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                <title>curb - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>साइबर अपराध पर लगाम कसने के लिए एडवाइजरी जारी</title>
                                    <description><![CDATA[सतर्कता के साथ, हर व्यक्ति साइबर अपराध को रोककर निर्दोष लोगों को इसका शिकार बनने से रोकने में मदद कर सकता है। विर्क ने कहा कि पुलिस ने साइबर थानों के अपने नेटवर्क को मजबूत करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/advisory-issued-to-curb-cyber-crime/article-13026"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/advisory-issued.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">पुलिस ने साइबर थानों के अपने नेटवर्क को मजबूत करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है</h2>
<h2 style="text-align:center;">(Advisory issued)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)।</strong> हरियाणा पुलिस ने साइबर क्राइम के बढ़ते खतरे के मद्देजनर एक महत्वपूर्ण एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों से अनुरोध किया है कि वे अज्ञात व्यक्तियों से प्राप्त क्विक रिस्पोंस (क्यूआर) कोड की स्कैनिंग करते समय विशेष सतर्कता बरतते हुए इससे बचें क्योंकि यह कोड उनके बैंक खातों की जानकारी लेकर ठगी कर सकते हैं। (Advisory issued) अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून एवं व्यवस्था) नवदीप सिंह विर्क ने ऐसे साइबर स्कैमर्स से सावधान रहने की सलाह देते हुए वीरवार को बताया कि साइबर अपराधी अब ईमेल, व्हाट्सएप जैसे माध्यम से क्यूआर कोड भेजकर लोगों के बैंक खातों को हैक कर ठगी करने की कोशिश कर रहे हैं।</p>
<h3>नागरिकों से किसी तरह के प्रलोभन या बहकावे में न आने का भी आग्रह किया</h3>
<p style="text-align:justify;">आज के युग में स्मार्ट फोन के बढ़ते उपयोग और मोबाइल ऐप व इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से भुगतान के नए तरीकों से साइबर धोखाधड़ी बढ़ी है। ऐसे जालसाजों से बचने के लिए ऑनलाइन भुगतान के हर विवरण पर पूरा ध्यान देना चाहिए। उन्होने नागरिकों से किसी तरह के प्रलोभन या बहकावे में न आने का भी आग्रह किया। साइबर अपराध के तरीके के बारे में उन्होंने कहा कि सबसे पहले, ये स्कैमर्स सेकंड हैंड सामान के लिए खरीददार या विक्रेता बनकर लोगों को भुगतान में आसानी के लिए एक क्यूआर कोड भेजकर स्कैन करने के लिए कहते हैं।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">जैसे ही रिसीवर्स कोड स्कैन करते हैं, उनके खाते से पैसे कट जाते हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">इसके अतिरिक्त, दुकानदारों को भी थोक आॅर्डर की पेशकश के साथ लालच दिया जाता है ।</li>
<li style="text-align:justify;">और बाद में भुगतान प्राप्त करने के लिए क्यूआर कोड भेजकर धोखा दिया जाता है।</li>
<li style="text-align:justify;">बाद में आरोपी सामान भी वितरित नहीं करते।</li>
</ul>
