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                <title>Natural Disaster - Sach Kahoon Hindi</title>
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                <title>जापान में बरसात का कहर, 130 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अपना विदेशी दौरा स्थगित किया कुराशिकी (एजेंसी)। जापान के पश्चिमी हिस्से में पिछले कईं दिनों से जारी भीषण बारिश और भूस्खलन की घटनाओं में मंगलवार सुबह तक कम से कम 130 लोगों की मौत हो गई है और अनेेेक लोग लापता हैं।सरकारी प्रसारक एनएचके ने बताया कि मंगलवार सुबह तक वर्षा […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/rainy-havoc-in-japan-death-of-130-people/article-4771"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-07/japan.jpg" alt=""></a><br /><h2>प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अपना विदेशी दौरा स्थगित किया</h2>
<p style="text-align:justify;">कुराशिकी (एजेंसी)। जापान के पश्चिमी हिस्से में पिछले कईं दिनों से जारी भीषण बारिश और भूस्खलन की घटनाओं में मंगलवार सुबह तक कम से कम 130 लोगों की मौत हो गई है और अनेेेक लोग लापता हैं।सरकारी प्रसारक एनएचके ने बताया कि मंगलवार सुबह तक वर्षा जनित हादसों में कम से कम 126 लोगों की मौत हाे गई है और 63 लोग लापता बताए जा रहे हैं। हालांकि बारिश की तीव्रता में थोड़ी कमी आई है और राहत तथा बचाव दल मलबें में लाेगों की तलाश कर रहे हैं।</p>
<h2>1982 के बाद से यह सबसे बडी प्राकृतिक आपदा</h2>
<p style="text-align:justify;">जापान में 1982 के बाद से यह सबसे बडी प्राकृतिक आपदा है जिसमें 20 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं और इस की गंभीरता काे देखते हुए प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने अपना विदेशी दौरा स्थगित कर दिया है।मुख्य कैबिनेट सचिव याेशीहिदे सुगा ने बताया कि इस अापदा के कारण श्री आबे ने बेल्जियम, फ्रांस, सऊदी अरब और मिस्र का अपना दौरा स्थगित कर दिया है।</p>
<h2>11,220 मकानों में बिजली आपूर्ति प्रभावित</h2>
<p style="text-align:justify;">आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि बाढ़ के कारण हुए अार्थिक नुकसान का अभी कोई आकलन नहीं किया गया है। बाढ़ के कारण इस क्षेत्र के 11,220 मकानों में बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है और सैंकडों लोगों को पीने का पानी नहीं मिल रहा है।बारिश के बाद आई बाढ़ से उद्याेग जगत भी काफी प्रभावित हुआ है और हिरोशिमा शहर में माजदा मोटर कंपनी ने हेड आफिस बंद कर दिया है। इस कंपनी ने पिछले सप्ताह कईं संयंत्राें में कामकाज को रोक दिया था और आज भी दो और संयंत्रों को बंद करने की बात कही जा रही है।</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Jul 2018 03:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>तेज रफ्तारी, जिंदगी पर भारी, यमराज से मिलने की तैयारी&amp;#8230;</title>
                                    <description><![CDATA[ट्रैफिक नियमों को ताक पर रख युवा कर रहे मौत की सवारी | Fast Speed सच कहूँ-प्रदीप दलाल/कैथल। चंद सैकिंड़ों की तेजी (Fast Speed) लाखों लोगों की जिंदगी पर ब्रेक लगा देती है। जितनी मौतें प्राकृतिक आपदा और बीमारी से नहीं होती उससे कहीं अधिक मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हो रही हैं। हालांकि सड़कों पर […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/fast-speed/article-4435"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/accident-5.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;">ट्रैफिक नियमों को ताक पर रख युवा कर<br />
