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                <title>DRDO - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>अब बढ़ेगी नौसेना की हवा में मार करने की क्षमता, Secret हथियार का सफल परिक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[सतह से हवा में मार करने वाली छोटी दूरी की वर्टिकल लांच मिसाइल का सफल परीक्षण नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा नौसेना ने सतह से हवा में मार करने वाली छोटी दूरी की वर्टिकल लांच मिसाइल का मंगलवार को ओडिशा की एकीकृत परीक्षण रेंज से सफल परीक्षण किया। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/capability-of-the-navy-will-increase-in-the-air/article-36931"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/drdo.jpg" alt=""></a><br /><h4 style="text-align:center;"><strong>सतह से हवा में मार करने वाली छोटी दूरी की वर्टिकल लांच मिसाइल का सफल परीक्षण</strong></h4>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) तथा नौसेना ने सतह से हवा में मार करने वाली छोटी दूरी की वर्टिकल लांच मिसाइल का मंगलवार को ओडिशा की एकीकृत परीक्षण रेंज से सफल परीक्षण किया। मिसाइल की वर्टिकल लॉन्च क्षमता का पता लगाने के लिए यह परीक्षण नौसेना के एक पोत से किया गया और इसने एक ड्रोन पर हवा में सटीक निशाना साधा। इस मिसाइल को डीआरडीओ ने डिजाइन तथा विकसित किया है। मिसाइल ने परीक्षण के दौरान सभी मानदंडों को पूरा करते हुए लक्ष्य पर निशाना साधा।</p>
<p style="text-align:justify;">डीआरडीओ तथा अन्य संबंधित प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों ने मिसाइल पर परीक्षण के दौरान करीब से नजर रखी और इसकी गतिविधियों को रखा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ नौसेना तथा इस परीक्षण से जुड़ीअन्य टीमों को बधाई दी है और कहा है कि इससे नौसेना की क्षमता बढ़ेगी। डीआरडीओ के अध्यक्ष ने भी सफल परीक्षण के लिए बधाई देते हुए कहा है कि इससे नौसेना की हवा में मार करने की क्षमता बढ़ेगी।</p>
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                                                            <category>देश</category>
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                <pubDate>Tue, 23 Aug 2022 16:47:54 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>‘प्रलय’ मिसाइल: अब दुश्मन सेना के पल भर में तबाह होंगे बंकर, बेस और तोप</title>
                                    <description><![CDATA[सतह से सतह पर मार करने वाली ‘प्रलय’ मिसाइल का सफल परीक्षण 150-500 किलोमीटर तक लक्ष्य को भेदने में सक्षम नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने देश में ही विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली ‘प्रलय’ मिसाइल का बुधवार को सफल परीक्षण किया। प्रलय का परीक्षण ओडिशा […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/pralay-missile-now-the-bunker-base-and-cannon-will-be-destroyed-in-a-moment-of-the-enemy-army/article-29349"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-12/drdo.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">सतह से सतह पर मार करने वाली ‘प्रलय’ मिसाइल का सफल परीक्षण</h3>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong>150-500 किलोमीटर तक लक्ष्य को भेदने में सक्षम</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने देश में ही विकसित सतह से सतह पर मार करने वाली ‘प्रलय’ मिसाइल का बुधवार को सफल परीक्षण किया। प्रलय का परीक्षण ओडिशा में डा. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम द्वीप से किया गया और इसने अपने सभी लक्ष्यों को पूरा किया। परीक्षण के दौरान मिसाइल की सभी प्रणालियों ने सफलता के साथ काम किया और पूरी सटीकता के साथ निशाने को भेदा। नई प्रौद्योगिकी से लैस इस मिसाइल को मोबाइल लांचर से दागा जा सकता है और यह 150 से 500 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम है। वहीं अगर सीमा के पास से यह मिसाइल दागने पर दुश्मन के बंकर, बेस और तोप को पल भर में तबाह कर देगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और डीआरडीओ के अध्यक्ष डा जी सतीश रेड्डी ने मिसाइल के विकास और परीक्षण से जुडी टीमों को बधाई दी है।</p>
<blockquote class="twitter-tweet">
<p lang="en" dir="ltr" xml:lang="en"><a href="https://twitter.com/hashtag/WATCH?src=hash&amp;ref_src=twsrc%5Etfw">#WATCH</a> 'Pralay' surface to surface ballistic missile successfully testfired</p>
<p>(Source: DRDO) <a href="https://t.co/MjW9lYR1Cm">pic.twitter.com/MjW9lYR1Cm</a></p>
<p>— ANI (@ANI) <a href="https://twitter.com/ANI/status/1473561349305225217?ref_src=twsrc%5Etfw">December 22, 2021</a></p></blockquote>
<p></p>
<h4 style="text-align:justify;"><strong>चीनी मिसाइल का भी सामना करने में सक्षम</strong></h4>
<p style="text-align:justify;">सूत्रों का कहना है कि इस मिसाइल का जिक्र डीआरडीओ ने साल 2015 में किया था। उसने अपनी वार्षिक रिपोर्ट में बताया था कि यह बैलिस्टिक मिसाइल प्रलय है, जो चीन की बैलिस्टिक मिसाइलों का सामना करने में पूरी तरह सक्षम है। इस मिसाइल की खासियत ये है कि इसे जमीन के साथ-साथ कन्सटर से भी दागा जा सकता है। मिसाइल इस तरह से बनाई गई है, जिससे यह अन्य कम दूरी वाली मिसाइलों की तुलना में कहीं अधिक घातक है। यह अपने लक्ष्य पर सटीक निशाना साधने के साथ ही उसे ध्वस्त करने की क्षमता भी रखती है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Dec 2021 15:01:11 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वायु सेना और डीआरडीओ ने स्वदेशी एंटी एयरफील्ड हथियार का किया सफल परीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना ने देश में ही विकसित स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार के संयुक्त रुप से दो सफल उड़ान परीक्षण किए हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार सैटेलाइट नेविगेशन और इलेक्ट्रो आॅप्टिकल सेंसर पर आधारित दो अलग-अलग विन्यासों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। बम के इस वर्ग […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/air-force-and-drdo-successfully-test-fired-indigenous-anti-airfield-weapon/article-28115"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/drdo.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) और भारतीय वायु सेना ने देश में ही विकसित स्मार्ट एंटी-एयरफील्ड हथियार के संयुक्त रुप से दो सफल उड़ान परीक्षण किए हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार सैटेलाइट नेविगेशन और इलेक्ट्रो आॅप्टिकल सेंसर पर आधारित दो अलग-अलग विन्यासों का सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया है। बम के इस वर्ग का इलेक्ट्रो आॅप्टिकल सीकर आधारित उड़ान परीक्षण देश में पहली बार किया गया है। इलेक्ट्रो आॅप्टिक सेंसर को स्वदेशी रूप से विकसित किया गया है। हथियार को गत 28 अक्टूबर और आज यानी बुधवार दो दिन राजस्थान के जैसलमेर में चंदन पर्वतमाला से भारतीय वायुसेना के विमान द्वारा लॉन्च किया गया था।</p>
<h4 style="text-align:justify;">मिशन के सभी उद्देश्यों को हासिल किया गया</h4>