<h3 style="text-align:justify;">पुलिस ने साइबर थानों के अपने नेटवर्क को मजबूत करने की प्रक्रिया की शुरू</h3>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने यूपीआई या अन्य वॉलेट्स द्वारा ऑनलाइन भुगतान करने के लिए एहतियाती उपाय सुझाते हुए कहा कि क्यूआर कोड धन प्राप्ति की बजाय केवल भुगतान के लिए प्रयोग होता है। नागरिकों को अज्ञात व्यक्तियों द्वारा भेजे गए क्यूआर कोड की स्कैनिंग से बचना चाहिए और संदिग्ध पतों से आई ईमेल, व्हाट्सएप व टेक्स्ट संदेशों का जवाब नहीं देना चाहिए।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">सतर्कता के साथ, हर व्यक्ति साइबर अपराध को रोककर निर्दोष लोगों को इसका शिकार बनने से रोकने में मदद कर सकता है।</li>
<li style="text-align:justify;">विर्क ने कहा कि पुलिस ने साइबर थानों के अपने नेटवर्क को मजबूत करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है।</li>
<li style="text-align:justify;">वर्तमान में, गुरुग्राम और पंचकुला में साइबर पुलिस स्टेशन काम कर रहे हैं।</li>
<li style="text-align:justify;">राज्य में साइबर जालसाजों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए जल्द ही साइबर पुलिस स्टेशनों के नेटवर्क को अपग्रेड किया जाएगा।</li>
</ul>
<p> </p>
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                                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Feb 2020 18:39:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>दिल्ली विधानसभा चुनावों में चुनाव आयोग का अंकुश</title>
                                    <description><![CDATA[दिल्ली विधानसभा चुनावों में चुनाव प्रचार बड़े जोरों-शोरों से चल रहा है पर वहीं इस दौरान कुछ नेताओं द्वारा आपत्तिजनक भाषा प्रयोग के मामले भी सामने आए हैं और जिसका चुनाव आयोग ने सख्त नोटिस लिया है। चुनाव महज वोटर के विवेक की परख हैं, जिसे घटिया राजनीति करने वाले नेताओं ने जंग का मैदान […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/editorial/election-commission-curb-in-delhi-assembly-elections/article-12859"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-02/delhi-assembly-election.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">दिल्ली विधानसभा चुनावों में चुनाव प्रचार बड़े जोरों-शोरों से चल रहा है पर वहीं इस दौरान कुछ नेताओं द्वारा आपत्तिजनक भाषा प्रयोग के मामले भी सामने आए हैं और जिसका चुनाव आयोग ने सख्त नोटिस लिया है। चुनाव महज वोटर के विवेक की परख हैं, जिसे घटिया राजनीति करने वाले नेताओं ने जंग का मैदान बना दिया है। जहां तक चुनाव आयोग की सख्ती का संबंध है वहा चुनाव आयोग ने सख्त व तुरंत फैसले लेने में कोई संकोच नहीं किया।</p>
<p style="text-align:justify;">चुनाव आयोग ने भाजपा के उम्मीदवार कपिल मिश्रा के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई है और उसके द्वारा किए गए आपत्तिजनक ट्वीट को भी हटाया है। मिश्रा ने दिल्ली विधानसभा चुनावों को भारत व पाकिस्तान की जंग करार दिया था। चुनावों की प्रक्रिया भारत के चुनाव आयोग द्वारा पूरी करवाई जाती है यहां पाकिस्तान का इससे कोई मतलब ही नहीं है। भारत में चुनाव वही व्यक्ति लड़ सकता है जिसे भारत के सविंधान में विश्वास है और वह खुद को भारतीय कहलवाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">ऐसी संवैधानिक व्यवस्था के होते हुए चुनाव लड़ रहे किसी व्यक्ति को पाकिस्तानी करार देना अपने आप में संविधान का अपमान है। चुनावों में जीत-हार बाद की बात है, सबसे अधिक अहमियत चुनावों की है। हमारे देश में चुनाव उत्सव रूप ले रहें हैं, हालांकि कुछ नेता अपनी जहर बुझी ब्यानबाजी द्वारा माहौल को बिगाड़ने का प्रयास करते हैं फिर भी यह सौभाग्य वाली बात है कि अब अनाप-शनाप बोलकर माहौल खराब करने वाले के खिलाफ न केवल कार्रवाई होती है बल्कि ऐसे नेता पार्टी में अकेले पड़ जाते हैं और पार्टी उनकी ब्यानबाजी से किनारा कर लेती है।</p>
