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                <title>Job News: आईटी सेवाओं की तुलना में 20 प्रतिशत तक अधिक सैलरी दे रहा है ये सेक्टर&amp;#8230;.</title>
                                    <description><![CDATA[Job News:  नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। टेक्नोलॉजी क्षेत्र के तेज गति से विकसित होने के बीच इनोवेशन और डिजिटल विशेषज्ञता के लिए भारत एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है और आईटी सेवाओं की तुलना में जीसीसी में अधिक वेतन मिलने लगा है। टेक स्टाफिंग और लर्निंग सॉल्यूशंस प्रदाता टीमलीज डिजिटल ने […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/gcc-offering-up-to-20-higher-salaries-than-it-services-teamlease/article-61545"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-08/job-news.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>Job News:  नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)।</strong> टेक्नोलॉजी क्षेत्र के तेज गति से विकसित होने के बीच इनोवेशन और डिजिटल विशेषज्ञता के लिए भारत एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है और आईटी सेवाओं की तुलना में जीसीसी में अधिक वेतन मिलने लगा है। टेक स्टाफिंग और लर्निंग सॉल्यूशंस प्रदाता टीमलीज डिजिटल ने वित्त वर्ष 2025 के लिए डिजिटल स्किल्स और सैलरी प्राइमर नाम से अपनी नवीनतम रिपोर्ट जारी की है, जो आईटी उत्पाद और सेवाएं, वैश्विक क्षमता केंद्र (जीसीसी), और गैर-तकनीकी उद्योग के तीन प्रमुख तकनीकी क्षेत्रों में नवीनतम उद्योग रुझानों, महत्वपूर्ण कौशल और वेतन बेंचमार्क के बारे में जरूरी और गहन जानकारी प्रदान करती है। यह रिपोर्ट वित्त वर्ष 2024 और वित्त वर्ष 2025 के बीच कौशल की मांग का तुलनात्मक विश्लेषण प्रस्तुत करती है, जिसमें नौकरी के कार्य, शहर, अनुभव स्तर और विशिष्ट भूमिकाओं के आधार पर वेतन को विभाजित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, रिपोर्ट उच्च-मांग वाले कौशल और इसके लिए जरूरी प्रमाणपत्रों का आकलन करती है। साथ ही स्किल गैप या कौशल अंतराल को संबोधित करने और उसे बाजार की जरूरतों के मुताबिक तैयार करने के लिए रणनीतिक सिफारिशें भी करती है।</p>
<p style="text-align:justify;">टेक्नोलॉजी मार्केट के बारे में विश्लेषण प्रस्तुत करती इस रिपोर्ट से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2024 तक, भारत के तकनीकी बाजार का आकार 254 अरब डॉलर था, जिसकी सालाना वृद्धि दर 3.8 प्रतिशत रही और इसमें 56 लाख तकनीकी कार्यबल मौजूद था। वर्ष 2020 से 2024 के बीच पायथन, आर, टेन्सरफ्लो और पायटॉर्च और जैसे आवश्यक टूल्स के साथ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल), ब्लॉकचेन टेक, आईओटी, रोबोटिक प्रोसेस आॅटोमेशन (आरपीए), एज कंप्यूटिंग और क्वांटम कंप्यूटिंग के क्षेत्र में भारत ने तेज प्रगति देखी। हालांकि, यहां विशेषज्ञता की एक महत्वपूर्ण कमी नजर आती है और पता चलता है कि भारत में केवल 2.5 प्रतिशत इंजीनियरों के पास एआई कौशल है, और केवल 5.5 प्रतिशत बुनियादी प्रोग्रामिंग क्षमताओं की योग्यता रखते हैं। Job News:</p>
<p style="text-align:justify;">इस बढ़ते तकनीकी कौशल अंतर के जवाब में, 86 प्रतिशत भारतीय व्यवसाय सक्रिय रूप से अपने आईटी कर्मचारियों को फिर से प्रशिक्षित कर रहे हैं। एआई, एमएल और ब्लॉकचेन में महत्वपूर्ण निवेश के साथ, भारतीय टेक क्षेत्र का राजस्व 2025 तक 350 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। दक्षता और इनोवेशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए, भारत में वर्तमान में 1600 से अधिक जीसीसी हैं जिनमें 16.6 लाख से अधिक पेशेवर काम कर रहे हैं। रिपोर्ट के अनुसार, भारत अगले 5-6 वर्षों में 800 नए जीसीसी का स्वागत करने के लिए तैयार है, जो वैश्विक तकनीकी केंद्र के रूप में देश की बढ़ती भूमिका को सामने रखता है। दिलचस्प बात यह है कि कोलकाता, अहमदाबाद और वडोदरा जैसे द्वितीय श्रेणी के शहरों में जीसीसी स्थापित करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो देश भर में तकनीकी अवसरों के भौगोलिक विविधीकरण का संकेत दे रही है।</p>
<p style="text-align:justify;">इस दौरान जिन हुनर या कौशल की मांग बढ़ रही है, उनमें पायटॉर्च, एडब्ल्यूएस, डेवआॅप्स, एनएलपी, कुबेरनेट्स, हाइपरलेजर फैब्रिक, ब्लॉकचेन, टैब्लू, एसक्यूएल और सर्विसनाऊ शामिल हैं।आईटी प्रॉडक्ट्स और सेवाओं में, अगले पांच वर्षों में क्लाउड निवेश 25-30 प्रतिशत बढ़ने वाला है। अनुमान के मुताबिक, आईटी उत्पाद और सेवाएं 2026 तक भारत की जीडीपी का 8प्रतिशत हिस्सा होंगी और क्लाउड समाधान अपनाते हुए ये भारत में 1.4 करोड़ नौकरियां पैदा करेंगी, जो इस क्षेत्र की आर्थिक प्रभाव की क्षमता को स्पष्ट करता है। वहीं प्रिज्माक्लाउड, सेल्सफोर्स, आईटीएसएम, पावरबीआई और ओरेकल के हुनर में तेज मांग देखी जा रही है, जबकि रिपोर्ट स्केच, यूआई पाथ, स्प्लंक और आॅटोमेशन एनीव्हेयर की घटती मांग के बारे में बताती है।</p>
<p style="text-align:justify;">पारंपरिक रूप से गैर-तकनीकी उद्योगों को भी उन्नत टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल से उनका कायाकल्प किया जा रहा है, जिसमें दूरसंचार, मीडिया और मनोरंजन, बीएफएसआई और ऊर्जा और उपयोगिता क्षेत्रों में 70 प्रतिशत से अधिक कंपनियां अपने प्रौद्योगिकी बजट का 20प्रतिशत से अधिक डिजिटल एडवांसमेट के लिए समर्पित कर रही हैं। इस गैर-तकनीकी क्षेत्र में तकनीकी प्रतिभा पूल का 7.86 प्रतिशत वार्षिक की दर से बढने की उम्मीद है, जो वित्त वर्ष 2012 में 7.65 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 27 तक 11.15 लाख तक पहुंच जाएगा। यह विभिन्न पारंपरिक उद्योगों में तकनीकी के बढ़ते एकीकरण को उजागर करता है। इसके अलावा, इस सेक्टर के दायरे को देखते हुए ट्रेंडिंग स्किल का दायरा काफी बड़ा है। हालांकि, जिम्प, जेंडेस्क, नागियोस, गूगल क्लाउड एसडीके और ओपनस्टैक सीएलआई जैसे स्किल की मांग में कमी आई है।</p>