<p style="text-align:justify;">इस सिस्टम का इलेक्ट्रो आॅप्टिकल कॉन्फिगरेशन इमेजिंग इंफ्रा-रेड (आईआईआर) सीकर तकनीक से लैस है जो हथियार की सटीक स्ट्राइक क्षमता को बढ़ाता है। दोनों परीक्षणों में लक्ष्य को उच्च सटीकता के साथ निशाना बनाया गया था। सिस्टम को अधिकतम 100 किलोमीटर की दूरी के लिए डिजाइन किया गया है। नए अनुकूलित लांचर ने हथियार की सुचारू रिलीज और निष्कासन सुनिश्चित किया। टेलीमेट्री और ट्रैकिंग सिस्टम ने पूरी उड़ान के दौरान सभी मिशन कार्यक्रमों को कैप्चर किया। मिशन के सभी उद्देश्यों को हासिल किया गया ।</p>
<h4 style="text-align:justify;">बेंगलुरु ने विमान के साथ हथियार का एकीकरण किया</h4>
<p style="text-align:justify;">स्मार्ट एंटी एयरफील्ड हथियार को रिसर्च सेंटर (आरसीआई) द्वारा अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के समन्वय और वायुसेना के सहयोग से डिजाइन और विकसित किया गया है। गुणवत्ता और डिजाइन प्रमाणन एजेंसियों ने इसके विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल), बेंगलुरु ने विमान के साथ हथियार का एकीकरण किया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और वायु सेना तथा मिशन से जुड़ी टीमों के साझा एवं सामंजस्यपूर्ण प्रयासों की सराहना की है। डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. जी सतीश रेड्डी ने टीमों को बधाई देते हुए कहा कि हथियार का प्रदर्शन और विश्वसनीयता साबित हो गई है।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Nov 2021 10:07:14 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>नई पीढ़ी की आकाश मिसाइल का सफल परीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। 21 जुलाई (वार्ता) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सतह से हवा में मार करने वाली नई पीढ़ी की आकाश मिसाइल (आकाश-एनजी) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। यह परीक्षण ओडिशा के तट के करीब एकीकृत परीक्षण रेंज से भूमि आधारित प्लेटफॉर्म से दोपहर करीब पौने एक बजे किया गया, जिसमें मल्टीफंक्शन रडार, […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/successful-test-of-new-generation-akash-missile/article-25369"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-07/akash-missile.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
<strong>नयी दिल्ली।</strong> 21 जुलाई (वार्ता) रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने सतह से हवा में मार करने वाली नई पीढ़ी की आकाश मिसाइल (आकाश-एनजी) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह परीक्षण ओडिशा के तट के करीब एकीकृत परीक्षण रेंज से भूमि आधारित प्लेटफॉर्म से दोपहर करीब पौने एक बजे किया गया, जिसमें मल्टीफंक्शन रडार, कमांड और कंट्रोल एंड कम्युनिकेशन सिस्टम लांचर जैसी सभी हथियार प्रणालियां शामिल थीं।</p>
<p style="text-align:justify;">मिसाइल प्रणाली को रक्षा अनुसंधान एवं विकास प्रयोगशाला (डीआरडीएल), हैदराबाद द्वारा अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के सहयोग से विकसित किया गया है। इस प्रक्षेपण के समय वायु सेना के अधिकारी भी मौजूद थे। उड़ान डेटा को हासिल करने के लिए आईटीआर ने इलेक्ट्रो ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम, रडार और टेलीमेट्री जैसे कई रेंज स्टेशनों को तैनात किया। इन प्रणालियों द्वारा एकत्र संपूर्ण उड़ान डेटा से संपूर्ण हथियार प्रणाली के दोषरहित प्रदर्शन की पुष्टि की गई है। परीक्षण के दौरान, मिसाइल ने तेज और फुर्तीले हवाई खतरों को बेअसर करने के लिए आवश्यक उच्चस्तरीय गतिशीलता का प्रदर्शन किया।</p>
<p style="text-align:justify;">एक बार तैनात होने के बाद आकाश-एनजी हथियार प्रणाली वायु सेना की हवाई सुरक्षा क्षमता में शानदार इज़ाफ़ा करने वाली साबित होगी। उत्पादन एजेंसियों भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) और भारत डायनेमिक्स लिमिटेड (बीडीएल) ने भी परीक्षणों में भाग लिया।</p>