रहे मौत की सवारी | Fast Speed</h1>
<p style="text-align:justify;"><strong>सच कहूँ-प्रदीप दलाल/कैथल।</strong> चंद सैकिंड़ों की तेजी <strong>(Fast Speed)</strong> लाखों लोगों की जिंदगी पर ब्रेक लगा देती है। जितनी मौतें प्राकृतिक आपदा और बीमारी से नहीं होती उससे कहीं अधिक मौतें सड़क दुर्घटनाओं के कारण हो रही हैं। हालांकि सड़कों पर ट्रैफिक को लेकर संकेत भी अंकित है लेकिन तेज रफ्तारी मौत की सवारी बनती जा रही है। जिस कारण न जाने कितने ही परिवार जीते जी मर रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">पूरे विश्व मे सबसे ज्यादा सड़क दुर्घटनाओं में मरने वालों की संख्या में भारत देश पहले पायदान पर है। जो बड़ी चिंता का विषय है। तेज रफ्तार के अलावा, शराब व अन्य नशे का सेवन, ट्रैफिक नियमों का पालन न करना और लापरवाही दुर्घटनाओं का बड़ा कारण है। सड़क दुर्घटनाओं का शिकार ऐसे लोग भी हो रहे हैं जो वाहनों को कम स्पीड में चलाते हैं लेकिन दूसरों की तेज स्पीड उनकी जिंदगी पर भी ब्रेक लगा देती है।</p>
<h1 style="text-align:justify;">तेज रफ्तार से 62.2 फीसदी हादसे | Fast Speed</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;">62.2 फीसदी सड़क हादसे तय सीमा से अधिक या बहुत अधिक गति से वाहन चलाने के कारण हुए।</li>
<li>सबसे अधिक 61 फीसदी मौतें भी इसी कारण से हुईं। 4.2 फीसदी हादसे शराब पीकर गाड़ी चलाने से हुए।</li>
<li>अधिकतर पुलिसकर्मी भी नहीं करते ट्रैफिक नियमों का पालन</li>
</ul>
<h2 style="text-align:justify;">कैथल में सैंकड़ों लोग सड़क दुर्घटना में खो चुके अपनी जिंदगी | Fast Speed</h2>
<p style="text-align:justify;">कैथल जिले में 2017 में सड़क दुर्घटना के 361 केस दर्ज हुए। जिनमें 173 लोगों की मृत्यु हो गई और 340 घायल हुए। जबकि 2018 में मई तक के सरकारी आंकड़े 146 केस रजिस्टर किए गए। जिनमें 76 लोगों की मृत्यु जबकि 112 घायल हुए। यह आंकड़े तो वो आंकड़े हैं जो रजिस्टर हैं। जबकि आंकड़ों की संख्या कहीं अधिक हो सकती है। ट्रैफिक एसएचओ मनदीप कुमार ने बताया कि ट्रैफिक नियमों की पालना को लेकर लगातार लोगों को जागरूक किया जा रहा है। ट्रैफिक नियमों का पालन न करने वाले लोगों के चालान काटे जा रहे हैं।</p>
<h1 style="text-align:justify;">छोटे बच्चे भी कर रहे हैं मौत की सवारी | Fast Speed</h1>
<p style="text-align:justify;">अभिभावक अपने बच्चों को दोपहिया वाहनों की चाबी देते हुए यह नहीं सोचते कि ऐसा करके वह अपने लाडले को मौत के मुंह में भेज रहे हैं। स्कूली बच्चों द्वारा की जा रही बेधड़क ड्राइविंग के कारण सड़क दुर्घटनाओं के मामले में लगातार बढ़ोतरी हो रही है। ऐसी स्थिति में सजा किसे मिलनी चाहिए, आरटीओ, यातायात विभाग या फिर पैरेंट्स को।</p>
<p style="text-align:justify;">अधिकांश लोगों का मानना है कि बच्चों को गाड़ी की चॉबी थमाने वाले अभिभावक ही इसके मुख्य दोषी हैं। लिहाजा, ऐसे वाहन मालिकों के लाईसेंस निरस्त कर उन पर जुर्माना लगाना चाहिए, तभी स्थिति सुधर सकती है।</p>
<h2>दुर्घटनाओं से बचाएंगे ये उपाय | Fast Speed</h2>
<ul>
<li style="text-align:justify;">ड्राइविंग शुरू करते समय तनाव में ना रहे।</li>
