47 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई जबकि चोरी की घटनाओं में भी 43 प्रतिशत की कमी आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">एजेंसी के अनुसार कोरोना महामारी के कारण लगाए गए लॉकडाउन और महामारी के खतरे के कारण लोगों के कम घरों से निकलने से इन घटनाओं में गिरावट आई हैं। चाकू या धारदार हथियारों से जुड़े अपराधों में भी वर्ष 2019 के मुकाबले इस वर्ष 21 और 23 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है। ओएनएस ने बताया कि पिछले वर्ष देश में अपराध के डेढ़ करोड़ मामले दर्ज किये गए थे जिसके बाद अप्रैल में लागू किये गए लॉकडाउन के चलते जून तक इन अपराधों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई। इस वर्ष अप्रैल से लेकर जून तक धारधार या हथियारों से किये जाने वालों अपराधों में भी भारी कमी दर्ज की गई।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>अंतरराष्ट्रीय ख़बरें</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Oct 2020 10:10:44 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>राजनीति में बढ़ता अपराधों को सरंक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[राजनीति के अपराधीकरण का मसला एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चिंता जताई है वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि सर्वोच्च अदालत को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। केंद्र सरकार की इस दलील के पीछे तर्क यह है कि अधिकांश मामलों में नेता बरी हो जाते हैं। यानि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/protection-of-increasing-crimes-in-politics/article-5916"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-09/protection-of-increasing-crimes-in-politics.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">राजनीति के अपराधीकरण का मसला एक बार फिर सुर्खियों में है। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में चिंता जताई है वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि सर्वोच्च अदालत को इसमें दखल नहीं देना चाहिए। केंद्र सरकार की इस दलील के पीछे तर्क यह है कि अधिकांश मामलों में नेता बरी हो जाते हैं। यानि केवल आरोपों के आधार पर उन्हें अयोग्य घोषित कर देना गलत होगा। दूसरी ओर न्यायाधीशों की राय भी इस मामले में बंटी हुई है। मसलन मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा का मानना है कि चुनाव आयोग खुद ही यह नियम बना सकता है कि आपराधिक मामलों में लिप्त उम्मीदवार को पार्टी का चुनाव चिन्ह नहीं दिया जाएगा। दो अन्य न्यायाधीश भी चीफ जस्टिस के इस मत का समर्थन करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">लेकिन एक अन्य न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा का कहना है कि इस प्रावधान का दुरुपयोग हो सकता है। यानि विपक्षी नेता उम्मीदवारों पर गलत आरोप लगा सकते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या इन आशंकाओं के मद्देनजर राजनीति के अपराधीकरण से आंखें मींच ली जाएं? सरकार की ओर से अटार्नी जनरल कहते हैं कि इस मसले पर न्यायपालिका संसद के अधिकार क्षेत्र को अपने हाथ में ले रही है यानि विधायिका के अधिकार पर अतिक्रमण कर रही है। जबकि प्रधान न्यायाधीश का कहना है कि संसद जब तक कानून नहीं बनाए तब तक क्या अदालत को हाथ पर हाथ धरे बैठे रहना चाहिए। जाहिर तौर पर राजनीति की मंशा इस मसले पर पारदर्शी नहीं दिखती।</p>
<p style="text-align:justify;">अपराध मुक्त राजनीति को लेकर संसद और सड़क पर बड़े-बड़े नेताओं ने बड़ी-बड़ी बातें कहीं। लेकिन अदालत में अटार्नी जनरल द्वारा रखा गया पक्ष इस बात की तस्दीक करता है वे सिर्फ बातें थीं, इनका वास्तविकता से कोई लेना देना नहीं। ऐसे में यदि सर्वोच्च अदालत कोई फैसला सुना भी दे तो उसका पालन होने में संदेह है। न्यायपालिका के कई फैसले ऐसे हैं जिनका पालन होने में लापरवाही बरती जा रही है। दरअसल कानून चाहे संसद बनाए चाहे सुप्रीम कोर्ट के आदेश से देश में कोई नियम लागू हो, उसका पालन होने में तब तक संदेह बना ही रहेगा जब तक पालन करवाने वाला इच्छाशक्ति नहीं दिखाएगा। संविधान में छुआछूत को गैरकानूनी घोषित किया गया है और सभी नागरिकों को समान अधिकार दिए गए हैं लेकिन क्या आजादी के 71 साल बाद भी समाज से छुआछूत मिट सकी है? क्या महिलाओं को हर क्षेत्र में बराबरी मिल सकी है? ऐसे में जब सरकार खुद ही सुप्रीम कोर्ट को इस मसले से दूर रहने की सलाह दे तो लगता है सियासत खुद अपराधमुक्त नहीं होना चाहती।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Sep 2018 13:29:46 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अपराधों पर अंकुश के लिए सम्मेलन संपन्न</title>