<p style="text-align:justify;">रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने सफल परीक्षण के लिए डीआरडीओ, बीडीएल, बीईएल, वायु सेना और उद्योग को बधाई दी है। डीआरडीओ के अध्यक्ष ने टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह मिसाइल वायु सेना को नई मजबूत देगी।</p>
<p><b>अन्य </b><strong><a href="http://10.0.0.122:1245/">अपडेट</a></strong><b> हासिल करने के लिए हमें </b><strong><a href="https://www.facebook.com/SachKahoonOfficial">Facebook</a></strong><b> और </b><strong><a href="https://x.com/SACHKAHOON">Twitter</a></strong><b>, <a href="https://www.instagram.com/sachkahoon/">Instagram</a>, <a href="https://www.linkedin.com/company/sachkahoon">LinkedIn</a> , <a href="https://www.youtube.com/channel/UCOcEoUWkETVpZIzmQPVlpfg">YouTube</a>  पर फॉलो करें।</b></p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jul 2021 21:22:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीआरडीओ ने बनाई नई किट, 75 रुपये में बताएगी आपके शरीर में कितने एंडीबॉडी</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। देश अब जानलेवा कोविड-19 के खिलाफ निर्णायक जंग की ओर बढ़ रहा है। महाबिमारी से निपटने के उपायों में डीआरडीओ को एक और सफलता मिली है। 2-डीजी दवाई निर्माण के बाद अब डीआरडीओ ने एंटीबॉडी डिटेक्शन किट DIPCOVAN (डीपकोवेन) बनाई है। इसे दिल्ली के वैनगार्ड डायग्नॉस्टिक्स के साथ मिलकर बनाया गया है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/drdo-makes-a-new-kit-will-tell-how-many-endobodies-in-your-body-for-75-rupees/article-23808"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/antibody-check-kit.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> देश अब जानलेवा कोविड-19 के खिलाफ निर्णायक जंग की ओर बढ़ रहा है। महाबिमारी से निपटने के उपायों में डीआरडीओ को एक और सफलता मिली है। 2-डीजी दवाई निर्माण के बाद अब डीआरडीओ ने एंटीबॉडी डिटेक्शन किट DIPCOVAN (डीपकोवेन) बनाई है। इसे दिल्ली के वैनगार्ड डायग्नॉस्टिक्स के साथ मिलकर बनाया गया है। DIPCOVAN किट की खासियत ये है कि इसकी सहायता से ये पता चल जाता है कि व्यक्ति के शरीर में कोरोना से लड़ने के लिए जरूरी एंटीबॉडी या प्लाज्मा है या नहीं। बताया जा रहा है कि किट को एक हजार से अधिक लोगों पर टेस्ट करने की तैयारी है।</p>
<p style="text-align:justify;">हालांकि आईसीएमआर ने अप्रैल और डीसीजीआई मई महीने में ही इसे मंजूरी दे चुके हैं। सूत्रों के अनुसार जून के पहले सप्ताह में इसके लॉन्च होने के आसार हैं। वहीं इसके जरिए हर जांच की कीमत 75 रुपये रखी जाएगी। बता दें कि डीपकोवेन की एक और खूबी ये भी है कि ये स्पाइक और नुक्लेओकैप्सिड प्रोटीन का भी पता लगा सकता है, वो भी 97% की उच्च संवेदनशीलता और 99% परफेक्शन के साथ।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 May 2021 10:45:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राहत: पहली स्वदेशी एंटी कोविड दवा 2-डीजी लॉन्च, जानें, खासियत</title>
                                    <description><![CDATA[डीआरडीओ की दवा कोरोना के खिलाफ उम्मीद की किरण: राजनाथ नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा बनायी गयी 2 डीजी दवा देश की वैज्ञानिक शक्ति का उदाहरण है और यह कोरोना महामारी से लड़ने में आशा और उम्मीद की किरण की […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/a-silver-lining-against-drdo-drug-corona-rajnath/article-23700"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-05/drdo.jpg" alt=""></a><br /><h3>डीआरडीओ की दवा कोरोना के खिलाफ उम्मीद की किरण: राजनाथ</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)</strong>। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आज कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा बनायी गयी 2 डीजी दवा देश की वैज्ञानिक शक्ति का उदाहरण है और यह कोरोना महामारी से लड़ने में आशा और उम्मीद की किरण की साबित होगी। सिंह ने सोमवार को 2- डीओक्सी-डी ग्लुकोज (2-डीजी) दवा को जारी करने के मौके पर कहा कि डा. रेडीज लेबोरेट्रीज के साथ मिलकर बनायी गयी यह दवा सरकारी तथा निजी क्षेत्र के बीच भागीदारी का अच्छा उदाहरण है। रक्षा मंत्री ने दवा की उपयोगिता का उल्लेख करते हुए कहा, ‘मुझे बताया गया, कि इसके प्रयोग से सामान्य उपचार की अपेक्षा लोग ढाई दिन जल्दी ठीक हुए हैं। साथ ही ऑक्सीजन पर निर्भरता भी लगभग 40 फीसदी तक कम देखने को मिली है। इसका पाउडर फॉर्म में होना भी इसकी एक बड़ी खासियत है। ओआरएस घोल की तरह इसका इस्तेमाल लोग बड़ी आसानी से कर सकेंगे।</p>
<h3>आॅक्सीजन संकट का ‘रामबाण 2-डीजी’</h3>
<p style="text-align:justify;">साथ ही उन्होंने कहा, ‘अभी हमें निश्चिंत होने की जरूरत नहीं है, और न ही थकने, और थमने की जरूरत है। क्योंकि कोरोना की लहर दूसरी बार आई है, और आगे भी इस बारे में कुछ निश्चित नहीं है। हमें पूरी सतर्कता के साथ कदम आगे बढ़ाने होंगे। उन्होंने कहा, ‘हमने हर समय स्थिति को हमने काफी गंभीरता से लिया है। चाहे वह आक्सीजन आपूर्ति का मामला हो, दवा का मामला हो, आईसीयू बैड की बात हो या क्रायोजेनिक टैंकर की व्यवस्था की बात हो, एक सामूहिक प्रयास किया गया है जिसका अच्छा परिणाम सामने आया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कई निर्देश जारी किए हैं जिसके अंतर्गत घर घर जाकर ज्यादा जांच की जा रही है, और आशा तथा आंगनवाड़ी कार्यकतार्ओं को सभी आवश्यक उपकरणों से लैस किया गया है।</p>
<h3>सैन्य अस्पतालों में भी इलाज की सुविधाओं का तेजी से विस्तार</h3>
<p style="text-align:justify;">कोरोना के खिलाफ राष्ट्रव्यापी अभियान में सशस्त्र सेना चिकित्सा सेवा के योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, ‘मुझे यह बताते हुए खुशी होती है कि मेडिकल कोर ने अपने सेवा निवृत डाक्टरों को भी दुबारा सेवा में लाने का निर्णय लिया है ताकि हमारी स्वास्थ्य व्यवस्था को और अधिक मजबूती दी जा सके। मैं ऐसे चिकित्सकों की हृदय से सराहना करता हूँ जो अपनी सर्विस के बाद भी इस अभियान से जुड़ रहे हैं। हमारी वायुसेना और नौसेना के जहाजों ने भी बड़ी संख्या में ऑक्सीजन सिलेंडर, कंटेनर्स, कंसंट्रेटर्स, टेस्ट किट्स के ट्रांसपोर्टेशन में अपनी भूमिका निभाई है। सैन्य अस्पतालों में भी इलाज की सुविधाओं का तेजी से विस्तार किया गया है।</p>
<p style="text-align:justify;">कोरोना के विकट समय में भी सेना की तैयारियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘इन सब कठिनाइयों से गुजरते हुए भी हमने यह सुनिश्चित किया है कि सीमा पर हमारी तैयारियों पर कोई प्रभाव न पड़े। हमारी सेनाओं के जोश और उत्साह में कहीं भी किसी प्रकार की कोई कमी नहीं है। हमें यह अच्छी तरह मालूम है, कठिनाई कितनी ही बड़ी क्यूँ न हो, हम उस पर विजय पा लेंगे। उन्होंने कहा कि अब तक हम रक्षा क्षेत्र में डीआरडीओ और निजी भागीदारी की बात करते थे लेकिन आज स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी डीआरडीओ और निजी क्षेत्र की भागीदारी का इतना अच्छा परिणाम देख कर खुशी हो रही है।</p>
<h3>दवा कैसे काम करती है?</h3>
<p>डीआरडीओ के डॉक्टर एके मिश्रा ने बताया, “किसी भी टिशू या वायरस के ग्रोथ के लिए ग्लूकोज का होना बहुत जरूरी होता है। लेकिन अगर उसे ग्लूकोज नहीं मिलता तो उसके मरने की उम्मीद बढ़ जाती है। इसी को हमने मिमिक करके ऐसा किया कि ग्लूकोज का एनालॉग बनाया। वायरस इसे ग्लूकोज समझ कर खाने की कोशिश करेगा, लेकिन ये ग्लूकोज नहीं है, इस वजह से वायरस की मौत हो जाएगी। यही इस दवाई का बेसिक प्रिंसिपल है।</p>