<p style="text-align:justify;">महत्वपूर्ण फंक्शनल एरिया, शीर्ष कौशल और वेतनटीमलीज डिजिटल की रिपोर्ट तकनीकी उद्योग में प्रमुख कार्यात्मक क्षेत्रों की पहचान करती है जिसमें सॉफ्टवेयर विकास और इंजीनियरिंग, क्लाउड सॉल्यूशंस और एंटरप्राइज एप्लिकेशन प्रबंधन, प्रोजेक्ट प्रबंधन और यूजर एक्सपीरिएंस, डेटा प्रबंधन और एनालिटिक्स, साइबर सुरक्षा और नेटवर्क विकास, और सिस्टम संचालन और तकनीकी सहायता सेवाएं शामिल हैं। ये क्षेत्र भारत के तकनीकी क्षेत्र को आगे बढ़ाने वाली मुख्य दक्षताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। रिपोर्ट इन-डिमांड कौशल और संबंधित वेतन ब्रैकेट के बारे में भी कहा है कि जीसीसी में, एआई/एमएल इंजीनियर की नौकरी के कार्य लगभग होते हैं। शुरूआती वेतन 8.2 लाख रुपये सालाना है जो 8 वर्ष से अधिक के अनुभव के साथ सीनियर लेवल पर 43 लाख रुपये सालाना तक जा सकता है। आईटी उत्पाद और सेवा क्षेत्र में, एक बिग डेटा डेवलपर को शुरूआती स्तरों पर 9.7 लाख रुपये सालाना और वरिष्ठ स्तरों पर 20.7 लाख रुपये सालाना का लगभग वेतन मिल सकता है। गैर-तकनीकी क्षेत्रों में तकनीकी कार्यों को ध्यान में रखते हुए, एसएपी एबीएएपी सलाहकार की भूमिका का प्रारंभिक वेतन लगभग 7.2 लाख रुपये सालाना है, जो कि 8 वर्षों से अधिक के अनुभव के साथ 31 लाख रुपये सालाना तक जा सकता है। अन्य मांग वाली भूमिकाओं में डेवआॅप्स इंजीनियर, आईओटी इंजीनियर, सूचना सुरक्षा विश्लेषक और आॅटोमेशन इंजीनियर शामिल हैं और प्रत्येक को अनुभव और विशेषज्ञता के आधार पर प्रतिस्पर्धी वेतन मिलता है। रिपोर्ट के नतीजों के बारे में बात करते हुए टीमलीज डिजिटल की सीईओ नीति शर्मा ने कहा, ह्ल भविष्य की ओर बढ़ने के साथ ही भारतीय तकनीकी क्षेत्र तेजी से विकास के लिए तैयार है, जो अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों में इनोवेशन और रणनीतिक निवेश की निरंतर खोज से प्रेरित है। टेक सेक्टर 2025 तक 350 अरब डॉलर के राजस्व तक पहुंचने वाला है।</p>
<p><strong>यह भी पढ़ें:– </strong><a title="कंगना सार्वजनिक रूप से माफी मांगें: पंधेर" href="http://10.0.0.122:1245/sarwan-singh-pandher-said-that-kangana-ranaut-should-apologize-publicly/">कंगना सार्वजनिक रूप से माफी मांगें: पंधेर</a></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 27 Aug 2024 16:58:55 +0530</pubDate>
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                <title>Artificial Intelligence : AI की नई आहट</title>
                                    <description><![CDATA[– Artificial Intelligence – Artificial Intelligence की ताकत को लेकर दुनिया में तमाम तरह की शंकाएं हों, लेकिन एक बात तय है कि भविष्य में बदलाव का सबसे बड़ा कारण एआई ही बनेगी। यह लगातार नई ताकतवर तकनीकों को जन्म दे रही है। इसी कड़ी में एआई तकनीक की गुणवत्ता से लैस सर्च इंजन के […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/artificial-intelligence/article-57563"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-05/artificial-intelligence.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;"><strong>– Artificial Intelligence –</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">Artificial Intelligence की ताकत को लेकर दुनिया में तमाम तरह की शंकाएं हों, लेकिन एक बात तय है कि भविष्य में बदलाव का सबसे बड़ा कारण एआई ही बनेगी। यह लगातार नई ताकतवर तकनीकों को जन्म दे रही है। इसी कड़ी में एआई तकनीक की गुणवत्ता से लैस सर्च इंजन के सामने आने की बात कही जा रही है है। कहा जा रहा है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से संचालित यह सर्च इंजन कालांतर गूगल के सर्च इंजन की बादशाहत को चुनौती दे सकता है। अभी गूगल का सर्च इंजन हर कंप्यूटर और हरेक स्मार्टफोन में मौजूद है, पर जब ओपनएआई का कृत्रिम बुद्धिमत्ता वाला सर्च इंजन सक्रिय हो जाएगा, तो स्थितियां बदलेंगी। माइक्रोसॉफ्ट समर्थित ओपनएआई कृत्रिम बुद्धिमत्ता में अभी सबसे आगे है। चैटजीपीटी भी ओपन एआई का अब तक का सफलतम उत्पाद है।</p>
<p style="text-align:justify;">अब नए सर्च इंजन के आने से ओपन एआई के चैट जीपीटी की क्षमताओं में वृद्धि की उम्मीद है, जिससे यह वेब से वास्तविक समय में या तत्काल जानकारी प्राप्त कर सकेगा। यह अक्सर कहा जा रहा है कि चैट जीपीटी काफी मशीनी या एकरूपता वाले पाठ पेश कर रहा है, जबकि बाजार में ज्यादा विविधता वाले ऐसे पाठों की जरूरत है, जो मशीनी नहीं, बल्कि ज्यादा मानवीय लगें। सरकारों को मौजूदा व्यवस्था में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के खतरों के प्रति सतर्क रहना चाहिए, क्योंकि आज देश की अधिकतर व्यवस्थाएं इंटरनेट पर टिकी हैं। इसके नियमन के लिये सख्त कानून बनाये जाने चाहिए। पश्चिमी जगत के विशेषज्ञ भी मनुष्य को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के खतरों के लिये तैयार करने की सलाह दे चुके हैं। ऐसे में इस दिशा में सावधानी के साथ चलने की आवश्यकता है।</p>
]]></content:encoded>
                
                                                            <category>देश</category>
