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                <title>Precious Word - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अनमोल वचन : परमात्मा की चर्चा से आती हैं बरकतें</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान जितनी भी मालिक, परमात्मा की चर्चा करता है, उतनी ही बरकतें उसकी झोली में आती चली जाती हैं। लेकिन यदि इन्सान दुनिया की, अपने मां-बाप की, परिवार की व भगवान की निंदा, चुगली व बुराइयां करता है तो उसके जीवन […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/guru-sant-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-ji-insan-5/article-26703"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-09/anmol-vachan-associate-good-people-in-life-pujya-guru-ji1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान जितनी भी मालिक, परमात्मा की चर्चा करता है, उतनी ही बरकतें उसकी झोली में आती चली जाती हैं। लेकिन यदि इन्सान दुनिया की, अपने मां-बाप की, परिवार की व भगवान की निंदा, चुगली व बुराइयां करता है तो उसके जीवन से सभी बरकतें व खुशियां पंख लगाकर उड़ जाया करती हैं। इसलिए किसी भी कीमत पर किसी की निंदा, चुगली या बुराई न करो। किसी की बुराई करना अपने पांव पर कुल्हाड़ी मारने के समान है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि हमने सभी पवित्र धर्म ग्रंथ पढ़े। पवित्र रामायण, गुरबाणी, कुरान व बाईबल सभी में यही लिखा हुआ मिला, कि क्यों! बेवजह अपनी जुबान व अपने दिमाग को व्यर्थ में खपाते हो। दूसरों की निंदा मेल धोने के समान है, अगर आप पर निंदा करोगे तो आपके अंदर पाप कर्मों की मेल चढ़ती जाएगी और आप अपनी जिंदगी में हमेशा दुखी व परेशान रहोगे। आप जी ने फरमाया कि इन्सान जितना समय दूसरों की बुराई करने व बुरा देखने में लगाता है अगर उससे आधा समय भी वह अपना भला मांगने व अल्लाह, मालिक की चर्चा में लगा दे तो यकीनन उसके जन्मों-जन्मों के पाप कर्म पल में कट जाएंगे और वह मालिक की खुशियों से मालामाल हो जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">इसलिए कभी किसी को बुरा मत कहो। पूज्य हजूर पिता जी फरमाते हैं कि हमने आज तक किसी को भी अपनी बुराइयां गाते हुए नहीं देखा। संत, पीर, फकीर को छोड़ दो वो तो इस नाशवान दुनिया से भली-भांति वाकिफ हंै। कबीर जी ने लिखा है, ‘कबीरा सबते हम बुरे हमतज भला सब कोय, जिन ऐसा कर मानेया मीत हमारा सोये।’ इन्सान को अपनी कमियां नजर क्यों नहीं आती, जबकि उसको दूसरों की कमी तुरंत नजर आ जाती है। अपने गुण तो नजर आते हैं, लेकिन दूसरों के गुण क्यों छिप जाते हैं। इन्सान को अपने अवगुण देखने चाहिएं ताकि उसके दिल व दिमाग से अवगुण चले जाएं। दूसरों के हमेशा गुणों को देखो ताकि वे सभी गुण आप में चले आएं।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 11 Sep 2021 05:05:55 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अनमोल वचन : भाग्य बदल देता है सुमिरन</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि नाम-शब्द बहुत भागों, नसीबों से इन्सान को मिलता है। सुमिरन करे तो भाग्य बदल जाते हैं, सुमिरन न करे तो अपने कर्मों का बोझ इन्सान को उठाना पड़ता है। मालिक का नाम जब इन्सान को मिल जाता है, तो उसके बाद […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/guru-sant-dr-gurmeet-ram-rahim-singh-ji-insan/article-25846"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/anmol-vachan-by-saint-msg.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि नाम-शब्द बहुत भागों, नसीबों से इन्सान को मिलता है। सुमिरन करे तो भाग्य बदल जाते हैं, सुमिरन न करे तो अपने कर्मों का बोझ इन्सान को उठाना पड़ता है। मालिक का नाम जब इन्सान को मिल जाता है, तो उसके बाद उसका सुमिरन करना अति जरूरी होता है। जब तक आप सुमिरन नहीं करेंगे, आपकी मनोइंद्रियां काबू में नहीं आएंगी और आप मन के हाथों मजबूर हो सकते हैं। इसलिए आप सुमिरन के पक्के बनो।