<li style="text-align:justify;">अपने दिमाग में चल रही परेशानियां दुर्घटना का कारण बन सकती है।</li>
<li style="text-align:justify;">सकारात्मक सोच रखना बहुत जरुरी है।</li>
<li style="text-align:justify;">कही भी जाने से पहले अपने वाहन को अच्छे से चेक कर ले कि उसमे कोई दिक्कत तो नहीं है।</li>
<li style="text-align:justify;">ड्राईविंग के समय कार के ब्रेक गियर को सावधानी से लगाए।</li>
<li style="text-align:justify;">कार को रिवर्स करने के लिए पहले कार को पूरी तरह से रोके।</li>
<li style="text-align:justify;">आबादी वाले इलाकों में भी कम स्पीड में ही कार चलाए।</li>
<li style="text-align:justify;">कार में ड्राइविंग करते समय आरामदायक स्थिति में शरीर को रखें जिससे हाथ, कमर घुटनों पर तनाव ना हो।</li>
<li style="text-align:justify;">शराब व नशे का सेवन कर वाहन न चलाए।</li>
</ul>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
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                                            <category>देश</category>
                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 23 Jun 2018 18:47:30 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बाढ़: प्राकृतिक आपदा में आदमी</title>
                                    <description><![CDATA[देश के ज्यादातर क्षेत्र में मानसून ने जोरदार दस्तक दे दी है, लेकिन कई इलाके बाढ़ में डूबने की त्रासदी झेल रहे हैं। इस कारण ऊंचे इलाकों में तो हरियाली दिख रही है, किंतु निचले क्षेत्रों में फसले चौपट हो गई हैं। असम के करीमगंज जिले में सुप्राकांधी गांव ने जल समाधि ले ली है। […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/perspectives/opinion-and-analysis/flood-man-in-natural-disaster/article-2890"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-08/flood.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">देश के ज्यादातर क्षेत्र में मानसून ने जोरदार दस्तक दे दी है, लेकिन कई इलाके बाढ़ में डूबने की त्रासदी झेल रहे हैं। इस कारण ऊंचे इलाकों में तो हरियाली दिख रही है, किंतु निचले क्षेत्रों में फसले चौपट हो गई हैं। असम के करीमगंज जिले में सुप्राकांधी गांव ने जल समाधि ले ली है। काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान में 7 गैंडे समेत 90 वन्य प्राणी और 80 लोग अब तक मारे जा चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ का संकट झेल रहे असम का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी दौरा करना पड़ा है। राजस्थान और गुजरात का भी बुरा हाल है। जयपुर एवं उदयपुर समेत 23 जिले बाढ़ग्रस्त घोषित किए गए हैं। 64 लोग अमर्यादित लहरों ने लील लिए हैं। लोगों को बचाने के लिए सेना को बुलाना पड़ा है।</p>
<p style="text-align:justify;">जालोर जिले की पथमेड़ा गोशाला में पानी भर जाने से 536 गायों की मौत हो गई। करीब 14 हजार कमजोर वृद्ध व बीमार नर गोवंश बाढ़ की चपेट में है। यहां केंद्रीय मंत्री स्मृती इरानी और मुख्यमंंत्री वसुंधरा राजे ने नौका से बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का जायजा लिया। प्रधानमंत्री के गृह प्रदेश गुजरात में और भी बुरा हाल है। यहां अब तक 218 लोग मारे जा चुके हैं। बनासकांठा जिला भी बाढ़ की चपेट में है। यहां एक परिवार के मकान में पानी भर जाने से 17 लोग