<h3>गंभीर किस्म के मरीजों को भी दी जा सकती है दवा</h3>
<p>एके मिश्रा का कहना है कि इस दवाई को हर तरह के मरीज को दिया जा सकता है। हल्के लक्षण वाले कोरोना मरीज हो या गंभीर मरीज, सभी को इस दवाई को दी जा सकेगी। बच्चों के इलाज में भी ये दवा कारगर होगी। हालांकि उन्होने कहा कि बच्चों के लिए इस दवा की डोज अलग होगी।</p>
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                                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 May 2021 17:48:12 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रक्षा क्षेत्र में मिली बड़ी कामयाबी। डीआरडीओ ने हारपरसोनिक हारपरसोनिक टेक्नोलोजी का किया सफल परीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों को दी बधाई नई दिल्ली। देश ने हारपरसोनिक और क्रूज मिसाइल प्रक्षेपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए हारपरसोनिक टेक्नोलोजी डिमोन्स्ट्रेशन व्हीकल (एचटीडीवी) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। देश के प्रमुख अनुसंधान संगठन, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने देश में ही विकसित प्रौद्योगिकी के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/great-success-in-defense-sector-drdo-successfully-tests-hypersonic-hypersonic-technology/article-18217"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/drdo.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों को दी बधाई</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> देश ने हारपरसोनिक और क्रूज मिसाइल प्रक्षेपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए हारपरसोनिक टेक्नोलोजी डिमोन्स्ट्रेशन व्हीकल (एचटीडीवी) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। देश के प्रमुख अनुसंधान संगठन, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने देश में ही विकसित प्रौद्योगिकी के माध्यम से सोमवार सुबह 11 बज कर तीन मिनट पर ओड़िशा के तट पर व्हीलर द्वीप स्थित डा ए पी जे अब्दुल कलाम प्रक्षेपण परिसर से यह परीक्षण किया। इसके साथ ही देश अमेरिका, रूस और चीन जैसे चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास यह प्रौद्योगिकी है। यह हवा में आवाज की गति से छह गुना ज्यादा स्पीड से दूरी तय करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यानी दुश्मन देश के एयर डिफेंस सिस्?टम को इसकी भनक तक नहीं लगेगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को इस सफलता पर बधाई दी है। इस सफलता के साथ सभी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी अब अगले चरण के के लिए विकसित की चा चुकी हैं। डीआरडीओ के अनुसार इस हाइपरसोनिक क्रूज यान को राकेट मोटर की मदद से प्रक्षेपित किया गया। गौरतलब हैं कि ये मिसाइलें मिनटों में दुनिया में कहीं भी मौजूद अपने टारगेट को ध्?वस्?त कर सकती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जानें, क्यों खास है हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल?</h3>
<p style="text-align:justify;">इस तकनीक का सबसे पहला परीक्षण भारत ने 2019 में भी किया था। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने और काफी कम खर्च में सैटेलाइन लॉन्च करने में इस तकनीक का इस्तमाल किया जाएगा। एचएसटीडीवी के परीक्षण का समय मात्र 20 सेकेंड था। इसकी रफ्तार 12,251 किलोमीटर थी। इस तकनीक के बाद उम्मीद बढ़ गयी है कि भारत के पास जल्द ही 12 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से मार करने वाले मिसाइल और विमान होंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रक्षा क्षेत्र में देश की नई छलांग</h3>