                                            <category>विचार</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 May 2024 10:08:17 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>Artificial Intelligence : आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की दुनिया में रहने की तैयारियां</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका: पीओके को हासिल करने के लिए हमें कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी || Artificial Intelligence  राजीव गुप्ता। ज्ञानिक खोज प्रौद्योगिकी और नवाचार मानव जीवन में उथल-पुथल लाती है। व्यक्ति के सोचने और कार्य करने के तौर-तरीकों में बदलाव लाती है। खगोल विज्ञान, चिकित्सा से लेकर पहिए, मोटर गॉड़ी और […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/artificial-intelligence-world/article-55794"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2024-03/artificial-intelligence.jpg" alt=""></a><br /><div>
<h3 style="text-align:center;"><strong>शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका: पीओके को हासिल करने के लिए हमें कुछ ज्यादा करने की जरूरत नहीं पड़ेगी || Artificial Intelligence </strong></h3>
<div style="text-align:justify;"><strong>राजीव गुप्ता।</strong> ज्ञानिक खोज प्रौद्योगिकी और नवाचार मानव जीवन में उथल-पुथल लाती है। व्यक्ति के सोचने और कार्य करने के तौर-तरीकों में बदलाव लाती है। खगोल विज्ञान, चिकित्सा से लेकर पहिए, मोटर गॉड़ी और कंप्यूटर के आविष्कार तक मानव के आविष्कारों ने इस बात को सिद्ध किया है। वर्ष 2016 में हॉलीवुड की फिल्म ‘हिडन फिगर्स’ में एक अश्वेत महिला जॉन ग्लेन का वर्णन किया गया है जो नासा के लिए कार्य करती है तथा जिन्होंने अमरीका के मानव युक्त अंतरिक्ष उडान में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी। इस बात की कल्पना करना कठिन है कि आधुनिक कंप्यूटरों के आविष्कार से पूर्व अंतरिक्ष यात्रा के लिए अपेक्षित जटिल और लंबी गणनाओं को व्यक्तियों द्वारा किया जाता था और इसलिए फिल्म में दर्शायी गई इन तीन महिलाओं को मानव कंप्यूटर कहा गया। हम जानते हैं कि इलेक्ट्रोनिक कंप्यूटर के आविष्कार से घर के बजट से लेकर जटिल वैज्ञानिक गणनाओं के तरीकों में पूर्ण बदलाव आया है। एक ऐसी दुनिया में शिक्षा की भूमिका को पूर्णत: स्वीकार किया जाना चाहिए जहां पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) आज इंटरनेट की तरह अनिवार्य हो जाएगी इसलिए शिक्षा के तीन महत्वपूर्ण अवयवों पर विचार किया जाना चाहिए जिनमें पाठयक्रम का डिजाइन, पाठ्य वस्तु का निर्धारण और मूल्यांकन और इन तीनों पहलुओं पर विचार किए जाने की आवश्यकता है। पाठ्यक्रम शिक्षा प्रणाली का अत्यंत महत्वपूर्ण भाग है। यदि पाठ्यक्रम छात्रों और समाज की आवश्यकताओं के अनुरूप न हो तो यह महत्वपूर्ण नहीं रह जाता है कि इसे कितने प्रभावी ढंग से पढाया जाता है।</div>
</div>
<div style="text-align:justify;">अतीत में पाठ्यक्रम में मोटे तौर पर तथ्यों, दृष्टिकोणों और विभिन्न कार्यकलापों को करने की विधियों तक सीमित रहना था और अधिकतर मामलों में तथ्य, दृष्टिकोण और विधियां पुरानी हो जाती थी क्योंकि समाज में नए बदलाव आ जाते हैं। पाठ्यक्रम का उद्देश्य छात्रों में विचार करने और सीखने की क्षमता का विकास करना है। इस क्षमता का तात्पर्य है कि छात्रों की भूमिका सूचना प्राप्त करने वालों के स्थान पर शिक्षण प्रक्रिया में सहयोगी और साझीदारी की बन गयी। इसी तरह अध्यापकों की भूमिका भी बदल गयी है। अब उनकी भूमिका ज्ञान के भंडार के बजाय ऐसे व्यक्ति के रूप में हो गयी है जो छात्रों की सर्वोत्तम क्षमताओं का विकास कर सके।</div>
<div style="text-align:justify;">इसके अलावा साफ्ट स्किल्स पर बल दिए जाने की आवश्यकता है। जिस पर आज अधिक ध्यान नहीं दिया जा सकता है। इन साफ्ट स्किल में क्रिटिकल थिंकिंग स्किल, कप्यूनिकेशन, कोलोबोरेशन आदि शामिल हैं। क्रिटिकल थिंकिंग स्किल प्रश्न पूछने, विश्लेषण करने, व्याख्या करने और निर्णय करने की क्षमता है। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) के माध्यम से तथ्यों तक पहुंच आसान हो जाएगी इसलिए सूचना का विश्लेषण और उपयोग करने की क्षमता का विकास करने की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस के विकास करने वाले चाहे कोई भी दावा करें, किए जाने वाले कार्यों के बारे में जिनमें निर्णय निकट भविष्य में भी मानव प्रयासों से ही किए जाएंगे। संप्रेषण कौशल लोगों को अपने विचार व्यक्त करने के लिए आवश्यक है। किंतु शिक्षा में वर्तमान नेतृत्व इन छात्रों में इन कौशलों के विकास में शिक्षा की भूमिका को नहीं देख पाते हैं जिसमें बदलाव लाया जाना चाहिए। जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों के समक्ष समस्याएं और जटिल बन गयी है इसलिए आवश्यक हो गया है कि हम अन्य लोगों के साथ सहयोग करना सीखें तथापि हमारी शिक्षा प्रणाली में व्यक्तिगत कार्य निष्पादन और विकास पर बल दिया जाता है इसलिए आवश्यक कौशल के विकास में अंतर रह जाता है और इस अंतर को दूर किए जाने की आवश्यकता है।</div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा का दूसरा महत्वपूर्ण क्षेत्र जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए वह सामग्री को उपलब्ध कराना है। परंपरागत रूप से अध्यापकों को सभी सूचनाओं का स्रोत मााना जाता था जहां पर अध्यापक व्याख्यान देते और छात्र कक्षाओं में निष्क्रिय होकर सीखते। शिक्षा के इस मॉडल मे छात्र सक्रिय साझीदार नहीं होते और पाठ्यक्रम समाप्त होने के बाद छात्र पाठ्य वस्तु को भूल जाते थे। इस बात के र्प्याप्त साक्ष्य हैं कि यदि छात्र अपनी सीखने की प्रक्रिया के दौरान भागीदारी करते हैं तो वे पाठ्य सामग्री को लंबे समय तक याद रखते हैं। इसका तात्पर्य है कि अध्यापकों की भूमिका सर्वज्ञ गुरू से बदलकर ऐसे व्यक्ति के रूप में होनी चाहिए जो छात्रों के साथ संवाद करे और उन्हें सीखने में मदद करे।</div>
