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                <title>diseases - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>बीमारियों की गिरफ्त में भारत</title>
                                    <description><![CDATA[कार्डियोलॉजिकल सोसायटी आॅफ इंडिया का यह खुलासा चिंतित करने वाला है कि देश में हृदयघात से होने वाली मृत्यु दर में लगातार वृद्धि हो रही है और अगर उच्च रक्तचाप, खराब जीवन शैली, मधुमेह, शराब का सेवन पर अंकुश नहीं लगा, तो फिर हृदयाघात से होने वाली मौतों को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा। सर्वेक्षण से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-suffers-from-diseases/article-3469"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-10/heart-attack-e1598431886683.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">कार्डियोलॉजिकल सोसायटी आॅफ इंडिया का यह खुलासा चिंतित करने वाला है कि देश में हृदयघात से होने वाली मृत्यु दर में लगातार वृद्धि हो रही है और अगर उच्च रक्तचाप, खराब जीवन शैली, मधुमेह, शराब का सेवन पर अंकुश नहीं लगा, तो फिर हृदयाघात से होने वाली मौतों को नियंत्रित करना मुश्किल हो जाएगा। सर्वेक्षण से उद्घाटित हुआ है कि इस समय देश में 54 लाख लोग हार्ट फेल्यर से पीड़ित हैं और प्रत्येक वर्ष दिल के मरीजों की तादाद बढ़ रही है। हृदयघात की बीमारी कई अन्य गैर संचारी बिमारियों को भी जन्म दे रही है। अभी गत वर्ष ही पुणे स्थित चेस्ट रिसर्च फाउंडेशन तथा नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट आॅफ जिनेमिक्स एंड इंटिग्रेटेड बायोलॉजी द्वारा खुलासा किया गया कि भारत की आधी से अधिक आबादी श्वास संबंधी रोगों और फेफड़ों से जुड़ी शिकायतों से ग्रस्त हैं और प्रतिदिन तकरीबन साढ़े तीन करोड़ लोग डॉक्टरों के पास स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों के निदान के लिए पहुंच रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">चिकित्सकों ने यह निष्कर्ष 880 शहरों में व्यापक अध्ययन के बाद निकाला है। चिकित्सकों ने अपने अध्ययन में पाया है कि देश की आबादी का 21 प्रतिशत हिस्सा हृदय रोगों, हाइपर टेंशन और उच्च रक्तचाप की चपेट में हैं। रिपोर्ट में फेफड़े की बीमारियों के अलावा दमा और क्रोनिक ब्रोंकाइटिस जैसे घातक बीमारियों के मरीजों की तादाद बढ़ने का भी उल्लेख है। साथ ही इस बात का भी जिक्र है कि विश्व की कुल 7़3 अरब की जनसंख्या के मुकाबले भारत की 1़2 अरब की आबादी में सालाना विश्व भर में होने वाली मौतों की 18 प्रतिशत मौतें भारत में होती है। संयुक्त राष्ट्र की वैश्विक रिपोर्ट से यह भी उद्घाटित हो चुका है कि असंक्रामक बीमारियों (हृदय रोग, मधुमेह और कैंसर) की वजह से आने वाले वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित होगी।</p>
<p style="text-align:justify;">रिपोर्ट में कहा गया है कि सन् 2012 से 2030 के बीच इन बीमारियों के इलाज पर तकरीबन 6़2 खरब डॉलर यानी 41 लाख करोड़ रुपए खर्च होगा। यह रिपोर्ट शहरी आबादी के स्वास्थ्य से विकास पर पड़ने वाले असर पर आधारित है। रिपोर्ट के मुताबिक बढ़ता शहरीकरण और वहां काम तथा जीवन शैली की स्थितियां ही इन बीमारियों के लिए जिम्मेदार हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि सन् 2014 से 2050 के बीच में भारत में 404 मिलियन यानी 40 करोड़ 40 लाख आबादी शहरों का हिस्सा बनेगी। आंकड़ों पर गौर करें तो देश में सालाना होने वाली कुल मौतों में से 6 प्रतिशत लोगों की मौत कैंसर से होती है। यह दुनिया भर में कैंसर से होने वाली कुल मौतों का 8 प्रतिशत है। इसी तरह भारत में 6 करोड़ से अधिक लोग मधुमेह से पीड़ित हैं। हर वर्ष तकरीबन 15 लाख लोग मधुमेह की भेंट चढ़ते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आज की तारीख में भारत की आधी से अधिक आबादी श्वास संबंधी रोगों और फेफड़ों से जुड़ी शिकायतों से ग्रस्त है। ऐसे में कहना गलत नहीं कि भारत विश्व की सर्वाधिक बीमारियों का बोझ उठाने वाले देशों में शुमार हो चुका है और अगर बीमारियों पर नियंत्रण नहीं लगा तो वह दिन दूर नहीं जब विश्व में भारत की पहचान एक बीमारु देश के रुप में होगी। कैंसर, मधुमेह, हृदय, श्वास रोग और मानसिक रोगों जैसे गैर संक्रामक रोगों से बेहतर तरीके से निपटने के लिए अभी तक कारगर कदम नहीं उठाए गए हैं। हालांकि इस दिशा में पार्टनरशिप टू फाइट क्रॉनिक डिजीज (पीएॅसीडी) ने हाल ही में संकल्प दिशा स्वस्थ भारत की नाम से एक राष्ट्रीय रुपरेखा तैयार की है।