<p style="text-align:justify;">1. अगली पीढ़Þी की मिसाइल तकनीक का परीक्षण<br />
2. ध्वनि से तेज गुना तेज चल सकने वाला सिस्टम<br />
3. यह तकनीक विकसित करने वाला भारत चौथा देश<br />
4. दुनिया में कहीं भी मौजूद अपने टारगेट को ध्वस्त कर सकती हैं</p>
<p> </p>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2020 16:20:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीआरडीओ अब दिल्ली में करेगा पीपीई और मास्क की जांच</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। देश के प्रमुख रक्षा उपक्रम, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने कोरोना महामारी के उपचार में जुटे डाक्टरों तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए जरूरी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) और मास्क समय पर और तेजी से उपलब्ध कराने के लिए अपने जांच केन्द्र को ग्वालियर से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया है। डीआरडीओ […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/drdo-will-now-investigate-ppe-and-mas-in-delhi/article-14444"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-04/drdo.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)।</strong> देश के प्रमुख रक्षा उपक्रम, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने कोरोना महामारी के उपचार में जुटे डाक्टरों तथा अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए जरूरी व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) और मास्क समय पर और तेजी से उपलब्ध कराने के लिए अपने जांच केन्द्र को ग्वालियर से दिल्ली स्थानांतरित कर दिया है। डीआरडीओ ने आज कहा कि पीपीई और मास्क की समय पर और तेजी से उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए उसने ग्वालियर स्थित अपने जांच केन्द्र को यहां स्थित इन्सटीट्यूट आफ न्यूक्लियर मेडिसिन एंड एलाइड साइंस (इनमास) में स्थानांतरित कर दिया है। इस केन्द्र को पीपीई और मास्क की जांच के लिए पूरी तरह तैयार कर दिया गया है और 10 बैच से भी अधिक वस्तुओं की इस प्रयोगशाला में जांच भी की जा चुकी है।</p>
<ul>
<li style="text-align:justify;">डीआरडीओ की ग्वालियर स्थित प्रयोगशाला में अब विदेशों से आने वाले पीपीई और मास्क की जांच की जायेगी।</li>
<li style="text-align:justify;">इस जांच के बाद ये किट विभिन्न एजेन्सियों को दिये जायेंगे।</li>
</ul>
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                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2020 09:30:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डीआरडीओ अब एयरफोर्स के लिए 5वीं पीढ़ी का एडवांस्ड कॉम्बैट एयरक्राफ्ट बनाए: वायुसेना प्रमुख</title>
                                    <description><![CDATA[नई दिल्ली (एजेंसी)। वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने एयरफोर्स को बेहतर हथियार प्रणाली मुहैया कराने के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की तारीफ की। उन्होंने मंगलवार को कहा कि डीआरडीओ को अब 5वीं पीढ़ी का एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) विकसित करना चाहिए। डीआरडीओ की 41वीं डायरेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में भदौरिया ने […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/drdo-must-make-5th-generation-amca-happen-says-iaf-chief/article-10812"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2019-10/drdo.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली (एजेंसी)। </strong>वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया ने एयरफोर्स को बेहतर हथियार प्रणाली मुहैया कराने के लिए रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) की तारीफ की। उन्होंने मंगलवार को कहा कि डीआरडीओ को अब 5वीं पीढ़ी का एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एएमसीए) विकसित करना चाहिए।</p>