काल के गाल में समा गए हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ की कमोबेश यही तस्वीर महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिश, बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में है। बद्रीनाथ में भू-स्खलन जारी है। नदी-नाले उफान पर हैं। कई बड़े बांधों के भर जाने के बाद दरवाजे खोल देने से त्रासदी और भयावह हो गई है। घरों, सड़कों, बाजारों, खेतों और रेल पटरियों के डूब जाने से अरबों रुपए की संपत्ति नष्ट हो गई है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ की त्रासदी अब देश में नियमित हो गई है। जो जल जीवन के लिए जीवनदायी वरदान है, वही अभिशाप साबित हो रहा है। इन आपदाओं के बाद केंद्र और राज्य सरकारें आपदा प्रबंधन पर अरबों रुपए खर्च करती हैं। करोड़ों रुपए बतौर मुआवजा देती हैं, बाबजूद आदमी है कि आपदा का संकट झेलते रहने को मजबूर बना हुआ है। बारिश का 90 प्रतिशत पानी तबाही मचाता हुआ अपना खेल खेलता हुआ समुद्र में समा जाता है। यह संपत्ति की बरबादी तो करता ही है, खेतों की उपजाऊ मिट्टी भी बहाकर समुद्र में ले जाता है।</p>
<p style="text-align:justify;">आफत की बारिश के चलते डूबने आने वाले अहमदाबाद, जयपुर, उदयपुर, बनासकांठा इत्यादि शहरों ने संकेत दिया है कि तकनीकी रूप से स्मार्ट सिटी बनाने से पहले शहरों में वर्षा जल की निकासी का समुचित ढांचा खड़ा करने की जरूरत है, लेकिन हमारे नीति नियंता हैं कि कुदरत के कठोर संकेतों से आंखें चुराने का काम कर रहे हैं। जबकि उत्तराखण्ड में देवभूमि और कश्मीर में हम तबाही देख चुके हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इस स्थिति से गुरूग्राम, चैन्नई, बैंग्लुरू और भोपाल भी गुजर चुके हैं। बावजूद इसके प्रलंयकारी बाढ़ की आशंकाओं को नजरअंदाज कर रहे हैं। बाढ़ की यह स्थिति शहरों में ही नहीं है, असम व बिहार जैसे वे राज्य भी झेल रहे हैं, जहां बाढ़ दशकों से आफत का पानी लाकर हजारों ग्रामों को डूबो देती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आफत की यह बारिश इस बात की चेतावनी है कि हमारे नीति-नियंता, देश और समाज के जागरूक प्रतिनिधि के रूप में दूरदृष्टि से काम नहीं ले रहे हैं। पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन के मसलों के परिप्रेक्ष्य में चिंतित नहीं हैं। 2008 में जलवायु परिवर्तन के अंतरसकारी समूह ने रिपोर्ट दी थी कि धरती पर बढ़ रहे तापमान के चलते भारत ही नहीं, दुनिया भर में वर्षाचक्र में बदलाव होने वाले हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">इसका सबसे ज्यादा असर महानगरों पर पड़ेगा। इस लिहाज से शहरों में जल-प्रबंधन व निकासी के असरकारी उपायों की जरूरत है। इस रिपोर्ट के मिलने के तत्काल बाद केंद्र की तत्कालीन संप्रग सरकार ने राज्य स्तर पर पर्यावरण सरंक्षण परियोजनाएं तैयार करने की हिदायत दी थी। लेकिन देश के किसी भी राज्य ने इस अहम् सलाह पर गौर नहीं किया। इसी का नतीजा है कि हम निरंतर जल त्रासदियां भुगतने को विवश हो रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">यही नहीं शहरीकरण पर अंकुश लगाने की बजाय, ऐसे उपायों को बढ़ावा दे रहे हैं, जिससे उत्तरोतर शहरों की आबादी बढ़ती रहे। यदि यह सिलसिला इन त्रासदियों को भुगतने के बावजूद जारी रहता है, तो ध्यान रहे 2031 तक भारत की शहरी आबादी 20 करोड़ से बढ़कर 60 करोड़ हो जाएगी। जो देश की कुल आबादी की 40 प्रतिशत होगी। ऐसे में शहरों की क्या नारकीय स्थिति बनेगी, इसकी कल्पना भी असंभव है?</p>