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका उद्देश्य देश में 2025 तक स्वस्थ भारत के संकल्प को हासिल करने में सहयोग देना है। चूंकि भारत में गैर संक्रामक रोगों से निपटने के लिए कोई ठोस नीति नहीं है लिहाजा ऐसे में इस ब्लू प्रिंट से राज्यों को स्वास्थ्य संबंधी मामलों को प्राथमिकता देने में मदद मिलेगी। आज जरुरत तो इस बात की है कि भारत सरकार और विश्व स्वास्थ्य संगठन जैसी अंतरराष्टÑीय संस्थाएं गैर संचारी रोगों से निपटने के लिए समन्वित रुप से असरकारक कार्यक्रम तैयार करें।</p>
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                                                            <category>लेख</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2017 03:44:25 +0530</pubDate>
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                <title>‘संपर्क पोर्टल पर 60 दिन से अधिक की पेंडेसी न होे’</title>
                                    <description><![CDATA[ राजश्री योजना की पहली किश्त बकाया होन पर सभी बीसीएमएचओ को नोटिस के निर्देश बिजली, पानी, मौसमी बीमारियों सबंधित बैठक आयोजित श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)। राजश्री योजना की पहली किस्त बड़ी संख्या में पेंडिंग रहने पर जिला कलक्टर ज्ञानाराम ने नाराजगी जाहिर करते हुए जिले के सभी बीसीएमएचओ को नोटिस देने के निर्देश दिए हैं। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/organized-meeting-related-to-electricity-water-seasonal-diseases/article-2643"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/meeting-5.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;"> राजश्री योजना की पहली किश्त बकाया होन पर सभी बीसीएमएचओ को नोटिस के निर्देश</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>बिजली, पानी, मौसमी बीमारियों सबंधित बैठक आयोजित</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>श्रीगंगानगर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> राजश्री योजना की पहली किस्त बड़ी संख्या में पेंडिंग रहने पर जिला कलक्टर ज्ञानाराम ने नाराजगी जाहिर करते हुए जिले के सभी बीसीएमएचओ को नोटिस देने के निर्देश दिए हैं। सात दिन में नोटिस का जवाब नहीं देने पर विभागीय कार्रवाई के लिए राज्य सरकार को लिखने को कहा है। जिला कलक्ट्रेट में बुधवार को बिजली, पानी, चिकित्सा, मौसमी बिमारियों से संबंधित आयोजित बैठक में राजश्री योजना की रिव्यू के दौरान जिला कलक्टर ने ये निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में राजश्री योजना को लेकर एडीश्नल सीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहता ने बताया कि राजश्री योजना की पहली किस्त 1343 बकाया है। इस पर जिला कलक्टर ने नाराजगी जताते हुए सभी बीसीएमएचओ को नोटिस देने के निर्देश देते हुए सात दिन में जवाब देने को कहा।</p>
<h2 style="text-align:justify;">पहली किस्त में खाते नहीं खुलने के कारण आयी दिक्कत</h2>