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर आप लगातार घंटा-घंटा सुबह-शाम सुमिरन करते हैं, तो आपके आने वाले पहाड़ जैसे कर्म कंकर में बदलते हैं और लगातार सुमिरन करने से वो कंकर की चुभन भी महसूस नहीं होती। इसलिए इन्सान को सुमिरन का पक्का बनना चाहिए। आप सुमिरन के लिए समय निश्चित करो। वैसे आप सुबह 2 से 5 बजे के बीच में कभी भी जागो, उसके बाद घंटा सुमिरन करो। अगर ऐसा संभव नहीं है तो जब भी जागो, तब टाईम फिक्स कर लो कि यह समय मालिक को देना ही है। वैसे टाईम मालिक को नहीं देना, बल्कि उस टाईम में मालिक से बहुत कुछ लेना है। जब तक आप टाईम फिक्स नहीं करते, तब तक आप सुमिरन नहीं कर सकेंगे। आप जी फरमाते हैं कि जब आप सुमिरन में बैठेंगे, तो कुछ समय तक आपका ध्यान नहीं जमेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">आपको जम्हाई आएगी, कभी खाज-खुजली हो जाएगी, कभी ध्यान इधर-उधर चला जाएगा, लेकिन आप फिर भी सुमिरन करना मत छोड़ो। क्योंकि इस कलियुग में आपने जितना भी सुमिरन कर लिया, उसका फल मिलना ही मिलना है। इसलिए आप सुमिरन करना मत छोड़िए, अपने-आप मन अपनी आदतें छोड़ देगा। शुरू-शुरू में वो अड़चनें पैदा करता ही करता है, बहुत लोग उन अड़चनों में अड़ कर ही सुमिरन करना छोड़ देते हैं, लेकिन कुछ ऐसे लोग भी होते हैं जो अड़चनों की परवाह नहीं करते और सुमिरन पर लगे रहते हैं, तो फिर उनका मन उन्हें तंग करना बंद कर देता है।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Aug 2021 06:00:14 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अनमोल वचन : तमाम मुश्किलें हल कर देता है प्रभु: पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का नाम वो खुशियां और बरकतें देता है, जिसकी इन्सान ने कभी कल्पना भी नहीं की होती। यदि इन्सान सच्चे हृदय और भावना से प्रभु का नाम लेता है तो प्रभु उस इन्सान को हर चिंता से मुक्त कर देता […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/lord-solves-all-the-problems/article-25812"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/anmol-vachan-associate-good-people-in-life-pujya-guru-ji.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक का नाम वो खुशियां और बरकतें देता है, जिसकी इन्सान ने कभी कल्पना भी नहीं की होती। यदि इन्सान सच्चे हृदय और भावना से प्रभु का नाम लेता है तो प्रभु उस इन्सान को हर चिंता से मुक्त कर देता है। आप जी फरमाते हैं कि परमात्मा का कोई सच्ची भावना, सच्चे हृदय से नाम लेता है तो वो मालिक, परमात्मा उसकी तमाम मुश्किलों को हल कर देता है, तमाम चिंताओं से मुक्ति दिला देता है और अंदर ऐसा आत्मबल, आत्मविश्वास भर देता है कि इन्सान मालिक की वो बरकतें खुशियां हासिल करता है, जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता।</p>
<p style="text-align:justify;">पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इन्सान को हर समय परमात्मा का गुणगान, अपने सतगुरु मौला के गुणगान गाते रहना चाहिए। जब तक इन्सान परमपिता के गुणगान नहीं गाता, जब तक उसकी दया मेहर, रहमत के काबिल नहीं बनता तब तक सुमिरन ध्यान से, लगन से करना चाहिए और जब उसकी रहमत हो जाती है, फिर सुमिरन करना नहीं पड़ता, अपने आप चलने लग जाता है। इसलिए जब तक आपके अंदर नूरी स्वरूप के दर्शन नहीं होते, जब तक अंत:करण की भावना मालिक से जुड़ती नहीं, शुद्ध नहीं होती तब तक लगातार सुमिरन करते रहिए।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 07 Aug 2021 06:05:37 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अनमोल वचन : बार-बार गलती करना शैतानियत : पूज्य गुरु जी</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि बार-बार गलती करना शैतानियत का काम है, पशुपन है। आप से कोई भूल हो गई, गलत सोच दिमाग में आ जाए तो सुमिरन करो भक्ति करो, वचनों में अगर पहली बार गलती हुई है तो साध-संगत के सामने बेझिझक माफी लें। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/to-make-mistakes-again-and-again-is-the-work-of-the-devil/article-25786"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-08/hajur-pita-ji-6-scaled.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि बार-बार गलती करना शैतानियत का काम है, पशुपन है। आप से कोई भूल हो गई, गलत सोच दिमाग में आ जाए तो सुमिरन करो भक्ति करो, वचनों में अगर पहली बार गलती हुई है तो साध-संगत के सामने बेझिझक माफी लें। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि अगर एक बार अनजाने में गलती हो जाती है तो उसकी माफी जरूर लेनी चाहिए, क्योंकि शर्माने-शर्माने में सारी जिंदगी खराब और सारी खुशियां बर्बाद। परम पिता परमात्मा से इन्सान कोई बात छुपा नहीं सकता, इसलिए अच्छे कर्म करो, बुरे कर्म न करो।</p>
<p style="text-align:justify;">नेक कर्म करो ताकि मालिक की दया मेहर, रहमत के काबिल आप बनते चले जाएं। उसकी वो तमाम खुशियां हासिल करें जिसकी आपने कभी कल्पना भी नहीं की। वो तमाम लज्जतें मिलें, तमाम आनंद मिले, यह संभव है अगर आप मालिक के नाम का जाप करते हैं, परमात्मा की भक्ति-इबादत करते हैं। तो आपके जन्मों-जन्मों के पाप, मालिक खत्म कर सकते हैं। इसलिए भावना से, लगन से, बिना दिखावे से उस परमपिता परमात्मा का शुक्राना करो जो सारी खुशियां देने वाला है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि अहंकार न करो, खुदी न करो, उसकी रहमतों को, दातों को सिर माथे लगाओ, लेकिन उस दाता को कभी भुलो न जिसकी सब दातें हैं। इसके लिए सत्संग में आना, सुनना, अमल करना अति जरूरी है। तभी इन्सान को वो तमाम खुशियां मिलती हैं, बरकतें मिलती हैं, या यूं कहें कि वो खुशियां, बरकतें बरकरार रहती हैं, अगर इन्सान सत्संग में आता है सुनता है और वचनों पर अमल कमाता है, तो कोई भी किसी भी तरह की कमी अंदर बाहर नहीं रहा करती।’</p>
<p><b>अन्य  </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Aug 2021 06:05:24 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अनमोल वचन : निंदा करने वालों से सदा बचकर रहो</title>
                                    <description><![CDATA[सरसा (सकब)। पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को सुमिरन के लिए टाईम-पीरियड फिक्स करना चाहिए। आमतौर पर लोग बड़ी जल्दबाजी करते हैं कि पांच-सात दिन सुमिरन करुंगा और मुझे ये मिल जाए, वो मिल जाए। जबकि आप यह सोचें कि मैंने ताउम्र सुमिरन करना है, तो […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/spiritual/holy-sermons/always-stay-away-from-the-slanderers/article-25256"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/anmol-vachan-associate-good-people-in-life-pujya-guru-ji1.jpeg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा (सकब)।</strong> पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि इन्सान को सुमिरन के लिए टाईम-पीरियड फिक्स करना चाहिए। आमतौर पर लोग बड़ी जल्दबाजी करते हैं कि पांच-सात दिन सुमिरन करुंगा और मुझे ये मिल जाए, वो मिल जाए। जबकि आप यह सोचें कि मैंने ताउम्र सुमिरन करना है, तो मालिक आपकी जायज मांग सुनते भी रहेंगे और पूरी भी करते रहेंगे। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान को हमेशा अपने दिल में ये श्रद्धा-भावना बैठा कर रखनी चाहिए कि मालिक का रहमो-कर्म तो बरसेगा ही बरसेगा।</p>
<p style="text-align:justify;">जब लोग चहूं ओर मालिक का रहमो-कर्म बरसते देख रहे हैं, तो नाम लेवा जीव को यह सोचना चाहिए कि मुझ पर मालिक का रहमो-कर्म क्यों वहीं बरस रहा। फिर जीव को सोचना चाहिए कि मेरा काम है कि मैं नाम का सुमिरन करुं, भक्ति करुं। आप जी फरमाते हैं कि इन्सान निंदा-चुगली, बुराइयों व झूठ-फरेब से जितना बच सकें, उतना ही अच्छा है। बेपरवाह सच्चे दाता-रहबर (पूजनीय परमपिता शाह सतनाम सिंह जी महाराज व बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज) फरमाया करते कि निंदक की तो परछाई भी बुरी होती है,</p>
<p style="text-align:justify;">और लोग अपनी बुराइयां छुपाने के लिए ही दूसरों की निंदा करते हैं। इस पर आप जी फरमाते हैं कि अकबर-बीरबल के समय में एक बार किसी दरबारी ने कोई सामान चुरा लिया। बीरबल ने लोगों को इकट्ठा किया और बादशाह से कहा कि मुझे पता चल गया है कि चोर कौन है। बादशाह ने पूछा कि बताओ कौन है? तो बीरबल ने कहा कि बादशाह! आप निगाह मारो, चोर की दाढ़ी में तिनका है। इतने कहते ही जो चोर था, वो पहले ही अपनी दाढ़ी में हाथ मारकर देखने लगा कि कहीं मेरी दाढ़ी में तिनका तो नहीं लगा। बीरबल ने कहा कि ये रहा चोर।</p>