<div style="text-align:justify;">शिक्षा का तीसरा महत्वपूर्ण तत्व मूल्यांकन है। पिछले कुछ दशकों में मूल्यांकन की दिशा में कुछ प्रगति हुई है। सत्र के अंत में परीक्षा के माध्यम से एकल मूल्यांकन का स्थान अब आवधिक मूल्याकनों ने ले लिया है और इसके लिए प्रतियोगिताएं, असाइनमेंट, प्रोजेक्ट आदि का सहारा लिया जाता है किंतु इसमें और प्रगति की आवश्यकता है। मूल्यांकन अभी भी मूलत: किसी विशेष कार्य के पूर्ण होने पर उसमें दक्षता पर आधारित है। छात्रों की क्षमताओं के मूल्यांकन के लिए बेहतर विधियों की आवश्यकता है जो उनके कार्य स्थल पर उनके लिए उपयोगी सिद्ध हों।</div>
<div style="text-align:justify;">हमारी शिक्षा प्रणाली में ग्रेड और मूल्यांकन गहरे समाए हुए हैं और इसमें बदलाव के लिए एक दूरदृष्टि नेतृत्व की आवश्यकता है। तथापि भावी छात्रों के लिए आवश्यक है कि वे नई चुनौतियों का सामना करने के लिए अपने में क्षमताएं विकसित करें। इस लेख का उद्देश्य भावी दुनिया के लिए छात्रों को तैयार करने हेतु वर्तमान शिक्षा प्रणाली के कुछ पहलुओं में बदलाव की आवश्यकता पर बल देना है जिसमें आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (Artificial Intelligence) की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। शिक्षा प्रणाली में बडे बदलाव लाने में समय लगता है इसलिए हमें अभी से शुरूआत करनी चाहिए। <strong>(यह लेखक के अपने विचार हैं)।</strong></div>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>संस्कृति एवं समाज</category>
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                <pubDate>Sat, 30 Mar 2024 10:56:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कमाल का बल्ब: अब चोरों पर रखेगा पैनी नजर</title>
                                    <description><![CDATA[जैसे जैसे टेक्नोलॉजी बढ़ रही है, जासूसी का अंदाज भी नया हो रहा है। अब बल्ब में भी स्पाई कैमरा फिट कर दिया जाता है। जिस वजह से यूजर्स की नजर स्पाई कैमरे में नही पड़ती है और सारी एक्टिविटी उस कैमरे में रिकॉर्ड हो जाती है। इस स्पाई कैमरे को आप ऑनलाइन भी खरीद […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/other-news/spy-camera-in-led-light-bulb/article-36974"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-08/spy-camera.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;">जैसे जैसे टेक्नोलॉजी बढ़ रही है, जासूसी का अंदाज भी नया हो रहा है। अब बल्ब में भी स्पाई कैमरा फिट कर दिया जाता है। जिस वजह से यूजर्स की नजर स्पाई कैमरे में नही पड़ती है और सारी एक्टिविटी उस कैमरे में रिकॉर्ड हो जाती है। इस स्पाई कैमरे को आप ऑनलाइन भी खरीद सकते है। ये स्पाई कैमरा अमेजन और दूसरी अन्य वेबसाइट पर उपलब्ध है। इस कैमरे की मदद से आसानी से चोरों पर नजर रखी जा सकती है।</p>
<p style="text-align:justify;">आप अपने घर को सुरक्षा के लिए इस स्पाई कैमरा वाला बल्ब का उपयोग कर सकते है। ये देखने से किसी को पता भी नही चलता है। ये स्पाई कैमरा है या नॉर्मल बल्ब। ये 1080पी एचडी रेज्योलूशन के साथ आता है। 4 एलईडी लाइट्स भी दी गई इसमें 2.4जी वाईफाई को सपोर्ट करता है। आप इस कैमरे को स्मार्टफोन के जरिए एक्सेस कर सकते है। कंपनी के कहा है कि ये ऑटो ट्रैकिंग और एलईडी लाइट्स के साथ आता है। इस कारण से ये मोशन को डिटेक्ट करके ऑटोमैटिकली ऑब्जेक्ट के तरफ घूमकर उसे ट्रैक करना शुरू कर देता है। इस 4 एलईडी लाइट्स भी दी गई है जिस वजह से रात में भी आपको क्लियर फुटेज मिलता है।</p>
<h3 style="text-align:justify;">कीमत 2000 रुपए से कम रखी गई</h3>
<p style="text-align:justify;">कंपनी ने कहा है कि इस कैमरे वाले बल्ब में बिल्ट इन माइक्रोफोन और स्पीकर भी दिया गया है। जिसमे फोन के जरिए टॉक बैक भी कर सकते है। साथ ही कैमरे के पास की वॉइस को भी सुन सकते है। अब इस कैमरे वाले बल्ब की कीमत की बात करें तो इसकी कीमत 2000 रुपए से कम रखी गई है।</p>
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                                                            <category>अन्य खबरें</category>
                                            <category>शिक्षा और रोजगार</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Aug 2022 15:15:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इंसानों के स्कीन जैसी रोबोटिक फिंगर बनाई, चोट खुद होगी ठीक</title>
                                    <description><![CDATA[टोक्यो। सभी जगह पर साइंस की दुनिया तेजी प्रगति कर रही है। इसके साथ ही रोजाना रोबोट्स से जुड़ी टेक्नोलॉजी में भी अहम बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी रोबोटिक फिंगर बनाई है जिसकी स्किन इंसानों जैसी होगी। सिर्फ इतना ही नहीं, इसमें खास बात यह है […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/science-invented-robotic-finger-like-human-in/article-34390"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2022-06/robot.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>टोक्यो।</strong> सभी जगह पर साइंस की दुनिया तेजी प्रगति कर रही है। इसके साथ ही रोजाना रोबोट्स से जुड़ी टेक्नोलॉजी में भी अहम बदलाव देखने को मिल रहे हैं। इसी कड़ी में अब वैज्ञानिकों ने एक ऐसी रोबोटिक फिंगर बनाई है जिसकी स्किन इंसानों जैसी होगी। सिर्फ इतना ही नहीं, इसमें खास बात यह है कि बीमार होने के बाद रोबोट की यह स्किन खुद को ठीक कर सकेगी। आपको बता दें कि यह रोबोटिक फिंगर टोक्यो यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने बनाई है, जिसकी स्किन लिविंग टिश्यू से ढकी होगी।</p>