<p style="text-align:justify;">वैसे, धरती के गर्म और ठंडी होते रहने का क्रम उसकी प्रकृति का हिस्सा है। इसका प्रभाव पूरे जैवमंडल पर पड़ता है, जिससे जैविक विविधता का आस्तित्व बना रहता है। लेकिन कुछ वर्षों से पृथ्वी के तापमान में वृद्घि की रफ्तार बहुत तेज हुई है।</p>
<p style="text-align:justify;">इससे वायुमंडल का संतुलन बिगड़ रहा है। यह स्थिति प्रकृति में अतिरिक्त मानवीय दखल से पैदा हो रही है। इसलिए इस पर नियंत्रण संभव है। सयुंक्त राष्ट्र की जलवायु परिवर्तन समिति के वैज्ञानिकों ने तो यहां तक कहा था कि ‘तापमान में वृद्घि न केवल मौसम का मिजाज बदल रही है, बल्कि कीटनाशक दवाओं से निष्प्रभावी रहने वाले विषाणुओं-जीवाणुओं, गंभीर बीमारियों, सामाजिक संघर्षों और व्यक्तियों में मानसिक तनाव बढ़ाने का काम भी कर रही है। साफ है, जो लोग एक सप्ताह से ज्यादा दिनों तक बाढ़ का संकट झेलने को अभिशप्त हैं, वह जरूर संभावित तनाव की त्रासदी को भोग रहे होगें?</p>
<p style="text-align:justify;">दरअसल, पर्यावरण के असंतुलन के कारण गर्मी, बारिश और ठंड का संतुलन भी बिगड़ता है। इसका सीधा असर मानव स्वास्थ्य और कृषि की पैदावार व फसल की पौष्टिकता पर पड़ता है। यदि मौसम में आ रहे बदलाव से पांच साल के भीतर घटी प्राकृतिक आपदाओं और संक्रामक रोगों की पड़ताल की जाए तो वे हैरानी में डालने वाले हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">तापमान में उतार-चढ़ाव से ‘हिट स्ट्रेस हाइपरथर्मिया‘ जैसी समस्याएं दिल व सांस संबंधी रोगों से मृत्युदर में इजाफा हो सकता है। पश्चिमी यूरोप में 2003 में दर्ज रिकॉर्ड उच्च तापमान से 70 हजार से अधिक मौतों का संबंध था। बढ़ते तापमान के कारण प्रदूषण में वृद्घि दमा का कारण है। दुनिया में करीब 30 करोड़ लोग इसी वजह से दमा के शिकार हैं। पूरे भारत में 5 करोड़ और अकेली दिल्ली में 9 लाख लोग दमा के मरीज हैं। अब बाढ़ प्रभावित समूचे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में दमा के मरीजों की और संख्या बढ़ना तय है।</p>
<p style="text-align:justify;">बाढ़ के दूषित जल से डायरिया व आंख के संक्रमण का खतरा बढ़ता है। भारत में डायरिया से हर साल करीब 18 लाख लोगों की मौत हो रही है। बाढ़ के समय रुके दूषित जल से डेंगू और मलेरिया के मच्छर पनपकर कहर ढाते हैं। तय है,बाढ़ थमने के बाद, बाढ़ प्रभावित शहरों को बहुआयामी संकटों का सामना करना होगा। बहरहाल जलवायु में आ रहे बदलाव के चलते यह तो तय है कि प्राकृतिक आपदाओं की आवृत्ति बढ़ रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस लिहाज से जरूरी है कि शहरों के पानी का ऐसा प्रबंध किया जाए कि उसका जल भराव नदियों और बांधों में हो, जिससे आफत की बरसात के पानी का उपयोग जल की कमी से जूझ रहे क्षेत्रों में किया जा सके। साथ ही शहरों की बढ़ती आबादी को नियंत्रित करने के लिए कृषि आधारित देशज ग्रामीण विकास पर ध्यान दिया जाए। क्योंकि ये आपदाएं स्पष्ट संकेत दे रही है कि अनियंत्रित शहरीकरण और कामचलाऊ तौर-तरीकों से समस्याएं घटने की बजाय बढ़ेंगी ही?</p>
<p style="text-align:justify;"><strong>-प्रमोद भार्गव</strong></p>
<p style="text-align:justify;">
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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2017 22:44:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