<p style="text-align:justify;">कपिल मिश्रा के बाद चुनाव आयोग ने भाजपा के दो स्टार प्रचारकों पर भी पाबंदी लगा दी है। नि:संदेह चुनाव आयोग ने इन सख्त फैसलों से दर्शा दिया है कि वह बिना किसी राजनीतिक दबाव के काम कर रहा है। बेशक दिल्ली विधानसभा की सीटों की संख्या केवल 70 ही है परंतु चुनावों पर पूरे देश की नजर है। बेशक सीएए के कारण दिल्ली में कई बार माहौल गर्माहट वाला बन चुका है।</p>
<p style="text-align:justify;">फिर भी लगभग सभी राजनीतिक पार्टियां चुनाव आयोग के आदेशों के प्रति सचेत हैं और एक-दूसरे को पटखनी देने के लिए मुद्दों पर ध्यान केद्रिंत कर रही हैं। आम आदमी पार्टी अपना संकल्प पत्र व भाजपा चुनावी घोषणा पत्र पेश कर चुकी हैं। दोनों पार्टियों की ओर से बड़े-बड़े वादे-दावे किए जा रहे हैं, हालांकि दिल्ली के वोटर की सोच देश के बाकी राज्यों से अलग है। उम्मीद की जानी चाहिए कि चुनाव शांतिपूर्वक तरीके से सम्पन्न होंगे और वोटरों को अपने अधिकारों का प्रयोग करने का अवसर मिलेगा।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>सम्पादकीय</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Feb 2020 11:24:23 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कार्बन उत्सर्जन पर भारत ने लगाया अंकुश</title>
                                    <description><![CDATA[इसी सिलसिले में भारत के कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन ने कहा है
कि यदि धरती के तापमान में 1 डिग्री सेल्शियस की वृद्धि हो जाती है तो गेहूं का उत्पादन 70 लाख टन घट सकता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/india-has-curbed-carbon-emissions/article-11814"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-12/curb.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">अमेरिका में कोयले से कुल खपत की 37 फीसदी बिजली पैदा की जाती है। इस बिजली उत्पादन में अमेरिका विश्व में दूसरे स्थान पर है। कोयले से बिजली उत्पादन करने से सबसे ज्यादा ग्रीन हाउस गैसें उत्सर्जित होती हैं। इस दिशा में भारत ने बड़ी पहल करते हुए 50 करोड़ एलईडी बल्बों से प्रकाश व्यवस्था लागू कर दी है। इस प्रक्रिया से कॉर्बन डाइआॅक्साइड में 11 करोड़ टन की कमी लाने में सफलता मिली है। इसकी अगली कड़ी में सघन औद्योगिक ईकाइयों की ऊर्जा खपत को तीन वर्शीय योजना के तहत घटाया जा रहा है। किंतु अमेरिका ने कोयले की चुनौती से निपटने के अब तक कोई उपाय नहीं किए ?</p>
<p style="text-align:justify;">भारत पहली बार इस वर्श के ‘जलवायु परिवर्तन प्रदर्शन सूचकांक’ में शीर्ष दस देशों में शामिल हुआ है। वहीं अमेरिका सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में पहली बार शामिल हुआ है। स्पेन की राजधानी मैड्रिड में ‘कॉप 25’ जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में यह रिपोर्ट जारी की गई। रिपोर्ट के अनुसार 57 उच्च कॉर्बन उत्सर्जन वाले देशों में से 31 में उत्सर्जन का स्तर कम होने के रुझान दर्ज किए गए हैं। इन्हीं देशों से 90 प्रतिशत कॉर्बन का उत्सर्जन होता रहा है। इस सूचकांक ने तय किया