<h3 style="text-align:justify;"><strong>रोबोटिक्स व लिविंग टिश्यू का मेल</strong></h3>
<p style="text-align:justify;">यह रोबोटिक्स व लिविंग टिश्यू का पहला और अनोखा मेल है। इस रोबोटिक फिंगर में लगे सेल्स और ऑर्गेनिक मैटेरियल इसको आकार व मजबूती देने वाले होंगे। इसे बनाने वाली टीम का कहना है कि यह स्किन खुद को ठीक कर सकेगी। इसका प्रयोग टच-कंट्रोल और सेंसिटिव अप्लीकेशंस में इस्तेमाल होगा। जॉर्नल मैटर में प्रकाशित पेपर में इसके बारे में विस्तार से बताया गया है। इसके मुताबिक इस रोबोट को बनाने में बायोहाइब्रिड अप्रोच के जरिए टिश्यू इंजीनियर्ड स्किन का इस्तेमाल किया गया है।</p>
<p>Edit By M.L</p>
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                                                            <category>विदेश</category>
                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Jun 2022 18:27:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नयी डिजिटल तकनीक लोकतांत्रिक, मानवीय मूल्यों पर केन्द्रित हो : मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[नयी दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व में डिजीटल जगत में हो रही क्रांति में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनिवार्यता पर बल देते हुए कहा कि भारत में डिजीटलीकरण के माध्यम से शासन, समावेशन, सशक्तीकरण, कनेक्टिविटी एवं लाभों के हस्तांतरण एवं कल्याणकारी पहल में जबरदस्त बदलाव आ रहे हैं। मोदी ने प्रथम सिडनी डॉयलॉग में मुख्य […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/new-digital-technology-should-be-democratic-focused-on-human-values-modi/article-28463"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2021-11/pm-narendra-modi.jpg" alt=""></a><br /><p style="text-align:justify;"><strong>नयी दिल्ली।</strong> प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विश्व में डिजीटल जगत में हो रही क्रांति में लोकतांत्रिक मूल्यों की अनिवार्यता पर बल देते हुए कहा कि भारत में डिजीटलीकरण के माध्यम से शासन, समावेशन, सशक्तीकरण, कनेक्टिविटी एवं लाभों के हस्तांतरण एवं कल्याणकारी पहल में जबरदस्त बदलाव आ रहे हैं। मोदी ने प्रथम सिडनी डॉयलॉग में मुख्य वक्तव्य में साइबर विश्व के विषय पर बोलते हुए आगाह किया कि भविष्य की तकनीक को लेकर दुनिया के तमाम लोकतांत्रिक देशों को मानवीय मूल्यों का ध्यान रखना होगा और तकनीक के दुरुपयोग की संभावना से युवा पीढ़ी को बचाना होगा।</p>
<p style="text-align:justify;">उन्होंने कहा कि सिडनी डॉयलॉग में उन्हें निमंत्रित करना ना केवल भारत के लिए सम्मान की बात है बल्कि यह हिन्द प्रशांत क्षेत्र तथा उभरते डिजीटल जगत में भारत की केन्द्रीय भूमिका को मान्यता देना है। उन्होंने कहा कि डिजीटल जगत में हमारे इर्दगिर्द हर चीज़ बदल रही है। इसने राजनीति, अर्थव्यवस्था एवं समाज को पुनर्परिभाषित किया है तथा संप्रभुता, शासन, नैतिकता, कानून, अधिकारों एवं सुरक्षा को लेकर नये सवाल खड़े किये हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्द्धा, शक्ति एवं नेतृत्व को भी नये सिरे से आकार दिया है। प्रधानमंत्री ने भारत में डिजीटल तकनीक के कारण पांच महत्वपूर्ण बदलावों का उल्लेख करते हुए कहा कि हम विश्व का सर्वाधिक विस्तृत जनसूचना अवसंरचना बना रहे हैं। 1.3 अरब भारतीयों के पास एक डिजीटल पहचान है।</p>
<p style="text-align:justify;">हम छह लाख गांवों को ब्रॉडबैंड से जोड़ने वाले हैं। दूसरा- हम डिजीटल तकनीक के माध्यम से शासन, समावेशन, सशक्तीकरण, कनेक्टिविटी तथा लाभों एवं कल्याणकारी पहल के हस्तांतरण से लोगों के जीवन में परिवर्तन ला रहे हैं। तीसरा – भारत में विश्व का तीसरा सबसे तेजी से बढ़ता स्टार्ट अप ईको सिस्टम है। हर सप्ताह नये-नये यूनीकॉर्न्स आ रहे हैं और वे स्वास्थ्य एवं शिक्षा से लेकर राष्ट्रीय सुरक्षा तक हर क्षेत्र में समाधान मुहैया करा रहे हैं। चौथा – भारत का उद्योग एवं सेवा क्षेत्रों खासकर कृषि क्षेत्र में बहुत व्यापक बदलाव हो रहे हैं। हम स्वच्छ ऊर्जा, संसाधनों एवं जैवविविधता के संरक्षण में डिजीटल तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। पांचवा – भारत को भविष्य के लिए तैयार करने के वास्ते बहुत बड़े स्तर पर प्रयास चल रहे हैं।</p>
<p style="text-align:justify;">हम 5जी एवं 6जी जैसी टेलीकॉम तकनीक में स्वदेशी क्षमता विकसित करने के लिए निवेश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं मशीन से सीखने के क्षेत्र में काम करने वाले अग्रणी देशों में से एक है जो एआई का मानव केन्द्रित एवं नैतिक उपयोग पर काम कर रहा है। हम क्लाउड प्लेटफॉर्म्स एवं कम्प्यूटिंग में मजबूत क्षमताओं को विकसित कर रहे हैं। यही हमारी डिजीटल संप्रभुता एवं टिकाऊ बने रहने का मंत्र है। हम क्वांटम कम्प्यूटिंग में विश्वस्तरीय क्षमताएं विकसित कर रहे हैं। हमारा अंतरिक्ष कार्यक्रम हमारी अर्थव्यवस्था एवं सुरक्षा का एक अहम हिस्सा है।</p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Nov 2021 11:01:05 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>रक्षा क्षेत्र में मिली बड़ी कामयाबी। डीआरडीओ ने हारपरसोनिक हारपरसोनिक टेक्नोलोजी का किया सफल परीक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों को दी बधाई नई दिल्ली। देश ने हारपरसोनिक और क्रूज मिसाइल प्रक्षेपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए हारपरसोनिक टेक्नोलोजी डिमोन्स्ट्रेशन व्हीकल (एचटीडीवी) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। देश के प्रमुख अनुसंधान संगठन, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने देश में ही विकसित प्रौद्योगिकी के […]