<p style="text-align:justify;">कहने का मतलब है कि जो निंदा-चुगली करते हैं, असल में वो खोखले होते हैं। वो अपने तिनके छुपाने के लिए दूसरों पर तिनकों की बौछार करते रहते हैं। इसलिए ऐसे लोगों से सावधान रहना चाहिए। जो भी निंदा करता है, बुराई गाता है, उससे जितना कन्नी कतरा कर रहोगे, उतने की सुखी रहोगे।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि आज घोर कलियुग का समय है। अपने मुंह से खुद अपनी बुराइयां, अपनी कमियां कोई नहीं गाता और जो लोग बुराई करने वालों के पीछे लगते हैं, उनका भी बुरा हाल होता है। इसलिए इन्सान को अपने गिरहेबान में निगाह मारनी चाहिए और अपने अंत:करण में जो कमियां नजर आती हैं, उन्हें राम-नाम के सुमिरन, परमार्थ के द्वारा निकाल डालो, तो यकीनन मालिक की दया-रहमत आप पर मूसलाधार बरसेगी ही बरसेगी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                            <category>अध्यात्म</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 18 Jul 2021 06:05:19 +0530</pubDate>
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                <title>सबके अंदर है परमात्मा</title>
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                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p style="text-align:justify;"><strong>सरसा।</strong> पूज्य हजूर पिता संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि सतगुरु, अल्लाह, वाहेगुरु, गॉड, खुदा, राम जिसके करोड़ों नाम हैं। जो भी कोई उसे सच्चे दिल से याद करता है, चाहे वो कहीं भी हो वो सतगुरु मौला दर्श-दीदार जरुर देते हैं। इन्सान की भावना शुद्ध हो इन्सान के विचार शुद्ध हों, कहीं जाने की जरुरत नहीं पड़ती, क्योंकि वो परम पिता परमात्मा सबके अंदर मौजूद है।</p>
<p>पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि वो अंदर ही नजारे दिखा देता है, अंदर ही दर्श-दीदार से नवाज देता है। वो रहमो-कर्म का मालिक है, दया का सागर है, किसी चीज की उसके पास कोई कमी नहीं है। बहुत ही भागों वाले, नसीबों वाले जीव होते हैं जो इस कलियुग में मालिक के नूरी स्वरूप के दर्शन करते हैं या मालिक के किसी भी रूप में दर्श-दीदार कर लिया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इन्सान जैसे-जैसे भक्ति करता जाता है वैसे-वैसे मालिक का रहमो-कर्म बरसता है। अगर इन्सान अंदर बाहर भावना शुद्ध कर लेता है, वचनों पर पक्का रहता है, कम से कम घंटा सुबह-शाम सुमिरन करता है, व्यवहार का सच्चा है तो एक न एक दिन उसे नूरी स्वरूप के दर्शन होते हैं, जरुर उसका दसवां द्वार खुल जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">इन्सान वचनों का पक्का है, थोड़ा सुमिरन करता है, सेवा करता है, व्यवहार का भी ठीक-ठाक है तो कभी न कभी जरुर दर्श दीदार होते हैं, चाहे वे नूरी न हों लेकिन दर्शन होते हैं। जिनको दृढ़ यकीन है, बहुत ही पक्का विश्वास है, वचनों पर पक्के हैं उनको भी मालिक के नजारे कभी कभार नजर आ जाया करते हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">आप जी फरमाते हैं कि इस कलियुग में अगर नूरी स्वरूप को देखना हो, दृढ़ यकीन हो वचनों पर पक्के हो, सुमिरन के पक्के हो, सेवा करते हो, व्यवहार के सच्चे हो अंदर शुद्ध बाहर भी शुद्ध भावना के आप स्वामी हो तो यकीन मानिये नूरी स्वरूप ही नहीं, पहले दसवां द्वार खुलेगा, फिर नूरी स्वरूप नजर आएगा और मालिक की अनहद नाद आपको मालिक तक जरुर ले जाएगी।</p>
<p style="text-align:justify;">कितना समय लगता है? समय सीमा कोई नहीं है, कुछ कहा नहीं जा सकता कितने समय तक आप मालिक के नूरी स्वरूप के दर्श-दीदार कर सकते हैं। पर यह सच है कि एक दिन वो नजर जरुर आता है। इसलिए सुमिरन कीजिए, भक्ति-इबादत कीजिए, वचनों के पक्के, व्यवहार के सच्चे बनें। इन्सान हमेशा यह ध्यान रखें कि उसके व्यवहार से कभी कोई दुखी न हो, कभी कोई परेशान न हो। व्यवहार के सच्चे बन कर जो वचनों पर चला करते हैं, वो मालिक की दया-दृष्टि के काबिल एक दिन जरुर बना करते हैं।</p>
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                                                            <category>अनमोल वचन</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 28 Jul 2017 01:08:35 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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