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                <title>प्राकृतिक आपदा की घड़ी में हम जनता के साथ: सीएम</title>
                                    <description><![CDATA[ बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने में कोताही नहीं होगी बर्दाश्त  लापरवाही बरतने वालों को नहीं जाएगा बख्शा जयपुर (सच कहूँ न्यूज)। प्रदेश में खासकर जालौर, सिरोही, पाली एवं बाड़मेर जिलों में बाढ़ के हालातों से निपटने के लिए मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में उनके सरकारी आवास पर एक बैठक हुई, जिसमें मुख्य सचिव […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/rajasthan/cm-helps-in-natural-disaster/article-2724"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2017-07/raje-cm.jpg" alt=""></a><br /><h1 style="text-align:center;"> बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाने में कोताही नहीं होगी बर्दाश्त</h1>
<ul>
<li style="text-align:justify;"><strong> लापरवाही बरतने वालों को नहीं जाएगा बख्शा</strong></li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong>जयपुर (सच कहूँ न्यूज)।</strong> प्रदेश में खासकर जालौर, सिरोही, पाली एवं बाड़मेर जिलों में बाढ़ के हालातों से निपटने के लिए मुख्यमंत्री श्रीमती वसुंधरा राजे की अध्यक्षता में उनके सरकारी आवास पर एक बैठक हुई, जिसमें मुख्य सचिव अशोक जैन सहित सरकार के कई वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। मुख्यमंंत्री ने इस बैठक में साफ-साफ निर्देश दिए कि किसी भी स्थिति में बाढ़ पीड़ितों को राहत पहुंचाई जाए। इसमें कोताही कतई बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाही बरतने वाले को बख्शा नहीं जाएगा।</p>
<p style="text-align:justify;">यहां उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री श्रीमती राजे ने गत दिवस बाढग्रस्त इलाके में जाने के लिए हेलीकॉप्टर से रवाना हुई थी लेकिन मौसम खराब होने के कारण वे जालोर नहीं उतर सकी। उन्होंने हवाई सर्वे जरूर किया। इसके बाद जयपुर पहुंचते ही उन्होंने अधिकारियों की बैठक ली और कहा कि संकट और प्राकृतिक आपदा की घड़ी में सरकार हर पल वहां के लोगों के साथ खडी है। हर सम्भव मदद करने को तैयार है। बाढ़ की सम्भावना के साथ ही तुरन्त प्रभाव से प्रभारी मंत्रियों और अधिकारियों को प्रभावित जिलों में भेजा गया, जो निरन्तर गत 24-25 जुलाई से राहत गतिविधियों के संचालन का जायजा एवं स्थिति को नियत्रंण में रखे हुए है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">किसानों का शॉर्ट टर्म लोन मीडियम में जाएगा बदला</h3>
<p style="text-align:justify;">राजस्व विभाग ने प्रभावित क्षेत्रों में विशेष गिरदावरी के आदेश दिए हैं। इन इलाकों में 2.95 लाख किसानों के 1310 करोड़ रुपए के शॉर्ट टर्म लोन को मिडियम टर्म लोन में परिवर्तित किया जाएगा। इसके लिए राज्य सरकार 196.05 करोड़ रुपए की अतिरिक्त राशि व्यय करेगी, जिसे भारत सरकार को राहत कार्यों में सहायता के लिए भेजे जा रहे अंतरिम ज्ञापन में शामिल किया गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">अब तक 11 हजार लोगों को पहुंचाया सुरक्षित</h3>