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/great-success-in-defense-sector-drdo-successfully-tests-hypersonic-hypersonic-technology/article-18217"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-09/drdo.jpg" alt=""></a><br /><h3 style="text-align:center;">रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने वैज्ञानिकों को दी बधाई</h3>
<p style="text-align:justify;"><strong>नई दिल्ली।</strong> देश ने हारपरसोनिक और क्रूज मिसाइल प्रक्षेपण के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करते हुए हारपरसोनिक टेक्नोलोजी डिमोन्स्ट्रेशन व्हीकल (एचटीडीवी) का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। देश के प्रमुख अनुसंधान संगठन, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ के वैज्ञानिकों ने देश में ही विकसित प्रौद्योगिकी के माध्यम से सोमवार सुबह 11 बज कर तीन मिनट पर ओड़िशा के तट पर व्हीलर द्वीप स्थित डा ए पी जे अब्दुल कलाम प्रक्षेपण परिसर से यह परीक्षण किया। इसके साथ ही देश अमेरिका, रूस और चीन जैसे चुनिंदा देशों की श्रेणी में शामिल हो गया है जिनके पास यह प्रौद्योगिकी है। यह हवा में आवाज की गति से छह गुना ज्यादा स्पीड से दूरी तय करता है।</p>
<p style="text-align:justify;">यानी दुश्मन देश के एयर डिफेंस सिस्?टम को इसकी भनक तक नहीं लगेगी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को इस सफलता पर बधाई दी है। इस सफलता के साथ सभी महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकी अब अगले चरण के के लिए विकसित की चा चुकी हैं। डीआरडीओ के अनुसार इस हाइपरसोनिक क्रूज यान को राकेट मोटर की मदद से प्रक्षेपित किया गया। गौरतलब हैं कि ये मिसाइलें मिनटों में दुनिया में कहीं भी मौजूद अपने टारगेट को ध्?वस्?त कर सकती हैं।</p>
<h3 style="text-align:justify;">जानें, क्यों खास है हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डिमॉन्स्ट्रेटर व्हीकल?</h3>
<p style="text-align:justify;">इस तकनीक का सबसे पहला परीक्षण भारत ने 2019 में भी किया था। हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल बनाने और काफी कम खर्च में सैटेलाइन लॉन्च करने में इस तकनीक का इस्तमाल किया जाएगा। एचएसटीडीवी के परीक्षण का समय मात्र 20 सेकेंड था। इसकी रफ्तार 12,251 किलोमीटर थी। इस तकनीक के बाद उम्मीद बढ़ गयी है कि भारत के पास जल्द ही 12 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से मार करने वाले मिसाइल और विमान होंगे।</p>
<h3 style="text-align:justify;">रक्षा क्षेत्र में देश की नई छलांग</h3>
<p style="text-align:justify;">1. अगली पीढ़Þी की मिसाइल तकनीक का परीक्षण<br />
2. ध्वनि से तेज गुना तेज चल सकने वाला सिस्टम<br />
3. यह तकनीक विकसित करने वाला भारत चौथा देश<br />
4. दुनिया में कहीं भी मौजूद अपने टारगेट को ध्वस्त कर सकती हैं</p>
<p> </p>
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                                                            <category>देश</category>
                                            <category>न्यूज़ ब्रीफ</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2020 16:20:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश का विकास विज्ञान, प्रौद्योगिकी की सफलता पर निर्भर: मोदी</title>
                                    <description><![CDATA[पिछले पांच साल में समूचे देश के आम आदमी ने ग्रामीण विकास की अनुभूति महसूस की है। विज्ञान हितैषी पर्यावरण के लिए बेंगलुरू की सराहना करते हुए उन्होंने कहा, ‘पूरा विश्व नयी खोज के लिए यहां आ रहा है
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/development-of-the-country-depends-on-the-success-of-science-technology-modi/article-12211"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2020-01/modi.jpg" alt=""></a><br /><h2 style="text-align:center;">‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने ग्रामीण जनसमूह की जीवनी को बदला है।(Modi)</h2>
<p style="text-align:justify;"><strong>बेंगलुरु (एजेंसी)।</strong> प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैज्ञानिकों एवं प्रौद्योगिकविदों से भारत के ग्रामीण समुदाय को (Modi)  सशक्त बनाने की दिशा में कड़ी मेहनत का शुक्रवार को आह्वान किया और कहा कि देश का भावी विकास विज्ञान और प्रौद्योगिकी की सफलता पर निर्भर होगा। मोदी ने यहां गांधी कृषि विजन्ना केंद्र परिसर में आयोजित पांच दिवसीय 10वें भारतीय विज्ञान कांग्रेस के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि विकास में तेजी लाने के लिए भारतीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के परिदृश्य को बदले जाने की आवश्यकता है।</p>
<ul>
<li>‘युवा वैज्ञानिकों के लिए नवोन्मेषी, ईजाद, उत्पादन और समृद्धि मेरा सिद्धांत है।</li>