है कि कोयले की खपत में कमी सहित कार्बन उत्सर्जन में वैश्विक बदलाव दिखाई देने लगे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस सूचकांक में चीन में भी मामूली सुधार हुआ है। नतीजतन वह तीसवें स्थान पर है। जी-20 देशों में ब्रिटेन सातवें और भारत को नवीं उच्च श्रेणी हासिल हुई है। जबकि आस्ट्रेलिया 61 और सऊदी अरब 56वें क्रम पर हैं। अमेरिका खराब प्रदर्शन करने वाले देशों में इसलिए आ गया है, क्योंकि उसने जलवायु परिवर्तन की खिल्ली उड़ाते हुए इस समझौते से बाहर आने का निर्णय ले लिया था। इसलिए कॉर्बन उत्सर्जन पर उसने कोई प्रयास ही नहीं किए। यदि भारत जीवाश्म ईंधन पर दी जा रही सब्सिडी को चरणबद्ध तरीके से कम करता चला जाए, तो कोयले पर उसकी निर्भरता कम हो जाएगी। कोयला ही सबसे ज्यादा कॉर्बन उत्सर्जन करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">भारत में अब तक ऊर्जा आवश्यकताओं और पर्यावरण सरंक्षण के बीच संतुलन साधने के बावजूद कार्बन उत्सर्जन बढ़ रहा था। इसीलिए अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2018 में 2,299 मिलियन टन कार्बन डाइआॅक्साइड पैदा हुआ, जो 2017 की तुलना में 4.8 फीसदी अधिक था। भारत में इस बढ़ोत्तरी का कारण उद्योगों और विद्युत उत्पादन में कोयले का बढ़ता प्रयोग रहा है। अर्थव्यवस्था को गति देने और आबादी के लिए ऊर्जा की जरूरतों को पूरा करने के लिए कोयले के उपयोग पर एकाएक अंकुश लगाना मुश्किल है ? लिहाजा वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में भारत की भागीदारी 7 प्रतिशत थी, जो अब घटना शुरू हो गई है। इसका प्रति व्यक्ति उत्सर्जन वैश्विक औसत का करीब 40 फीसदी है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह इसलिए संभव हुआ, क्योंकि एलईडी बल्ब और सौर ऊर्जा की खपत बढ़ाए जाने का सिलसिला नरेंद्र मोदी सरकार ने एक मुहिम के तहत चलाया। ग्रामीण इलाकों में बड़ी संख्या में गैस सिलेंडर मुफ्त दिए गए। इससे लकड़ी के ईंधन पर ग्रामीण भारत की निर्भरता बहुत कम हो गई। यदि कॉर्बन उत्सर्जन पर नियंत्रण बना रहता है तो भारत प्रदूषण से मुक्ति की दिशा में आगे बढ़ता दिखाई देगा ? यह इसलिए भी जरूरी है, क्योंकि पिछले दिनों ग्रीनपीस की जो रिपोर्ट आई थी, उसमें बताया था कि विश्व के 30 सर्वाधिक प्रदूषित नगरों में से 22 भारत में हैं। औद्योगिक संयंत्रों और वाहनों से निकलने वाला धुंआ इस प्रदूषण की मुख्य वजह है। दुनिया की आधी आबादी वाले एशिया में कोयले की तीन चौथाई खपत होती है। इसी क्षेत्र में तीन चौथाई कोयले के संयंत्र हैं। हालांकि भारत जीवाश्म ईंधन के इस्तेमाल से बचने के लिए इलेक्ट्रनिक कार, सौर और वायु ऊर्जा तथा न्यूनतम कार्बन पैदा करने वाली प्रौद्योगिकी पर जोर दे रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">इटली में जी-7 की शिखर बैठक में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हस्ताक्षर करने से इंकार कर दिया था। ट्रंप ने तब भारत और चीन पर आरोप लगाया कि इन दोनों देशों ने विकसित देशों से अरबों डॉलर की मदद लेने की शर्त पर समझौते पर दस्तखत किए हैं। लिहाजा यह समझौता अमेरिका के आर्थिक हितों को प्रभावित करने वाला है। यही नहीं ट्रंप ने आगे कहा था कि भारत ने 2020 तक अपना कोयला उत्पादन दो गुना करने की अनुमति भी ले ली है। वहीं चीन ने कोयले से चलने वाले सैकड़ों बिजलीघर चालू करने की शर्त पर दस्तखत किए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">साफ है, यह समझौता अमेरिकी हितों को नुकसान पहुंचाने वाला है। हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तत्काल ट्रंप द्वारा खड़े किए इस सवाल का उत्तर देते हुए कहा था कि ‘भारत प्राचीनकाल से ही पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी निभाता चला आ रहा है। हमारे 5000 साल पुराने शास्त्र पर्यावरण सरंक्षण के प्रति सजग रहे हैं। अथर्ववेद तो प्रकृति को ही समर्पित है। हम प्रकृति के दोहन को अपराध मानते हैं।’ अब इस ताजा रिपोर्ट से साबित हुआ है कि भारत ने कॉर्बन उत्सर्जन पर अंकुश के प्रतिबद्धता का प्रमाण दे दिया है। यहां यह भी स्पष्ट करना मुनासिब होगा कि पेरिस समझौते के बाद 2015 में भारत को हरित जलवायु निधि से कुल 19000 करोड़ रुपए की मदद मिली है। जिसमें अमेरिका का हिस्सा महज 600 करोड़ रुपए है। ऐसे में ट्रंप का यह दावा नितांत खोखला था कि भारत को इस निधि से अमेरिका के जरिए बड़ी मदद मिल रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल जलवायु परिवर्तन के असर पर शोध कर रहे वैज्ञानिकों का मानना है कि सन् 2100 तक धरती के तापमान में वृद्धि को नहीं रोका गया तो हालात नियंत्रण से बाहर हो जाएंगे। क्योंकि इसका सबसे ज्यादा असर खेती पर पड़ रहा है। धरती की नमी घट रही है और शुष्कता बढ़ रही है। भविष्य में अन्न उत्पादन में भारी कमी की आशंका जताई जा रही है। इस बात का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि एशिया के किसानों को कृषि को अनुकूल बनाने के लिए प्रति वर्ष करीब पांच अरब डॉलर का अतिरिक्त खर्च उठाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">अंतरराष्ट्रीय खाद्य नीति शोध संस्थान के अनुसार, अगर यही स्थिति बनी रही तो एशिया में 1 करोड़ 10 लाख, अफ्रीका में एक करोड़ और शेष दुनिया में 40 लाख बच्चों को भूखा रहना होगा। इसी सिलसिले में भारत के कृषि वैज्ञानिक स्वामीनाथन ने कहा है कि यदि धरती के तापमान में 1 डिग्री सेल्शियस की वृद्धि हो जाती है तो गेहूं का उत्पादन 70 लाख टन घट सकता है। लिहाजा वैज्ञानिकों की मंशा है कि औद्योगिक क्रांति के समय से धरती के तापमान में जो बढ़ोत्तरी हुई है, उसे 2 डिग्री सेल्शियस तक घटाया जाए। बहरहाल, भारत ने इस दिशा में अपनी प्रतिबद्धता का प्रमाण देकर उन देशों में आईना दिखा दिया है, जो कॉर्बन उत्सर्जन पर अंकुश लगाने का कोई प्रमाण नहीं दे पाए हैं।<br />
<strong><em>-प्रमोद भार्गव</em></strong></p>
<p> </p>
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                <pubDate>Mon, 16 Dec 2019 19:43:35 +0530</pubDate>
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                <title>अपराधों पर अंकुश के लिए सम्मेलन संपन्न</title>
                                    <description><![CDATA[सम्मेलन। पुलिस हमारी कम्प्यूनिटी, जिला-राज्य की नहीं हो कोई बाध्यता आन्तरिक सुरक्षा पर किया गहनता से मंथन HanumanGarh, SachKahoon News:  पुलिस महानिरीक्षक ओपी सिंह हिसार रेंज की अध्यक्षता में जीओ मैस हिसार में हिसार रेंज से लगते राजस्थान व पंजाब प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के उच्च पुलिस अधिकारियों के साथ अन्तरराज्यीय समन्वय सम्मेलन का आयोजन […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/to-curb-the-crimes-conference/article-377"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2016-12/04.jpg" alt=""></a><br /><ul>