<p style="text-align:justify;">बैठक में एडिश्नल सीएमएचओ ने बताया कि योजना की दूसरी किस्त में हम पूरे राजस्थान में दूसरे स्थान पर हैं। पहली किस्त में खाते नहीं खुलने के कारण दिक्कत आ रही है। इस पर जिला कलक्टर ने कहा कि जब मनरेगा से लेकर दूसरी सरकारी योजना में महिलाओं के नाम खाते खुलवाकर काम हो रहा है तो फिर बीसीएमएचओ संबंधित महिलाओं के खाते क्यों नहीं खुलवा सकते। बैठक में राजस्थान संपर्क पोर्टल की समीक्षा करते हुए जिला कलक्टर ने कहा कि 60 दिन से ज्यादा की पैंडेसी जीरो होनी चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">एसीपी रूचि गोयल ने बैठक में बताया कि जिले में 30 दिन से ज्यादा 576, 60 दिन से ज्यादा 327 और 180 दिन से ज्यादा के 87 परिवेदनाएं पेंडिंग हैं। इस पर बैठक में संपर्क पोर्टल पर 30 दिन से ज्यादा पेंडिंग चल रहे मामलों की समीक्षा करते हुए जिला कलक्टर ने पीडब्ल्यूडी, यूआईटी समेत कई विभागों को परिवेदनाएं पिछले सप्ताह से ज्यादा होने पर उन्हें जल्द निस्तारण के निर्देश देते हुए कहा कि इसमें किसी प्रकार की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। वहीं जल संसाधन विभाग द्वारा पिछले एक सप्ताह में परिवेदनाओं का निस्तारण कर 78 से 46 पर आंकड़ा आने पर प्रशंसा की।</p>
<h2 style="text-align:justify;">आवारा पशुओं की समस्या की ली जानकारी</h2>
<p style="text-align:justify;">शहर में आवारा पशुओं की समस्या को लेकर समीक्षा करने के दौरान नगर परिषद कमीश्नर ने गांव के आवारा पशुओं को मिर्जेवाला रोड पर बनी नंदीशाला में लेकर आने की समस्या पर जिला कलक्टर ने स्पष्ट किया कि मिर्जेवाला रोड पर बनी नंदीशाला में केवल शहर के आवारा पशुओं को ही छोड़ा जाए। गांव के आवारा पशुओं को स्थानीय स्तर पर और ब्लॉक स्तर पर ही उनकी व्यवस्था की जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">नगर परिषद् कमीश्नर ने हाल ही में शुरू हुई नंदीशाला में चारे की समस्या बताने पर जिला कलक्टर ने एडीएम विजीलेंस, एसडीएम श्रींगगानगर और सीईओ जिला परिषद को चारे की व्यवस्था को लेकर आवश्यक कार्यवाही करने के निर्देश दिए। जिला कलक्टर ने पशुपालन विभाग की ओर से गौशालाओं को अनुदान, उन्हें जमीन अलॉट, पशुओं की क्षमता इत्यादि की पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं करवाने पर नाराजगी जाहिर करते हुए इसके बारे में पूरी जानकारी शीघ्र उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए ताकि जिन गौशालाओं में क्षमता है वहां आवारा पशुओं को शिफ्ट किया जा सके।</p>
<h2 style="text-align:justify;">स्वीकृत कार्य पूरे नहीं होने पर जताई नाराजगी</h2>
<p style="text-align:justify;">बैठक में एमपी-एमएलए लेड की समीक्षा के दौरान सामने आया कि पीएचईडी में एमपी और एमएलए लेड से कई कार्य स्वीकृत हैं लेकिन उनमें से ज्यादातर कार्य नहीं हो रहे। कई कार्य तो 2 साल से स्वीकृत होने के बावजूद पूरा नहीं होने पर जिला कलक्टर ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि ये समस्या तो आ सकती है कि फंड नहीं है लेकिन फंड होने के बावजूद ऐसी समस्या आ रही है। ये ठीक नहीं है। जिला कलक्टर ने एमपी-एमएलए लेड से स्वीकृत सभी कार्यों को प्राथमिकता के साथ करने के निर्देश दिए।</p>
<h2 style="text-align:justify;">जल्द पेमेंट करने के निर्देश</h2>
<p style="text-align:justify;">महिला एवं बाल विकास की समीक्षा के दौरान सूरतगढ़ में आंगनवाड़ी केन्द्रों पर कार्य कर रही कार्यकर्ताओं इत्यादि का पेमेंट 3 महीने से नहीं होने के मामले में उपनिदेशक महिला एवं बाल विकास को जल्द पेमेंट के निर्देश दिए। समाज कल्याण विभाग के रायनसिंहनगर और केसरीसिंहपुर हॉस्टल व सूरतगढ़ की सोयल टेस्ट लेब में पानी की समस्या सामने आने पर जिला कलक्टर ने पीएचईडी के अधिकारियों को इसमें आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए।</p>
<p style="text-align:justify;">बैठक में इसके अलावा मुख्यमंत्री द्वारा ली जाने वाली राजविकास वीसी, समेत सरकार की अन्य फ्लैगशिप योजनाओं की भी समीक्षा की गई। बैठक में जिला कलक्टर ज्ञानाराम के अलावा जिला परिषद् सीईओ विश्राम मीणा, एडीएम विजीलेंस वीरेंद्र कुमार, नगर परिषद् कमीश्नर सुनीता चौधरी, महिला एवं बाल विकास उपनिदेशक ऋषिबाला श्रीमाली, सीओ सिटी तुलसीदास समेत अन्य विभागों के अधिकारी शामिल थे।</p>
<p style="text-align:justify;">
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Jul 2017 02:03:10 +0530</pubDate>
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