<li style="text-align:justify;">‘विज्ञान और प्रौद्योगिकी ने ग्रामीण जनसमूह की जीवनी को बदला है।</li>
<li style="text-align:justify;">पिछले पांच साल में समूचे देश के आम आदमी ने ग्रामीण विकास की अनुभूति महसूस की है।</li>
<li style="text-align:justify;">विज्ञान हितैषी पर्यावरण के लिए बेंगलुरू की सराहना करते हुए उन्होंने कहा ।</li>
</ul>
<p style="text-align:justify;"><strong><em>-‘पूरा विश्व नयी खोज के लिए यहां आ रहा है और इस शहर ने विकास के लिए एक बृहद इको-सिस्टम विकसित करने के साथ ही प्रत्येक युवा वैज्ञानिकों, अन्वेषकों और इंजीनियरों को यहां से जुड़ने के लिए शोध किया है।</em></strong></p>
<p> </p>
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</span></span></p>
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                                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jan 2020 16:45:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अर्ध कुंभ 2019 : पहली बार होगा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल</title>
                                    <description><![CDATA[आईबीएम दे रही है एआई बेस्ड वीडियो एनालिटिक्स सर्विस उतर प्रदेश (सच कहूँ)। इलाहाबाद में 15 जनवरी से शुरू हो रहे अर्ध कुंभ की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस धार्मिक मेले में रेलवे पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने जा रही है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनी आईबीएम द्वारा विकसित की […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/national/railway-to-use-technology-for-crowd-control-at-kumbh-2019/article-6671"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-11/kumbh-.jpg" alt=""></a><br /><h2>आईबीएम दे रही है एआई बेस्ड वीडियो एनालिटिक्स सर्विस</h2>
<p><strong>उतर प्रदेश (सच कहूँ)।</strong> इलाहाबाद में 15 जनवरी से शुरू हो रहे अर्ध कुंभ की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। इस धार्मिक मेले में रेलवे पहली बार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करने जा रही है। दुनिया की बड़ी टेक कंपनी आईबीएम द्वारा विकसित की गई इस तकनीक की मदद से मेले में वाली भीड़ को कंट्रोल करने में मदद मिलेगी। इसके अलावा टीवी स्क्रीन और कैमरों से मेले पर नजर रखने की तैयारी हो रही है।</p>
<h2>एआई टेक्नोलॉजी से भीड़ को कंट्रोल करेंगे</h2>
<p>उत्तर-मध्य रेलवे के जनरल मैनेजर राजीव चौधरी ने बताया कि ‘भीड़ को कंट्रोल करने के लिए आईबीएम की एआई टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर वीडियो एनालिटिक्स सर्विस देगा। इसके अलावा हर तरफ से सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जाएगी और लगातार टीवी स्क्रीन पर जानकारी अपडेट की जाएगी।’</p>
<h2>इस तरह काम करती है आईबीएम वीडियो एनालिटिक्स सर्विस :</h2>
<p>आईबीएम सिक्योरिटी और पब्लिक सेफ्टी ऑर्गनाइजेशन को वीडियो का उपयोग कर सिक्योरिटी, इंटेलिजेंस और जांच में मदद करता है। इसकी मदद से कई कैमरों से लिए गए वीडियो में से फोटो और जरूरी जानकारी खोजने के लिए एडवांस्ड सर्च, रिडेक्शन और फेशियल रिकग्निशन का उपयोग कर सकते हैं।</p>
<ul>
<li>इसमें किसी अपराधी, वीआईपी जैसे लोगों की फोटो एड कर वॉच लिस्ट बना सकते हैं, ताकि कैमरा इनको पहचान सके।</li>
<li>आयु, लिंग, चेहरे का रंग, बालों का रंग, कपड़ों का रंग और पैटर्न के आधार पर कई कैमरों में से सही रिजल्ट निकालकर देगा।</li>
<li>लाइव-स्ट्रीमिंग फिक्स्ड कैमरा से, अगर कोई ऑब्जेक्ट तय किए गए पैटर्न से अलग मूवमेंट करता है, तो उसका अलर्ट तुरंत मिल जाएगा।</li>
<li>वीडियो इमेजेस को डेटा में बदल देता है, जिससे वीडियो मॉनिटरिंग करना आसान हो जाता है।</li>
</ul>
<h2>पहले दिन 1 करोड़ से ज्यादा श्रद्धालुओं के आने की संभावना</h2>
<ul>
<li>दिन श्रद्धालुओं की अनुमानित संख्या</li>
<li>15 जनवरी (मकर संक्रांति) 1.20 करोड़</li>
<li>21 जनवरी (पौष पूर्णिमा) 55 लाख</li>
<li>4 फरवरी (मौनी अमावस्या) 3 करोड़</li>
<li>10 फरवरी (वसंत पंचमी) 2 करोड़</li>
<li>19 फरवरी (माघी पूर्णिमा) 1.6 करोड़</li>
<li>4 मार्च (महाशिवरात्रि) 60 लाख</li>
</ul>
<h2>ट्रेन की जानकारी के लिए ऐप होगी शुरू</h2>
<p>रेलवे जल्द ही ‘कुंभ रेल सेवा’ नाम से एक नई मोबाइल ऐप लॉन्च करने जा रहा है, जिसकी मदद से यात्रियों को ट्रेन से जुड़ी सारी जानकारी दी जाएगी। अनुमान के मुताबिक, इस मेले में दुनियाभर से 10 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इसके अलावा सोशल मीडिया की भी मदद ली जाएगी।</p>
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<p> </p>
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                                                            <category>फटाफट न्यूज़</category>
                                            <category>देश</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Nov 2018 08:58:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Sach Kahoon Desk]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>छात्रों के आइडिया अपनाएगा विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग</title>
                                    <description><![CDATA[ देश की किसी भी मान्य भाषा में भेज सकते हैं सुझाव  बैंक अकाऊंट में डाली जाएगी पुरस्कार राशि सच कहूँ/सुनील वर्मा सरसा। देश व प्रदेश के सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में छठी से दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थी, जिनकी आयु 10-15 वर्ष के बीच है, उनके आइडिया प्रतियोगिता से निकले दो से […]
