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                <title>Political Party - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>मुफ्त पैसे या मुफ्त सुविधाओं के वायदों से ऊपर उठें पार्टियां</title>
                                    <description><![CDATA[पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा एवं मणिपुर-में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां पूरी तैयारी के साथ मैदान में हैं। साफ-सुथरी निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग भी दमखम के साथ सक्रिय है। कोरोना की वजह से इस बार बड़ी-बड़ी रैलियां कम देखने को मिल रही हैं। गनीमत है कि […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/news-brief/rise-above-the-promises-of-free-money-or-free-features/article-30707"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-02/politics-2.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">पांच राज्यों- उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा एवं मणिपुर-में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं। राजनीतिक पार्टियां पूरी तैयारी के साथ मैदान में हैं। साफ-सुथरी निर्वाचन प्रक्रिया सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग भी दमखम के साथ सक्रिय है। कोरोना की वजह से इस बार बड़ी-बड़ी रैलियां कम देखने को मिल रही हैं। गनीमत है कि इस बार चुनाव आयोग ने थोड़ी सख्ती दिखायी है, नहीं तो नेता नहीं मानने वाले थे। खैर, चुनाव हैं, तो मुद्दे भी हैं। वायदे हैं, फायदे हैं और हैं बड़े-बड़े सपने। आप रैलियों में कही गई बड़ी बातों के बाद का असर खुद एक बार याद कर देख लीजिये, आपको भी भरोसा हो जायेगा। अब जब चुनाव सपने बेचने का एक बड़ा मेला है, उत्तर प्रदेश, गोवा, उत्तराखंड, पंजाब और मणिपुर के विधानसभा चुनाव में इन राज्यों की महिलाओं और लड़कियों के लिए क्या सपने हैं? हम इन्हें सपना ही कहेंगे, आप मुद्दे समझिये। क्योंकि चुनावी मुद्दे सपने सरीखे ही हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी ने घोषणा की है कि वह टिकट बंटवारे में महिलाओं को 40 फीसदी का आरक्षण देगी जो उसने दिया भी। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने बाल विवाह निषेध कानून में लड़कियों के विवाह की वैधानिक उम्र 18 वर्ष से बढ़ाकर 21 वर्ष करने का संशोधन विधेयक प्रस्तावित किया है। गोवा चुनाव की बात करें, तो वहां एक तरफ कांग्रेस पार्टी महिलाओं को नौकरियों में 30 फीसदी आरक्षण देने की बात कर रही है, तो दूसरी ओर तृणमूल कांग्रेस ने वादा कर गई है कि चुनाव के बाद अगर उसकी सरकार बनती है, तो गोवा में वह ‘गृहलक्ष्मी कार्ड योजना’ शुरू करेगी। इस योजना के तहत गोवा की महिलाओं को प्रत्येक महीने 5000 रुपये की वित्तीय सहायता दी जायेगी। इस आपाधापी में आम आदमी पार्टी भी पीछे न रहते हुए यह वादा किया है कि यदि उसकी सरकार बनती है, तो गोवा की महिलाओं को हर माह 1000 रुपये की वित्तीय सहायता मिलेगी।</p>
<p style="text-align:justify;">पंजाब में भी आम आदमी पार्टी ने महिलाओं से यही वित्तीय सहायता राशि देने का वादा किया है। अब अगर इन्हीं कुछ सपनों की बात करें, जो महिलाओं के लिये आरक्षित किये गये हैं। अगर इन पांच राज्यों के चुनावी माहौल में महिलाओं और लड़कियों के लिए इतना कुछ ही है, तब साफ-साफ समझ आता है कि हमारी-आपकी औकात क्या है, हम इस पूरे तंत्र में कितनी भागीदारी रखती हैं और इन पार्टियों को हमारी-आपकी कितनी चिंता है। पार्टियों को अब गैस चूल्हा, मुफ्त भत्ता और मां-ममता जैसी योजनाओं से आगे बढ़ना चाहिए। पर लगता है कि 2022 में भी महिलाओं के मुद्दे से जुड़े सपने 1990 के ही हैं या पार्टियां हमें यही सपने दिखाना चाह रही हैं।</p>