                                    <description><![CDATA[सम्मेलन। पुलिस हमारी कम्प्यूनिटी, जिला-राज्य की नहीं हो कोई बाध्यता आन्तरिक सुरक्षा पर किया गहनता से मंथन HanumanGarh, SachKahoon News:  पुलिस महानिरीक्षक ओपी सिंह हिसार रेंज की अध्यक्षता में जीओ मैस हिसार में हिसार रेंज से लगते राजस्थान व पंजाब प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के उच्च पुलिस अधिकारियों के साथ अन्तरराज्यीय समन्वय सम्मेलन का आयोजन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/to-curb-the-crimes-conference/article-377"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/04.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>सम्मेलन। पुलिस हमारी कम्प्यूनिटी, जिला-राज्य की नहीं हो कोई बाध्यता</strong></li>
<li><strong>आन्तरिक सुरक्षा पर किया गहनता से मंथन</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>HanumanGarh, SachKahoon News:</strong>  पुलिस महानिरीक्षक ओपी सिंह हिसार रेंज की अध्यक्षता में जीओ मैस हिसार में हिसार रेंज से लगते राजस्थान व पंजाब प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के उच्च पुलिस अधिकारियों के साथ अन्तरराज्यीय समन्वय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में आपसी समन्वय स्थापित करने व आन्तरिक सुरक्षा विषय पर गहनता से मंथन किया गया। सीमावर्ती जिला क्षेत्र में बढ़ते अपराधों के प्रकार व कारणों पर मंथन किया गया। अपराधी अपराध घटित कर दूसरे जिले एवं दूसरे राज्य में अपराधी द्वारा बनाई गई शरण स्थली विषयों के साथ-साथ गतवर्ष आपसी समन्वय व सहयोग के साथ अपराधियों की धरपकड़ में चलाये गये अभियान व मिली सफलता के बारे में भी सविस्तार चर्चा की गई। वहीं उस विषय पर भी चर्चा हुई जो एक-दूसरे के लिए बाधा बने। पुलिस महानिरीक्षक हिसार रेंज ओपी सिंह ने कहा कि जब कोई अपराध किसी थाना क्षेत्र में होता है तो उस अपराध के नियन्त्रण व धरपकड़ में दूसरे थाना प्रभारी ज्यादा मुस्तैदी नहीं दिखाते। जिले के थाना प्रभारी और भी कम दिलचस्पी दिखाते हैं तथा दूसरे राज्य की पुलिस जो बहुत कम दिलचस्पी लेती है। इसका फायदा अपराधी बखूबी उठाता है तथा पुलिस की गिरफ्त से बच निकलता है। उन्होंने कहा कि पुलिस हमारी कम्यूनिटी है, उसमें जिला व राज्य की कोई बाध्यता नहीं हो सकती। बशर्ते समन्वय व समय पर सूचना का आदान-प्रदान सही हो। उन्होंने कहा कि इस समस्या के निदान के लिए उन्होंने हिसार रेंज पुलिस को एक यूनिट के रूप में गठित किया है।</p>
<p><strong>हनुमानगढ़ सहित कई जिलों के एसपी रहे मौजूद</strong><br />
सम्मेलन में हनुमानगढ़ के पुलिस अधीक्षक भुवन भूषण यादव, भादरा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेन्द्रसिंह मीणा, संगरिया थानाधिकारी मोहरसिंह पूनियां, झुन्झूनू के पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र कुमार गुप्ता, चुरू के पुलिस अधीक्षक राहुल, चुरू के थानाधिकारी अनिल बिश्नोई, मानसा के पुलिस अधीक्षक नरेन्द्रपाल सिंह, एएसपी भरतराज, संगरूर के सहायक पुलिस अधीक्षक बुलन्दसिंह,सहित रेंज के अनेक उप पुलिस अधीक्षक थाना सीआईए प्रभारियों ने भाग लिया।</p>
<p><strong>इन बिन्दुओं पर सहयोग व कार्रवाई पर बनी सहमति</strong><br />
अन्तर्राज्यीय अपराध नियन्त्रण सम्मेलन में मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची जो एक-दूसरे के क्षेत्र में शरण लेते हैं का आदान-प्रदान किया गया। इसके अलावा बताया गया कि एक ऐसा मोबाइल एप बनाने पर भी काम चल रहा है जो पुलिस के अधिकारियों को सूचना देगा कि उसके मोस्ट वांटेड वा उद्घोषित अपराधी किस क्षेत्र में व कितनी संख्या में रहते हैं। जिसके बन जाने से ऐसे अपराधियों पर पुलिस की निगाह उन पर बनी रहेगी। सप्ताह में कम से कम एक बार पड़ोसी राज्य के पुलिस कर्मचारी व अधिकारी सीमा पर सामूहिक नाकाबन्दी कर चैंकिंग अभियान चलाने पर सहमति बनी।</p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Dec 2016 22:50:40 +0530</pubDate>
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