<p style="text-align:justify;">डीआरडीओ की 41वीं डायरेक्टर्स कॉन्फ्रेंस में भदौरिया ने कहा कि भविष्य में टेक्नोलॉजी के नेतृत्व से हमें विपरीत परिस्थितियों में तकनीकी बढ़त मिलेगी। डीआरडीओ ने इसे साबित कर दिखाया है। हमारे पास डीआरडीओ के साथ जुड़ने का लंबा इतिहास है। 70 के दशक में हम दुश्मनों से पीछे थे और फिर डीआरडीओ ने सबसे पहले हमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर सिस्टम दिया। साधारण रडार वॉर्निंग सिस्टम की जगह इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम मिलने से वायुसेना की ऑपरेशन की क्षमता बढ़ी।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
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                <pubDate>Wed, 16 Oct 2019 10:35:51 +0530</pubDate>
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                <title>देश के पहले मानवरहित टैंक से बढ़ेगी भारतीय सेना की ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[नक्सल प्रभावित इलाकों में भी करेगा मदद नई दिल्ली । रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मानव रहित, रिमोट से संचालित टैंक विकसित किया है। इस टैंक के तीन तरह के मॉडल्स विकसित किए गए हैं- सर्विलांस, बारूदी सुरंग खोजने वाला और जिन इलाकों में न्यूक्लियर और जैविक हमलों का अंदेशा है, वहां गश्ती लगाने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/uttar-pradesh/first-unmanned-tank-of-indian-army/article-2694"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/army-tank.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">नक्सल प्रभावित इलाकों में भी करेगा मदद</h1>
<p><strong>नई दिल्ली ।</strong> रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने मानव रहित, रिमोट से संचालित टैंक विकसित किया है। इस टैंक के तीन तरह के मॉडल्स विकसित किए गए हैं- सर्विलांस, बारूदी सुरंग खोजने वाला और जिन इलाकों में न्यूक्लियर और जैविक हमलों का अंदेशा है, वहां गश्ती लगाने के लिए। इस टैंक को MUNTRA नाम दिया गया है और ये देश का पहला मानवरहित टैंक है।</p>
<p>इस टैंक को कॉम्बैट वीइकल्स रिसर्च ऐंड डिवेलपमेंट इस्टैबलिशमेंट (CVRDE) इसे बनाया है और इन टैंकों का परीक्षण राजस्थान के रेगिस्तानी इलाकों के तेज तापमान में किया गया है। परीक्षण के दौरान सेना ने इस टैंक को सफलापूर्वक संचालित किया। अर्धसैनिक बल इस टैंक को नक्सल प्रभावित इलाकों में इस्तेमाल करना चाहते हैं, इसके लिए इस टैंक में कुछ बदलाव की जरूरत होगी।</p>
<ul>
<li><strong>टैंक में निगरानी रडार, कैमरा, लेजर रेंज का पता लगाने वाली डिवाइस है। </strong></li>
<li><strong>इससे जमीन पर 15 किलोमीटर की दूरी तक भारी वाहनों का पता लगाया जा सकता है।</strong></li>
</ul>
<h3>प्रदर्शनी में रखे गए टैंक</h3>
<p>इस तरह के दो बख्तरबंद टैंकों को ‘साइंस फॉर सोल्जर्स’ प्रदर्शनी में लगाया था। इसका आयोजन पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम के सम्मान में DRDO ने अवदी में कराया था। बख्तरबंद टैंक की तरह डिजाइन किए गए रिमोट से ऑपरेट होने वाले ये टैंक अवाडी में साइंस फॉर सोल्जर्स नाम की प्रदर्शनी में डिस्प्ले में रखे गए हैं।</p>
<p> </p>
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                                            <category>उत्तर प्रदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2017 04:37:07 +0530</pubDate>
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