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                                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 11 Feb 2022 10:06:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने बनाई नई पार्टी हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट</title>
                                    <description><![CDATA[कु. शैलजा पर साधा निशाना : बोले-बहनजी की वजह से आज इस अंजाम तक पहुंचा | Haryana Democratic Front चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)। कांग्रेस के मजबूत सिपाहसलार एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कु. सैलजा के नजदीकी रहे पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने वीरवार को नए राजनैतिक दल के गठन का ऐलान कर दिया। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/former-minister-nirmal-singh-formed-new-party-haryana-democratic-front/article-13499"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-03/haryana-democratic-front.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">कु. शैलजा पर साधा निशाना : बोले-बहनजी की वजह से आज इस अंजाम तक पहुंचा | Haryana Democratic Front</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़/सच कहूँ)।</strong> कांग्रेस के मजबूत सिपाहसलार एवं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा और कु. सैलजा के नजदीकी रहे पूर्व मंत्री निर्मल सिंह ने वीरवार को नए राजनैतिक दल के गठन का ऐलान कर दिया। उन्होंने हरियाणा डैमोक्रेटिक फ्रंट (Haryana Democratic Front)नाम से नए दल का ऐलान चंडीगढ़ में वीरवार को किया। उनके साथ इस मौके पर उनकी बेटी चित्रा सरवारा एवं अन्य नेता मौजूद रहे। पूर्व मंत्री निर्मल सिंह पिछले लोकसभा चुनाव में कुरुक्षेत्र के कांगे्रस के उम्मीदवार थे और भाजपा के नायब सैनी से हार गए थे।</p>
<p style="text-align:justify;">इस मौके पर निर्मल सिंह ने कहा कि वे कांग्रेस की आपसी कलह से तंग थे और विधानसभा चुनावों में उनकी बेटी चित्रा और उन्हें अनदेखा किया गया। उन्होंने कहा कि टिकटों में बंदरबाट कांग्रेस का पुराना कल्चर है, जिस कारण आज कांग्रेस की ये स्थिति है। इस स्थिति से तंग आकर उन्होंने अपना अलग राजनीतिक दल का निर्माण किया है।</p>
<h3>हुड्डा और सैलजा के करीबियों में थे शामिल</h3>
<p style="text-align:justify;">निर्मल सिंह ने कहा कि बेशक वे कांगे्रस में लबे समय तक रहे लेकिन उन्होंने हमेशा भेदभाव रहित राजनीति की है और इसी का नतीजा है कि आज उन्हें स्थानीय लोगों का अपार समर्थन हासिल है। उन्होंने कहा कि एक सांझी सोच और हर धर्म जाति के लोगों को साथ लेकर आगे बढ़ेंगे। उन्होंने कहा कि (Haryana Democratic Front)पदाधिकारियों की घोषणा भी जल्द कर दी जाएगी। वहीं उन्होंने बताया कि 15 मार्च को अंबाला में एक विशाल कार्यकर्ता सम्मेलन करेंगे।</p>