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://www.sachkahoon.com/state/haryana/department-of-science-and-technology-will-adopt-students-ideas/article-4348"><img src="https://www.sachkahoon.com/media/400/2018-06/sirsa-ok.jpg" alt=""></a><br /><h2> देश की किसी भी मान्य भाषा में भेज सकते हैं सुझाव</h2>
<h2> बैंक अकाऊंट में डाली जाएगी पुरस्कार राशि</h2>
<p><strong>सच कहूँ/सुनील वर्मा</strong></p>
<p><strong>सरसा।</strong> देश व प्रदेश के सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों में छठी से दसवीं कक्षा में पढ़ने वाले मेधावी विद्यार्थी, जिनकी आयु 10-15 वर्ष के बीच है, उनके आइडिया प्रतियोगिता से निकले दो से तीन अच्छे विचारों/नई जानकारी/नवप्रवर्तनों को भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग द्वारा संचालित राष्ट्रीय कार्यक्रम ‘इंस्पायर अवार्ड मानक’ के लिए आमंत्रित किया है। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मेधावी छात्रों के अंदर छोटी आयु में ही विज्ञान की पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना व वैज्ञानिक अनुसंधान को अपना भविष्य बनाने के लिए प्रेरित व आकर्षित करना है।</p>
<p>इसी कार्यक्रम को लेकर बीते मंगलवार को प्रोजेक्ट के इंचार्ज डॉ. संजय मिश्रा ने दिल्ली में हरियाणा, दिल्ली व उत्तराखंड प्रदेशों के इंस्पायर अवार्ड मानक के नोडल अधिकारियों व जिला नोडल अधिकारियों की बैठक ली। बैठक का मुख्य उद्देश्य राज्य और जिला स्तर के पदाधिकारियों में इंस्पायर अवार्ड मानक कार्यक्रम के प्रति जागरूकता और कार्यक्षमता को बढ़ाना था।</p>
<p>इंस्पायर अवार्ड मानक में आवेदन की तिथि अब 30 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी है। इस बैठक में सरसा से इंस्पायर अवार्ड मानक के नोडल अधिकारी व जिला विज्ञान विशेषज्ञ डॉ. मुकेश कुमार ने शिरकत की। ेबता दें कि वर्ष 2009-10 में भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग ने इंस्पायर पुरस्कार योजना की शुरुआत की थी और अब उक्त योजना में कुछ सुधार किए गए हैैं और पुरस्कार राशि को भी बढ़ाया गया है।</p>
<p>छठी से दसवीं कक्षा के विद्यार्थी निर्धारित प्रारूप के तहत देश की मान्यता प्राप्त सभी भाषाओं में अपना आवेदन अपने विद्यालय में जमा करवा सकते है। स्कूल प्राचार्य द्वारा स्कूलों में आईडिया प्रतियोगिता के जरिए विद्यार्थियों के दो से तीन अच्छे विचारों/नवप्रवर्तनों का चयन किया जाएगा, जिसका आॅनलाइन नामांकन विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग भारत सरकार की वेब पोर्टल ई-एमआईएएस पर होगा। नए विद्यालय वेब पोर्टल पर ई-एमआईएएस पर स्वयं को पंजीकृत कर सकते हैं।</p>
<p>देशभर से एक लाख छात्रों को मिलेगा पुरस्कार भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग तथा राष्ट्रीय नवप्रवर्तन प्रतिष्ठान द्वारा देशभर से आने वाले सर्वश्रेष्ठ एक लाख विचारों का चयन किया जाएगा। इन चयनित विद्यार्थियों को 10 हजार रुपये प्रति पुरस्कार राशि उनके खाते में डाली जाएगीं। विचारों का चयन उसकी नवीनता, व्यवहारिकता, सामाजिक उपयोगिता, पर्यवरण की अनुकूलता और वर्तमान में मौजूद तकनीक से बेहतरी के आधार पर होगा।</p>
<p>इसके पश्चात पूरे भारत से जिला स्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट कम्पटीशन करवाकर एक लाख नवप्रवर्तनों में से 10 हजार नवप्रवर्तनों का चयन राज्यस्तरीय प्रतियोगिता और प्रदर्शनी के लिए किया जाएगा। इसके बाद राज्यस्तरीय प्रदर्शनी और प्रोजेक्ट कम्पटीशन द्वारा 10 हजार में से एक हजार नवप्रवर्तनों का चयन होगा। चयनित 1000 प्रतिकृति को राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनी में रखा जाएगा, जहां से श्रेष्ठ 60 को राष्ट्रीय पुरस्कार के लिए चयनित किया जाएगा, जिन्हें मार्च में राष्टÑपति भवन में महामहिम राष्टÑपति द्वारा सम्मानित किया जाएगा।</p>
<h2>क्या है इंस्पायर अवार्ड मानक कार्यक्रम</h2>
<p>इंस्पायर अवार्ड मानक विज्ञान एवं प्रोद्यौगिकी विभाग भारत सरकार का एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य मेधावी छात्रों के अंदर छोटी आयु में ही विज्ञान की पढ़ाई के प्रति रुचि पैदा करना व वैज्ञानिक अनुसंधान को अपना भविष्य बनाने के लिए प्रेरित व आकर्षित करना है। कार्यक्रम के अंतर्गत छठी से दसवीं कक्षा के मेधावी छात्रों जिनकी आयु 10-15 वर्ष के बीच होती है, को दस हजार रुपए की अवार्ड राशि प्रदान की जाती है। इस राशि का उपयोग छात्रों द्वारा विज्ञान का एक प्रोजेक्ट या मॉडल बनाने व उसे जिलास्तरीय प्रदर्शनी व प्रतियोगिता स्थल तक पहुंचाने के लिए किया जाता है। इसके तहत अवार्ड विजेता छात्र जिला, राज्य व राष्ट्रय स्तर पर हिस्सा लेता है। राष्ट्रीय प्रतियोगिता में सम्मिलित होने वाले प्रतिभागियों को महामहिम राष्ट्रपति द्वारा सम्मानित किया जाता है।</p>
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                                            <category>हरियाणा</category>
                                    

                <link>https://www.sachkahoon.com/state/haryana/department-of-science-and-technology-will-adopt-students-ideas/article-4348</link>
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                <pubDate>Thu, 21 Jun 2018 08:42:36 +0530</pubDate>
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