<li><strong>सम्मेलन। पुलिस हमारी कम्प्यूनिटी, जिला-राज्य की नहीं हो कोई बाध्यता</strong></li>
<li><strong>आन्तरिक सुरक्षा पर किया गहनता से मंथन</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>HanumanGarh, SachKahoon News:</strong>  पुलिस महानिरीक्षक ओपी सिंह हिसार रेंज की अध्यक्षता में जीओ मैस हिसार में हिसार रेंज से लगते राजस्थान व पंजाब प्रदेश के सीमावर्ती जिलों के उच्च पुलिस अधिकारियों के साथ अन्तरराज्यीय समन्वय सम्मेलन का आयोजन किया गया। सम्मेलन में आपसी समन्वय स्थापित करने व आन्तरिक सुरक्षा विषय पर गहनता से मंथन किया गया। सीमावर्ती जिला क्षेत्र में बढ़ते अपराधों के प्रकार व कारणों पर मंथन किया गया। अपराधी अपराध घटित कर दूसरे जिले एवं दूसरे राज्य में अपराधी द्वारा बनाई गई शरण स्थली विषयों के साथ-साथ गतवर्ष आपसी समन्वय व सहयोग के साथ अपराधियों की धरपकड़ में चलाये गये अभियान व मिली सफलता के बारे में भी सविस्तार चर्चा की गई। वहीं उस विषय पर भी चर्चा हुई जो एक-दूसरे के लिए बाधा बने। पुलिस महानिरीक्षक हिसार रेंज ओपी सिंह ने कहा कि जब कोई अपराध किसी थाना क्षेत्र में होता है तो उस अपराध के नियन्त्रण व धरपकड़ में दूसरे थाना प्रभारी ज्यादा मुस्तैदी नहीं दिखाते। जिले के थाना प्रभारी और भी कम दिलचस्पी दिखाते हैं तथा दूसरे राज्य की पुलिस जो बहुत कम दिलचस्पी लेती है। इसका फायदा अपराधी बखूबी उठाता है तथा पुलिस की गिरफ्त से बच निकलता है। उन्होंने कहा कि पुलिस हमारी कम्यूनिटी है, उसमें जिला व राज्य की कोई बाध्यता नहीं हो सकती। बशर्ते समन्वय व समय पर सूचना का आदान-प्रदान सही हो। उन्होंने कहा कि इस समस्या के निदान के लिए उन्होंने हिसार रेंज पुलिस को एक यूनिट के रूप में गठित किया है।</p>
<p><strong>हनुमानगढ़ सहित कई जिलों के एसपी रहे मौजूद</strong><br />
सम्मेलन में हनुमानगढ़ के पुलिस अधीक्षक भुवन भूषण यादव, भादरा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नरेन्द्रसिंह मीणा, संगरिया थानाधिकारी मोहरसिंह पूनियां, झुन्झूनू के पुलिस अधीक्षक सुरेन्द्र कुमार गुप्ता, चुरू के पुलिस अधीक्षक राहुल, चुरू के थानाधिकारी अनिल बिश्नोई, मानसा के पुलिस अधीक्षक नरेन्द्रपाल सिंह, एएसपी भरतराज, संगरूर के सहायक पुलिस अधीक्षक बुलन्दसिंह,सहित रेंज के अनेक उप पुलिस अधीक्षक थाना सीआईए प्रभारियों ने भाग लिया।</p>
<p><strong>इन बिन्दुओं पर सहयोग व कार्रवाई पर बनी सहमति</strong><br />
अन्तर्राज्यीय अपराध नियन्त्रण सम्मेलन में मोस्ट वांटेड अपराधियों की सूची जो एक-दूसरे के क्षेत्र में शरण लेते हैं का आदान-प्रदान किया गया। इसके अलावा बताया गया कि एक ऐसा मोबाइल एप बनाने पर भी काम चल रहा है जो पुलिस के अधिकारियों को सूचना देगा कि उसके मोस्ट वांटेड वा उद्घोषित अपराधी किस क्षेत्र में व कितनी संख्या में रहते हैं। जिसके बन जाने से ऐसे अपराधियों पर पुलिस की निगाह उन पर बनी रहेगी। सप्ताह में कम से कम एक बार पड़ोसी राज्य के पुलिस कर्मचारी व अधिकारी सीमा पर सामूहिक नाकाबन्दी कर चैंकिंग अभियान चलाने पर सहमति बनी।</p>
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                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 02 Dec 2016 22:50:40 +0530</pubDate>
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