<p style="text-align:justify;">वहीं एक सवाल के जवाब में निर्मल सिंह ने कहा कि मौजूदा समय में कांग्रेस की विचारधारा पीछे रह गई है और एकाध नेता की विचारधारा आगे आ गई है। इस कारण कांग्रेस की ये हालत है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की विचारधारा के कारण ही उन्होंने कांग्रेस ज्वाइन की थी और 40 साल तक इस पार्टी की सेवा की लेकिन अब कांग्रेस की विचारधारा पीछे छूट गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अशोक तंवर से फिलहाल नहीं कोई बातचीत</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं अशोक तंवर द्वारा नई पार्टी के गठन की चर्चा संबंधी सवाल पर निर्मल सिंह ने कहा कि उनका फिलहाल अशोक तंवर से कोई संपर्क नहीं है। उन्होंने कहा कि जो लोग उनकी सोच के होंगे उनका मोर्चे में स्वागत होगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">स्थानीय नेतृत्व को देंगे तवज्जो</h3>
<p style="text-align:justify;">निर्मल सिंह ने बताया कि हरियाणा डैमोके्रटिक फ्रंट स्थानीय नेतृत्व को प्रोत्साहित करेगा और विकसित करेगा। मोर्चा मूल रूप से गैर स्थानीय बाहरी आयातित नेतृत्व का विरोध करता है। ये आयातित नेतृत्व ना तो स्थानीय जनता से जुड़ पाता है और ना ही स्थानीय मुद्दे को समझ पा कोई उद्धार करता है। वहीं मोर्चाे किसी भी तरह के भेदभाव-राजनैतिक, सामाजिक या अर्थिक, के विरुद्ध है और सभी क्षेत्रों, समुदायों को समान समझेगा। वहीं विकास के मौकों को प्रोत्साहित करेगा, वहीं मौजूदा सरकार के चुनावी घोषणा पत्र में करे गए वादों को याद दिलाया जाएगा और उन्हें पूरा करवाया जाएगा।</p>
<h3 style="text-align:justify;">सरकार से पांच विषयों पर मांगा श्वेत पत्र</h3>
<p style="text-align:justify;">वहीं निर्मल सिंह ने प्रेस वार्ता में सरकार से निम्नलिखित दिए गए मुद्दों पर सरकार से श्वेत पत्र जारी करने की मांग की। किसानों से जुड़े धान घोटाला, गन्ने का भुगतान, नारायणगढ़ शुगर मिल को सरकार के अधीन लेने की घोषणा कहां तक पहुंची, दादूपुर नलवी नहर की आज क्या स्थिति है। वहीं उन्होंने पैंशन पर किए वायदों पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की।</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Mar 2020 10:00:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>वंदेमातरम् पर ओछी सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम् को तमिलनाडु के स्कूलों में सप्ताह में कम से कम दो बार गायन को अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद जिस तरह राजनीतिक दल इस पर ओछी सियासत कर मजहबी रंग दे रहे हैं, वह राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम् की गरिमा के खिलाफ ही है। यह कहीं से […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/political-party-against-the-national-song/article-2713"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/protest-4.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">
</p><p style="text-align:justify;">मद्रास उच्च न्यायालय द्वारा राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम् को तमिलनाडु के स्कूलों में सप्ताह में कम से कम दो बार गायन को अनिवार्य किए जाने के फैसले के बाद जिस तरह राजनीतिक दल इस पर ओछी सियासत कर मजहबी रंग दे रहे हैं, वह राष्ट्रीय गीत वंदेमातरम् की गरिमा के खिलाफ ही है। यह कहीं से भी उचित नहीं कि सियासी दल राष्ट्रीय गीत को मजहब के फ्रेम में फिट कर इसका विरोध करें और सियासी साजिश तलाशें। जब अदालत अपने फैसले में कह चुकी है कि अगर किसी व्यक्ति या संगठन को इसे गाने में दिक्कत है, तो उन्हें इसे गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता, फिर भी इस पर सियासी तूफान खड़ा क्यों किया जा रहा है।</p>