<p style="text-align:justify;">इससे पूर्व गत 26 जुलाई को मुख्यमंत्री ने विडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से समीक्षा की थी तथा जिला कलक्टरों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए थे। अब तक 11 हजार से अधिक व्यक्तियों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया है। जिसमें 42 लोगों की जाने वायु सेना के हेलिकॉप्टर के माध्यम से बचाई गई है। इसके अलावा 1107 लोगों की जान हेलीकॉप्टर के माध्यम से बचाई गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">हेलीकॉप्टर और आर्मी सहित राहत टीमें अलर्ट</h3>
<p style="text-align:justify;">बैठक में आपदा प्रबंधन विभाग ने जानकारी दी कि जालौर के लिए एनडीआरएफ की दो टीमें, आर्मी की तीन टीमें, एसडीआरफ की एक टीम तथा दो हेलीकॉप्टर राहत कार्यों के लिए उपलब्ध हैं। इसी प्रकार, पाली के लिए एनडीआरएफ की एक टीम तथा एसडीआरफ की एक टीम तथा 24 होमगार्ड सहित आर्मी की एक टीम उपलब्ध है। इसके अलावा, सिरोही और जालौर के लिए गाजियाबाद से एनडीआरएफ की दो अतिरिक्त टीमें दिनांक गत 24 जुलाई से ही उपलब्ध कराई गई है। विभाग के अधिकारियों ने एनडीआरएफ मुख्यालय दिल्ली से बात कर चैन्नई से भी अतिरिक्त राहत बचाव दलों की मांग की है। इसके साथ ही आवश्यकता पड़ने पर कोटा, उदयपुर, जालौर, सिरोही, तथा अन्य जिलों में त्वरित गति से राहत एवं बचाव कार्य करने के लिए 6 हेलीकॉप्टर तथा सेना के कॉलम को अलर्ट रखा गया है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">12 हजार पशुधन की ली सुध</h3>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान 12,223 बीमार पशुधन का ईलाज किया जा चुका है तथा 6164 का टीकाकरण किया गया है। जालौर जिले में पथमेड़ा गौशाला के लिए 13, महावीर हनुमान गौशाला के लिए 13 और ठाकुर गौशाला के लिए 5 पशु चिकित्सक तथा पैरा वेटेनरी स्टाफ को तैनात किया गया है। 1.89 करोड़ की दवाईयां प्रभावित क्षेत्रों में भिजवाई गई हैं तथा अतिरिक्त आवश्यकता हेतु प्रत्येक जिले को 5 लाख रुपए की राशि दी गई है। प्रभावित क्षेत्र में अतिरिक्त मोबाइल टीमों को भेजा गया है। गौपालन विभाग द्वारा जालौर, सिरोही तथा पाली जिले की 196 गौशालाओं को गौसंरक्षण एवं संवर्धन निधि से 21.24 करोड़ रुपए स्वीकृत एवं वितरित किए जा चुके हैं। जालौर जिले की श्रीगोपाल गोवर्धन गौशाला, पथमेड़ा तथा महावीर हनुमान गौशाला, गोलासन में संधारित 14,778 गौवंश के लिए 5.03 करोड़ रुपए की सहायता हाल ही में दी गई है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">चिकित्सकों के अवकाश निरस्त</h3>
<p style="text-align:justify;">सभी प्रभावित क्षेत्रों में राहत कार्यों के लिए चिकित्सकों एवं अन्य विभागों के अधिकारियों के अवकाश निरस्त कर दिए हैं। कुल 150 मेडिकल टीमों के साथ-साथ वेटनरी टीमों को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में तैनात किया गया है। जिला कलक्टर, जालौर की मांग पर 20 मैट्रिक टन पशु आहार राजफैड़ द्वारा रवाना कर दिया गया है। पेयजल की व्यवस्था के लिए जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग ने प्रभावित 15 में से 13 कस्बों में सेवाएं बहाल कर दी है तथा ग्रामीण क्षेत्र के 873 अन्य प्रभावित रिहायशी इलाकों में से 75 को फिर से सुचारू किया गया है। बिजली आपूर्ति बहाल करने के लिए 180 अभियंता एवं 2175 तकनीकी स्टाफ तैनात किया गया है। अब तक 1111 खम्भे एवं 207 ट्रांसफार्मर तथा 56 किलोमीटर बिजली की लाइन दुरूस्त की जा चुकी है।</p>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 30 Jul 2017 08:12:33 +0530</pubDate>
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