<p style="text-align:justify;">यह समझना होगा कि वंदेमातरम् गीत किसी धर्म विशेष का प्रतीक नहीं, बल्कि मातृभूमि के प्रति समर्पण का भाव है, जिसे दुनिया के हर देश में अपने तरीके से प्रदर्शित किया जाता है। गौर करें तो अरबी में मातृभूमि को मादर-ए-वतन कहा जाता है, जिसका मतलब मां से है। फारसी में भी मातृभूमि की उपमा मां से की गयी है। ऐसे में वंदेमातरम् के विरोध का औचित्य समझ से परे है। यमन के राष्ट्रगीत में झरनों की तुलना मां के दूध से की गयी है। मिस्र के राष्ट्रगीत में मातृभूमि की तुलना मां से की गयी है। इसी तरह मलेशिया, सूडान, अरब, जार्डन सभी देशों में राष्ट्रगीत की परंपरा है। समझना होगा कि राष्ट्रगीत या राष्ट्रगान केवल राष्ट्र के प्रतीक चिंह्न भर नहीं होते। उससे राष्ट्र की संस्कृति, इतिहास, कला, साहित्य और ज्ञान-विज्ञान का भी बोध होता है। बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित वंदेमातरम् गीत भी इन्हीं संपूर्णताओं को समेटे हुए है।</p>
<p style="text-align:justify;">समझना होगा कि वंदेमातरम किसी धर्म-जाति या मजहब को समर्पित गान नहीं है, बल्कि यह राष्ट्रीयता की भावना का प्रकटीकरण है। इसकी पंक्तियों में भारतीयता का ओज और समृद्ध भारत भूमि की विषेशताओं का उल्लेख है। गीत राष्ट्र पर कुर्बान होने का जज्बा पैदा करता है। वंदेमातरम् में मातृभूमि के प्रति अनुरक्ति, समर्पण और उसकी उदात्त संपूर्णता का भाव निहित है। भारतीय सभ्यता और संस्कृति में मातृभूमि और राष्ट्रीयता के प्रति सम्मान और समर्पण का संस्कार कालजयी है। माता और मातृभमि को एक कहा गया है। ‘जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरियसी‘ यानी माता और मातृभूमि स्वर्ग से बढ़कर है। वंदेमातरम एक राष्ट्रीय भाव है। इसे राजनीतिक संकीर्णता के दायरे में रखकर नहीं देखा जाना चाहिए। इससे राष्ट्रीय हित को चोट पहुंचता है।</p>
<p style="text-align:justify;">समझना होगा कि वंदेमातरम् आजादी की लड़ाई का मुख्य नारा था। क्रांतिकारियों ने इस आदर्श नारे को अपने संस्कार में ढाला। गीत के जरिए आजादी की जंग को तेज कर भारतीय जनमानस में जागृति पैदा की। लोगों को लामबंद किया और ब्रिटिश राजसत्ता को उखाड़ फैंका। भगत, राजगुरु और विस्मिल जैसे क्रांतिकारियों ने वंदेमातरम् की आवाज लगाकर फांसी के फंदे को चूम लिया। फिर क्यों न माना जाए कि वंदेमातरम् पर सवाल खड़ा करने वाले क्रांतिकारियों का अपमान कर रहे हैं? वंदेमातरम् राष्ट्रीयता का स्वर और क्रांतिकारियों के प्रति एक सच्ची श्रद्घांजलि है। इसका विरोध आजादी के दीवानों का विरोध और राष्ट्रीयता की भावना पर कुठाराघात है। संसदीय मर्यादा का हनन है।</p>
<p style="text-align:justify;">राष्ट्रीय प्रतीक चिंह्न किसी धर्म, जाति या मजहब विशेष का प्रतिनिधित्व नहीं करते। न ही इससे किसी धर्म या मजहब की भावनाएं आहत होती हैं। लेकिन दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के कुछ सियासी दल इसे मजहब का खोल पहनाकर भारतीय संस्कृति के खिलाफ जहर उगलने का काम कर रहे हैं। अब उचित होगा कि देश के सभी दल राष्ट्रगीत वंदेमातरम पर काली सियासत करने के बजाए उसका सम्मान करें।</p>
<p><em>अरबी में मातृभूमि को मादर-ए-वतन कहा जाता है, जिसका मतलब मां से है। फारसी में भी मातृभूमि की उपमा मां से की गयी है। ऐसे में वंदेमातरम् के विरोध का औचित्य समझ से परे है। यमन के राष्ट्रगीत में झरनों की तुलना मां के दूध से की गयी है। मिश्र के राष्ट्रगीत में मातृभूमि की तुलना मां से की गयी है।</em></p>
<p style="text-align:justify;"><em><strong>-रीता सिंह</strong></em></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Sun, 30 Jul 2017 04:21:44 +0530</pubDate>
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